उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर अब किसी तरह की आधी व्यवस्था या ढिलाई नहीं चलेगी। डीजीपी राजीव कृष्ण ने साफ कहा है कि मिशन शक्ति अब केवल एक सरकारी अभियान नहीं रहेगा, बल्कि यह यूपी पुलिस की कार्यसंस्कृति का स्थायी और भरोसेमंद हिस्सा बनेगा। मिशन शक्ति फेज-5 के तहत बरेली रेंज से महिला सुरक्षा का यह मॉडल पूरी मजबूती के साथ सामने आया है।
जीआईसी ऑडिटोरियम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित मिशन शक्ति कौशल कार्यशाला को संबोधित करते हुए डीजीपी ने कहा कि अब प्रदेश के किसी भी जिले या थाने पर महिला या पीड़िता को अलग-अलग स्तर की सेवा नहीं मिलेगी। हर मिशन शक्ति केंद्र के लिए न्यूनतम सेवा मानक तय किए जाएंगे, ताकि शहर और गांव में समान संवेदनशीलता, समान गुणवत्ता और समान परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।
डीजीपी ने कहा ये
डीजीपी राजीव कृष्ण ने बताया कि संवाद, संवेदनशीलता और कम्युनिटी आउटरीच आधारित पुलिसिंग का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। बलात्कार के मामलों में लगभग 33 प्रतिशत की कमी, दहेज हत्या जैसे जघन्य अपराधों में करीब 13 प्रतिशत की गिरावट और इलोपमेंट व सामाजिक अपराधों में लगातार कमी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि सख्त कानून के साथ मानवीय पुलिसिंग अपराध नियंत्रण का सबसे प्रभावी तरीका बन रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मिशन शक्ति केंद्र अब केवल एफआईआर दर्ज करने तक सीमित नहीं रहेंगे। इन केंद्रों को संवाद, प्री-एफआईआर काउंसलिंग, कानूनी सहायता, मेडिकल रेफरल और पोस्ट-ट्रॉमा केयर का एकीकृत मंच बनाया गया है।
फेज-5 के तहत हर थाने पर मिशन शक्ति केंद्र स्थापित कर महिलाओं की समस्याओं का समाधान एफआईआर की दहलीज से पहले करने पर जोर दिया जा रहा है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से मुफ्त कानूनी सहायता और सरकारी व निजी अस्पतालों से समन्वय कर उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
कार्यशाला में डीजीपी ने यह भी कहा कि पीड़िता से बातचीत के शुरुआती 10 मिनट सबसे अहम होते हैं, क्योंकि यही समय उसकी मानसिक स्थिति और आगे की दिशा तय करता है। बिना किसी पूर्वाग्रह के सुना जाना, सम्मान और सहानुभूति दिखाना पुलिसिंग की मूल भावना होनी चाहिए।
गंभीर मामलों में पीड़िता की सहमति से गोपनीय मानसिक स्वास्थ्य रेफरल की व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। महिला बीट और मिशन शक्ति केंद्रों की फील्ड सक्रियता बढ़ाने के लिए हर थाने पर चार स्कूटी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
ये अफसर भी थे मौजूद
डीजीपी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यशाला में एडीजी बरेली जोन रमित शर्मा, कमिश्नर भूपेन्द्र एस. चौधरी, डीआईजी रेंज अजय कुमार साहनी, महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन की एडीजी पद्मजा चौहान सहित प्रशासनिक, पुलिस, मेडिकल और काउंसलिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भाग लिया। डीजीपी का कहना था कि मिशन शक्ति तभी सफल होगा जब हर पुलिसकर्मी इसे औपचारिक आदेश नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी और संवेदनशील कर्तव्य के रूप में अपनाएगा।












