लॉक डाउन के कारण बाजार बंद चल रहा है। कुछ जरूरी सामान को छोड़कर न तो कोई प्रतिष्ठान खुल रहा है और न ही लोग घरों से बाहर जा रहे हैं। ऐसे मुसीबत के समय आम इंसान तो जैसे तैसे अपनी जरूरतें पूरी कर ले रहा है, लेकिन मुसीबत की इस घड़ी में सबसे ज्यादा बदहाली का शिकार आवारा पशु, कुत्ते और बंदर हो रहे हैं।

बाजार खुला रहने पर इनको कुछ न कुछ खाने को मिल जाता रहा, लेकिन लॉक डाउन के बाद से इनका पेट भरने वाला कोई नही है। 

 मामला उत्तर प्रदेश के अम्बेडकर नगर जिले का है, जहां कस्बे में हजारों की संख्या में बंदर हैं। लॉक डाउन के कारण इनकी भी हालत खराब है। दिन भर इधर से उधर दौड़ लगाने के बावजूद इनका पेट नही भर रहा है और देखने से भी ये काफी कमजोर दिखाई पड़ रहे हैं। ऐसे में इन बंदरों के लिए कुछ लोग भगवान के दूत बन गए हैं। रात में जब पूरा शहर सन्नाटे में हो जाता है तब कोतवाली टांडा के इंस्पेक्टर संजय पांडेय अपने हमराहियों के साथ चौक में पहुंच जाते हैं और वहां मौजूद सैकड़ों बंदरों को कभी बिस्किट तो कभी ब्रेड या कभी चना खिलाकर उनका पेट भरते हैं। 

खास बात यह है कि आम लोगों के पास आने से बचने वाले बंदरों की पुलिस इंस्पेक्टर संजय पांडेय से ऐसी दोस्ती हो गई है कि बंदर का छोटा बच्चा भी अब बिना डर के उनके हाथ से खाने का समान ले लेता है। बंदरों के यह पुलिस प्रेम चर्चा का विषय बना हुआ है।बाजार खुला रहने पर इनको कुछ न कुछ खाने को मिल जाता रहा, लेकिन लॉक डाउन के बाद से इनका पेट भरने वाला कोई नही है। 

मामला उत्तर प्रदेश के अम्बेडकर नगर जिले का है, जहां कस्बे में हजारों की संख्या में बंदर हैं। लॉक डाउन के कारण इनकी भी हालत खराब है। दिन भर इधर से उधर दौड़ लगाने के बावजूद इनका पेट नही भर रहा है और देखने से भी ये काफी कमजोर दिखाई पड़ रहे हैं। ऐसे में इन बंदरों के लिए कुछ लोग भगवान के दूत बन गए हैं। रात में जब पूरा शहर सन्नाटे में हो जाता है तब कोतवाली टांडा के इंस्पेक्टर संजय पांडेय अपने हमराहियों के साथ चौक में पहुंच जाते हैं और वहां मौजूद सैकड़ों बंदरों को कभी बिस्किट तो कभी ब्रेड या कभी चना खिलाकर उनका पेट भरते हैं। 

खास बात यह है कि आम लोगों के पास आने से बचने वाले बंदरों की पुलिस इंस्पेक्टर संजय पांडेय से ऐसी दोस्ती हो गई है कि बंदर का छोटा बच्चा भी अब बिना डर के उनके हाथ से खाने का समान ले लेता है। बंदरों के यह पुलिस प्रेम चर्चा का विषय बना हुआ है। 

रिपोर्ट - सुशील शर्मा