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सुबह की ये 5 अच्छी आदतें रखेंगी पूरे दिन एनर्जी से भरपूर, आज से ही अपनाएं


सुबह की शुरुआत जैसी होती है अक्सर हमारा पूरा दिन भी वैसा ही बीतता है। अगर दिन की शुरुआत आलस और थकान के साथ होती है तो काम में मन नहीं लगता है। ऐसे में फिर शरीर भी सुस्त महसूस करने लगता है। वहीं सुबह की कुछ अच्छी आदतें अपनाने से शरीर और दिमाग दोनों तरोताजा महसूस करते हैं। इसलिए सुबह की दिनचर्या पर ध्यान देना बहुत जरूरी होता है। ये आदतें अपनाना मुश्किल नहीं है और इन्हें हर उम्र के लोग आसानी से अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बना सकते हैं।

 

अच्छी बात यह है कि पूरे दिन एनर्जी बनाए रखने के लिए आपको कोई मुश्किल काम करने की जरूरत नहीं है। रोज सुबह की कुछ आसान आदतें अपनाकर आप खुद को दिनभर फ्रैश और एक्टिव महसूस कर सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसी 5 आसान आदतों के बारे में जिन्हें अपने लाइफस्टाइल में शामिल करके आप पूरे दिन बेहतर महसूस कर सकते हैं।

 

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1. सुबह उठते ही एक गिलास पानी पिएं

रातभर सोने के बाद शरीर को पानी की जरूरत होती है। इसलिए सुबह उठते ही एक गिलास सादा या गुनगुना पानी पीने की आदत डालें। इससे शरीर फ्रैश महसूस करता है और दिन की शुरुआत भी अच्छी होती है। साथ ही शरीर में पानी की कमी भी पूरी होने लगती है।

2. कुछ देर धूप में जरूर बैठें

सुबह की हल्की धूप शरीर के लिए फायदेमंद मानी जाती है। रोज 10 से 15 मिनट धूप में बैठने या टहलने की कोशिश करें। इससे शरीर को विटामिन डी मिलता है और मन भी अच्छा महसूस करता है। सुबह की ताजी हवा भी शरीर को तरोताजा रखने में मदद करती है।

3. हल्की एक्सरसाइज या वॉक करें

सुबह 15 से 20 मिनट टहलना, स्ट्रेचिंग करना अच्छी आदत है। इससे शरीर में फुर्ती आती है और दिनभर काम करने में आसानी होती है। अगर समय कम हो तो घर पर ही कुछ आसान एक्सरसाइज कर सकते हैं।

 

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4. हेल्दी नाश्ता जरूर करें

कई लोग जल्दी के कारण सुबह का नाश्ता छोड़ देते हैं लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए। नाश्ते में फल, दूध, दही, दलिया, पोहा, ओट्स या अंडा जैसी पौष्टिक चीजें शामिल करें। अच्छा नाश्ता करने से शरीर को दिनभर काम करने की ताकत मिलती है और जल्दी भूख भी नहीं लगती है।

5. उठते ही मोबाइल चलाने से बचें

आजकल कई लोग सुबह आंख खुलते ही मोबाइल देखने लगते हैं। इससे दिमाग पर बेवजह का दबाव पड़ सकता है। कोशिश करें कि उठने के बाद कुछ मिनट मोबाइल से दूर रहें। इसकी जगह गहरी सांस लें, थोड़ा टहलें या दिनभर के जरूरी कामों की योजना बना लें। इससे दिन की शुरुआत शांत और अच्छी होती है।

देवशयनी एकादशी के दिन पढ़िए यह कथा, तभी बरसेगी भगवान विष्णु की कृपा


आज देवशयनी एकादशी का पर्व है। सनातन धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो भक्त इस दिन व्रत रखता है, सच्चे मन से भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करता है और व्रत कथा पढ़ता या सुनता है, उसे न केवल भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि अनजाने में किए गए पापों से भी मुक्ति मिलती है। साथ ही भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है और उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।


इसी व्रत के बारे में एक बार युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा था कि देवशयनी एकादशी का क्या महत्व है। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तर दिया कि यह सभी एकादशी व्रतों में श्रेष्ठ है। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में भक्त देवशयनी एकादशी का व्रत रखते हैं।

 

धार्मिक जानकारों के अनुसार, जिन लोगों ने देवशयनी एकादशी का व्रत रखा लेकिन व्रत कथा नहीं पढ़ी या सुनी, उनका व्रत अधूरा माना जाता है। ऐसे में भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण नहीं होतीं। इसलिए इस दिन व्रत के साथ व्रत कथा पढ़ना या सुनना भी बेहद जरूरी माना गया है। अब सवाल उठता है कि देवशयनी एकादशी की व्रत कथा क्या है? आइए जानते हैं।

 

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देवशयनी एकादशी व्रत कथा

 

कथा के अनुसार, प्राचीन समय में मांधाता नाम के एक राजा थे। वे अपनी प्रजा के हितों की रक्षा करते थे और राज्य के लोगों के कल्याण के लिए कार्य करते थे। उनके राज्य में कभी अकाल नहीं पड़ता था। हालांकि, एक बार उनके राज्य में लगातार तीन सालों तक बारिश नहीं हुई। बारिश न होने के कारण पूरे राज्य में भयंकर अकाल पड़ गया। लोग अन्न और जल के लिए तरसने लगे। अन्न और जल की कमी के कारण लोगों ने हवन, यज्ञ और पूजा जैसे धार्मिक अनुष्ठान भी करना छोड़ दिए। 

