Home Blog

‘दबंग बन गए हैं जज’, तुषार मेहता ने जजों की ‘दादागिरी’ पर उठाए सवाल


सीनियर वकील और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की नई किताब इन दिनों चर्चा में है। उन्होंने अपनी किताब में न्यायपालिका में जजों के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा है कि कुछ जजों का रवैया सही नहीं है। उन्होंने किताब में दुनिया भर में वकीलों की तरफ से जजों के लिए जताई जाने वाली श्रद्धा को लेकर कई प्रश्न खड़े किए हैं। उनकी इस किताब ने न्यायिपालिका को लेकर एक बार फिर से बहस तेज कर दी है। 

 

दरअसल, उन्होंने कहा कि अदालतों में जजों को जरूरत से ज्यादा सम्मान देने की परंपरा कभी-कभी उल्टा असर डालती है। इससे कुछ जजों में एक तरह की श्रेष्ठता की भावना आ जाती है और उनका व्यवहार दबाव बनाने वाला हो सकता है। उन्होंने लिखा कि कुछ जजों में दिव्यता का ‘अनूठा एहसास’ पैदा हो गया है। 

 

यह भी पढ़ें: Live: बंगाल, केरल, तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी, सरकार बदलेगी या नहीं? नतीजे आज

कैसे उठा पूरा मामला?

यह पूरी बहस तुषार मेहता की किताब  ‘द बेंच, द बार एंड द बिजार’ से शुरू होती है। इस किताब में तुषार मेहता ने कहा कि कुछ मामलों में जजों का रवैया ऐसा हो जाता है कि वकीलों के लिए अपनी बात रखना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने यह भी इशारा किया कि न्यायपालिका में संतुलन और जवाबदेही बनाए रखना जरूरी है, ताकि सभी पक्षों को बराबर मौका मिल सके। उन्होंने विदेशी अदालतों का जिक्र करते हुए ‘बेंच की दादागिरी’ थीम का जिक्र किया। 

जजों की कार्यशैली पर उठाए सवाल

तुषार मेहता ने कहा है कि न्यायिक दादागिरी कई रूप ले सकती है। कुछ जज वकीलों की बात लगातार काटते हैं, तो कुछ सख्ती की हद पार करके अपमान करने पर उतर आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका देश की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में से एक है और जनता को इससे सर्वोच्च स्तर की निष्पक्षता और मर्यादा की उम्मीद होती है। ऐसे में अगर किसी भी स्तर पर व्यवहार में कमी आती है, तो यह चिंता का विषय बन जाता है।

जजों को सम्मान देने के तरीकों पर सवाल

तुषार मेहता ने अपनी किताब में अदालत के अंदर जजों को सम्मान देने के तरीकों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अगर बेंच की ओर से कोई बेतुकी कानूनी बात भी कही जाती है, तो वकील पहले ‘हम माननीय न्यायाधीश के सामने नतमस्तक हैं’ कहकर उसका जवाब देते हैं। इसके बाद वकील कोर्ट में कोई प्रस्ताव पेश करने की हिम्मत कर पाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका देश की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में से एक है और जनता को इससे सर्वोच्च स्तर की निष्पक्षता और मर्यादा की उम्मीद होती है। ऐसे में अगर किसी भी स्तर पर व्यवहार में कमी आती है, तो यह चिंता का विषय बन जाता है।

 

यह भी पढ़ें: ‘हमें बचा लो, हम राख हो जाएंगे…’, विवेक विहार में मरने वालों के अंतिम शब्द

कानूनी जगत में बढ़ी हलचल

यह पहली बार नहीं है जब न्यायपालिका के कामकाज पर सवाल उठे हों। पहले भी कई बार जजों के व्यवहार, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस होती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता के साथ-साथ उसकी जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है।  तुषार मेहता एक जाने-माने वकील हैं और उनकी इस किताब के बाद वकीलों और कानूनी विशेषज्ञों के बीच चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे एक जरूरी बहस मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि इस तरह की बातें न्यायपालिका की छवि पर असर डाल सकती हैं।

 

15 से 29 साल के लोगों में हार्ट अटैक के मामले बढ़े, जानिए बचाव के तरीके और कारण


भारत में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़े हैं। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक दुनियाभर में 10 में से 7 व्यक्ति को हार्ट अटैक आता है। हाल ही में National Statistical Organisation (NSO) का सर्वे आया है जिसमें बताया कि पिछले 7 सालों में भारत में हार्ट अटैक के मामले 3 गुना ज्यादा बढ़े हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि 15 से 29 साल के युवाओं में हार्ट अटैक के मामले बढ़े हैं। पहले हृदय संबंधी बीमारियां लोगों को 50 या 60 की उम्र के बाद होती थी।

 

दिल की बीमारी आज के समय में सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन गया है। जितनी उम्र ज्यादा होता है उतना ही ज्यादा हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। आइए जानते हैं युवाओं में हार्ट अटैक का क्या कारण है और उससे कैसे बच सकते हैं?

 

यह भी पढ़ें: गर्मी से बचने के लिए क्या करें, किन चीजों को खाने से बचें? सबकुछ डॉक्टर से जानें

उम्र के हिसाब से जानिए हार्ट अटैक का खतरा

  • 0 से 4 साल – 0.3%
  • 5 से 14 साल- 0.2%
  • 15 से 29 साल -2.1%
  • 30 से 44 साल- 15. 31%
  • 45 से 59 साल- 30. 1%
  • 60 साल के ऊपर- 37.8%

सर्वे में पाया गया कि 15 से 29 साल वाले 27% लोग संक्रमण की वजह से अस्पताल में भर्ती हुए हैं। इस उम्र के लोगों में 3. 4 % लोग हृदय संबंधी बीमारियों की वजह से भर्ती हुए हैं जो कि चिंता की बात है। रिपोर्ट में पाया गया कि गांव के मुकाबले शहर में रहने वाले पुरुषों में हार्ट संबंधी बीमारियों के मामले बढ़े हैं।

युवाओं में हृदय संबंधी बीमारी के बढ़ने का कारण क्या है?

