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क्या इजरायली पीएम और UAE के राष्ट्रपति के बीच हुई सीक्रेट मीटिंग? सच आया सामने

ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष के बीच एक खबर ने पूरे मीडिल ईस्ट में राजनीति हलचल को तेज कर दिया था। इजरायल के इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से दावा किया गया था कि नेतन्याहू ने युद्ध के दौरान UAE का एक सीक्रेट दौरा किया। दावा किया गया कि वह इस दौरे के दौरान नेतन्याहू ने  राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से सीक्रेट मुलाकात की। 

 

इजरायली पीएम के ऑफिस से जारी बयान के अनुसार, दोनों देशों के अध्यक्षों के बीच यह मुलाकात इजारयल के ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान के दौरान हुई। बयान में दावा किया गया है कि इस सीक्रेट मीटिंग से दोनों देशों के रिश्तों में ऐतिहासिक सफलता मिली है। हालांकि, अब यूएई की ओर से इजरायली पीएम ऑफिस के इन दावों पर बयान आ गया है। 

 

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यूएई ने क्या बताया?

यूएई ने इजरायल के इन दावों को खारिज कर दिया कि इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने यूएई का कोई सीक्रेट दौरा किया है। यूएई के विदेश मंत्रालय ने इन रिपोर्ट्स को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है।

यूएई के विदेश मंत्रायल ने बयान जारी कर कहा कि देश (यूएई) में न तो नेतन्याहू का कोई गुप्त दौरा हुआ और न ही किसी इजरायली सैन्य प्रतिनिधिमंडल को बुलाया गया। मंत्रालय ने कहा कि यूएई और इजरायल के संबंध पूरी तरह सार्वजनिक और आधिकारिक हैं, इनमें किसी तरह की गुप्त व्यवस्था शामिल नहीं है।

 

इजरायल ने किया था दावा

इजरायल ने प्रधानमंत्री के ऑफिस से एक बयान जारी कर कहा था कि नेतन्याहू ने यूएई का दौरा किया है। बयान में कहा, ‘ऑपरेशन रोअरिंग लायन के बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुप्त रूप से संयुक्त अरब अमीरात का दौरा किया, जहां उन्होंने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात की। इस यात्रा से इजरायल और यूएई के संबंधों में ऐतिहासिक सफलता मिली है।’

 

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मोसाद के चीफ का दौरा

बेंजामिन नेतन्याहू से पहले यूएई के दौरे पर इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के चीफ डेविड बारनिया गए थे। द टाइम्स ऑफ इजराइ की रिपोर्ट के अनुसार, मोसाद चीफ कम से कम दो बार इस संघर्ष के दौरान यूएई गए हैं। इसके साथ ही बताया गया है कि दोनों देश एक पेट्रोकेमिकल संयंत्र पर हमला करने की योजना भी मिलकर बना रहे हैं। 

…तो नहीं होगी तेस गैस की कमी, UAE के साथ बड़ी डील करेंगे PM मोदी


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 मई को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दौरे पर जा रहे हैं। इस यात्रा के दौरान भारत और UAE के बीच ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई अहम समझौते होने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक LPG यानी रसोई गैस और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण को लेकर दो बड़े करार किए जा सकते हैं। सरकार का मानना है कि इन समझौतों से भारत की ऊर्जा जरूरतों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

 

प्रधानमंत्री मोदी UAE में करीब चार घंटे रुकेंगे। इस दौरान उनकी मुलाकात यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान से होगी। दोनों नेताओं के बीच भारत-UAE रणनीतिक साझेदारी, व्यापार, निवेश और पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा होने की उम्मीद है। इसके बाद प्रधानमंत्री पांच दिन के यूरोप दौरे पर रवाना होंगे, जहां वह कई देशों के शीर्ष नेताओं से मुलाकात करेंगे।

 

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ऊर्जा सुरक्षा पर रहेगा खास फोकस

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते संकट के कारण दुनिया भर में तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। दुनिया का लगभग 20 फीसदी कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए यूएई के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है।

व्यापार और निवेश बढ़ाने पर होगी चर्चा

भारत और UAE के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। UAE भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। पिछले 25 वर्षों में UAE भारत में निवेश का सातवां सबसे बड़ा स्रोत रहा है। माना जा रहा है कि इस दौरे में दोनों देश निवेश, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमत हो सकते हैं।

 

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यूरोप दौरे में कई अहम बैठकें

यूएई दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा करेंगे। इस दौरान रक्षा, ग्रीन एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष, स्टार्टअप और नई तकनीकों जैसे मुद्दों पर बातचीत होगी। सरकार को उम्मीद है कि इस यात्रा से भारत और यूरोपीय देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंध और मजबूत होंगे।

सुबह की चाय से लेकर रात की चॉकलेट तक, दिनभर में कितनी चीना खा रहे आप?

हम सभी जानते हैं कि चीनी सेहत के लिए हानिकारक है। इसकी वजह से विभिन्न प्रकार की बीमारियां होती हैं। दिन भर में एक चम्मच चीनी खाने से स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है। दिक्कत तब शुरू होती है जब हम चीनी को अलग-अलग रूप में खाते हैं। हम भारतीयों को मीठा बहुत पसंद है। कोई भी त्योहार, शादी, मुंडन हो या श्राद्ध मीठा आपको जरूर मिलेगा। यu मीठा हमारे लिए किसी जहर से कम नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ दिन पहले ‘मन की बात’ कार्यक्रम में लोगों से अपील की थी चीनी का सेवन कम करें क्योंकि चीनी मधुमेह और डायबिटीज जैसी बीमारियों का मुख्य कारण है।

 

हम में से ज्यादातर लोग अपने दिन की शुरुआत एक कप चाय के साथ करते हैं। इसके बाद बिस्किट, कुकीज, चिप्स, चॉकलेट से लेकर तमाम चीजें खाते-पीते हैं। इन चीजों में नैचुरल और एडेड शुगर होती है। यह शुगर सेहत के लिए नुकसानदायक होती है। चीनी भी दो तरह की होती है एक नैचुरल और दूसरी एडेड शुगर। दूध, फल और सब्जियों में नैचुरल शुगर होती है। वहीं, बिस्किट, कुकीज, आइसक्रीम, चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक समेत अन्य खाने-पीने की चीजों में एडेड शुगर होती है। क्या आपने कभी सोचा है कि हम दिन भर में कितनी मात्रा में चीनी खाते हैं?

