सरपंच बनने की चाहत ने पिता को बनाया कातिल, महाराष्ट्र में दो बच्चों की नीति के कारण जुड़वां बेटी की हत्या

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नांदेड़. महाराष्ट्र के एक ग्रामीण इलाके से रोंगटे खड़े कर देने वाली ऐसी वारदात सामने आई है जिसने सत्ता की हवस और सामाजिक कुरीतियों के भयावह चेहरे को उजागर कर दिया है। एक व्यक्ति ने सरपंच बनने की अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए अपनी ही चंद दिनों की मासूम जुड़वां बेटी की 'बलि' चढ़ा दी। यह पूरी साजिश महाराष्ट्र के उस कड़े कानून के इर्द-गिर्द बुनी गई थी जिसमें दो से अधिक संतान होने पर व्यक्ति को स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाता है। आरोपी पिता पहले से ही एक बच्चे का पिता था और हाल ही में उसकी पत्नी ने जुड़वां बेटियों को जन्म दिया था।

इसके साथ ही उसके बच्चों की कुल संख्या तीन हो गई थी जो उसकी राजनीतिक राह में सबसे बड़ा कानूनी रोड़ा बन गई थी। चुनाव लड़ने की पात्रता बनाए रखने के लिए उसने एक बेटी को रास्ते से हटाने का खौफनाक फैसला लिया जिसे सुनकर हर कोई दंग है। केरूर गांव में 28 वर्षीय पांडुरंग कोंडमंगले ने अपने छह वर्षीय जुड़वां बच्चों में से एक बेटी को हत्या कर देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपी का मकसद था कि वह आगामी पंचायत चुनाव में सरपंच पद के लिए उम्मीदवार बन सके, क्योंकि महाराष्ट्र पंचायत राज अधिनियम के अनुसार दो से अधिक बच्चे वाले व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकते।

पांडुरंग, जो गांव में विराट सैलून चलाता है और तीन बच्चों का पिता है, ने जुड़वां बेटियों में से बड़ी, प्राची, को कथित तौर पर मार डाला। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने पहले बेटी को गोद देने और छोड़ देने जैसे विकल्पों पर विचार किया, लेकिन इनसे उसका उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता। अंततः उसने और मौजूदा सरपंच गणेश शिंदे के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने प्राची को नजदीकी निजामाबाद जिला में निजामसागर नहर के पास ले जाकर पानी में धकेल दिया। आसपास काम कर रहे ग्रामीणों ने पानी में कुछ गिरते होने की आवाज सुनी और नहर में जाकर देखा कि बच्ची तैर नहीं पा रही थी। ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और बच्ची का शव बाहर निकाला गया।

शरीर के पानी से जल्दी बाहर निकलने के कारण उसका चेहरा पहचानने योग्य था। महाराष्ट्र के एक ग्रामीण ने सोशल मीडिया पर पुलिस कर्मियों के WhatsApp नंबर पर प्राची की फोटो देखकर उसे पहचान लिया और निज़ामाबाद पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने आरोपी पिता से पूछताछ की तो उसने पहले बहाना बनाया कि बच्ची किसी दूरस्थ स्वास्थ्य केंद्र में इलाज करवा रही है, लेकिन अंततः उसने हत्या स्वीकार कर ली।

इस मामले में आरोपी के खिलाफ हत्या और आपराधिक साजिश के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है, जबकि वर्तमान सरपंच को भी सह-साजिश के आरोप में नामजद किया गया है। पुलिस ने बताया कि बच्ची नहाने या तैरने में सक्षम नहीं थी। ग्रामीणों के नहर तक पहुंचने के 10 मिनट के भीतर भी उसकी जान बचाई नहीं जा सकी।

पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए हैं वे किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं हैं लेकिन उनकी हकीकत रूह कंपा देने वाली है। आरोपी ने अपनी योजना को अंजाम देने के लिए बड़ी चतुराई से यह दिखाने की कोशिश की कि बच्ची की मौत प्राकृतिक कारणों या किसी बीमारी की वजह से हुई है। उसने सोचा था कि बच्ची की मौत के बाद रिकॉर्ड में उसके केवल दो ही बच्चे रहेंगे जिससे वह सरपंच पद का चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह पात्र हो जाएगा। लेकिन कानून की आंखों में धूल झोंकना उसके लिए मुमकिन नहीं हो पाया। जब बच्ची के शव को दफनाने की प्रक्रिया और उसके अचानक गायब होने पर कुछ स्थानीय लोगों और स्वास्थ्य कर्मियों को संदेह हुआ तो पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस की शुरुआती पूछताछ में आरोपी पिता ने कई बार अपने बयान बदले जिससे शक गहराता गया और जब कड़ाई से पूछताछ की गई तो उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।

यह मामला केवल एक हत्या का नहीं है बल्कि यह उस प्रशासनिक और कानूनी दबाव की ओर भी इशारा करता है जिसे लोग गलत तरीके से सुलझाने की कोशिश करते हैं। महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम के तहत 1995 के बाद जिन लोगों के दो से अधिक बच्चे हैं वे चुनाव नहीं लड़ सकते। इस प्रावधान का उद्देश्य जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देना था लेकिन इस मामले ने यह दिखा दिया कि कैसे सत्ता की लालच में इंसान अपनी नैतिकता और मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रख सकता है। आरोपी ने अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए उस मासूम की जान ले ली जिसे अभी ठीक से दुनिया देखनी भी बाकी थी। इस घटना ने पूरे गांव में मातम और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। लोग इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि एक पिता अपनी ही संतान का दुश्मन सिर्फ इसलिए बन सकता है ताकि वह पंचायत की कुर्सी पर बैठ सके।

अक्सर यह देखा गया है कि जहां बेटों की चाहत में लोग अपराध करते हैं वहीं इस मामले में सत्ता की चाहत ने एक मासूम बेटी की जान ले ली। स्थानीय स्तर पर राजनीति का स्तर इतना गिर चुका है कि छोटे पदों के लिए भी लोग किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या और साक्ष्य मिटाने की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है ताकि मौत के सटीक कारणों का पता चल सके और अदालत में आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश किए जा सकें। इस घटना ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है कि क्या ऐसे कड़े कानूनों के कुछ अनपेक्षित और हिंसक परिणाम भी हो रहे हैं जिन पर समाज को विचार करने की जरूरत है।