Sunday, December 14, 2025
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भारत-नेपाल सीमा पर नशीली दवाओं का तस्कर गिरफ्तार, 950 कैप्सूल बरामद।*

रिपोर्ट:हेमंत कुमार दुबे।

महराजगंज: भारत-नेपाल सीमा पर नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में सोमवार देर शाम एक बड़ी सफलता मिली। सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और पुलिस की संयुक्त टीम ने एक तस्कर को गिरफ्तार कर उसके पास से 950 प्रासिको स्पॉस कैप्सूल और एक होंडा साइन बाइक बरामद की है।यह गिरफ्तारी अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब 500 मीटर पहले एसएसबी रोड पर की गई। गिरफ्तार किए गए तस्कर की पहचान ठूठीबारी थाना क्षेत्र के निपनिया गांव निवासी बबलू कुमार मद्धेशिया के रूप में हुई है।
मिली जानकारी के अनुसार, बरामद की गई इन नशीली दवाओं को अवैध रूप से नेपाल भेजा जाना था।
इस संयुक्त अभियान का नेतृत्व सहायक कमांडेंट दालसानिया हरसुखलाल रूपा भाई और बीओपी इंचार्ज शिवपूजन ने किया। टीम में एसआई बृजेश कुमार पांडेय, कांस्टेबल बलवंत यादव, अनूप यादव, और मृत्युंजय तिवारी भी शामिल थे।प्रभारी कोतवाल महेंद्र मिश्रा ने बताया कि आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सीमा पर नशा तस्करी रोकने के लिए गश्त और निगरानी बढ़ा दी गई है।

क्यों फटते हैं टमाटर? : इन कारणों से होता है किसानों को नुकसान, आसान उपाय से बचाएं फसल

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सांकेतिक तस्वीर – फोटो : सोशल मीडिया

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टमाटर की फसल में फल फटने की समस्या किसानों को बड़ा नुकसान करती है। इस समस्या के कारण किसान अपनी मेहनत और निवेश के बावजूद आर्थिक नुकसान झेलते हैं। जब टमाटर का फल फट जाता है, तो उसका बाजार मूल्य न के बराबर रह जाता है और किसान को कम भाव में फसल बेचनी पड़ती है। ऐसे में फसल की गुणवत्ता और उपज दोनों प्रभावित होती हैं।

दो कारणों से फटता है टमाटर
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, टमाटर का फल फटने के मुख्य दो कारण हैं। पहला, असंतुलित या अनियमित सिंचाई। जब पौधों को पानी अचानक अधिक मिलता है या लंबे समय तक नहीं मिलता, तो फलों में जल का दबाव बढ़ जाता है, जिससे फल फट जाते हैं। दूसरा प्रमुख कारण बोरोन की कमी है। बोरोन एक आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व है, जो पौधों में कोशिकाओं के विकास और फल की मजबूती के लिए जरूरी है। इसकी कमी से फल कमजोर और आसानी से फटने योग्य हो जाते हैं।

समस्या से ऐसे पाएं समाधान
इस समस्या के समाधान के लिए किसान कुछ आसान और प्रभावी उपाय अपना सकते हैं। सबसे पहले, फसल में सिंचाई को नियमित रूप से करें और अचानक अधिक या कम पानी देने से बचें। इसके साथ ही, पौधों को आवश्यक पोषक तत्व देने के लिए बोरोन और कैल्शियम नाइट्रेट का छिड़काव करें। बुआई से पहले 10 किलोग्राम बोरेक्स पाउडर प्रति हेक्टेयर भुरकाव करने से पौधों में बेसल डोज के रूप में पोषण सुनिश्चित होता है।

फलों की बढ़ती है मजबूती
खड़ी फसल में छिड़काव करते समय प्रति लीटर पानी में 2 ग्राम बोरोन और 1 ग्राम कैल्शियम नाइट्रेट मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। यह उपाय फलों की मजबूती बढ़ाने और फल फटने की समस्या को कम करने में कारगर साबित होते हैं। नियमित देखभाल और पोषण देने से न केवल फसल सुरक्षित रहती है, बल्कि किसान को बेहतर उत्पादन और बाजार मूल्य भी प्राप्त होता है।

इस प्रकार, सिंचाई की नियमितता और पोषक तत्वों का सही प्रयोग टमाटर की फसल में फल फटने की समस्या का सरल और प्रभावी समाधान प्रदान करता है। किसानों को चाहिए कि वे इन आसान उपायों को अपनाकर अपनी फसल की सुरक्षा सुनिश्चित करें और आर्थिक नुकसान से बचें।

महिला वर्ल्ड कप की हीरो दीप्ति शर्मा अब UP Police के पॉडकास्ट में, बताई DSP वाली कड़क छवि की कहानी

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भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार ऑलराउंडर और महिला वर्ल्ड कप में मैच ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब जीत चुकीं दीप्ति शर्मा एक बार फिर चर्चा में हैं। मैदान पर अपने शानदार प्रदर्शन से विपक्षी टीमों को चौंकाने वाली दीप्ति अब क्रिकेट के बाहर अपने व्यक्तित्व को लेकर सुर्खियां बटोर रही हैं। इस बार वजह है उत्तर प्रदेश पुलिस का खास पॉडकास्ट, जिसमें उन्होंने अपनी जिंदगी से जुड़े कई अनसुने पहलुओं पर खुलकर बात की है।