 

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दिन भर में कितनी चीनी खाते हैं आप?

आपको बता दें कि एक छोटे चम्मच चीनी में 4 ग्राम शुगर पाया जाता है। एक व्यक्ति अगर एक कप में चाय में 1 से 2 चम्मच चीनी का इस्तेमाल करता है तो वह एक बार में 8 ग्राम शुगर खा रहा है। आमतौर पर लोग सुबह और शाम के समय में एक कप चाय पीते हैं। इसका मतलब है कि 2 कप चाय में लगभग 16 ग्राम चीनी पाई जाती है।

 

बिस्किट

 

100 ग्राम के बिस्किट में 20 से 36 ग्राम तक शुगर होता है। शुगर की मात्रा बिस्किट के टाइप और उसके ब्रांड पर निर्भर करती है। एक बार में अगर आप 4 से 5 बिस्किट खाते हैं तो उसमें 2 से 8 ग्राम तक चीनी पाई जाती है। पॉपुलर ब्रांड पारले जी के 100 ग्राम के बिस्किट पैकेट में 33 ग्राम शुगर पाया जाता है।

 

 

जूस

 

पैकेट वाले 200 से 250 मिली लीटर के जूस में 20 से 30 ग्राम तक शुगर होता है जिसका मतलब है कि 5 से 8 चम्मच चीनी। इसमें नैचुरल और आर्टिफिशयल दोनों प्रकार का शुगर पाया जाता है।  

 

ब्रेड

 

अगर आप एक बार में 2 से 4 ब्रेड स्लाइस खा रहे हैं तो उसमें 1 से 2 ग्राम शुगर पाया जाता है। हालांकि शुगर की मात्रा ब्रेड के ब्रांड के हिसाब से कम और ज्यादा हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि आप ब्रेड पर न्यूट्रिशन लेबल जरूर देखें।

 

चावल

 

एक कटोरी में 150 से 200 ग्राम चवाल आते हैं। इसमें 0.1 से 0.3 ग्राम शुगर होता है। चावल में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट होता है जो एक दम से कार्ब्स को ग्लूकोज में बदल देता है। इस वजह से ब्लड में शुगर का लेवल बढ़ता है।

 

रोटी

 

गेंहू की चार रोटियों में लगभग 60 ग्राम कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है जो पाचन के समय ग्लूकोज में टूटता है। इसका मतलब है डेढ से 2 चम्मच चीनी है। 4 रोटियों में 285 से 550 कैलोरी होती है। 

 

कॉफी

 

अगर आप ब्लैक कॉफी पी रहे हैं तो उसमें चीनी की मात्रा जीरो है। अगर आप एक कप कॉफी में दूध और चीनी मिला रहे हैं तो उसमें 4 ग्राम शुगर पाया जाता है।

 

सॉफ्ट ड्रिंक

 

सॉफ्ट ड्रिंक में सबसे ज्यादा चीनी का इस्तेमाल होता है। 600 मिली लीटर की बोतल में 35 से 65 ग्राम शुगर पाया जाता है। अगर आप रोजाना 250 मिली लीटर की कोल्ड ड्रिंक पी रहे हैं तो उसमें 25 से 27 ग्राम तक शुगर पाया जाता है।

 

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कुकीज

 

कुकीज में बिस्किट के मुकाबले ज्यादा शुगर होती है। 24 से 30 कुकीज में 180 ग्राम शुगर पाया जाता है। औसतन 4 से 5 कुकीज में 25 ग्राम शुगर पाया जाता है।

 

चॉकलेट

 

100 ग्राम चॉकलेट में 50 से 60 ग्राम शुगर पाया जाता है। डॉक चॉकलेट में शुगर की मात्रा कम होती है। चॉकलेट में शुगर की मात्रा उसके टाइप और ब्रांड पर निर्भर करती है। एक 20 ग्राम के पैकेट के चॉकलेट में 11 से 12 ग्राम शुगर पाया जाता है।

कितनी मात्रा में चीनी खाना सही?

एक व्यक्ति दिन भर में 140 से 150 ग्राम चीनी का सेवन करता है। यह आंकड़ा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के तय मानक से 6 गुना ज्यादा है। WHO के मुताबिक एक व्यक्ति को एक दिन में 6 चम्मच से ज्यादा मीठा नहीं खाना चाहिए। अगर आप कम चीनी खाते हैं तो डायबिटीज और मोटापे जैसी गंभीर बीमारियों से बचे सकते हैं। WHO के अनुसार एडेड शुगर आपकी डेली कैलोरी में 10% से ज्यादा नहीं होना चाहिए। 

किसे कितनी मात्रा में चीनी खाना चाहिए?