शारीरिक गतिविधियों में कमी- ज्यादातर लोग डेस्क जॉब करते हैं और इस वजह से एक ही जगह पर घंटों बैठे रहते हैं। इस वजह से मोटापे बढ़ता है। मोटापा हृदय संबंधी बीमारी को बढ़ाने का काम करता है।

 

बाहर का जंक फूड- आज के समय में लोग घर का खाना कम खाते हैं और बाहर की तली भनी चीजें ज्यादा पसंद करते हैं। इन चीजों में रिफाइंड कार्ब्स और शुगर होता है जो शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने का काम करता है। हाई कोलेस्ट्रॉल आपके हार्ट के लिए खतरनाक है।

 

तनाव- आजकल की इस भागदौड़ वाली जिंदगी में युवा छोटी-छोटी बातों पर तनाव लेते हैं। युवाओं को ऑफिस का प्रेशर, फाइनेंशल प्रेशर और पर्सनल लाइफ से जुड़ी चुनौतियों की वजह से तनाव महसूस होता है। तनाव के कारण कोर्टिसोल और एड्रेनालिन हार्मोन बढ़ता है जो ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकता है।

 

स्मोकिंग और शराब- आज के समय में स्मोकिंग और शराब पीने को कूल ट्रेंड माना जाता है। ये दोनों चीजें आपके दिल के लिए नुकसानदायक है। स्मोकिंग से ब्लड प्रेशर बढ़ता है और ऑक्सीजन का लेवल कम होता जिसकी वजह हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है।

 

यह भी पढ़ें: गर्मी में गन्ने का जूस पीने के शौकीन हैं तो इन बातों का रखें ध्यान

कैसे बचें?

  • संतुलित आहार लें- अपनी डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और ओमेगा 3 वाली चीजों को शामिल करें।
  • रोजाना 30 से 45 मिनट तक एक्सरसाइज करें।
  • 30 साल की उम्र के बाद हर महीने हेल्थ चेकअप करवाएं।
  • शराब, सिगरेट और तंबाकू से पूरी तरह से परहेज करें

उत्तराखंड के 5 प्रयागों का क्या रहस्य है? पौराणिक कहानियों से समझिए


उत्तराखंड को देवों की भूमि माना जाता है, जहां हिन्दू धर्म के कई धार्मिक स्थल हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कई प्राचीन मंदिर जैसे बद्रीनाथ और केदारनाथ की उत्पत्ति यहीं हुई थी। इसके अलावा कुछ पवित्र नदियों की धारा भी यहीं से शुरू हुई, जो आज भी उतनी ही पवित्र और स्वच्छ मानी जाती हैं जितनी पहले हुआ करती थीं। धार्मिक मान्यता के अनुसार जब मां गंगा धरती लोक में सबसे पहले आईं, तो वह भगवान शिव की जटाओं में विराजमान थीं, जिसके बाद वे धरती पर विभिन्न नदियों के प्रवाह से मिल गईं, जिन्हें संगम कहा जाता है। ऐसा ही पांच प्रयाग हैं, जहां गंगा जी अलग-अलग नदियों से मिली हैं।


हिन्दू धर्म में गंगा नदी को सबसे पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक उत्तराखंड के पांच प्रयाग केवल एक संगम नहीं हैं, बल्कि कई पौराणिक कहानियों का प्रतीक हैं। उत्तराखंड में जब अलकनंदा नदी पांच अलग-अलग नदियों से मिली, तो पांच पवित्र संगमों का निर्माण हुआ। इन पांच संगमों के नाम हैं विष्णुप्रयाग, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग और देवप्रयाग। अब सवाल उठता है कि इन पांचों नदियों के संगम की पौराणिक कहानी क्या है।

 

यह भी पढ़ें: मई में पैसे कम पड़ेंगे या आराम से निकल जाएगा महीना? अपने राशिफल से समझिए

पंच प्रयाग से जुड़ी पौराणिक कथा


1. विष्णुप्रयाग


विष्णुप्रयाग उत्तराखंड के चमोली जिले में है, जहां चारधाम यात्रा के दौरान भक्त जाते हैं और पूरे श्रद्धा भाव से नदी में डुबकी लगाते हैं। विष्णुप्रयाग में अलकनंदा और धौलीगंगा नदी का संगम है। माना जाता है कि यहां स्नान करने से भक्तों के सारे पाप खत्म हो जाते हैं। इसी वजह से कई श्रद्धालु बद्रीनाथ धाम के दर्शन के बाद यहां डुबकी लगाते हैं।


इस स्थान से जुड़ी पौराणिक कथा यह है कि यहां नारद मुनि ने भगवान विष्णु की कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु यहां प्रकट हुए थे। इसी कारण इस संगम को विष्णुप्रयाग कहा जाता है। कई धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु आज भी यहां विराजमान हैं।


2. नंदप्रयाग


नंदप्रयाग में अलकनंदा और नंदाकिनी नदी का संगम देखने को मिलता है। यह भी उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है। इस स्थान से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार यहां राजा नंद रहते थे, जिनकी कोई संतान नहीं थी। संतान प्राप्ति के लिए उन्होंने भगवान विष्णु की कई सालों तक तपस्या की थी। उनकी तपस्या से खुश होकर भगवान विष्णु ने उन्हें संतान का वरदान दिया। तभी से इस स्थान को नंदप्रयाग कहा जाने लगा।

