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सप्लीमेंट्स नहीं, रोज का खाना ही पूरा करेगा विटामिन B6 की कमी


आजकल जब कमजोरी और थकान जैसे लक्षण महसूस होते हैं तो लोग तुरंत दवाइयों और सप्लीमेंट्स की ओर भागते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके शरीर के लिए जरूरी कई पोषक तत्व आपकी रोज की थाली में ही मौजूद होते हैं। ऐसा ही एक महत्वपूर्ण विटामिन है विटामिन बी6, जिसकी कमी को पूरा करने के लिए सिर्फ दवा नहीं बल्कि सही आहार ही काफी है।

 

विटामिन बी6 शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह न केवल भोजन को ऊर्जा में बदलता है बल्कि दिमाग को स्वस्थ रखने, मूड बेहतर करने और इम्यूनिटी मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाता है। इसके बावजूद लोग अक्सर इसकी कमी पूरी करने के लिए सीधे सप्लीमेंट्स का सहारा लेते हैं, जो हर बार जरूरी नहीं होता है।

 

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिपोर्ट के मुताबिक, विटामिन बी6 शरीर में 100 से अधिक एंजाइमिक प्रतिक्रियाओं के लिए अहम है, जिसमें अमीनो एसिड और हीमोग्लोबिन का निर्माण शामिल है। इसलिए शरीर की कमजोरी, डिप्रेशन और लो हीमोग्लोबिन से लड़ने के लिए विटामिन बी6 बेहद जरूरी है।

 

अब सवाल उठता है कि विटामिन बी6 किस प्रकार के भोजन से मिल सकता है। हमारे रोजमर्रा के भोजन जैसे चना, चिकन, केले, आलू और टमाटर का सूप खाने से शरीर को विटामिन बी6 मिलता है। अब सवाल उठता है कि इन फलों और सब्जियों को हर दिन कितनी मात्रा में खाना चाहिए ताकि हम संतुलित मात्रा में विटामिन की पूर्ति कर सकें।

 

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कौन से आहार खाने से मिलता है विटामिन बी6?

केला- एक सामान्य आकार का केला रोज एक बार खाने से करीब 0.4 मिलीग्राम विटामिन बी6 मिलता है। इसके अलावा केला खाने से शरीर को विटामिन C और पोटेशियम भी मिलता है। केले को नाश्ते से 2 घंटे पहले खाना सही माना जाता है।

 

आलू- लगभग एक कप उबले हुए आलू खाने से करीब 0.4 मिलीग्राम विटामिन बी6 मिलता है। आलू से पोटैशियम, विटामिन C और फाइबर भी मिलता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आलू के छिलकों में भी विटामिन और फाइबर होता है। इसलिए आलू को अच्छी तरह धोकर उबालना चाहिए। उबले हुए आलू खाने से ही विटामिन मिलता है क्योंकि तले हुए आलू में विटामिन नष्ट हो जाते हैं।

 

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चिकन- 85 ग्राम चिकन ब्रेस्ट खाने से करीब 0.5 मिलीग्राम विटामिन बी6 मिलता है। चिकन पकाते समय ध्यान रखें कि इसे उबालकर या भाप में पकाया जाए ताकि इसके पोषक तत्व बरकरार रहें।

 

टमाटर- एक कप टमाटर का सूप पीने से लगभग 0.4 मिलीग्राम विटामिन बी6 मिलता है। इसके अलावा इसमें विटामिन A, विटामिन C और पोटैशियम भी होता है, जो दिल और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है।

 

चना – दिनभर में आधा कप चना खाने से करीब 0.55 मिलीग्राम विटामिन बी6 मिलता है। चना खाने से शरीर को पोटैशियम भी मिलता है। विटामिन बी6 की कमी से जूझ रहे लोगों को ऐसे आहार जरूर खाने चाहिए।

 

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के शोध के मुताबिक हर व्यक्ति को अपनी उम्र के हिसाब से विटामिन बी6 युक्त आहार लेना चाहिए। 19 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को रोजाना 1.3 मिलीग्राम विटामिन बी6 का सेवन करना चाहिए।

 

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विटामिन बी6 के फायदे

विटामिन युक्त आहार खाना हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।


हीमोग्लोबिन बनना- विटामिन बी6 हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है, जिससे व्यक्तियों को एनीमिया का खतरा कम हो जाता है।


स्वस्थ हृदय– यह शरीर के खून में पाए जाने वाले अमीनो एसिड यानी होमोसिस्टीन की मात्रा कम करता है, जिससे हृदय संबंधी रोगों का खतरा कम हो जाता है।


स्वस्थ त्वचा – विटामिन बी6 युक्त आहार खाने से त्वचा स्वस्थ रहती है।


स्वस्थ मानसिक स्वास्थ्य – विटामिन बी6 शरीर में न्यूरोट्रांसमीटर ( chemical messenger) बनाने में अहम भूमिका निभाता है। न्यूरोट्रांसमीटर से दिमाग तेजी से काम करता है।

 

विटामिन बी6 की कमी के लक्षण

जिन लोगों के शरीर में विटामिन बी6 की कमी होती है उनमें कई लक्षण दिखाई देते हैं।


मानसिक तनाव -डिप्रेशन, चिंता और चिड़चिड़ापन विटामिन की कमी के कारण हो सकते हैं।


खराब स्किन -विटामिन बी6 त्वचा की चमक बनाए रखने में मदद करता है, इसकी कमी से स्किन प्रॉब्लम हो सकती है।