 

राज्य की ऐसी स्थिति देखकर राजा मांधाता बहुत दुखी और चिंतित हो गए। वे लगातार सोचने लगे कि इस समस्या का समाधान कैसे निकाला जाए। काफी विचार-विमर्श करने के बाद वे समाधान की खोज में जंगल की ओर निकल पड़े।

 

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जब राजा मांधाता घोड़े पर सवार होकर जंगल में घूम रहे थे, तब उन्हें ब्रह्माजी के पुत्र महर्षि अंगिरा का आश्रम दिखाई दिया। वे तुरंत आश्रम पहुंचे और हाथ जोड़कर बोले, ‘हे ऋषिवर मैं सदैव धर्म का पालन करता हूं, फिर भी मेरे राज्य में पिछले तीन साल से बारिश नहीं हुई है। कृपया कोई ऐसा उपाय बताइए, जिससे मेरे राज्य में फिर से बारिश हो और अकाल समाप्त हो जाए।’

 

तब महर्षि अंगिरा ने कहा, ‘हे राजन आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली देवशयनी एकादशी का व्रत करें। इस व्रत के प्रभाव से भक्तों को पापों से मुक्ति मिलती है। आप अपने राज्य के सभी लोगों के साथ मिलकर देवशयनी एकादशी का व्रत रखें और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करें। इससे आपके राज्य की सभी परेशानियां दूर हो जाएंगी।’ महर्षि अंगिरा से उपाय जानने के बाद राजा मांधाता अपने राज्य लौट आए। जब देवशयनी एकादशी का दिन आया, तब राजा ने पूरी प्रजा के साथ मिलकर व्रत रखा और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की। व्रत के प्रभाव से राज्य में अच्छी बारिश हुई, चारों ओर हरियाली छा गई और राज्य से अकाल समाप्त हो गया।

 

नोट- यह कथा धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। खबरगांव इसकी पुष्टि नहीं करता है।

 

हूतियों के हमले, सऊदी अरब की टेंशन; दुविधा में कैसे फंसा पाकिस्तान?


अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग में पाकिस्तान ने भरसक प्रयास किया कि सऊदी अरब को निशाना न बनाया जाए। पिछले पांच महीने में उसकी यह कोशिश रंग भी लाई। पहले चरण के संघर्ष में ईरान ने सबसे अधिक संयुक्त अरब अमीरात को निशाना बनाया। अमेरिका ने सीजफायर के बीच जब दोबारा हमला किया तो अबकी बार जॉर्डन, कतर, कुवैत और बहरीन को खूब हमले झेलने पड़े। मगर 13 जुलाई को कुछ ऐसा हुआ, जिसने सारे समीकरणों को बदल कर रख दिया। आज न केवल सऊदी अरब के सामने सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती खड़ी हो गई, बल्कि पाकिस्तान भी दुविधा में फंस चुका है।

 

तीन जुलाई को यमन के हूती विद्रोहियों का एक प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचा। यह प्रतिनिधिमंडल करीब एक हफ्ते तक चले अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल हुआ। 13 जुलाई को ईरान की महान एयरलाइन के विमान से प्रतिनिधिमंडल की वापसी हुई। यह विमान जैसे ही राजधानी सना के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के पास पहुंचा, वैसे ही सऊदी अरब समर्थित यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार ने रनवे पर हमला कर दिया। हूती विद्रोहियों को विमान मोड़ना पड़ा और लाल सागर के तट पर स्थित होदेइदा एयरपोर्ट पर उतारना पड़ा। 

 

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पाकिस्तान ने ईरान को कौन सी धमकी भेजी?

हमले के जवाब में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर बैलेस्टिक मिसाइल दागीं। हालांकि इन्हें रोक लिया गया। पाकिस्तान ने खुलकर सऊदी अरब का समर्थन किया और बल इस्तेमाल करने पर हूती विद्रोहियों को चेतावनी भी दी। पाकिस्तान मीडिया के मुताबिक वहां की सरकार ने ईरान को एक मैसेज भेजा। इसमें कहा कि सऊदी अरब उसकी रेड लाइन है। अगर रियाद पर हमला किया तो पाकिस्तान के पास कोई और विकल्प नहीं बचेगा।

हूतियों ने कैसे दिया धमकी का जवाब?

हूती विद्रोहियों ने पाकिस्तानी की धमकियों को नजरअदांज किया और लाल सागर में सऊदी अरब के खिलाफ नाकेबंदी का ऐलान कर दिया। 23 जुलाई को सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला किया। यही से पाकिस्तान की हूती और ईरान रूपी दुविधा की शुरुआत हुई। जहां अमेरिका ने खुलकर हूती विद्रोहियों और ईरान को परिणाम भुगतने की धमकी दी तो वहीं पाकिस्तान के नेतृत्व ने चुप्पी साध ली है।

ख्वाब टूटने का डर

पाकिस्तान की सेना और सरकार को डर है कि ईरान संघर्ष में उसको भी घसीटा जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कराके शांतिदूत बनने का उसका ख्बाव चकनाचूर हो जाएगा।

जंग में पाकिस्तान के उतरने का खतरा बढ़ा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यमन सीमा के करीब सऊदी अरब में पाकिस्तान के हजारों सैनिक और फाइटर जेट की एक स्क्वाड्रन तैनात है। पाकिस्तान के रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हूतियों के ताजा हमले के बाद संघर्ष में पाकिस्तान के उतरने का खतरा पहले अधिक बढ़ चुका है। 