दीप्ति शर्मा ने कहा ये

दीप्ति शर्मा, जो यूपी पुलिस में डीएसपी के पद पर तैनात हैं, ने पॉडकास्ट में स्वीकार किया कि उनकी पुलिस अधिकारी वाली छवि से कभी-कभी टीम की साथी खिलाड़ी भी घबरा जाती हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए बताया कि मैदान के बाहर उनकी कड़क और अनुशासित पहचान बनी हुई है, लेकिन यह अनुशासन ही उन्हें क्रिकेट में मजबूती देता है।

दीप्ति का मानना है कि पुलिस ट्रेनिंग और जिम्मेदारी ने उनके व्यक्तित्व को और निखारा है। यही कारण है कि दबाव वाले मुकाबलों में भी वह शांत और आत्मविश्वास से भरी नजर आती हैं। महिला वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर उनका प्रदर्शन इस बात का सबूत है कि अनुशासन और मेहनत मिलकर किसी खिलाड़ी को कितनी ऊंचाई तक पहुंचा सकते हैं।

दीप्ति के भाई सुमित शर्मा ने भी इस पॉडकास्ट में उनके व्यक्तित्व पर रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि परिवार में शुरू से ही अनुशासन और संस्कारों को प्राथमिकता दी गई। दीप्ति बचपन से ही जिम्मेदार, गंभीर और अपने काम के प्रति बेहद समर्पित रही हैं। डीएसपी बनने के बाद उनके आत्मविश्वास में और इजाफा हुआ है।

इस पॉडकास्ट में हुई बातचीत

यह बातचीत उत्तर प्रदेश पुलिस के “Beyond the Badge” नामक पॉडकास्ट का हिस्सा है, जिसे डीजीपी प्रशांत कुमार की पहल पर शुरू किया गया है। इस पॉडकास्ट का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों के अनुभव, चुनौतियों और उनकी दूसरी पहचान को सामने लाना है, ताकि खासकर युवा अफसरों और युवाओं को प्रेरणा मिल सके।

यूपी पुलिस की इस सीरीज में उन अधिकारियों को शामिल किया जा रहा है, जिन्होंने वर्दी के बाहर भी अपनी अलग पहचान बनाई है। दीप्ति शर्मा का एपिसोड इसीलिए खास माना जा रहा है, क्योंकि वह खेल और सेवा दोनों क्षेत्रों में युवाओं के लिए रोल मॉडल हैं।

पॉडकास्ट के आने वाले टीजर में दीप्ति के मजेदार और प्रेरणादायी किस्सों की झलक देखने को मिलेगी। आगरा समेत पूरे उत्तर प्रदेश के खेल प्रेमियों को अब इस एपिसोड का बेसब्री से इंतजार है, जिसमें दीप्ति शर्मा की जिंदगी के वे पहलू सामने आएंगे, जो क्रिकेट मैदान से बाहर कम ही दिखाई देते हैं।

Rice Imports: 2027 से भारत-पाकिस्तान से चावल आयात पर EU लागू करेगा सख्त नियम, कितना पड़ेगा असर?

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बासमती चावल

बासमती चावल
– फोटो : ani

विस्तार


यूरोपीय संघ (EU) भारत, पाकिस्तान और अन्य एशियाई देशों से चावल आयात पर सख्त प्रतिबंध लागू करने जा रहा है। परिषद और यूरोपीय संसद ने चावल आयात के लिए ‘स्वचालित सेफगार्ड मैकेनिज्म’ लागू करने पर सहमति जताई है, जिसके तहत निर्धारित सीमा से अधिक आयात होने पर अतिरिक्त शुल्क स्वतः लागू हो जाएगा। यह नियम 1 जनवरी 2027 से लागू किया जाएगा।यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर तेजी से प्रगति हो रही है और 23 में से 11 अध्यायों पर सहमति बन चुकी है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि EU एक तरफ बाजार खोलने की बात कर रहा है, जबकि दूसरी तरफ उसी उत्पाद पर सुरक्षा दीवार खड़ी कर रहा है।

कैसे लागू होगा नया नियंत्रण?
EU परिषद के प्रस्ताव के अनुसार यदि भारत या अन्य एशियाई देशों से चावल आयात ऐतिहासिक औसत स्तर से ऊपर चला जाता है, तो उस पर MFN शुल्क लग जाएगा। इस फैसले के बाद आयातित चावल प्रीमियम शुल्क के दायरे में आएगा और EU बाजार में स्थानीय उत्पादकों को लाभ मिलेगा। कानूनी अनुमोदन के बाद यह प्रावधान आधिकारिक रूप से लागू होगा।

टैरिफ सिस्टम ऐसे बदलेगा
फेडरेशन ऑफ यूरोपियन राइस मिलर्स (FERM) ने EU को शुल्क संरचना बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है—

श्रेणीवर्तमान शुल्क प्रस्तावित शुल्क
मिल्ड चावल200 यूरो/टन से कम416 यूरो/टन
हस्क्ड (ब्राउन) चावललगभग 65 यूरो/टन264 यूरो/टन

FERM का दावा है कि मौजूदा शुल्क “पुराने बाजार ढांचे” पर आधारित है और आधुनिक व्यापार वास्तविकता को नहीं दर्शाता।

चावल आयात चार गुना बढ़ा, उत्पादन घटा
EU का तर्क है कि चावल उत्पादन बीते 20 साल में 1.64 मिलियन टन से घटकर 1.47 मिलियन टन रह गया है।  लेकिन आयात 6 लाख टन से बढ़कर करीब 2.3 मिलियन टन पहुंच चुका है। विशेष रूप से भारत और पाकिस्तान से आयात पिछले दो दशक में लगभग 5 गुना बढ़ा। जबकि थाईलैंड और वियतनाम का स्तर लगभग वही रहा। कंबोडिया और म्यांमार के ‘शून्य शुल्क लाभ’ को भी EU एक खतरे के रूप में देख रहा है।

भारत-पाकिस्तान पर सीधा असर क्यों?