कमजोरी – इसकी कमी से शरीर में थकावट और कमजोरी महसूस होती है।


होठ फटना -विटामिन की कमी से होंठ फटना और टैनिंग जैसी समस्या हो सकती है।

 

विटामिन बी6 की कमी से होने वाली बीमारियां

विटामिन बी6 की कमी कई बीमारियों का कारण बन सकती है, जैसे हीमोग्लोबिन की कमी और एनीमिया।
हीमोग्लोबिन की कमी – विटामिन बी6 की कमी से हीमोग्लोबिन कम हो जाता है, जिससे थकान और कमजोरी होती है।
डिप्रेशन – इसकी कमी से मानसिक स्थिति प्रभावित होती है और डिप्रेशन की समस्या हो सकती है।

शुक्राचार्य की आंख भगवान ने फोड़ क्यों दी थी?


भारतीय पुराणों में वर्णित शुक्राचार्य से जुड़ी कथा हमेशा चर्चा में रहती है, जिसमें बताया गया है कि किस तरह भगवान विष्णु के वामन अवतार के दौरान असुर गुरु शुक्राचार्य की एक आंख नष्ट हो गई थी। यह प्रसंग न केवल देव–असुर संघर्ष से जुड़ा है, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा, दान की मर्यादा और धर्म-अधर्म के टकराव को भी उजागर करता है। राजा बलि के यज्ञ, तीन पग भूमि के वरदान और भगवान की लीला से जुड़ी यह कथा आज भी लोगों को यह संदेश देती है कि अहंकार और पक्षपात जब विवेक पर हावी हो जाते हैं, तो सबसे बड़े ज्ञानी को भी परिणाम भुगतने पड़ते हैं।

 

शुक्राचार्य को असुरों का गुरु (गुरु शुक्र) कहा जाता है। वह महर्षि भृगु के पुत्र थे और महान तपस्वी, ज्योतिषाचार्य और विद्वान माने जाते थे। शुक्राचार्य को संजीवनी विद्या का ज्ञान था, जिससे वह मरे हुए असुरों को दोबारा जीवित कर सकते थे। इसी वजह से देवताओं और असुरों के युद्ध में असुर बार-बार हारने के बाद भी फिर शक्तिशाली हो जाते थे।

 

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भगवान ने शुक्राचार्य की आंख क्यों फोड़ी – कथा

यह प्रसंग वामन अवतार से जुड़ा हुआ है। असुर राजा बलि बहुत शक्तिशाली हो गए थे और तीनों लोकों पर अधिकार करना चाहते थे। देवताओं की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने वामन ब्राह्मण का रूप धारण किया और बलि के यज्ञ में पहुंचे।

 

वामन ने बलि से केवल तीन पग भूमि दान में मांगी। राजा बलि तुरंत दान देने को तैयार हो गए लेकिन शुक्राचार्य ने अपनी दिव्य दृष्टि से पहचान लिया कि यह कोई साधारण ब्राह्मण नहीं बल्कि स्वयं भगवान विष्णु हैं। उन्होंने बलि को दान देने से रोकने का प्रयास किया।

 

जब बलि ने गुरु की बात नहीं मानी, तो शुक्राचार्य ने यज्ञ के कमंडलु (जल पात्र) की टोंटी में अपना रूप छोटा कर प्रवेश कर लिया, जिससे जलधारा रुक जाए और दान पूरा न हो सके। वामन रूप में भगवान विष्णु ने यह जान लिया और पास रखी कुशा (घास) या दर्भ से कमंडलु की टोंटी को साफ किया।

 

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इसी दौरान कुशा शुक्राचार्य की एक आंख में चुभ गई और उनकी एक आंख नष्ट हो गई। तभी से उन्हें एकाक्षी शुक्राचार्य कहा जाने लगा।

आंख फूटने का आध्यात्मिक अर्थ

यह घटना केवल शारीरिक चोट नहीं बल्कि एक गहरे प्रतीक को दर्शाती है। शुक्राचार्य असुरों के हित की वजह से धर्म से हटकर सोच रहे थे। उनकी एक आंख का नष्ट होना यह दर्शाता है कि जब बुद्धि पर अहंकार और पक्षपात हावी हो जाता है, तो विवेक की दृष्टि कमजोर हो जाती है।

शुक्राचार्य की महानता

आंख खोने के बावजूद शुक्राचार्य की विद्या, तप और ज्ञान कम नहीं हुआ। वह नवग्रहों में शुक्र ग्रह के अधिष्ठाता बने और आज भी वैदिक ज्योतिष में उन्हें वैभव, सुख, ऐश्वर्य और कला का कारक माना जाता है।

एक साल में ट्रंप से भिड़ने वाले नेता; न डरे, न दबे… तानाशाही से भी लड़े


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तानाशाह जैसा व्यवहार करने में जुटे हैं। अगर कोई नेता उनसे असहमत होता है तो उसे वह खुलेआम धमकी देते हैं। उस देश को नतीजे भुगतने की बात कहते हैं। दुनिया के अधिकांश नेता ट्रंप से बहस की जगह बायपास करने की नीति अपनाने में जुटे हैं। मगर तमाम धमकियों के बावजूद कुछ ऐसे नेता भी हैं, जो ट्रंप के सामने झुकाने को तैयार नहीं हैं। उनके साथ क्या होगा, यह भविष्य ही बताएगा, लेकिन दो बड़े नेताओं के साथ अमेरिका ने क्या किया है, इसे दुनिया देख चुकी है। आइये जानते हैं उन नेताओं के बारे में, जो पिछले एक साल में ट्रंप से भिड़ चुके हैं।

