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अमेरिका और ईरान के बीच भीषण बमबारी, 5 देशों पर हमला; 140 स्थानों पर तबाही


अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ चुका है। एक हफ्ते में अमेरिका ने ईरान पर हमलों की तीसरी लहर शुरू कर दी है। जवाब में ईरान ने ओमान, कुवैत और बहरीन पर हमला किया। आईआरजीसी ने अगले आदेश तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का ऐलान किया है। कुछ जगहों ने ईरान के बजाय ओमान तट के करीब से गुजर रहे हैं। ईरान ने स्पष्ट कहा कि मार्ग बदलना स्वीकार्य नहीं है। उधर, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया पर धमकी दी कि ईरान ने गलत विकल्प चुना। अब उसे इसकी कीमत चुकानी होगी।  

 

यूएस सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसकी सेनाओं ने ईरान के खिलाफ तीसरे दौर के हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य से स्वतंत्र रूप से गुजरने वाले नाविकों और वाणिज्यिक जहाजों पर हमला करने की ईरान की क्षमता को लगातार कमजोर कर उसे भारी कीमत चुकाने पर मजबूर कर रहा है।

 

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होर्मुज पर जहाजों पर हमले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पहुंच चुका है। ओमान तट के पास कंटेनर पर अटैक के बाद अमेरिका ने ईरान के बंदर अब्बास, सिरिक और चाबहार और केशम द्वीप पर हमले किए। जवाब में ईरान ने ओमान, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। 

 

ओमान: ईरान ने बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, कतर और ओमान पर हमले की जिम्मेदारी ली है। ओमान के दुक्म बंदरगाह पर ईरान ने रसद सहायता केंद्र और ईंधन भरने वाले प्लेटफार्मों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। ईरान का दावा है कि हमले में यह केंद्र नष्ट हो चुके हैं। 

 

कतर: ईरान ने अल उदैद एयरबेस पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। कतर के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ईरान की तरफ से आने वाली मिसाइलों को रोक दिया गया। वहीं कतर के गृह मंत्रालय के मुताबिक एक बच्चे समेत तीन लोग घायल हैं। उधर, ईरान का दावा है कि उसके हमले में कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और लड़ाकू विमान का एक रखरखाव केंद्र तबाह हो गया।

 

जॉर्डन: ईरान ने जॉर्डन के प्रिंस हसन एयरबेस पर भी हमला किया। ईरान का कहना है कि उसके बैलेस्टिक मिसाइल हमले में एमक्यू-9 ड्रोन रखने वाले हैंकर को नुकसान पहुंचा है। एक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर भी तबाह हुआ है। 

 

बहरीन: ईरान के हमले के बीच बहरीन में सायरन बजने की आवाज सुनी गई। ईरान के मुताबिक उसने बहरीन में अमेरिका के रडार साइट और संचार प्रणाली को निशाना बनाया है। 

 

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कुवैत: अमेरिका के सहयोगी कुवैत पर ईरान ने ड्रोन से हमला किया। यहां गोला-बारूद डिपो, रडार साइट और पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाकर हमलों को अंजाम दिया गया।

अमेरिका ने कितने स्थानों पर की बमबारी?

अमेरिका सेना ने अपनी तीसरी लहर में ईरान के भीतर 140 स्थानों पर भीषण बमबारी की। पहले चरण में 80 और दूसरे में 90 स्थानों पर बमबारी की गई थी। यूएस सेंट्रल कमांड ने बताया कि ताजा हमलों में ईरानी मिसाइल और ड्रोन साइट, नौसैनिक क्षमताएं, गोला-बारूद भंडारण सुविधाएं, संचार नेटवर्क और तटीय निगरानी स्थल को नष्ट किया गया है। अमेरिकी सेना के मुताबिक एक हफ्ते में 300 से अधिक लक्ष्यों पर हमलों को अंजाम दिया गया है।

वंदे मातरम और जन गण मन में ‘महान’ कौन, क्यों मचा है ऐसा शोर?


केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों को एक बार फिर सख्त निर्देश दिया है कि सरकारी कार्यक्रमों में जब भी राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों बजाए या गाए जाएं तो पहले ‘वंदे मातरम’ बजाना या गाना होगा, उसके बाद ‘जन गण मन’ गाया या बजाया जाएगा। गृह मंत्रालय ने 9 जुलाई को सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्रीय मंत्रालयों के सचिवों को पत्र लिखकर कहा कि इस नियम का सख्ती से पालन किया जाए। 

केंद्र सरकार का निर्देश है कि ‘वंदे मातरम’ और ‘जन गण मन’ को सही शब्दों, सही उच्चारण और सही लय में ही गाया या बजाया जाए। फरवरी महीने में भी सरकार ने आदेश दिया था कि वंदे मातरम के सभी छह छंद पूरे गाए जाएं, जो करीब 3 मिनट 10 सेकंड का होता है। अब इस नियम को दोबारा याद दिलाया गया है।

‘वंदे मातरम’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ का हिस्सा है। यह गीत, भारत माता की आराधना है। स्वतंत्रता आंदोलन के समय कांग्रेस ने इसके पहले दो छंदों को अपनाया था। बाद में इसे राष्ट्रगीत का दर्जा दिया गया। ‘जन गण मन’ की रचना रवींद्रनाथ टैगोर ने की थी।

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वंदे मातरम पर क्या कानून लाने जा रही है सरकार?

सरकार जल्द ही संसद के मानसून सत्र में एक बिल लाने जा रही है, जिसमें वंदे मातरम का अपमान करने या इसे गाने में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाया जाएगा।  राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 3 के तहत राष्ट्रगान, राष्ट्रध्वज और संविधान का अपमान करने पर तीन साल तक की सजा हो सकती है। सरकार चाहती है कि सभी संस्थाएं और संगठन इन निर्देशों का पूरी तरह पालन करें।

वंदे मातरम या जन गण मन महान कौन?

संवैधानिक मामलों की जानकार और सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता रुपाली पंवार बताती हैं, ‘वंदे मातरम और जन गण मन दोनों ही महान हैं, लेकिन अलग-अलग भूमिकाओं में। ये बहस राजनीतिक और भावनात्मक है, न कि संवैधानिक। जन गण मन पर किसी वर्ग को कोई आपत्ति नहीं है, वहीं वंदे मातरम को आलोचक सेक्युलर विचारधारा के खिलाफ मानते हैं। इसके सिर्फ दो छंद राष्ट्रगीत के तौर पर स्वीकृत हैं लेकिन जन गण मन में किसी खास धर्म या देवी का सीधा जिक्र नहीं है।’

कितनी पुरानी ये बहस है?