  • 2004-05 में EU को मिलने वाले चावल का
  • 80-90 प्रतिशत हिस्सा ब्राउन/हस्क्ड राइस होता था

अब यह अनुपात

  • केवल 50 प्रतिशत रह गया है
  • बाकी हिस्सा मिल्ड चावल का है, जो मूल्यवर्धित उत्पाद माना जाता है।
  • मिल्ड राइस पर शुल्क बढ़ने से भारतीय-पाकिस्तानी कंपनियों को नुकसान होगा।

भारतीय निर्यातकों की नई चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार पैक्ड चावल निर्यात (जैसे बासमती) पर विशेष टैक्स लग सकता है। EU स्थानीय मिलर्स को खुद ब्रांड बनाने का अवसर देना चाहता है। बड़े निर्यातकों को EU में संयंत्र स्थापित करना पड़ सकता है। पहले ही एक बड़ी भारतीय कंपनी दावत ने नीदरलैंड में प्लांट स्थापित कर दिया है।

यूरोप में नया गठबंधन
आठ यूरोपीय चावल उत्पादक देशों ने नया संगठन EURice बनाया है। यह नीति समन्वय करेगा, टैरिफ का दबाव बढ़ाएगा, EU बाजार में बाहरी देशों की हिस्सेदारी सीमित करेगा। इसकी वार्षिक अध्यक्षता सदस्य देशों में घुमावदार तरीके से रहेगी।

भारत-ईयू FTA में नई बाधा
उद्योग विशेषज्ञों का मत है कि यह कदम FTA वार्ताओं को जटिल बना सकता है। भारत को अब चावल सेक्टर को “संवेदनशील उत्पाद” की सूची से बाहर करवाने और सेफगार्ड तंत्र को सीमित समय या मात्रात्मक प्रावधान तक सीमित कराने के लिए प्रयास करने होंगे। विश्लेषकों का मानना है कि यदि समाधान न निकला तो भारत के प्रीमियम चावल निर्यात को सीधा झटका लगेगा।
 

Rice Imports: 2027 से भारत-पाकिस्तान से चावल आयात पर EU लागू करेगा सख्त नियम, कितना पड़ेगा असर?

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बासमती चावल

बासमती चावल
– फोटो : ani

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यूरोपीय संघ (EU) भारत, पाकिस्तान और अन्य एशियाई देशों से चावल आयात पर सख्त प्रतिबंध लागू करने जा रहा है। परिषद और यूरोपीय संसद ने चावल आयात के लिए ‘स्वचालित सेफगार्ड मैकेनिज्म’ लागू करने पर सहमति जताई है, जिसके तहत निर्धारित सीमा से अधिक आयात होने पर अतिरिक्त शुल्क स्वतः लागू हो जाएगा। यह नियम 1 जनवरी 2027 से लागू किया जाएगा।यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर तेजी से प्रगति हो रही है और 23 में से 11 अध्यायों पर सहमति बन चुकी है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि EU एक तरफ बाजार खोलने की बात कर रहा है, जबकि दूसरी तरफ उसी उत्पाद पर सुरक्षा दीवार खड़ी कर रहा है।

कैसे लागू होगा नया नियंत्रण?
EU परिषद के प्रस्ताव के अनुसार यदि भारत या अन्य एशियाई देशों से चावल आयात ऐतिहासिक औसत स्तर से ऊपर चला जाता है, तो उस पर MFN शुल्क लग जाएगा। इस फैसले के बाद आयातित चावल प्रीमियम शुल्क के दायरे में आएगा और EU बाजार में स्थानीय उत्पादकों को लाभ मिलेगा। कानूनी अनुमोदन के बाद यह प्रावधान आधिकारिक रूप से लागू होगा।

टैरिफ सिस्टम ऐसे बदलेगा
फेडरेशन ऑफ यूरोपियन राइस मिलर्स (FERM) ने EU को शुल्क संरचना बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है—

श्रेणीवर्तमान शुल्क प्रस्तावित शुल्क
मिल्ड चावल200 यूरो/टन से कम416 यूरो/टन
हस्क्ड (ब्राउन) चावललगभग 65 यूरो/टन264 यूरो/टन

FERM का दावा है कि मौजूदा शुल्क “पुराने बाजार ढांचे” पर आधारित है और आधुनिक व्यापार वास्तविकता को नहीं दर्शाता।

चावल आयात चार गुना बढ़ा, उत्पादन घटा
EU का तर्क है कि चावल उत्पादन बीते 20 साल में 1.64 मिलियन टन से घटकर 1.47 मिलियन टन रह गया है।  लेकिन आयात 6 लाख टन से बढ़कर करीब 2.3 मिलियन टन पहुंच चुका है। विशेष रूप से भारत और पाकिस्तान से आयात पिछले दो दशक में लगभग 5 गुना बढ़ा। जबकि थाईलैंड और वियतनाम का स्तर लगभग वही रहा। कंबोडिया और म्यांमार के ‘शून्य शुल्क लाभ’ को भी EU एक खतरे के रूप में देख रहा है।

भारत-पाकिस्तान पर सीधा असर क्यों?