  • एक साल तक के बच्चे को 10 ग्राम से कम चीनी खाना चाहिए।
  • 2 से 3 साल के बच्चों को 14 ग्राम से ज्यादा चीनी नहीं खाना चाहिए।
  • 4 से 6 साल के बच्चे को 19 ग्राम से ज्यादा चीनी नहीं खाना चाहिए।
  • 7 से 10 साल के बच्चे को 24 ग्राम से ज्यादा चीनी नहीं खाना चाहिए।
  • एडल्ट्स 25 से 30 ग्राम चीनी खा सकते हैं।

हमारे खाने पीने की कई चीजों में एडेड शुगर होता है। अपनी डेली रूटीन में चीनी की जगह पर हेल्दी ऑप्शन को अपनाएं। सुबह की चाय या कॉफी की जगह अपने दिन की शुरुआत ब्लैक टी के साथ करें। ब्रेकफास्ट में ब्रेड की जगह पर इडली या फ्रूट्स खा सकते हैं। इसके अलावा लंच में छाछ पी सकते हैं। शाम में बाहर की तली-भूनी चीजों की जगह पर हेल्दी स्नैक्स खाएं। इसमें मखाना, नट्स और भूनी हुई मूंगफली खा सकते हैं।

 

उमानंद आइलैंड को क्यों कहते हैं ‘भस्माचल’, शिव मंदिर की कहानी क्या है?


असम की राजधानी गुवाहाटी के ब्रह्मपुत्र नदी के बीच उमानंद आइलैंड है, जो न सिर्फ अपनी खूबसूरती बल्कि धार्मिक महत्व के लिए भी जाना जाता है। इस आइलैंड में उमानंद मंदिर है, जहां उमानंद बाबा की पूजा-अर्चना की जाती है, जो शिव भगवान के एक रूप माने जाते हैं। उमानंद मंदिर में जो भी भक्त दर्शन करने आते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। इसी वजह से इस मंदिर में हर साल हजारों लोग दर्शन करने जाते हैं। खासकर शिवरात्रि के पर्व में हजारों भक्त मंदिर आते हैं। धार्मिक मान्यता के मुताबिक उमानंद द्वीप को भस्माचल भी कहा जाता है। इस नाम से जुड़ी एक पौराणिक कथा है।

 

असम के गुवाहाटी में ही मां कामाख्या का मंदिर है, जहां दर्शन करने आए भक्त शिव भगवान के इस मंदिर में भी दर्शन करने आते हैं। धार्मिक मान्यता के मुताबिक इसी जगह पर भगवान शिव ने कामदेव का वध किया था। अब सवाल उठता है कि उमानंद मंदिर का इतिहास क्या है, साथ ही सवाल उठता है कि इसे भस्माचल क्यों कहा जाता है?

 

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उमानंद मंदिर से जुड़ी कथा

 

धार्मिक कहानियों के मुताबिक उमानंद द्वीप शिवजी और मां सती के प्रेम का प्रतीक है। मां सती राजा दक्ष की बेटी थीं, जिन्हें शिवजी और सती जी का रिश्ता पसंद नहीं था। इसी वजह से मां सती ने राजा दक्ष से सारे रिश्ते तोड़ दिए और उमानंद द्वीप पर आकर रहने लगीं। सती जी और भगवान शिव ने कई सालों तक इसी जगह अपना जीवन बिताया था। इसी वजह से कई सालों बाद 1694 में यहां शिव जी का मंदिर बनाया गया।

 

भस्माचल नाम से जुड़ी पौराणिक कथा

 

पौराणिक कथाओं के मुताबिक एक बार राजा दक्ष ने पूजा समारोह रखवाया था, जिसमें मां सती को भी बुलाया था, जबकि भगवान शिव जी को नहीं बुलाया गया था। जिस वजह से सती जी दुखी हुईं और शिव जी से इच्छा जताई कि वह पूजा समारोह में जाएं। शिव जी ने सती की बात मान ली। जिसके बाद दोनों दक्ष के घर पहुंचे तो राजा दक्ष शिव भगवान को देख आगबबूला हो गए। पूरे समारोह में उन्होंने शिव जी और सतीजी का अपमान किया। जिसके बाद सती जी शिव भगवान का अपमान सह नहीं पाईं और आत्महत्या कर ली।

 

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सती जी के बिछड़ने के बाद शिव भगवान बेहद दुखी रहने लगे थे। जिसे देख भगवान विष्णु जी ने कामदेव को उमानंद द्वीप भेजा। कामदेव उमानंद में आकर नृत्य करने लगे, ताकि शिव जी का मन शांत हो जाए। उसी वक्त भगवान शिव बेहद गुस्से में थे, तब उन्होंने कामदेव को भस्म कर दिया। जिसके बाद कामदेव का सुंदर स्वरूप हमेशा के लिए खत्म हो गया। इसी वजह से इस मंदिर को भस्माचल नाम से जाना जाता है।

 

कैसे जाएं उमानंद मंदिर?

 

उमानंद मंदिर जाने के लिए आपको ट्रेन, फ्लाइट या टैक्सी के जरिए असम के गुवाहाटी पहुंचना होगा। गुवाहाटी शहर से 7.4 किलोमीटर दूर ब्रह्मपुत्र नदी के पास आना होगा। जिसके बाद नाव में बैठकर उमानंद मंदिर पहुंचा जा सकता है।

 

डिस्क्लेमर – यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि नहीं की जाती।

न एक मिसाइल दागी, न ड्रोन अटैक किया, UAE कैसे निकाल रहा ईरान से दुश्मनी


अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी की तड़के ईरान पर हमला किया था। कुछ घंटे बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू की। ईरान ने करीब 83 फीसदी मिसाइल और ड्रोन हमलों को खाड़ी सहयोग परिषद यानी जीसीसी देशों पर अंजाम दिया। कुछ हमले सऊदी अरब पर भी किए गए। हालांकि बाद में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने सऊदी समकक्ष से बात की और स्पष्ट किया कि इन हमलों के पीछे ईरान नहीं है। खाड़ी में सबसे अधिक ईरानी हमलों को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने झेला है। मगर ईरान ने उसके समक्ष ऐसा कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया।

