उत्तर प्रदेश में जहां एक ओर नक्सल प्रभावित जिलों में किसी भी समय नक्सी हमला कर मासूमों के जान माल को नुक्सान पहुंचा सकते हैं। तो वहीं दूसरी ओर नक्सल प्रभावित सोनभद्र जिले में किसी भी समय हमला कर असमाजिक तत्वों हुए हमले में यूपी पुलिस भी कहीं ना कहीं अपनी एक चुक के कारण नाकाम दिख सकती है... जी हां ऐसा हम नहीं कह रहे ऐसा हाल सोनभद्र से देखने को मिला है। जहां के पुलिसकर्मियों को असलाह तक खोलना नहीं आता, और अगर खुल जाए तो उसे बंद कैसे किया जाएग इसे लेकर भी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। दरअसल कोतवाली पर तैनात पुलिसकर्मियों की पोल उस समय खुल गई जब तिमाही निरीक्षण करने कोतवाली पहुंचे दुद्धी सीओ ने वहां मौजूद सिपाहियों से असलहा खोलने की बात कही। जिसमें चौंकाने वाली बात तो यह रही कि इसमें से कई सिपाहियों को तो असलहा चलाने तक की जानकारी नहीं थी... और न ही रबर बुलेट दागने की। 

 

 

सिपाहियों के छूटे पसीने

दरअसल तिमाही निरीक्षण के लिए दुद्धी सीओ कोतवाली पहुंचे। जहां कोतवाली में मौजूद सिपाहियों से सीओ से इस बारे सिपाहियों से असलहा चलाने के विष्य में जानकारी ली। सवाल सुनने से पहले ही कई सिपाहियों के पसीने छूट गए। ऐसे में देखने वाली बात तो यह रही कि 1या 2 नहीं, बल्कि 6 सिपाही इस मौके पर जांच के दौरान नाकाम साबित हुए। सीओ ने जैसे ही सभी के हाथों में राइफल दी तो सभी के पैरों तले जमीन ही खिसक गई.... लेकिन सिपाहियों की इस नाकामी को देख सीओ ने असलहा चलाने की बारीकियां बताईं। सीओ ने कोतवाली से लेकर गेट परिसर और कार्यालय में साफ-सफाई का व अन्य चीजों के रख रखाव का ध्यान रखने के निर्देश भी दिए। कोतवाली में रखे अभिलेख व्यवस्थित ढंग में मिले। जिसे देखकर सीओ ने कई पुलिसकर्मियों की सराहना करते हुए उनको शाबासी देकर उनकी पीठ थपथपाई।

 

 

नाकाम पुलिसकर्मियों पर सीओ ने जताई नरागी

सीओ ने जिन भी पुलिसकर्मियों से परिसर में मौजूद सिपाहियों से असलहा चलाने व बुलेट लोड करने के साथ-साथ फायरिंग करने के बारे में पूछताछ करने के साथ-साथ आंसू गैस के गोले और रबर बुलेट चलाने की जानकारी ली। एक-एक कर 6 पुलिसकर्मी CO के सवालों में उलझ कर रह गए। लेकिन जहां कोई असलहा नहीं खोल सका तो कोई बुलेट दागने से पहले सावधानी से अनजान था। इसे गंभीरता से लेते हुए CO ने भी सख्त नाराजगी जाहिर की।

 

 

सजा भी ऐसी जो बनी औरों के लिए बड़ी नजीर

क्योंकि कोतवाली पर तैनात नाकाम सिपाहियों को देख सीओ का पारा हाई होकर सातवे आसमान पर पहुंच गया था जो लाजमी भी है, लेकिन भविष्य ऐसी नाकामी फिर से ना देखने को मिले इसके लिए सीओ ने 6 सिपाहियों की क्लास लगाते हुए सीओ ने सिपाहियों को सभी के सामने कोतवाली के चक्कर काटने को बोल दिया। आस-पास के लोग भी इसे देखते रह गए। पुलिसकर्मी लौटे तो उन्हें CO ने असलहा चलाने का प्रशिक्षण भी कराया। निरीक्षण में प्रभारी निरीक्षक पंकज कुमार सिंह ने मुकदमों की लंबित विवेचना को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए थे, अपराधियों पर नकेल कसने के साथ-साथ महिला उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों को भी गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई करने का निर्देश दिया।  

 

 

सिपाही को बारीकी से दी असलहों की जानकारी

असलहा चलाने में नाकाम पुलिसकर्मियों की इस चूक के पीछ सबसे बड़ी लापरवाही यही थी कि लंबे समय से सिपाहियों को असलहा चलाने में प्रशिक्षण ही नहीं मिला था। नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के बावजूद असलहा चलाने में पुलिसकर्मियों की विफलता आम लोगों की सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ी चूक है। इस बाबत CO रामाशीष यादव के मुताबिक समय-समय पर पुलिस लाइन बुलाकर प्रशिक्षण देकर असलहों के बारे में बारीकी से जानकारी देना बेहद ही जरूरी है।