नई दिल्ली. बुलंदशहर के असदपुर घेड़ गांव निवासी चंद्रमणि आर्य पिछले छह माह से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि स्कीम (Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi Scheme) का लाभ पाने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों की लालफीताशाही से लड़ रहे हैं. वह तीन बार अपने जिले के कृषि उप निदेशक, दो बार तहसीलदार, समाज कल्याण अधिकारी, तहसील दिवस में एसडीएम और लेखपाल के सामने अपनी बात रख चुके हैं. किसान पोर्टल पर शिकायत एक मैसेज आया लेकिन समाधान नहीं हुआ. आर्य ऐसे अकेले किसान नहीं हैं जिन्हें आधार, बैंक खाता नंबर और राजस्व रिकॉर्ड के बावजूद पैसा नहीं मिल रहा. देश में ऐसे लगभग 1.16 करोड़ किसान हैं. यानी इतने किसान अभी 6000 रुपये सालाना सहायता से वंचित हैं. पीएम नरेंद्र मोदी ने बजट दिया हुआ है, लेकिन अधिकारी किसानों को सरकारी तंत्र में फंसाए हुए हैं.

हमने जब बुलंदशहर के कृषि उप निदेशक आरपी चौधरी से बात की तो उन्होंने कहा, “हमारे जिले में ही करीब सवा लाख किसानों को पैसा नहीं मिल रहा है. उनके कागजात का वेरीफिकेशन होना है. चौधरी के इस बयान के बाद हमने राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे किसानों का आंकड़ा निकाला जिनका रजिस्ट्रेशन है लेकिन लाभ नहीं मिला. कृषि मंत्रालय की ओर से लोकसभा में पेश की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक इस योजना के तहत 6 फरवरी तक रजिस्टर्ड कुल किसानों और लाभार्थियों की संख्या के बीच 1.16 करोड़ से अधिक का अंतर है.
रिपोर्ट में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि योजना का पैसा लाभार्थियों के खातों में तब ट्रांसफर किया जाता है जब उनका सत्यापित डेटा पीएम किसान वेब पोर्टल पर संबंधित राज्यों द्वारा अपलोड किया जाता है. भुगतान से पहले कई स्तर का वेरीफिकेशन होता है. इसलिए पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना ही लाभ पाना तय नहीं करता. मंत्रालय राज्यों से किसान की भूमि जोत, गांव, बैंक डिटेल और आधार कार्ड नंबर आदि हासिल करता है. अगर कोई गड़बड़ी मिलती है तो उसे सुधारा जाना जरूरी है.
आखिर वेरीफिकेशन की याद दिसंबर 2019 में ही क्यों आई?

सवाल ये भी उठता है कि तमाम कृषि प्रधान राज्यों और आम चुनाव के दौरान बिना वेरीफिकेशन किसानों के अकाउंट में पैसा क्यों भेजा गया? लाभार्थियों के डेटा का वेरीफिकशन दिसंबर 2019 से ही क्यों अनिवार्य किया गया, जबकि योजना दिसंबर 2018 से चल रही है. जानकारों का कहना है कि ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि तुरंत पैसा न मिलने पर किसानों के वोट का नुकसान हो सकता था.
क्या इसीलिए अब तक नहीं खर्च हुई पूरी रकम?

दिसंबर 2018 में जब स्कीम शुरू की गई थी तब देश में आम चुनाव 2019 का माहौल बन रहा था. आनन-फानन में चार करोड़ किसानों को दो किश्त दे दी गई. लेकिन उसके बाद रफ्तार धीमी हो गई. लिहाजा 14.5 करोड़ किसान परिवारों के लिए जो 87 हजार करोड़ रुपये का बजट रखा गया था उसमें से अब तक महज 55 हजार करोड़ रुपये ही किसानों में वितरित हो सके हैं. करीब 9 करोड़ 61 लाख किसान ही लाभान्वित हुए. शेष रकम अभी पड़ी हुई है. उधर, एक करोड़ से अधिक किसान रजिस्ट्रेशन करके खेती के लिए 6000 रुपये पाने का इंतजार कर रहे हैं.