इंसानियत शर्मसार, कानून बेबस!
रुधौली थाना क्षेत्र से इंसानियत को झकझोर देने वाली हैवानियत सामने आई है।
मुंगरहा चौराहे पर 12 बेजुबान कुत्तों के मासूम बच्चों को बेरहमी से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक,
आरोपी ने पिल्लों को दौड़ा-दौड़ाकर मारा,
उनकी चीखें गूंजती रहीं,
लेकिन चौराहा तमाशबीन बना रहा।
सबसे चौंकाने वाली बात —
हत्या के बाद भी आरोपी खुलेआम घूमता रहा,
कानून मूकदर्शक बना रहा।
आरोपी की पहचान मैनी गांव निवासी के रूप में बताई जा रही है,
हत्या के बाद शव फेंककर मौके से फरार हो गया।
सूचना पर पुलिस पहुंची,
लेकिन तहरीर न मिलने का हवाला देकर कार्रवाई ठप कर दी गई।
पुलिस का साफ कहना —
“तहरीर मिलेगी, तभी मुकदमा बनेगा।”
अब सवाल उठता है —
क्या वायरल वीडियो तहरीर नहीं है?
क्या 12 बेजुबानों की लाशें सबूत नहीं हैं?
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल है,
लेकिन पुलिस की कार्रवाई इंतजार में अटकी दिखी।
NGO और पशु प्रेमी संस्थाओं की चुप्पी ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
देर शाम तक जो कार्रवाई हुई,
वह सिर्फ शांति भंग की धाराओं में चालान।
यानि 12 जिंदगियों की कीमत — सिर्फ शांति भंग!
अब सबसे बड़ा सवाल —
क्या 12 बेजुबानों की नृशंस हत्या सिर्फ शांति भंग है?
या फिर यह कानून, सिस्टम और संवेदनाओं की सामूहिक विफलता है?
👉 बस्ती में इंसानियत की हत्या पर अब जवाब कौन देगा?