 

अली खामेनेई: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को 28 फरवरी की सुबह अमेरिका और इजरायल ने मार डाला। अमेरिका ने ईरान को 10 दिन का समय दिया था। दो मार्च को यह समय सीमा खत्म हो रही थी। मगर दो दिन पहले ही एयर स्ट्राइक में अली खामेनेई की जान ले ली गई। अमेरिका उन पर नरसंहार, दमन और आतंक फैलाने का आरोप लगाता है। सबसे बड़ा आरोप परमाणु बम बनाने का है। ईरान कई बार इसका खंडन कर चुका है। तेहरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांति और नागरिक उद्देश्यों के लिए है। अली खामेनेई के सामने अमेरिका से समझौता करने का विकल्प था। मगर उन्होंने दूसरा रास्ता चुना।

 

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निकोलस मादुरो: पिछले कार्यकाल से ही वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और ट्रंप के बीच तनातनी चल रही थी। दूसरे कार्यकाल में यह चरम पर पहुंच गई। अमेरिका की निगाह वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर है। उसने मादुरो पर चुनाव में धांधली और विरोधियों के दमन का आरोप लगाया। अमेरिका ने कई बार समझौता करने का दबाव बनाया, लेकिन मादुरो झुके नहीं। गिरफ्तारी से पहले उन्होंने ट्रंप को पकड़ने की धमकी भी दी थी। इसी साल 3 जनवरी की तड़के अमेरिकी सेना ने एक ऑपरेशन में मादुरो को उनकी पत्नी के साथ अगवा करके अमेरिका उठा ले गई।

 

सिरिल रामफोसा:  डोनाल्ड ट्रंप और सिरिल रामफोसा के झगड़े को भी दुनिया जानती हैं। पिछले साल रामफोसा अमेरिका गए थे। ओवल ऑफिस में ट्रंप से मुलाकात की थी। मगर यह मुलाकात झगड़े में बदल गई थी। ट्रंप ने अफ्रीकी सरकार पर फर्जी तरीके से श्वेत लोगों के नरसंहार का आरोप लगाया। जवाब में रामफोसा ने कहा था कि मेरे पास आपको देने के लिए जहाज नहीं है। दरअसल, कुछ दिन पहले ही कतर ने एक लग्जरी जहाज ट्रंप को गिफ्ट किया था। रामफोसा का इशारा इसी तरफ था। दोनों के बीच विवाद जी-20 सम्मेलन के दौरान और बढ़ गया। ट्रंप ने दक्षिण अफ्रीका में आयोजित जी20 सम्मेलन का बहिष्कार किया और इस साल अमेरिका में आयोजित समिट से प्रतिबंधित कर दिया। 

 

गुस्तावो पेट्रो: कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो कई मौकों पर ट्रंप से सीधे भिड़ चुके हैं। पिछले साल गुस्तावो पेट्रो ने ट्रंप की आव्रजन नीति का खुलकर विरोध किया था। लोगों को हथकड़ी के साथ अमेरिका से निकालने की खबरों के बाद पेट्रो ने अमेरिकी जहाजों को कोलंबिया के एयरस्पेस में घुसने से मना कर दिया था। ट्रंप ने 30 फीसद टैरिफ की धमकी दी। मगर अमल अभी तक नहीं किया। जब निकोलस मादुरो को अगवा किया गया तो भी पेट्रो ने खुलकर ट्रंप का विरोध किया। उन्होंने गिरफ्तार करने की चुनौती तक दे डाली। जवाब में ट्रंप ने कोलंबिया पर ड्रग्स रॉकेट चलाने का आरोप लगाया। पिछले साल कोलंबियाई राष्ट्रपति ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर हजारों फिलिस्तीन समर्थक की रैली को संबोधित किया। बाद में अमेरिका ने उनका वीजा भी रद्द कर दिया था।

 

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पेड्रो सांचेज: ट्रंप से साथ ताजा विवाद स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज का हुआ। सांचेज ने ईरान के खिलाफ अपने रोटा और मोरोन एयरबेस के इस्तेमाल की अनुमति अमेरिका को नहीं दी। स्पेन की सरकार ने गाजा, वेनेजुएला, यूक्रेन और ईरान मामले में अमेरिका के खिलाफ रुख अपनाया है। मगर ताजा मामले ने ट्रंप को नाराज कर दिया। बेस पर पाबंदी लगाने की जानकारी मिलने के बाद ट्रंप ने स्पेन के साथ सभी तरह के व्यापार बंद करने की धमकी दी और कहा कि स्पेन का रवैया बेहद खराब है। ट्रंप ने यह भी धमकी दी कि हम चाहें तो अड्डे का इस्तेमाल कर सकते हैं। हमें कोई रोक नहीं सकता है।

‘मानता हूं कि किरेन रिजीजू बहुत हस्तक्षेप करते हैं…’, ऐसा क्यों बोले अमित शाह?