  • 2004-05 में EU को मिलने वाले चावल का
  • 80-90 प्रतिशत हिस्सा ब्राउन/हस्क्ड राइस होता था

अब यह अनुपात

  • केवल 50 प्रतिशत रह गया है
  • बाकी हिस्सा मिल्ड चावल का है, जो मूल्यवर्धित उत्पाद माना जाता है।
  • मिल्ड राइस पर शुल्क बढ़ने से भारतीय-पाकिस्तानी कंपनियों को नुकसान होगा।

भारतीय निर्यातकों की नई चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार पैक्ड चावल निर्यात (जैसे बासमती) पर विशेष टैक्स लग सकता है। EU स्थानीय मिलर्स को खुद ब्रांड बनाने का अवसर देना चाहता है। बड़े निर्यातकों को EU में संयंत्र स्थापित करना पड़ सकता है। पहले ही एक बड़ी भारतीय कंपनी दावत ने नीदरलैंड में प्लांट स्थापित कर दिया है।

यूरोप में नया गठबंधन
आठ यूरोपीय चावल उत्पादक देशों ने नया संगठन EURice बनाया है। यह नीति समन्वय करेगा, टैरिफ का दबाव बढ़ाएगा, EU बाजार में बाहरी देशों की हिस्सेदारी सीमित करेगा। इसकी वार्षिक अध्यक्षता सदस्य देशों में घुमावदार तरीके से रहेगी।

भारत-ईयू FTA में नई बाधा
उद्योग विशेषज्ञों का मत है कि यह कदम FTA वार्ताओं को जटिल बना सकता है। भारत को अब चावल सेक्टर को “संवेदनशील उत्पाद” की सूची से बाहर करवाने और सेफगार्ड तंत्र को सीमित समय या मात्रात्मक प्रावधान तक सीमित कराने के लिए प्रयास करने होंगे। विश्लेषकों का मानना है कि यदि समाधान न निकला तो भारत के प्रीमियम चावल निर्यात को सीधा झटका लगेगा।
 

Rice Imports: 2027 से भारत-पाकिस्तान से चावल आयात पर EU लागू करेगा सख्त नियम, कितना पड़ेगा असर?

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यूरोपीय संघ (EU) भारत, पाकिस्तान और अन्य एशियाई देशों से चावल आयात पर सख्त प्रतिबंध लागू करने जा रहा है। परिषद और यूरोपीय संसद ने चावल आयात के लिए ‘स्वचालित सेफगार्ड मैकेनिज्म’ लागू करने पर सहमति जताई है, जिसके तहत निर्धारित सीमा से अधिक आयात होने पर अतिरिक्त शुल्क स्वतः लागू हो जाएगा। यह नियम 1 जनवरी 2027 से लागू किया जाएगा।यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर तेजी से प्रगति हो रही है और 23 में से 11 अध्यायों पर सहमति बन चुकी है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि EU एक तरफ बाजार खोलने की बात कर रहा है, जबकि दूसरी तरफ उसी उत्पाद पर सुरक्षा दीवार खड़ी कर रहा है।

कैसे लागू होगा नया नियंत्रण?
EU परिषद के प्रस्ताव के अनुसार यदि भारत या अन्य एशियाई देशों से चावल आयात ऐतिहासिक औसत स्तर से ऊपर चला जाता है, तो उस पर MFN शुल्क लग जाएगा। इस फैसले के बाद आयातित चावल प्रीमियम शुल्क के दायरे में आएगा और EU बाजार में स्थानीय उत्पादकों को लाभ मिलेगा। कानूनी अनुमोदन के बाद यह प्रावधान आधिकारिक रूप से लागू होगा।

टैरिफ सिस्टम ऐसे बदलेगा
फेडरेशन ऑफ यूरोपियन राइस मिलर्स (FERM) ने EU को शुल्क संरचना बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है—

श्रेणीवर्तमान शुल्क प्रस्तावित शुल्क
मिल्ड चावल200 यूरो/टन से कम416 यूरो/टन
हस्क्ड (ब्राउन) चावललगभग 65 यूरो/टन264 यूरो/टन

FERM का दावा है कि मौजूदा शुल्क “पुराने बाजार ढांचे” पर आधारित है और आधुनिक व्यापार वास्तविकता को नहीं दर्शाता।

चावल आयात चार गुना बढ़ा, उत्पादन घटा
EU का तर्क है कि चावल उत्पादन बीते 20 साल में 1.64 मिलियन टन से घटकर 1.47 मिलियन टन रह गया है।  लेकिन आयात 6 लाख टन से बढ़कर करीब 2.3 मिलियन टन पहुंच चुका है। विशेष रूप से भारत और पाकिस्तान से आयात पिछले दो दशक में लगभग 5 गुना बढ़ा। जबकि थाईलैंड और वियतनाम का स्तर लगभग वही रहा। कंबोडिया और म्यांमार के ‘शून्य शुल्क लाभ’ को भी EU एक खतरे के रूप में देख रहा है।

भारत-पाकिस्तान पर सीधा असर क्यों?

