Potato: आलू की बंपर पैदावार पाने के लिए अपनाएं ये तरीका, सही समय पर कर लें काम, खूब मिलेगा फायदा

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आलू की खेती – फोटो : AI Image

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आलू की खेती में अच्छी उपज पाने के लिए किसान अक्सर खाद, सिंचाई और कीटनाशकों पर ज्यादा ध्यान देते हैं, लेकिन एक छोटा-सा वैज्ञानिक उपाय बिना किसी अतिरिक्त खर्च के पैदावार को 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, आलू के पौधों में आने वाले फूल यदि समय पर हटा दिए जाएं, तो पौधे की पूरी ऊर्जा जमीन के नीचे कंदों के विकास में लगती है। इससे न केवल आलू का आकार बड़ा होता है, बल्कि वजन और गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार आता है।

फूलों में क्यों खर्च होती है पौधे की ऊर्जा
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के प्लांट पैथोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. एस.के. सिंह बताते हैं कि जब आलू के पौधों में फूल खिलते हैं, तो पौधा स्वाभाविक रूप से अपनी ऊर्जा और पोषक तत्व बीज और फूल बनाने में लगाने लगता है। किसानों के लिए ये फूल उपयोगी नहीं होते, क्योंकि आलू की खेती का असली उद्देश्य जमीन के नीचे बनने वाले कंदों की अच्छी पैदावार हासिल करना है। यदि फूलों को समय रहते हटा दिया जाए, तो पौधे का पोषण सीधे कंदों तक पहुंचता है।

पैदावार और आकार में होता है बड़ा फायदा
विशेषज्ञों के अनुसार, फूल हटाने का सबसे बड़ा लाभ आलू के आकार और औसत वजन में बढ़ोतरी के रूप में सामने आता है। जब ऊर्जा फूलों में खर्च नहीं होती, तो कंद तेजी से बढ़ते हैं और अधिक सुडौल बनते हैं। शोध और खेतों के अनुभव बताते हैं कि इस तकनीक को अपनाकर किसान 10 से 20 प्रतिशत तक अधिक पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। खास बात यह है कि इसके लिए न तो अतिरिक्त खाद डालनी पड़ती है और न ही किसी रसायन का उपयोग करना होता है।

रोग और कीट नियंत्रण में भी मददगार
डॉ. सिंह के मुताबिक, फूल हटाना केवल उत्पादन बढ़ाने का तरीका ही नहीं है, बल्कि यह पौधों को कीट और फफूंद जनित रोगों से बचाने में भी सहायक होता है। अक्सर देखा गया है कि फूल आने की अवस्था में कीट और रोगों का प्रकोप बढ़ जाता है। फूल हटाने से पौधा स्वस्थ रहता है और पत्तियों के माध्यम से कंदों को बेहतर पोषण मिलता है।

फूल हटाने का सही समय और तरीका
कृषि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जब आलू की फसल 50 से 60 दिन की हो जाए और फूल पूरी तरह विकसित हो जाएं, तभी उन्हें हटाना चाहिए। फूल हटाने के लिए हाथ से तोड़ने की बजाय साफ कैंची या प्रूनर का इस्तेमाल करें। औजार को पहले ब्लीच या अल्कोहॉल से साफ कर लें, ताकि किसी भी प्रकार का रोग एक पौधे से दूसरे पौधे में न फैले। ध्यान रखें कि केवल फूलों के गुच्छे ही काटें और टहनियों या पत्तियों को नुकसान न पहुंचाएं।

खुदाई के समय दिखता है असर
जो किसान इस तकनीक को अपनाते हैं, उन्हें खुदाई के समय बड़े, वजनदार और लगभग एक जैसे आकार के आलू मिलते हैं। इससे न केवल कुल उत्पादन बढ़ता है, बल्कि बाजार में बेहतर दाम मिलने की संभावना भी रहती है, क्योंकि आकार और गुणवत्ता दोनों बेहतर होती हैं।

किन परिस्थितियों में न अपनाएं यह तकनीक
यदि किसान आलू का बीज उत्पादन करना चाहते हैं, तो फूल नहीं हटाने चाहिए। इसके अलावा, अत्यधिक ठंडे या पहाड़ी इलाकों में, जहां पौधों की ऊर्जा स्वाभाविक रूप से कंदों की ओर अधिक जाती है, वहां फूल हटाने का असर सीमित हो सकता है। हालांकि, बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब और अन्य मैदानी क्षेत्रों में यह तकनीक किसानों के लिए बेहद कारगर और लाभकारी साबित हो रही है।

किसानों के लिए आसान और सस्ता समाधान
डॉ. एस.के. सिंह का कहना है कि यदि किसान इस सरल और वैज्ञानिक प्रबंधन तकनीक को अपनाएं, तो बिना अतिरिक्त खर्च के आलू की पैदावार बढ़ाना पूरी तरह संभव है। थोड़ी सी सावधानी और सही समय पर फूल हटाने से आलू की खेती अधिक लाभकारी बन सकती है।