लोकसभा के मौजूदा स्पीकर ओम बिरला को हटाने के लिए मंगलवार को संसद में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया। विपक्ष ने ओम बिरला पर आरोप लगाए कि वह संविधान और सदन की मर्यादा का उल्लंघन करते हैं। कांग्रेस सांसदों ने कहा कि बार-बार रोकटोक की जाती है और नेता प्रतिपक्ष तक को बोलने से रोका गया। इसी को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने तंज कसते हुए कहा कि वह मानते हैं कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू बहुत हस्तक्षेप करते हैं। उन्होंने विपक्ष का आड़े हाथ लेते हुए कहा कि इससे पहले इतना गैरजिम्मेदार विपक्ष भी कभी नहीं देखा गया।

 

अब अमित शाह का यह जवाब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इससे पहले विपक्ष की ओर से तरुण गोगोई और कई अन्य नेताओं ने सवाल उठाए कि जब ओम बिरला को ही हटाने के लिए प्रस्ताव लाया गया है तो उनकी ओर से तय पैनल में से कोई स्पीकर की कुर्सी पर बैठ सकता है। जब ये सवाल उठाए गए तब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के जगदंबिका पाल पीठासीन अधिकारी की भूमिका निभा रहे थे। इस दौरान गौरव गोगोई ने सीधे-सीधे पूछा कि आखिर जगदंबिका पाल स्पीकर की कुर्सी पर कैसे बैठ सकते हैं?

 

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क्या बोले अमित शाह?

 

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि गौरव गोगोई अपनी बात रख रहे हैं। वह कहते हैं, ‘भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड को देखते हुए जब रिसर्च होगी तब एक रिसर्च यह भी होगी कि विपक्ष के बोलते समय सबसे ज्यादा हस्तक्षेप करने वाले संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजीजू हैं।’ इसी पर अमित शाह खड़े हुए और कहा, ‘मैं भी विधानसभा में रह चुका हूं। संसदीय कार्यमंत्री को तभी खड़ा होना पड़ता है जब संसद के नियमों से दूर कोई चीज होती है। यह बात सही है कि संसदीय कार्यमंत्री के रूप में सबसे ज्यादा हस्तक्षेप किरेन रिजीजू ने किया है, मैं सहमत हूं लेकिन ऐसा गैरजिम्मेदार विपक्ष भी कभी नहीं आया है।’

 

ओम बिरला को लोकसभा स्पीकर की कुर्सी से हटाने के लिए कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने प्रस्ताव सदन में प्रस्तुत किया। इस प्रस्ताव के बारे में गौरव गोगोई ने कहा, ‘देश को पता होना चाहिए कि किस तरह से संविधान और सदन की मर्यादा का उल्लंघन हो रहा है। बिरला जी का व्यक्तिगत रूप से सभी के साथ रिश्ता अच्छा है। हमें यह संकल्प लाना पड़ रहा है। इस सदन की मर्यादा को बचाने और सदन में जनता का विश्वास कायम रखने के लिए धर्म का पालन करते हुए हम यह अविश्वास प्रस्ताव ला रहे हैं।’  उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष ओम बिरला पर व्यक्तिगत रूप से हमला नहीं कर रहा है।

 

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राहुल के भाषण के दौरान हुई थी रोकटोक

 

उनका कहना था, ‘इस मंदिर (संसद) का दरवाजा सबके लिए खुला हुआ है और इसके संचालन में अध्यक्ष की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। फरवरी में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जब नेता प्रतिपक्ष बोलने के लिए खड़े हुए तब 20 बार व्यवधान पैदा किया गया। यह सिर्फ इसलिए किया गया क्योंकि वह कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे उठाना चाहते थे। जब भारत की सीमा पर पड़ोसी देश के टैंक आ रहे थे तो सेना राजनीतिक नेतृत्व की तरफ देखा रही थी लेकिन उस समय देश के मुखिया कहते हैं कि जो उचित लगे वह कर लो।’

 

गौरव गोगोई ने इस बात का का भी जिक्र किया कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने यह विषय भी सदन में उठाया था कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता दबाव में किया गया है। उनके मुताबिक, नेता प्रतिपक्ष ने कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए तो लोकसभा अध्यक्ष ने तथ्यों को सत्यापित करने के लिए कहा और नेता प्रतिपक्ष सत्यापित करने के लिए तैयार हुए लेकिन सत्तापक्ष के लोग नहीं चाहते थे कि विषय उठाया जाए। गौरव गोगोई ने दावा किया कि नेता प्रतिपक्ष को पहले भी बोलने से रोका गया है।

सर्दियों में मोजे पहनने के बाद भी लगती हैं पैरों में ठंड, जानिए वजह


सर्दियों में शरीर को गर्म रखने के लिए हम कपड़ों की लेयररिंग करते हैं। कुछ लोगों को हाथों और पैरों में जरूरत से ज्यादा ठंड लगती हैं। ये लोग सोते समय पैर में मोजे पहनकर सोते हैं। इसके बावजूद पैर बर्फ की तरह ठंड रहते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? आइए इसके पीछे का कारण जानते हैं।

 

पैरों के ठंडे रहने का सबसे आम कारण खराब ब्लड सर्कुलेशन है। जब पैरों तक खून सही से नहीं पहुंचता है तब पैर ज्यादा देर तक ठंड रहते हैं। सर्दियों में शरीर स्वाभाविक रूप से अंदरूनी अंगों को गर्म रखने के लिए हाथ और पैर में ब्लड सर्कुलेशन कम कर देता है। इसके अलावा जिन लोगों को डायबिटीज, आर्टरीज संबंधी समस्याएं हैं उनके पैर लंबे समय तक ठंडे रहते हैं।

 

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मोजे पहनने के बाद भी क्यों लगती है ठंड?