 

भौगोलिक नजदीकी और राजनयिक संबंधों के कारण यूएई को सबसे अधिक मार झेलनी पड़ी है। ईरान तट से संयुक्त अरब अमीरात की सीमा बेहद करीब है। उसके इजरायल और अमेरिका के अच्छे संबंध हैं। यूएई खाड़ी का इकलौता देश है, जिसने इजरायल को मान्यता दे रखी है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि युद्ध के वक्त इजरायल ने अपने एयर डिफेंस सिस्टमों को यूएई में तैनात किया था। ईरान को अपने दुश्मन के साथ यूएई की यह नजदीकियां नहीं पसंद आई।

 

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एक वजह यह है कि ईरान दुनिया का सबसे अहम व्यापारिक केंद्र है। वैश्विक वित्तीय और पर्यटन केंद्र है। ईरान यहां हमला करके पूरी दुनिया में दहशत फैलाना चाहता है। यही कारण है कि यूएई को सबसे अधिक नुकसान भी पहुंचाया। हाल ही में मिडिल ईस्ट आई ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि ईरानी अधिकारियों ने सऊदी अरब से कहा था कि वह यूएई को कुचलने की योजना बना रहा है। 

 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यूएई का प्रशासन ईरानी हमलों के खिलाफ आवाज न उठाने वाले अपने अरब सहयोगियों से नाराज है। यूएई अब ईरान के खिलाफ निर्णायक जंग चाहता है। पहले संयुक्त अरब अमीरात ने धैर्य का परिचय दिखाया। मगर अब खुलकर ईरान के खिलाफ आवाज उठाने लगा है। मार्च महीने में ही यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने ईरान को ‘दुश्मन’ बताया था और कहा कि उनका देश आसान शिकार नहीं है।

 

जंग शुरु होने के अगले दिन ही यूएई ने ईरान में अपना दूतावास बंद कर दिया था। सभी कर्मचारियों को बुला लिया था। अपने देश में स्थित ईरानी सांस्कृतिक केंद्रों और स्कूल को भी बंद कर दिया। यहां तक कि यूएई ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने में सैन्य सहयोग देने की भी बात कही थी।

 

ईरान का आरोप है कि यूएई की धरती से ईरान के सैन्य ठिकानों और बंदरगाहों पर हमला किया जा रहा है। हालांकि इन दावों का यूएई ने खंडन किया। धमकी भरे लहजे में ईरान ने कहा कि हम आपको (UAE) अमेरिका और इजरायल के सैन्य अड्डा नहीं बनन देंगे। संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार अनवर गरगाश भी ईरान को अपने देश का मुख्य दुश्मन बता चुके हैं।

 

ईरान भले ही आज यूएई पर मिसाइलों की बारिश कर रहा, लेकिन यूएई उसके लिए एक अहम वाणिज्यिक केंद्र है। मौजूदा युद्ध ने दोनों देशों को संबंध तोड़ने की कगार पर पहुंच दिया है। इस बीच वीजा रद्द होने से यूएई में अपना व्यवसाय बनाने वाले लाखों ईरानी फंस चुके हैं।

 

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ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक यूएई में फंसे ईरानी नागरिकों को निकलने के लिए कुछ ही दिन का समय दिया गया। वहीं यूएई से किसी अन्य देश जाने वाले ईरानी नागरिकों को वापस आने नहीं दिया जा रहा है। यहां तक कि सामान लेने तक का भी समय नहीं दिया गया। यूएई के सरकार ने संपत्ति जब्त नहीं की। मगर कुछ ईरानी नागरिक अपनी संपत्ति का प्रबंधन नहीं कर सकते हैं। अन्य लोगों को विदेश में पैसा ट्रांसफर करने को कहा गया है।

 

चीन के बाद संयुक्त अरब अमीरात ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। यहां का जेबेल अली बंदरगाह वर्षों से ईरान का सबसे अहम वाणिज्यिक केंद्र है। ईरानी आयात और निर्यात का एक बड़ा हिस्सा यही से गुजरता है। मगर अब ईरान से जुड़े निर्यात ऑर्डरों को भी कैंसिल किया जा रहा है। दूसरी तरफ ईरानी अधिकारियों का भी मानना है कि अब यूएई के साथ उसके रिश्ते सामान्य नहीं होंगे। यही कारण है कि पाकिस्तान के बंदरगाह और कतर के हमाद पोर्ट को विकल्प के तौर पर ईरान देख रहा है। 

‘जितनी बड़ी चोरी, उतना बड़ा इनाम’, NEET रद्द होने पर सरकार पर भड़के राहुल गांधी


NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद देश में सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राहुल ने तीखा हमला करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का तथाकथित अमृत काल अब देश के युवाओं के लिए विष काल में तब्दील हो चुका है। उन्होंने मोदी सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि बड़ी चोरी करने वाले को सरकार बड़ा इनाम देती है।

 

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि BJP सरकार उन लोगों को संरक्षण दे रही है जो छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 22 लाख से अधिक छात्रों की कड़ी मेहनत, उनके सपने और परिवारों द्वारा दी गई कुर्बानियां इस भ्रष्ट व्यवस्था की भेंट चढ़ गई हैं। राहुल के अनुसार, यह केवल परीक्षा का रद्द होना नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य के खिलाफ एक संगठित अपराध है।

 

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राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि आज शिक्षा व्यवस्था में मेहनत से ज्यादा पैसे और पहुंच का महत्व हो गया है। उन्होंने लिखा, ‘जिस बाजार में छात्रों के सपनों की नीलामी हो रही है, वहां सिर्फ एक नियम चलता है जितनी बड़ी चोरी, उतना बड़ा इनाम।’ अपने इस पोस्ट में उन्होंने लोगों से यह भी कहा कि एक काम कीजिए खुद Google कीजिए ‘NEET 2024 की भयंकर चोरी के दौरान NTA का DG कौन था और मोदी सरकार ने उसे आज कहां बैठाया है?’

