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‘सावधान! इन लोगों से कोई लेना-देना नहीं’, विदेश मंत्रालय ने ऐसा क्यों कहा?


विदेश मंत्रालय ने कुछ फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट के बारे में जनता को आगाह किया है। मंत्रालय ने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ लोग पॉलिसी से जुड़े मामले में सलाह देने का दावा करते हैं, लेकिन उनसे मंत्रालय का कोई लेना-देना नहीं है। विदेश मंत्रालय ने सभी लोगों से ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स से सावधान रहने की अपील की। विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक फैक्ट चेक अकाउंट पर यह सूचना जारी की है। 

 

अपने फैक्ट चेक एक्स अकाउंट पर विदेश मंत्रालय ने लिखा, ‘मंत्रालय के ध्यान में आया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कुछ लोग ऐसी पोस्ट कर रहे हैं, जिनसे लगता है कि वे मंत्रालय को ट्रेड, माइग्रेशन और दूसरे मुद्दों पर नीति से जुड़ी सलाह देते हैं। 

 

 

 

 

इसके अलावा ये अकाउंट्स विदेश मंत्रालय के साथ काम करने के तरीके पर पैसे लेकर सलाह या सेशन देने का भी दावा करते हैं। इन लोगों का मंत्रालय से कोई लेना-देना नहीं है। मंत्रालय सभी से अपील करता है कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी फर्जी पोस्ट से सावधान रहें।’

 

 

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विदेश मंत्रालय ने क्यों किया आगाह 

  • विदेश मंत्रालय का यह अलर्ट बेहद अहम है, क्योंकि सोशल मीडिया के माध्यम से किसी को भी आसानी से धोखाधड़ी का शिकार बनाया जा सकता है। अगर कोई शख्स आपसे विदेश मंत्रालय से जुड़े होने का दावा करता है तो बिल्कुल सतर्क रहे। विदेश मंत्रालय का यह अलर्ट इसलिए अहम है ताकि कोई व्यक्ति इन जालसाजों के हाथों न फंसे। 

 

  • माइग्रेशन और व्यापार समेत अन्य नीतिगत मामलों से जोड़े होने का दावा करने वालों से भी सतर्क रहे। इन लोगों का मंत्रालय से कोई लेना-देना नहीं है। इन दावों का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड आदि में किया जा सकता है।

 

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  • बता दें कि सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने दावा किया कि वह ट्रेड और माइग्रेशन समेत विभिन्न मुद्दों पर विदेश मंत्रालय को सलाह देते हैं। कुछ विदेश मंत्रालय के साथ काम करने का तरीका बताने का दावा करते हैं और बदले में पैसा लेते हैं। अब विदेश मंत्रालय स्पष्ट कर दिया कि इन लोगों का मंत्रालय से कोई लेना-देना नहीं है। इन फर्जी पोस्टों से बिल्कुल सावधान रहे। 

कम उम्र में सफेद हो रहे हैं बाल? अपनाएं ये देसी नुस्खे, काले हो जाएंगे


आजकल युवाओं में समय से पहले बाल सफेद होने की समस्या तेजी से बढ़ रही है। बढ़ता तनाव, खराब खान-पान, विटामिन की कमी, अनहेल्दी लाइफस्टाइल और जेनेटिक कारणों से यह समस्या आम हो गई है। सफेद बालों की वजह से कई जवान लोग भी उम्र से ज्यादा बूढ़े दिखने लगते हैं। बाजार में उपलब्ध केमिकल वाली हेयर डाई से सफेद बालों को कुछ दिनों के लिए काला किया जा सकता है, लेकिन इसका इस्तेमाल बालों को अंदर से कमजोर बना देता है। ऐसे में लोग घरेलू उपायों की ओर रुख कर रहे हैं। 

सही डाइट और कुछ आसान घरेलू नुस्खों से बालों को स्वस्थ रखा जा सकता है और समय से पहले सफेद होने की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। बालों के रोम में मेलानिन नामक पिगमेंट की कमी, थायराइड की समस्या और विटामिन बी की कमी भी सफेद बालों का बड़ा कारण बन रही है। 

इस रिपोर्ट में हम आपको कुछ ऐसे सरल घरेलू उपाय बताएंगे जिनकी मदद से आप घर बैठे ही अपने बालों को स्वस्थ रख सकते हैं और सफेद होने से बचा सकते हैं। सही खान-पान और जीवनशैली अपनाकर इस समस्या से निपटा जा सकता है।

 

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सफेद बाल रोकने के लिए क्या खाएं?

  • अंडा- बायोटिन और प्रोटीन से भरपूर अंडा बालों को मजबूत रखने में मदद करता है।
  • पालक- इसमें आयरन, फोलेट और विटामिन A व C होते हैं, जो बालों के लिए जरूरी पोषक तत्व हैं।
  • बादाम और अखरोट- इनमें विटामिन E, ओमेगा-3 फैटी एसिड और कॉपर पाया जाता है, जो बालों की सेहत को सपोर्ट करते हैं।
  • काला तिल-  कई आयुर्वेदिक स्रोतों में रोज 1-2 चम्मच काले तिल खाने की सलाह दी जाती है। इसमें में कॉपर और आयरन अच्छी मात्रा में होते हैं। इन्हें सीमित मात्रा में डाइट में शामिल किया जा सकता है।
  • दही और दूध- विटामिन B12 और प्रोटीन की कमी से बाल सफेद हो सकते हैं। ऐसे में दही और दूध इस कमी को पूरा करने में मदद कर सकते हैं।
  • दालें और राजमा- ये प्रोटीन, आयरन और जिंक के अच्छे स्रोत हैं, जो बालों के ग्रोथ और मजबूती के लिए जरूरी हैं।
  • आंवला- रोजाना ताजा आंवला, मुरब्बा या आंवला जूस सीमित मात्रा में लिया जा सकता है। ध्यान रहें कि जूस में चीनी की मात्रा कम हो।

