नई दिल्ली । नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी और विधानसभा में भाजपा के 7 विधायकों ने आरोप लगाया कि दिल्ली विधानसभा के केवल दो दिन के सत्र में दिल्ली से संबंधित किसी मुद्दे पर चर्चा नहीं कराई गई और केजरीवाल सरकार ने विधानसभा का उपयोग अन्य राज्यों में अपनी पार्टी के विस्तार के लिए एक मंच के तौर पर किया है। उन्होंने भाजपा विधायकों को विधासनभा अध्यक्ष द्वारा दिल्ली की जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने की अनुमति न देने और नियमानुसार सदन न चलाने पर कड़ी आपत्ति दर्ज करते हुए कहा कि वे इस मामले में राष्ट्रपति और लोकसभा अध्यक्ष के सामने भी रखेंगे और अगर जरुरत पड़ी तो अदालत का दरवाजा भी खटखटाएंगे। 
प्रदेश भाजपा कार्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में रामवीर सिंह बिधूड़ी और विधायक सर्वश्री  ओ. पी. शर्मा,  अभय वर्मा, अनिल वाजपेयी और जितेन्द्र महाजन ने कहा कि दो दिन के सत्र के विधानसभा में दिल्ली के मुद्दों पर नहीं बल्कि उन मुद्दों पर चर्चा हुई जो कि उसके अधिकार क्षेत्र में ही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सदस्यों ने स्वास्थ्य, कोविड, अस्पताल, परिवहन, डी.टी.सी. बस घोटाला, शिक्षा, वर्षों से एक भी स्कूल और कालेज न खोलने शिक्षकों की कमी, पीने के पानी, बरसात में डूबी दिल्ली, वरिष्ठ नागरिकों को पेंशन न मिलने और राशन प्रणाली जैसे जनहित के मुद्दों पर चर्चा के लिए नोटिस दिए, लेकिन अध्यक्ष द्वारा इन सभी को अस्वीकार कर दिया गया। उन्होंने कहा कि सदन में कृषि कानून, पदमश्री, पदम विभूषण और भारत रत्न देने के मुद्दे उठाए गए जो विधानसभा के अधिकार क्षेत्र से बाहर के हैं। इस मौके पर प्रदेश भाजपा मीडिया सह-प्रमुख अनिल वर्मा उपस्थित थे।  
श्री बिधूड़ी ने कहा कि भाजपा विधायक दल ने दो दिन के सत्र को 10 दिन का करने की मांग की थी, लेकिन इसे भी नहीं माना गया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और अध्यक्ष लोकतंत्र की स्थापित मर्यादाओं का पालन नहीं करते और बार-बार संविधान की अवहेलना करते हैं।   
श्री बिधूड़ी सहित सभी भाजपा विधायकों ने आरोप लगाया है कि  केजरीवाल सरकार लोकतंत्र के तमाम नियमों और परंपराओं को कुचल रही है। दो दिन के मानसून अधिवेशन में जनता से जुड़ा कोई मुद्दा उठाने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने चेतावनी दी कि विपक्ष की आवाज कुचलने के इन प्रयासों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भाजपा विधायक इस मामले में राष्ट्रपति और लोकसभा अध्यक्ष के पास जाकर इन अलोकतांत्रिक कोशिशों की शिकायत करेंगे। श्री बिधूड़ी ने कहा कि देश में किसी भी प्रदेश की सरकार इस तरह निरंकुश होकर काम नहीं करती और विपक्ष को नजरअंदाज नहीं करती जिस तरह आम आदमी पार्टी सरकार कर रही है। 
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रत्येक विधानसभा का सत्र शुरू होने से पहले कार्य मंत्रणा समिति (बिजनेस एडवाइजरी कमेटी) की बैठक होती है जिसमें विपक्ष भी शामिल रहता है। इसी बैठक में तय किया जाता है कि विधानसभा में किन मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। दिल्ली सरकार इस परंपरा का लगातार उल्लंघन कर रही है। यही नहीं, विपक्ष द्वारा नियमानुसार भेजे गए प्रस्तावों पर भी चर्चा नहीं कराई जाती। विपक्ष ने दिल्ली की समस्याओं के बारे में चर्चा के लिए प्रस्ताव भेजे थे, लेकिन उनमें से किसी पर भी चर्चा नहीं कराई गई। 
श्री बिधूड़ी ने कहा कि सरकार ने इस बार दो विधेयक पेश किए लेकिन हैरानी की बात है कि न तो इन विधेयकों की प्रति सदस्यों को भेजी और न ही एजेंडा में ही इसकी सूचना दी गई। यह तानाशाही रवैया तमाम नियमों को ताक पर रखकर अपनाया जा रहा है। यही नहीं, इस बार विधानसभा में विपक्ष के लिए सारे दिन में 20 मिनट का समय तय कर दिया गया। 
भाजपा विधायकों ने कहा कि वे जनहित के मुद्दों पर चर्चा चाहते थे। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान स्वास्थ्य ढांचा क्यों चरमरा गया? दूसरी लहर के दौरान जनता पर परेशानियों का पहाड़ टूट पड़ा। न अस्पतालों में बेड मिले और न ही दवाइयां। दिल्ली का डेथ रेट भी देश में सबसे ज्यादा रहा है। यह चर्चा इसलिए जरूरी थी ताकि तीसरी लहर के लिए तैयारी की जा सके और गलतियों से सबक सीखा जा सके। इसके अलावा दिल्ली में पानी की कमी का मुद्दा भी बहुत महत्वपूर्ण है। आज आधी दिल्ली प्यासी है और जहां पानी आ भी रहा है, वह इतना गंदा है कि लोग उसे पीकर गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। राजधानी में पीडब्ल्यूडी और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग नालों की सफाई नहीं कर पाया जिससे हर बारिश के दौरान दिल्ली डूब रही है। 
भाजपा विधायकों ने कहा कि दिल्ली की परिवहन व्यवस्था में भी विस्फोटक स्थिति पैदा हो चुकी है क्योंकि डीटीसी के बेड़े में सात सालों में एक भी बस नहीं जुड़ पाई, सारी बसें अपनी उम्र पूरी कर चुकी हैं और अब दिल्ली सरकार के बस खरीद सौदे में करोड़ों का घोटाला सामने आ रहा है। दिल्ली के स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, दिल्ली के बुजुर्गों को पेंशन नहीं मिल रही, सरकार ने किसानों से किए वादों में से कोई पूरा नहीं किया और बिजली के भारी-भरकम बिल आ रहे हैं। सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह इन सभी विषयों पर जनता को जवाब दें लेकिन सरकार द्वारा  विपक्ष का ही गला घोंटा जा रहा है। आम आदमी पार्टी सरकार विधानसभा का उपयोग सिर्फ राजनीतिक उद्देश्यों के लिए कर रही है जहां केंद्र सरकार की निंदा के अलावा और कुछ नहीं किया जाता।