  • 2004-05 में EU को मिलने वाले चावल का
  • 80-90 प्रतिशत हिस्सा ब्राउन/हस्क्ड राइस होता था

अब यह अनुपात

  • केवल 50 प्रतिशत रह गया है
  • बाकी हिस्सा मिल्ड चावल का है, जो मूल्यवर्धित उत्पाद माना जाता है।
  • मिल्ड राइस पर शुल्क बढ़ने से भारतीय-पाकिस्तानी कंपनियों को नुकसान होगा।

भारतीय निर्यातकों की नई चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार पैक्ड चावल निर्यात (जैसे बासमती) पर विशेष टैक्स लग सकता है। EU स्थानीय मिलर्स को खुद ब्रांड बनाने का अवसर देना चाहता है। बड़े निर्यातकों को EU में संयंत्र स्थापित करना पड़ सकता है। पहले ही एक बड़ी भारतीय कंपनी दावत ने नीदरलैंड में प्लांट स्थापित कर दिया है।

यूरोप में नया गठबंधन
आठ यूरोपीय चावल उत्पादक देशों ने नया संगठन EURice बनाया है। यह नीति समन्वय करेगा, टैरिफ का दबाव बढ़ाएगा, EU बाजार में बाहरी देशों की हिस्सेदारी सीमित करेगा। इसकी वार्षिक अध्यक्षता सदस्य देशों में घुमावदार तरीके से रहेगी।

भारत-ईयू FTA में नई बाधा
उद्योग विशेषज्ञों का मत है कि यह कदम FTA वार्ताओं को जटिल बना सकता है। भारत को अब चावल सेक्टर को “संवेदनशील उत्पाद” की सूची से बाहर करवाने और सेफगार्ड तंत्र को सीमित समय या मात्रात्मक प्रावधान तक सीमित कराने के लिए प्रयास करने होंगे। विश्लेषकों का मानना है कि यदि समाधान न निकला तो भारत के प्रीमियम चावल निर्यात को सीधा झटका लगेगा।
 

Rice Imports: 2027 से भारत-पाकिस्तान से चावल आयात पर EU लागू करेगा सख्त नियम, कितना पड़ेगा असर?

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यूरोपीय संघ (EU) भारत, पाकिस्तान और अन्य एशियाई देशों से चावल आयात पर सख्त प्रतिबंध लागू करने जा रहा है। परिषद और यूरोपीय संसद ने चावल आयात के लिए ‘स्वचालित सेफगार्ड मैकेनिज्म’ लागू करने पर सहमति जताई है, जिसके तहत निर्धारित सीमा से अधिक आयात होने पर अतिरिक्त शुल्क स्वतः लागू हो जाएगा। यह नियम 1 जनवरी 2027 से लागू किया जाएगा।यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर तेजी से प्रगति हो रही है और 23 में से 11 अध्यायों पर सहमति बन चुकी है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि EU एक तरफ बाजार खोलने की बात कर रहा है, जबकि दूसरी तरफ उसी उत्पाद पर सुरक्षा दीवार खड़ी कर रहा है।

कैसे लागू होगा नया नियंत्रण?
EU परिषद के प्रस्ताव के अनुसार यदि भारत या अन्य एशियाई देशों से चावल आयात ऐतिहासिक औसत स्तर से ऊपर चला जाता है, तो उस पर MFN शुल्क लग जाएगा। इस फैसले के बाद आयातित चावल प्रीमियम शुल्क के दायरे में आएगा और EU बाजार में स्थानीय उत्पादकों को लाभ मिलेगा। कानूनी अनुमोदन के बाद यह प्रावधान आधिकारिक रूप से लागू होगा।

टैरिफ सिस्टम ऐसे बदलेगा
फेडरेशन ऑफ यूरोपियन राइस मिलर्स (FERM) ने EU को शुल्क संरचना बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है—

श्रेणीवर्तमान शुल्क प्रस्तावित शुल्क
मिल्ड चावल200 यूरो/टन से कम416 यूरो/टन
हस्क्ड (ब्राउन) चावललगभग 65 यूरो/टन264 यूरो/टन

FERM का दावा है कि मौजूदा शुल्क “पुराने बाजार ढांचे” पर आधारित है और आधुनिक व्यापार वास्तविकता को नहीं दर्शाता।

चावल आयात चार गुना बढ़ा, उत्पादन घटा
EU का तर्क है कि चावल उत्पादन बीते 20 साल में 1.64 मिलियन टन से घटकर 1.47 मिलियन टन रह गया है।  लेकिन आयात 6 लाख टन से बढ़कर करीब 2.3 मिलियन टन पहुंच चुका है। विशेष रूप से भारत और पाकिस्तान से आयात पिछले दो दशक में लगभग 5 गुना बढ़ा। जबकि थाईलैंड और वियतनाम का स्तर लगभग वही रहा। कंबोडिया और म्यांमार के ‘शून्य शुल्क लाभ’ को भी EU एक खतरे के रूप में देख रहा है।

भारत-पाकिस्तान पर सीधा असर क्यों?

  • 2004-05 में EU को मिलने वाले चावल का
  • 80-90 प्रतिशत हिस्सा ब्राउन/हस्क्ड राइस होता था

अब यह अनुपात

  • केवल 50 प्रतिशत रह गया है
  • बाकी हिस्सा मिल्ड चावल का है, जो मूल्यवर्धित उत्पाद माना जाता है।
  • मिल्ड राइस पर शुल्क बढ़ने से भारतीय-पाकिस्तानी कंपनियों को नुकसान होगा।

भारतीय निर्यातकों की नई चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार पैक्ड चावल निर्यात (जैसे बासमती) पर विशेष टैक्स लग सकता है। EU स्थानीय मिलर्स को खुद ब्रांड बनाने का अवसर देना चाहता है। बड़े निर्यातकों को EU में संयंत्र स्थापित करना पड़ सकता है। पहले ही एक बड़ी भारतीय कंपनी दावत ने नीदरलैंड में प्लांट स्थापित कर दिया है।

यूरोप में नया गठबंधन
आठ यूरोपीय चावल उत्पादक देशों ने नया संगठन EURice बनाया है। यह नीति समन्वय करेगा, टैरिफ का दबाव बढ़ाएगा, EU बाजार में बाहरी देशों की हिस्सेदारी सीमित करेगा। इसकी वार्षिक अध्यक्षता सदस्य देशों में घुमावदार तरीके से रहेगी।

