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सोनौली सीमा पर ट्रक से कद्दू के बीज पकड़े गए:SSB और कस्टम विभाग ने नेपाल से आ रहे ट्रक की जांच शुरू की

भारत-नेपाल सीमा के सोनौली मुख्य प्रवेश द्वार पर सशस्त्र सीमा बल (SSB) और कस्टम विभाग की टीम ने एक कार्रवाई की। उन्होंने नेपाल से भारत आ रहे एक मालवाहक ट्रक से कद्दू के बीज पकड़े।
कस्टम विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल, पकड़े गए बीज की मात्रा, माल से जुड़े दस्तावेज और उसके परिवहन की वैधता की जांच की जा रही है। विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इस तस्करी के पीछे कौन है।
कस्टम अधिकारी नेपाल से आने वाले वाहनों की नियमित जांच कर रहे थे। इसी दौरान नेपाल से आया एक ट्रक मुख्य प्रवेश द्वार पर पहुंचा। जांच में ट्रक के भीतर कद्दू के बीज मिले।
कस्टम विभाग के इंस्पेक्टर विवेक सिंह ने बताया कि नेपाल से भारत में घुसते समय एक ट्रक से कद्दू के बीज मिले हैं। ट्रक की जांच जारी है। सत्यापन पूरा होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

भीम आर्मी आजाद समाज पार्टी ने गांव-गांव सदस्यता अभियान चलाया:बस्ती के तेलियाडीह गांव में बैठक

बस्ती के साउघाट ग्राम पंचायत तेलियाडीह गांव में भीम आर्मी आजाद समाज पार्टी की बैठक हुई। इस दौरान पार्टी का गठन करने और बूथों को मजबूत करने पर चर्चा की गई। बैठक में नए सदस्यों को पार्टी की सदस्यता भी दिलाई गई।
पार्टी ने आने वाले विधानसभा चुनाव में रुदौली 309 से डॉ. मोहम्मद आकिब को भारी मतों से जिताने का संकल्प लिया। मुख्य जिला प्रभारी नासिर अली खान ने कहा कि पार्टी को मजबूत करना है।
इस मौके पर जिला अध्यक्ष भाईचारा कमेटी मूलचंद आजाद, राहुल कुमार, विवेक कुमार और मनोज कुमार समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। नासिर खान ने राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट चंद्रशेखर आजाद के हाथों को मजबूत करने की बात कही।

इकौना में पायलेट प्रोजेक्ट का विरोध:अधिवक्ता संघ ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर समीक्षा और रद्द करने की मांग की

अधिवक्ता संघ इकौना ने प्रदेश के चार जिलों में लागू पायलेट प्रोजेक्ट का विरोध किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उपजिलाधिकारी इकौना के जरिए एक ज्ञापन भेजा है। बुधवार को संघ के अध्यक्ष उदयराज पांडेय के नेतृत्व में यह ज्ञापन उपजिलाधिकारी रवि प्रताप सिंह को सौंपा गया। इसमें बैनामों के निजीकरण, रजिस्ट्री के बाद ऑनलाइन दाखिल-खारिज और राजस्व न्यायालयों में नई व्यवस्था लागू करने पर आपत्ति जताई गई। वकीलों का कहना है कि इससे राजस्व न्यायालयों की प्रक्रिया पर असर पड़ेगा और लोगों को परेशानी होगी। देखिए खबर से जुड़ी तस्वीरें… ज्ञापन में दाखिल-खारिज, धारा 116 के तहत अंश विभाजन, धारा 24 के तहत सीमांकन और धारा 38 के तहत त्रुटि सुधार की कार्यवाही ऑनलाइन करने पर भी सवाल उठाए गए। अधिवक्ता संघ ने मुख्यमंत्री से जनहित और किसानों के हितों को देखते हुए पायलेट प्रोजेक्ट की समीक्षा कर उसे रद्द करने की मांग की। इस दौरान महामंत्री राजेंद्र मिश्रा, हसमत खान, वीरेंद्र मिश्रा, दिलीप शर्मा, राम कुमार शुक्ला, शिवराम आर्य, सुधीर शुक्ला, राघवेंद्र दीक्षित, पाटेश्वरी प्रसाद मिश्रा, धर्मचंद्र यादव, अनुराग शर्मा, नितिन श्रीवास्तव समेत कई वकील मौजूद थे।

