उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अपने साढ़े तीन साल के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए बड़े कदम उठाये। इस दौरान आये दिन बड़े ट्रांसफर तो हुए ही निलंबन की कार्रवाई भी ताबड़तोड़ हुई। ये सस्पेंशन केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहा बल्कि IAS -IPS अफसरों पर भी योगी सरकार में धड़ल्ले से गाज गिरी। सरकार के मार्च 2017 से सस्ता में आने के बाद से अब तक यूपी के 14 आईपीएस अफसरों और 6 आईएएस अफसरों को सस्पेंड किया जा चुका है। इन अधिकारियों की बड़ी गलती पाए जाने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर ये कार्रवाई की गयी।

पुलिस विभाग काफी चर्चा में रहा

योगी सरकार के साढ़े 3 साल के कार्यकाल में 6 आईएएस अधिकारी सस्पेंड हो चुके हैं, जिनमे से 4 जिलाधिकारी पद पर तैनात थें। जिन चार डीएम को योगी सरकार में सस्पेंड किया गया, उनमे उन्नाव में डीएम रहते देवेन्द्र कुमार, फतेहपुर के डीएम रहे कुमार प्रशांत, गोंडा से डीएम रहे जितेंद्र बहादुर सिंह और महराजगंज के डीएम अमरनाथ उपाध्याय का नाम शामिल हैं। योगी सरकार में अपनी गलती गतिविधियों के चलते पुलिस विभाग काफी चर्चा में रहा। दारोगा, सिपाही के भ्रष्टाचार से बढ़ कर आईपीएस अफसरों पर बड़े गंभीर आरोप लगे। साढ़े 3 सालों में 14 आईपीएस अफसरों को सस्पेंड किया गया इन 14 अधिकारीयों में से 7 IPS अफसरों को अब तक नहीं पोस्टिंग नहीं मिली है। कुछ आईपीएस तो पावर के लिए एक दूसरे को ही ले डूबे।

इन 6 IAS अफसरों पर अब तक गिर चुकी है गाज

जितेन्द्र बहादुर सिंह: गोण्डा में जिलाधिकारी पद पर तैनाती के दौरान जून 2018 में जितेन्द्र बहादुर सिंह को निलंबित किया गया था। उनपर जिले में सरकारी अनाज की बंटरबाट का आरोप लगा था। 2005 बैच के IAS जितेन्द्र बहादुर फिलहाल PWD में विशेष सचिव हैं।

कुमार प्रशांत: फतेहपुर से डीएम रहते जून 2018 में कुमार प्रशांत को सस्पेंड कर दिया गया था। इनपर सरकारी गेहूं खरीद में धांधली का आरोप था। 2010 बैच के IAS कुमार प्रशांत फिलहाल बदायूं के डीएम हैं।

देवेन्द्र कुमार पांडेय: उन्नाव में डीएम रहते देवेन्द्र कुमार को इसी साल फरवरी में सस्पेंड किया गया था। 2011 बैच के IAS देवेन्द्र कुमार पर बेसिक शिक्षा विभाग में हुई खरीद में वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे थे। फिलहाल वे निलम्बित ही चल रहे हैं और राजस्व परिषद से अटैच हैं।

अमरनाथ उपाध्यायः महाराजगंज के डीएम रहते अमरनाथ को सस्पेंड कर दिया गया था। IAS अमरनाथ 2011 बैच के हैं, इनपर डीएम रहते गौ संरक्षण केन्द्रों के बजट में धांधली के आरोप हैं। फिलहाल स्वतंत्रता सेनानी बोर्ड में विशेष सचिव हैं।

केदारनाथ सिंहः 2012 में PCS से IAS बने केदारनाथ सिंह को पिछले साल मई में सस्पेंड किया गया था। इस दौरान वे पर्यटन विभाग में विशेष सचिव थे। वर्तमान में केदारनाथ सस्पेंड चल रहे हैं और राजस्व परिषद से अटैच हैं।

शारदा सिंहः चंकबन्दी आयुक्त रहते इस IAS शारदा सिंह को योगी सरकार ने सस्पेंड कर दिया था। उन पर होने वाली भर्ती में ओबीसी कोटे से किसी की भर्ती नहीं की किये जाने का आरोप था। अब वह रिटायर हो चुके हैं।

इन 14 IPS अफसरों पर अब तक गिर चुकी है गाज

जसवीर सिंह: 1992 बैच के सीनियर IPS जसवीर सिंग को सरकार ने पिछले साल सस्पेंड किया था। सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ टिप्पणी करने के चलते IPS जसवीर पर कार्रवाई की गयी। जब वे सस्पेंड हुए तो ADG के पद पर तैनात थे। हालांकि अभी तक दूसरी पोस्टिंग नहीं मिली है।

