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साप्ताहिक राशिफल: 15 से 21 जून तक सूर्य गोचर का आप पर क्या होगा असर?


15 जून से 21 जून का यह सप्ताह ग्रहों की एक बेहद महत्वपूर्ण हलचल के साथ शुरू हो रहा है। मिथुन राशि में सूर्य, बुध और शुक्र ग्रह की युति होगी, जिससे बेहद शुभ ‘बुधादित्य’ और ‘लक्ष्मी नारायण’ योग का निर्माण हो रहा है। सोमवार का दिन होने के कारण चंद्र देव की कृपा पूरे सप्ताह बनी रहेगी। अंक ज्योतिष के नजरिए से देखें तो सप्ताह के पहले दिन का मूलांक 6 बनता है, जो शुक्र देव का अंक है। यह मूलांक हमारे जीवन में प्रेम, ऐश्वर्य और भौतिक सुख-सुविधाओं को बढ़ाने वाला साबित होगा।

 

इस सप्ताह मंगल देव अपनी स्वराशि मेष में प्रवेश करेंगे, जिससे लोगों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। वहीं, गुरु बृहस्पति वृषभ राशि में बैठकर हमारी बुद्धि में स्थिरता लाएंगे। ग्रहों का यह ताना-बाना इस सप्ताह सभी 12 राशियों के लिए मिले-जुले लेकिन बेहद खास परिणाम लेकर आया है। यह समय नए लक्ष्यों को जमीन पर उतारने के लिए उत्तम है। आइए जानते हैं आपकी राशि के लिए यह सप्ताह कैसा रहेगा।

 

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राशिफल और उपाय

 

मेष राशि

 

ऑफिस में आपका प्रभाव बढ़ेगा। नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। आर्थिक स्थिति लगातार मजबूत रहेगी लेकिन सुख-सुविधाओं पर खर्च बढ़ सकता है। जीवनसाथी के साथ संबंध अच्छे होंगे।

क्या करें: हर दिन सुबह सूर्य देव को जल अर्पित करें।

क्या न करें: कोई भी बड़ा व्यापारिक निर्णय लेने से बचें।

 

वृषभ राशि

 

नौकरी में प्रमोशन या सैलरी बढ़ सकती है। व्यापारियों के लिए कोई नई डील फाइनल हो सकती है। आर्थिक रूप से यह सप्ताह बेहद मजबूत है। लव लाइफ में रोमांस बढ़ेगा। परिवार के साथ किसी मनोरंजक यात्रा पर जा सकते हैं।

क्या करें: शुक्रवार के दिन छोटी कन्या को सफेद मिठाई खिलाएं।

क्या न करें: किसी भी व्यक्ति पर पैसों के मामले में आंख मूंदकर भरोसा न करें।

 

मिथुन राशि

 

आपकी राशि में तीन ग्रहों का मिलन होगा, इस वजह से आपके हर काम तेज रफ्तार से पूरे होंगे। आमदनी अच्छी रहेगी। जीवनसाथी की भावनाओं का सम्मान करें। इस सप्ताह आपको आंखों में जलन या नींद न आने की समस्या परेशान कर सकती है।

क्या करें: बुधवार को गाय को हरा चारा या पालक खिलाएं।

क्या न करें: किसी के साथ बहसबाजी में न उलझें।

 

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कर्क राशि

 

नौकरीपेशा जातकों को काम के सिलसिले में विदेश जाना पड़ सकता है। इस सप्ताह धन खर्च ज्यादा होगा, जिससे बजट बिगड़ सकता है। भाई-बहनों का पूरा सहयोग मिलेगा। बच्चों की तरक्की से मन खुश होगा।

क्या करें: सोमवार को शिवलिंग पर जल चढ़ाएं।

क्या न करें: इस सप्ताह किसी को भी पैसा उधार देने की गलती न करें।

 

सिंह राशि

 

करियर में तरक्की के नए रास्ते खुलेंगे। बिजनेस करने वालों को इस सप्ताह बड़ा लाभ संभव है। आर्थिक स्थिति में जबरदस्त सुधार होगा। दोस्तों के साथ अच्छा समय बीतेगा।