एक और पोस्ट में राहुल गांधी ने कहा, ‘परीक्षा नहीं, NEET अब नीलामी है। मोदी जी, जब आप अपनी हर नाकामी का बिल जनता पर डालते हैं, तो गरीब के बच्चों का भविष्य भी उसी बिल में आता है। 22 लाख बच्चों का भरोसा टूटा है। मोदी सरकार से बड़ा खतरा भारत के युवाओं के सपनों के लिए कोई नहीं।’ उन्होंने इस पोस्ट में आरोप लगाया कि कई सवाल परीक्षा से 42 घंटे पहले व्हाट्सएप पर बिक रहे थे।

 

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23 लाख छात्रों पर पड़ा असर

गौरतलब है कि 3 मई को आयोजित NEET UG 2026 परीक्षा में करीब 23 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था। परीक्षा रद्द होने के बाद अब छात्रों के सामने दोबारा तैयारी करने की चुनौती खड़ी हो गई है। नई परीक्षा की तारीख और एडमिट कार्ड से जुड़ी जानकारी जल्द जारी की जाएगी। 

 

आपको बता दें कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने मंगलवार को NEET UG 2026 परीक्षा रद्द करने का ऐलान किया। एजेंसी ने कहा कि पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं की शिकायतों के बाद यह फैसला लिया गया है। सरकार ने मामले की जांच के लिए CBI को जिम्मेदारी सौंपी है। NTA का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने और छात्रों का भरोसा कायम रखने के लिए परीक्षा दोबारा कराई जाएगी।

कब्ज से हैं परेशान? इन 6 घरेलू नुस्खों से पेट होगा तुरंत साफ


आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में कब्ज की समस्या बहुत आम हो गई है। कब्ज का मतलब है कि जब आपका पेट ठीक से साफ नहीं होता और मल बहुत सख्त हो जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह हमारा गलत खान-पान और शरीर में हलचल की कमी है। जब मल को बाहर निकालने में बहुत ज्यादा जोर लगाना पड़ता है, तो इससे शरीर में बहुत बेचैनी और भारीपन महसूस होता है। 

 

अगर कब्ज की यह परेशानी लंबे समय तक बनी रहे तो यह सेहत के लिए बहुत खतरनाक हो सकती है और शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचा सकती है। कई एक्सपर्ट बताते हैं कि अगर हम अपनी आदतों में थोड़ा बदलाव करें और किचन में मौजूद कुछ चीजों का इस्तेमाल करें तो पुरानी से पुरानी कब्ज को भी जड़ से खत्म किया जा सकता है। कब्ज को दूर करने के लिए हमें तुरंत दवाइयों के पीछे भागने की जरूरत नहीं है। हमारे किचन में ऐसी कई प्राकृतिक चीजें मौजूद हैं जो पेट को साफ करने में मदद करती हैं। ये तरीके न सिर्फ सुरक्षित हैं बल्कि हमारे पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाते हैं।  

 

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1. प्रून और काली किशमिश का मिश्रण

प्रून और काली किशमिश को कब्ज के लिए सबसे अच्छा इलाज माना जाता है। इन दोनों में फाइबर बहुत ज्यादा होता है जो मल को नरम बनाता है। ये एक प्राकृतिक लैक्सेटिव की तरह काम करते हैं जिससे सुबह पेट आसानी से साफ हो जाता है। इसके इस्तेमाल से गैस, एसिडिटी, पेट दर्द और अपच जैसी समस्याओं में भी काफी आराम मिलता है। इसके लिए 3-4 काली किशमिश और 1 प्रून को रात में पानी में भिगोकर रखें और अगली सुबह इसे खा लें।  

2. ईसबगोल की भूसी का कमाल

ईसबगोल फाइबर का एक बहुत ही अच्छा जरिया है। यह आंतों पर हल्का दबाव डालता है जिससे मल बाहर निकलने में कोई परेशानी नहीं होती। खास बात यह है कि ईसबगोल में सूजन कम करने वाली क्वालिटी भी होती है जो पेट की अंदरूनी जलन को शांत करते हैं। फायदा पाने के लिए रात को सोते समय एक गिलास गुनगुने पानी या गर्म दूध में 1 चम्मच ईसबगोल मिलाकर पिएं।  

3. पेट की बीमारियों की दवा ‘अजवाइन’

अजवाइन सिर्फ एक मसाला नहीं बल्कि एक बड़ी औषधि है। इसमें ‘थाइमोल’ नाम का एलिमेंट होता है जो पाचन में मदद करने वाले एंजाइम्स को बढ़ाता है। इससे गैस और एसिडिटी में तुरंत फायदा होता है और पेट की सफाई अच्छे से होती है। इसके लिए रोज रात को सोने से पहले आधा चम्मच अजवाइन को एक गिलास पानी के साख लें।

