यूपी के बदायूं जिले से एक काफी अच्छी खबर सामने आ रही है। दरअसल, जिले के एक गांव, जहां कच्ची शराब बनाने की कई फैक्ट्री लगी थी, वहां के लोगों ने इस काले धंधे से हाथ जोड़ लिए है। ये सब हुआ है पुलिसकर्मियों की मेहनत की वजह से। इसके लिए सीओ उझानी अनिरुद्ध सिंह समेत पुलिस अफसर कई महीने से प्रयास रत थे। इसी का नतीजा है कि मंगलवार को गांव पहुंची पुलिस को ग्रामीणों ने खुद न सिर्फ कच्ची शराब छिपाने के अड्डे दिखाये बल्कि शराब समेत उसे बनाने के उपकरण भी बरामद करा दिए।

सीओ उझानी के निर्देशन में चला अभियान

जानकारी के मुताबिक, बदायूं जिले के धनूपुरा गांव में अब अवैध शराब का धंधा बंद होने की शुरुआत हो गई है। गांव का कोई व्यक्ति न शराब बनाना चाहता है और न बेचना। इसकी वजह पुलिस है। सोमवार को पुलिस ने गांव के लोगों को शराब का धंधा छोड़ने को समझाया तो मंगलवार को उन्होंने अपनी भट्ठियां तोड़ दीं। सीओ उझानी अनिरुद्ध सिंह के निर्देशन गठित टीम ने शाम के समय गांव के हर घर जाकर लोगों को अवैध शराब का धंधा बंद करने को कहा।

टीम ने घर घर जाकर लोगों को समझाया कि वह रात के अंधेरे में अपने-अपने घर से शराब बनाने के बर्तन और उपकरण सड़क पर रख दें। बुधवार सुबह लोग सोकर उठे तो गांव की सड़कों पर बर्तन ही बर्तन दिखाई दिए। दोपहर तक गांव के बच्चे बर्तन एकत्र करते रहे। उनका एक ढेर लग गया। अधिकारियों ने वादा किया है कि किसी पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। पुलिस की पहल से ग्रामीणों को पुलिस की यह बात भी समझ में आई कि अवैध धंधा छोड़ने पर उन्हें रोजगार मुहैया कराया जाएगा।

2500 लोगों ने छोड़ा काला कारोबार

दरअसल, जब लोगों से बात की गई तो ये खुलासा हुआ कि रोजगार ना मिलने से ये लोग कच्ची शराब बनाने को मजबूत हैं। जिसके बाद खुद एसपी सिटी और सीओ उझानी इन गांवों में पहुंचे और लोगों को समझाते हुए रोजगार दिलाने समेत विधवाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगों को पेंशन दिलाने का आश्वासन दिया। युवाओं को बैंक से ऋण दिलाकर नये उद्योग स्थापित कर उद्यमी बनाने के सपने भी दिखाये। नतीजतन गांव में सक्रिय तकरीबन 2,500 लोगों ने अब कच्ची के कारोबार से मुंह मोड़ लिया है।