आम तौर पर पुलिसवालों के प्रति यही धारणा रहती है कि पुलिस वाले कठोर दिल के होते हैं। वर्दी का रौब उनके सर चढ़कर बोलता है और वो मासूम मजलूमों पर खूब अत्याचार करते है। लेकिन जिस तरह एक मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है ठीक उसी तरह कुछ पुलिस वाले अपनी करतूतों से पुलिस महकमे को बेशक बदनाम कर रहे हैं, लेकिन इससे ये कहना बिल्कुल गलत है कि हर पुलिस वाला बेरहम होता है। आज भी यूपी पुलिस में एक नहीं कई ऐसे चेहरें हैं। जो अपने कर्तव्य और फर्ज के पथ पर अडिग हैं। ये पुलिसकर्मी पूरी सिद्दत से ड्यूटी निभाने के अलावा गरीब ,मासूमों और मजलूमों की सहायता के लिए सामने आते हैं। जिसका जीता जागता उदाहरण लॉकडाउन के बीच श्रावस्ती से देखने को मिला है। कोरोना संकट के कारण पूरा देश लॉकडाउन हैं। ऐसे समय में रोज कमाने-खाने वालों के लिए काफी परेशानी खड़ी हो गई है। लेकिन इस मुश्किल की घड़ी में उत्तर प्रदेश की पुलिस गरीबों की बढ़-चढ़कर मदद कर रही है। प्रदेश के श्रावस्ती में तो पुलिस अधीक्षक अनूप सिंह ने, ‘कोई भूखा न रह जाए’ योजना की शुरूआत की है। एसपी अनूप सिंह के निर्देश पर जिले की पुलिस मेस में ही खाना बनाकर जरूरतमंदों के साथ ही जानवरों का भी पेट भर रही है।

महकमे में तैनात पुलिसकर्मियों की नेकदिली

प्रदेश के पुलिस विभाग में तैनात कई वर्दी वालों की इसी नेकदिली पुलिस महकमे की साख को बचाये हुए है। जिसमे "एसपी अनूप सिंह " का नाम यदि पहले लिया जाए तो चौंकने की बात नहीं है। लॉकडाउन के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ ही जरूरतमंदों की मदद में पुलिस जुटी है। पुलिस का मानवीय रूप देख कर सराहना करते लोग थक नहीं रहे हैं। दवा से लेकर खाना तक लोगों को मुहैया करा रही है। परदेश से आने वाले लोगों की जांच कराती है साथ ही उन्हें मंजिल तक पहुंचाकर अपना फर्ज भी निभा रही है। इमोशनल पुलिसिग से लॉकडाउन के दौरान आम जनता और पुलिस के बीच की दूरियां कम होती दिख रही हैं।

कोरोना संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए घोषित लॉकडाउन के बीच ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जब पुलिस ने बीमारों, बुजुर्गों व आíथक रूप से कमजोर लोगों की मदद कर उन्हें भोजन मुहैया करवा रही है। इतना ही नहीं कई लोगों को घरों तक पहुंचाना भी उसका सगल बन गया है। सीओ भिनगा हौसला प्रसाद व प्रभारी निरीक्षक सिरसिया विनोद कुमार क्षेत्र भ्रमण पर निकले तो मोतीपुर कला गांव में राशन न होने की जानकारी उन्हें मिली। दुकान खोलवाकर उन्हें राशन उपलब्ध कराया। भिनगा कोतवाल दद्दन सिंह ने भयापुरवा, पटना खरगौरा व हरिहरपुर गांव में भूख से बिलबिला रहे मजदूर परिवारों व बच्चों को भोजन उपलब्ध कराया। बदला पुलिस चौकी प्रभारी किसलय मिश्रा व गिरंट पुलिस चौकी इंचार्ज राजीव मिश्रा ने काम बंद होने से आíथक तंगी से गुजर रहे परिवारों को खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई। नासिरगंज पुलिस चौकी के उपनिरीक्षक शंभूनाथ उपाध्याय ने क्षेत्र के गरीब मजदूरों व बच्चों को लंच पैकेट वितरित किया। जमुनहा पुलिस चौकी प्रभारी अखिलेश यादव ने मजदूर परिवारों के घर जाकर भोजन की व्यवस्था करवाई। श्रावस्ती पुलिस चौकी इंचार्ज अनिल कुमार दीक्षित को सूचना मिली कि कटरा बाजार में एक परिवार के पास कोई खाद्यान्न समाग्री नहीं है। छोटे-छोटे बच्चें भूखे हैं। चौकी इंचार्ज ने गेहूं, चावल, सब्जी व दैनिक उपयोग की वस्तुओं को भूखे परिवार के घर पहुंचाकर मानवता की मिसाल कायम की। एएसपी बीसी दूबे कहते हैं कि कोरोना के विरुद्ध लड़ी जा रही लड़ाई में पुलिसकर्मी ड्यूटी के साथ जरूरतमंदों को दवा से लेकर राशन तक पहुंचा रहे हैं। कर्म के साथ जरूरतमंदों की सेवा करना पुलिस का काम है।

संकट काल में दोहरी जिम्मेदारी

बता दे, प्रदेश में कोरोना को हराने के लिए लॉकडाउन जारी है। ऐसे में सभी को बेवजह घरों से बाहर निकलने की मनाही है। इस संकट काल में पुलिस कर्मियों के कंधों पर दोहरी जिम्मेदारी है। पुलिसकर्मी लोगों से लॉकडाउन के नियमों का पालन कराने के लिए सड़कों और चौराहों पर कड़ी ड्यूटी कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर मानवता धर्म के मुताबिक बेसहारा और जरूरतमंदों को खाना, दवाएं समेत अन्य वस्तुएं मुहैया करा रहे हैं। जिससे लोगों को ज्यादा परेशानी का सामना ना करना पड़े और कोई भी व्यक्ति भूखे न सोए। जिसके क्रम में प्रभारी निरीक्षक थाना सिरसिया विनोद कुमार द्वारा अन्तरराष्ट्रीय इंडो-नेपाल बार्डर भैसाही नाका का पुलिस टीम के साथ भर्मण किया गया। इस दौरान बार्डर पर ड्यूटीरत नेपाल पुलिस (APF) टीम व SSB टीम के जवानों के साथ संयुक्त रूप से बार्डर पर कॉमबिंग व वार्ता की गयी तथा लॉक डाउन का कड़ाई से अनुपालन कराने के सम्बंध में जानकारी दी गई। बार्डर सीमा पर बसे गरीब मजदूर, असहाय लोगों को खाद्यान्न सामग्री राशन आदि का वितरण किया गया।