4. कैस्टर ऑयल का कमाल 

पुरानी कब्ज के लिए कैस्टर ऑयल  एक बहुत ही पुराना और कारगर नुस्खा है। यह आंतों की मांसपेशियों को फुर्तीला करता है जिससे पेट के अंदर फंसा हुआ मल आसानी से नीचे खिसक कर बाहर आ जाता है। यह बाजार में मिलने वाली कई महंगी दवाओं से ज्यादा बेहतर काम करता है। इसे इस्तेमाल करने के लिए एक कप दूध या पानी में सिर्फ 2-3 बूंद कैस्टर ऑयल मिलाएं। ध्यान रहे कि इसे हफ्ते में सिर्फ 2 या 3 बार ही लेना चाहिए।  

5. प्रोबायोटिक्स का सेवन

जब हमारे पेट में ‘अच्छे बैक्टीरिया’ कम हो जाते हैं तो कब्ज की समस्या होने लगती है। प्रोबायोटिक्स इन अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं और आंतों को सेहतमंद रखते हैं। आप अपने खाने में दही, केफिर या कोम्बुचा जैसी चीजों को शामिल कर सकते हैं जिससे आपका हाजमा हमेशा दुरुस्त रहेगा।  

 

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6. मलासन योग की शक्ति

योग में मलासन को पेट साफ करने के लिए सबसे बहेतर माना गया है। इस मुद्रा में बैठने से पेट की आंतों पर सही दबाव पड़ता है और रुकी हुई गैस बाहर निकल जाती है। इससे पाचन तंत्र फुर्तीला हो जाता है। इसके लिए हर सुबह उठकर पहले गर्म पानी पिएं और फिर 5 से 10 मिनट तक मलासन की मुद्रा में बैठें।

 

12 मई का राशिफल, मंगल और बृस्पति देव की कृपा से क्या आपका भाग्य बदल रहा है?


आज 12 मई 2026, दिन मंगलवार है। हिंदू पंचांग के अनुसार आज ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि है। आज का मूलांक 3 है, जो देवगुरु बृहस्पति से प्रभावित है, जबकि मंगलवार का दिन होने के कारण मंगल देव की ऊर्जा का विशेष प्रभाव रहेगा। ग्रहों की स्थिति पर नजर डालें तो चंद्रमा आज मीन राशि में गोचर कर रहे हैं। आज अनुशासन और साहस के बल पर मुश्किल कार्यों को भी किया जा सकता है।


आज की ऊर्जा मिली-जुली रहने वाली है। मंगल और गुरु का प्रभाव व्यक्ति में निर्णय लेने की क्षमता का विकास करेगा। हालांकि, जोश में आकर होश खोने से बचना होगा। निवेश और बिजनेस से जुड़े निर्णय दोपहर के बाद लेना ठीक रहेगा। पारिवारिक जीवन में अपनी जुबान पर नियंत्रण रखना आवश्यक है। आइए जानते हैं मेष से लेकर मीन तक सभी 12 राशियों के लिए कैसा रहने वाला है आज का दिन।

 

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राशिफल और उपाय 


मेष


आज का दिन आपके लिए आत्मविश्वास से भरा रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपके साहस की सराहना होगी। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी, लेकिन अचानक खर्चों का योग बन रहा है। प्रेम जीवन पहले से बेहतर बना रहेगा। हेल्थ सामान्य रहेगा, फिर भी सिरदर्द से बचें।
आज क्या करें: हनुमान चालीसा का पाठ करें।
आज क्या न करें: किसी से कर्ज न लें। 


वृषभ 


आज का दिन शांति और धैर्य से बिताने का है। कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ तालमेल बिठाने में दिक्कत आ सकती है। आर्थिक दृष्टि से आज का दिन खर्चीला हो सकता है। परिवार में किसी बात पर मतभेद हो सकता है। खान-पान पर ध्यान दें, पेट संबंधी समस्या हो सकती है।
आज क्या करें: सफेद वस्तुओं का दान करें।
आज क्या न करें: आज निवेश करने से बचें।


मिथुन


सभी कामों में आज आपको सफलता मिलेगी। करियर में प्रमोशन के अवसर मिलेंगे। आर्थिक लाभ के अच्छे संकेत हैं। प्रेमी के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा। मानसिक रूप से आप काफी खुश महसूस करेंगे।
आज क्या करें: गाय को हरा चारा खिलाएं।
आज क्या न करें: अफवाहों पर ध्यान न दें।


कर्क


आज आप भावुक महसूस कर सकते हैं, जिससे कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। बिजनेस में सावधानी बरतें और कागजी कार्रवाई पूरी रखें। आर्थिक स्थिति स्थिर रहेगी। परिवार के बुजुर्गों का आशीर्वाद मिलेगा। आज आपकी हेल्थ थोड़ी खराब रह सकती है, पैरों में दर्द की शिकायत हो सकती है।
आज क्या करें: शिवलिंग पर जल अर्पित करें।
आज क्या न करें: पुरानी नकारात्मक बातें न दोहराएं।

 

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सिंह


आज आपका सम्मान बढ़ेगा। बिजनेस में लाभ कमाने की योजनाएं सफल होंगी, जिसकी वजह से आज आपका मन खुश रहेगा। जीवनसाथी के साथ संबंध अच्छे होंगे। हेल्थ शानदार रहेगा लेकिन धूप में निकलने से बचें।
आज क्या करें: सूर्य देव को अर्घ्य दें।
आज क्या न करें: अहंकार से दूर रहें।


कन्या


आज कार्यस्थल पर बारीकियों पर ध्यान देने की जरूरत है। बिजनेस के दुश्मन आपके साथ बुरा करने की सोच रहे हैं, इसी वजह से सचेत रहें। आर्थिक लेनदेन में सावधानी बरतें। पारिवारिक जीवन सुखद बना रहेगा। आज छोटी-मोटी मौसमी बीमारियां परेशान कर सकती हैं।
आज क्या करें: पक्षियों को दाना डालें।
आज क्या न करें: आज कहीं घूमने न जाएं।