दीवान लॉ कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर निखिल गुप्ता बताते हैं, ’24 जनवरी 1950 को संविधान सभा में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने जन गण मन को राष्ट्रगान और वंदे मातरम को राष्ट्रगीत घोषित करते हुए कहा था कि दोनों को समान सम्मान मिलेगा। अब सरकार कह रही है कि यह मूल भावना थी, जिसे अब कानूनी रूप दिया गया है लेकिन सेक्युलर वर्ग को वंदे मातरम पर आपत्ति है। इस्लाम में ईश्वर के अतिरिक्त कोई पूजा के योग्य नहीं है, इसलिए ज्यादातर मुसलमानों को इस पर ऐतराज है।’

आलोचना क्या है?

असदुद्दीन ओवैसी और अबू आजमी जैसे मुस्लिम नेताओं का साफ कहना है कि वे वंदे मातरम का सम्मान करते हैं लेकिन वंदे मातरम नहीं कहेंगे। उनका धर्म, उन्हें ईश्वर के अलावा किसी की पूजा से रोकता है। यह उनका धार्मिक अधिकार है कि वे वंदे मातरम न कहें। असदुद्दीन ओवैसी तो यहां तक कह चुके हैं, ‘अगर आप मुझे किसी और की पूजा करने के लिए मजबूर करते हैं, तो मेरी धार्मिक आजादी कहां रही?’

 

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि जन-गण-मन को संविधान के तहत विशेष दर्जा प्राप्त है, जबकि वंदे मातरम की ऐतिहासिक अहमियत तो है पर दोनों को समान कानूनी स्तर पर रखना उचित नहीं होगा। 

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सरकार की सोच क्या है?

कानूनी और संवैधानिक रूप से आज भी जन गण मन ही भारत का राष्ट्रगान है और वंदे मातरम राष्ट्रगीत है। सरकार का दावा है कि नए नियम बस दोनों को बराबर सम्मान देने के लिए लाए जा रहे हैं। यह किसी को महान घोषित करने का मामला नहीं है। 

क्या कह रहा है पक्ष?

नेशनलिस्ट काग्रेंस पार्टी (शरद पवार) के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी कहते हैं, ‘मैंने पहले भी कई इंटरव्यू में कहा है, मुसलमान ‘वंदे मातरम’ नहीं गा सकते क्योंकि उनकी मान्यता के अनुसार, वे केवल एक ईश्वर की पूजा करते हैं और उनमें विश्वास रखते हैं। इसलिए, वे ईश्वर के अलावा किसी और के सामने या किसी और चीज के सामने अपना सिर नहीं झुका सकते।’

कुछ ऐसा ही तर्क कांग्रेस सांसद जेपी माथर ने कहा, ‘यह ठीक है, और निश्चित रूप से हम सभी को वंदे मातरम और राष्ट्रगान का सम्मान करना चाहिए। मैंने वह नोटिफिकेशन या निर्देश नहीं देखा है। जिस तरह से यह सरकार काम करती है, वह हमेशा इसमें कोई न कोई राजनीतिक एजेंडा शामिल करने या लोगों पर किसी तरह का दबाव डालने की कोशिश करती है।’

क्या कहते हैं सत्ता पक्ष के लोग?

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा, ‘वंदे मातरम भारत की आत्मा की आवाज है। देश की आजादी की लड़ाई वंदे मातरम के नारे के साथ लड़ी गई थी। इसलिए, वंदे मातरम गाना या बोलना हर भारतीय के लिए गर्व की बात है और हर नागरिक को ऐसा करना चाहिए।’
 
बीजेपी सांसद शशांक मणि ने कहा, ‘वंदे मातरम को कांग्रेस और पूर्ववर्ती सरकारों ने भुला दिया था। उन्होंने सिर्फ पहले दो छंद रखे थे और हमने देखा, पार्लियामेंट में जो डिबेट हुई तो उसमें ये निकल कर आया कि सभी छंद बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय जी ने 150 साल पहले लिखे थे और इसके उच्चारण से मां भारती का जयगान होता है। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को आगे बढ़ाया जा सकता है। इसी कारणवश हमारी सरकार ने ये लागू किया है कि वंदे मातरम का पूर्ण गान होना चाहिए और पहले होना चाहिए।’

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वंदे मातरम vs जन गण मन का शोर क्यों?

वंदे मातरम मूल रूप से 6 छंदों का है। पहली दो पंक्तियां मातृभूमि की स्तुति हैं। बाद की पंक्तियों में दुर्गा और हिंदू देवियों का रूपक लिया गया है। अल्पसंख्यकों को इस पर ऐतराज है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वंदे मातरम को खूब गाया गया। क्रांतिकारियों ने इसे सुर बना लिया। यह रचना 7 नवंबर 1875 को लिखी गई थी। गीत के कुछ छंदों में देवी-पूजा और युद्धाभिलाषा जैसी पंक्तियां हैं। 1930 से 40 के दौर में रवीन्द्रनाथ टैगोर और सुभाष चंद्र बोस के बीच भी इस गीत को लेकर बहस हुई।

1937 तक जवाहर लाल नेहरू,  महात्मा गांधी और रवींद्र नाथ टैगोर की सलाह पर दो छंदों को स्वीकार किया। तब कुछ मुस्लिम नेताओं ने दुर्गा और लक्ष्मी के रूपक वाले बाद के छंदों और उपन्यास के संदर्भों पर आपत्ति जताई। यह पूरा गीत, राष्ट्रगान नहीं बन सका। एक पक्ष आज कहता है कि वंदे मातरम स्वाधीनता संग्राम का असली गान है, इसे पूरा गाने का अधिकार और अनिवार्यता से जुड़ा कानून बनना चाहिए। दूसरे पक्ष का तर्क है कि धर्मनिरपेक्ष भारत में यह हिंदू धर्म की ओर झुका है, इसे संवैधानिक मजबूरी नहीं बनानी चाहिएष जन गण मन इससे बेहतर विकल्प है।

बारिश और उमस के मौसम में कैसे भगाएं मच्छर? देसी नुस्खे हैं कारगर


गर्मी और बरसात के मौसम में मच्छरों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो जाती है, जिससे दिन-रात खुजली, जलन के साथ-साथ डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में मच्छरों के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए घर के आसपास साफ-सफाई बनाए रखना और कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाना बेहद प्रभावी साबित हो सकता है।

बाजार में उपलब्ध मच्छर मार कॉइल, स्प्रे और अन्य रासायनिक उत्पादों का अत्यधिक उपयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, इसलिए आजकल लोग इनके विकल्प के रूप में पारंपरिक घरेलू उपायों को प्राथमिकता दे रहे हैं। स्वच्छता और प्राकृतिक नुस्खों के सहारे मच्छरों की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

