
लो-टनल संरक्षित खेती की बेहतरीन तकनीक – फोटो : गांव जंक्शन
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मौसमी सब्जियों की खेती करना छोटे और सीमांत किसानों के लिए हमेशा चुनौती भरा काम रहा है। बारिश, पाला और बदलते मौसम के कारण खुले खेतों में सब्जी के पौधे अक्सर रोगग्रस्त हो जाते हैं और नुकसान की संभावना बढ़ जाती है। लो-टनल (Low Tunnel) तकनीक का उपयोग इस समस्या का सरल, सस्ता और प्रभावी समाधान है। लो-टनल संरक्षित खेती की बेहतरीन तकनीक
एटा के जिला उद्यान अधिकारी सुघड़ सिंह बताते हैं, लो-टनल संरक्षित खेती की बेहतरीन तकनीक है। इसमें सब्जियों के रोगमुक्त व गुणवत्तापूर्ण पौधे तैयार किए जाते हैं। ऑफ सीजन में इन पौधों की रोपाई करके सब्जियों की अच्छी उपज प्राप्त कर सकते हैं। किसान लो-टनल तकनीक अपनाकर मौसम की मार से पौधों को बचा सकते हैं और ऑफ-सीजन में भी अच्छी कमाई कर सकते हैं।कम खर्च में अधिक उत्पादन
लो-टनल तकनीक अपनाकर बेहद कम खर्च में किसान बेमौसमी सब्जियों की स्वस्थ पौध आसानी से तैयार कर सकते हैं। पौध की समय पर रोपाई करके अच्छा उत्पादन और अधिक बाजार मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। किसान अपने जिले के उद्यान विभाग से संपर्क करके लो-टनल तकनीक की पूरी जानकारी और प्रशिक्षण भी प्राप्त कर सकते हैं।ऐसे काम करती है लो-टनल तकनीक
लो-टनल छोटे आकार की ढकी हुई संरचना होती है, जिसमें सब्जियों की कतारों को पारदर्शी प्लास्टिक शीट से ढककर एक छोटी टनल बनाई जाती है। पौधों के आसपास की हवा गर्म रहती है और ठंड, पाला, बारिश एवं तेज हवाओं से इनको सुरक्षा मिलती है। पौधे कीट और बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं। यह तकनीक ऑफ-सीजन सब्जियों की पौध तैयार करने में विशेष रूप से कारगर मानी जाती है।कतारों के बीच रखें 1.6 सेंटीमीटर दूरी
सबसे पहले 1.5 से 2.5 मीटर लंबी लोहे की जस्ती रॉड जमीन में गाड़कर उस पर नेट चढ़ा दें। मौसम खराब हो तो इस पर 100 माइक्रॉन की पारदर्शी प्लास्टिक शीट चढ़ा दें। लो-टनल की ऊंचाई 40-60 सेंटीमीटर रखें। पौधों की रोपाई 50 सेंटीमीटर की दूरी पर करें। दो कतारों के बीच 1.5 से 1.6 मीटर तक दूरी रखें। ड्रिप सिंचाई प्रणाली से फसल को फायदा होता और पानी की बचत भी होती है।1000-1200 रुपये आता है खर्चा
1-1.5 मीटर चौड़ी और 10-12 मीटर लंबी टनल का खर्च करीब 1000-1200 रुपये आता है। ऐसी 3 टनल में एक हेक्टेयर खेत के लिए पौध तैयार हो जाती है। इसमें किसान बैगन, मिर्च, पत्तागोभी, फूलगोभी, लौकी, खीरा, करेला और मिर्च जैसी कई सब्जियों के पौधे तैयार कर सकते हैं। इस तकनीक की मदद से इन सब्जियों को ठंड और पाले के मौसम में भी सुरक्षित तरीके उगाया जा सकता है।ऑफ सीजन में पाएं सब्जियों के ऊंचे दाम
सुघड़ सिंह ने बताया कि लो-टनल तकनीक से फसल 30-40 दिन पहले तैयार हो जाती है। कम लागत में अधिक उत्पादन होता है। ऑफ-सीजन में सब्जियां ऊंचे दाम पर बिकती हैं। लो-टनल बनाते समय ध्यान रखंे कि प्लास्टिक शीट की गुणवत्ता सर्वोत्तम होनी चाहिए। दिन में तापमान ज्यादा होने पर टनल को थोड़ा खोल दें। ड्रिप सिस्टम का नियमित रखरखाव करें। रोग व कीट नियंत्रण के लिए समय पर जैविक दवाओं का छिड़काव जरूरी है।