 

यह भी पढ़ें: बद्रीनाथ के रास्ते का रहस्य, पांडवों ने पाया मोक्ष, जानिए पांडुकेश्वर की कहानी


3. कर्णप्रयाग


कर्णप्रयाग में अलकनंदा और पिंडर नदी का संगम है। इस स्थान की पौराणिक कथा महाभारत से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि महाभारत के वीर कर्ण ने यहां सूर्य देव की कठोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर सूर्य देव ने उन्हें कवच और कुंडल प्रदान किए थे। इसी कारण इस संगम को कर्णप्रयाग कहा जाता है।


4. रुद्रप्रयाग


रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मंदाकिनी नदी का संगम है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यहां भगवान शिव ने रुद्र रूप धारण किया था। कहा जाता है कि नारद मुनि ने यहां भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी, जिसके बाद शिवजी रुद्र रूप में प्रकट हुए और उन्होंने तांडव नृत्य किया। यह संगम केदारनाथ धाम के पास स्थित है, इसलिए इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।


5. देवप्रयाग


देवप्रयाग उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में स्थित है। यहां अलकनंदा और भागीरथी नदी का संगम होता है, और यहीं से गंगा नदी का वास्तविक स्वरूप शुरू होता है। इस संगम से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार भगवान राम रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद यहां आए थे। उन्होंने यहां भगवान विष्णु के रूप में तपस्या की थी। इसलिए इस स्थान को देवप्रयाग कहा जाता है।

 

डिस्क्लेमर- यह खबर मान्यताओं पर आधारित है, हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

44,447 की गई जान, अमेरिका में बात-बात पर क्यों चल जाती है गोली?


दुनिया में बंदूक हिंसा में सबसे अधिक जानें अमेरिका में जाती हैं। अमेरिका के बाद बंदूक से सबसे अधिक मौतें ब्राजील में होती हैं। 2023 के आंकड़ों के मुताकि अमेरिका में बंदूक हिस्सा में मरने वालों की संख्या ब्राजील की तुलना में 10 हजार अधिक थी। अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के आंकड़ों के मुताबिक 2024 में अमेरिका में बंदूक हिंसा में 44,447 लोगों की जान गई। पिछले तीन वर्षों से मृतकों की संख्या में गिरावट हुई, लेकिन यह आंकड़ा अब भी बहुत अधिक है।

 

गन वायलेंस आर्काइव के मुताबिक अमेरिका में 2024 में सामूहिक गोलीबारी में 510 लोगों की जान गई। वहीं एफबीआई का डेटा बता रहा है कि साल दर साल सामूहिक गोलीबारी की घटनाओं में कमी आ रही है। मगर बड़ी संख्या में लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। 2021 में सामूहिक गोलीबारी की 61, 2022 में 50, 2023 में 48 और 2024 में 24 घटनाओं से अमेरिका दहल उठा। 

 

यह भी पढ़ें: ‘हम भारत जैसे नहीं है’, पाकिस्तान के मंत्री ने TV पर देश की बड़ी कमजोरी बता दी

गोली मारकर खुदकुशी के मामले सबसे अधिक

खास बात यह है कि अमेरिका में बंदूक से होने वाली मौतों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी आत्महत्याओं की है। करीब 62 फीसद मामले खुदकुशी से जुड़े थे। वहीं 35 फीसद केस हत्या से। 2024 में 27,593 ने गोली मारकर आत्महत्या की। वहीं 15,364 लोगों की हत्या हुई। 450 लोगों की मौत बंदूक दुर्घटना व अज्ञात कारणों से 404 की जान गई। 636 लोगों ने पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों की गोली का शिकार बने।

15,364 लोगों की गोली मारकर हत्या

अमेरिका में साल 2024 में हत्या के कुल 20,162 मामले सामने आए। इनमें से करीब 76 फीसद यानी 15,364 लोगों की हत्या गोली मारकर की गई थी। इसी साल करीब 48,824 लोगों ने खुदकुशी की। इनमें से 57 फीसद यानी 27,593 लोगों ने गोली मारकर अपनी जान ली। 

 

कोविड महामारी के वक्त अमेरिका में गोली मारकर हत्या करने के मामलों में इजाफा हुआ था। 2024 में जहां 15,364 लोगों की बंदूक से हत्या की गई। वहीं 2021 में यह आंकड़ा 20,958 तक पहुंच गया था। 

किस राज्य में सबसे अधिक मामले

2024 में बंदूक हिंसा में जान गंवाने वालों की दर मिसिसिपी में सबसे अधिक रही। यहां प्रति 10 हजार लोगों में 28 लोगों की मौत गोली लगने से हुई। इसके बाद न्यू मैक्सिको (26.6), अलास्का (24.4), अलबामा (23.7) और व्योमिंग (23.4) का नंबर आता है। वहीं हवाई (3.7), मैसाचुसेट्स (3.8), न्यू जर्सी (4.0), न्यूयॉर्क (4.4) और रोड आइलैंड (4.6) में सबसे कम दर रिकॉर्ड की गई।

 

यह भी पढ़ें: अमेरिका के टेक्सास में विमान हादसा, पांच लोगों की मौत; बचाव अभियान जारी

गन हिंसा के पीछे वजह क्या है?