 

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1. नीम की पत्तियां जलाएं

शाम के समय सूखी नीम की पत्तियां या नीम के तेल का इस्तेमाल करने से निकलने वाली गंध मच्छरों को दूर रखने में मदद कर सकती है। कई घरों में यह तरीका आज भी अपनाया जाता है।

2. कपूर का इस्तेमाल करें

एक कटोरी में कपूर जलाकर 15-20 मिनट के लिए कमरे में रखें। इसकी तेज गंध से मच्छर दूर रह सकते हैं। ध्यान रखें कि कपूर जलाते समय कमरे में सावधानी बरतें।

3. नींबू और लौंग का नुस्खा

एक नींबू को बीच से काट लें और उसमें 8-10 लौंग लगा दें। इसे कमरे या खिड़की के पास रखने से इसकी खुशबू मच्छरों को दूर रखने में मदद कर सकती है।

 

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4. तुलसी का पौधा लगाएं

तुलसी का पौधा सिर्फ औषधीय गुणों के लिए ही नहीं बल्कि मच्छरों को दूर रखने के लिए भी जाना जाता है। इसे घर की बालकनी, आंगन या खिड़की के पास लगाया जा सकता है।

5. सरसों के तेल और अजवाइन का उपाय

एक छोटी कटोरी में सरसों का तेल लें और उसमें थोड़ी सी अजवाइन डाल दें। इसे कमरे के किसी कोने में रख दें। इसकी गंध मच्छरों को दूर रखने में मदद कर सकती है।

6. लहसुन का स्प्रे बनाएं

लहसुन की कुछ कलियों को पानी में उबालकर ठंडा कर लें। अब इस पानी को स्प्रे बोतल में भरकर घर के कोनों, खिड़कियों और दरवाजों के आसपास छिड़क सकते हैं। लहसुन की तेज गंध मच्छरों को दूर रखने में मदद कर सकती है।

7. पुदीना और लेमनग्रास का इस्तेमाल करें

पुदीना और लेमनग्रास की तेज खुशबू मच्छरों को पसंद नहीं होती। इनके पौधे घर में लगाने या इनके एसेंशियल ऑयल की कुछ बूंदे मच्छर भगाने वाली मशीन में डालने से फायदा मिल सकता है।

 

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8. नारियल तेल और नीम का तेल

एक चम्मच नारियल तेल में कुछ बूंदे नीम का तेल मिलाकर हाथ और पैरों पर लगाया जा सकता है। इससे बाहर जाने पर भी आपके पास से मच्छर दूर रहेंगे।

9. धूप या लोबान जलाएं

गांव के इलाकों में शाम के समय लोबान या देसी धूप जलाने की परंपरा रही है। इसका धुआं मच्छरों को दूर रखने में मदद कर सकता है। हालांकि आज भी कई घर ऐसे हैं जो इस पुरानी परंपरा को अपनाना पसंद करते हैं।

10. घर के आसपास सफाई रखें

कोई भी देसी नुस्खा तभी असरदार होगा जब घर के आसपास पानी जमा न हो। कूलर, गमले, बाल्टी और पुराने टायर में रुका हुआ पानी समय-समय पर खाली करते रहें क्योंकि यहीं मच्छर सबसे ज्यादा पनपते हैं।

‘द डिवाइन कॉमेडी’ इटली की इस कविता में गरुड़ पुराण जैसी लिखी गई है नरक यात्रा


इंसान अक्सर अपनी आंखें बंद करके मृत्यु के बारे में सोचता है, जहां वह नरक और स्वर्ग की कल्पना करता है। ऐसी कल्पना इटली के कवि दांते की थी, जिन्होंने नरक की कल्पना कर ‘द डिवाइन कॉमेडी’ नाम की कविता लिखी थी। सनातन धर्मग्रंथ गरुड़ पुराण में नरक के बारे में बताया गया है, जिसमें साफ तौर पर बताया गया है कि व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर नरक में सजा मिलती है। इसी तरह दांते ने डिवाइन कॉमेडी कविता के जरिए नरक यात्रा बताई है।

 

दांते ने ‘द डिवाइन कॉमेडी’ 13वीं शताब्दी में लिखी थी। यह इटली में दुकानों पर बेची जाती थी। इसमें लिखी गई नरक की यात्रा को पढ़कर लोग प्रभावित होते थे। हिन्दू धर्मग्रंथ गरुड़ पुराण में व्यक्ति की मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा बताई गई है, जिसमें नरक और नरक में मिलने वाली यातनाओं के बारे में बताया गया है। इसी तरह डिवाइन कॉमेडी कविता में नरक और नरक में लोगों को मिलने वाली सजा के बारे में रोचक तरीके से लिखा गया है।

 

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डिवाइन कॉमेडी में नरक चक्र

 

डिवाइन कॉमेडी में 9 प्रकार के नरक बताए गए हैं। इन 9 प्रकार के नरकों में अलग-अलग कर्मों की सजा दी जाती है। जहां व्यक्ति की आत्मा को झूठ बोलने से लेकर लालच जैसे पाप करने की सजा दी जाती है। अब सवाल उठता है कि नौवें नरक में किस प्रकार की सजा दी जाती है।

 

1. लीम्बो – दांते ने पहले नरक का नाम लीम्बो रखा है, जो उन गैर-ईसाई लोगों के लिए है जो ईसा मसीह से पहले जन्मे थे। इस नरक में रहने वाली आत्माओं को सजा नहीं दी जाती है, सिर्फ यहां रहने वाले लोगों को स्वर्ग से दूर रखा जाता है।

 

2. वासना-इस नरक में उन लोगों को सजा दी जाती है, जो अपनी पूरी जिंदगी वासना और शारीरिक सुखों के लालच में रहते हैं। इस नरक में लगातार तेज हवा बहती है। तेज हवा लोगों को थप्पड़ के समान लगती है। दांते के मुताबिक यह सजा इसलिए दी जाती है क्योंकि वासना में लिप्त व्यक्ति का मन एक जगह नहीं ठहरता है।

 

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3. पेटूपन – इस चक्र में उन लोगों की आत्मा रहती है, जिन्होंने अपने जीवन में खाने को लेकर लालच किया था। यहां एक राक्षस लोगों को बर्फीली जमीन पर लिटाता है, साथ ही बर्फीली बारिश कराकर तड़पाता है। ज्यादा खाने वाले लोगों की आत्मा को इसलिए सजा दी जाती है क्योंकि वे हमेशा दूसरों की परवाह किए बिना खाना खाते थे।