 

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बता दें कि पिछले साल पाकिस्तान और सऊदी अरब ने एक रक्षा समझौता किया था। इसके तहत एक पर हमला दूसरे पर हुआ हमला माना जाएगा। कुछ समय पहले ही पाकिस्तान ने ईरान के नेताओं को संदेश भेजा था कि सऊदी अरब पर हमले पाकिस्तान पर हमले माने जाएंगे। यह हमारी रेड लाइन है।

घरेलू स्तर पर चुनौती कम नहीं

पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व को डर सता रहा है कि अगर हूती विद्रोहियों के साथ संघर्ष बढ़ता है तो पाकिस्तान को भी जंग में लाजिम तौर पर उतरना पड़ेगा। वो भी तब जब पाकिस्तान घरेलू स्तर पर सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में प्रदर्शन का दौर जारी है। खैबर पख्तूनख्वा में सेना सुरक्षित नहीं है। बलूचिस्तान में अलगाववाद की लहर चरम पर है। रोजाना बड़ी तादाद में सैनिकों के मारे जाने की खबर आ रही हैं।

पड़ोसी से भी इस्लामाबाद की नहीं बनती

घरेलू मामलों के इतर पाकिस्तान के अपने पड़ोसियों से भी रिश्ते अच्छे नहीं है। अफगानिस्तान के साथ उसके संबंध रसातल पर हैं। पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के साथ तनातनी का माहौल है। पाकिस्तान की सरकार को यह भी डर सता रहा है कि अगर हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग में उतरे तो ईरान के साथ भी प्रत्यक्ष संघर्ष का हिस्सा बनना पड़ सकता है और यह स्थिति बेहद नाजुक होगी, क्योंकि ईरान के साथ उसकी करीब 900 किमी लंबी सीमा लगती है। 

ऊर्जा संकट गहराने का खतरा 

पाकिस्तान किसी भी हाल में ईरान के साथ संबंध नहीं बिगाड़ना चाहता है। लेकिन खाड़ी देशों के साथ संतुलन भी बनाना चाहता है। इसकी वजह है कि पाकिस्तान तेल और गैस आपूर्ति के मामलों में खाड़ी देशों पर अधिक निर्भर है। खासकर सऊदी अरब उसका बेहद अहम आर्थिक सहयोगी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के बाद पाकिस्तान को अधिकांश तेल की आपूर्ति सऊदी अरब ही कर रहा है। लाल सागर के रास्ते यह खेप कराची तक पहुंचाई जा रही है। सऊदी अरब के खिलाफ हूती विद्रोहियों की नाकेबंदी से पाकिस्तान के सामने ऊर्जा संकट खड़ा होने का खतरा बढ़ चुका है। यही स्थिति पाकिस्तान को जंग में खींच सकती है।

VBSA बिल क्या है? इससे छात्रों-शिक्षकों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?


देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए केंद्र सरकार विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (VBSA) बिल लाने की तैयारी कर रही है। सरकार का कहना है कि इस बिल से विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की व्यवस्था को बेहतर बनाया जाएगा और उच्च शिक्षा से जुड़े नियमों को आसान बनाया जाएगा। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर शिक्षा जगत और राजनीतिक दलों के बीच चर्चा भी तेज हो गई है।

 

सरकार का दावा है कि VBSA बिल से अलग-अलग शिक्षा नियामक संस्थाओं की जगह एक नई व्यवस्था बनाई जाएगी जिससे काम करने में आसानी होगी और शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी। वहीं कई शिक्षकों और विपक्षी दलों का कहना है कि इस बिल से विश्वविद्यालयों की स्वतंत्रता पर असर पड़ सकता है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि VBSA बिल क्या है, इसका छात्रों और शिक्षकों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है और बैठक रद्द क्यों हुई है।

VBSA बिल है क्या?

VBSA बिल, 2025 केंद्र सरकार का एक प्रस्तावित बिल है। जिसका मकसद देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बदलाव करना है। इस बिल के जरिए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के नियमन की प्रक्रिया को सरल और एक समान बनाने की कोशिश की गई है। सरकार का कहना है कि इससे उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और संस्थानों के कामकाज में पारदर्शिता आएगी।

 

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इस बिल के तहत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) जैसी अलग-अलग संस्थाओं की जगह विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (VBSA) नाम की एक नई संस्था बनाने का प्रस्ताव है। यह संस्था देश के उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए नियम तय करने, उनकी गुणवत्ता की निगरानी करने और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने का काम करेगी।

छात्रों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?

केंद्र सरकार का नया VBSA बिल उच्च शिक्षा के पुराने नियमों को बदलने जा रहा है। इसके तहत UGC और AICTE जैसी संस्थाओं को हटाकर एक बड़ा केंद्रीय बोर्ड बनाया जाएगा। इसे पूरे देश में एक जैसा पढ़ाई का नियम क्रेडिट सिस्टम लागू होगा। इससे छात्र बीच में ही आसानी से अपना कॉलेज बदल सकेंगे। हालांकि, डिजिटल सिस्टम होने से स्कॉलरशिप और डिग्री का काम तेज होगा।वहीं दूसरी और छात्र संगठनों को डर है कि कॉलेजों को ज्यादा छूट मिलने से वे अपनी फीस बढ़ा सकते हैं।

 

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शिक्षकों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?

