आंध्र प्रदेश के सिनेमा यानी तेलुगु भाषा वाली फिल्मों के सबसे बड़े स्टार चिरंजीवी 
चिरंजीवी का असली नाम सिवा संकर वरा प्रसाद है। जब वे फिल्मी दुनिया के लिए अपना नया नाम सोच रहे थे तो उन्हें सपना आया कि एक बुजुर्ग आदमी और एक लड़की उन्हें चिरंजीवी नाम से पुकार रहे हैं। उन्होंने अपनी मां से इस बारे में बात की जो हनुमान की बड़ी भक्त रहीं।  उनकी मां ने इस नाम के लिए हां कर दी क्योंकि ये अंजनेय स्वामी यानी हनुमान का ही दूसरा नाम है।
आकर्षण का केंद्र बनने अभिनेता बने 
जब चिरंजीवी किशोर थे तब उन्हें सबके आकर्षण का केंद्र बनना बहुत पसंद था। वे स्कूल में, एनसीसी कैंप में और अपने रिश्तेदारों के सामने फिल्मी गानों पर नाचा करते थे। 70 के दशक में उन्होंने अभिनेता बनने का फैसला किया। कुछ नाटकों में काम किया। फिर मद्रास के एक इंस्टिट्यूट में एक्टिंग सीखने लगे। 1978 में कोर्स खत्म किया और पहली फिल्म की शूटिंग शुरू कर दी। ये इतना जल्दी यूं हुआ कि फिल्म संस्थान में थे तब उनके एक दोस्त को संबंधित फिल्म में रोल करना था लेकिन उसका किसी अन्य निर्माता से दूसरी फिल्म न करने का करार था। ऐसे में उसने चिरंजीवी का नाम सुझाया। उस फिल्म को देख एक और तेलुगु प्रोड्सूसर क्रांतिकुमार ने अपनी ब्लैक एंड वाइट आर्ट फिल्म में चिरंजीवी को लिया। अधिकतम समय तक चिरंजीवी की एक फिल्म खत्म होने और दूसरी शुरू होने में 10 दिन से ज्यादा का फर्क नहीं रहा।
हैलेन को देखकर सीखा डांस 
चिरंजीवी के डांस को सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है लेकिन उन्होंने डांस कहीं से सीखा नहीं है। दरअसल उन्होंने हिंदी फिल्म एक्ट्रेस हैलेन को पिया तू अब तो आजा गाने पर नाचते हुए देखा तब से नाचने लगे। जब भी रेडियो पर ये गाना बजता वे नाचते थे। फिर ऐसा वे लगातार घर के सदस्यों के सामने करने लगे और उनकी तारीफ से उनका हौसला बढ़ता गया। हैलेन के कारण ही वे डांसर बने।
फिल्मों की दीवानगी ऐसी कि लोग मारे जाते 
उनकी दीवानगी इतनी है कि अंदाजा लगाना मुश्किल है। उनकी नई फिल्मों की रिलीज के पहले ही दिन टिकट के लिए इतनी भीड़ मचती है कि भगदड़ में लोग मारे जाते हैं। ऐसा एक से ज्यादा बार हो चुका है। 2003 में उनकी फिल्म ‘टैगोर’ की टिकट लेने के दौरान भगदड़ में चार लोग मारे गए। एक बार एक प्रशंसक उनके करीब आकर छूने की कोशिश कर रहा था कि उसे बिजली का झटका लग गया। 
1992 में प्रदर्शित ‘घराना मोगुडु’ फिल्म के साथ चिरंजीवी भारत में सबसे ज्यादा फीस लेने वाले एक्टर बन गए थे। उन्हें 1.25 करोड़ रुपये मिले थे। तब उन्हें अमिताभ बच्चन से भी बड़ा स्टार कहा जाने लगा था।
जब तेलुगु फिल्मों के सिनेमाघर मालिक और वितरक चिरंजीवी की किसी नई फिल्म के प्रदर्शन के दौरान घाटे में जाने लगते हैं तो उन सबको चिरंजीवी की पुरानी फिल्में फिर से मुफ्त में दी जाती हैं और उनका घाटा पूरा होता है।
उन्होंने ‘द रिटर्न ऑफ द थीफ ऑफ बगदाद’ नाम की हॉलीवुड फिल्म भी साइन की थी जिसकी शूटिंग बाद में रद्द हो गई।
जब तेलुगु फिल्मों में चिरंजीवी का प्रवेश हुआ जब उसमें अक्किनेनी नागेश्वरा राव और एनटी रामा राव सबसे बड़े सुपरस्टार थे। वे लोग पौराणिक कहानियों और ड्रामा भरी फिल्मों से दिग्गज बने। चिरंजीवी ब्रेकडांस लेकर आए। उनकी फिल्मों में डांस, फाइट, धांसू डायलॉग और दो हीरोइन वाला फॉर्मूला होता था जो चल निकला।
चिरंजीवी पहले दक्षिण भारतीय अभिनेता थे जिन्हें कथित तौर पर 1987 में 59वें ऑस्कर अवॉर्ड में हिस्सा लेने के लिए बुलाया गया था।
सितंबर 1978 में चिरंजीवी की पहली फिल्म रिलीज हुई थी और ठीक दस साल बाद उनकी 100 फिल्म ‘त्रिनेत्रुडू’ रिलीज हुई।
ऐसा दावा किया जाता है कि वे पहले भारतीय फिल्म अभिनेता हैं जिन्होंने अपनी खुद की वेबसाइट बनवाई थी। 
फिल्मी जीवन में चिरंजीवी को सबसे पहला टैग मिला, वो था सुप्रीम हीरो का। 1983 में आई फिल्म ‘कैदी’ ने उन्हें पहला स्टारडम दिया। कोई 90 से ज्यादा फिल्में करने के बाद 1988 में फिल्म ‘मरना मृदंगम’ के साथ उन्हें मेगा स्टार का टैग मिला।
ने 2007 में प्रदर्शित हुई ‘शंकर दादा एमबीबीएस’ के बाद फिल्में छोड़ दी थीं। इसके बाद वह राजनीति में आ गये। चिरंजीवी की ज्यादातर फिल्में तेलुगु में रही हैं लेकिन कुछ हिंदी फिल्मों में भी वह सुपरहिट रहे हैं।