नई दिल्ली| जदयू ने जनसंख्या नियंत्रण कानून, जातिगत जनगणना तथा बिहार के बाहर अन्य राज्यों में चुनावों को लेकर अपना तल्ख रुख दिखाया है। बाकायदा इन मुद्दों पर कार्यकारिणी में प्रस्ताव पारित किए गए हैं। यह प्रस्ताव सहयोगी भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से असहज करने वाले हो सकते हैं। लेकिन जदयू इन मुद्दों पर अपने रुख पर अडिग दिख रहा है। शनिवार को हुई कार्यकारिणी की बैठक के प्रस्ताव में कहा गया कि जाति आधारित जनगणना तत्काल की जानी चाहिए। इस सिलसिले में जदयू सरकार पर दबाव बनाएगा। जल्द ही संसदीय दल के नेताओं का एक दल प्रधानमंत्री से मिलेगा। जदयू के वरिष्ठ नेता के.सी. त्यागी ने कहा कि इसके लिए प्रधानमंत्री से समय मांगा गया है। जबकि केंद्र सरकार जातीय जनगणना की संभावना से इनकार कर चुकी है।
इसी प्रकार अति पिछड़ों की पहचान के लिए बने जस्टिस जी. रोहिणी आयोग की रिपोर्ट में देरी पर भी जदयू ने नाराजगी प्रकट की है। इस आयोग को छह महीने के भीतर रिपोर्ट देनी थी, लेकिन दस बार इसे सेवा विस्तार दिया जा चुका है। जदयू ने मांग रखी है कि आयोग रिपोर्ट जल्दी सौंपे तथा उसे प्रकाशित करे। ताकि इन अति पिछड़े तबकों को उचित लाभ दिया जा सके।

जदयू ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून का भी विरोध किया है और प्रस्ताव पारित किया है। हालांकि यह कहा कि जनसंख्या पर नियंत्रण के उपाय होने चाहिए लेकिन इसके लिए प्रोत्साहन दिए जाने की जरूरत है, न कि कानून बनाने की। उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में जनसंख्या नियंत्रण के लिए भाजपा सरकारें कानून बनाने का ऐलान कर चुकी हैं। इस कड़ी में जदयू ने एकदम उलट रुख प्रकट किया है।