हाई कोलेस्ट्रॉल लेवल- ब्लड में कोलेस्ट्रॉल का लेवल ज्यादा होने से सर्कुलेशन कमजोर हो जाता है और ब्लड सेल्स सिकुड़ जाते हैं। इस वजह से पैरों में ठंड लगती है।

 

नर्व डैमेज- कभी-कभी पैरों को ठंड तापमान की वजह से महसूस नहीं होती है बल्कि में नर्व में डैमेज होने की वजह से ऐसा महसूस होता है। नर्व के डैमेज होने को न्यूरोपैथी कहा जाता है। खासतौर से डायबिटीज वाले लोगों को ज्यादा ठंड लगती है।

 

बॉडी टेंपरेचर रेगुलेशन- सर्दियों में शरीर के काम करने का तरीका अलग है। आपका सिस्टम आपके हाथों और पैरों में रक्त वाहिकाओं को सिकुड़ देता है जिससे शरीर का तापमान स्थिर रहता है लेकिन आपके अंगों को ठंडा छोड़ देता है। मोजे के साथ भी आपके पैर ठंड रहते हैं क्योंकि शरीर अंदरूनी अंगों को गर्म रखता है।

 

थायरॉइड- अगर शरीर में थायरॉइड हार्मोन कम बनता है। इसकी वजह से मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है और गर्मी पैदा करने की क्षमता भी धीमी हो जाती है। इस वजह से पैर हमेशा ठंडे रहते हैं।

 

अधिक तनाव– अगर आप अधिक तनाव लेते हैं तब शरीर में ज्यादा एड्रेनालाईन बनता है जिससे हाथ-पैर के ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाती हैं। इस वजह से पैरों में ज्यादा ठंड लगती हैं। 

 

अनहेल्दी लाइफस्टाइल- हमारे खराब का लाइफस्टाइल का असर भी पड़ता है। स्मोकिंग, इनएक्टिविटी, डिहाइड्रेशन, खराब डाइट सर्कुलेशन पर असर डालता है। आयरन, विटामिन बी12 की कमी की वजह से भी पैरों में ज्यादा ठंड लगती हैं।

क्या रात में मोजे पहनकर सोना फायदेमंद है?

हां, रात में मोजे पहनकर सोना फायदेमंद होता है। इससे आपको अच्छी नींद आती है। मोजे पहनने से शरीर गर्म रहता है। ऐसा करने से आपको अच्छी नींद आती है। नेशनल स्लीप फाउंडेशन के मुताबिक पैर गर्म रहने से जल्दी नींद आती है। मोजे पहनने से पैर गर्म रहते हैं जिससे ब्लड वेसल्स फैलती है इस प्रोसेस को वेसोडिलेशन कहते हैं। इसके अलावा जिन लोगों को रेनॉल्ड्स अटैक के चांस कम हो जाते हैं। मोजे पहनकर सोने से क्रैक्ड हील्स रिपेयर होती हैं।

 

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किन लोगों को ज्यादा ठंड लगती है?

  • बुजुर्ग लोगों को ज्यादा ठंड लगती है।
  •  जिन्हें एनीमिया की समस्या है।
  • थायरॉइड के मरीज।
  • जिन्हें रेनॉल्ड्स डिजीज है।
  • जिनका ब्लड सर्कुलेशन कम होता है।
  • स्ट्रेस या एंग्जाइटी की समस्या होने पर।

किन्हें मोजा नहीं पहनना चाहिए?

  • जिनकी स्किन सेंसिटिव है।
  • डायबिटीज के मरीज।
  • जिन्हें ज्यादा पसीना आता है।
  • जिन्हें फंगल इंफेक्शन होता है।
  • जिन्हें त्वचा संबंधी समस्याएं है।

 

 

14 या 15 जनवरी, किस दिन मनाई जाएगी मकर संक्रांति? जानें पुण्य काल का समय


साल 2026 की शुरुआत के साथ ही देशभर में मकर संक्रांति को लेकर लोगों में उत्साह दिखने लगा है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण की शुरुआत के रूप में मनाया जाने वाला यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि इसका सीधा संबंध प्रकृति, खेती-किसानी और भारतीय परंपराओं से भी है। हर साल जनवरी के मध्य में आने वाली मकर संक्रांति इस बार भी 14 जनवरी को मनाई जाएगी। 

 

इस अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान, सूर्य उपासना, दान-पुण्य और तिल-गुड़ के प्रसाद की परंपरा निभाई जाती है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे उत्तरायण, पोंगल, लोहड़ी और माघ बिहू जैसे नामों से मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उत्तरायण काल को शुभ माना जाता है और इस दिन किए गए पुण्य कर्मों का विशेष फल मिलता है। इसी वजह से मकर संक्रांति को आत्मशुद्धि, नई शुरुआत और सामाजिक सौहार्द का पर्व माना जाता है, जिसकी तैयारियां अब पूरे देश में तेज हो गई हैं।

 

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मकर संक्रांति 2026 में कब है?