दुनिया में आम नागरिकों के पास सबसे अधिक असलहे अमेरिका में है। 2017 तक दुनियाभर में नागरिक इस्तेमाल के लिए उपलब्ध 857 मिलियन बंदूकों में से करीब 393.3 मिलियन (46%) असलहे अमेरिकी नागरिकों के पास है। अमेरिका के मोंटाना राज्य में प्रतिशत के लिहाज से सबसे अधिक बंदूकें आम जनता के पास हैं। यहां 66.3% लोग बंदूकों के मालिक हैं। माना जाता है कि बंदूकों की अधिक उपलब्धता गन हिंसा के पीछे एक अहम वजह है।

 

मैसाचुसेट्स और न्यू जर्सी में लोगों के पास सबसे कम बंदूक है। यहां 14.7 फीसद लोग अपने पास बंदूक रखते हैं। भारत में जहां हर 100 व्यक्ति में सिर्फ 5.3 लोगों के पास लाइसेंसी बंदूक है तो वहीं अमेरिका में हर 100 व्यक्ति में 120.5 बंदूकें हैं। बंदूक रखने के मामले में अमेरिका के बाद स्विट्जरलैंड का नंबर आता है। यहां हर 100 नागरिक में 27.58 बंदूकें हैं। 

 

 

‘मेरा जीना मुश्किल, बहुत परेशान किया जा रहा’, खुदकुशी करने वाले जज की आखिरी कॉल


दिल्ली के सफदरजंग में कड़कड़डूमा कोर्ट के जज अमन कुमार शर्मा (30) ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। अमन की बहन के ससुर ने हत्या से पहले घर में क्या-क्या हुआ था… उसका विस्तार से खुलासा किया। आत्महत्या के पीछे घरेलू कलह को वजह बताया जा रहा है। शुक्रवार की रात अमन ने अपने पिता को फोन किया था। इसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें दो महीने से परेशान किया जा रहा है। इसी रात उनका पत्नी स्वाति के साथ झगड़ा हुआ। अमन घर में स्वाति की आईएएस बहन निधि मलिक की दखल से परेशान था। निधि मलिक अभी जम्मू-कश्मीर में तैनात हैं। 

 

अमन की बहन के ससुर ने बताया कि मैंने फोन पर बेटे से बात की तो घटना की जानकारी मिली। बेटे ने बताया कि अमन को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया है। जब तक अस्पताल पहुंचा तब तक डॉक्टर उसे मृत घोषित कर चुके थे। उन्होंने आगे कहा कि घटना के बाद मैंने अपने समधी साहब से बात की। उनकी हालत ठीक नहीं थी। वह बहुत रो रहे थे।

 

यह भी पढ़ें: जमीन हड़पने के लिए पहले किया अपहरण, फिर बनाया अश्लील वीडियो, दो गिरफ्तार

‘मैं बहुत परेशान हूं’

बहन के ससुर ने पुलिस को दिए अमन के पिता के बयान का जिक्र किया और बताया कि रात करीब 10 बजे अमन ने अपने पिता को फोन किया। इसमें अमन ने कहा कि मैं बहुत परेशान हूं। मेरा जीना मुश्किल हो गया है। पिता ने अमन को समझाया और रात 10 बजे ही अलवर से चल पड़े। करीब 12 बजे रात को यहां पहुंचे।

‘पत्नी के साथ अमन का चल रहा था झगड़ा’

बहन के ससुर ने आगे बताया कि यहां पहुंचने पर पिता को पता चला कि उनका (अमन) पत्नी के साथ झगड़ चल रहा है। अमन ने पिता को बताया कि उन्हें दो महीने से बहुत परेशान किया जा रहा है। उन्होंने आगे बताया कि अमन की पत्नी स्वाति भी न्यायिक अधिकारी हैं। उनकी बहन निधि मलिक आईएएस अधिकारी हैं। वह अभी जम्मू में तैनात हैं। अमन के मुताबिक निधि मलिक का घर में बहुत दखल था। यहां का सारा कंट्रोल वही करती है। पिता ने दोनों को समझाने का प्रयास किया।

 

 

 

‘आपको बंद करवा दूंगी’

अमन के पिता ने अपनी बेटी के ससुर को बताया, ‘बहू ने उनसे कहा कि अगर आप यहां से नहीं गए तो वह पुलिस बुला लेगी। आपको बंद करवा दूंगी। हालांकि रात को यहां रुके और सुबह बहू के माता-पिता से संपर्क करने की कोशिश की। मगर उन्होंने उनका फोन ब्लॉक कर दिया। बाद में चाचा से संपर्क किया। वह यहां आए, लेकिन उन्हें कोई मैसेज आया। इसके बाद वह भी चले गए।’ 

 

पिता के बयान के आधार पर अमन की बहन के ससुर ने बताया, ‘स्वाति बहुत गुस्से में थी। अमन रो रहा था। कुछ देर बाद कमरे से आवाज आनी बंद हो गई। उनको लगा कि शायद सुलह समझौता हो गया। मगर कुछ देर बाद पिता ने बहू स्वाति से पूछा कि अमन कहां है तो उन्होंने कहा कि मुझे नहीं मालूम की वह कहां है?’

 

यह भी पढ़ें: बंगाल में दोबारा वोटिंग: मगराहाट पश्चिम में 86% और डायमंड हार्बर में 88% मतदान

बाथरूम में लटकी मिली लाश

उन्होंने आगे कहा, ‘बाद में पिता ने अमन के मोबाइल पर फोन किया तो कमरे में बने बाथरूम में घंटी बजी। पिता ने दरवाजा खोलने को कहा। इसी बीच निधि मलिक और चाचा युद्धवीर वहां पहुंचे। दरवाजा खोलने की बहुत कोशिश की गई। मगर नहीं खुला। खिड़की का शीशा तोड़कर जब गार्ड शंकर बाथरूम के अंदर पहुंचा तो देखा अमन ने स्वाति की चुन्नी से फांसी लगा रखी थी। उसे उतारकर अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने अमन को मृत घोषित कर दिया।’ 

