उत्तर प्रदेश के सीतापुर ज‍िले में सामुदायिक शौचालय के अंदर परचून की दुकान खोलने का मामला सामने आया है। यहां शौचालय के अंदर स्थित दुकान से गांव के लोग रोज बाकायदा खरीदारी भी करते हैं। शौचालय में बने स्नानागार को किराना दुकान का गोदाम बना दिया गया है। 70 हजार रुपए की सरकारी लागत से बना शौचालय ग्रामीणों के तो किसी काम नहीं आ रहा है। हालांक‍ि यह मामला सोशल मीडिया की सुर्खियां बना हुआ है। वहीं सीडीओ ने मामले की जांच की आदेश द‍िए हैं। 

निजी जमीन पर लालच देकर बनवाया शौचालय

मामला सकरन ब्लॉक के तारपारा गांव का है। बताया गया क‍ि यहां के निवासी मोहनलाल की जमीन पर एक सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया। मोहनलाल का कहना है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव में शौचालय निर्माण के लिए तत्कालीन ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव को जमीन की तलाश थी। ग्राम प्रधान और सचिव ने मोहनलाल को लालच दिया कि अगर वह अपनी जमीन पर शौचालय बनवा लेगा तो उसे 15 हजार रुपये हर महीने किराया और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी जाएगी।



प्रधान ने वादे नहीं क‍िए पूरे तो खोल दी दुकान 

मोहनलाल ने बताया क‍ि इसी लालच में आकर ग्रामीण ने शैचालय का निर्माण तो करवा लिया लेकिन उससे किये गए वादे पूरे नहीं हुए तो उसने विरोध करना शुरू कर दिया। जमीन पर कब्जा जमाने के लिए उसने वहां परचून की दुकान खोल ली। दुकान खुलने के बाद ग्रामीणों ने विरोध तो दर्ज कराया लेकिन पंचायत सचिव ने महज मोहनलाल को नोटिस देकर मामले से पलड़ा झाड़ लिया।

सीडीओ ने दिए जांच के आदेश

शौचालय में दुकान खोलने का मामला मीडिया में आने के बाद सीडीओ अक्षत वर्मा ने जांच के आदेश दिए हैं। उनका कहना है कि ब्लॉक स्तर की एक टीम बनाकर मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। इस प्रकरण में जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।