 

4. लालच – नरक के इस चक्र में लोगों की आत्माओं को दो अलग-अलग हिस्सों में सजा दी जाती है। पहले हिस्से में उन लोगों को सजा दी जाती है जो अपने जीवन में नशे की लत में डूबे थे। वहीं दूसरे हिस्से में उन लोगों को रखा जाता है जो धन-संपत्ति के लालच में रहते थे।

 

5. अहंकार – इस नरक में वे लोग रहते हैं, जिन्होंने अपने जीवन में दूसरों पर गुस्सा किया था।

 

6. अधर्मी – डिवाइन कॉमेडी कविता में नरक के छठे चक्र को लेकर बताया गया है कि इस चक्र में उन लोगों की आत्माएं सजा काटती हैं, जिन्होंने अपने पूरे जीवन ईश्वर पर भरोसा नहीं किया।

7. हिंसा – नरक के सातवें हिस्से को तीन भागों में बांटा गया है। जहां एक तरफ हत्यारे लोगों की आत्माएं रखी गई हैं, वहीं दूसरी तरफ हिंसा करने वाले लोगों की आत्माओं को सजा दी जाती है, जबकि तीसरी तरफ आत्महत्या करने वाले लोगों को सजा दी जाती है।

 

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8. धोखा – नरक के आठवें चक्र में उन लोगों की आत्माओं को रखा गया है, जिन्होंने अपने जीवन में दूसरों को धोखा दिया।

 

9. विश्वासघात – इस नरक में लूसिफर नाम का शैतान उन लोगों की आत्माओं को सजा देता है, जिन्होंने अपने परिवार, लव पार्टनर और दोस्तों को धोखा दिया।

 

गरुड़ पुराण से समानता

दांते की नरक की परिकल्पना में 9 चक्र हैं, जहां हर चक्र एक पाप के लिए है। व्यक्ति की आत्मा को सजा मिलती है। उसी प्रकार गरुड़ पुराण में भी अलग-अलग नरकों जैसे रौरव, महारौरव और कुम्भीपाक नरक का जिक्र किया गया है, जहां हर नरक में अलग-अलग पापों की अलग-अलग सजा दी जाती है।

 

कर्म के आधार पर दंड मिलता है। जैसा दांते में वासना के लिए सजा का जिक्र किया गया है, वैसा ही गरुड़ पुराण में दंड के बारे में बताया गया है। जहां चोरी करने वाले को कांटों पर घसीटा जाना जैसा दंड बताए गए हैं। डिवाइन कॉमेडी में लोगों के कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले एक व्यक्ति का जिक्र किया गया है। वैसा ही गरुड़ पुराण में यमराज न्यायाधीश हैं और चित्रगुप्त कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं।

 

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डिवाइन कॉमेडी और गरुड़ पुराण दोनों में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा, पाप-पुण्य और कर्मों के अनुसार मिलने वाले दंड का उल्लेख मिलता है। इसी वजह से दोनों की अक्सर तुलना की जाती है। हालांकि, दोनों ग्रंथ अलग-अलग मान्यताओं पर आधारित हैं। गरुड़ पुराण में नरक का दंड अस्थायी माना गया है, जबकि डिवाइन कॉमेडी में नरक को शाश्वत दंड के रूप में दिखाया गया है।

क्या है हाका डांस? जिससे न्यूजीलैंड में PM मोदी का हुआ स्वागत, इतिहास जान लीजिए


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 से 11 जुलाई तक 2026 तक तीन देशों (इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड) के दौरे पर थे। आज PM मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड के ऑकलैंड पहुंचे थे। गवर्नमेंट हाउस पहुंचने पर वहां की पारंपरिक माओरी जनजाति के ‘हाका’ नृत्य के साथ PM मोदी का भव्य स्वागत किया गया। PM मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। 

 

हाका नृत्य के बारे में बात करें तो यह न्यूज़ीलैंड की मूल निवासी माओरी जनजाति का एक पारंपरिक और बेहद जोशीला नृत्य है। यह कोई सामान्य नृत्य नहीं है, बल्कि इसमें पैर थपथपाना, सीने पर हाथ मारना, तेजी से सांस छोड़ना और जोरदार हुंकार भरना शामिल है।

 

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आपको याद होगा कि पिछले दिनों एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। इसमें न्यूजीलैंड की संसद में युवा महिला सांसद हाना-रावहिती करैरिकी माईपी-क्लार्क सरकार के एक बिल के विरोध में पारंपरिक ‘हाका’ नृत्य किया था। सोशल मीडिया पर उनकी यह क्लिप आज भी खूब वायरल होती है।

क्या है हाका नृत्य? 

हाका न्यूजीलैंड के स्वदेशी माओरी (Maori) समुदाय का पारंपरिक नृत्य है, जिसे ‘वॉर डांस’ भी कहा जाता है। दरअसल, यह नृत्य  ऐतिहासिक रूप से योद्धाओं द्वारा युद्ध के मैदान में जाने से पहले अपने दुश्मनों को डराने और अपनी ताकत के प्रदर्शन के तौर पर किया जाता था। लेकिन इसका महत्व इससे कहीं ज्यादा है। मौजूदा समय में हाका नृत्य खास मेहमानों के स्वागत, शादी, अंतिम संस्कार, जीत के जश्न, राष्ट्रीय समारोह और अहम अवसरों पर किया जाने लगा। 

 

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हाका नृत्य में होता क्या है?

हाका नृत्य के दौरान एक साथ ऊंची आवाज में पारंपरिक शब्द बोले जाते हैं। कलाकार जोरदार कदमताल करते हुए छाती और जांघों पर हाथ मारते हैं। आंखें बड़ी करते हैं और जीभ बाहर निकालते हैं। यह नृत्य ताकत, साहस, एकजुटता और सम्मान का संदेश देता है। इसका उद्देश्य केवल सामने वाले को चुनौती देना ही नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और सामूहिक भावना को भी दर्शाना होता है। न्यूजीलैंड की अंतरराष्ट्रीय रग्बी टीम (ऑल ब्लैक्स) अंतरराष्ट्रीय मैचों से पहले हाका नृत्य करती है। यहां से इसे दुनियाभर में खूब प्रसिद्धि मिली।  

बताया जाता है कि माओरी जनजाति न्यूजीलैंड के मूल निवासी हैं, जो 13वीं या 14वीं शताब्दी के आसपास प्रशांत महासागर के द्वीपों से नावों के जरिये न्यूजीलैंड पहुंचे थे। माओरी जनजाति अपनी समृद्ध संस्कृति, अपनी भाषा (ते रेओ माओरी), और युद्ध के पारंपरिक नृत्य ‘हाका’ के लिए दुनिया भर में जानी जाती है। हाका नृत्य के अलावा माओरी संस्कृति में टैटू का भी बहुत महत्व है। वे अपने चेहरे और शरीर पर खास टैटू भी बनवाते हैं। यह उनके परिवार और सामाजिक स्थिति को दर्शाता है।  