पिंक टैक्स क्या है? महिलाओं के सामान अक्सर महंगे क्यों होते हैं


पिंक टैक्स कोई सरकारी टैक्स नहीं है। यह असल में बाजार की एक चालाकी है। इसमें महिलाओं के इस्तेमाल वाली चीजों को पुरुषों की चीजों से महंगा बेचा जाता है। जैसे अगर लड़कों का नीला रेजर 20 रुपये का है तो लड़कियों वाला वही रेजर गुलाबी रंग की पैकिंग में 25 या 30 रुपये का मिलता है। सिर्फ रंग और दिखावट बदलकर महिलाओं से ज्यादा रुपये वसूलना ही ‘पिंक टैक्स’ है। यह कपड़ों, परफ्यूम और यहां तक कि बाल कटवाने जैसी सर्विस पर भी लिया जाता है।

 

इस भेदभाव के बारे में सबसे पहले 1994 में अमेरिका के कैलिफोर्निया में पता चला था। वहां रिसर्च में देखा गया कि महिलाओं के ब्यूटी प्रोडक्ट्स लड़कों के मुकाबले 13 प्रतिशत महंगे थे। ब्रिटेन में तो चेहरे की क्रीम 34 प्रतिशत तक महंगी बेची जा रही थी। इसी भेदभाव को देखते हुए साल 2017 में संयुक्त राष्ट्र (UN) ने पूरी दुनिया को इसे रोकने की सलाह दी थी।

 

यह भी पढ़ें: दिल्ली की भयंकर गर्मी का बुरा असर, गरीब बस्तियों की गर्भवती महिलाएं बेहाल

भारत में पिंक टैक्स की स्थिति

भारत में बहुत कम लोगों को इसके बारे में पता है। साल 2018 में जब सरकार ने सैनिटरी पैड्स पर से टैक्स हटाया, तब इस मुद्दे पर थोड़ी चर्चा शुरू हुई। आज भी भारत में महिलाएं जाने-अनजाने में स्किन केयर और सैलून में पुरुषों से ज्यादा रुपये दे रही हैं।

महिलाओं पर इसका असर

पिंक टैक्स महिलाओं के बजट को खराब करता है:

 

कम कमाई और ज्यादा खर्च: महिलाओं की कमाई अक्सर पुरुषों से कम होती है, फिर भी उन्हें सामान महंगा मिलता है।

 

बचत में कमी: फालतू खर्च की वजह से घर की बचत कम हो जाती है।

 

बड़ा आर्थिक नुकसान: अगर पूरी जिंदगी का हिसाब जोड़ें, तो एक महिला सिर्फ इस भेदभाव की वजह से लाखों रुपये फालतू खर्च कर देती है।

इस खर्च से कैसे बचें?

थोड़ी सावधानी से आप अपने रुपये बचा सकती हैं:

 

पुरुषों वाले सामान का इस्तेमाल: अगर रेजर या शैम्पू की क्वालिटी एक जैसी है तो लड़कों वाला पैक खरीदें क्योंकि वह सस्ता होता है।

 

कीमतों को चेक करें: सामान लेने से पहले देखें कि क्या वही चीज लड़कों के लिए कम दाम में मिल रही है।

 

सैलून में बात करें: अगर हेयरकट एक जैसा है तो जेंडर के नाम पर ज्यादा रुपये न दें।

 

जागरूक बनें: सिर्फ उन्हीं कंपनियों से सामान खरीदें जो दाम में भेदभाव नहीं करतीं।

 

यह भी पढ़ें: दिल्ली की भयंकर गर्मी का बुरा असर, गरीब बस्तियों की गर्भवती महिलाएं बेहाल

भारत में कानून और नियम

भारत में अभी पिंक टैक्स के खिलाफ कोई सख्त कानून नहीं बना है। हालांकि उपभोक्ता अदालतों का कहना है कि कंपनियों को जेंडर के आधार पर कीमत नहीं बढ़ानी चाहिए। अभी आपकी जानकारी ही आपका सबसे बड़ा बचाव है।

हरदोई का अद्भुत संयोग, जहां की धरती पर भगवान विष्णु ने लिया दो बार अवतार


उत्तर प्रदेश का हरदोई जिला हिन्दू धर्म के लोगों के लिए बेहद खास है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक हरदोई में ही भगवान विष्णु जी ने दो बार अवतार लिए थे, जहां एक बार नरसिंह के रूप में अवतार लिया था, वहीं दूसरी बार उन्होंने वामन रूप में अवतार लिया था। इन दोनों अवतारों के जरिए भगवान विष्णु जी ने लोगों को अधर्म से धर्म के रास्ते पर चलने की राह दिखाई थी, साथ ही घमंडी राजाओं का अहंकार तोड़ा था। धार्मिक कथाओं के मुताबिक भगवान विष्णु जी का चौथा अवतार नरसिंह था। इस अवतार में सबसे खास बात यह है कि नरसिंह जी का आधा शरीर नर का था और आधा शरीर सिंह का था। इसी वजह से उनका नाम नरसिंह रखा गया था।

 

भगवान विष्णु जी ने वामन अवतार हरदोई के सांडी क्षेत्र में लिया था, जहां उस दौरान राजा बलि राजा थे, जो अपनी शक्तियों और धन को लेकर बेहद अहंकारी हो गए थे। उन्हें ही सबक सिखाने के लिए वामन जी ने अवतार लिया था। अब सवाल उठता है कि नरसिंह और वामन जी के अवतार की कहानी क्या है?

 

यह भी पढ़ें: मई में पैसे कम पड़ेंगे या आराम से निकल जाएगा महीना? अपने राशिफल से समझिए

 

नरसिंह जी के अवतार के पीछे की कहानी क्या है?