पुलिस अधीक्षक बलरामपुर के निर्देशन में, बलरामपुर पुलिस की आपातकालीन सेवा यूपी-112 पुलिस टीम द्वारा तत्परता व सूझबूझ से घर से भटक गए 04 वर्षीय बच्चे को सकुशल परिजनों को किया गया सुपुर्द*

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*पुलिस अधीक्षक बलरामपुर श्री मार्तण्ड प्रकाश सिंह* द्वारा जनपदीय यूपी-112 को कम से कम रिस्पांस टाइम पर मौके पर पहुंचकर तत्काल आवश्यक कार्यवाही किए जाने हेतु दिए गए सख्त निर्देश के क्रम में *अपर पुलिस अधीक्षक बलरामपुर श्री विशाल पाण्डेय* के पर्यवेक्षण में-

दिनांक- 27.10.2026 को कॉलर अभय श्रीवास्तव द्वारा यूपी 112 पर सूचना दी गई कि एक बच्चा उम्र करीब 04 वर्ष, जो ग्राम पीलीभीत चुटकी रोड थाना कोतवाली देहात के पास काफी देर से घूम-घूम कर रो रहा है, अपने परिजनों व घर का पता नहीं बता पा रहा है । उपरोक्त प्राप्त सूचना के आधार पर तत्काल यूपी 112 (पीआरवी 8411) की पुलिस द्वारा मौके पर पहुंचकर आसपास के लोगों तथा चौराहों पर उक्त बच्चे के परिजनों के बारे में जानकारी ली गई तो काफी देर पूछताछ करने पर एक महिला द्वारा बच्चे की पहचान कर उसके परिजनों व गांव के संबंध में जानकारी दी गई। जानकारी के आधार पर बच्चे को उसके गांव लाला जोत थाना कोतवाली देहात जनपद बलरामपुर पहुंचकर सकुशल उसके परिजनों के सुपुर्द किया गया l पुलिस टीम द्वारा की गई समय से त्वरित कार्यवाही एवं सूझबूझ से बच्चे को उसके परिजनों से मिलाया गया । यूपी 112 पुलिस टीम की इस तत्परता की स्थानीय लोगों द्वारा सराहना की गई।

 

*पुलिस टीम का विवरण*

कमांडर- का0 सनी कुमार

सबकमांडर- म0का0 निधि पटेल

पायलट- हो0गा0 मधुसूदन तिवारी

 

*यूपी 112 आमजन की सेवा एवं सुरक्षा के लिए 24×7 तत्पर है। किसी भी आपातकालीन स्थिति में 112 पर कॉल करें।*

 

समुद्र में उठी ऊंची लहरें, जगह-जगह गिरे पेड़… आंध्र प्रदेश में दिखा ‘अर्णब’ का रौद्र रूप

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भीषण चक्रवाती तूफान अर्णब ने बुधवार सुबह आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में लैंडफॉल ने भारी तबाही मचाया है। तटीय क्षेत्रों में भारी बारिश, तूफानी हवाओं और समुद्र में ऊंची लहरों का प्रचंड रूप देखने को मिला।

विशाखापट्टनम और पड़ोसी राज्य ओडिशा के मल्कानगिरी में कई पेड़ उखड़ गए, जबकि काकीनाडा तट पर तेज हवाओं और अशांत समुद्र ने भारी तबाही मचाई।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, चक्रवात बुधवार सुबह आंध्र प्रदेश और यानम तट के करीब लगभग ठहरा हुआ था। इस दौरान 120 से 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से निरंतर हवाएं चल रही थीं, जिनकी गति झोंकों के साथ 145 किमी प्रति घंटे तक पहुंच गई। सुबह 7 बजे के बाद से लैंडफॉल की इस प्रक्रिया के अगले तीन घंटों तक जारी रहने का अनुमान जताया गया।

विशाखापट्टनम, काकीनाडा और कोनासीमा में असर

विशाखापट्टनम के आरके बीच पर समुद्र में बहुत ऊंची लहरें उठती देखी गईं, जबकि आंध्र यूनिवर्सिटी के महिला इंजीनियरिंग कॉलेज के पास एक बड़ा पेड़ उखड़ गया। काकीनाडा के कई हिस्सों में भारी बारिश के चलते जलभराव हो गया।

वहीं, आंध्र प्रदेश के कोनासीमा जिले में बिजली के ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है, जहां करीब 6,000 बिजली के खंभे गिर गए। प्रशासन ने पगाडाला पेटा सहित सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालकर पुनर्वास केंद्रों में पहुंचाया।