माओरी संस्कृति के सबसे खास और पवित्र अनुष्ठान ‘पोविरी’ से आज PM मोदी का स्वागत किया गया। माओरी स्वागत समारोह ‘पोविरी’ चार चरणों में पूरा होता है। पहला- करंगा, जिसमें माओरी महिलाएं विशेष स्वर में मेहमानों का स्वागत करती हैं। दूसरा चरण- वाइकेरो, जिसमें एक योद्धा मेहमान के सामने प्रतीकात्मक वस्तु रखता है। उसे उठाना शांति और सद्भाव का संकेत माना जाता है। तीसरा- हाका, जिसमें पुरुष और महिलाएं ऊर्जा से भरपूर पारंपरिक हाका नृत्य प्रस्तुत करते हैं। आखिरी चरण- हौंगी का होता है। इसमें मेजबान और मेहमान नाक व माथा मिलाते हैं। माओरी संस्कृति में इसे आपसी सम्मान और आत्मिक जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है। 

अगले 48 घंटे में तेज बारिश, IMD का राज्यों के लिए अलर्ट, जानिए अपने शहर का हाल


देश के कई राज्यों में उमस बढ़ गई है। अब इन राज्यों में गरज-तड़क के साथ तेज बारिश होने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अनुमान जाया है कि मध्य उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्से में बने कम दबाव वाले क्षेत्र के असर की वजह से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। 

बीते 24 घंटों में उत्तराखंड, हिमाचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बहुत ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। IMD के मुताबिक अगले 6-7 दिनों में मध्य भारत और दक्षिणी भारत में बारिश की गतिविधियां कम रहने वाली हैं। उत्तर-पश्चिमी राज्यों में अगले कई दिनों तक बारिश जारी रहने की उम्मीद है। 

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पिछले 24 घंटों में कहां बारिश हुई है?

उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 21 सेंटीमीटर या उससे ज्यादा बारिश दर्ज की गई। पूर्वी मध्य प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश, मेघालय, बिहार और हरियाणा में 12-20 सेंटीमीटर तक बहुत भारी बारिश हुई। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पूर्वी राजस्थान और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में गुरुवार को 7-11 सेंटीमीटर तक भारी बारिश दर्ज की गई।

कैसे रहेगा आज का मौसम?

10 से 12 जुलाई तक जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और 10 से 16 जुलाई तक हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आज और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 10-13 जुलाई तक भारी बारिश की संभावना है। हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, हिमाचल, उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कहीं-कहीं बहुत बारिश भी हो सकती है।

मध्य भारत में कैसा रहेगा मौसम?

पश्चिमी मध्य प्रदेश में 11 से 16 जुलाई तक, पूर्वी मध्य प्रदेश में 11 से 14 जुलाई और विदर्भ में 11 से 13 जुलाई तक कुछ जगहों पर बारिश रहेगी। पूर्वी मध्य प्रदेश 15-16 जुलाई को फिर से अच्छी बारिश हो सकती है। इन इलाकों में आंधी-तूफान, बिजली गिरने और 40-60 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज हवाएं चलने की भी चेतावनी है।

पूर्वोत्तर में कैसा रहेगा हाल?

अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 10 से 16 जुलाई तक पूरे क्षेत्र में बारिश होने की संभावना है। 10 से 11 जुलाई को इन राज्यों में कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश हो सकती है। पश्चिम बंगाल, सिक्किम, बिहार, झारखंड और ओडिशा में भी अगले कई दिनों तक बारिश और आंधी-बिजली की गतिविधियां रहेंगी।

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पश्चिमी और दक्षिणी भारत में कैसा रहेगा मौसम?

कोंकण और गोवा में 10-16 जुलाई तक अच्छी बारिश जारी रहने की उम्मीद है। गुजरात, महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में छिटपुट बारिश होगी। दक्षिण भारत में तटीय कर्नाटक, केरल और तटीय आंध्र प्रदेश में अगले दिनों व्यापक बारिश हो सकती है। तमिलनाडु, तेलंगाना और रायलसीमा में कुछ जगहों पर बारिश के साथ आंधी-तूफान की संभावना है। दिल्ली-NCR का 

मौसम कैसे रहेगा?

दिल्ली में अगले कुछ दिनों तक आसमान में बादल छाए रहेंगे। दिल्ली में 11 से 13 जुलाई तक तापमान थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन बादल और हल्की बारिश जारी रहने की उम्मीद है।

कहां ज्यादा है खतरा?

IMD ने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है। 11 से 15 जुलाई तक अरब सागर के कई क्षेत्रों और 11-15 जुलाई तक बंगाल की खाड़ी में खतरनाक स्थिति रह सकती है। 

क्या है स्लीपमैक्सिंग, गहरी नींद के लिए क्या कर रहे हैं लोग?


स्लीपमैक्सिंग का चलन इन दिनों तेजी से बढ़ा है। स्लीपमैक्सिंग उन सभी तरीकों, गैजेट्स और नुस्खों को कहते हैं जिनसे लोग जल्दी और गहरी नींद पाने की कोशिश करते हैं। जैसे लोग अपने लुक्स सुधारने के लिए कुछ तरीके अपनाते हैं, वैसे ही अब नींद बेहतर करने के लिए स्लीपमैक्सिंग का इस्तेमाल हो रहा है। स्टैनफोर्ड हेल्थ केयर के एक्सपर्ट क्लीट ए. कुशिदा कहते हैं कि लोग अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को अच्छा करने के लिए ऐसा कर रहे हैं। कुछ लोग नींद की परेशानी दूर करने के लिए आसान रास्ता ढूंढ रहे हैं।

आज के समय में लोग फिटनेस डिवाइस के जरिए अपनी नींद का डेटा देख सकते हैं। इससे उन्हें पता चलता है कि उनकी नींद कैसी है। सोशल मीडिया पर कई तरह के तरीके दिख रहे हैं। इनमें सोते समय मुंह पर टेप लगाना, नाक चौड़ी करने वाली चीजें इस्तेमाल करना, मैग्नीशियम वाली ड्रिंक्स पीना और सोने से पहले कीवी फल खाना शामिल है। कुछ लोग पीनियल ग्लैंड मेडिटेशन के बारे में भी बताते हैं। उनका दावा है कि इससे दस मिनट से कम समय में नींद आ जाती है।

 

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क्या ये तरीके सच में काम करते हैं?