क्या करें: रविवार के दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।

क्या न करें: अपने भीतर अहंकार की भावना को न पनपने दें।

 

कन्या राशि

 

ऑफिस में आपके काम की तारीफ होगी। बेरोजगारों को नई नौकरी के बेहतरीन अवसर मिल सकते हैं। इस सप्ताह जमीन या गाड़ी खरीदने के योग बन रहे हैं। माता-पिता के आशीर्वाद से कोई अटका काम पूरा होगा।

क्या करें: भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करें।

क्या न करें: किसी की पीठ पीछे बुराई न करें।

 

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तुला राशि

 

भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। धार्मिक या शैक्षणिक कार्यों से जुड़े लोगों के लिए समय बेहद शानदार है। आर्थिक स्थिति मिली-जुली रहेगी। जीवनसाथी के साथ किसी धार्मिक स्थल की यात्रा पर जा सकते हैं। प्रेम जीवन में आपसी समझ बढ़ेगी।

क्या करें: किसी जरूरतमंद व्यक्ति को काले चने का दान करें।

क्या न करें: दस्तावेजों पर बिना पढ़े साइन न करें।

 

वृश्चिक राशि

 

ऑफिस में काम का दबाव अधिक रहेगा। दुश्मनों से सावधान रहें, वे आपकी छवि बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं। धन हानि के संकेत हैं, इसलिए सट्टेबाजी या लॉटरी जैसे कामों से दूर रहें। जीवनसाथी के साथ छोटी-मोटी बातों पर अनबन हो सकती है।

क्या करें: हनुमान चालीसा का पाठ करें।

क्या न करें: इस सप्ताह किसी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।

 

धनु राशि

 

पार्टनरशिप में चल रहे व्यापार में बड़ा मुनाफा होने के योग हैं। नौकरी में नए प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारी मिल सकती है। इस सप्ताह सुख-सुविधाओं की चीजों पर धन खर्च करने में आनंद आएगा।

क्या करें: गुरुवार के दिन माथे पर हल्दी का तिलक लगाएं।

क्या न करें: दूसरों के मामलों में दखल देने से बचें।

 

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मकर राशि

 

नौकरी में आपके विरोधी परास्त होंगे। इस सप्ताह खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। कर्ज लेने या देने की स्थिति से पूरी तरह बचें। जीवनसाथी का पूरा सहयोग मिलेगा।

क्या करें: शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

क्या न करें: काम को कल पर टालने की आदत से बचें।

 

कुंभ राशि

 

विद्यार्थियों और मीडिया से जुड़े लोगों के लिए यह सप्ताह सफलता लेकर आया है। नई नौकरी के मौके मिलेंगे। शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड से लाभ हो सकता है। लव पार्टनर के साथ रोमांटिक समय बिताने का मौका मिलेगा।

क्या करें: शनिवार के दिन शनि चालीसा का पाठ करें।

क्या न करें: भावनाओं में आकर कोई फैसला न लें।

 

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मीन राशि

 

ऑफिस के कामकाज में बदलाव हो सकते हैं। प्रॉपर्टी से जुड़े बिजनेस को फायदा होने की उम्मीद है। सुख-साधनों पर खर्च होगा। हालांकि, अटका हुआ धन मिलने से आर्थिक संतुलन बना रहेगा।

क्या करें: गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा करें।

क्या न करें: अपने मन की बात किसी से भी शेयर न करें।

 

नोट: यह राशिफल ज्योतिषीय मान्यताओं के आधार पर बताया गया है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