प्रोफेसरों की भर्ती और प्रमोशन के नियम साफ-सुथरे होंगे। रिसर्च (शोध) करने के लिए सरकार से सीधे और जल्दी पैसा मिलेगा। वहीं टीचर यूनियनों को डर है कि परमानेंट नौकरियों की जगह कॉन्ट्रैक्ट पर रखने की प्रकिया बढ़ जाएगी। इन विवादों की वजह से इस बिल की जांच अभी संसद की संयुक्त समिति (JPC) कर रही 

मानसून में बिजली का बिल क्यों बढ़ जाता है? बचत के तरीके जानिए


मॉनसून आते ही लोगों को गर्मी से राहत तो मिलती है लेकिन कई घरों में बिजली का बिल पहले से ज्यादा आने लगता है। ऐसे में लोग अक्सर सोचते हैं कि जब गर्मी कम हो गई है तो बिल बढ़ क्यों गया। बारिश के मौसम में कुछ ऐसी वजहें होती हैं जिनसे बिजली की खपत बढ़ जाती है। हवा में नमी बढ़ने, कम धूप निकलने और कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के ज्यादा इस्तेमाल का सीधा असर बिजली की खपत पर पड़ता है। कई बार लोग बिना वजह बढ़े हुए बिल को बिजली कंपनी की गलती मान लेते हैं जबकि इसकी वजह घर में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी हो सकते हैं।

 

अगर आप भी हर महीने बढ़ते बिजली बिल से परेशान हैं तो इसके पीछे की वजह जानना जरूरी है। साथ ही कुछ आसान आदतें अपनाकर बिजली की खपत को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आइए जानते हैं कि मानसून में बिजली का बिल किन कारणों से बढ़ता है और इसे कम करने के लिए आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

 

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मॉनसून में बिजली का बिल ज्यादा क्यों आता है?

बारिश के मौसम में हवा में नमी बढ़ जाती है। इसकी वजह से कई लोग एसी को लंबे समय तक चलाते हैं या उसे ड्राई मोड पर इस्तेमाल करते हैं जिससे बिजली की खपत बढ़ सकती है। वहीं लगातार बारिश होने पर कपड़े जल्दी नहीं सूखते इसलिए कई लोग ड्रायर या वॉशिंग मशीन के ड्राई फीचर का ज्यादा इस्तेमाल करने लगते हैं। इससे भी बिजली का बिल बढ़ने की संभावना रहती है। इसके अलावा बारिश के दिनों में धूप कम निकलती है और घर के अंदर अंधेरा ज्यादा रहता है। ऐसे में दिन के समय भी लाइट, पंखे और दूसरे बिजली के उपकरण ज्यादा देर तक चलते हैं। वहीं अगर फ्रिज का दरवाजा बार-बार खोला जाए या उसमें जरूरत से ज्यादा सामान भर दिया जाए तो उसे ठंडा रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है जिससे बिजली की खपत और बढ़ सकती है।

 

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बिजली का बिल कम करने के तरीके

  • एसी का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रखें।
  • जरूरत न होने पर लाइट, पंखे और दूसरे उपकरण बंद कर दें।
  • जहां पॉसिबल हो LED बल्ब का इस्तेमाल करें।
  • कपड़ों को ड्रायर की बजाय नेचुरल हवा में सुखाने की कोशिश करें।
  • एसी और फ्रिज की समय-समय पर सर्विस कराएं ताकि वह बेहतर तरीके से काम करें।
  • टीवी, चार्जर और दूसरे उपकरणों को स्टैंडबाय मोड में छोड़ने की बजाय प्लग से बंद करें।
  • दिन में जितना हो सके नेचुरल रोशनी का इस्तेमाल करें।

सूर्य ग्रह का प्रभाव कैसे जीवन को कर सकता है बर्बाद? लाल किताब से समझिए


ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रह को बेहद खास माना जाता है। सूर्य को ग्रहों का राजा भी कहा जाता है। कुंडली के अलग-अलग भावों में सूर्य देव के प्रवेश करने से उसका प्रभाव व्यक्ति के भाग्य पर अलग तरीके से पड़ता है। इससे व्यक्ति का भाग्य संवर भी सकता है और बिगड़ भी सकता है। जब सूर्य ग्रह कुंडली के शुभ भाव में विराजमान होता है, तो व्यक्ति को न सिर्फ सुख और संपत्ति मिलती है, बल्कि उसे करियर में भी नई ऊंचाइयां हासिल होती हैं। इसके विपरीत, जब कुंडली के अशुभ भाव में सूर्य देव विराजमान हों, तो व्यक्ति को जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, सेहत से जुड़ी समस्याएं भी परेशान कर सकती हैं।


लाल किताब के अनुसार, जब सूर्य अपने मित्र ग्रहों के साथ बैठता है, तो उसे शुभ स्थिति माना जाता है। सूर्य मित्र ग्रहों के साथ बैठकर व्यक्ति पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। वहीं, जब सूर्य अपने शत्रु ग्रहों या उनकी राशियों में बैठा हो, तो उसका प्रभाव नकारात्मक रहता है। सूर्य के नकारात्मक प्रभाव से व्यक्ति गुस्सैल, बीमार और ईर्ष्यालु हो सकता है।

 