बाल काला करने के घरेलू नुस्खे

1. आंवला और नारियल तेल

  • 4-5 सूखे आंवले या 2 चम्मच आंवला पाउडर लें।
  • 1 कप नारियल तेल में 10-15 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं।
  • ठंडा करके छान लें।
  • सप्ताह में 2-3 बार रात को बालों की जड़ों में मसाज करें और सुबह धो लें।

2. करी पत्ता और नारियल तेल

  • 15-20 करी पत्ते लें।
  • 1 कप नारियल तेल में तब तक उबालें जब तक पत्ते काले न हो जाएं।
  • तेल ठंडा करके छान लें।
  • हफ्ते में 2 बार स्कैल्प पर लगाकर 1-2 घंटे बाद धो लें।

3. मेहंदी + कॉफी + आंवला

  • 4 चम्मच मेहंदी
  • 1 चम्मच आंवला पाउडर
  • 1 चम्मच कॉफी पाउडर
  • जरूरत अनुसार चाय का पानी
  • इसका पेस्ट बनाकर 2-3 घंटे बालों में रखें, फिर धो लें।
  • इससे बालों को नेचुरली भूरा-गहरा रंग मिल सकता है।

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4. भृंगराज तेल

  • आयुर्वेद में भृंगराज को बालों के लिए लाभकारी माना जाता है।
  • सप्ताह में 2-3 बार इससे मालिश की जा सकती है।

5. प्याज का रस

  • एक प्याज का रस निकालें।
  • कॉटन की मदद से जड़ों में लगाएं।
  • 30-40 मिनट बाद शैंपू कर लें।

6. मेथी दाना और नारियल तेल

  • 2 चम्मच मेथी दाना हल्का भून लें।
  • इसे 1 कप नारियल तेल में 10 मिनट तक गर्म करें।
  • ठंडा करके छान लें।
  • हल्के हाथ से लगाएं और इसे हफ्ते में 2 बार इस्तेमाल किया जा सकता है।

7. काली चाय (ब्लैक टी) रिंस

  • 2 गिलास पानी में 2-3 चम्मच काली चाय उबालें।
  • ठंडा होने पर बाल धोने के बाद इससे आखिरी रिंस करें।
  • कुछ लोग मानते हैं कि इससे सफेद बालों का रंग थोड़ा गहरा दिख सकता है।

8. गुड़हल (हिबिस्कस) के फूल और पत्ते

  • गुड़हल के फूल और पत्तों का पेस्ट या इन्हें नारियल तेल में पकाकर लगाया जाता है। यह बालों को पोषण देने के लिए लोकप्रिय घरेलू नुस्खा है।

डिस्क्लेमर: यह खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है। विशेष जानकारी के लिए अपने चिकित्सक से संपर्क करें।

कृष्ण के जिन भाइयों को कंस ने मारा था, उनके बारे में क्या कहता है भागवत पुराण?


हिंदू धर्म में कई ऐसे ग्रंथ और पुराण हैं, जिनमें देवी-देवताओं से जुड़ी कहानियां और प्रसंग बताए गए हैं। इसी तरह भागवत पुराण भी एक महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है, जिसमें बताए गए कथाओं से हमें जीवन की कई सीख मिलती है। इस ग्रंथ में माता देवकी के पुत्रों से जुड़ी एक खास कहानी का उल्लेख किया गया है। माता देवकी ने भगवान कृष्ण को जन्म देने से पहले 6 पुत्रों को जन्म दिया था, जिन्हें कंस ने मार दिया था। भागवत पुराण के मुताबिक, कंस ने भगवान कृष्ण के 6 भाइयों को जन्म के कुछ ही समय बाद पत्थर पर पटक-पटककर मार दिया था। देवकी माता के 6 पुत्रों की मृत्यू सिर्फ कंस के वजह से नहीं बल्कि उनके पिछले जन्मों के कर्म के वजह से हुआ था। 

 

भागवत पुराण के मुताबिक, एक बार माता देवकी ने भगवान कृष्ण और बलराम जी के सामने अपने 6 पुत्रों से मिलने की इच्छा जताई थी। तब भगवान कृष्ण और बलराम अपने 6 भाइयों को लेने सुतल लोक गए थे, जहां राजा बलि ने भगवान कृष्ण को बताया कि माता देवकी के 6 पुत्र कोई साधारण बालक नहीं थे, बल्कि वे देवता थे। अब सवाल उठता है कि भगवान कृष्ण के 6 भाई कौन थे? साथ ही यह भी सवाल उठता है कि अगर वे देवता थे, तो जन्म के बाद उनकी हत्या क्यों कर दी गई?

 

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कौन थे भगवान कृष्ण के 6 भाई?

 

भागवत पुराण की कथा के मुताबिक, एक बार माता देवकी अपने 6 पुत्रों को याद कर दुखी हो गई थीं। उन्होंने भगवान कृष्ण के सामने इच्छा जाहिर की कि वे अपने पुत्रों को एक बार फिर देखना चाहती हैं। इसके बाद भगवान कृष्ण और बलराम सुतल लोक उन्हें वापस लाने के लिए गए।

 

सुतल लोक में राजा बलि ने भगवान कृष्ण के 6 भाइयों के बारे में रोचक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वे 6 बालक साधारण इंसान नहीं थे, बल्कि देवताओं के पुत्र थे। राजा बलि ने बताया कि वे ब्रह्मा जी के मानस पुत्र प्रजापति मरीचि और ऊर्णा देवी के पुत्र थे, जिन्हें पिछले जन्म में ब्रह्मा जी का श्राप मिला था। इसी श्राप के कारण अगले जन्म में कंस ने उनका वध किया था।

 

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 कृष्ण के 6 भाइयों को ब्रह्मा जी ने श्राप क्यों दिया?