मकर संक्रांति हर साल 14 या 15 जनवरी को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी। यह उन गिने-चुने हिंदू त्योहारों में से एक है जिसकी तारीख लगभग हर साल तय रहती है, क्योंकि यह चंद्रमा नहीं बल्कि सूर्य की स्थिति पर आधारित है।

 

वैदिक पंचांग के अनुसार, मकर संक्रांति का पर्व माघ महीने की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाएगा। इस तिथि की शुरुआत 14 जनवरी 2026 के दिन होगी। 

 

मकर संक्रांति पुण्य काल- 14 जनवरी 2026 के दिन दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से शाम 5 बजकर 45 मिनट तक रहेगा।

 

मकर संक्रांति महा पुण्य काल- 14 जनवरी 2026 के दिन दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से शाम 4 बजकर 58 मिनट तक रहेगा।

 

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मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है

मकर संक्रांति उस दिन मनाई जाती है जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस खगोलीय घटना को सूर्य का उत्तरायण होना कहा जाता है। इसी दिन से सूर्य उत्तर दिशा की ओर गति करते हैं और दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं। इसे अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संकेत माना जाता है, इसलिए यह पर्व सकारात्मकता, ऊर्जा और नए आरंभ का प्रतीक माना जाता है।

मकर संक्रांति के पीछे की वजह

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, उत्तरायण काल देवताओं का दिन माना जाता है। इस अवधि में किए गए दान, जप, तप और पुण्य कर्मों का फल कई गुना बढ़ जाता है। मकर संक्रांति कृषि से भी जुड़ा पर्व है, क्योंकि इसी समय नई फसल घर आती है। किसान इस दिन सूर्य देव का आभार व्यक्त करते हैं और समृद्धि की कामना करते हैं।

मकर संक्रांति से जुड़ी पौराणिक मान्यता

पौराणिक कथा के अनुसार, इसी दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव से मिलने जाते हैं। शनि देव मकर राशि के स्वामी हैं, इसलिए यह दिन पिता-पुत्र के मिलन का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से मकर संक्रांति को आपसी मतभेद समाप्त करने और संबंधों में मधुरता लाने का पर्व भी कहा जाता है।

 

एक अन्य मान्यता के अनुसार, महाभारत के महान योद्धा भीष्म पितामह ने इसी दिन अपने शरीर का त्याग किया था। उन्होंने उत्तरायण का इंतजार किया क्योंकि इस काल में देह त्याग करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

मकर संक्रांति की धार्मिक और सामाजिक विशेषता

इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, सूर्य को अर्घ्य, तिल-गुड़ का दान, खिचड़ी, तिल के लड्डू और गुड़ से बने व्यंजन बनाने की परंपरा है। तिल और गुड़ को शरीर में ऊष्मा बनाए रखने वाला माना जाता है, इसलिए इसका सेवन स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी होता है।

 

देश के अलग-अलग हिस्सों में यह पर्व अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। उत्तर भारत में मकर संक्रांति, गुजरात में उत्तरायण, पंजाब में लोहड़ी, असम में माघ बिहू और तमिलनाडु में पोंगल के रूप में इसे धूमधाम से मनाया जाता है।

पहले माफी, फिर मिसाइल-ड्रोन से हमला, पड़ोसियों पर टूट रहा ईरान का कहर


ईरान के मिसाइल और ड्रोन खाड़ी के देशों पर कहर बनकर टूट रहे हैं। खाड़ी देशों में रविवार की सुबह तक ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरें आईं। सोशल मीडिया पर इन देशों ने अपना दर्द साझा किया है। कुवैत की सेना ने कहा कि रविवार कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट के फ्यूल स्टोरेज पर दुश्मनों के ड्रोन ने हमला किया।

सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उन्होंने भी ड्रोन हमलों का सामना किया और रविवार की सुबह-सुबह कम से कम 21 ड्रोनों को रोककर नष्ट कर दिया। बहरीन में, किंग फहद कॉजवे के पार मिना सलमान सीपोर्ट पर एक जगह में लगी आग को बहरीन के गृह मंत्रालय ने ईरानी हमला बताया। 

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किन देशों को निशाना बना रहा ईरान?

ईरान ने बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों पर ड्रोन हमला किया है। इन देशों पर ईरान, अमेरिका को सहयोग देने का आरोप लगाता रहा है। यहां अमेरिकी सैन्य बेस थे, जिन्हें ईरान ने तबाह किया था। बहरीन में हालात बिगड़ गए हैं। इमरजेंसी सर्विसेज आग बुझाने में जुटी हुई हैं। 

पहले माफी, फिर हमला, क्या सोच रहा ईरान?

ड्रोन और मिसाइल हमले ऐसे समय में हुए हैं, जब ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने शनिवार को खाड़ी देशों से माफी मांगी थी। उन्होंने पिछले हफ्ते क्षेत्र में अमेरिकी बेसों पर हुए कई ड्रोन-मिसाइल हमलों के लिए माफी मांगी और कहा था कि ईरान अब पड़ोसियों पर हमला नहीं करेगा, जब तक कि खुद पर हमला न हो।

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क्या सफाई पेश की है?

मसूद पेजेश्कियान के इस विवाद पर ईरान में ही हंगामा हो गया। इस्लामिक रिव्यूल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स के जवानों ने राष्ट्रपति के बयान को अव्यवहारिक बताया। विवाद के बाद उनके ऑफिस ने सफाई दी कि उनका मतलब था कि अगर क्षेत्रीय देश अमेरिका के हमले में हम पर सहयोग नहीं करेंगे, तो हम उन पर हमला नहीं करेंगे।

सरकार ने लागू किया Essential Commodities Act; गैस सिलिंडर, CNG पर होगा क्या असर?


