संसद का मानसून सत्र जारी है। राज्यसभा में निलंबित सांसदों को वापस बुलाए जाने की जोरदार मांग की जा रही है जिसपर संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि यदि ये अपने किए पर खेद व्यक्त करते हैं तो इन्हें वापस बुलाया जा सकता है। सत्र के नौवें दिन  मंगलवार को दोनों सदनों में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। विपक्षी नेताओं ने राज्यसभा से वॉक-आउट किया और संसद परिसर में गांधी प्रतिमा के सामने 8 सांसदों के निलंबन को रद करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। 

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सैयद नासिर हुसैन ने कहा, 'सभी विपक्षी पार्टियां बचे सत्र का बहिष्कार करती हैं उन्होंने धरना पर बैठे सांसदों से इसे खत्म करने की अपील की और बचे सत्र के बहिष्कार में साथ दें।' उन्होंने आगे कहा, 'हम केवल निलंबन वापसी ही नहीं बल्कि कृषि विधेयक की भी वापसी चाहते हैं ताकि इस पर उचित तौर पर वोटिंग कराई जाए। लेकिन इस तरह का कुछ नहीं होने जा रहा क्योंकि सभापति किसी की भी सुनने को सहमत नहीं हैं।'

विपक्ष करेगी सत्र का बहिष्कार: नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी

नेता प्रतिपक्ष ने आगे कहा, 'जब यह विधेयक लाया जा रहा था तब MSP का ऐलान करना चाहिए लेकिन नहीं की गई। खैर MSP बाद में ऐलान किया गया जिसका हम स्वागत करते हैं। MSP को लेकर हमने तीन शर्तें रखी हैं जब तक वो पूरी नहीं हो जाती ये बायकॉट जारी रहेगा।'  गुलाम नबी ने कहा, ' जब तक हमारे सांसदों के संस्पेंशन को वापिस नहीं लिया जाता और किसान के बिलों से संबंधित हमारी मांगों को नहीं माना जाता विपक्ष सत्र से बायकॉट करती है।' राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद ने मंगलवार को कहा, '8 सांसदों के निलंबन को वापस लिया जाना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'पिछले दो दिनों में जो सदन में हुआ मुझे नहीं लगता कि उससे कोई भी खुश है...करोड़ों लोगों का प्रतिनिधित्व करने वालों को करोड़ों लोग देखते हैं। जो लक्ष्य है यहां आने का वो तो पूरा होना चाहिए।'

राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने विपक्ष से दोबारा सोचने और विश्लेषण करने का आग्रह किया। उन्हेांने कहा,'सदन के सदस्यों के निलंबन से मैं खुश नहीं हूं। यह कार्रवाई उनके आचरण को लेकर किया गया है।'