मुंबई-कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप के भय से पुणे और मुंबई में काम करने वाले असंगठित मजदूरों का भारी संख्या में पलायन हो रहा है। रेलवे स्टेशनों पर भारी भीड का आलम है। दोनों महानगरों में असंगठित मजदूरों की वजह से प्रायवेट सेक्टर की धडकन चलती है, ऑटो-रिक्शा चालक, दूध, सब्जी बेचने वाले मजदूर यही होते है।छोटे कारखानों, दूकानों में काम यही मजदूर करते है। अब पुणे मुंबई इनके बिना मानों थम सी गई है। महाराष्ट्र के चार शहरों में सरकार के दुकानों और विभिन्न संस्थानों को बंद करने के फैसले के बाद मुंबई थम सी गई है। मुंबई और पुणे में असंगठित क्षेत्र के हजारों मजदूरों ने पलायन शुरू कर दिया है। ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवर भी रेलवे काउंटरों पर अपने घर वापस जाने के लिए जुटे हुए हैं। इनमें से अधिकतर उत्तर प्रदेश और बिहार के हैं। आपको बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने सूबे के चार शहरों को पूरी तरह से लॉकडाउन कर दिया है। इनमें मुंबई, पुणे, पिंपरी चिंचवाड़ और नागपुर शामिल हैं।

एक ओर जहां सरकार ने कोविड-19 से बचने के लिए घरों के अंदर रहने की सलाह दी है, वहीं इन मजदूरों के घर वापसी के लिए इकट्ठा होने से स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। कुर्ला में बीएमसी के चिकित्सा अधिकारी डॉ. जितेंद्र जाधव ने बताया कि उन्हें शुक्रवार शाम लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर भारी भीड़ के बारे में सूचित किया गया था। उन्होंने कहा, रेलवे पुलिस को महामारी अधिनियम के तहत भीड़ को तितर-बितर करना चाहिए था। यह हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। ऐसा लगता है कि लोग अपने मूल स्थानों पर लौटने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि ट्रेनें और बसें बंद हो जाएंगी और वे ऐसा होने से पहले शहर छोड़ना चाहते हैं।

2011 की जनगणना के अनुसार मुंबई, जिसमें मुंबई शहर, मुंबई उपनगर और ठाणे जिला शामिल हैं, में 1 करोड़ प्रवासी रहते हैं। इनमें से 30 प्रतिशत प्रवासी अनौपचारिक अर्थव्यवस्था से अपनी आजीविका कमाते हैं। 31 मार्च तक के लिए की गई बंदी की सबसे अधिक मार इन मजदूरों को ही पड़ी है। इसीलिए इन्होंने फैसला किया है कि वे अपने घर पहुंच जाएं। सिक्यॉरिटी गार्ड एजेंसी चलाने वाले सचिन मोरे का कहना है कि वह अपने कर्मचारियों को वेतन वृद्धि का वादा करने के बावजूद रोकने में नाकाम रहे हैं। उन्होंने कहा, लोगों की कमी के कारण ओवरटाइम कराया जा रहा है। जो लोग शहर छोड़कर जा रहे हैं, उन्हें कहा गया है कि भविष्य में उन्हें नौकरी वापस मिलने में दिक्कत हो सकती है, इसके बावजूद वे नहीं रुक रहे हैं।


 रिपोर्ट -  चंदू शर्मा