भारत-ईयू FTA में नई बाधा
उद्योग विशेषज्ञों का मत है कि यह कदम FTA वार्ताओं को जटिल बना सकता है। भारत को अब चावल सेक्टर को “संवेदनशील उत्पाद” की सूची से बाहर करवाने और सेफगार्ड तंत्र को सीमित समय या मात्रात्मक प्रावधान तक सीमित कराने के लिए प्रयास करने होंगे। विश्लेषकों का मानना है कि यदि समाधान न निकला तो भारत के प्रीमियम चावल निर्यात को सीधा झटका लगेगा।
 

यूपी पुलिस–मेटा की साझेदारी बनी जीवन रक्षक, इटावा में सोशल मीडिया अलर्ट से छात्र की जान बची

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उत्तर प्रदेश पुलिस ने तकनीक को मानवता से जोड़ते हुए एक बार फिर साबित कर दिया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन रक्षक भी बन सकते हैं। मेटा कंपनी के साथ स्थापित समन्वय प्रणाली के जरिए इटावा में एक 20 वर्षीय छात्र की जान समय रहते बचा ली गई।

ये है मामला 

मामला तब सामने आया जब जसवंतनगर क्षेत्र के रहने वाले बीएससी छात्र ने इंस्टाग्राम पर एक चिंताजनक स्टोरी साझा की। तस्वीर में रस्सी और भावुक संदेश दिखाई देने के बाद मेटा के सेफ्टी सिस्टम ने इसे आत्महत्या से जुड़ा संभावित खतरा मानते हुए तुरंत अलर्ट जारी किया। यह सूचना सीधे पुलिस महानिदेशक मुख्यालय स्थित सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेंटर तक पहुंची।

रात 10:16 बजे मिले इस अलर्ट को गंभीरता से लेते हुए मुख्यालय से इटावा पुलिस को जरूरी जानकारी—मोबाइल नंबर और संभावित लोकेशन—तत्काल साझा की गई। यूपी पुलिस की यह डिजिटल-इमरजेंसी चेन बिना किसी देरी के सक्रिय हुई। थानाध्यक्ष जसवंतनगर कमल भाटी अपनी टीम के साथ कुछ ही मिनटों में बताए गए पते पर पहुंचे।

घर पर युवक न मिलने पर पुलिस ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। मेटा से मिले संकेतों के आधार पर युवक को जंगल की ओर जाते हुए ट्रेस किया गया, जहां वह आत्मघाती कदम उठाने की स्थिति में था। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बातचीत की, भरोसा दिलाया और सुरक्षित वापस ले आई।

बातचीत में सामने आया कि निजी रिश्ते टूटने के बाद युवक मानसिक दबाव में था। पुलिस ने न सिर्फ स्थिति संभाली, बल्कि संवेदनशील काउंसलिंग कर उसे और उसके परिवार को मानसिक सहयोग भी दिया।

अब तक बचाई गई इतनी जानें

पुलिस मीडिया सेल के अनुसार, वर्ष 2022 से मेटा और उत्तर प्रदेश पुलिस के बीच बनी यह समन्वय व्यवस्था लगातार कारगर साबित हो रही है। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर सामने आने वाले आत्मघाती संकेतों की सूचना मेटा द्वारा पुलिस को दी जाती है। इसी तकनीकी साझेदारी के चलते जनवरी 2023 से दिसंबर 2025 तक यूपी पुलिस 1700 से अधिक लोगों की जान बचा चुकी है।

यह घटना बताती है कि जब तकनीक, सतर्कता और संवेदनशील पुलिसिंग एक साथ काम करें, तो समय से पहले बुझती जिंदगी को फिर से रोशनी मिल सकती है।

Prayagraj: वर्दी पर दबाव की कोशिश, चौराहे पर पुलिसकर्मियों से बदसलूकी का मामला

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प्रयागराज शुक्रवार देर रात शहर के व्यस्त चंद्रलोक चौराहे पर अचानक हालात उस वक्त बिगड़ गए, जब दो कारों की हल्की टक्कर ने बड़ा बवाल खड़ा कर दिया। मामूली सड़क हादसा देखते ही देखते ऐसा विवाद बना कि पुलिस को बीच-बचाव के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा, लेकिन स्थिति संभलने के बजाय और उलझती चली गई।

ये है मामला

घटना रात करीब 11 बजे की बताई जा रही है। कार टकराने के बाद दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हुई, जो कुछ ही देर में धक्का-मुक्की और हंगामे में बदल गई। मौके पर डायल 112 के जरिए पहुंचे पुलिसकर्मियों ने विवाद शांत कराने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि एक पक्ष ने पुलिस की बात मानने से इनकार कर दिया और अभद्रता शुरू कर दी।

इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। करीब डेढ़ मिनट के इस वीडियो में पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की होती दिखाई दे रही है। एक पुलिसकर्मी का कॉलर पकड़े जाने और दूसरे के उसे छुड़ाने के दृश्य भी सामने आए हैं। वीडियो में एक व्यक्ति पुलिस को धमकाते हुए यह कहते सुना जा सकता है कि “अभी मंत्री जी तुम्हारी खबर लेंगे”, वहीं दूसरी ओर किसी के खून निकलने और चेन छिनने की बात कही जा रही है, जिसे पुलिसकर्मी नकारते हुए दिखाई दे रहे हैं।

