महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने कहा कि मुझे समझ नहीं आता कि जो मुस्लिम लोग नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रहे हैं। वे ऐसा कर क्यों रहे हैं। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) उन मुसलमानों के लिए नहीं है जो यहां पैदा हुए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन करके आप किसको अपनी ताकत दिखा रहे हैं?'

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कार्यकर्ता रविवार को बांग्लादेशी और पाकिस्तानी घुसपैठियों को बाहर करने की मांग को लेकर आजाद मैदान में रैली में एकत्रित हुए। इस मौके पर मनसे के कई नेताओं ने रैली को संबोधित किया। इस दौरान नेताओं ने बांग्लादेशी और पाकिस्तानी घुसपैठियों को बाहर करने की मांग। वहीं, मनसे की रैली के कारण पुलिस ने कड़ी चौकसी की है। रैली के कारण जाम लगने से लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के मुखिया राज ठाकरे ने अपनी पार्टी का झंडा बदलकर हिंदुत्व का रंग गाढ़ा करने का संकेत दिया है। इसके साथ ही उन्होंने अपने पुत्र अमित ठाकरे को भी राजनीति में उतार दिया है। उन्होंने एलान किया था कि उनकी पार्टी पाकिस्तान और बांग्लादेश के अवैध घुसपैठियों को निकालने के मामले में केंद्र सरकार का समर्थन करेगी। राज ठाकरे ने 14 साल पहले जब शिवसेना से अलग होकर मनसे का गठन किया तो अपने झंडे को बहुरंगी स्वरूप दिया था। उसमें नीला, हरा एवं भगवा रंग की पट्टियों पर चुनाव चिह्न रेल का इंजन शामिल किया था। लेकिन अब उनकी पार्टी के झंडे में भगवा रंग पर छत्रपति शिवाजी महाराज की मुहर का चित्र होगा। साथ ही, नीचे कत्थई रंग की पट्टी पर पार्टी का नाम महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना लिखा होगा। गुरुवार को पहली बार उनके मंच पर विनायक दामोदर सावरकर की प्रतिमा भी नजर आई।

इससे पहले उनके मंच पर छत्रपति शिवाजी महाराज की अर्धप्रतिमा के बगल में डॉ. भीमराव आंबेडकर, महात्मा ज्योतिबा फुले एवं उनके दादा प्रबोधनकार ठाकरे की तस्वीरें हुआ करती थीं। माना जा रहा है कि राज ठाकरे ने अपनी रणनीति में यह परिवर्तन विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की राजनीति में आए बदलाव को देखते हुए किया है। पिछले विधानसभा चुनाव के बाद हिंदुत्व का झंडाबरदार समझी जानेवाली शिवसेना ने भाजपा का साथ छोड़कर कांग्रेस और राकांपा के साथ सरकार बना ली है। इससे शिवसेना के कार्यकर्ता क्षुब्ध हैं। जिन दलों के खिलाफ वे पिछले 30 वषरें से संघर्ष करते आए, आज उन्हीं दलों के साथ शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे सरकार चला रहे हैं

राज ठाकरे को लगता है कि इस स्थिति में वह यदि अपनी छवि हिंदुत्ववादी नेता की बनाते हैं, तो शिवसेना से छिटके कार्यकर्ता उनके साथ आ सकते हैं। सावरकर की प्रतिमा को मंच पर पहली बार स्थापित करना भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। कांग्रेस द्वारा सावरकर की लगातार आलोचना के बावजूद शिवसेना वैसी प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त कर पा रही है, जैसी कि लोग उससे अपेक्षा करते हैं। 14 साल पहले मनसे की स्थापना के समय राज ठाकरे ने मुस्लिमों को आकर्षित करने के लिए ही अपने झंडे में हरे रंग की पट्टी को स्थान दिया था।राज ठाकरे ने अपने बेटे अमित ठाकरे को भी पार्टी में शामिल कर राजनीति में आगे बढ़ाने का संकेत दे दिया।

पिछले विधानसभा चुनाव में उनके चचेरे बड़े भाई उद्धव ठाकरे के पुत्र आदित्य ठाकरे चुनाव लड़कर राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री बन चुके हैं। उनकी प्रतिद्वंद्विता में राज अपने पुत्र अमित को पीछे नहीं रहने देना चाहते। कुछ दिन पहले ही राज ठाकरे एवं पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस की मुलाकात हुई थी। उसके बाद से ही कयास लगाए जा रहे हैं कि राज्य की राजनीति में किसी न किसी स्तर पर मनसे का तालमेल भाजपा के साथ हो सकता है। इसकी शुरुआत स्थानीय निकाय चुनावों से हो सकती है।

रिपोर्ट - मुंबई / चंदू शर्मा