नई दिल्ली । पंजाब का विवाद थमता नहीं दिख रहा है। नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बने दो दिन बीत गए हैं, पर कैप्टन अमरिंदर सिंह से कोई बातचीत नहीं हुई है। दोनों नेताओं के बीच इस टकराव ने पार्टी नेताओं की चिंता बढ़ा दी है। उनका मानना है कि दोनों के बीच तालमेल का अभाव रहा तो चुनाव में मुश्किलें बढ़ सकती हैं। विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और प्रदेश अध्यक्ष सिद्धू के बीच तालमेल जरूरी है। पर अभी तक दोनों गुट एक दूसरे से माफी मंगवाने की मांग पर अड़े हैं। कैप्टन गुट कई दिनों से सिद्धू से माफी मांगने की मांग कर रहा है। उसका कहना है कि सिद्धू ने मुख्यमंत्री के खिलाफ कई ट्वीट किए हैं, इसलिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए। सिद्धू के करीबी नेता परगत सिंह ने कहा कि माफी मांगने का सवाल ही नहीं है। माफी खुद कैप्टन को मांगनी चाहिए, क्योंकि वह मुख्यमंत्री के तौर पर जनता से किए वादों को पूरा करने में असफल रहे हैं। प्रदेश में बढ़ती रार पर अंकुश लगाने के लिए पार्टी ने सिद्धू और उनके समर्थकों को दूसरे गुट को उकसाने से बचने की सलाह दी है। सिद्धू गुट के एक नेता ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री से मिलने का वक्त मांगा है, जैसे ही मुख्यमंत्री समय देंगे, सिद्धू कैप्टन से मुलाकात करेंगे। इस बीच, कई विधायकों ने सिद्धू का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री से अपील की है कि वह पुरानी बातों को भूल जाएं। सिद्धू को माफ कर दें और उनके साथ अगले साल होने वाले चुनाव की रणनीति बनाएं। वहीं, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल ने ट्वीट कर कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू को माफी मांगनी होगी। रवीन ठुकराल ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि 'स्टैंड में कोई बदलाव नहीं हुआ है। सीएम तब तक नवजोत सिंह सिद्धू से नहीं मिलेंगे जब तक सिद्धू सोशल मीडिया के जरिए सीएम पर दिये गये बयानों के लिए सार्वजनिक तौर पर माफी नहीं मांगते हैं।