स्टैनफोर्ड के एक्सपर्ट क्लीट ए. कुशिदा मेलाटोनिन जैसे सप्लीमेंट्स को असरदार मानते हैं। वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन की प्रोफेसर अनीता शेलगिकर का कहना है कि गहरी सांस लेने या ध्यान लगाने से तनाव कम होता है, जिससे नींद की क्वालिटी बेहतर होती है। रिसर्च के मुताबिक, कीवी खाने से शरीर में सेरोटोनिन और मेलाटोनिन का स्तर बढ़ता है जो नींद लाने में मददगार है। इसके अलावा, ब्लू लाइट को रोकने वाले चश्मे शरीर की नेचुरल घड़ी को ठीक रखने में मदद करते हैं।

 

दूसरी तरफ कई ऐसे तरीके भी हैं जिनके लिए अभी कोई पक्का सबूत नहीं मिला है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मुंह पर टेप लगाने जैसे तरीकों का कोई ठोस टेस्ट नहीं हुआ है। इसी तरह, पीनियल ग्लैंड मेडिटेशन जैसे तरीकों के पीछे भी कोई ठोस आधार नहीं है। मैग्नीशियम सप्लीमेंट्स और व्हाइट नॉइज मशीनों के नतीजे भी हर व्यक्ति पर अलग-अलग रहे हैं। 

 

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नींद को बेहतर बनाने के सही तरीके

नींद को बेहतर बनाने के लिए नील वालिया की सलाह है कि लोग अपनी नींद को लेकर बहुत चिंता न करें। जो लोग बिना ज्यादा सोचे चैन से सोते हैं उन्हें सबसे अच्छी नींद आती है। स्लीप हाइजीन के तहत सोने वाले कमरे का तापमान 60 से 67 डिग्री फारेनहाइट के बीच रखना और सोने से पहले कमरे की रोशनी कम करना फायदेमंद होता है। नींद को परफेक्ट बनाने के चक्कर में लोग ऑर्थोसोनिया जैसी समस्या का शिकार हो सकते हैं। क्लीट ए. कुशिदा मुंह पर टेप लगाने जैसे तरीकों को खतरनाक बताते हैं,  इससे सांस लेने में दिक्कत और फेफड़ों में बलगम जाने का खतरा रहता है। 

योगिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलेगा?


10 जुलाई को आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है, जिसे योगिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। आज का दिन आध्यात्मिक और मानसिक शुद्धि के लिए बेहद पवित्र माना गया है। अंक ज्योतिष के अनुसार आज का मूलांक 1 है, जो सूर्य देव के प्रभाव को दर्शाता है। यह जीवन में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संकेत देता है। आज चंद्रमा वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही शुक्र और बुध की युति से लक्ष्मी नारायण योग का प्रभाव बना रहेगा, जो आर्थिक मामलों, कलात्मक कार्यों और सुख-सुविधाओं में वृद्धि के लिए बेहद शुभ संकेत दे रहा है।

 

शुक्रवार का दिन होने और चंद्रमा के वृषभ राशि में रहने से आज का दिन भौतिक सुखों में वृद्धि करेगा और रिश्तों में मजबूती लाएगा। हालांकि, मूलांक 1 के प्रभाव के कारण स्वभाव में थोड़ा अहंकार या जिद आ सकती है, जिससे बचने की आवश्यकता होगी। आज की ऊर्जा हमें व्यावहारिक रहते हुए अपने लक्ष्यों पर केंद्रित रहने की प्रेरणा देती है। आइए जानते हैं कि मेष से लेकर मीन राशि तक के जातकों के लिए आज का दिन कैसा रहने वाला है।

 

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राशिफल

 

मेष राशि

 

करियर में नए अवसर मिलेंगे। ऑफिस के सहकर्मियों का सहयोग आपके काम को आसान बनाएगा। धन लाभ के योग हैं। जीवनसाथी के साथ संबंध अच्छे रहेंगे। परिवार में उत्सव का माहौल बन सकता है।

आज क्या करें: देवी लक्ष्मी को लाल फूल अर्पित करें।

आज क्या न करें: किसी भी काम में जल्दबाजी या हड़बड़ी न दिखाएं।

 

वृषभ राशि

 

चंद्रमा आपकी ही राशि में हैं, जिससे आपका प्रभाव बढ़ेगा। नौकरी में प्रमोशन के योग हैं। आर्थिक रूप से आज का दिन बेहद मजबूत रहेगा। अटका हुआ धन वापस मिल सकता है। लव लाइफ में रोमांस बढ़ेगा और परिवार के साथ यादगार समय बीतेगा।

आज क्या करें: सफेद रंग के कपड़े पहनें या सफेद रुमाल पास रखें।

आज क्या न करें: आज किसी से उधार का लेनदेन करने से बचें।

 

मिथुन राशि

 

दफ्तर में काम का दबाव अधिक रह सकता है। बिजनेस में कोई भी बड़ा निवेश करने से पहले अनुभवी लोगों की सलाह जरूर लें। खर्चों में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है, इसलिए बजट बनाकर चलें।

आज क्या करें: पक्षियों को दाना डालें और कपूर जलाएं।

आज क्या न करें: आज अपनी बातें किसी अजनबी से शेयर न करें।

 

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कर्क राशि

 

करियर में तरक्की के नए रास्ते खुलेंगे। धन कमाने के नए स्रोत हाथ लग सकते हैं, जिससे आपकी आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होगी। दोस्तों के साथ मेलजोल बढ़ेगा। पारिवारिक जीवन में खुशहाली और तालमेल रहेगा।

आज क्या करें: शिवलिंग पर कच्चा दूध और जल अर्पित करें।

आज क्या न करें: आज के दिन किसी पर भी आंख मूंदकर भरोसा न करें।

 

सिंह राशि

 

नौकरीपेशा जातकों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है। व्यापार में नई डील फाइनल हो सकती हैं, जो भविष्य में बड़ा लाभ देंगी। पैतृक संपत्ति से लाभ होने के योग हैं। माता-पिता का पूरा सहयोग मिलेगा और जीवनसाथी के साथ तालमेल बेहतरीन रहेगा।

आज क्या करें: उगते सूर्य को तांबे के लोटे से अर्घ्य दें।

आज क्या न करें: अहंकार में आकर किसी का अपमान करने से बचें।

 

कन्या राशि

 

भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। नौकरी में बदलाव के लिए यह समय अच्छा है। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। फंसा हुआ पैसा मिलने से राहत मिलेगी। जीवनसाथी के साथ किसी धार्मिक स्थल पर जा सकते हैं।

