सही सिंचाई से पाएं मोटा-चमकदार गेहूं : कब, कितना और कैसे दें फसल को पानी? जानिए वैज्ञानिक तरीका

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गेहूं में कितनी बार सिंचाई करें? – फोटो : गांव जंक्शन

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गेहूं की खेती में उपयुक्त समय और सही मात्रा में सिंचाई जरूरी है। बंपर उत्पादन के लिए किसानों को सिंचाई के सटीक समय, सही मात्रा और तकनीक की पूरी जानकारी होनी चाहिए। सिंचाई की योजना मिट्टी के प्रकार, मौसम की स्थिति और पानी की उपलब्धता के अनुसार तय करनी चाहिए। गेहूं की सिंचाई महज एक काम नहीं है, बल्कि इसी से पौधे की वृद्धि और दाने की गुणवत्ता निर्धारित होती है।

हर क्षेत्र में सिंचाई की संख्या समान नहीं होती। जहां मिट्टी बलुई दोमट या रेतीली है, वहां 5-6 सिंचाई करनी पड़ती है। मटियार या चिकनी दोमट मिट्टी में नमी बनी रहती है, इसलिए 2-3 सिंचाई ही काफी है। मौसम और बारिश के अनुसार सिंचाई की संख्या व समय में बदलाव करते रहें। सही योजना से ही गेहूं का खेत भरपूर पैदावार देता है।

गलती करने से कम हो सकती है उपज

कृषि विज्ञान केंद्र, शाहजहांपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एन.सी. त्रिपाठी बताते हैं, गेहूं में सिंचाई से जुड़ी गलती करने से किसानों को 4 से 8 क्विंटल प्रति एकड़ तक उपज का नुकसान हो सकता है। सही समय और सही मात्रा में सिंचाई करने पर प्रति एकड़ 22-26 क्विंटल तक उपज मिल सकती है। समय पर पानी न मिलने पर कल्ले कम निकलते हैं, बालियां कमजोर होती हैं और दाने हल्के बनते हैं। 

बुआई के 20-25 दिन बाद पहली सिंचाई

बुआई के 20-25 दिन बाद शीर्ष जड़ें निकलने की अवस्था में गेहूं की पहली सिंचाई करें। इस अवस्था में पानी की कमी सीधे उपज पर असर डाल सकती है। दूसरी सिंचाई 40-45 दिन बाद टिलिंग स्टेज पर की जाती है। तीसरी सिंचाई 60-65 दिन पर गांठ बनने की अवस्था में करें। चौथी फ्लॉवरिंग स्टेज पर (80-85 दिन) और पांचवी सिंचाई दानों में दूध भरने की अवस्था (100-105 दिन) में करें।  

पानी कम हो तो सोच-समझकर करें उपयोग

छठी और अंतिम सिंचाई फसल पकने या दानों के कठोर होने के चरण (115-120 दिन) में करते हैं। इसे डफ स्टेज या ग्रीन फिलिंग अवस्था कहते हैं। पानी की उपलब्धता सीमित हो तो शीर्ष जड़ें निकलने की अवस्था (पहली सिंचाई) और फ्लॉवरिंग स्टेज (चौथी सिंचाई) पर पानी देने को प्राथमिकता दें। यह सुनिश्चित करता है कि फसल के विकास की महत्वपूर्ण अवस्थाओं में नमी की कमी न हो। 

बारिश में रखें खास ध्यान

गेहूं पानी की हर बूंद को महसूस करता है। तेज हवा में सिंचाई करने से बचें। इससे फसल गिरने का खतरा रहता हैं। सर्दियों में बारिश हो जाए, तो सिंचाई के शेड्यूल को उसी के अनुसार समायोजित करना जरूरी है। ऐसे में, सिंचाई की मात्रा कम-ज्यादा कर सकते हैं। सिंचाई के समय को भी फसल की जरूरत के हिसाब से आगे-पीछे किया जा सकता है।

जल-जमाव न होने दें, सड़ सकती हैं जड़ें 

डॉ. एन.सी. त्रिपाठी बताते हैं कि शुरुआती सिंचाई में अत्यधिक पानी डालने से बचें, क्योंकि खेत में जल-जमाव से जड़ें सड़ सकती हैं और पत्तियां पीली पड़ सकती हैं। हल्का पानी डालें ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे। सिंचाई का समय भी महत्वपूर्ण है। सुबह या शाम के समय पानी देना सबसे अच्छा होता है। अधिक ठंडे मौसम में हल्की सिंचाई पर्याप्त होती है, जबकि गर्म मौसम में पानी की मात्रा बढ़ानी पड़ सकती है।