पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश, पत्रकार पर हमला करने के बाद अब खुद पर लगाया झूठा छिनैती का आरोप।
रिपोर्ट:ब्यूरो कार्यालय।
महराजगंज। निचलौल-महराजगंज मुख्य मार्ग पर बरोहिया ढाला स्थित सिंह खाद भण्डार का संचालक अनिल सिंह, जो खाद तस्करी के मामले में लगातार सुर्खियों में रहा है, अब अपने ऊपर दर्ज गंभीर मुकदमे से बचने के लिए हथकंडों का सहारा ले रहा है। पुलिस की विवेचना में शिकंजा कसने के बाद, मास्टरमाइंड अनिल सिंह ने एक मनगढ़ंत कहानी गढ़कर पुलिस अधीक्षक को शिकायत पत्र सौंपा है, जिसमें उसने लूट और मारपीट का झूठा आरोप लगाया है।

*पत्रकार पर हमले से शुरू हुआ था विवाद।*
अनिल सिंह और उसके परिवार पर मूल मुकदमा पत्रकार धर्मेंद्र कसौधन पर हुए हमले से संबंधित है।1 नवंबर 2025 की सुबह लगभग 8 बजे, पत्रकार धर्मेंद्र कसौधन खाद तस्करी की सूचना पर कवरेज के लिए सिंह खाद भण्डार से 100 कदम की दूरी से खबर कवरेज कर रहे थें।सूचना मिलते ही अनिल सिंह पुत्र परशुराम,परशुराम और राधिका ने मिलकर पत्रकार के साथ मारपीट की।निचलौल पुलिस ने शिकायत और साक्ष्यों के आधार पर तीनों आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 115(2), 352 और 351 के तहत मुकदमा दर्ज किया था।मामले की विवेचना एस.आई.संदीप यादव द्वारा की गई। विवेचना के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की संख्या और मुकदमे की धाराएं भी बढ़ाई गई हैं।
*मनगढ़ंत आरोपों से दबाव बनाने का प्रयास।*
बढ़ती कानूनी सख्ती से घबराकर अनिल सिंह ने दबाव बनाने की नीयत से 1 दिसंबर 2025 को पुलिस अधीक्षक को एक शिकायत दी। शिकायत में कहा गया है कि 28 नवंबर 2025 को दोपहर 12 बजे निचलौल तहसील से मुकदमा देखकर लौटते समय बरोहिया चौराहे से लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर जितेंद्र, धर्मेंद्र (निवासी हरदी) और राजेश्वर उपाध्याय (निवासी जमुई पंडित) ने जानबूझकर उसकी गाड़ी में टक्कर मार दी।इसके बाद दिग्विजय नाथ उर्फ ललित उपाध्याय भी आ गए और सभी ने मिलकर उसके साथ गाली गलौज की, थप्पड़ से मारा और उसका पैसा तथा सोने का माला छीन लिया।अनिल सिंह ने दावा किया कि उसने इस मामले की जानकारी निचलौल थाना प्रभारी को दी थी, लेकिन उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई।
*अब पुलिस की कार्रवाई पर टिकी निगाहें।*
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह शिकायत मूल मुकदमे को प्रभावित करने और प्रतिशोध की भावना से दर्ज कराई गई है।अब यह देखना होगा कि पुलिस अधीक्षक महराजगंज इस पूर्व-प्रायोजित और मनगढ़ंत शिकायत पर क्या रुख अपनाते हैं, या क्या पुलिस साक्ष्यों पर आधारित मूल मामले की जाँच को प्राथमिकता देते हुए तस्कर के दबाव में नहीं आएगी।

















