प्रदेश में स्वतंत्रता दिवस को लेकर जहां आतंकी बड़ी और खौफनाक वारदतों को अंजाम देने के लिए तमाम प्रयास कर रहे हैं। एक तरफ जहां प्रदेश में आतंकी गतिविधिया लगातार बढ़ रही है, वहीं खबर मिल रही है कि उत्तर प्रदेश एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉयड (ATS) और सशक्त होने जा रही है। बताया जा रहा है कि SPOT (स्पेशल पुलिस ऑपरेशन टीम) के कमांडो देहरादून के BSF ट्रेनिंग सेंटर पर ट्रेनिंग लेकर लखनऊ लौट चुके हैं। 
 
वाटर राफ्टिंग करते SPOT कमांडो।
 

स्पेशल ट्रेनिंग से लौटे कमांडो

दरअसल, उत्तर प्रदेश एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉयड (ATS)  की टीम को 19 से 27 जुलाई तक 8 दिनों में कमांडो को ट्रेनिंग सेंटर इंस्टीट्यूट ऑफ एडवेंचर (BIAAT) में ट्रेनिंग दी गई। इन्हें हर कठिन हालात में जिंदा रहने और आतंकी वारदात के समय दुश्मनों को मुंह तोड़ जवाब देने के लिए तैयार किया गया है।
 
दुर्गम पहाड़ियों पर चढ़ने का अभ्यास कराया गया।

बड़े जिलों में तैनात होगी ATS की टुकड़ी 

प्रदेश में बढ़ती आतंकी गतिविधियों को देखते हुए हाल ही में गाजियाबाद, गोरखपुर, बनारस और प्रयागराज में ATS की टुकड़ी तैनात करने का फैसला लिया गया था। ATS के विस्तार के लिए 2017 में SPOT का गठन किया गया था। ट्रेनिंग पूरी कर चुके अब इन जवानों को इनके तैनाती वाले जिलों में भेजा जाएगा।
 
ऊंची बिल्डिंग पर चढ़ने की ट्रेनिंग लेते जवान।
 

IG ATS ने कहा

IG ATS जीके गोस्वामी ने बताया कि पैराग्लाइडिंग, वाटर राफ्टिंग, रॉक क्लाइम्बिंग, ट्रैकिंग, प्रतिकूल स्थिति में जीवित रहना और खुद का बचाव करने की ट्रेनिंग जवानों को दी गई। प्रशिक्षण में Arial Surveillance के अंतर्गत UAV ( Unmanned Aerial Vehicles ) की स्पेशल ट्रेनिंग को भी शामिल किया गया। इसके तहत ड्रोन को उड़ाने का तरीका सिखाया गया।
 
रस्सी के सहारे ऊंची पहाड़ियों पर चढ़ते जवान।
 

ऐसे हुआ प्रशिक्षण

प्रशिक्षण के दौरान कमांडो को 100 फीट से भी अधिक ऊंची दुर्गम पहाड़ियों पर रॉक क्लाइम्बिंग का प्रशिक्षण दिया गया। इससे उनमें साहस और टीम भावना मजबूत हुई। साथ ही पहाड़ों पर बहती नदियों की तेजधारा में लहरों को चीरते हुए रीवर रॉफ्टिंग व क्याकिंग जैसे रोमांचक व साहसिक काम कराए गए। इससे कमांडो में विपरीत परिस्थितियों में भी अपने साथियों के साथ तालमेल बनाये रखकर चुनौतियों से निपटने की कला सिखाई गई।
 
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पूर्व IG असीम अरुण ने तैयार की थी SPOT की रूपरेखा

प्रदेश के कोने-कोने तक ATS की पहुंच हो इसके लिए पूर्व IG ATS असीम अरुण ने SPOT की रूपरेखा तैयार की थी। इसे लागू करवाने के लिए उन्होंने करीब दो साल तक जद्दोजहद की थी। पूर्व DGP ओपी सिंह को यह सुझाव मुनासिब लगा और उन्होंने ही इसे शासन से मंजूरी दिलवाई।
 
ट्रेनिंग पूरी होने के बाद ग्रुप फोटो हुई। इसके बाद देहरादून से कमांडो को विदा किया गया।
 

नवंबर 2017 में हुआ था गठन

नवंबर 2017 में इसका गठन किया गया। लेकिन इसमें भर्ती की कठिन शर्तो की वजह से नागरिक पुलिस के जवान आवेदन करने को तैयार नहीं थे। जबकि इस टीम में शामिल होने वाले जवानों को 30 फीसदी अतिरिक्त जोखिम भत्ता देने का का भी प्राविधान रखा गया है।