आज क्या करें: किसी मंदिर में हरी मूंग की दाल का दान करें।

आज क्या न करें: आज भाग्य के भरोसे बैठकर समय बर्बाद न करें।

 

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तुला राशि

 

ऑफिस में चुनौतियां आ सकती हैं। विरोधियों से सावधान रहें। बिजनेस में कोई भी नया प्रयोग करने के लिए दिन ठीक नहीं है। आज धन हानि हो सकती है, इसलिए सट्टा या लॉटरी से पूरी तरह दूर रहें।

आज क्या करें: छोटी कन्याओं को मिश्री या मिठाई खिलाएं।

आज क्या न करें: आज गाड़ी चलाते समय लापरवाही बिल्कुल न बरतें।

 

वृश्चिक राशि

 

नौकरी में आपके काम को अलग पहचान मिलेगी। धन कमाने के साधन बढ़ेंगे। सुख-सुविधाओं पर खर्च करने का मन बनेगा। प्रेम संबंधों में नया मोड़ आ सकता है। 

आज क्या करें: हनुमान चालीसा का पाठ करें और सिंदूर का तिलक लगाएं।

आज क्या न करें: आज शाम के समय किसी को धन उधार न दें।

 

धनु राशि

 

नौकरी में आपके विरोधी परास्त होंगे और आप अपने काम को समय पर पूरा कर पाएंगे। आर्थिक स्थिति स्थिर रहेगी। लोन या कर्ज चुकाने में सफलता मिल सकती है। परिवार के सदस्यों का सहयोग मिलेगा। 

आज क्या करें: गाय को घी लगी रोटी और गुड़ खिलाएं।

आज क्या न करें: आज किसी भी अजनबी के विवाद में बीच-बचाव न करें।

 

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मकर राशि

 

विद्यार्थियों और कला जगत से जुड़े लोगों के लिए आज का दिन शानदार है। आमदनी अच्छी रहेगी। रचनात्मक कार्यों से भी धन कमाने के मौके मिलेंगे। लव पार्टनर के साथ यादगार समय बिताएंगे।

आज क्या करें: शनि चालीसा का पाठ करें और गरीब को काले चने दान करें।

आज क्या न करें: आज भावनाओं में बहकर कोई फैसला न लें।

 

कुंभ राशि

 

ऑफिस में ज्यादा काम का बोझ आपको मानसिक तनाव दे सकता है। जमीन-जायदाद से जुड़े बिजनेस में थोड़ा संभलकर चलने की जरूरत है। सुख-साधनों और घर की मरम्मत पर खर्च होने की संभावना है।

आज क्या करें: शिवलिंग पर जल में काले तिल मिलाकर अर्पित करें।

आज क्या न करें: आज किसी करीबी से बहस या वाद-विवाद में न उलझें।

 

मीन राशि

 

ऑफिस में आज आपका साहस बढ़ेगा। सहकर्मियों के सहयोग से मुश्किल प्रोजेक्ट भी आसानी से पूरे कर लेंगे। आर्थिक लाभ के अच्छे अवसर मिलेंगे। बचत करने में सफल रहेंगे। भाई-बहनों के साथ संबंध मजबूत होंगे और समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा।

आज क्या करें: माथे पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं।

आज क्या न करें: आज आलस्य को अपने ऊपर हावी न होने दें।

 

नोट: यह राशिफल ज्योतिषीय मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

 

तुर्की से सऊदी तक, इजरायल एफ-35 बेचने का विरोध क्यों करता है?


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तुर्की को दुनिया का सबसे घातक फाइटर जेट एफ-35 बेचने पर विचार कर रहे हैं। इजरायल अपने सहयोगी के इस कदम से खुश नहीं है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू खुलकर सामने आ चुके हैं। उनका कहना है कि तुर्की को किसी भी कीमत पर एफ- 35 फाइटर जेट नहीं मिलना चाहिए। हालांकि इस प्रस्ताव का विरोध करने वाला इजरायल इकलौता देश नहीं है। ग्रीस के रक्षा मंत्रालय ने भी एक बयान में कहा कि अगर तुर्की को एफ- 35 फाइटर जेट मिलता है तो इससे ग्रीस खुश नहीं होगा।

 

आइये समझते हैं कि तुर्की को एफ-35 विमान इजरायल बेचने का इजरायल विरोध क्यों कर रहा है, उसकी चिंता क्या है। इस बीच रूस ने ऐसा कौन सा कदम चल दिया है, जो न केवल इजरायल बल्कि अमेरिका की भी टेंशन बढ़ा देगा।

 

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ट्रंप तुर्की बेचना चाहते हैं एफ-35

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में तुर्की में आयोजित नाटो सम्मेलन में हिस्सा लिया। तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैय्यप एर्दोगन के साथ बैठक के बाद ट्रंप ने ऐलान किया कि अमेरिका तुर्की को एफ-35 लाइटनिंग II स्टील्थ स्ट्राइक फाइटर जेट बेचने पर विचार कर रहा है। अगर अमेरिका इस सौदे को मंजूरी देता है तो तु्र्की पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट हासिल करने वाला दुनिया पहला मुस्लिम बहुल देश होगा।

इजरायल को कौन सा डर सता रहा?

मध्य पूर्व में अभी सिर्फ इजरायल के पास ही दर्जनों एफ-35 लड़ाकू विमान है। यह विमान पूरे इलाके में इजरायल की हवाई श्रेष्ठता साबित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इजरायल को डर है कि अगर यह विमान तुर्की के हाथ लगे थे। मध्य पूर्व में न केवल शक्ति का संतुलन बदलेगा, बल्कि इजरायल की हवाई श्रेष्ठता को भी चुनौती मिलेगी।


बेंजामिन नेतन्याहू के बयान में भी इसकी झलक दिखती है। फॉक्स न्यूज से बातचीत में इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि उन्हें (तुर्की) एफ-35 या लड़ाकू विमानों के इंजन दिए जाने चाहिए। इस तरह की बिक्री से मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन बिगड़ जाएगा।’

कहां चूक गया था तुर्की?