इसके साथ ही अगले कुछ घंटों में सामान्य समुद्री जलस्तर से 1 से 1.5 मीटर ऊंची तूफानी लहरों के निचले इलाकों में घुसने की चेतावनी दी गई।

स्कूल बने राहत शिविर

आंध्र प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्यभर के 609 स्कूलों को राहत शिविरों में बदल दिया, जहां बुधवार तड़के तक 854 लोगों को आश्रय दिया जा चुका था।

27 अक्टूबर की सुबह 8:30 बजे से 28 अक्टूबर की सुबह 4 बजे के बीच अनकापल्ली जिले के कन्नेउरीपालेम में सबसे अधिक 261.5 मिमी बारिश दर्ज की गई।

इसके अलावा विजयनगरम में 259.74 मिमी और विशाखापट्टनम में 259.06 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

राहत-बचाव के पुख्ता इंतजाम

चक्रवात के मद्देनजर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने बताया कि राज्य में 2,199 चक्रवात राहत शिविर तैयार किए गए हैं। बचाव कार्यों में बुजुर्गों, बच्चों, दिव्यांगों और गर्भवती महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है, जिसके तहत 2360 गर्भवती महिलाओं को अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में शिफ्ट किया गया।

सीएम ने बताया कि 12 एनडीआरएफ और 10 एसडीआरएफ टीमों को संवेदनशील जिलों में तैनात किया गया है। इसके अलावा पुलिस, अग्निशमन सेवा, नौसेना और तटरक्षक बल को भी अलर्ट पर रखा गया है।

बिजली आपूर्ति की जल्द बहाली के लिए 8,400 से अधिक कर्मियों को तैनात किया गया है। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, सतर्क रहें और प्रशासन का सहयोग करें।

उन्होंने लोगों को तूफान पूरी तरह शांत होने तक सुरक्षित शिविरों में ही रहने, जरूरी सामान व मोबाइल चार्ज रखने और समुद्र तटों, नदियों, बाढ़ के पानी व गिरे हुए बिजली के तारों से दूर रहने की हिदायत दी है।

ओडिशा में रेड अलर्ट

मौसम विभाग ने ओडिशा के गंजाम, गजपति, रायगड़ा और नबरंगपुर जिलों के छिटपुट इलाकों में अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में 60 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और 80 किमी प्रति घंटे तक के झोंके आने की आशंका है।

ओडिशा के अन्य दक्षिणी जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट दिया गया है, जबकि भुवनेश्वर और कटक में 40 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। आईएमडी वैज्ञानिक संजीव द्विवेदी ने कोरापुट क्षेत्र में भूस्खलन और कीचड़ धंसने की आशंका जताते हुए लोगों को गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है।

KMC मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने निकाली कैंसर जागरूकता रैली:लक्षण दिखने पर तुरंत जांच और इलाज कराने की अपील की

महराजगंज कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने और समय पर इलाज का महत्व समझाने के लिए केएमसी मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने बुधवार सुबह 11 बजे जागरूकता रैली निकाली। रैली के जरिए लोगों को कैंसर के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने और बीमारी के संकेत मिलने पर चिकित्सकीय परामर्श लेने का संदेश दिया गया। मेडिकल कॉलेज से जिला अस्पताल तक निकली रैली केएमसी मेडिकल कॉलेज से शुरू हुई रैली विभिन्न मार्गों से होते हुए जिला अस्पताल पहुंची। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने लोगों से संवाद कर कैंसर के प्रति जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने बताया कि कैंसर का समय पर पता चलने और उचित उपचार मिलने से मरीज के स्वस्थ होने की संभावना बेहतर हो सकती है। शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें छात्र-छात्राओं ने लोगों को कैंसर के संभावित लक्षणों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शरीर में असामान्य गांठ, लंबे समय तक न भरने वाला घाव, बिना स्पष्ट कारण वजन कम होना या लगातार बनी रहने वाली परेशानी होने पर चिकित्सक से जांच करानी चाहिए। हालांकि, ऐसे लक्षण होने का अर्थ हमेशा कैंसर होना नहीं है, लेकिन समय पर जांच कराना जरूरी है। भ्रांतियों से दूर रहने की अपील रैली के माध्यम से लोगों को कैंसर को लेकर भय और भ्रांतियों से दूर रहने का संदेश भी दिया गया। छात्र-छात्राओं ने अपील की कि बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर घरेलू उपायों या झाड़-फूंक के भरोसे समय बर्बाद न करें। इसके बजाय योग्य चिकित्सक से परामर्श लेकर जरूरी जांच कराएं। जागरूकता से समय पर इलाज को मिलेगा बढ़ावा मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं की इस पहल का उद्देश्य समाज में कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को समय पर उपचार के लिए प्रेरित करना रहा। समय पर जांच, सही चिकित्सकीय सलाह और उचित उपचार इस बीमारी से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