‘हम पर लागू नहीं, हम आजाद देश’, ईरान से ट्रंप की डील को इजरायल ने किया खारिज


एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप ने एलान किया कि अब ईरान से उनकी डील हो गई है और अब हमले नहीं होंगे। पहली बार ईरान ने भी इसकी पुष्टि कर दी। सब ठीक लग ही रहा था कि इजरायल ने इसे मानने से ही इनकार कर दिया है। इजरायल ने दो टूक कहा है कि ट्रंप का यह समझौता उस पर लागू नहीं होता। ईरान ने कहा है कि जितनी बार उसने अंतरराष्ट्रीय दबाव में समझौता किया, हर बार उसने अपना खून बहाकर कीमत चुकाई है। इजरायल ने यह भी कहा है कि वह स्वतंत्र और संप्रभु देश है तो अमेरिका की बात उस पर लागू नहीं होती है।

 

इससे पहले एलान किया गया था कि 60 दिनों तक कोई भी हमला नहीं होगा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से खोल दिया जाएगा। यह कहा गया था कि 19 जून को जिनेवा में इस समझौते पर दस्तखत किए जाएंगे। इसी समझौते में यह भी कहा गया कि इजरायल बनाम हिज्बुल्लाह की जंग भी खत्म होगी। हालांकि, इजरायल अब इस पर राजी नहीं है। वहीं, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी अभी कोई समझौता नहीं हुआ है और इस पर अगले 60 दिनों में बातचीत होनी है।

 

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इजरायल ने क्या कहा?

इजरायल की ओर से उसके नेशनल सिक्योरिटी मंभी इतमार बेन-गवीर ने बयान जारी करके कहा है, ‘ट्रंप का समझौता हम पर लागू नहीं होता। इजरायल अमेरिका का हिस्सा नहीं है। हम एक आजाद और संप्रभु देश हैं। जितनी बार भी हम अंतरराष्ट्रीय दबाव में झुके हैं, हर बार हमारा खून बहा है और हमने इसकी कीमत चुकाई है। ओस्लो समझौते में यही हुआ, 2006 के लेबनान समझौते में यही हुआ और गाजा को लेकर हर बार यही हुआ और हमारे सामने धमाके होते रहे। हम कहना चाहते हैं कि हम अमेरिका को पसंद करते हैं और राष्ट्रपति ट्रंप के शुक्रगुजार हैं लेकिन इजरायल कोई बनाना रिपब्लिक नहीं है।’

 

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उन्होंने आगे कहा है, ‘मैं हर बार प्रधानमंत्री को यही कहता हूं और ऐतिहासिक मौकों पर हर बार बंदे कमरे में यही बात दोहराता हूं। ऐसे मौकों पर ऐतिहासिक फैसले लिए जाने चाहिए। हमने एकदम साफ किया है कि अगर लेबनान की तरफ से एक भी ड्रोन, UAV या मिसाइल हमला होगा तो इजरायल दहिया (लेबनान) पर हमला करेगा।’

 

दरअसल, अमेरिका अब चाहता है कि विवाद और ना बढ़े क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बार-बार बंद होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है और इसका असर अमेरिका पर भी पड़ने लगा है। उधर इजरायल का कहना है कि लेबनान समर्थित हिजुबुल्लाह हमेशा से उसके लिए नासूर बना हुआ है और अब वह इसका खात्मा करके ही रहेगा। ईरान बार-बार कह रहा है कि वह तभी कोई डील करेगा जब लेबनान पर हमले बंद हों। डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल की रजामंदी के बिना ही यह बात स्वीकार कर ली है कि लेबनान पर हमले नहीं होंगे। इसी को लेकर अब इजरायल भड़क गया है।

 

डीजल की कालाबाजारी कैसे रुकेगी? सरकार ने तय की खरीद सीमा


सरकार ने पेट्रोल पंपों से डीजल खरीदने को लेकर नए और सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब कोई भी गाड़ी वाला या ग्राहक एक दिन में किसी भी पेट्रोल पंप से 200 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं खरीद पाएगा। यह बड़ा फैसला सरकार ने इसलिए लिया है ताकि पेट्रोल पंपों पर डीजल की जमाखोरी को रोका जा सके और आम लोगों को ईंधन आसानी से मिलता रहे। साथ ही, इसका उद्देश्य सरकारी तेल कंपनियों को हो रहे नुकसान को कम करना भी है।  