 

पौराणिक कथाओं के अनुसार हरदोई जिले में हिरण्यकश्यप नाम का एक राजा था, जो भगवान और धर्म में विश्वास नहीं करता था। इसके अलावा वह अपने राज्य में लोगों को पूजा-पाठ और भगवान का नाम लेने से भी रोकता था। हिरण्यकश्यप अपने राज्य के लोगों को बेहद परेशान करता था, जिस वजह से हरदोई के लोग दुखी रहते थे। हिरण्यकश्यप को अपनी शक्तियों पर बेहद घमंड था। इसके पीछे एक खास रहस्य है।

 

प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप ने ब्रह्मा जी को खुश करने के लिए तपस्या की थी। इससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उन्हें वरदान दिया था। इस वरदान के मुताबिक हिरण्यकश्यप को न कोई इंसान और न ही कोई जानवर मार सकता था। इस वरदान की वजह से ही हिरण्यकश्यप को अहंकार हो गया था। वह खुद को ही भगवान समझने लगा और देवी-देवताओं की पूजा-पाठ छोड़ दी।

 

यह भी पढ़ें: बद्रीनाथ के रास्ते का रहस्य, पांडवों ने पाया मोक्ष, जानिए पांडुकेश्वर की कहानी

 

हिरण्यकश्यप का बेटा प्रह्लाद था, जो भगवान विष्णु जी का परम भक्त था। वह हर रोज विष्णु जी की पूजा-पाठ किया करता था। यह देखकर हिरण्यकश्यप गुस्सा हो गया और उसने अपने बेटे प्रह्लाद को मारने की कोशिश की थी। इसके बाद अपने भक्त की रक्षा करने के लिए नरसिंह जी प्रकट हुए और हिरण्यकश्यप का वध कर दिया।

 

वामन जी के अवतार की पौराणिक कहानी

 

विष्णु जी का पांचवां अवतार वामन था। पौराणिक कहानियों के मुताबिक हरदोई के सांडी क्षेत्र में राजा बलि राज करता था, जिसने पूजा-पाठ के जरिए भगवान के आशीर्वाद से अत्यधिक धन और शक्ति प्राप्त कर ली थी। इंद्र के प्रभाव को खत्म करते हुए उसने पृथ्वी, आकाश और स्वर्ग तीनों पर अधिकार जमा लिया था।

 

यह भी पढ़ें: 1 मई का राशिफल, बुद्ध पूर्णिमा के दिन कैसा रहने वाला है आपका भाग्य? जानिए राशिफल

 

इसके बाद देवताओं का अधिकार छिन गया और असुरों का प्रभाव बढ़ गया। राजा बलि को अपने धन और शक्ति पर घमंड हो गया था। इसी घमंड को तोड़ने के लिए वामन जी ने बलि से तीन पग जमीन मांगी। जैसे ही बलि ने दान का संकल्प लिया, वामन देव ने अपना आकार बढ़ाकर विराट रूप धारण कर लिया। इससे डरकर बलि ने माफी मांग ली थी।

 

डिस्क्लेमर- यह खबर मान्यताओं पर आधारित है, हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

‘ईरान से लौटते क्यूबा पर कब्जा करेंगे’, ट्रंप ने बताया अपना मिलिट्री प्लान


अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मजाक-मजाक में बड़ी बात कह दी। उन्होंने कहा कि ईरान से लौटते समय अमेरिकी नौसेना क्यूबा को अपने कब्जे में लेगी। बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान युद्ध शुरू होने से पहले ही क्यूबा की ईंधन नाकेबंदी कर रखी है। नाकेबंदी की वजह से क्यूबा में भीषण आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ट्रंप कई बार क्यूबा के खिलाफ सैन्य अभियान की धमकी भी दे चुके हैं।

 

गैर-लाभकारी संगठन ‘फोरम क्लब ऑफ पाम बीचेज’ में पहुंचे ट्रंप ने कहा, क्यूबा पर हम लगभग तुरंत कब्जा कर लेंगे, क्यूबा में समस्याएं हैं। ईरान से लौटते समय हमारे पास हमारा एक बड़ा विमानवाहक पोत होगा… शायद यूएसएस अब्राहम लिंकन, जो दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत है। वह आएगा… तट से लगभग 100 गज की दूरी पर रुकेगा और वे कहेंगे- बहुत-बहुत धन्यवाद। हम आत्मसमर्पण कर रहे हैं।’

 

यह भी पढ़ें: 14 साल के लड़के को उम्रकैद की सजा, दुष्कर्म हत्या मामले में ऐतिहासिक फैसला

चार महीने से ऊर्जा संकट झेल रहा क्यूबा

क्यूबा की जनता पिछले चार महीने से ऊर्जा संकट झेल रही है। अस्पतालों में ऑपरेशन कम हो रहे हैं। सड़कें रात में सूनी हो जाती हैं। कई इलाकों में भारी बिजली कटौती हो रही है। देशभर में छोटे व्यवसाय बंद हो रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी तक हजारों सर्जरी स्थगित की जा चुकी हैं। लाखों लोगों के सामने पीने के पानी का संकट भी खड़ा हो गया है। 

 

 

यह भी पढ़ें: ‘हम भारत जैसे नहीं है’, पाकिस्तान के मंत्री ने TV पर देश की बड़ी कमजोरी बता दी

 

‘समुद्री लुटेरों जैसा बर्ताव कर रही यूएस नेवी’

डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरान की नाकेबंदी पर कहा कि यूएस नेवी समुद्री लुटेरों जैसा बर्ताव कर रही है। फ्लोरिडा में ट्रंप ने कहा, ‘हम, उस पर उतरे और हमने जहाज पर कब्जा कर लिया। हमने माल पर कब्जा कर लिया, तेल पर कब्जा कर लिया। यह बहुत मुनाफे वाला धंधा है। हम कुछ हद तक समुद्री लुटेरों जैसे हैं, लेकिन हम कोई खेल नहीं खेल रहे हैं। 