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सूर्य ग्रह के प्रभाव


लाल किताब के अनुसार, सूर्य के मित्र ग्रह बृहस्पति, मंगल और चंद्रमा हैं, जबकि शनि, राहु और केतु शत्रु ग्रह माने जाते हैं। जब सूर्य इन शत्रु ग्रहों के घर में प्रवेश कर जाए या उनकी राशि में उनके साथ बैठ जाए, तो व्यक्ति के भाग्य पर बुरा असर पड़ सकता है। अब सवाल उठता है कि यदि सूर्य शत्रु ग्रहों के साथ बैठा हो, तो कुंडली के अलग-अलग भावों के अनुसार व्यक्ति के जीवन में किस प्रकार की बाधाएं आती हैं।


कुंडली के 12 भाव में सूर्य ग्रह


पहला भाव-लाल किताब के अनुसार, कुंडली का पहला भाव स्वयं का भाव होता है। अगर यहां सूर्य अपने मित्र ग्रहों के साथ बैठा हो, तो व्यक्ति के स्वभाव में आत्मविश्वास, साहस और नेतृत्व क्षमता आती है। इसके विपरीत, यदि सूर्य शत्रु ग्रहों के साथ बैठा हो, तो व्यक्ति को अपने व्यवहार में संघर्ष करना पड़ सकता है।


दूसरा भाव-इसे पैतृक संपत्ति का भाव माना जाता है। अगर यहां सूर्य अशुभ स्थिति में बैठा हो, तो व्यक्ति को पैतृक धन की हानि का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, बचपन से ही आर्थिक चुनौतियां झेलनी पड़ सकती हैं।


तीसरा भाव-इस भाव में सूर्य ग्रह मौजूद हो, तो व्यक्ति में बोलने का गुण आता है। इसके विपरीत, अगर सूर्य अशुभ स्थिति में हो, तो व्यक्ति को अपनी बात रखने में कठिनाई आ सकती है।

 

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चौथा भाव-इसे माता का भाव माना जाता है। यदि यहां सूर्य शत्रु ग्रहों के साथ बैठ जाए, तो व्यक्ति को मानसिक अशांति का सामना करना पड़ सकता है।


पांचवां भाव-लाल किताब में इस भाव को संतान का भाव माना गया है। इस भाव में मौजूद ग्रहों के अनुसार संतान का स्वभाव तय होता है। अगर यहां सूर्य देव अशुभ स्थिति में बैठ जाएं, तो व्यक्ति को संतान संबंधी कष्ट झेलने पड़ सकते हैं।


छठा भाव-अगर इस भाव में सूर्य देव राहु, शनि या अन्य शत्रु ग्रहों के साथ बैठ जाएं, तो व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में आंखों की बीमारी या ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं हो सकती हैं।


सातवां भाव-अगर इस भाव में सूर्य और चंद्रमा एक साथ बैठ जाएं, तो व्यक्ति को लव लाइफ में तनाव का सामना करना पड़ सकता है।


आठवां भाव– इस भाव में सूर्य देव बैठ जाएं, तो व्यक्ति को धन हानि का सामना करना पड़ सकता है।

 

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नौवां भाव-यहां भाव में सूर्य देव बैठ जाएं, तो व्यक्ति की अपने पिता के साथ अनबन हो सकती है। साथ ही, उसे पिता का प्रेम भी नहीं मिल पाता।


दसवां भाव-यह भाव व्यक्ति के करियर को दर्शाता है। यदि यहां सूर्य अशुभ स्थिति में बैठा हो, तो व्यक्ति को करियर में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।


ग्यारहवां भाव- इस भाव पर सूर्य का नकारात्मक प्रभाव हो, तो व्यक्ति को बार-बार नौकरी बदलनी पड़ सकती है, जिससे उसकी आय और सैलरी में अस्थिरता बनी रह सकती है।


बारहवां भाव-सूर्य अपने शत्रु ग्रहों के साथ बैठा हो, तो वह बेहद नकारात्मक प्रभाव देता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को मानसिक परेशानियों या मानसिक रोगों का सामना करना पड़ सकता है।

 

नोट: यह लेख ग्रंथ और  ज्योतिषीय मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

जॉर्डन पर सबसे अधिक हमले क्यों कर रहा ईरान, उसकी रणनीति क्या है?


अमेरिका और ईरान के बीच 12 दिनों से जंग जारी है। मगर सबसे अधिक हमलों की मार जॉर्डन को झेलनी पड़ रही है। ईरान की सेना और आईआरजीसी ने जॉर्डन के कई एयरबेस पर हमलों को अंजाम दिया। पोर्ट शहर अकाबा पर भी कई बार बैलेस्टिक मिसाइल से अटैक हो चुका है। 

 

ईरानी हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत भी हो चुकी है। बहरीन, कुवैत और कतर की तुलना में ईरान जॉर्डन को अधिक ताकत के साथ निशाना बना रहा है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि सिर्फ जॉर्डन पर ही तेहरान इतना गुस्सा क्यों दिख रहा है… आइये इसे समझे हैं। 

 

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जॉर्डन और ईरान की ताजा दुश्मनी क्या है?

युद्ध शुरू होने से पहले ईरान ने स्पष्ट किया था कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह पूरे क्षेत्र में हमलों को अंजाम देगा। खासकर उन देशों पर जहां अमेरिकी बेस और उसकी सेना की मौजूदगी है। इसके बाद सऊदी अरब समेत तमाम खाड़ी के देशों ने अपने यहां अमेरिकी सेना की तैनाती पर रोक लगा दी। यह भी कहा कि उनकी धरती से ईरान पर कोई हमला नहीं होगा। अमेरिकी हमले सिर्फ रक्षात्मक होंगे।

 

  • जॉर्डन ने अन्य खाड़ी देशों से अलग राह पकड़ी। उसने अपने यहां से अमेरिका को ईरान पर हमला करने की अनुमति दी। अमेरिका के फाइटर जेट, गोला-बारूद और सैनिकों की मेजबानी की। आज ईरान पर अमेरिका अधिकांश हमले जॉर्डन और फारस की खाड़ी पर मौजूद अपने विमानवाहक पोतों से कर रहा है।

 

  • कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान इन हमलों को जॉर्डन पर अमेरिका को पनाह देने की सजा के तौर पर थोप रहा, ताकि अन्य खाड़ी देशों तक यह संदेश जाए कि अमेरिका की मेजबानी करने का नतीजा क्या होता है? 

