नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट आज केंद्र सरकार के उस तर्क की समीक्षा करेगा, जिसमें निर्भया सामूहिक दुष्कर्म व हत्या मामले के चारों दोषियों द्वारा फांसी को टालने के लिए कानून से खिलवाड़ किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने अपनी याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को भी चुनौती दी है, जिसमें चारों दोषियों को अलग-अलग फांसी नहीं देने का निर्देश दिया गया है। केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने जस्टिस एनवी रमन्ना की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष इस याचिका का उल्लेख करते हुए जल्द सुनवाई की गुहार लगाई। नटराज ने कहा कि चारों दोषियों की पुनर्विचार व सुधारात्मक याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं और तीन की दया याचिकाएं भी खारिज हो चुकी हैं। इसके बावजूद तिहाड़ जेल प्रशासन चारों दोषियों को फांसी नहीं दे पा रहा है। मालूम हो कि बुधवार को हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को दरकिनार करने से इनकार कर दिया था, जिसमें चारों दोषियों की फांसी की सजा को अगले आदेश तक टाल दिया गया था। हालांकि हाईकोर्ट ने सभी दोषियों को सात दिनों के भीतर तमाम कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया था। बुधवार को ही केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर कर हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दे दी थी। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सवाल रखा है कि मृत्युदंड वाले मामलों में एक दोषी द्वारा तमाम कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करने के बावजूद क्या वह महज इस कारण कानून के साथ खिलवाड़ कर सकता है, क्योंकि सह दोषियों ने अपने सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल नहीं किया है। 


डेथ वारंट के लिए फिर कोर्ट पहुंचा जेल प्रशासन
निर्भया के दोषियों को जल्द फांसी पर लटकाने के लिए तिहाड़ जेल प्रशासन एक बार फिर पटियाला हाउस कोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने सभी दोषियों से जवाब दायर के निर्देश दिए हैं, ताकि अदालत इस मामले में कार्यवाही को आगे बढ़ा सके। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने तिहाड़ की अपील पर संज्ञान लेते हुए कहा कि चारों दोषी अपने कानूनी उपायों को लेकर शुक्रवार तक जवाब दायर करें और बताएं की क्या किसी दोषी की कोई याचिका लंबित है या नहीं।  इससे पहले पटियाला हाउस कोर्ट ने 31 जनवरी को दोषियों की फांसी पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी, क्योंकि बचाव पक्ष ने कोर्ट को जानकारी दी थी कि दोषी विनय की दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित है, लिहाजा दोषियों को एक फरवरी को फांसी नहीं दी जा सकती। हालांकि उसी दिन राष्ट्रपति ने दोषी विनय की याचिका खारिज कर दी थी। चूंकि दया याचिका खारिज होने के बाद भी दोषी को फांसी से पहले 14 दिनों का समय दिया जाता है, इसलिए कोर्ट ने फांसी को अगले आदेश तक टाल दिया था।