भोपाल, मध्यप्रदेश पुलिस महकमे से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रदेश के डीजीपी वीके सिंह हटाए जा सकते हैं। डीजीपी के चयन के लिए यूपीएससी पैनल को रद्द कर दिया है। ऐसे में यह तय हो गया है कि वीके सिंह को अब हटाया जा सकता है। ऐसे में अगले डीजीपी के नाम की चर्चा शुरू हो गई है। जिसके प्रबल दावेदार हनीट्रैप मामले की जांच कर रहे एसआईटी चीफ राजेंद्र कुमार बताए जा रहे हैं।

दरअसल, डीजीपी वीके सिंह को लेकर सवाल उठ रहे थे। वीके सिंह के कई फैसलों की वजह से किरकिरी भी हुई। साथ ही कमलनाथ की सरकार को वह तालमेल नहीं बैठा रहे थे। वीके सिंह की नियुक्ति बीजेपी सरकार में हुई थी। इसलिए कांग्रेस के कई नेता भी पार्टी की बैठकों में यह कहते रहे हैं कि वीके सिंह बीजेपी के लिए काम करते हैं। साथ ही हनीट्रैप मामले में जिस तरीके आईपीएस अधिकारियों में भिड़ंत हुई, उससे सरकार की शाख पर ही सवाल उठने लगे थे।

यूपीएससी पैनल को किया खारिज
वीके सिंह मध्यप्रदेश के एक्टिंग डीजीपी थे। नियम के अनुसार डीजीपी की नियुक्ति के लिए यूपीएससी सरकार के पास पैनल भेजती है। जिसमें तीन लोगों के नाम थे। टॉप में वर्तमान डीजीपी वीके सिंह का नाम था। इसके अलावे मैथलीशरण गुप्त और व्हीके जौहरी का नाम था। साथ ही मैथलीशरण गुप्त को भी सरकार डीजी बनाने को तौयार नहीं थी।

वहीं, यूपीएससी द्वारा जो तीन नाम सरकार को भेजे गए थे, उसमें व्हीके जौहरी द्वारा लिखित सहमति पत्र प्रस्तुत नहीं की गई। इसे लेकर राज्य की सरकार ने यूपीएससी को अवगत कराया। साथ ही कहा कि यह संघ लोक सेवा आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और प्रक्रिया के विरूद्ध है। ऐसे में राज्य शासन द्वारा यूपीएससी की अनुशंसा को अस्वीकार किया जाता है। साथ ही चयन समिति से यह आग्रह किया है कि राज्य सरकार फिर से एक नवीन प्रस्ताव भेजें।

हटाए जा सकते हैं वीके सिंह
यूपीएसी द्वारा प्रस्तावित पैनल को राज्य सरकार ने खारिज कर दिया है। वीके सिंह एक्टिंग डीजीपी हैं। ऐसे में राज्य सरकार उन्हें कभी भी हटा सकती है। और किसी और को एक्टिंग डीजीपी बना सकती है। क्योंकि कई वजहों से सरकार के साथ वह तालमेल नहीं बिठा पा रहे हैं। उन पर यह भी आरोप लगता है कि वह पुलिस मुख्यालय में बैठकर केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों का पालन करते हैं।

राजेंद्र कुमार हो सकते हैं अगले डीजीपी
प्रस्ताव खारिज होने के बाद यूपीएससी फिर से एक पैनल तैयार कर राज्य सरकार के पास भेजेगी। उसके बाद सरकार उनमें से किसी नाम पर मुहर लगाएगी। लेकिन अब यह चर्चा तेज हो गई है कि सरकार सीनियर आईपीएस अधिकारी राजेंद्र कुमार अंतरिम डीजीपी बना सकती है। राजेंद्र कुमार अभी हनीट्रैप मामले में गठित एसआईटी के चीफ हैं। लेकिन उन्हें वहां से यहां शिफ्ट करने के लिए राज्य सरकार को हाईकोर्ट में जानकारी देनी होगी। क्योंकि हाईकोर्ट ने पहले ही कहा है कि एसआईटी चीफ बदलने से पहले हमें जानकारी दें।