दिनेश चन्द्र दुबेः 2003 बैच के IPS दिनेश चंद्र दुबे DIG रैंक के अधिकारी हैं। पशुपालन घोटाले के आरोप में योगी सरकार में निलंबित हुए और अभी तक तैनाती नहीं मिली है।

अरविंद सेन: दिनेश चंद्र दुबे के साथ 2003 बैच के IPS अरविंद सेन भी पशुपालन घोटाले में निलंबित हैं। DIG रैंक के ये अफसर तैनाती के लिए अभी भी तरस रहे हैं।

वैभव कृष्णा: नोएडा के एसएसपी रहते वैभव कृष्णा को सस्पेंड किया गया था। इन पर एक महिला के साथ आपत्तिजनक वीडियो में पकड़े जाने का आरोप है। इसके अलावा डिपार्टमेंट के अपने ही साथी IPS अफसरों से भी इनका विवाद काफी चर्चा में रहा। 2010 बैच के वैभव को अभी तक तैनाती नहीं मिली है।

अपर्णा गुप्ता: 2015 बैच की IPS अर्पणा गुप्ता को योगी सरकार ने हाल ही में निलंबित कर दिया था। उन पर कानपुर के संजीत यादव अपहरण कांड में लापरवाही का आरोप है। अभी तक उनको तैनाती नहीं मिली है।

अभिषेक दीक्षित: 2006 के IPS अभिषेक दीक्षित को प्रयागराज के SSP रहते निलंबित किया गया था। कानून व्यवस्था न संभाल पाने और घूसखोरी के आरोप में दीक्षित पर गाज गिरी थी। अभी तक उनको तैनाती नहीं मिली है। बता दें कि तमिलनाडू कैडर के अभिषेक प्रतिनियुक्ति पर यूपी आये हैं।

मानिकलाल पाटीदार: 2014 बैच के IPS मानिकलाल पाटिदार हाल ही में काफी चर्चा में आए। एसपी महोबा रहते हुए सरकार ने उन्हें निलंबित किया है। उन पर व्यापारी से रंगदारी मांगने का आरोप हैं। वहीं व्यापारी की हाल ही में मौत के बाद उन पर हत्या का शक भी है। ऐसे में जल्द तैनाती मिलना मुश्किल ही है।

सुभाष चन्द्र दुबे: 2017 में सहारनपुर में हुए बवाल के बाद 2005 बैच के IPS सुभाष चंद्र दुबे को सस्पेंड कर दिया गया था। फिलहाल ये IPS आजमगढ़ के डीआईजी हैं।

डॉ. सतीश कुमार: बाराबंकी में एसपी रहते हुए IPS सतीश कुमार को निलंबित किया गया था। 2013 बैच के इस IPS अफसर पर रिश्वतखोरी के आरोप लगे थे। फिलहाल ने SP, SDRF हैं।

एन कोलांची: बुलंदशहर में एसएसपी रहते इन्हें 2019 में निलंबित किया गया था। कोलांची पर थानाध्यक्षों के तबादले में अनियमितता के आरोप लगे थे। 2008 बैच के ये IPS फिलहाल PAC में एसपी की पोस्ट पर तैनात हैं।

अतुल शर्मा: प्रयागराज के एसएसपी रहते इन्हें निलंबित किया गया था। कानून व्यवस्था के मोर्चे पर नाकामी और भ्रष्टाचार के आरोप थे। 2009 बैच के IPS अतुल फिलहाल PAC में SP हैं।

आरएम भारद्वाज: 2018 में संभल में SP रहते IPS आरएम भारद्वाज को निलंबित किया गया था। उन की तैनाती के दौरान महिला को गैंगरैप के बाद जलाकर मार डाला गया था। 2005 बैच के इस IPS की पुलिस मुख्यालय में डीआईजी के पद पर तैनाती है।

संतोष कुमार सिंह: 2009 बैच के IPS संतोस सिंह को प्रतापगढ़ में SP रहते सस्पेंड किया गया था। इन पर भी कानून व्यवस्था के मोर्चे पर फेल होने का आरोप लगा था फिलहाल ये SP बुलंदशहर हैं।

हिमांशु कुमार: 2010 बैच के IPS हिमांशु कुमार वो पहले पुलिस अधिकारी थे, जिन्हें योगी सरकार ने निलंबित किया था। एक ट्वीट के कारण इन्हें मार्च 2017 में सस्पेंड किया गया था। फिलहाल IPS हिमांशु इन दिनों PAC में SP की पोस्ट पर तैनात हैं।

रिपोर्ट - चंदू शर्मा