इस जीत के साथ वे इस अंतरराष्ट्रीय एमएमए प्लेटफॉर्म पर जीत हासिल करने वाले पहले भारतीय फाइटर बन गए हैं.
भारत के गौरव, कॉमनवेल्थ हैवीवेट चैंपियन और एमएमए फाइटर संग्राम सिंह ने एक बार फिर दुनिया को दिखा दिया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है. फिट इंडिया अभियान के एम्बेसडर संग्राम सिंह ने नीदरलैंड्स के एम्स्टर्डम में हुए लेवल्स फाइट लीग (LFL) में ट्यूनीशिया के हकीम त्राबेल्सी को नॉकआउट हराकर भारत का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कर दिया. इस जीत के साथ वे इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय एमएमए प्लेटफॉर्म पर जीत हासिल करने वाले पहले भारतीय फाइटर बन गए हैं. 2 नवंबर 2025 को हुए इस रोमांचक मुकाबले में संग्राम सिंह ने अपनी फिटनेस, अनुशासन और अदम्य आत्मविश्वास का परिचय दिया. उन्होंने अपनी बेहतरीन रणनीति, ग्राउंड कंट्रोल और रेसलिंग तकनीक से प्रतिद्वंद्वी को मात दी.
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यह जीत केवल एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि भारत की नई खेल सोच की पहचान है. “यह जीत हर उस भारतीय की है जो मानता है कि सपनों की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती,” संग्राम सिंह ने भावुक होकर कहा. “40 की उम्र के बाद भी मैं यह साबित करना चाहता था कि फिटनेस की कोई सीमा नहीं होती. जब मन अनुशासित होता है, तब शरीर असीमित हो जाता है. यह जीत मैं अपने देश और हर उस युवा को समर्पित करता हूँ जो बड़े सपने देखने का साहस रखता है.” फिट इंडिया मूवमेंट और युवा एवं खेल मंत्रालय के समर्थन से यह जीत भारत की नई खेल पहचान का प्रतीक बन गई है. LFL के अध्यक्ष डोनोवन जेम्स अलेक्जेंडर पनायोटिस ने कहा, “संग्राम सिंह केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा हैं. उनकी विनम्रता, ताकत और जज़्बा उन्हें एक वैश्विक आइकन बनाता है.”
उनके कोच भूपेश कुमार ने इस जीत को “धैर्य, तैयारी और परिपक्व रणनीति का परिणाम” बताया. उन्होंने कहा, “संग्राम ने मुकाबले में शांत रहकर खेल को अपने नियंत्रण में लिया. यही उनके चैंपियन बनने का रहस्य है.” हरियाणा के रोहतक से निकलकर अंतरराष्ट्रीय एमएमए मंच तक का सफर संग्राम सिंह के जुनून और जज़्बे की कहानी है. दो बार के कॉमनवेल्थ हैवीवेट चैंपियन, मोटिवेशनल स्पीकर, अभिनेता और समाजसेवी संग्राम ने हमेशा अपने खेल से नई परिभाषाएँ गढ़ी हैं. रिंग के बाहर भी वे करोड़ों भारतीयों को फिटनेस के प्रति जागरूक कर रहे हैं.
संग्राम फिट इंडिया एम्बेसडर के रूप में लगातार संदेश देते हैं — “स्वस्थ भारत ही सशक्त भारत है.” उनकी इस ऐतिहासिक जीत के बाद सोशल मीडिया पर बधाइयों की बाढ़ आ गई. खिलाड़ियों से लेकर फिल्मी सितारों तक, हर कोई गर्व से कह रहा है — “संग्राम सिंह ने फिर से भारत का सिर गर्व से ऊँचा कर दिया.” यह जीत केवल खेल की नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की जीत है — वह आत्मा जो कभी हार नहीं मानती.
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