आपने अक्सर इस तरह की खबरों को पढ़ा होगा और सुना भी होगा, जिसमें पुलिसकर्मी अंजान लोगों की मदद को पूरे जी जान से लग जाते हैं. इस प्रकार के मामले हम सभी को अक्सर पढ़ने में आते हैं. पर इसकी जगह यदि किसी पुलिसकर्मी को लोगों की जरूरत पड़ जाए तो हालात ही बदल जाते हैं. हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि जौनपुर में कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है. जिसमे एक हेड कांस्टेबल की हादसे के बाद सड़क पर तड़प तड़प कर मौत हो जाती है. पर लोग तमाशबीन बने महज वीडियो बनाते हैं. लोगों के इस असंवेदनशील व्यवहार पर अब विभाग के सिपाहियों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं.

ये था मामला

जानकारी के मुताबिक जौनपुर के जलालपुर थाने पर तैनात हेड कांस्टेबल अमित कुमार सिंह दो दिन पहले सुबह लगभग 10:30 बजे अपनी बाइक से रेहटी ग्राम स्थित अस्पताल जा रहे थे तभी किसी अज्ञात वाहन की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हो गए. मौके पर उनकी बाइक भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई. कहा जा रहा है कि हेड कांस्टेबल सड़क पर गिरने के बाद काफी देर वहां पड़े रहे, लेकिन वहाँ से गुजरने वाले राहगीर तमाशा ही देखते रहे और कुछ लोग तो वीडियो बनाने में जुट गए थे. हेड कांस्टेबल के काफी देर तड़पने के बाद उन को किसी तरह से निकट के स्वास्थ्य केंद्र ले पहुँचाया गया, जहां चिकित्सक ने उन्हें देखते ही मृत घोषित कर दिया. डॉक्टरों की माने तो यदि उन्हैं सही समय पर अस्पताल ले जाया जाता तो शायद वो बच जाते.

सिपाहियों ने उठाए सवाल

इस मामले के सामने आने के बाद यूपी पुलिस के सिपाहियों ने लोगों के इस असंवेदनशील व्यवहार पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है. आगरा के सिपाही ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा कि, ”दुर्भाग्यपूर्ण! यदि इस सिपाही की जगह कोई नागरिक होता, तब यही सिपाही ड्यूटी पर होता या नहीं… उसे हॉस्पिटल लेकर जाता, जरूरत पड़ती तो अपना खून भी देता. अफसोस कि वो सिपाही था, तड़पते हुए का वीडियो बनाते रहे… वो मर गया”

वहीं प्रयागराज पुलिस के सिपाही ने लिखा कि, ”मैं खाकी हूँ! विचारणीय बात,क्या समाज के नागरिकों का कोई दायित्व नहीं है? खाकी पहनने के बाद कोई सुपरमैन,स्पाइडरमैन नहीं बन जाता,वह भी एक सामान्य इंसान की तरह है,अगर वो आपके कष्ट में काम आता है तो हमारा भी फर्ज है कि अगर खाकी वाला किसी कष्ट में हैं तो आगे बढ़ कर उसकी मदद करनी चाहिए. सिर्फ एक ओर से प्यार नहीं बढ़ता. अगर वहाँ खड़ी भीड़ वीडियो बनाने की बजाय मदद को हाथ बढ़ाती तो शायद एक जान बच सकती थी.”