भारत सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act, 1955) लागू किया है। यह कदम पेट्रोलियम, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और नेचुरल गैस की उपलब्धता, आपूर्ति और समान वितरण को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है।

 

पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर ईंधन की आपूर्ति में रुकावट आ रही है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। भारत तेल और गैस की आपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, इसलिए सरकार ने यह फैसला लिया है ताकि जमाखोरी रोकी जा सके और जरूरी ईंधन लोगों तक पहुंचता रहे।

 

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चार सेक्टर में बांटा

सरकार ने प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर बांटा है:

  • प्राथमिकता सेक्टर 1 (100% आपूर्ति, उपलब्धता के अनुसार): घरों में पाइप से आने वाली प्राकृतिक गैस (PNG), वाहनों के लिए CNG, LPG, पाइपलाइन के संचालन के लिए ईंधन आदि। इनको सबसे पहले पूरा किया जाएगा।

  • प्राथमिकता सेक्टर 2: खाद कारखाने। पिछले 6 महीने की औसत खपत का 70% तक गैस मिलेगी लेकिन सिर्फ खाद बनाने के लिए।

  • प्राथमिकता सेक्टर 3: चाय उद्योग, फैक्ट्रियां और अन्य औद्योगिक उपभोक्ता। पिछले 6 महीने की औसत खपत का 80% तक।

  • प्राथमिकता सेक्टर 4: शहरों में गैस वितरण करने वाली कंपनियों के जरिए औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ता। 80% तक आपूर्ति।

तेल रिफाइनरियों को आदेश

तेल रिफाइनरियों को आदेश दिया गया है कि वे LPG का उत्पादन ज्यादा से ज्यादा बढ़ाएं। प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी चीजों को पेट्रोकेमिकल बनाने की बजाय LPG के लिए इस्तेमाल करें। इससे घरों में रसोई गैस की कमी न हो।


विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद में कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति ‘बहुत चिंता की बात’ है। सरकार वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा बाजार पर असर को बारीकी से देख रही है। अगर अस्थिरता जारी रही तो व्यापार, कारोबार और ऊर्जा प्रवाह प्रभावित हो सकता है जो भारत की अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है।

 

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कहा- तत्काल कमी नहीं

सरकार ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और अभी इनकी कोई तत्काल कमी नहीं है। यह कदम लोगों की सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए है। आवश्यक वस्तु अधिनियम पुराना कानून है जो जरूरी चीजों की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए बनाया गया था। अब इसे ईंधन पर लागू किया गया है ताकि आम आदमी की रसोई और जरूरी काम प्रभावित न हों।

नींद है बॉडी का रीसेट बटन, जानिए क्यों जरूरी हैं 6 घंटे सोना


शरीर के लिए नींद केवल आराम करने का समय नहीं है बल्कि यह उसके लिए एक ऐक्टिव बॉयोलोजिक प्रोसेस हैप्रसिद्ध न्यूरोसाइंटिस्ट औरWhy We Sleep’ के लेखक डॉ. मैथ्यू वॉकर ने कहा नींद हमारे हेल्थ के लिए सबसे जरूरी और ताकतवर जरिया हैजब हम सोते हैं तो हमारा दिमाग एकग्लाइम्फेटिक सिस्टमसक्रिय करता है जो दिन भर के दौरान जमा हुए कचरे को साफ करता हैविज्ञान की मानें तो यदि आप पर्याप्त एक्सरसाइज करते हैं और बैंलेंस डाइट लेते हैं लेकिन आपकी नींद 6 घंटे से कम है तो आपके शरीर को इन कामों का लाभ नहीं मिल पाएगा

 

यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो की एक रिसर्च के अनुसार, कम सोने वालों का शरीर मांसपेशियों के बजाय चर्बी को सुरक्षित रखने लगता है और मांसपेशियों को जलाना शुरू कर देता है, जिससे वर्कआउट का उद्देश्य ही फेल हो जाता है

 

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नींद क्यों हैसुपर-पावर‘?

नींद सीधे हमारे दो प्रमुख हार्मोन को कंट्रोल करती हैपहला लेप्टिन जो हमें बताता है कि पेट भर गया है और दूसरा घ्रेलिन जो भूख का अहसास कराता हैस्टेनफोर्ड मेडिसिन की रिपोर्ट बताती है कि कम सोने परलेप्टिनगिर जाता है औरघ्रेलिनबढ़ जाता हैयही कारण है कि नींद पूरीहोने पर हम ज्यादा जंक फूड और मीठा खाना चाहते हैं

 

जिम या वर्कआउट के दौरान हम मांसपेशियों के टिश्यू को तोड़ते हैं लेकिन वे ठीक और बनते केवल गहरी नींद के दौरान होते हैंशरीर में 75% ग्रोथ हार्मोन नींद के दौरान रिलीज होता हैअगर आप नहीं सोएंगे, तो आपकी मांसपेशियां रिकवर नहीं होंगी और ताकत नहीं बढ़ेगी

मेंटल हेल्थ औरइमोशनल स्टेबिलिटी

दिमाग काएमिग्डाला‘, जो इमोशन को कंट्रोल करता है, नींद की कमी में 60% अधिक संवेदनशील हो जाता हैUC Berkeley की रिपोर्ट के अनुसार, नींद की कमी हमें चिड़चिड़ा और तनावपूर्ण बनाती हैनींद के दौरान हमारा दिमाग यादों को स्टोर करता है, जिससे हम अगले दिन नई चीजें सीखने के लिए तैयार होते हैं

