अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता शुरू, पर दोनों के बीच खास मुद्दे क्या हैं?

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अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल और ईरान के संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ के नेतृत्व में ईरानी प्रतिनिधिमंडल शनिवार को पाकिस्तान पहुंचा। दोनों पक्षों का मकसद है कि हाल ही में हुए युद्धविराम को मजबूत किया जाए और दोनों देशों के बीच चल रहे संघर्ष को हमेशा के लिए खत्म करने का रास्ता निकाला जाए।

 

दोनों प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से अलग-अलग मिले। अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। युद्धविराम के बावजूद स्थिति काफी नाजुक है। इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच दक्षिणी लेबनान की सीमा पर अभी भी गोलीबारी हो रही है। ईरान ने औपचारिक बातचीत शुरू करने से पहले कई शर्तें रखी हैं।

 

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बैठक से कुछ घंटे पहले कहा, ‘हम देखेंगे कि क्या चल रहा है। वे सैन्य रूप से हार चुके हैं।’ ईरान की मुख्य शर्तें हैं – होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका नियंत्रण, युद्ध के नुकसान की भरपाई, उसके ब्लॉक किए गए संपत्ति को छोड़ना और पूरे क्षेत्र में युद्धविराम। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका लेबनान में युद्धविराम और उसके ऊपर लगे प्रतिबंध हटाने की गारंटी नहीं देता, तब तक औपचारिक बातचीत शुरू नहीं हो सकती।

लेबनान बड़ा मुद्दा

लेबनान का मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण है। ईरान लेबनान में युद्धविराम चाहता है जहां इजरायली हमलों में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के लगभग 2000 लोग मारे गए हैं। इजरायल और अमेरिका कहते हैं कि लेबनान का मामला ईरान-अमेरिका युद्धविराम से अलग है लेकिन तेहरान इसे सीधे जुड़ा हुआ मानता है। 

 

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि हिजबुल्लाह के साथ कोई युद्धविराम नहीं होगा। हालांकि इजरायल ने बेरूत के दक्षिणी इलाकों के लोगों को निकलने को लेकर चेतावनी दी है लेकिन अभी बड़े हमले नहीं हुए हैं।

इजरायल ने दी चेतावनी

ट्रंप ने कहा कि लेबनान में इजरायल के अभियान अब कम तीव्र होंगे। अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया कि इजरायल और लेबनान के बीच सीधी बातचीत अगले हफ्ते वॉशिंगटन में होगी। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने एक्स पर लिखा कि अगर ये कार्रवाइयां जारी रहीं तो बातचीत बेकार हो जाएगी। उन्होंने कहा, ‘हमारी उंगलियां ट्रिगर पर हैं। हम अपने लेबनानी भाई-बहनों को कभी नहीं छोड़ेंगे।’

होर्मुज दूसरा बड़ा मुद्दा

दूसरा बड़ा मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य है। दुनिया के तेल परिवहन का यह बहुत महत्वपूर्ण रास्ता है। ईरान चाहता है कि इस पर उसका अधिकार माना जाए, वह होर्मुज में टोल वसूलने और उस पर नियंत्रण का अधिकार चाहता है, जबकि अमेरिका का कहना है कि यह रास्ता सभी जहाजों के लिए बिना किसी रोक-टोक के खुला रहना चाहिए। 

 

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान ‘बहुत खराब काम’ कर रहा है और समझौते का सम्मान नहीं कर रहा। फिलहाल होर्मुज से बहुत कम जहाज गुजर रहे हैं और सैकड़ों जहाज तथा 20,000 नाविक फंस गए हैं। ईरान ने नए रास्ते बनाने की घोषणा की है ताकि मुख्य इलाके में एंटी-शिप माइन्स से बचा जा सके।

परमाणु कार्यक्रम बड़ा मुद्दा

परमाणु कार्यक्रम सबसे विवादास्पद मुद्दा है। ईरान यूरेनियम संवर्धन जारी रखना चाहता है लेकिन ट्रंप इसे बिल्कुल मंजूर नहीं करते। उन्होंने कहा कि उन्होंने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी इसलिए शुरू किया ताकि ईरान कभी परमाणु हथियार न बना सके। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी कहा कि ईरान को कभी परमाणु क्षमता नहीं मिलेगी। मिसाइल कार्यक्रम पर भी दोनों पक्षों में बड़ा मतभेद है। इजरायल और अमेरिका ईरान की मिसाइल क्षमता घटाना चाहते हैं लेकिन ईरान अपनी मिसाइल क्षमता को बनाए रखना चाहता है।

 

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फंड रिलीज करने की मांग

ईरान प्रतिबंध हटाने और उसके ब्लॉक फंड को रिलीज करने की मांग कर रहा है। यह फंड करीब 6 अरब डॉलर का है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस रिपोर्ट को खारिज किया है कि अमेरिका ने फंड रिलीज करने पर सहमति दे दी है। साथ ही ईरान, अमेरिका से मिडिल ईस्ट एरिया से अपनी सैन्य ताकत हटाने, सभी मोर्चों पर लड़ाई बंद करने और कोई हमला न करने की गारंटी भी चाहता है। लेकिन ट्रंप ने कहा है कि अंतिम शांति समझौता होने तक अमेरिकी सैन्य उपस्थिति बनी रहेगी। अगर ईरान समझौता नहीं मानता तो बड़ी लड़ाई हो सकती है।

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