 

सरकार के नए नोटिफिकेशन के अनुसार, अब पेट्रोल पंप डीलर किसी भी गाड़ी या ग्राहक को एक दिन में 200 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं दे सकेंगे। इसके साथ ही, पंप से खरीदे गए डीजल को दोबारा बेचने यानी रीसेल करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। पेट्रोल पंप चलाने वालों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे डीजल सिर्फ गाड़ी की टंकी में या ‘पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन’ (PESO) से मंजूर किए गए कंटेनर में ही डालें। यह आदेश तुरंत लागू कर दिया गया है और यह अभी अगले 3 महीने यानी 90 दिनों तक प्रभावी रहेगा।  

 

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बड़े खरीदारों के लिए नई व्यवस्था

मॉल, अस्पताल, बड़ी फैक्ट्रियां, ट्रैवल एजेंसियां और निजी बस चलाने वाले जैसे थोक खरीदार अब रिटेल पेट्रोल पंपों से तेल नहीं खरीद पाएंगे। सरकार ने इन सभी संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे अपनी जरूरत का डीजल सिर्फ अधिकृत ‘बल्क सेल पॉइंट्स’ यानी थोक बिक्री केंद्रों से ही लें। उन्हें पेट्रोल पंपों पर जाकर तेल लेने की इजाजत नहीं होगी।

 

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सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?

पेट्रोल पंपों पर डीजल का दाम और थोक में मिलने वाले डीजल के दाम में बहुत बड़ा अंतर है। उदाहरण के तौर पर, दिल्ली में रिटेल पंप पर डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर है जबकि थोक में यह 134.50 रुपये प्रति लीटर है। इसी कीमत के अंतर का फायदा उठाने के लिए कई औद्योगिक खरीदार अपने थोक स्रोतों के बजाय आम पेट्रोल पंपों पर जाकर तेल लेने लगे थे। इससे पेट्रोल पंपों पर अचानक तेल की कमी होने लगी और तेल कंपनियों को राजस्व का बहुत नुकसान होने लगा।  

 

अगर कोई व्यक्ति या संस्था इन नए नियमों को तोड़ती है या डीजल की जमाखोरी करती है, तो उन पर ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955’ के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह कदम तेल के गलत इस्तेमाल और डायवर्जन को रोकने के लिए बहुत जरूरी था।  

दौड़ के बहाने दोस्ती, भारत के शहरों में क्यों बढ़ा रनिंग क्लब्स का क्रेज?


आजकल बड़े शहरों में रहने वाले लोग जिम की चारदीवारी से बाहर निकलकर सड़कों और पार्कों में एक साथ दौड़ना पसंद कर रहे हैं। इस बदलाव के पीछे सिर्फ अपनी फिटनेस सुधारना ही मुख्य कारण नहीं है बल्कि यह बड़े शहरों में दोस्तों का नया नेटवर्क बनाने और अकेलापन दूर करने का एक बहुत अच्छा जरिया बन गया है। काम की भागदौड़ और मानसिक दबाव से बचने के लिए लोग सुबह जल्दी उठकर एक साथ दौड़ने का फैसला ले रहे हैं। जब लोग एक साथ दौड़ते हैं तो उनके बीच आपसी तालमेल और दोस्ती बहुत गहरी हो जाती है जो इस दौड़ को एक सामाजिक गतिविधि बना देती है। ‘स्वेट टुगेदर’ (Sweat Together) नाम की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में रनिंग कम्युनिटी के सदस्यों की संख्या अब 2.6 मिलियन तक पहुंच गई है।

 

भारत के प्रमुख शहरों में रनिंग क्लब्स की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। बेंगलुरु को भारत की ‘रनिंग कैपिटल’ माना जाता है जहां 150 से ज्यादा सक्रिय रनिंग ग्रुप्स हैं। दिल्ली और एनसीआर का इलाका भी इस मामले में बहुत आगे है जहां लगभग 120 बड़े रनिंग क्लब्स मौजूद हैं। इसी तरह मुंबई में भी 90 से ज्यादा ग्रुप्स काम कर रहे हैं।