 

एक बार ब्रह्मा जी को देखकर मरीचि के 6 पुत्र जोर-जोर से हंसने लगे थे। यह देखकर ब्रह्मा जी को क्रोध आ गया। उनका मजाक उड़ाना मरीचि के 6 पुत्रों पर भारी पड़ गया, क्योंकि ब्रह्मा जी ने उन्हें श्राप दे दिया। ब्रह्मा जी ने श्राप दिया कि मरीचि के 6 पुत्र असुर योनि में जन्म लेंगे, जिसके बाद वे देवकी के गर्भ से जन्म लेंगे। हालांकि, जन्म के कुछ ही समय बाद उनकी हत्या कर दी जाएगी। इसी श्राप के कारण माता देवकी के 6 पुत्रों का वध हुआ था।

 

नोट- यह लेख धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

 

5 शहर, 3 करोड़ लोग; खामेनेई के जनाज़े पर ईरान को कौन सा डर सता रहा?


ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम विदाई का छह दिवसीय कार्यक्रम शुरू हो चुका है। 9 जुलाई को उन्हें दफनाया जाएगा। इससे पहले उनके पार्थिव शरीर को इराक के कर्बला और नजफ समेत पांच शहरों में ले जाया जाएगा। उम्मीद है कि खामेनेई के जनाज़े में लगभग 3 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। दुनिया भर के नेता, अधिकारी और प्रमुख हस्तियां भी तेहरान पहुंच रही हैं।

 

ईरान की सरकार छह दिनों तक चलने वाले आयोजन से चिंतित भी है। उसे हमले और भगदड़ का डर सता रहा है। यही कारण है कि तेहरान के अलावा उन शहरों में भी सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद की गई है, जहां से खामेनेई का जनाज़ा निकलना है। बासिज फोर्स को अलर्ट पर रखा गया है। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बलों की तैनाती है।

 

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ईरान का तीसरा सबसे बड़ा कार्यक्रम

तेहरान स्थित ग्रैंड मोसल्ला में अली खामेनेई के पार्थिव शरीर को रखा है, लेकिन ईरान की सरकार ने लोगों से मस्जिद में अधिक देर तक न रुकने की अपील की है, ताकि भगदड़ जैसी स्थिति से बचा जा सके। अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी और कासिम सुलेमानी के बाद यह ईरान के इतिहास का तीसरा सबसे बड़ा जनाज़ा कार्यक्रम है। माना जा रहा है कि पिछले कार्यक्रमों से भी बड़ी भीड़ जुटेगी।

गलती दोहराना नहीं चाहता ईरान

उधर, कार्यक्रम आयोजन से पहले ही ईरान ने अभूतपूर्व सुरक्षा अभियान चलाया, ताकि साल 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी और हाल ही में 2020 में कासिम सुलेमानी के जनाज़े में हुई घटनाओं को दोहराया न जा सके। बता दें कि ईरान में अंतिम विदाई कार्यक्रमों में हादसों का पुराना इतिहास है। 

भीड़ प्रबंधन पर सबसे अधिक फोकस

ईरान की सरकार का सबसे अधिक फोकस भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा पर है। अली खामेनेई का ताबूत पड़ोसी देश इराक भी जाएगा। वहां भी सुरक्षा संबंधी चुनौतियां है। यही कारण है कि हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सीमा पार जुलूस के संबंध में इराकी अधिकारियों के साथ बगदाद में बैठक भी की।

जब जनाज़े में हुए हादसे

अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी का जनाज़ा: तीन जून 1989 को मौजूदा इस्लामिक ईरान के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी को सुपुर्द-ए-खाक किया जाना था। उनका भी पार्थिव शरीर तेहरान के मोसल्ला में रखा गया। जब उनके पार्थिव शरीर को दफनाने की खातिर ले जाया जाने लगा तो उस वक्त लगभग 10 लाख लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।

 

लोगों ने तबूत छूने की कोशिश की। सुरक्षा बलों ने बल प्रयोग किया तो भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। खुमैनी का ताबूत टूट गया। कफन फट गया। नतीजा यह हुआ कि हेलीकॉप्टर से शव को निकालना पड़ा। एक दिन सुपुर्द-ए-खाक को टालना पड़ा। भगदड़ में बड़ी संख्या में लोगों को जान गंवाना पड़ा, लेकिन ईरान ने कभी वास्तविक संख्या सार्वजनिक नहीं की।

 

जब सुलेमानी के जनाज़े में हुई भगदड़: अमेरिका ने 3 जनवरी 2020 को इराक के बगदाद एयरपोर्ट के पास एक ड्रोन हमले में कासिम सुलेमानी को मारा था। 1989 में खुमैनी के अंतिम यात्रा के बाद ईरान में सबसे बड़ा सुपुर्द-ए-खाक सुलेमानी का आयोजित किया गया। उनके शव को भी इराक और ईरान के कई शहरों में घूमाया गया। बाद में सुलेमानी के गृहनगर करमान ले जाया गया। यहां बैरियर गिरने से भगदड़ मच गई। इसमें कम से कम 56 लोगों की जान गई और 200 से अधिक लोग घायल हुए। 

ईरान को कितना बड़ा डर सता रहा?

