समाज में पुलिस की छवि किस प्रकार की है हम सभी इस बात से वाकीफ हैं। लेकिन इसका कारण केवल कुछ मुट्ठी भर पुलिसकर्मी हैं, जो अपने स्वार्थ व लालच के चलते खाकी को दागदार करने का काम करते हैं। लेकिन इसी महकमे में कुछ ऐसे भी पुलिसकर्मियों हैं जो अपनी ड्यूटी से भी कई हद तक ऊपर उठ कर समाज में अपना योगदान देते हैं, और पीड़ितों की सहायता कर पूरे महकमे के लिए प्रेऱणा बनते हैं। ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश इटावा जनपद से सामने आया है। जहां SSP ब्रिजेश कुमार सिंह ने एक गरीब के इलाज की गुहार सुनने के बाद उसके इलाज का जिम्मा उठाया। 

 

 

इटावा SSP ने मदद के लिए बढ़ाया हाथ 

दरअसल, व्हाट्सएप्प ग्रुप व फेसबुक के जरिए एक गरीब के इलाज की गुहार हुई पूरी SSP ने इलाज का जिम्मा उठाया। थाना बकेवर क्षेत्र के कर्वाखेड़ा का रहने वाला बुजुर्ग चौकीदार काफी लंबे समय से हर्निया की बीमारी से ग्रस्त चल रहा था। जिसके पास ऑपरेशन के लिए रुपए न होने के चलते इस बीमारी से जूझ रहा था। लेकिन उसकी कहीं कोई सुनने वाला नजर नहीं आ रहा था। सोशल मीडिया पर किसी के द्वारा चौकीदार वीरेन्द्र की बीमारी की समस्या वायरल हो गई। जिसके बाद इटावा SSP ने मदद के लिए हाथ बढ़ाते हुए वीरेंद्र के इलाज का सारा खर्च स्वयं उठाने के लिए अश्वाशन दे दिया और वीरेंद्र को अपने कार्यलय पर मिलने के लिए बुलाया।

 

 

दानवीरों से आर्थिक सहायता के लिए भी लगाई थी गुहार

चौकीदार वीरेंद्र बाबू अपने हार्निया की बीमारी का ऑपरेशन कराने के लिए बेबस लाचार होकर इधर-उधर काफी समय से भटक रहा था। बीमारी से परेशान चौकीदार वीरेंद्र बाबू ने अपनी समस्या 9 सितंबर को एक स्थानीय पत्रकार से साझा की और बताया था, कि उसके पास इतना पैसा नहीं है कि वह हार्निया का ऑपरेशन करा सके। ऐसा भी नहीं है कि मुफ्त इलाज कराने की चलाई जा रही गोल्डन कार्ड योजना में उसका नाम न हो, नाम तो है मगर तकनीकी खामी से योजना की सूची मे उसका नाम वीरेंद्र बाबू के स्थान पर वीरेंद्र वव्वू के नाम से दर्ज हो गया है। जिसके चलते प्रधानमंत्री की बीमा योजना भी उसके काम नहीं आ रही। जिसकी वजह से गोल्डन कार्ड स्कीम उसके लिए मात्र सफेद हाथी साबित हो रही। लाचार चौकीदार ने दानवीरों से अपने इलाज के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की गुहार लगाई थी जिससे कि वह इस गम्भीर समस्या से निजात पा सके।

 

 

SSP ने कार्यालय पर मिलने के लिए बुलाया

वीरेंद्र बाबू की फोटो सहित सोशल मीडिया पर उनकी बीमारी की समस्या और दानवीरों से गुहार वायरल हो गई। लेकिन जिले के बड़े बड़े सेठ, नेता, समाजसेवी, सत्ता पक्ष, विपक्षी नेताओं तक वीरेंद्र की गुहार पहुंची तो लेकिन किसी के कान पर इस बात की जूं तक नही रेंगी। इस मामले की भनक जैसे ही इटावा SSP डा० बृजेश कुमार सिंह के पास पहुंची। उन्होंने अपने पुलिसकर्मियों को चौकीदार वीरेंद्र के बारे में जानकारी हासिल करने के और उनसे सम्पर्क करके 11 सितंबर को अपने कार्यालय पर मिलने के लिए कहा। साथ ही वीरेंद्र को यह आश्वासन दिया कि उनके इलाज का सारा खर्च खुद SSP स्वयं उठाएंगे। इस बात की जानकारी जैसे ही लोगों को मिली सभी लोग इटावा SSP की इस नेक कार्य की सराहना करते नजर आए।