नोएडा में हाल ही में पुलिस ने एटीएम हैकर्स के एक गैंग को गिरफ्तार किया था। जिसके बाद उनसे कुछ ऐसा खुलासा हुआ, जिस वजह से न सिर्फ जिला प्रशासन बल्कि डीजीपी दफ्तर तक में हड़कंप मच गया। दरअसल, हैकर्स ने बताया कि उन्हें तीन महीने पहले भी गिरफ्तार किया गया था लेकिन बीस लाख रुपए और क्रेटा गाड़ी लेकर उन्हें छोड़ दिया गया। अब मामले में डीजीपी ने जांच के आदेश दिए थे। जिसके बाद डीसीपी क्राइम की जांच रिपोर्ट के बाद एसओजी के प्रभारी और एक हेड कांस्टेबल को दोषी मानते हुए पुलिस सेवा से तत्काल बर्खास्त कर दिया गया है।

ये है मामला

जानकारी के मुताबिक, जिले की इंदिरापुरम थाना पुलिस ने एटीएम हैकर गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया। उनके द्वारा गाजियाबाद में क्रेटा कार से एक घटना को अंजाम दिया गया था। जब पुलिस ने हैकर गिरोह से इस क्रेटा कार के संबंध में पूछा तो उन्होंने बताया कि यह क्रेटा कार नोएडा पुलिस की एसओजी की टीम के पास है। इस पर हुई पूछताछ में खुलासा हुआ कि उन्हें करीब तीन माह पहले एसओजी नोएडा की टीम ने पकड़ा था और उस दौरान उनके पास 10 लाख रुपये नकद थे। जिसे टीम ने जब्त कर लिया था और उसके बाद उनसे 10 लाख रुपये और लेने के लिए एसओजी कर्मियों की एक टीम उनके घर गई थी। टीम वहां से 10 लाख रुपये और क्रेटा कार लेकर आ गई थी। इस पर इंदिरापुरम थाना पुलिस ने हैकर को उनके घर ले जाकर वहां से एसओजी कर्मियों द्वारा क्रेटा कार ले जाने की सीसीटीवी फुटेज भी बरामद कर ली। जिसके बाद डीजीपी ने मामले में सख्ती से जांच के आदेश दिए थे।

कई बर्खास्त तो कई लाइन हाजिर

इस मामले में उन्होंने डीसीपी क्राइम अभिषेक को जांच सौंपी थी। अभिषेक से 24 घंटे में जांच रिपोर्ट तलब की गई थी। इस जांच रिपोर्ट के आने के बाद एसओजी के तत्कालीन प्रभारी शावेज खान और हैड कांस्टेबल अमरीशकांत यादव को तत्काल पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। जिले की पूरी एसओजी टीम को भंग कर लाइन हाजिर कर दिया गया है। जिसमें एक दारोगा, तीन हेड कांस्टेबल और पांच कांस्टेबल लाइन हाजिर किए गये हैं। अपर आयुक्त कानून और व्यवस्था लव कुमार ने कहा कि इस मामले में अभी जांच जारी है और आगे की जांच में यदि किसी और पुलिसकर्मी की कोई संलिप्तता निकलती है या कुछ और मामला पकड़ में आता है तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।