 

  • वहीं कुछ का तर्क यह है कि ईरान की रणनीति युद्ध को सीमित रखने की है। उसे पता है कि अगर इजरायल पर हमला किया तो जंग का दायर बढ़ सकता है। संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब भी एक सीमा के बाद पलटवार कर सकते हैं। मगर जॉर्डन का ऐसा करना लगभग नामुमकिन है।

 

  • जॉर्डन की सरकार ने लगातार हो रहे ईरानी हमलों की समय-समय पर निंदा की। पिछले रविवार को ईरान और जॉर्डन के बीच राजनयिक तनाव भी देखने को मिला। जॉर्डन ने ईरानी राजदूत को तलब किया और तुरंत हमले रोकने की मांग की।

अमेरिका ने जॉर्डन में सैनिकों को क्यो भेजा?

रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा सहयोग समझौते के तहत जॉर्डन के सैन्य ठिकानों तक अमेरिका की पहुंच है। यही समझौता आज जॉर्डन को भारी पड़ रहा है। हालांकि मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच जॉर्डन आज भी तटस्थ है। एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान में जॉर्डन में लगभग 4000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। कतर, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन से कई अमेरिकी सैनिकों को जॉर्डन में भेजा गया है। इसकी वजह यह है कि इन देशों की तुलना में जॉर्डन अधिक सुरक्षित है।

 

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जॉर्डन में अमेरिका को कितना नुकसान?

पिछले हफ्ते ईरान ने जॉर्डन में पांच बड़े हमलों को अंजाम दिया। इनमें तीन अमेरिकी सैनिकों की जान गई और बड़ी संख्या में जवान घायल भी हुए। ईरान ने अपना पहला हमला किंग फैसल एयर बेस के आवासीय परिसर पर किया। यहां पांच अमेरिकी सैनिकों को चोट आई। दूसरा हमला एक अन्य बेस पर किया गया। यहां बड़ी संख्या में ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टर को नुकसान पहुंचा है।

 

तीसरा हमला मुवफ्फक साल्टी एयरबेस पर किया गया। गनीमत रही की किसी को कोई चोट नहीं आई। इसके बाद 17 जुलाई को ईरान ने इसी एयरपोर्ट पर दोबारा हमला किया। इस हमले में तीन सैनिकों की जान गई और 20 जवान घायल हुए।  

‘असामाजिक तत्व उठा रहे फायदा’, सोनम वांगचुक ने की शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील


दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन जारी है। इसी प्रदर्शन को देखते हुए देश के कई राज्यों में भी नीट और अन्य पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन चल रहे हैं। प्रयागराज, पटना, नासिक, मुंबई, हैदराबाद आदि शहरों में आंदोलन हो रहे हैं। मगर, इन प्रदर्शनों में कई जगह हिंसा भी देखने को मिली है। ऐसे में सोनम वांगचुक ने छात्रों से प्रदर्शन में अहिंसा और शांति बनाए रखने की अपील की है।

 

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक यह शांति की अपील अस्पताल से की है। वह इस समय गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं। वांगचुक शुरुआत से ही छात्रों के इस प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से चलाने के पक्षधर हैं। 

 

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वांगचुक की छात्रों से अपील


सोनम वांगचुक ने गुरुवार को अपनी भूख हड़ताल के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर छात्रों से अपील की। उन्होंने लिखा, ‘दिन 26 शांति और सिर्फ शांति ही मेरा रास्ता है।’

 

 

 

 

‘शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का गलत फायदा उठा रहे’

 

उन्होंने कहा, ‘जंतर-मंतर पर जहां विरोध-प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण बना हुआ है, वहीं मुझे ये जानकर बेहद दुख हुआ है कि दूसरी जगहों पर कुछ असामाजिक तत्व हिंसा भड़काने के लिए इन शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का गलत फायदा उठा रहे हैं।’

 

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उन्होंने आंदोलन में शामिल युवाओं कहा कि वो ऐसे तत्वों के बहकावे में बिल्कुल न आएं और अपनी एकजुटता को किसी भी तरह की हिंसा का शिकार न होने दें। सोनम वांगचुक ने आगे कहा कि सामने वाला चाहे जो भी करे, हमारा जवाब सिर्फ फूल होना चाहिए। कृपया हर कीमत पर इस परंपरा को बनाए रखें।

बड़े आराम से करा पाएंगी ब्रेस्ट फीडिंग, नई मां जान लें मैटरनिटी ब्रा के फायदे


प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं की ब्रेस्ट में बदलाव आना सामान्य बात है। यह बदलाव डिलीवरी तक रहते हैं। डिलीवरी के बाद महिलाओं को ब्रेस्ट में दर्द की समस्या रहती है। इन समस्याओं को कम करने के लिए आपको मैटरनिटी ब्रा पहननी चाहिए। आज के समय में नई मांओं में मैटरनिटा ब्रा का ट्रेंड बढ़ गया है। पहले क समय में मैटर्निटी ब्रा की सुविधा नहीं थी इसलिए नॉर्मल ब्रा से काम चलाया जाता था। इस वजह से उनके ब्रेस्ट का साइज बिगड़ जाता था और अन्य परेशानियां भी होती थी। आज नई मांओं के पास मार्केट में मैटर्निटी ब्रा का ऑप्शन उपल्बध है। इस ब्रा को पहनने से ब्रेस्ट शेप में रहते हैं। साथ ही यह आरामदायक भी होता है। आइए जानते हैं मैटनिटी ब्रा क्यों पहनना चाहिए?

