रूपईडीहा बहराइच । 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 हटने के 2 वर्ष पूर्ण होने वाले हैं इस पर मीडिया कर्मियों ने स्थानीय इंडो नेपाल बॉर्डर रुपईडीहा के लोगों से वार्तालाप की जिसमें लोगों ने बताया कि जब पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर के अलंकरण 370 और 35-ए हटे तो कश्मीर को जानने में मेरी रुचि बढ़ी। जिस में देखने को मिला कि कश्मीर की स्थानीय महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार कश्मीर में काफी काम कर रही है। सरकार के निर्देशानुसार सेना द्वारा सभी मुख्यालयों पर कैंप वर्कशाॅप का आयोजन किया जा रहा है । इसका लक्ष्य महिलाओं को जीवनयापन के लिए आत्मनिर्भर बनाने का था। सरकार द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि सिलाई, कढ़ाई बौर बुनाई के काम में महिलाएं महारत रखती हैं। उन्हें इसी काम को पेशा बनाने के लिए कई तकनीकों के बारे में जानकारी दी जा रही है । इससे उन्हें अपने काम को बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने में मद्द मिलेगी। महिलाओं को छोटे पैमाने पर उद्योग खोलने के लिए उन्हें सिलाई मशीने भी दी जा रही है । लोगो ने कहा कि ऐसे प्रयास सरकार और आवाम के बीच रिश्तों को सुधारने के साथ ही कश्मीरी महिलाओं के बेहत्तर भविष्य को बनाने का काम करेंगे। राज्य में बेशक एक महिला दो साल के करीब मुख्यमंत्री के पद पर विराजमान रह चुकी हों और कई विभागों में महिलाएं मुखिया हों। परंतु जहां तक महिला सशक्तिकरण की बात है तो जम्मू कश्मीर कई राज्यों की तुलना में पिछड़ा हुआ था । अनुच्छेद 370 हटाने के बाद से लगातार कश्मीर में भारत सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिए अभियान चलाया जा रहा है और महिलाओं को जागरूक करते हुए उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है ।