EVM में कैसे गिने जाते हैं वोट, VVPAT से क्या होता है? आपके हर सवाल का जवाब


केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम और पुड्डूचेरी में विधानसभा चुनाव हुए हैं। विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और तृणमूल कांग्रेस के बीच खूब सियासी झड़प देखने को मिल रही है। तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से छेड़छाड़ कर, अपने हित में वोट बटोर रही है। चुनाव आयोग ने इन आरोपों का खंडन किया है। आरोप प्रत्यारोपों के बीच, एक सवाल हर किसी के मन में है कि क्या EVM हैक कर सकते हैं, EVM में वोटों की गिनती कैसे होती है।

चुनाव आयोग, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का इस्तेमाल करता है। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए 2013 से EVM के साथ VVPAT मशीन भी लगाई जाती है, जो उम्मीदवार का नाम और चुनाव चिह्न छापकर कागजी पर्ची निकालती है। मतगणना की जिम्मेदारी रिटर्निंग अधिकारी (RO) पर होती है। 

RO हर संसदीय क्षेत्र में चुनाव कराने और वोट गिनने का काम देखता है। गिनती कहां होगी, यह रिटर्निंग अधिकारी तय करता है। आमतौर पर RO के दफ्तर या मुख्य जगह पर गिनती होती है, लेकिन कई विधानसभा क्षेत्र होने पर अलग-अलग जगहों पर भी हो सकती है। 

यह भी पढ़ें: EVM में छेड़छाड़ से ममता कुछ लाईं हैं तक, कहां पहुंच गया बंगाल का चुनाव?

काउंटिंग हॉल में क्या होता है?

काउंटिंग हॉल में खास व्यवस्था होती है। एक हॉल में एक समय में एक विधानसभा क्षेत्र के वोट ही गिने जाते हैं। हर राउंड में 14 EVM मशीनों के वोट गिने जाते हैं। गिनती की निगरानी रिटर्निंग अधिकारी और सहायक रिटर्निंग अधिकारी करते हैं। उम्मीदवार अपने गिनती एजेंट के साथ मौजूद रह सकते हैं। 

क्या पहले गिना जाता है?

सबसे पहले पोस्टल बैलट और इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलट गिने जाते हैं। इनकी गिनती RO खुद देखते हैं। इसके आधा घंटे बाद EVM मशीनों की गिनती शुरू हो जाती है। हर राउंड पूरा होने पर 14 EVM के नतीजे घोषित किए जाते हैं।

VVPAT पर्चियों की गिनती कैसे होती है?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार हर संसदीय क्षेत्र के हर विधानसभा क्षेत्र में 5 पोलिंग स्टेशन की VVPAT पर्चियां चुनी जाती हैं। इन पर्चियों को EVM के नतीजों से मिलाया जाता है। यह काम गिनती हॉल के अंदर एक सुरक्षित VVPAT काउंटिंग बूथ में होता है। 

संसदीय क्षेत्र में आमतौर पर 5 से 10 विधानसभा क्षेत्र होते हैं, इसलिए कुल 25 से 50 VVPAT मशीनों की पर्चियां मिलाई जाती हैं। अगर EVM और VVPAT में अंतर पाया गया तो VVPAT की गिनती को अंतिम माना जाएगा। रिटर्निंग अधिकारी VVPAT मिलान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम नतीजे घोषित करते हैं।

यह भी पढ़ें: पहले पोस्टल बैलेट की गिनती, फिर EVM की, चुनाव आयोग ने क्या बदलाव किया?

EVM में कैसे गिने जाते हैं वोट?

मतगणना के दिन सुबह 8 चुनाव आयोग की सख्त निगरानी में वोटों की गिनती शुरू होती है। वोट EVM में दर्ज होते हैं। इन्हें गिनने की प्रक्रिया बेहद व्यवस्थित और पारदर्शी होती है। मतदान के बाद सभी EVM और कंट्रोल यूनिट को सील करके स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाता है। 

स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा कई स्तर पर होती है। CCTV, सुरक्षा बल और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि यहां मौजूद रहते हैं। मतगणना वाले दिन सुबह स्ट्रॉन्ग रूम को सभी उम्मीदवारों के एजेंटों, ऑब्जर्वर और रिटर्निंग अधिकारी की मौजूदगी में खोला जाता है। EVM की सील, सीरियल नंबर और फॉर्म 17C की जांच की जाती है। फॉर्म 187सी में ही बूथ पर पड़े कुल वोटों का रिकॉर्ड रखा जाता है। 

गिनती कैसे होती है?

सुबह 8 बजे सबसे पहले पोस्टल बैलट और इलेट्रॉनिकली ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलेट (ETPB) की गिनती शुरू होती है। यह करीब 30 मिनट तक चलती है। इसके आधे घंटे बाद, करीब 8:30 के आसपास EVM की गिनती शुरू हो जाती है। कंट्रोल यूनिट ही मुख्य मशीन होती है, जिसमें वोट दर्ज होते हैं। बैलेट यूनिट से वोटर बटन दबाता है और वोट कंट्रोल यूनिट की मेमोरी में सुरक्षित हो जाता है। 

गिनती राउंड में होती है। हर राउंड में आमतौर पर 14 EVM की गिनती की जाती है। काउंटिंग सुपरवाइजर कंट्रोल यूनिट (CSCU) पर रिजल्ट बटन दबाता है। मशीन तुरंत स्क्रीन पर सभी उम्मीदवारों के नाम और उनके सामने पड़े वोटों की संख्या दिखा देती है। यह आंकड़ा ब्लैकबोर्ड पर नोट किया जाता है। एजेंट देखते हैं और रिटर्निंग अधिकारी को रिपोर्ट किया जाता है। हर राउंड के बाद परिणाम अपडेट होते जाते हैं। पूरी विधानसभा के EVM खत्म होने तक यह प्रक्रिया चलती है। 

यह भी पढ़ें: EVM से कैसे गिनते हैं वोट, कितनी देर चलती है बैटरी, हर सवाल का जवाब

नतीजे कैसे घोषित होते हैं?