बस्ती के पूर्षिया गांव में खड़ंजा सड़क पक्की बनी:गड्ढों से परेशान राहगीरों को अब आने-जाने में राहत मिली

बस्ती के पूर्षिया गांव में खड़ंजे की सड़क अब पक्की बन गई है। इससे लंबे समय से गड्ढों से परेशान राहगीरों को काफी राहत मिली है।
यह सड़क हाईवे गौरा से बांसी रोड बस्ती को जोड़ती है। पहले यह खड़ंजा सड़क टूटकर गड्ढों में बदल गई थी। दिन हो या रात, साइकिल और मोटरसाइकिल सवारों को आने-जाने में बहुत दिक्कत होती थी।
स्थानीय निवासी शिवकुमार, अजय कुमार, अनिल कुमार, विश्वजीत और महेश कुमार ने बताया कि खराब रास्ते के कारण उन्हें काफी परेशानी होती थी। अब सड़क पक्की बनने से गांव के लोगों में खुशी है।

NH 730 पर अज्ञात महिला का शव मिला:गिलौला के पास बाबा चौराहे पर राहगीरों ने दी सूचना, पुलिस को दुर्घटना का अंदेशा

नेशनल हाईवे 730 पर गिलौला के पास बाबा चौराहे पर एक अज्ञात महिला का शव मिला है। राहगीरों ने इसकी सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची।
पुलिस के अनुसार, पहली नजर में यह मामला दुर्घटना का लगता है। मोबाइल फॉरेंसिक टीम ने शव को कब्जे में ले लिया है और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
घटना की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगी।

‘फाइल फेंकने और दबाने वाले, ऑफिस में लेट आने वाले…’; कैबिनेट सचिव ने गिनाए 12 तरह के ब्यूरोक्रेट्स

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने मंगलवार को परफॉरमेंस रिव्यू (कामकाज की समीक्षा) बैठक में एक ऐसी प्रेजेंटेशन दी, जिससे वरिष्ठ नौकरशाह () भी हक्के-भक्के रह गए।

टी.वी. सोमनाथन ने इस बैठक में ऐसे नौकरशाहों पर तंज कसा, जिससे ये अनुमान लगाया जा सकता है कि कई अधिकारी असहज हो गए होंगे।

कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने 12 तरह के नौकरशाहों पर एक प्रेजेंटेशन दिया। सोमनाथन की सूची में ऐसे अधिकारी शामिल थे जो महिला सहकर्मियों को कोई दस्तावेज दिखाने के लिए बहुत करीब आने को कहते हैं।

सोमनाथन ने उन अधिकारियों पर भी तंज कसा, जो फाइलें फेंकते हैं और बदतमीजी से बात करते हैं। इसके अलावा वो भी जो शनिवार को स्टाफ को तो बुलाते हैं, लेकिन खुद देर से आते हैं।

अन्य श्रेणियों में ऐसे अधिकारी भी शामिल थे जो शाम 7 बजे के बाद बैठकें बुलाते हैं, फाइलों को दबाकर (बिना आगे बढ़ाए) रखते हैं, या ऐसे फैसले मंत्रियों को भेज देते हैं जिन्हें वे खुद ले सकते थे।

टी.वी. सोमनाथन ने इन 12 तरह के नौकरशाहों पर प्रेजेंटेशन देने के लिए हर श्रेणी के साथ एक कार्टून भी दिखाया। बताया जा रहा है कि इनमें से कई कार्टून मशहूर कार्टूनिस्ट आर.के. लक्ष्मण के बनाए हुए थे।

‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ पर जोर

अधिकारियों के अनुसार, कैबिनेट सचिव का मुख्य संदेश यह था कि बैठकों को बेहतर तरीके से कैसे चलाया जाए और कार्यस्थल (वर्कप्लेस) को ऐसा कैसे बनाया जाए जहां काम आसानी से और अच्छे से हो सके।

टी.वी. सोमनाथन ने अधिकारियों को केंद्र सरकार की सुधारों की अगली कड़ी, ‘डिरैग्युलेशन 3.0’ (Deregulation 3.0) के बारे में भी बताया, जो जनवरी से शुरू होने वाली है।