तुला


आज का दिन आपके लिए सुखद परिणाम लेकर आएगा। कार्यक्षेत्र का माहौल शानदार रहेगा और सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। बिजनेस में पार्टनरशिप की वजह से लाभ होगा। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। प्रेम संबंधों में नयापन देखने को मिलेगा। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, मन में शांति का अनुभव करेंगे।
आज क्या करें: किसी कन्या को गिफ्ट दें।
आज क्या न करें: विवादों में मध्यस्थता न करें।

 

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वृश्चिक


आज आपकी ऊर्जा चरम पर रहेगी। कठिन कार्यों को भी आप आसानी से पूरा कर लेंगे। बिजनेस में जोखिम लेना फायदेमंद साबित हो सकता है। प्रेम जीवन में कुछ तनाव हो सकता है, इसलिए बातचीत स्पष्ट रखें।
आज क्या करें: लाल चंदन का तिलक लगाएं।
आज क्या न करें: आज झूठ बोलने से बचें।


धनु


आज के दिन आपको धार्मिक कामकाज में मन लगेगा। करियर के लिहाज से दिन प्रगतिशील है, नई नौकरी के मौके मिल सकते हैं। आर्थिक स्थिति ठीक रहेगी। परिवार के साथ किसी जगह घूमने का प्लान बनाएंगे।
आज क्या करें: पीले फल का दान करें।
आज क्या न करें: किसी की बुराई न करें।


मकर


आज का दिन थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कार्यस्थल पर काम का दबाव महसूस होगा। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। परिवार के सदस्यों के साथ संवाद बनाए रखें। तनाव से बचने के लिए मेडिटेशन करें।
आज क्या करें: शनि चालीसा का पाठ करें।
आज क्या न करें: किसी पर अंधविश्वास न करें।

 

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कुंभ


आज का दिन खुशहाली भरा रहेगा। नई तकनीक और विचारों से आप कार्यक्षेत्र में अपनी जगह बनाएंगे। आर्थिक स्थिति में मजबूती आएगी। बिजनेस में धन लाभ के योग बन रहे हैं। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। पीठ दर्द की शिकायत हो सकती है।
आज क्या करें: हनुमान जी को चमेली का तेल चढ़ाएं।
आज क्या न करें: आलस को हावी न होने दें।


मीन


चंद्रमा आपकी राशि में हैं, इसी वजह से आज आप अधिक संवेदनशील बने रहेंगे। व्यापार में उन्नति के अवसर मिलेंगे। आर्थिक स्थिति संतोषजनक रहेगी। प्रेम जीवन में रोमांस बढ़ेगा। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, लेकिन अधिक सोचने से बचें।
आज क्या करें: तुलसी के पौधे में दीपक जलाएं।
आज क्या न करें: कोई भी निर्णय जल्दबाजी में न लें।

 

नोट: यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। अपनी मेहनत पर विश्वास रखें और सकारात्मक सोच के साथ दिन का आनंद लें।

 

भारत का आखिरी पड़ोसी देश भी बागी, क्या सच में घेरी जा रही है दिल्ली?


पड़ोसी देश नेपाल में जब से सत्ता परिवर्तन हुआ है और बालेंद्र शाह प्रधानमंत्री बने हैं, भारत के साथ रिश्ते बहुत अच्छे नहीं चल रहे हैं। जिस नेपाल के साथ भारत का रोटी-बेटी का रिश्ता था अब उसमें रुकावट आ रही है। दरअसल, नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने भारत से जाने वाले भारतीय सामानों पर कस्टम ड्यूटी लगा दी है। भारत-नेपाल बॉर्डर से 100 रुपये से ज्यादा का सामान ले जाने पर नेपाल को कस्टम ड्यूटी देनी होगी। नेपाल अपने पुराने नियम को सख्ती से लागू कर रहा था, जिससे कि उसे राजस्व बढ़ सके।

 

इसके अलावा भारत-नेपाल की खुली सीमा पर अब पहले जैसी आसानी नहीं रह गई है। नेपाल सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारतीय नागरिकों के लिए पहचान पत्र अनिवार्य कर दिया है। पिछले हफ्ते से लागू हुए इस नए नियम के बाद बिहार के अररिया जिले स्थित जोगबनी बॉर्डर पर अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला है। बिना पहचान पत्र पहुंचे सैकड़ों यात्रियों को नेपाल पुलिस ने सीमा से ही वापस लौटा दिया।

 

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लिपुलेख दर्रे से यात्रा कराने पर आपत्ति 

नेपाल सरकार ने इसी महीने भारत और चीन को राजनायिक स्तर पर चेतावनी भेजकर लिपुलेख दर्रे से यात्रा कराने पर आपत्ति दर्ज की थी। नेपाल का कहना है कि लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी पर उसका अधिकार है और भारत को वहां कोई गतिविधि नहीं करनी चाहिए। हालांकि, भारत ने इसपर आपत्ति जताते हुए कहा, ‘लिपुलेख दर्रा साल 1954 से ही कैलाश मानसरोवर यात्रा का पारंपरिक रास्ता रहा है। यह कोई नई बात नहीं है। भारत नेपाल के साथ सभी मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार है और सीमा संबंधी लंबित मुद्दों को संवाद के जरिए सुलझाने को तैयार है।’

नेपाल को यह खटकता क्यों है?