 

एक्सपर्ट्स के मुताबिक दूसरी तिमाही में ही मैटर्निटी ब्रा पहनना शुरू कर देना चाहिए ताकि आपको ब्रेस्ट में हो रहे बदलाव के दौरान कम परेशानी महसूस हो। मैटरनिटी ब्रा गर्भावस्था के दौरान पहनना चाहिए और नर्सिंग ब्रा डिलीवरी के बाद पहनना चाहिए। इस पहनने से बच्चे को दूध पिलाना आसान होता है।

 

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बच्चे को दूध पिलाना आसान है

बच्चे के जन्म के बाद ब्रेस्ट भारी हो जाते हैं। ऐसे में इसका कवरेज ऐरिया ज्यादा होता है। साथ ही यह सॉफ्ट कपड़े से बना होता है जिसकी वजह से आपको चुभते नहीं है। शुरुआत में हर दो घंटे के बाद बच्चे को भूख लगती है। इस तरह के फ्रंट ब्रा की बहुत जरूरत होती है ताकि आप अपने बच्चे को आसानी से दूध पिला पाएं।

सही फिटिंग जरूरी

ज्यादातर महिलाएं सही फिटिंग वाली ब्र नहीं पहनती है। गलत साइज की ब्रा पहनने से ब्रेस्ट का शेप बढ़ता और बिगड़ता है। ब्रा खरीदने से पहले अपने साइज का खास ध्यान रखें। खासतौर से गर्भावस्था से डिलिवरी तक ब्रेस्ट के साइज में काफी बदलाव आता है। ऐसे में सही कप और एस्ट्रा हुक वाली ब्रा चुनें ताकि पहनने में अनकंफर्टेबल महसूस न करें।

कॉटन के कपड़े वाली ब्रा खरीदें

हमेशा कॉटन वाली ब्रा खरीदनी चाहिए। खासतौर से प्रेग्रेंसी के दौरान कॉटन वाली ब्रा पहननी चाहिए ताकि रैशेज की समस्या न हो।

 

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इन बातों का रखें ध्यान

  • मैटरनिटी ब्रा बहुत ही मुलायम कपड़े से बना होता है जिसकी वजह से त्वचा पर रैशेज नहीं पड़ते हैं। इस ब्रा को धोने के लिए लिक्विड डिटर्जेंट का इस्तेमाल करें। हमेशा ब्रा क हाथों से धोकर हल्की धूप में सुखाएं जिससे ब्रा की इलास्टिक खराब नहीं होता है और लंबे समय तक चलता है।
  • डिलीवरी के कम से कम 6 महीनों तक अंडर वायर ब्रा नहीं पहननी चाहिए।

मीन और धनु राशि वाले लोगों को करियर में सफलता मिलेगी?


आज का दिन मीन और धनु राशि वालों के लिए बेहद शानदार रहने वाला है, जहां उन्हें करियर में नई सफलता मिलेगी। आज का सूर्योदय नई सकारात्मक ऊर्जा और नए अवसरों की सौगात लेकर आया है। पंचांग के अनुसार आज आषाढ़ महीने की दशमी तिथि है। साथ ही आज मूलांक 5 बनता है, जो बुध ग्रह का प्रतीक माना जाता है। मूलांक 5 बुद्धि, तर्कशक्ति और जल्द फैसला लेने की क्षमता को बढ़ावा देगा। आज के दिन आकाशीय मंडल में ग्रहों का विशेष योग बना हुआ है, जहां बुध और गुरु की नजर से बौद्धिक क्षमता बढ़ेगी।

 

गुरुवार का दिन होने के कारण देवगुरु बृहस्पति का प्रभाव आज ज्ञान, भाग्य और धर्म-कर्म के कामों में बढ़ोतरी लाएगा। आज की ऊर्जा बेहद ऊर्जावान, व्यावहारिक और दूरगामी सोच को बढ़ावा देने वाली है। नए विचारों पर काम करने के लिए आज का दिन बेहद शुभ है। इसके अलावा आज के दिन अटके हुए कामों को सही रणनीति से पूरा करने के लिए भी आज का दिन शुभ है। रिश्तों में संवाद और समझदारी बनी रहेगी, बस आवश्यकता है कि आप अपनी ऊर्जा को सही दिशा में चलाएं। आइए जानते हैं कि आज का दिन आपकी राशि के लिए क्या खास संकेत दे रहा है।

 

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राशिफल

 

मेष राशि

 

ऑफिस में आपके काम की सराहना होगी। नया प्रोजेक्ट शुरू करने का मौका मिलेगा। अचानक धन लाभ के योग बन रहे हैं। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। लव पार्टनर के साथ किसी खूबसूरत जगह की यात्रा की योजना बन सकती है।