गोपनीय दस्तावेज और तेहरान नगर पालिका के सूत्रों के हवाले जर्मन अखबार डाई वेल्ट ने बड़ा दावा किया। उसने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ईरानी अधिकारियों ने दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम विदाई समारोह के दौरान 1,500 से 3,000 लोगों की मौत की आशंका जताई है। इससे निपटने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।

मोजतबा की हत्या का भी डर

ईरान को यह भी डर सता रहा है कि अगर मोजतबा खामेनेई समारोह में शामिल होते हैं तो उन्हें निशाना बनाया जा सकता है। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने समारोह में शामिल होने का अनुरोध किया था, लेकिन सुरक्षा बलों ने इसे खारिज कर दिया है। उन्हें आशंका है कि इजरायल मोजतबा की हत्या कर सकता है या उनके गुप्त ठिकाने तक पहुंच सकता है।

खामेनेई का एक भी बेटा नहीं पहुंचा

शुक्रवार को राजधानी तेहरान में आयोजित कार्यक्रम में न तो मोजतबा खामेनेई पहुंचे और न ही तीन अन्य भाई। सिर्फ परिवार के प्रतिनिधि के तौर पर मोजतबा के ससुर गुलाम-अली हद्दाद आदेल ही पहुंचे। उधर, ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि तेहरान, कोम और मशहद में अली खामेनेई के सुपुर्द-ए-खाक में होने वाली नमाज की अगुवाई मोजतबा की जगह वरिष्ठ धर्मगुरु करेंगे।

37 साल के शासन का हुआ अंत

अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को भीषण बमबारी में अली खामेनेई को निशाना बनाया था। करीब चार महीने बाद उनको सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। कहा जा रहा है कि सुरक्षा कारणों से जनाज़े में देरी हुई है। 1939 में मशहद में जन्मे अली खामेनेई ने लगभग 37 वर्षों तक ईरान में शासन किया।

 

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कब-कहां पहुंचेगा अली खामेनेई का जुलूस?

तेहरान: अली खामेनेई का आखिरी विदाई समारोह 3 जुलाई से शुरू हो चुका है। तीन दिनों तक उनका पार्थिव शरीर राजधानी तेहरान में ही रखा जाएगा। 

 

कोम: 6 जुलाई को तेहरान से एक जुलूस में उनका पार्थिव शरीर करीब 120 किमी दूर स्थित कोम शहर ले जाया जाएगा। अली खामेनेई ने कोम के ही मदरसे से अपनी पढ़ाई की थी। यह शिया मुसलमानों की विद्वत्ता का सबसे बड़ा केंद्र है। सात जुलाई तक खामेनेई का पार्थिव शरीर यहां रहेगा।

 

नजफ: आठ जुलाई को पार्थिव शरीर को इराक ले जाया जाएगा। नजफ इंटरनेशल एयपोर्ट पर एक समारोह आयोजित किया जाएगा। इसके बाद जुलूस नजफ शहर ले जाया जाएगा। बता दें कि इमाम अली का मकबरा नजफ में ही स्थित है। 

 

कर्बला: यहां पैगंबर मुहम्मद के पोते इमाम हुसैन और अब्बास शहीद हुए थे। यहीं पर ही इमाम हुसैन और उनके सौतेले भाई अब्बास के मकबरे हैं। यहां हर साल लाखों शिया मुस्लिम आते हैं। यह शिया इस्लाम की धार्मिक आस्था का सबसे बड़े केंद्र में से एक है।

 

मशहद: 9 जुलाई को अली खामेनेई की जन्मस्थली मशहद में उन्हें दफनाया जाएगा। मशहद को ईरान का सबसे पवित्र शहर माना जाता है। अली खामेनेई शुरुआती जीवन इसी शहर में बीता।

उमर खालिद और शरजील इमाम को लगा झटका, जमानत याचिका हुई खारिज


दिल्ली दंगों की साजिश रचने के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को शनिवार को एक और झटका लगा। अदालत ने दोनों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने दोनों पक्षों की दलाल सुनी और दोनों आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया।

 

बता दें कि साल 2020 के फरवरी महीने में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़के थे। इसमें 53 लोगों की जान गई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। उमर खालिद और शरजील इमाम पर दंगे की साजिश रचने का आरोप है। इन दोनों के अलावा कई अन्य लोगों के खिलाफ यूएपीए और भारतीय दंड संहिता की तमाम धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

 

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‘लगातार जेल में रखना मौलिक अधिकार का उल्लंघन’

अपनी याचिका में उमर खालिद और शरजील इमाम ने कहा कि अभी तक मुकदमा शुरू नहीं हुआ है। उसके बिना जेल में लगातार रखना स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। उमर खालिद ने अपनी याचिका में तर्क दिया कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत भी ‘जमानत ही नियम है’।

‘छह साल से हिरासत में हूं, अभी आरोप तय नहीं हुए’

बता दें कि इसी साल पांच जनवरी को दिल्ली हाई कोर्ट ने यूएपीए मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उमर खालिद और शरजील इमाम ने नई याचिकाएं दाखिल कीं। शरजील इमाम ने दलील दी कि हाई कोर्ट से जमानत न मिलने के छह महीने बाद भी इस मामले की कार्यवाही में कोई खास प्रगति नहीं हुई है। लगभग छह साल से हिरासत में हूं। अभी तक मामले में आरोप भी तय नहीं किए गए।

 

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उमर खालिद ने कहा- मेरी याचिका सुनवाई योग्य है

