Mustard Crop: किसान जान लें, गिरते तापमान में सरसों की फसल को रोगों और कीटों से कैसे बचाएं?

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कम तापमान में सरसों की फसल में कई तरह के रोगों और कीटों का खतरा रहता है।

कम तापमान में सरसों की फसल में कई तरह के रोगों और कीटों का खतरा रहता है।
– फोटो : AI Image

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सरसों के विकास और अच्छे उत्पादन में कीट, रोग और खरपतवार सबसे बड़ी बाधा बनते हैं। दिसंबर के महीने मे पारा गिरना शुरू हो चुका है। कम तापमान में सरसों की फसल में कीट-रोग के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में किसानों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि वे अपनी फसल को इन खतरों से वैज्ञानिक तरीके से कैसे बचा सकते हैं।

सफेद रतुआ का खतरा
कम तापमान सफेद रतुआ रोग के पनपने के लिए अनुकूल है। पत्तियों के निचले हिस्से में सफेद रंग के धब्बे बन जाते हैं, जो बाद में मिलकर बड़े हो जाते हैं। पत्तियों के ऊपरी हिस्से पर गहरे भूरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। सबसे पहले समय पर उचित सिंचाई करें। संक्रमण दिखने पर रिडोमिल एम. जेड 72 डब्ल्यू.पी. या मेनकोजेब 1250 ग्राम को 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। इसे हर 10 दिन पर दोहराएं।

काला धब्बा रोग
अगर समय पर ध्यान न दिया जाए, तो यह रोग फसल को भारी नुकसान पहुंचाता है। पत्तियों पर गोल भूरे रंग के धब्बे बनते हैं, जिनमें छल्ले जैसा आकार दिखता है। बाद में ये धब्बे शाखाओं तक फैल जाते हैं, पत्तियां झुलस जाती हैं और पौधे के दाने सिकुड़ जाते हैं। इसकी रोकथाम के लिए मेनकोजेब 2.5 ग्राम को प्रति एक लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। 10 दिनों के अंतराल पर 2 से 3 बार छिड़काव करने की सलाह दी जाती है।

रुई जैसे जाल से सावधान
इस रोग में पत्तियों के निचले हिससे में मटमैले या भूरे धब्बे बनते हैं, जिन पर रुई जैसे सफेद जाल दिखाई देते हैं। संक्रमण बढ़ने पर पौधा मुरझाकर या टूटकर गिर जाता है। इस रोग के नियंत्रण के लिए कार्बन्डाजिम को एक लीटर पानी में घोलकर हर 10 दिन पर छिड़काव करना चाहिए।

दिसंबर से फरवरी तक चेपा का प्रकोप
सरसों का चेपा कीट दिसंबर से फरवरी तक फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। शुरुआत में संक्रमित शाखाओं को तोड़कर नष्ट कर दें। नीम की खली के 5 प्रतिशत घोल का छिड़काव करें। यदि प्रकोप बहुत अधिक हो, तो ऑक्सीडेमेटान मिथाइल 25 ई.सी. या डाइमेथोएट 30 ई.सी. की 500 मिली मात्रा को 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

खरपतवार नियंत्रण का तरीका
गोमला, चील, मोरवा और प्याजी जैसे खरपतवार फसल के विकास को रोकते हैं। बुवाई के 50 दिनों बाद निराई-गुड़ाई अवश्य करें। अंकुरण से पहले खरपतवार रोकने के लिए पैण्डीमेथालिन की 2.5 से 3 लीटर मात्रा का उपयोग करें। यदि खरपतवार उग आए हैं, तो क्वीजीलोफॉप इथाइल की 800 से 1000 मिली मात्रा का छिड़काव कर इससे छुटकारा पाया जा सकता है।