आज क्या करें: हनुमान चालीसा का पाठ करें।

आज क्या न करें: किसी से उग्र भाषा में बात न करें।

 

वृषभ राशि

 

नौकरीपेशा जातकों पर आज काम का बोझ थोड़ा बढ़ सकता है। धन निवेश करने से पहले अनुभवी व्यक्ति की सलाह अवश्य लें। पारिवारिक माहौल सुखद रहेगा। पार्टनर के साथ पुराने मतभेद सुलझाने का सही समय है।

आज क्या करें: भगवान विष्णु को केले अर्पित करें।

आज क्या न करें: ज्यादा धन खर्चों से बचें और उधार का लेन-देन न करें।

 

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मिथुन राशि

 

मूलांक 5 का प्रभाव आज आपकी राशि के लिए बेहद शुभ है। आपकी बातचीत से कोई भी काम आसानी से पूरे हो जाएंगे। रिश्तों में मिठास बढ़ेगी। अपने पार्टनर के साथ दिल की बात  शेयर करेंगे।

आज क्या करें: गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें।

आज क्या न करें: एक समय में कई कामों में हाथ न डालें।

 

कर्क राशि

 

दफ्तर में सहकर्मियों से सहयोग मिलेगा, लेकिन वित्तीय मामलों में थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत है। आज बजट बनाकर चलना आपके लिए फायदेमंद रहेगा। परिवार के सदस्यों के साथ कुछ समय बिताएं।

आज क्या करें: शिवलिंग पर दूध और जल से अभिषेक करें।

आज क्या न करें: नकारात्मक विचारों को खुद पर हावी न होने दें।

 

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सिंह राशि

 

आपकी लीडरशिप क्वालिटी आज रंग लाएगी। सीनियर अधिकारियों से प्रोत्साहन मिलेगा। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। लव लाइफ में उत्साह बना रहेगा। जीवनसाथी की कोई बड़ी उपलब्धि घर में खुशियां लाएगी।

आज क्या करें: सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें।

आज क्या न करें: सहकर्मियों के सुझावों को अनदेखा न करें।

 

कन्या राशि

 

व्यापार करने वाले लोगों के लिए आज का दिन बेहद शुभ होगा। रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है। नौकरी में पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। जीवनसाथी के साथ तालमेल बेहतरीन रहेगा। 

आज क्या करें: किसी कन्या को मिठाई खिलाएं।

आज क्या न करें: बहकावे में आकर अपनी योजनाएं उजागर न करें।

 

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तुला राशि

 

नौकरी में स्थिति सामान्य रहेगी। साझेदारी के काम में अच्छा मुनाफा होने की संभावना है। आर्थिक स्थिति आज ठीक-ठाक रहेगी, इसलिए फिजूलखर्च पर नियंत्रण रखें। लव लाइफ में नया मोड़ आ सकता है। 

आज क्या करें: जरूरतमंदों को चने की दाल दान करें।

आज क्या न करें: जल्दबाजी में कोई फैसला न लें।

 

वृश्चिक राशि

 

ऑफिस के दुश्मनों पर आज आपको जीत होगी, जो भविष्य में लाभकारी सिद्ध होगी। पैसों का लेन-देन ध्यानपूर्वक करें। संतान पक्ष से कोई शुभ समाचार मिल सकता है। लव पार्टनर के साथ आपसी समझ और विश्वास में बढ़ोतरी होगी।

आज क्या करें: हनुमान जी को गुड़ और चने का भोग लगाएं।

आज क्या न करें: स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न बरतें।

 

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धनु राशि

 

आपकी राशि के स्वामी गुरु का प्रभाव आज आपके ज्ञान और निर्णय क्षमता को बढ़ाएगा। व्यापार में तरक्की के नए रास्ते खुलेंगे। शेयर बाजार या निवेश से लाभ संभव है। पारिवारिक जीवन खुशहाल रहेगा। जीवनसाथी के साथ घूमने जाएंगे।

आज क्या करें: विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।

आज क्या न करें: किसी विवादित मामले में दखल देने से बचें।

 

मकर राशि

 

ऑफिस में काम का दबाव महसूस हो सकता है। आर्थिक मामलों में आज सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है। घर के सदस्यों का मार्गदर्शन मिलेगा। पार्टनर के साथ संवादहीनता की स्थिति न बनने दें।

आज क्या करें: शनिदेव के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

आज क्या न करें: किसी भी व्यक्ति से बिना बात के बहस न करें।

 

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कुंभ राशि

 

नई तकनीक और नए विचारों के प्रयोग से कार्यक्षेत्र में बड़ा लाभ मिलेगा। धन कमाने के नए रास्ते साफ होंगे। दोस्तों और लव पार्टनर के साथ सुखद समय व्यतीत होगा। जीवनसाथी का हर मोड़ पर सहयोग प्राप्त होगा।

आज क्या करें: पक्षियों को दाना डालें ।

आज क्या न करें: अपनी बातों को दूसरों के साथ शेयर करने से बचें।

 

मीन राशि

 

नौकरीपेशा लोगों के लिए यह दिन शानदार  है। अधिकारी आपके काम से खुश होंगे। पैसों की स्थिति में सुधार होगी और रुका हुआ धन प्राप्त होने के योग हैं। प्रेम जीवन में ताजगी और सकारात्मकता बनी रहेगी।

आज क्या करें: गुरुजन और माता-पिता का आशीर्वाद लें।

आज क्या न करें: आलस के कारण काम को टालने की भूल न करें।

 

नोट: यह राशिफल ज्योतिषीय मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।