उमर खालिद ने 18 मई को की गई हाईकोर्ट की एक टिप्पणी का उल्लेख किया। बताया गया कि दो न्यायाधीशों की पीठ ने कहा था कि आतंकवाद-रोधी कानून का इस्तेमाल अनिश्चित काल तक हिरासत में रखने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उमर खालिद ने तर्क दिया कि भले ही हाई कोर्ट से पिछली जमानत याचिका खारिज कर दी गई। लेकिन बाद में हुई न्यायिक घटनाओं से ‘हालात में बदलाव’ आया है। इस वजह से उनकी मौजूदा जमानत याचिका सुनवाई योग्य है।

दिनभर फोन देखता है बच्चा? मां-बाप पहले बदलें ये 7 आदतें


आज के समय में मोबाइल, टैबलेट और टीवी बच्चों की जिंदगी का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं। ज्यादातर माता-पिता अपने बच्चों को कम स्क्रीन टाइम देना चाहते हैं, लेकिन खुद पूरे दिन फोन में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में बच्चों से स्क्रीन की आदत छुड़ाना मुश्किल हो जाता है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर माता-पिता खुद स्क्रीन टाइम के नियमों का पालन करें, तो बच्चे भी उन्हें आसानी से अपना लेते हैं। 

बच्चों को बार-बार डांटने की बजाय खुद अच्छा उदाहरण बनना सबसे प्रभावी तरीका है।जब पूरा परिवार एक जैसे नियम बनाता है और माता-पिता सोच-समझकर मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं तो बच्चे स्वाभाविक रूप से उनकी नकल करने लगते हैं।

छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाकर बच्चों की स्क्रीन लत को काफी हद तक कम किया जा सकता है।इस रिपोर्ट में बताए गए आसान टिप्स की मदद से आप धीरे-धीरे अपने बच्चे का स्क्रीन टाइम कम कर सकते हैं। माता-पिता अगर खुद संतुलित आदतें अपनाएंगे, तो बच्चों को स्वस्थ आदतें सिखाना आसान हो जाएगा।

 

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बच्चे बड़ों को देखकर सीखते हैं

बच्चे वही आदतें जल्दी अपनाते हैं जो वे अपने घर में देखते हैं। अगर माता-पिता हर समय फोन चलाते हैं और बच्चे को मोबाइल से दूर रहने की सलाह देते हैं, तो बच्चा इस बात को गंभीरता से नहीं लेता है। इसलिए सबसे पहले बड़ों को अपनी स्क्रीन की आदतों पर ध्यान देना चाहिए।

घर में स्क्रीन टाइम का नियम बनाएं

पूरे परिवार के लिए एक समय तय करें कि कब मोबाइल या टीवी का इस्तेमाल होगा और कब नहीं। इससे बच्चे भी समझेंगे कि नियम सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि सभी के लिए हैं।

खाना खाते समय मोबाइल से दूरी रखें

खाने की टेबल पर फोन या टीवी का इस्तेमाल न करें। इस दौरान परिवार के साथ बातचीत करें। इससे बच्चों का ध्यान स्क्रीन से हटेगा और परिवार के साथ समय भी अच्छा बीतेगा।

 

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सोने से पहले स्क्रीन बंद करें

सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल, टैबलेट और टीवी बंद कर दें। इससे बच्चों की नींद बेहतर हो सकती है और सुबह वे तरोताजा महसूस कर सकते हैं।

बच्चों को दूसरे कामों में व्यस्त रखें

अगर बच्चा बार-बार मोबाइल मांगता है, तो उसे ड्रॉइंग, कहानी की किताब, पजल, ब्लॉक्स या आउटडोर गेम खेलने के लिए प्रेरित करें। इससे उसका ध्यान स्क्रीन से हट सकता है।

खुद भी फोन कम चलाएं

अगर माता-पिता खाली समय में हर बार मोबाइल उठाने की बजाय बच्चों के साथ खेलें, बातें करें या कोई एक्टिविटी करें, तो बच्चे भी धीरे-धीरे फोन पर कम समय बिताने लगते हैं।

स्क्रीन टाइम के लिए प्यार से समझाएं

बच्चे से फोन अचानक छीनने की बजाय उसे प्यार से समझाएं कि ज्यादा स्क्रीन देखने से आंखों, नींद और पढ़ाई पर असर पड़ सकता है। जब बच्चे वजह समझते हैं, तो नियम मानना उनके लिए आसान हो जाता है।

किन बातों का रखें ध्यान?

  • 2 साल से छोटे बच्चों को स्क्रीन से जितना हो सके दूर रखें।
  • बड़े बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम की समय सीमा तय करें।
  • पढ़ाई के अलावा मस्ती के लिए मोबाइल का समय सीमित रखें।
  • छुट्टी के दिन परिवार के साथ आउटिंग या खेलकूद की योजना बनाएं।

4 जुलाई का राशिफल, राहु और शनि का प्रभाव किन राशियों के लिए लाएगा अच्छे दिन?


आज का दिन सभी 12 राशियों के जीवन में मिलाजुला प्रभाव लेकर आ रहा है। पंचांग के अनुसार आज आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है। अंक ज्योतिष के नजरिए से देखें तो आज का मूलांक 4 है, जो राहु का अंक माना जाता है। आज ग्रहों की स्थिति में शनिदेव अपनी स्वराशि में मजबूत स्थिति में हैं, जबकि चंद्रमा कुंभ राशि में प्रवेश कर रहे हैं। राहु और केतु का प्रभाव भी आज के दिन की ऊर्जा को थोड़ा रहस्यमयी और अचानक बदलाव लाने वाला बना रहा है। आज का दिन कर्मप्रधान और अनुशासन की मांग करने वाला रहेगा, जहां शॉर्टकट के बजाय की गई कड़ी मेहनत ही सफलता दिलाएगी।

 

