

उर्वरक सब्सिडी के लिए मौजूदा रबी सीजन के लिए अनुमानित बजटीय आवश्यकता ₹37,952.29 करोड़ है। – फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें
खेती के लिए खाद जरूरी है, जिसकी वास्तविक कीमतें बाजार भाव से कहीं अधिक होती हैं। उर्वरक कंपनियों को अधिसूचित दरों पर केंद्र सरकार सब्सिडी देती है ताकि किसानों को खेती के लिए आवश्यक उर्वरक रियायती मूल्यों पर मिल सकें। वर्ष 2022-23 से वर्ष 2024-25 तक पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) के लिए ₹2.04 लाख करोड़ से अधिक आवंटित किए गए ताकि किसानों को सस्ते दामों पर उर्वरक उपलब्ध हो सकें। किसानों तक ऐसे पहुंचता है सब्सिडी का लाभ
केंद्र सरकार ने रबी 2025-26 सीजन (1 अक्तूबर 2025 से 31 मार्च 2026 तक) के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) दरों को मंजूरी दी है, जो फॉस्फेटिक एवं पोटाश (P&K) उर्वरकों – जिनमें डीएपी और एनपीकेएस (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम, सल्फर) शामिल हैं – पर लागू होंगी। इसके लिए मौजूदा रबी सीजन में अनुमानित बजटीय आवश्यकता ₹37,952.29 करोड़ बताई जा रही है, जो खरीफ 2025 से ₹736 करोड़ अधिक है।
प्रति किलो NPKS उर्वरकों पर ₹96 से अधिक सब्सिडी
उर्वरकों पर सब्सिडी दरों की बात करें तों सरकार प्रति किलोग्राम नाइट्रोजन (N) पर ₹43.02, फॉस्फोरस (P) पर ₹47.96, पोटाश (K) पर ₹2.38 और सल्फर (S) पर ₹2.87 सब्सिडी देती है। इस तरह, प्रति किलो नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश और सल्फर (NPKS) उर्वरकों पर सरकार कुल 96.23 रुपये की सब्सिडी देती है। एनबीएस नीति के कारण घरेलू फॉस्फेटिक एवं पोटाश (P&K) उर्वरक उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और यह वर्ष 2014 के 112.19 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर दिसंबर 2025 तक 168.55 लाख मीट्रिक टन पहुंच गया है, जो 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि को दर्शाता है।
कीमतों पर नहीं होता सरकार का प्रत्यक्ष नियंत्रण
एनबीएस योजना के अंतर्गत फॉस्फेटिक एवं पोटाश (P&K) उर्वरक क्षेत्र नियंत्रण-मुक्त प्रणाली के आधार पर कार्य करता है और उर्वरकों की कीमतों पर सरकार का प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं होता। इस प्रणाली में कंपनियां उचित स्तर पर अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) निर्धारित कर सकती हैं, लेकिन सरकार इसकी निगरानी करती है। इस व्यवस्था से किसान-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाते हुए उर्वरकों की वहनीय एवं प्रतिस्पर्धी मूल्यों पर उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है तथा किसानों को प्रत्यक्ष सब्सिडी लाभ मिलता है।
ऐसे तय की जाती है सब्सिडी, ये रहे परिणाम
पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के तहत सरकार फॉस्फेटिक एवं पोटाश (P&K) उर्वरकों – जिनमें डीएपी शामिल है – पर निश्चित सब्सिडी प्रदान करती है, जिसे वार्षिक या अर्धवार्षिक आधार पर संशोधित किया जाता है। उर्वरकों में मौजूद पोषक तत्वों – नाइट्रोजन (एन), फॉस्फोरस (पी), पोटाश (के) तथा सल्फर (एस) – की मात्रा के आधार पर सब्सिडी निर्धारित की जाती है। यह दृष्टिकोण संतुलित उपयोग को बढ़ावा देता है, किसानों को मृदा एवं फसल की विशिष्ट जरूरतों के अनुसार सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाता है तथा द्वितीयक एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों के प्रयोग को प्रोत्साहित करता है, जिससे मृदा क्षरण और पोषक असंतुलन की समस्याएं कम होती हैं।
इस योजना के परिणामस्वरूप किसान किसी एक उर्वरक पर अत्यधिक निर्भरता से बचते हैं, उर्वरक समय पर एवं वहनीय मूल्यों पर उपलब्ध होते हैं, कंपनियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ती है तथा गुणवत्ता, नवाचार और दक्षता में सुधार होता है। नए एवं उन्नत उर्वरकों को समर्थन देकर यह कृषि आधुनिकीकरण में योगदान देती है तथा वैश्विक मूल्य रुझानों के अनुरूप सब्सिडी निर्धारण से राजकोषीय उत्तरदायित्व भी बनाए रखती है।
संतुलित उर्वरकों का उपयोग फसल उत्पादकता बढ़ाने तथा दीर्घकालिक कृषि स्थायित्व के लिए आवश्यक है। – फोटो : गांव जंक्शन
संतुलित उर्वरकों का उपयोग मिट्टी का स्वास्थ्य बनाए रखने, फसल उत्पादकता बढ़ाने तथा दीर्घकालिक कृषि स्थायित्व सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना को निरंतर प्राथमिकता देती रही है। यह महत्वपूर्ण नीतिगत हस्तक्षेप किसानों को प्रमुख पोषक तत्व वहनीय मूल्यों पर उपलब्ध कराता है तथा उर्वरकों के विवेकपूर्ण एवं संतुलित उपयोग को प्रोत्साहित करता है। 1 अप्रैल 2010 से प्रभावी इस योजना से उर्वरक क्षेत्र में बड़े परिवर्तन देखने को मिले हैं, जिसका उद्देश्य किसानों को सब्सिडी-युक्त उर्वरक न्यायसंगत मूल्यों पर उपलब्ध कराना रहा है।
योजना में शामिल उर्वरक ग्रेड एवं विस्तार
रबी 2023-24 तक एनबीएस योजना में डीएपी, एमओपी तथा एसएसपी सहित 25 फॉस्फेटिक एवं पोटाश (P&K) उर्वरक ग्रेड शामिल थे। खरीफ 2024 से तीन नए ग्रेड जोड़े गए हैं, जिनमें मैग्नीशियम, जिंक, बोरॉन एवं सल्फर से फॉर्टिफाई किया गया एनपीके (11:30:14), यूरिया-एसएसपी (5:15:0:10) तथा मैग्नीशियम, जिंक एवं बोरॉन से सुदृढ़ एसएसपी (0:16:0:11) शामिल हैं। अब कुल 28 प्रकार के फॉस्फेटिक एवं पोटाश (P&K) उर्वरक अधिकृत निर्माताओं एवं आयातकों के माध्यम से सब्सिडी-युक्त दरों पर किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं।




