उत्तर प्रदेश में मोहर्रम पर इस बार ताजिया का जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी जाएगी जिसको लेकर यूपी पुलिस के मुखिया ने प्रदेश के सभी कप्तानों को दिशा निर्देश जारी किए हैं। ऐसे इलाके जहां पर मोहर्रम के दौरान घटनाएं हो चुकी हैं और वह संवेदनशील हैं। वहां सीसीटीवी व ड्रोन कैमरों के जरिए निगरानी की जाएगी। मोहर्रम के दौरान कोई अप्रिय घटना न घटे पुलिसबल इसका विशेष ख्याल रखेंगे।

सोशल मीडिया की हो मोनिटरिंग

पुलिस महानिदेशक मुकुल गोइल ने अपनी अधीनस्थों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कट्टरवादी तत्व छोटी-बड़ी घटनाओं को तूल देकर कोई घटना न करा दें, इसका विशेष ध्यान दिया जाए। धर्मगुरूओं से बातचीत कर कोविड-19 के दिशा-निर्देशों का अनुपालन कराने के साथ ही असामाजिक तत्वों की सूची को अभी से तैयार कर उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। सोशल मीडिया फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर एवं व्हाट्सएप की राउण्ड द क्लॉक मॉनिटरिंग की जाएगी। यहां पर अफवाह या फिर सौहार्द बिगाड़ने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज होगी। इतना ही नहीं बल्कि हिन्दू-मुस्लिम के बीच आपसी सौहार्द बनाए रखने के लिए शांति समिति की बैठकें भी आयोजित कराई जाएंगी। मोहर्रम के दौरान संवेदनशील एवं कन्टेनमेन्ट जोन में पुलिस बल की तैनाती करने के साथ ही सभी बस एवं रेलवे स्टेशनों, धार्मिक स्थलों की निरंतर चेिकंग कराने के लिए डॉग स्क्वायड, आतंकवादी निरोधक एवं बम निरोधक दस्ते की मदद भी ली जाएगी।

चप्पे चप्पे पर रहेगी पुलिस तैनात

डीजीपी द्वारा जारी आदेश में मुख्य चिकित्साधिकारी से भी वार्ता कर अस्पतालों में सभी व्यवस्थाओं को एलर्ट पर रखने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए गए हैं, जिससे की किसी भी दशा में कोई घटना होने पर व्यक्त को तत्काल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। बीते कई वर्षों में मोहर्रम के दौरान हुए दंगों या घटनाओं में कई लोगों की जान भी गई है। लिहाजा क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने के साथ ही दंगों को नियंत्रित करने वाले उपकरण और पुलिस बल को भी रिजर्व रखा जाएगा, जिससे की किसी भी आपातकालीन स्थित से निपटा जा सके। चूंकि इस बार मोहर्रम सावन माह के दौरान पड़ रहा है। कई असमाजिक तत्व माहौल बिगाड़कर साम्प्रदायिक सौहार्द का नुकसान पहुंचा सकते हैं। लिहाजा पुलिस को मुखबिर तंत्र को सक्रिय करने के साथ ही क्षेत्र में गश्त बढ़ाने व ज्यादा सतर्कता बरतने की बात कही गई है