वसई । विरार में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ गया है। लॉकडाउन के दौरान लोगों के घरों से बाहर न निकलने के कारण सड़कों पर भटकने वाले कुत्तों को भोजन नहीं मिल पा रहा था, इससे ये कुत्ते ज्यादा आक्रामक हो गए। ऐसे में हजारों की संख्या में भटकने वाले कुत्ते नागरिकों पर हमला कर रहे हैं, जिससे ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार सड़कों पर भटकने वाले कुत्तों से नागरिक परेशान हैं.दोपहिया वाहनों के पीछे यह कुत्ते दौड़ते हैं जिसके कारण अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं। बाजार जाने वाले छोटे बच्चे, महिलाएं, वृद्ध नागरिकों के मन में सड़कों पर घूमने वाले इन आवारा कुत्तों के काटने का भय बना रहता है। मनपा के अनुसार बीते वर्ष 2019 में कुत्तों के काटने की कुल 18, 268 घटनाएं हुई थीं , जबकि वर्ष 2020 में यह बढ़ कर दोगनी हो गई है।
कुत्तों के आतंक को रोकने के लिए कुत्तों की नसबंदी की जाती है. मनपा द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार बीते 3 वर्ष में 10, 255 कुत्तों की नसबंदी हुई है। एक कुत्ते की नसबंदी के लिए 996 रुपए खर्च होते हैं. नसबंदी के लिए मनपा ने बीते 3 वर्ष में लाखों रुपए खर्च किए हैं.उसके बावजूद अब भी मनपा की सड़कों पर हजारों की संख्या में आवारा कुत्ते घूमते नजर आ रहे हैं। सवाल यह भी है कि जब कुत्तों की नसबंदी हो जाती है तो नए कुत्ते के पिल्लै कहाँ से पैदा हो जाते है।
मनपा के वसई नवघर मानिकपुर क्षेत्र स्थित एकमात्र नसबंदी केंद्र पर पूरा भार है। केंद्र के लिए मनपा ने 2 स्थान चिन्हित किए हैं, जिसमें प्रभाग समिति सी के विरार स्थित चंदनसार और दूसरा प्रभाग समिति ई में नालासोपारा स्थित निर्मल के अलावा तीसरा वसई में स्थान प्रस्तावित किया गया था। लेकिन तीनों स्थान शहर के बाहर होने के कारण बताया जाता है कि डॉक्टरों ने वहां जाने से इंकार किया है। जिसको देखते हुए वर्तमान में चल रहे केंद्र के पुनर्निर्माण की तैयारी चल रही है. इसी आधार पर मनपा द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव फिलहाल ठंडे बस्ते में है।
वर्तमान में कार्य कर रहे वसई नवघर स्थित केंद्र में भारी दुर्व्यवस्था है। ठेका पद्धति पर चलाने के लिए दिए गए केंद्र पर मनमानी चल रही है। इस स्थान पर कुत्तों को पकड़ने के लिए मात्र एक वाहन है.गाड़ी पर काम करने वाले कर्मचारियों की भी कमी है। केंद्र में मात्र एक चिकित्सक है, जिसका समय भी निर्धारित नहीं रहता। जगह- जगह गंदगी का साम्राज्य है। कुत्तों को रखने वाले पिंजरे भी जर्जर अवस्था में हैं। नियमित साफ- सफाई भी नहीं होती।
जन सेवा के प्रति महानगर पालिका कितनी जागृत है इसका अनुभव इस पत्रकार को प्रत्यक्ष भी हुआ। उसकी गली जो वसंत नगरी में पुलिस उपायुक्त कार्यालय के पास है , एक कुत्ती द्वारा कई लोगों की घटना को रोकने के लिए महानगर पालिका के कई 
अधिकारीयों को जागृत करने के बाद भी केवल ताल मटोल के स्वर सुनाई देने पर हुए। वसंत नगरी वसई पूर्व में रीगल काम्पलेक्स के पास रोजाना एक कुत्ती के काटने की 2 -3 घटनाए हो रही है पर हर तरफ शिकायत करने पर भी कोई कार्यवाही नहीं हो रहीं है।