दिल की सेहत

एक रात की भी कम नींद आपके ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकती हैविश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, शिफ्ट में काम करने वाले या कम सोने वाले लोगों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम उन लोगों की तुलना में 45% अधिक होता है जो नियमित 6-8 घंटे सोते हैंडॉ. मैथ्यू वॉकर कहते हैं, ‘आप खराब नींद को ज्यादा एक्सरसाइज या अच्छी डाइट सेमेक-अपनहीं कर सकतेनींद की कमी एक ऐसा कर्ज है जिसे शरीर सूद समेत वसूलता है।’

दो बार आने वाला खरमास काल, कौन सा माना जाता है ज्यादा खास


हिंदू धर्म में किसी भी शुभ या अच्छे कार्य को करने से पहले मुहूर्त देखने की परंपरा है, जिस पर लोग गहरी आस्था रखते हैं। शुभ काम शुरू करने से पहले अलग-अलग काल और समयावधियों को देखा जाता है। इन्हीं में से एक समय खरमास कहलाता है। खरमास वह अवधि होती है जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं। मान्यता है कि इस दौरान सूर्य की गति धीमी हो जाती है, इसलिए विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य करना वर्जित माना जाता है। साल में खरमास दो बार आता है लेकिन इनमें से एक को विशेष महत्व दिया जाता है।


पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह समय आत्म-चिंतन, जप, तप और आध्यात्मिक साधना के लिए सबसे उत्तम माना गया है। कहा जाता है कि इस दौरान सूर्य का तेज कम हो जाता है, इसी कारण इसे नए शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।


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खरमास क्यों लगता है?

पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब सूर्य देव के रथ के घोड़े थक जाते हैं, तब वे रथ में गधों (खर) को जोड़ लेते हैं। इससे रथ की गति धीमी हो जाती है और सूर्य को अपनी परिक्रमा पूरी करने में एक महीना लग जाता है। इसी कारण इस अवधि को खरमास कहा जाता है। इस समय सूर्य का तेज भी अपेक्षाकृत कम माना जाता है।

साल में दो बार क्यों?

इसका मुख्य कारण खगोलीय और ज्योतिषीय मान्यताओं से जुड़ा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बृहस्पति (गुरु) की दो राशियां होती हैं—धनु और मीन। जब सूर्य देव अपने गुरु बृहस्पति की किसी राशि में प्रवेश करते हैं, तो वे अपनी ऊर्जा और तेज का एक हिस्सा गुरु को अर्पित कर देते हैं। इसी कारण सूर्य को उस समय कम प्रभावशाली या ‘मलीन’ माना जाता है।

 

चूंकि बृहस्पति की दो राशियां हैं, इसलिए सूर्य वर्ष में दो बार गुरु की राशि में प्रवेश करते हैं और इसी वजह से साल में दो बार खरमास लगता है। पहली बार यह तब होता है जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं, जो आमतौर पर दिसंबर के मध्य में होता है। दूसरी बार सूर्य मीन राशि में प्रवेश करते हैं, जो मार्च के मध्य के आसपास आता है।

 

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दोनों में मुख्य अंतर

धनु खरमास, जिसे शीतकालीन खरमास भी कहा जाता है, हर साल लगभग 14–15 दिसंबर से शुरू होकर 14–15 जनवरी तक रहता है। इसका समापन मकर संक्रांति पर होता है, जब सूर्य उत्तरायण में प्रवेश करते हैं। इस अवधि को भक्ति, साधना और धार्मिक कार्यों के लिए बहुत शुभ माना जाता है। यह समय सर्दी के चरम का होता है। ज्योतिष के अनुसार, इस दौरान सूर्य दक्षिणायन की स्थिति में रहते हैं, जिसे ‘देवताओं की रात्रि’ का अंतिम चरण माना जाता है। इसलिए खरमास के समाप्त होने और मकर संक्रांति के आगमन को पूरे देश में उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

 

मीन खरमास को ग्रीष्मकालीन खरमास भी कहा जाता है। यह लगभग 14–15 मार्च से शुरू होकर 13–14 अप्रैल तक चलता है। इसका अंत मेष संक्रांति पर होता है, जिसे वैशाखी के रूप में भी मनाया जाता है। इसे मलमास के समान माना जाता है। इस समय चैत्र मास होता है, जो हिंदू नववर्ष की शुरुआत का संकेत देता है। सूर्य इस दौरान उत्तरायण में होते हैं और उनकी शक्ति बढ़ने लगती है लेकिन गुरु के मीन राशि में होने के कारण मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। यह काल मौसम के बदलाव का भी होता है जब बसंत से ग्रीष्म का आगमन होता है।

कौन सा ज्यादा महत्वपूर्ण है?

अध्यात्म की दृष्टि से धनु खरमास को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि मकर संक्रांति के बाद सूर्य की दिशा बदलती है और ‘देवताओं का दिन’ शुरू होता है। वहीं, मीन खरमास के खत्म होने के बाद सूर्य अपनी ‘उच्च’ राशि (मेष) में प्रवेश करते हैं, जो नई ऊर्जा और शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए सबसे शक्तिशाली समय माना जाता है।

 

अभी धनु खरमास चल रहा है और यह 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति के साथ समाप्त हो जाएगा। उसके बाद से ही सभी रुके हुए शुभ और मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो सकेंगे।

 

नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।