नेपाल, लिपुलेख दर्रे को अपना मानता है। भारत कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए लिपुलेख का इस्तेमाल करता रहा है। नेपाल का दावा है कि ब्रिटिश काल के दौरान साल 1816 में भारत और नेपाल के बीच सुगौली संधि हुई थी। यह संधि, महाकाली नदी के पूर्व में स्थित, लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा पर नेपाल को संप्रभुता का हक देती है। 

विदेश सचिव विक्रम मिस्री का दौरा रद्द

नेपाल के इस बदलते रवैये को देखते हुए भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री का नेपाल दौरा तय था लेकिन बीच में ही यह दौरा रद्द करना पड़ा। उन्हें 11 मई को दो दिवसीय यात्रा के लिए काठमांडू पहुंचना था। भारत सरकार ने नेपाल की नई बालेंद्र शाह सरकार के साथ बातचीत करने और उसकी प्राथमिकताओं को समझने के लिए अपने विदेश सचिव विक्रम मिस्री को काठमांडू भेजने का फैसला किया था। इस यात्रा से द्विपक्षीय संबंधों की भविष्य की दिशा तय होने की उम्मीद थी लेकिन अब ये दौरा टल गया है।

 

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पड़ोसियों के साथ रिश्ते पहले ही ठीक नहीं 

खास बात ये है कि भारत के अपने पड़ोसियों के साथ रिश्ते पहले ही ठीक नहीं हैं। पाकिस्तान से भारत के संबंध कैसे हैं यह किसी से नहीं छिपा है। हाल के वर्षों में बांग्लादेश कई बार भारत को आंख दिखा चुका है। मालदीव भी आंख दिखाकर चीन के करीब जा चुका है, हालांकि बाद में भारत ने कुटनीतिक चालों से मालदीव को सामान्य किया। ऐसे में एक और पड़ोसी देश नेपाल का नाराज होना भारत के लिए अच्छा नहीं होगा।

 

खासतौर से चीन नेपाल को वर्षों से साधने की कोशिश में रहा है। चीन यहां भारी निवेश करके नेपाल की जमीन को भारत के खिलाफ रणनीतिक रूप से इस्तेमाल करना चाहता है। मगर, भारत लंबे समय से नेपाल को अपने पक्ष में किए हुए है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या सच में दिल्ली घेरी जा रही है? क्योंकि भारत का आखिरी पड़ोसी देश भी बागी हो रहा है।

कौन हैं अली अल जैदी? समर्थन करके ट्रंप इराक का PM क्यों बनाना चाहते हैं?


अमेरिका लगातार मिडिल ईस्ट के देशों पर नजर गड़ाए हुए है। ईरान में हमला करने और कई मोर्चों पर घेरने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नजर इराक पर गड़ गई है। दरअसल, इराक में प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव होने वाले हैं। इस रेस में इराक के जाने-माने उद्योगपति अली अल जैदी भी हैं। डोनाल्ड ट्रंप अली जैदी का समर्थन कर रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप बाहरी देशों में उन नेताओं को समर्थन करते हैं, जो बाद में पद पाने के बाद अमेरिकी हितों के लिए काम करे।

   

हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने अली जैदी को मिलने के लिए वाशिंगटन बुलाया था। इस मुलाकात के बाद ट्रंप ने कहा था कि वह जैदी के साथ हर तरीके से खड़े हैं। हालांकि, ट्रंप ने यह समर्थन एक शर्त के साथ दी है। शर्त है कि अली जैदी अगर इराक के प्रधानमंत्री बनते हैं कि वह ईरान के समर्थन वाले मिलिशिया ग्रुप को देश से बाहर कर दें। साथ ही इराक में ईरान के प्रभाव को कम करें।

 

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अमेरिका की प्लानिंग क्या है?

साफ है कि अमेरिका लगातार ईरान के घेरने के लिए उसके ही पड़ोसी देशों का इस्तेमाल कर रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की खबर के मुताबिक, साल 2024 में अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने अली जैदी के एक बैंक के साथ डॉलर के लेन-देन पर रोक लगा दी थी। अमेरिका के शक था कि जिस बैंक का इस्तेमाल अली जैदी कर रहे थे वह ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े एक मिलिशिया नेता के साथ बिजनेस कर रहा था।

जैदी पर समझौते का दबाव बना रहे ट्रंप

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट बताती है कि अली अल जैदी शुरू में इराक के प्रधानमंत्री के लिए ट्रंप की पसंद नहीं थे। उनका नाम तब सामने आया जब ट्रंप ने इराक को अमेरिकी मदद बंद करने की धमकी दी थी। इराक में इसी साल ईरान के करीबी माने जाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री नूरी अल-मलिकी प्रधानमंत्री पद के लिए मजबूत उम्मीदवार के तौर पर आमने आए हैं। यही वजह है कि ट्रंप अली जैदी को समर्थन कर रहे हैं।

 

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ट्रंप की धमकी के बाद इराक में काम करे वाले अमेरिकी ऑर्डिनेशन ग्रुप ने पिछले महीने ही अली जैदी की तरफ रुख करना शुरू किया है।

ईरान मिलिशिया को बाहर करने के खिलाफ क्यों?

इन घटनाक्रमों के बीच इराक में ईरान के IRGC में टॉप अधिकारी इस्माइल कानी ने मांग की है कि इराक मिलिशिया नेताओं को सरकार से बाहर रखने के ट्रंप के ऑर्डर को खारिज करे या ग्रुप्स को हथियार देने की कोशिश करे।

 

इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्रालय इराक में मौजूद मिलिशिया के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की सोच रहा है। दरअसल, अमेरिका का आरोप है कि इन्हीं मिलिशिया ग्रुप्स ने US-इजरायल युद्ध के दौरान इराक में अमेरिकी डिप्लोमैटिक और सैन्य बेसों पर 600 हमले किए हैं।