नाटो का सदस्य होने के नाते तुर्की पहले एफ-35 जॉइंट स्ट्राइक फाइटर कार्यक्रम का हिस्सा था, लेकिन उसने 2019 में रूस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा था। इसके बाद अमेरिका ने उसे कार्यक्रम से बाहर निकाल दिया था। स्टील्थ विमान खरीदने पर बैन भी लगा दिया था। हालांकि तुर्की का प्लान 100 एफ-35A फाइटर जेट हासिल करने का था। 

इंजन बेचने का भी विरोध

अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद तुर्की ने अपना फाइटर जेट प्रोग्राम शुरू किया। कान नाम से स्टील्थ फाइटर जेट बना रहा है। हालांकि उसे इसके लिए अमेरिकी इंजनों की जरूरत है। तुर्की अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक के एफ110 इंजन चाहता है। अमेरिका ने भी इन इंजनों को बेचने में दिलचस्पी दिखाई है। मगर इजरायल इसका विरोध कर रहा है। उसका कहना है कि तुर्की को इंजन भी नहीं मिलने चाहिए। 

 

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तुर्की के अलावा इन देशों का भी विरोध

ट्रंप प्रशासन ने सऊदी अरब को भी एफ-35 विमान बेचने पर दिलचस्पी दिखाई थी। उस वक्त भी इजरायल की सरकार और वायुसेना ने इसका विरोध किया था। इजरायली वायुसेना ने कहा था कि अगर मध्य पूर्व के कई देशों के पास आधुनिक स्टील्थ फाइटर जेट आ जाते हैं तो इजरायल की हवाई श्रेष्ठता कमजोर पड़ सकती है। तुर्की और सऊदी अरब के अलावा इजरायल संयुक्त अरब अमीरात को भी एफ-35 बेजने पर आपत्ति जता चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका एफ-35 विमान तुर्की, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को बेचता है तो पूरे इलाके में इजरायली सेना की मनमानी पर विराम लग सकता है। 

कहां फंस सकता तुर्की का पेंच?

तुर्की अबकी बार पहले वाली गलती नहीं करना चाहता है। 2019 में तुर्की को बेचे जाने वाले पहले एफ-35 विमान अंसेबली लाइन से निकल चुके थे। मगर एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने के कारण अमेरिका ने बैन लगा दिया और इन विमानों की डिलीवरी नहीं की। बाद में अमेरिकी एयरफोर्स ने इन विमानों को खरीद लिया था। 

 

अब भी तुर्की के सामने एक दिक्कत यह है कि अगर उसके पास एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम मौजूद रहता है तो अमेरिकी कांग्रेस एफ- 35 की बिक्री पर रोक लगा सकती है। मतलब साफ है कि तुर्की को अपने यहां से एस-400 को हटाना होगा। इस बीच खबर यह है कि तुर्की ने अपने एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम को किसी तीसरे देश को बेचने की खातिर रूस से अनुमति मांगी है।

रूस जल्द ईरान को सौंपेगा फाइटर विमान

तुर्की के साथ एफ-35 डील के बीच रूस सुखोई 35 विमान का पहला बैच ईरान को सौंपने को तैयार है। माना जा रहा है कि साल के आखिरी और 2027 के शुरुआत तक 20 विमानों की डिलीवरी हो सकती है। ईरान की पुरानी वायुसेना काफी हद तक तबाह हो चुकी है। लेकिन इन विमानों की आपूर्ति से उसकी ताकत में इजाफा होगा।   

क्या फर्जी जानकारी देकर बेची जा रही है शराब? FSSAI ने जारी कर दिया नोटिस


फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) अब एनर्जी ड्रिंक के बाद शराब बनाने वाली कंपनियों पर सख्ती दिखा रहा है। FSSAI ने शराब बनाने वाली कंपनियों को नोटिस जारी कर दिया है और नियमों के उल्लंघन को लेकर नोटिस जारी किया है। FSSAI ने कहा है कि कुछ कंपनियां एक्स्ट्रा फ्लेवर का इस्तेमाल कर रही हैं और प्रोडक्ट लेबल पर प्रोडक्ट की उम्र से जुड़े भ्रामक दावे कर रही हैं। FSSAI अब इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। 

 

FSSAI के अनुसार, यह नोटिस खाद्य सुरक्षा और मानक (मादक पेय पदार्थ) विनियम, 2018 के तहत निर्धारित प्रावधानों का उल्लंघन करने के लिए FSS एक्ट, 2006 के तहत लाइसेंस प्राप्त कंपनियों फूड बिजनेस ऑपरेटर्स को जारी किया गया है। इस नोटिस के बाद कंपनियों को निर्धारित समय में  जवाब देने के लिए कहा गया है। 

 

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सोशल मीडिया पर दी जानकारी

FSSAI ने इसको लेकर अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट किया है। FSSAI ने पोस्ट में कहा, ‘FSSAI ने शराब निर्माताओं को फ्लेवर मिलाने और उम्र से संबंधित भ्रामक दावों से संबंधित नियामक प्रावधानों का कथित रूप से पालन न करने के लिए नोटिस जारी किए हैं और यह स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए।’

कहां खेल कर रही थी कंपनियां?

FSSAI ने इन कंपनियों के प्रोडक्ट्स की जांच की है। जांच में सामने आया कि कुछ कंपनियों अपने उत्पादों में ऐसे एक्स्ट्रा सिंथेटिक फ्लेवर का इस्तेमाल कर रही हैं, जो व्हिस्की, वाइन और अन्य शराब के प्रोडक्ट्स के नेचुरल स्वाद और खुशबू की नकल करते हैं। FSSAI का कहना है कि इस तरह अनाधिकृत फ्लेवर का उपयोग ना केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक गुणवत्ता के बारे में गुमराह किया जाता है। 

 

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उम्र को लेकर क्या विवाद?

शराब की बोतल के प्रोडक्ट लेबल पर प्रोडक्ट की एज को लेकर किए जा रहे दावों पर भी FSSAI ने सवाल उठाए हैं। शराब की बोतलों पर 8 से 12 साल पुरानी होने का दावा किया जाता है और FSSAI ने इसी को लेकर सवाल उठाए हैं। नियमों के अनुसार, किसी शराब के लेबल पर उसकी उम्र का दावा किया जाता है तो वह उस मिश्रण में मौजूद सबसे कम उम्र वाली स्पिरिट के आधार पर होना चाहिए। FSSAI की जांच में सामने आया है कि कंपनियां बहुत कम मात्रा में पुरानी स्पिरिट मिलाकर पूरी बोतल को एज्ड बताकर ज्यादा कीमत पर बेच रही हैं। इस तरह की लेबलिंग को भ्रामक और नियमों के खिलाफ बताया है। 

 

FSSAI ने कंपनियों से इस मामले में जवाब मांगा है और पूछा है कि उनके खिलाफ FSS एक्ट, 2006 के तहत कार्रवाई क्यों ना की जाए। रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर FSSAI इन कंपनियों के जवाब से संतुष्ट नहीं हुई तो नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर जुर्माना लगाया जा सकता है या कुछ और सख्त कार्रवाई की जा सकती है।