नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 24-25 फरवरी को होने वाले भारत दौरे से पहले दोनों देशों के बीच होने वाले दो और बड़े रक्षा समझौतों को अंतिम रूप दे दिया गया है। 30 हेवी-ड्यूटी सशस्त्र हेलिकॉप्टरों के लिए 3.5 बिलियन डॉलर (25,000 करोड़ रुपए) के ये समझौते होने हैं। नेवी के लिए 24 एमएच-60 रोमियो सीहॉक मैरीटाइम मल्टी-मिशन हेलिकॉप्टरों के लिए 2.6 बिलियन डॉलर का सौदा किया जा रहा है। ये हेलिकॉप्टर अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन से खरीदे जाएंगे। वहीं सेना के लिए छह एएच -64 ई अपाचे अटैक हेलिकॉप्टरों के लिए 930 मिलियन डॉलर का सौदा होना है। सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्यूरिटी द्वारा इन सौदों को अगले सप्ताह औपचारिक मंजूरी दी जाएगी।
4-5 साल में आएंगे सभी 60आर हेलिकॉप्टर
यूएस फॉरेन मिलिटरी सेल्स (एफएमएस) गर्वनमेंट-टू-गवर्नमेंट डील के तहत भारत एमएच-60 आर हेलिकॉप्टरों के लिए पहली किस्त के तौर पर 15 फीसदी की किस्त का भुगतान करेगा। कॉन्ट्रैक्ट पर साइन होने के बाद दो साल में हेलिकॉप्टरों की पहली किस्त हमें मिल जाएगी। वहीं चार से पांच साल में सभी 24 हेलिकॉप्टर आ जाएंगे। हेलफायर मिसाइलों, एमके-54 टॉरपीडो और सटीक मार वाले रॉकेटों से लैस एमएच-60 आर हेलिकॉप्टर भारतीय रक्षा बलों को सतह और पनडुब्बी भेदी युद्धक अभियानों को सफलता से अंजाम देने में सक्षम बनाएंगे। ये हेलिकॉप्टर फ्रिगेट, विध्वंसक पोतों, क्रूजर और विमान वाहक पोतों से संचालित किए जा सकते हैं। इन हेलिकॉप्टरों को दुनिया के सबसे अत्याधुनिक समुद्री हेलिकॉप्टर माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, हिंद महासागर में चीन के आक्रामक व्यवहार के मद्देनजर भारत के लिए ये हेलिकॉप्टर आवश्यक हैं। ये हेलिकॉप्टर इस समय अमेरिकी नौसेना में तैनात हैं। इस क्षेत्र के युद्धपोत बल में अभी तक लगभग एक दर्जन पुराने सी किंग और 10 कामोव-28 ऐंटी सबमरीन युद्धक हेलिकॉप्टर हैं।
पिछले साल सीहॉक को मिली थी मंजूरी
बता दें कि अमेरिका ने पिछले साल अप्रैल में भारत को सीहॉक हेलिकॉप्टर बेचने को मंजूरी दी थी। माना जा रहा है कि इस हेलिकॉप्टर से भारतीय नौसेना को जमीन रोधी और पनडुब्बी रोधी लड़ाई में और ताकत मिलेगी। इस हेलिकॉप्टर को पनडुब्बी को खोज कर नष्ट करने के लिए बनाया गया है। सीहॉक ब्रिटेन में बने और अब पुराने पड़ चुके सी किंग हेलिकॉप्टर का स्थान लेगा।