शनिवार का दिन होने और मूलांक 4 के प्रभाव के कारण आज तकनीकी कार्यों और रणनीतिक योजनाओं में सफलता मिल सकती है। हालांकि, जुबान पर संयम रखना और जल्दबाजी में कोई भी निर्णय लेने से बचना आज के दिन का मूल मंत्र होना चाहिए। आइए जानते हैं कि मेष से लेकर मीन राशि तक के जातकों के लिए आज का दिन कैसा रहने वाला है।

 

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राशिफल

 

1. मेष राशि

 

करियर में नए अवसर मिलेंगे। सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा और व्यापार में नई डील्स फाइनल हो सकती हैं। धन लाभ के योग हैं। जीवनसाथी के साथ तालमेल अच्छा रहेगा। शाम का समय परिवार के साथ सुखद बीतेगा।

आज क्या करें: हनुमान चालीसा का पाठ करें।

आज क्या न करें: किसी को उधार देने से बचें।

 

2. वृषभ राशि

 

नौकरी में सीनियर्स आपके काम की तारीफ करेंगे। कारोबार बढ़ाने के लिए बनाई गई योजनाएं सफल होंगी। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। पुराने निवेश से अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना है। लव लाइफ में नया उत्साह देखने को मिलेगा।

आज क्या करें: किसी जरूरतमंद को काले तिल का दान करें।

आज क्या न करें: आज आलस्य को खुद पर हावी न होने दें।

 

3. मिथुन राशि

 

ऑफिस में काम का दबाव अधिक रह सकता है। व्यापारियों को किसी भी कागजी कार्रवाई में सावधानी बरतनी होगी। रुपयों की फिजूलखर्ची से बचें। किसी पुरानी बात को लेकर जीवनसाथी से बहस हो सकती है।

आज क्या करें: पक्षियों को दाना डालें।

आज क्या न करें: आज किसी भी अजनबी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।

 

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4. कर्क राशि

 

नौकरी में आपकी मेहनत का फल मिलेगा। धन की स्थिति सामान्य रहेगी। प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में सावधानी से कदम बढ़ाएं। परिवार में किसी मांगलिक कार्य की रूपरेखा बन सकती है। पार्टनर के साथ रिश्ते और गहरे होंगे।

आज क्या करें: शिवलिंग पर जल अर्पित करें।

आज क्या न करें: यात्रा के दौरान जल्दबाजी या लापरवाही न बरतें।

 

5. सिंह राशि

 

करियर में तरक्की के नए रास्ते खुलेंगे। मैनेजमेंट और लीडरशिप से जुड़े लोगों को कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। आर्थिक रूप से दिन लाभकारी है। रुका हुआ धन वापस मिलने से राहत महसूस होगी।

आज क्या करें: उगते सूर्य को अर्घ्य दें।

आज क्या न करें: अहंकार को अपने रिश्तों पर हावी न होने दें।

 

6. कन्या राशि

 

नौकरीपेशा लोगों के लिए दिन सामान्य है। आय और धन खर्च में संतुलन बना रहेगा। शेयर मार्केट में निवेश के लिए दिन बहुत अच्छा नहीं है। दोस्तों का सहयोग मिलेगा। पारिवारिक माहौल शांतिपूर्ण रहेगा।

आज क्या करें: हरी मूंग की दाल का दान करें।

आज क्या न करें: आज खुद को विवादों और गॉसिप से दूर रखें।

 

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7. तुला राशि

 

कला, मीडिया और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों को बड़ी सफलता मिलेगी। सुख-सुविधा की वस्तुओं पर खर्च होगा। प्रेम संबंधों के लिए दिन रोमांटिक रहेगा। जीवनसाथी के साथ डिनर का प्लान बन सकता है।

आज क्या करें: मंदिर में घी का दीपक जलाएं।

आज क्या न करें: किसी भी काम को कल पर न टालें।

 

8. वृश्चिक राशि

 

ऑफिस में राजनीति का शिकार होने से बचें। अपने काम पर ध्यान केंद्रित करें। विरोधी शांत रहेंगे। पैसों के लेन-देन में बेहद सतर्क रहें। कोई भी बड़ा निवेश आज टाल देना ही बेहतर होगा। घरेलू मामलों को लेकर मन थोड़ा उदास रह सकता है।

आज क्या करें: सुंदरकांड का पाठ करें या सुनें।

आज क्या न करें: आज गाड़ी चलाते समय मोबाइल का प्रयोग बिल्कुल न करें।

 

9. धनु राशि

 

नौकरी में प्रमोशन या सैलरी बढ़ने के संकेत मिल सकते हैं। आज धन के निवेश के लिए दिन बहुत अच्छा है। पैतृक संपत्ति से भी लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। परिवार के साथ किसी धार्मिक यात्रा पर जाने का मन बना सकते हैं।

आज क्या करें: माथे पर हल्दी का तिलक लगाएं।

आज क्या न करें: बड़ों की बातों की अनदेखी न करें।

 

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10. मकर राशि

 

शनिदेव की कृपा से आपके अटके हुए काम पूरे होंगे। आज लोन या कर्ज चुकाने की दिशा में कदम आगे बढ़ेंगे। जीवनसाथी का हर मोड़ पर सहयोग मिलेगा। कड़वाहट खत्म होगी और रिश्तों में नजदीकियां आएंगी।

आज क्या करें: शनि चालीसा का पाठ करें।

आज क्या न करें: आज किसी के प्रति मन में कड़वाहट या हीन भावना न रखें।

 

11. कुंभ राशि

 

चंद्रमा आपकी ही राशि में हैं, जिससे आपकी निर्णय क्षमता मजबूत होगी। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। किसी नई योजना में पूंजी निवेश करना फायदेमंद साबित हो सकता है। लव लाइफ में समझदारी से रिश्ते मजबूत होंगे।