हालात की गंभीरता को देखते हुए बहादुरगंज चौकी प्रभारी समेत आसपास के थानों की फोर्स मौके पर पहुंची। कोतवाली, मुट्ठीगंज, खुल्दाबाद, करेली, अतरसुइया सहित कुल छह थानों की पुलिस ने किसी तरह भीड़ को नियंत्रित किया और स्थिति को काबू में लिया।

डीसीपी ने कहा ये

नगर डीसीपी मनीष शांडिल्य के अनुसार, पुलिसकर्मी सिर्फ विवाद को शांत कराने पहुंचे थे, लेकिन वहां मौजूद कुछ लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। दोनों पक्षों को थाने लाकर पूछताछ की जा रही है। एसीपी कोतवाली रवि गुप्ता ने बताया कि पुलिसकर्मियों से अभद्रता की पुष्टि हुई है और जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल वायरल वीडियो और मौके से जुटाए गए तथ्यों के आधार पर पूरे मामले की जांच जारी है।

SSP श्लोक कुमार के प्लान से हिला ‘मिनी जामताड़ा’, साइबर ठगों पर मथुरा पुलिस का बड़ा प्रहार

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मथुरा में साइबर ठगी के खिलाफ जो बड़ी कार्रवाई सामने आई, वह किसी एक दिन का फैसला नहीं थी। यह एसएसपी श्लोक कुमार की उस रणनीतिक सोच का नतीजा थी, जिसमें अपराध को सिर्फ दर्ज करना नहीं, बल्कि उसकी जड़ तक पहुंचकर नेटवर्क को तोड़ना लक्ष्य था। बीते कुछ महीनों से लगातार आ रही शिकायतें, संदिग्ध डिजिटल ट्रांजैक्शन और एक ही पैटर्न पर हो रही ठगी ने पुलिस को संकेत दे दिया था कि मामला बिखरा हुआ नहीं, बल्कि संगठित है।

शुरुआत से किया काम

एसएसपी श्लोक कुमार ने शुरुआती स्तर पर ही साफ कर दिया था कि अलग-अलग आरोपियों को पकड़ने से काम नहीं चलेगा। जरूरत पूरे सिस्टम को एक साथ झटका देने की थी। इसी सोच के तहत साइबर सेल, लोकल इंटेलिजेंस और तकनीकी यूनिट से मिले इनपुट को जोड़कर गोवर्धन क्षेत्र के चार गांवों को फोकस एरिया के तौर पर चिन्हित किया गया। इन गांवों से बार-बार ठगी के कॉल ट्रेस हो रहे थे, लेकिन आरोपी हर बार पहचान से पहले गायब हो जाते थे।

ऑपरेशन से पहले एसएसपी ने फील्ड अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि कार्रवाई दिखावटी नहीं, बल्कि निर्णायक होनी चाहिए। तय समय पर भारी पुलिस बल और पीएसी की मौजूदगी में चारों गांवों की घेराबंदी की गई। प्रवेश और निकास मार्ग बंद कर दिए गए ताकि कोई भी संदिग्ध भाग न सके। करीब दस घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन में 37 लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि कुछ शातिर आरोपी मौके का फायदा उठाकर फरार हो गए।

पूछताछ और डिजिटल जांच में सामने आए तथ्य पुलिस के लिए भी हैरान करने वाले थे। एसएसपी श्लोक कुमार के अनुसार, आरोपी मोबाइल फोन और सिम कार्ड को महज कुछ दिनों तक इस्तेमाल करते थे। ठगी के बाद इन मोबाइलों को तोड़कर या खेतों में जमीन के अंदर दबा दिया जाता था, ताकि कोई तकनीकी सुराग न मिले। पैसों को सीधे बैंक खातों में डालने के बजाय डिजिटल गिफ्ट कार्ड के जरिए घुमाया जाता था, जिससे लेनदेन की कड़ी टूट जाए।

जांच आगे बढ़ने पर यह भी साफ हुआ कि इस नेटवर्क की जड़ें मथुरा तक सीमित नहीं थीं। सिम कार्ड दूसरे राज्यों से मंगवाए जाते थे और वेरिफिकेशन पूरा होने से पहले ही उनका इस्तेमाल कर लिया जाता था। गांवों में अचानक उभरी आलीशान कोठियां, महंगी गाड़ियां और शादियों में बेहिसाब खर्च लंबे समय से पुलिस के रडार पर था, जिसे अब ठगी की कमाई से जोड़ा जा रहा है।

एसएसपी ने कहा ये 

एसएसपी श्लोक कुमार ने दो टूक कहा है कि यह कार्रवाई किसी एक दिन की सफलता मानकर खत्म नहीं की जाएगी। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच होगी। फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है और दूसरे राज्यों से जुड़े लिंक भी खंगाले जा रहे हैं।

इस सख्त और योजनाबद्ध कार्रवाई के बाद मथुरा में साइबर अपराध से जुड़े गिरोहों में साफ संदेश चला गया है—अब पुलिस सिर्फ शिकायतों पर प्रतिक्रिया नहीं दे रही, बल्कि अपराध की पूरी चेन तोड़ने के लिए मैदान में उतर चुकी है।

जानें कप्तान के बारे में 

इस पूरी कार्रवाई के केंद्र में रहे एसएसपी श्लोक कुमार मूल रूप से बिहार से ताल्लुक रखते हैं और 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद उन्होंने कॉरपोरेट सेक्टर में नौकरी भी की, लेकिन बाद में सिविल सेवा को अपना लक्ष्य बनाया।

यूपी कैडर में आने के बाद उन्होंने आगरा, रायबरेली, गाजियाबाद और हमीरपुर जैसे जिलों में अहम जिम्मेदारियां संभालीं। मथुरा में तैनाती के बाद उन्होंने साइबर अपराध, संगठित गिरोह और आर्थिक अपराधों पर विशेष फोकस किया। तकनीक और फील्ड इनपुट के संयोजन से काम करने की उनकी कार्यशैली ही इस बड़े साइबर नेटवर्क तक पहुंचने की वजह बनी।

 

Rice Imports: 2027 से भारत-पाकिस्तान से चावल आयात पर EU लागू करेगा सख्त नियम, कितना पड़ेगा असर?