जब काउंटिंग सेंटर पर सभी राउंड और VVPAT वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है, तब रिटर्निंग अधिकारी फॉर्म 20, फाइनल रिटर्निंग शीट भरकर आधिकारिक नतीजे घोषित करते हैं। EVM की मेमोरी को फिर से सील कर दिया जाता है और इसे सुरक्षित रखा जाता है।

क्या EVM को हैक किया जा सकता है?

चुनाव आयोग, एक सिरे से इसे खारिज करता है। चुनाव आयोग का कहना है कि भारत में मतदान की प्रक्रिया तेज, सस्ती और बेहद सुरक्षित है। पहले बैलट पेपर की गिनती में दिन-रात लग जाते थे, अब बड़े-बड़े चुनावों के नतीजे एक ही दिन में आ जाते हैं। राजनीतिक दल के एजेंट हर कदम पर मौजूद रहते हैं, ऑब्जर्वर निगरानी रखते हैं और मीडिया को भी नजर रहती है। ऐसे में किसी भी तरह की धांधली की बात सिर्फ गलत मंशा से फैलाई जाती है। मतगणना की पूरी प्रक्रिया निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार होती है और किसी भी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई की जाती है।

क्या सिर पर गीला कपड़ा या दुपट्टा रखना हीट वेव से बचा सकता है?


दिल्ली समेत अन्य राज्यों में भीषण गर्मी से लोग परेशान है। अप्रैल के महीने में तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच गया है। सुबह 8 बजे से ही गर्मी का प्रकोप दिखने लगता है। ऐसे में लोग खुद को गर्मी से बचाने के लिए तरह-तरह के उपायों को अपनाते हैं।

 

गर्मी में अक्सर आपने लोगों को सिर पर गीला गमछा, दुपट्टा रखें देखा होगा। ऐसा करने से उन्हें गर्मी से राहत तो मिलती है लेकिन क्या इसका इस्तेमाल हीट एग्जॉशन या हीट स्ट्रोक से बचने के लिए किया जा सकता है। इस बारे में हमने Aster CMI अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन कंसल्टेंट डॉक्टर पूजा पिल्लई से बात की

 

यह भी पढ़ें: गर्मी में इलेक्ट्रोलाइट की कमी को हल्के में न लें, जाना पड़ सकता है अस्पताल

क्या हीट स्ट्रोक से बचता है गीला कपड़ा?

डॉक्टर के मुताबिक सिर पर गील कपड़ा या दुपट्टा रखने से कुछ देर के लिए राहत तो मिल सकती है लेकिन ये हीट स्ट्रोक या हीट एग्जॉशन से नहीं बचा सकता है। जब किसी व्यक्ति के शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा हो जाता है तो उस स्थिति को हीट स्ट्रोक कहा जाता है। इस दौरान तुरंत अस्पताल लें जाएं। खुद से इलाज करने की गलती न करें। गंभीर मामलों में हीट स्ट्रोक की वजह से जान भी जा सकती हैं। 

कपड़े को इस्तेमाल करने का तरीका क्या है ?

जब आपको कुछ देर के लिए बाहर निकल रहे हैं तो ऐसा कर सकते है। कपड़े की वजह से आप सीधा सूरज के संपर्क में नहीं आएंगे। ये आपको कुछ देर के लिए गर्मी से राहत दिलाने का काम भी करता है।

 

आपको कपड़े को हल्का गीला करना है। हमेशा सूती का साफ कपड़ा इस्तेमाल करें। आप कपड़े को सिर पर 10 मिनट के लिए रख सकते हैं। उसे ज्यादा देर न रखें।

अगर आप लंबे समय तक गीले कपड़े को सिर पर रखते हैं तो इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। गर्मी से बचने के लिए आप कुछ देर छाव में रुककर आराम करें। कपड़ा कुछ देर के लिए गर्मी से राहत देगा लेकिन यह समस्या का समाधान नहीं है।

 

यह भी पढ़ें: 15 से 29 साल के लोगों में हार्ट अटैक के मामले बढ़े, जानिए बचाव के तरीके और कारण

गर्मी से बचने के लिए क्या करें

  • शरीर को हाइड्रेटेड रखें- गर्मी के मौसम में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। पानी पीने से शरीर हाइड्रेटेड रहता है। आप घर पर नींबू,चीनी और नमक को पानी में घोलकर ओआरएस भी बना सकते हैं।
  • धूप में निकलने से बचें-दोपहर में 12 बजे से लेकर 4 बजे तक बाहर निकलने से बचें।
  • हल्के कपड़े पहनें- सूती के हल्के कपड़े पहने ताकि पसीना सोख पाएं।
  • घर में ही रहें- गर्मी से बचने के लिए जितना हो सके घर के अंदर ही रहें।
  • थोड़ी-थोड़ी दे पर ब्रेक लें- जो लोग बाहर धूप में काम कर रहे हैं। वे घंटे या 2 घंटे पर अपने काम से 15 से 20 का ब्रेक लेकर छाव बैठें ताकि शरीर का तापमान सामान्य हो सके।