• जिला परिषद सीईओ का दावा गली संकरी होने से नहीं पहुंच सकी एंबुलेंस

अस्पताल में बेड नहीं मिलने से शुक्रवार को एक कोरोना मरीज की घर पर मौत हो गई। मामला तब सामने आया जब मृतक के शव को हाथ ठेले पर शमशान घाट ले जाया जा रहा था। घटना पुणे के खानापुर गांव का है। ये पहला मामला है जब किसी कोरोना मरीज की घर पर मौत हुई है। गांव के सरपांच निलेश जावलकर एजेंसी का बताया कि मृतक को किसी भी अस्पताल में बेड नहीं मिला। घर पर जब उसकी हालत बिगड़ी तो हमने एंबुलेंस को फोन किया। लेकिन वहां एंबुलेंस नहीं होने के बारे में बताया गया। वहीं जिला परिषद के सीईओ आयुष प्रसाद का दावा है कि मरीज को सांस लेने में तकलीफ थी, उसे एंबुलेंस से नवाले अस्पताल ले जाया गया था। मरीज की कोरोना रिपोर्ट पेंडिंग थी। उसने अस्पताल में भर्ती होने से मना कर दिया और बिना बताया घर चला गया था। प्रसाद के अनुसार मरीज का घर संकरे इलाके में होने से वहां तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाई। उसका अंतिम संस्कार घर से 500-700 मीटर की दूरी पर बने शमशान घाट में करा दिया गया। कोरोना मरीज के शव को कंधे पर ले जाने की इजाजत नहीं होने से उसे हाथ ठेले से ले जाया गया। इस घटना की जांच की जा रही है।