आज क्या करें: बहते पानी में नारियल प्रवाहित करें।

आज क्या न करें: किसी भी काम में जल्दबाजी दिखाने से बचें।

 

12. मीन राशि

 

काम के सिलसिले में अनचाही यात्रा करनी पड़ सकती है। नौकरीपेशा लोगों को आज अधिक मेहनत करनी होगी। खर्चों की अधिकता रहेगी, जिससे मन थोड़ा चिंतित हो सकता है। हाथ थोड़ा खींचकर चलें। 

आज क्या करें: भगवान विष्णु की आराधना करें।

आज क्या न करें: आज किसी भी तरह के कानूनी विवाद में न उलझें।

 

 

नोट: यह राशिफल ज्योतिषीय मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

अचानक सिंधु जल समझौते की इतनी चर्चा क्यों, क्या पाकिस्तान सेना ने रची कोई साजिश?


पाकिस्तान कई मोर्चों पर सिंधु जल विवाद को उठा रहा है। हर न्यूज चैनल पर सिंधु जल समझौते पर बातचीत हो रही है। भारत को धमकियां दी जा रही हैं। यह भी बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की सीमा क्या है। यहां तक कि भारत के बांधों पर हमले का प्लान मीडिया प्लेटफॉर्म पर समझाया और बताया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया पर भी इस मुद्दे पर व्यापक बहस छिड़ चुकी है। अचानक से सिंधु जल समझौते पर बहस का इतना तेज होना क्या संयोग है या पाकिस्तान की कोई छिपी हुई रणनीति?

 

पूरे मामले में अब खुलासा हो रहा है कि पाकिस्तान की सेना ही भारत के खिलाफ सिंधु जल समझौते पर एक कोऑर्डिनेटेड मीडिया अभियान चला रही है। पाकिस्तान के कुछ न्यूज चैनलों पर एंकर और मेहमान भी खुलकर कह चुके हैं कि हमें ग्लोबल मीडिया पर भारत के खिलाफ अभियान चलाना होगा। अन्य मंचों पर भी इस मुद्दे को उठाना होगा। इसका सबसे बड़ा उदाहरण हाल ही में पाकिस्तान में सिंधु जल के मुद्दे पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है। जहां से खुलकर भारत को धमकियां दी गईं।

 

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कैसे समन्वित अभियान की तैयारी?

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान सेना की अंतर-सेवा जनसंपर्क महानिदेशालय (डीजी आईएसपीआर) ने समन्वित मीडिया अभियान की तैयारी की। इसमें मीडिया से जम्मू-कश्मीर में कथित अत्याचार की कवरेज को बढ़ाने और इसे ब्लॉग व टॉक शो में शामिल करने का आह्वान किया गया। पाकिस्तान सेना ने भारत में अल्पसंख्यकों की चिंताओं और मोदी सरकार की आलोचना पर फोकस करने की अपील की।

 

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पाकिस्तान सेना ने की एंकरों के साथ बैठक

लीक दिशानिर्देशों के मुताबिक डीजी आईएसपीआर लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ ने रावलपिंडी में मेनस्ट्रीम मीडिया के एंकरों और शीर्ष व्लॉगरों के साथ बैठक की। इसमें चैनलों के कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों को भारत के खिलाफ और प्रमुख भू-राजनीतिक तनाव वाले बिंदुओं पर फोकस करने को कहा गया। मीडिया कर्मियों को खालिस्तान समर्थनक और कथित जनमत संग्रह पर भी ध्यान केंद्रित करने व भारत के अंदर गरीबी और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों को अधिक महत्व देने पर जोर दिया गया।

कब हुई थी सिंधु जल संधि?

बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि 19 सितंबर 1960 को कराची में हुई थी। विश्व बैंक की मध्यस्थता से यह समझौता हुआ था। इसमें सिंधु नदी बेसिन की छह नदियों के पानी को दोनों देशों में बांटा गया था। समझौते पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने साइन हैं। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने 26 निर्दोष पर्यटकों को धर्म के आधार पर मारा। इसके बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया। भारत ने स्पष्ट कहा कि खून और पानी एक साथ नहीं बहेगा।

‘आस्था को गहरी चोट…’, राम मंदिर चोरी मामले पर पहली बार बोला RSS


अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी मामले में पहली बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की प्रतिक्रिया सामने आई है। आरएसएस के सरकार्यवाह यानी महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने शुक्रवार को कहा कि अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की घटना ने पूरे समाज की भावनाओं और आस्था को गहरी ठेस पहुंचाई है। संघ ने राम मंदिर की दान पेटियों से चोरी को दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया। साथ ही उसका कहना है कि वह इस चोरी से बहुत दुखी और आक्रोशित है।

 

दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाए, उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि हिंदू विरोधी और राष्ट्रविरोधी ताकतें इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का फायदा उठाकर हिंदू धर्म को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने पूरे हिंदू समाज से भी अपील की कि वह इस कठिन समय में धैर्य और संयम बनाए रखें जिससे कि इस तरह की सभी साजिशों को नाकाम किया जा सके।

 

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कमियों को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाए

होसबाले ने एक बयान में कहा, ‘अयोध्या स्थित श्रीराम लला मंदिर में रखे दानपात्रों से चोरी की दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने पूरे समाज और रामभक्तों की भावनाओं तथा आस्था को गहरी ठेस पहुंचाई है। इस घटना से हम सभी बहुत दुखी और आक्रोशित हैं।’ होसबाले ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समेत पूरे हिंदू समाज की न्यास से स्वाभाविक ही अपेक्षा है कि वह इस अत्यंत निंदनीय घटना को असाधारण मामला मानते हुए मंदिर के प्रबंधन और संचालन में मौजूद सभी कमियों को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाए।

