
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और ईरान पर कुछ ऐसा कहा है, जिसने नई बहस छेड़ दी है। डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान वास्तव में हॉर्मुज स्ट्रेट को बंद नहीं करना चाहता। ईरानी रिजीम इसे खुला रखना चाहता है।
डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट से हर दिन 50 मिलियन डॉलर कमाना चाहता है। अगर यह बंद रहा तो ईरान को हर दिन इतना ही नुकसान हो रहा है। डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान सिर्फ इसलिए बंद करने की बात कर रहा है क्योंकि अमेरिका ने इसे पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है।
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‘ईरान, होर्मुज खोलना चाहता है’
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान सिर्फ अपनी इज्जत बचाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि चार दिन पहले कुछ लोग उनसे मिले और बोले, ‘सर, ईरान जल्द से जल्द इस होर्मुज स्ट्रेट को खोलना चाहता है।’
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‘जब तक उड़ा नहीं देते, तब तक नहीं होगी डील’
डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका इसे खोल देता है तो ईरान के साथ कोई समझौता कभी नहीं हो सकेगा। उन्होंने कहा, ‘जब तक हम उनके नेताओं के साथ, उनके बाकी देश को उड़ा नहीं देते, तब तक डील नहीं होगी।’
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क्या चाहते हैं डोनाल्ड ट्रंप?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को पहले एक इंटरव्यू में कहा था कि वह ईरान के साथ सीजफायर बढ़ाना नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि अमेरिका मजबूत स्थिति में है और जल्द ही अच्छा समझौता हो जाएगा। उन्होंने यहां तक धमकी दी कि अगर डील नहीं हुई तो बमबारी भी हो सकती है।
कुछ घंटों बाद ही डोनाल्ड ट्रंप ने अपना फैसला बदल दिया। उन्होंने सीजफायर बढ़ाने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की इच्छा पर यह फैसला लिया गया है।
ईरान को मिटा हुआ मान रहे हैं ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की सरकार को गंभीर रूप से टूटी-फूटी सरकार बताया और कहा कि ईरान के नेता एक साथ मिलकर एक एकजुट प्रस्ताव लेकर आएं, तब तक हमले नहीं होंगे। ट्रंप ने यह भी साफ कहा कि अमेरिकी नौसेना ईरान के बंदरगाहों पर नाकेबंदी जारी रखेगी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी नहीं हटेगी और अमेरिकी सेना हर तरह से तैयार रहेगी। ईरान की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है लेकिन तेहरान में शुरूआती प्रतिक्रियाएं संदेह भरी हैं।
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IRGC का रुख क्या है?
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़ी तस्नीम न्यूज एजेंसी ने कहा कि ईरान ने कभी सीजफायर बढ़ाने की मांग नहीं की थी। उन्होंने दोहराया कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिकी नाकेबंदी को जबरन तोड़ सकते हैं। ईरानी संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालीबाफ के एक सलाहकार ने कहा कि ट्रंप का ऐलान ज्यादा मायने नहीं रखता, यह सिर्फ एक चाल हो सकती है।
ईरान की तरफ से बातचीत को समय की बर्बादी भी बताया जा रहा है क्योंकि अमेरिका अभी भी नाकेबंदी जारी रखे हुए है। दूसरे दौर की शांति वार्ता पाकिस्तान में होनी थी, लेकिन उसमें अनिश्चितता है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का इस्लामाबाद जाना रद्द हो गया है। फिलहाल दोनों तरफ से धमकियां और सतर्कता बनी हुई है लेकिन सीजफायर कुछ समय के लिए बढ़ गया है।