ग्वालियर राजनैतिक भूचाल के कारण प्रदेश में कमलनाथ सरकार का तख्तापलट होने के बाद अब कुल जमा सूबे की 24 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं। इनमें 22 सीटें वो हैं जो कांग्रेस के बागी विधायकों के इस्तीफों के चलते हाल ही में खाली हुई हैं, जबकि 2 विधानसभा सीटों पर स्थानीय एमएलए का निधन हो जाने के कारण पहले से ही उनके लिए उपचुनाव होना तय था।

गौरतलब है कि अपनी ही पार्टी के विधायकों के बागी हो जाने से महज 15 महीने के भीतर ही सूबे की कांग्रेस सरकार पलट गई। खास बात ये है कि बीते विधानसभा चुनाव में जिस ग्वालियर-चंबल संभाग से कांग्रेस को 15 साल बाद प्रदेश में सत्ता की चाबी मिली, वहीं के बदले राजनैतिक समीकरणों ने अब पार्टी को सत्ता से बाहर कर दिया। बता दें कि 2013 के विधानसभा चुनाव में अंचल की कुल 34 विधानसभा सीटों में से जिस बीजेपी को यहां की जनता ने बंपर 20 सीटें के साथ सत्ता की हैट्रिक बनाने का मौका दिया था, वहीं के लोगों ने 2018 में भाजपा को 7 सीटों पर समेटकर सत्ता की रेस से बाहर कर दिया। वहीं 2013 में अंचल से 12 सीटें हासिल करने वाली कांग्रेस को 2018 में 26 सीटों पर प्रचंड विजय देकर सरकार बनाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया। इस बीच बदले हालातों में प्रदेश की कमलनाथ सरकार के खिलाफ बगावत करने वाले 22 मंत्री-विधायकों में सर्वाधिक 15 ग्वालियर और चंबल संभाग से ही हैं। वहीं अब नए सिरे से बने राजनैतिक समीकरणों में एक तरफ तो बीजेपी में दावेदारों की भीड़ से दवाब जैसे हालात बन सकते हैं तो दूसरी ओर कांग्रेस में दमदार प्रत्याशियों का टोटा पड़ने जैसे स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।

ग्वालियर संभाग- कु ल 9 विधानसभाएं, जिनमें ग्वालियर, ग्वालियर पूर्व, डबरा, भाण्डेर, करैरा, पोहरी, बमौरी, अशोक नगर और मुंगावली अंचल की इन सीटों पर होना है उपचुनाव।

चंबल संभाग- कु ल 7 विधानसभाएं, जिनमें संभाग की सुमावली, मुरैना, दिमनी, अंबाह, मेहगांव, गोहद और जौरा विधानसभाएं शामिल हैं।

कांग्रेस के जिन मंत्रियों और विधायकों के बागी तेवरों के चलते प्रदेश की कमलनाथ सरकार की विदाई हुई है उनमें ग्वालियर और चंबल संभाग में कांग्रेस के कुल 26 एमएलए में से 15 की निर्णायक भूमिका रही है। इनमें प्रद्युम्न सिंह तोमर, इमरती देवी, मुन्नालाल गोयल, महेन्द्र सिसौदिया, रघुराज कंषाना, जसवंत जाटव, रक्षा संतराम सिरौनिया, ओपीएस भदौरिया, रणवीर जाटव, सुरेश धाकड़, एंदल सिंह कंषाना, गिर्राज दंडौतिया, जजपाल सिंह जज्जी, कमलेश जाटव और बृजेन्द्र यादव शामिल हैं। दरअसल इनके साथ कुल 22 विधायकों ने पिछले कई दिनों से बगावती तेवर अपनाते हुए सरकार को अल्पमत में ला दिया, जिसके चलते मुख्यमंत्री कमलनाथ को अंतत: इस्तीफा देना पड़ा।