आलू किसान ध्यान दें : सर्दी में फसल को बर्बाद कर सकते हैं ये दो कीट और पाला, बचाव के लिए अपनाएं ये तरीके

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सर्दी के मौसम में आलू किसानों को कुछ खास कदम उठाने होंगे। – फोटो : AI

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सर्दी का मौसम आलू की खेती करने वाले किसानों के लिए चिंता का विषय बन सकता है। गिरते तापमान के साथ आलू की फसल में कीटों के संक्रमण और पाले (कोहरे) की मार का खतरा काफी बढ़ गया है। इसका सीधा असर फसल के विकास और कुल उत्पादन पर पड़ता है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को इन खतरों से निपटने के लिए सतर्क रहने और समय रहते बचाव के उपाय करने की सलाह दी है।

फसल के लिए दुश्मन हैं ये दो कीट
आलू की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान ‘झंझा’ और ‘माहू’ कीट से पहुंचता है। झंझा कीट, जिसे देश के कई इलाकों में लाही के नाम से भी जाना जाता है, फसल के लिए बेहद खतरनाक है। इसके संक्रमण से आलू की पत्तियों में छोटे-छोटे छेद हो जाते हैं और कई बार यह पूरी पत्ती को ही नष्ट कर देता है। यह कीट आलू के अलावा सरसों की फसल को भी नुकसान पहुंचाता है।

वहीं, माहू कीट आकार में काफी छोटा होता है, लेकिन इसका असर गहरा होता है। यह आलू और मसूर जैसी फसलों को कमजोर कर देता है, जिससे पौधे का विकास रुक जाता है।

पाले की मार और बचाव के उपाय
उत्तर भारत में सर्दी के दौरान पाला पड़ना एक आम समस्या है, जिसके लिए मौसम विभाग समय-समय पर अलर्ट जारी करता है। पाले की वजह से आलू के पौधे सूखने लगते हैं, जिससे पैदावार कम हो जाती है। खास बात यह है कि पाला पड़ने के दौरान फसल पर झंझा और माहू कीटों के हमले की संभावना और भी बढ़ जाती है। इनसे बचाव के लिए कीटनाशकों का छिड़काव करना जरूरी है।

किसान इन तरीकों से बचाएं अपनी फसल
पाले के प्रकोप से फसल को बचाने के लिए किसान कुछ आसान और देसी तरीके अपना सकते हैं।

  • किसान अपने खेत के चारों तरफ या किनारों पर कूड़ा-करकट और घास-फूस जलाकर धुआं पैदा कर सकते हैं। इससे खेत के तापमान में कुछ डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होती है, जो फसल को पाले से बचाता है।
  • रात के समय फसल को प्लास्टिक की चादर से ढककर सुरक्षित रखा जा सकता है। हालांकि, सुबह होते ही इस चादर को हटा देना चाहिए।
  • जली हुई लकड़ी की राख का फसल पर छिड़काव करने से भी खेत के तापमान में मामूली बढ़ोतरी होती है, जो पौधों के लिए फायदेमंद है।
  • यदि पौधे पाले से प्रभावित हो गए हैं और सूख रहे हैं, तो उन पर गर्म पानी का छिड़काव करने की सलाह दी जाती है। इससे पौधे दोबारा हरे-भरे हो सकते हैं।