कानपुर में बाबा बिरयानी रेस्टोरेंट के मालिक मुख्तार बाबा को पुलिस ने जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। वहीं अब उसके खिलाफ लड़ाई लड़ने वाली रानी उर्फ जीनत आजमी की इंसाफ की आस फिर से जिंदा हो गई है। मुख्तार बाबा ने स्वरूप नगर स्थित जिस भूखंड के बाहर बिरयानी का पतीला लगाते हुए धीरे-धीरे 8 दुकानें कब्जाई थीं, वह रानी के पति मुमताज अहमद की थी। अब रानी ने अपने वकील से प्रार्थना पत्र तैयार करवाया है, जिसे वह पुलिस कमिश्नर से मिलकर मुख्तार पर मुकदमा दर्ज कराने के लिए देंगी।

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रानी उर्फ जीनत आजमी के मुताबिक मुख्तार बाबा ने स्वरूप नगर स्थित भूखंड के बाहर बिरयानी का पतीला लगाना शुरू किया था और धीरे-धीरे आठ दुकानें कब्जा ली थीं। विरोध करने पर वह उन्हें धमकी देता था। हालात इतने बदतर हो गए कि 2010 में मुमताज अहमद ने अपने बेटे को खो दिया। इसके बाद बीमारी की वजह से 2016 में उनकी भी मौत हो गई। इसके बाद मुमताज की पत्नी रानी उर्फ जीनत आजम अकेली पड़ गईं।

जीनत पांच साल तक प्रशासन और पुलिस के चक्कर लगाती रहीं लेकिन मदद नहीं मिली। अंत में उन्हें अपनी ही संपत्ति से बेदखल कर दिया गया। मजबूर होकर उन्होंने पड़ोस में ही किराए का मकान लिया और अपना पेट पालने के लिए दुकान शुरू की। बेटे और पति को खोने के बाद वह पूरी तरह टूट चुकी थीं। इंसाफ की आस भी दम तोड़ चुकी थी। लेकिन, मुख्तार बाबा के खिलाफ कार्रवाई की खबर ने उनमें फिर से लड़ने की हिम्मत दे दी है।

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जानकारी के अनुसार स्वरूप नगर स्थित भूखंड संख्या 112/338 और 112/339 का क्षेत्रफल 400 वर्ग गज है। मुमताज ने इसे वर्ष 1972 में खरीदा था। आज इस संपत्ति की कीमत पांच करोड़ से भी ज्यादा है। बावजूद इसके रानी और उनका बेटा राहिल किराये के मकान में रहते हैं। इस कमरे की स्थिति भी बेहद दयनीय है। ताला लगाने के लिए कुंडी तक ठीक नहीं है।

रानी के मुताबिक मुख्तार बाबा ने वर्ष 2001 में मुमताज से अनुमति लेकर भूखंड के चबूतरे पर पतीला लगाकर बिरयानी कारोबार शुरू किया था। इसके बाद उसने किराये पर मुमताज से दो दुकानें लीं और धीरे-धीरे आठ दुकानों पर कब्जा कर लिया। मुख्तार ने इस दुकान का लाइसेंस अपने भाई मुश्ताक के नाम पर ले रखा है जो बाबा फूड्स के नाम पर है। फिलहाल, बिरयानी और मटन का सैंपल फेल होने के बाद सोमवार को इसे सीज कर दिया गया।

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