इसका मकसद लालफीताशाही (red tape) को कम करना, नियमों का पालन आसान बनाना और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (कारोबार करने में आसानी) को बेहतर बनाना है।

1 से 10 नंबर के बीच में सही रैंकिंग

वरिष्ठ नौकरशाहों की बैठक में टी.वी. सोमनाथन ने मंत्रालयों के बीच आपसी बातचीत में तेजी लाने पर जोर दिया। सोमनाथन ने कहा कि केंद्रीय वित्त और वाणिज्य मंत्रालयों को अपने विचार तुरंत भेजने चाहिए ताकि किसी तरह की देरी न हो।

कैबिनेट सचिव ने यह भी गौर किया कि अधिकारियों के परफॉरमेंस स्कोर अक्सर 1 से 10 के पैमाने पर 10 के बहुत करीब होते हैं। इससे रैंकिंग सिस्टम में ऐसे अधिकारियों को अलग करना मुश्किल हो जाता है जो वास्तव में बेहतरीन हैं, और उन अधिकारियों को अलग करना मुश्किल हो जाता है जिनका काम बस ‘संतोषजनक’ है।

‘हमारे सिस्टम में मुकदमे की प्रक्रिया ही सजा है…’, उमर खालिद-शरजील इमाम की जमानत पर SC के पूर्व जज की टिप्पणी

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न मिलने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज संजय किशन कौल ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भारत में दोष सिद्ध होने या बरी होने से पहले का समय एक सजा बन जाता है।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज संजय किशन कौल ने कहा कि लंबी कानूनी प्रक्रियाएं अपने आप में एक सजा का रूप ले सकती हैं। उन्होंने कहा कि जमानत मिलना एक सामान्य बात होनी चाहिए।

कुछ मामलों में आसानी से नहीं मिलती जमानत

पूर्व जज संजय किशन कौल ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि जमानत के मामले में उनका नजरिया आमतौर पर उदार रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि कुछ कानून विशेष मामलों में जमानत देने पर स्पष्ट रूप से रोक लगाते हैं।

कानूनी प्रकिया ही सजा

पूर्व जज ने कहा कि जमानत के मामले में मेरा नजरिया हमेशा काफी उदार रहा है। मुझे लगता है कि जमानत मिलना सजा नहीं हो सकती। उन्होंने बताया कि सजा तो दोष सिद्ध होने पर मिलती है। दुर्भाग्य से, हमारी व्यवस्था में, दोष सिद्ध होने या बरी होने से पहले का समय ही एक सजा बन जाता है। पूरी कानूनी प्रक्रिया ही एक सजा बन जाती है।

कई जजों ने जताई चिंता

कौल ने बताया कि कई जजों ने इस मुद्दे पर चिंता जताई है। उन्होंने जस्टिस सुंदरेश के लिखे एक फैसले का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने जमानत के सवाल और हिरासत से जुड़े सिद्धांतों पर चर्चा की थी। उन्होंने बताया कि कई जज इस बारे में लिखते और बात करते रहे हैं।

उन्होंने बताया कि असल में, मैंने जस्टिस सुंदरेश के साथ मिलकर जमानत के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की थी। ये समझने की कोशिश की थी कि आखिर लोग हिरासत में क्यों हैं? 

जमानत मिलना सामान्य बात

कौल ने कहा कि मेरी नज़र में इस मामले में वे एक उदार जज हैं। हमने कुछ नियम वगैरह तय करने की कोशिश की, जो पहले से ही मौजूद थे। उन्होंने ताजा मामले पर हैरानी जताते हुए कहा कि इस मामले तक आते-आते देखिए।

31 अक्तूबर को रिलीज होगी किताब

कौल ने जय विनायक ओझा के साथ मिलकर ‘विदाउट फियर ऑर फेवर’ (Without Fear or Favour) नाम की एक किताब लिखी है, जो उनके संस्मरणों पर आधारित है। यह किताब 31 अक्टूबर को रिलीज़ होने वाली है।

बता दें कि फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के पीछे एक बड़ी साजिश के आरोप में, खालिद और इमाम पर ‘गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम’ (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस हिंसा में 53 लोगों की मौत हो गई थी और 700 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे।

ये दंगे ‘नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019’ और प्रस्तावित ‘नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स’ (NRC) के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़के थे। इस साल पांच जनवरी को, सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दंगों के पीछे की कथित साजिश से जुड़े मामले में खालिद और इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया था।