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बासमती चावल – फोटो : ani

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यूरोपीय संघ (EU) भारत, पाकिस्तान और अन्य एशियाई देशों से चावल आयात पर सख्त प्रतिबंध लागू करने जा रहा है। परिषद और यूरोपीय संसद ने चावल आयात के लिए ‘स्वचालित सेफगार्ड मैकेनिज्म’ लागू करने पर सहमति जताई है, जिसके तहत निर्धारित सीमा से अधिक आयात होने पर अतिरिक्त शुल्क स्वतः लागू हो जाएगा। यह नियम 1 जनवरी 2027 से लागू किया जाएगा।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर तेजी से प्रगति हो रही है और 23 में से 11 अध्यायों पर सहमति बन चुकी है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि EU एक तरफ बाजार खोलने की बात कर रहा है, जबकि दूसरी तरफ उसी उत्पाद पर सुरक्षा दीवार खड़ी कर रहा है।

कैसे लागू होगा नया नियंत्रण?
EU परिषद के प्रस्ताव के अनुसार यदि भारत या अन्य एशियाई देशों से चावल आयात ऐतिहासिक औसत स्तर से ऊपर चला जाता है, तो उस पर MFN शुल्क लग जाएगा। इस फैसले के बाद आयातित चावल प्रीमियम शुल्क के दायरे में आएगा और EU बाजार में स्थानीय उत्पादकों को लाभ मिलेगा। कानूनी अनुमोदन के बाद यह प्रावधान आधिकारिक रूप से लागू होगा।

टैरिफ सिस्टम ऐसे बदलेगा
फेडरेशन ऑफ यूरोपियन राइस मिलर्स (FERM) ने EU को शुल्क संरचना बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है—

श्रेणीवर्तमान शुल्क प्रस्तावित शुल्क
मिल्ड चावल200 यूरो/टन से कम416 यूरो/टन
हस्क्ड (ब्राउन) चावललगभग 65 यूरो/टन264 यूरो/टन

FERM का दावा है कि मौजूदा शुल्क “पुराने बाजार ढांचे” पर आधारित है और आधुनिक व्यापार वास्तविकता को नहीं दर्शाता।

चावल आयात चार गुना बढ़ा, उत्पादन घटा
EU का तर्क है कि चावल उत्पादन बीते 20 साल में 1.64 मिलियन टन से घटकर 1.47 मिलियन टन रह गया है।  लेकिन आयात 6 लाख टन से बढ़कर करीब 2.3 मिलियन टन पहुंच चुका है। विशेष रूप से भारत और पाकिस्तान से आयात पिछले दो दशक में लगभग 5 गुना बढ़ा। जबकि थाईलैंड और वियतनाम का स्तर लगभग वही रहा। कंबोडिया और म्यांमार के ‘शून्य शुल्क लाभ’ को भी EU एक खतरे के रूप में देख रहा है।

भारत-पाकिस्तान पर सीधा असर क्यों?

  • 2004-05 में EU को मिलने वाले चावल का
  • 80-90 प्रतिशत हिस्सा ब्राउन/हस्क्ड राइस होता था

अब यह अनुपात
  • केवल 50 प्रतिशत रह गया है
  • बाकी हिस्सा मिल्ड चावल का है, जो मूल्यवर्धित उत्पाद माना जाता है।
  • मिल्ड राइस पर शुल्क बढ़ने से भारतीय-पाकिस्तानी कंपनियों को नुकसान होगा।

भारतीय निर्यातकों की नई चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार पैक्ड चावल निर्यात (जैसे बासमती) पर विशेष टैक्स लग सकता है। EU स्थानीय मिलर्स को खुद ब्रांड बनाने का अवसर देना चाहता है। बड़े निर्यातकों को EU में संयंत्र स्थापित करना पड़ सकता है। पहले ही एक बड़ी भारतीय कंपनी दावत ने नीदरलैंड में प्लांट स्थापित कर दिया है।

यूरोप में नया गठबंधन
आठ यूरोपीय चावल उत्पादक देशों ने नया संगठन EURice बनाया है। यह नीति समन्वय करेगा, टैरिफ का दबाव बढ़ाएगा, EU बाजार में बाहरी देशों की हिस्सेदारी सीमित करेगा। इसकी वार्षिक अध्यक्षता सदस्य देशों में घुमावदार तरीके से रहेगी।

भारत-ईयू FTA में नई बाधा
उद्योग विशेषज्ञों का मत है कि यह कदम FTA वार्ताओं को जटिल बना सकता है। भारत को अब चावल सेक्टर को “संवेदनशील उत्पाद” की सूची से बाहर करवाने और सेफगार्ड तंत्र को सीमित समय या मात्रात्मक प्रावधान तक सीमित कराने के लिए प्रयास करने होंगे। विश्लेषकों का मानना है कि यदि समाधान न निकला तो भारत के प्रीमियम चावल निर्यात को सीधा झटका लगेगा।