बस्ती। कप्तानगंज थाना क्षेत्र से ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस, अदालत और समाज—तीनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जिस बेटी की हत्या के आरोप में मां-बाप दो साल तक बदनामी और मुकदमे का दंश झेलते रहे, वही बेटी अचानक जिंदा हालत में थाने पहुंच गई। कागजों में ‘मृत’ घोषित प्रियंका जब पुलिस के सामने खड़ी हुई तो हर कोई सन्न रह गया।
अफवाह बनी FIR, माता-पिता बन गए ‘कातिल’
पिलखायें गांव की प्रियंका प्रजापति की शादी 14 मई 2017 को संदीप से हुई थी। एक बेटा भी हुआ, लेकिन पति-पत्नी के रिश्तों में दरार आ गई। दो साल पहले प्रियंका ससुराल से जेवर लेकर मायके आई और फिर अचानक लापता हो गई।
इसी बीच गांव में सनसनीखेज अफवाह उड़ी—पिता ने जेवर के लालच में बेटी और नाती की हत्या कर लाश सरयू में फेंक दी! पति ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अदालत के आदेश पर 4 नवंबर 2024 को पिता दयाराम, मां सुभावती, रिश्तेदार संजना और अशोक कुमार मौर्य पर हत्या और साक्ष्य मिटाने का मुकदमा दर्ज हो गया।
बिना लाश, बिना सबूत—मां-बाप ‘हत्यारे’ घोषित कर दिए गए।
राजस्थान में बसी नई जिंदगी
सच्चाई इससे बिल्कुल उलट निकली। प्रियंका आत्महत्या के इरादे से अयोध्या पहुंची थी, लेकिन वहां उसकी मुलाकात राजस्थान के मंगल चंद्र से हुई। आत्महत्या का इरादा बदल गया और वह उसके साथ राजस्थान चली गई। दोनों पति-पत्नी की तरह रहने लगे। उधर बस्ती में उसके माता-पिता हत्या के आरोपी बनकर सामाजिक तिरस्कार झेलते रहे।
एक OTP ने खोला राज
कहानी में ट्विस्ट तब आया जब पति संदीप के मोबाइल पर प्रियंका के आधार कार्ड में बदलाव का OTP आया। शक गहराया, पुलिस हरकत में आई और आखिरकार प्रियंका राजस्थान में जिंदा मिल गई। दो साल से ‘मरी हुई’ महिला खुद चलकर थाने पहुंच गई।
अब किसके साथ जाएगी प्रियंका?
सच्चाई सामने आने के बाद माता-पिता पर से हत्या का कलंक तो मिटा, लेकिन रिश्तों की डोर पूरी तरह टूट चुकी है। मां-बाप उसे अपनाने को तैयार नहीं। पति भी साथ रखने से इंकार कर रहा है। प्रियंका अपने नए साथी मंगल चंद्र के साथ ही रहना चाहती है।
सबसे दर्दनाक पहलू—बेटा अब अपने जैविक पिता संदीप को पिता मानने को तैयार नहीं।
यह मामला सिर्फ एक पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि सवाल है—
क्या सिर्फ अफवाह के आधार पर किसी को हत्यारा बना देना इतना आसान है?
दो साल तक बेगुनाह माता-पिता समाज और कानून के कटघरे में खड़े रहे—अब उनकी खोई इज्जत कौन लौटाएगा?’
बस्ती (कप्तानगंज): कहते हैं कानून अंधा होता है, लेकिन बस्ती के कप्तानगंज में जो हुआ उसने कानून के साथ-साथ सामाजिक न्याय को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। पिलखायें गांव की प्रियंका प्रजापति, जिसे कागजों में मृत मानकर उसके ही माता-पिता पर हत्या का मुकदमा चलाया जा रहा था, वह अचानक जिंदा थाने पहुंच गई। प्रियंका की इस “वापसी” ने उस सिस्टम को बेनकाब कर दिया है जिसने बिना लाश और बिना सबूत के एक परिवार को ‘हत्यारा’ घोषित कर दिया था।
कैसे शुरू हुआ ‘मौत’ का यह झूठा खेल?
प्रियंका की शादी 2017 में संदीप से हुई थी। वैवाहिक कलह के बाद प्रियंका दो साल पहले ससुराल से मायके आई और फिर रहस्यमय तरीके से लापता हो गई। गांव में यह अफवाह उड़ी कि पिता दयाराम ने जेवरों के लालच में बेटी और नाती की हत्या कर दी।
अदालती आदेश पर दर्ज हुआ मुकदमा: पति संदीप की अर्जी पर कोर्ट ने 4 नवंबर 2024 को पिता दयाराम, मां सुभावती और दो रिश्तेदारों पर हत्या (धारा 302) और साक्ष्य मिटाने का केस दर्ज करने का आदेश दे दिया। दो साल तक यह परिवार समाज का तिरस्कार और पुलिसिया कार्रवाई की दहशत झेलता रहा।

