 

 

 

भ्रम की स्थिति समाप्त होनी चाहिए

उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाए, उसे कड़ी से कड़ी सजा मिले। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि मौजूदा भ्रम और अनिश्चितता की स्थिति समाप्त होनी चाहिए। होसबाले ने कहा, ‘इस संबंध में हमें अपेक्षा है कि मंदिर प्रबंधन और सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) सभी जरूरी कदम उठाएंगे।’

 

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श्रद्धा, आस्था और भक्ति का केंद्र है मंदिर

उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि पर निर्मित भव्य मंदिर पीढ़ियों के संघर्ष तथा करोड़ों रामभक्तों के समर्पण, त्याग और बलिदान के कारण पूरे हिंदू समाज की श्रद्धा, आस्था और भक्ति का केंद्र है। उन्होंने कहा, ‘हमारा यह विश्वास है कि समुचित वित्तीय प्रबंधन, सुचारू संचालन के लिए पारदर्शी व्यवस्थाओं एवं शुद्धता और शुचिता से परिपूर्ण धार्मिकता से ओतप्रोत वातावरण के द्वारा श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास हिन्दू समाज की आस्था एवं विश्वास को सुदृढ़ बनाए रखेगा।’

मानसून में चटपटा खाने का कर रहा है मन? शेफ रणवीर ने बताई पालक चाट की रेसिपी


मानसून का मौसम शुरू होते ही लोगों को कुछ अच्छा और मसालेदार खाने की इच्छा होने लगती है। इस सुहाने मौसम को ध्यान में रखते हुए मशहूर मास्टरशेफ रणवीर बराड़ ने टेस्टी पालक पत्ता चाट की आसान रेसिपी शेयर की है। इस डिश को बनाने में कोई झंझट नहीं है। अगर आप मानसून में पकोड़ों से हटकर कुछ नया और स्वादिष्ट खाना चाहते हैं तो रणवीर बराड़ की यह पालक पत्ता चाट जरूर ट्राई करें। 

मानसून आते ही हर तरफ स्पेशल डिशेस बनने लगती हैं। ज्यादातर लोग इस मौसम में चाय और पकोड़े खाने के बारे में सोचते हैं। लेकिन कुछ अलग ट्राई करने वाले लोगों के लिए शेफ रणवीर बराड़ लाए हैं कुरकुरे पालक पत्ता चाट की रेसिपी। यह डिश मानसून के नाश्ते या स्नैक्स की सारी क्रेविंग पूरी कर देती है। इसमें कुरकुरापन, तीखा स्वाद और मीठा फ्लेवर दोनों का मजा मिलता है। रणवीर बराड़ की इस आसान रेसिपी को घर पर बनाकर मानसून का आनंद दोगुना करें।

 

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पालक पत्ता चाट की सामग्री

  • 8-10 बड़े पालक के पत्ते
  • 1 कप बेसन
  • ½ कप चावल का आटा
  • 4-5 लहसुन की कलियां
  • 2 हरी मिर्च
  • 1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन का पेस्ट
  • ½ छोटा चम्मच हल्दी
  • ½ छोटा चम्मच अजवाइन
  • 1 छोटा चम्मच दरदरा धनिया
  • नमक स्वादानुसार
  • ½ छोटा चम्मच बेकिंग सोडा
  • तलने के लिए तेल

टॉपिंग के लिए

  • फेंटा हुआ मीठा दही
  • इमली या अमचूर की मीठी चटनी
  • अनार के दाने
  • बारीक सेव
  • तली हुई स्वीट कॉर्न और हरी मिर्च (ऑप्शनल)
  • थोड़ा चाट मसाला और लाल मिर्च पाउडर

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बनाने की विधि

स्टेप 1: सबसे पहले पालक के पत्तों को अच्छी तरह धोकर सुखा लें।
स्टेप 2: बेसन, चावल का आटा, लहसुन, हरी मिर्च, अदरक-लहसुन पेस्ट, हल्दी, नमक और थोड़ा-सा पानी डालकर मिक्सर में पीस लें। इससे चिकना घोल तैयार होगा। अब इसमें अजवाइन, दरदरा धनिया और बेकिंग सोडा मिलाकर दोबारा फेंट लें। ध्यान रहे घोल न ज्यादा पतला हो और न ज्यादा गाढ़ा।
स्टेप 3: कढ़ाही में तेल गर्म करें। पालक के पत्तों को तैयार घोल में अच्छी तरह डुबोकर सुनहरा और कुरकुरा होने तक तल लें। अगर आप चाहें तो स्वीट कॉर्न और हरी मिर्च को भी घोल में लपेटकर तल सकते हैं।
स्टेप 4: अब एक प्लेट में सबसे पहले तले हुए पालक के पत्ते रखें। इनके ऊपर मीठा दही डालें और फिर अमचूर या इमली की चटनी डालें।
स्टेप 5: आखिर में अनार के दाने, बारीक सेव, तली हुई स्वीट कॉर्न, थोड़ा चाट मसाला और लाल मिर्च पाउडर छिड़कें।

शेफ रणवीर बरार की खास टिप

इस रेसिपी का सबसे अहम हिस्सा घोल है। इसे हाथ से फेंटने की बजाय मिक्सर में तैयार करें ताकि यह बिल्कुल स्मूद बने। साथ ही घोल की कंसिस्टेंसी मीडियम रखें न बहुत पतली और न बहुत गाढ़ी। इससे पालक के पत्ते ज्यादा कुरकुरे बनेंगे।