 

फिल्टर कॉफी की ‘इंडिया फिटनेस इकोसिस्टम’ रिपोर्ट के मुताबिक, पुणे और हैदराबाद जैसे शहरों में भी पिछले कुछ सालों में रनिंग ग्रुप्स की संख्या में 35 प्रतिशत तक का उछाल आया है। ये आंकड़े साफ दिखाते हैं कि शहरों में रहने वाले लोग अब अकेले वर्कआउट करने के बजाय एक कम्युनिटी के साथ रहना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। बड़े इवेंट्स की बात करें तो, टाटा मुंबई मैराथन जैसे आयोजनों में अब 65,000 से अधिक लोग हिस्सा लेते हैं जबकि ‘गीक्स ऑन फीट’ के 2026 के आंकड़ों के अनुसार, बेंगलुरु के TCS वर्ल्ड 10K मैराथन में 16,000 से अधिक धावकों ने भाग लिया है।

 

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युवाओं की सेहत पर इसका अच्छा असर

आजकल की युवा पीढ़ी अपनी सेहत को लेकर पहले से कहीं ज्यादा जागरूक है। स्वास्थ्य जानकारों और रिपोर्ट्स के मुताबिक, नियमित रूप से रनिंग क्लब के साथ दौड़ने वाले युवाओं में दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा 30 प्रतिशत तक कम हो जाता है। ‘ई-पीक’ की रिपोर्ट के मुताबिक, 44 प्रतिशत धावकों ने माना है कि दौड़ने से उनकी मानसिक सेहत में वैसा ही सुधार हुआ है जैसा एंटी-डिप्रेसेंट दवाओं से होता है। दौड़ने के दौरान शरीर में ‘हैप्पी हार्मोन्स’ निकलते हैं जो पूरे दिन की थकान को दूर रखते हैं और एकाग्रता को बढ़ाते हैं। एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि रनिंग क्लब में आने वाले 70 प्रतिशत लोग यह मानते हैं कि ग्रुप में दौड़ने से उनका मानसिक तनाव काफी कम हुआ है। साथ ही 89 प्रतिशत धावकों ने माना है कि नियमित दौड़ने से वे पहले के मुकाबले ज्यादा खुश रहते हैं।

कौन है इसमें शामिल?

ज्यादातर रनिंग क्लब्स को वे लोग होस्ट करते हैं जिन्हें दौड़ने का बहुत ज्यादा शौक है। इन क्लब्स को चलाने के लिए अक्सर किसी बड़ी स्पोर्ट्स कंपनी से मदद ली जाती है या फिर सभी सदस्य मिलकर थोड़े पैसे जमा करते हैं ताकि पानी के स्टॉल और फर्स्ट एड किट जैसी चीजें आसानी से मिल सकें। इन क्लब्स का नेतृत्व अक्सर ऐसे लोग करते हैं जो फिटनेस कोच हैं या पुराने खिलाड़ी रहे हैं। जो लोग इन क्लब्स में शामिल हो रहे हैं उनमें 22 से 40 साल की उम्र के ऑफिस में काम करने वाले लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है। खास बात यह है कि ‘गीक्स ऑन फीट’ के 2026 के डेटा के मुताबिक, TCS वर्ल्ड 10K बेंगलुरु मैराथन में 25 से 30 साल की उम्र के युवाओं का ग्रुप सबसे बड़ा था जो यह दिखाता है कि अब युवा पीढ़ी इसे अपना रही है।

 

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करियर का नया रास्ता

रनिंग क्लब अब केवल दौड़ने की जगह ही नहीं रह गए हैं बल्कि ये एक अनौपचारिक नेटवर्किंग हब भी बन गए हैं। रेड लैब रिपोर्ट के मुताबिक, लोग अब शराब और बार के बजाय फिटनेस ग्रुप्स में सोशल नेटवर्किंग करना पसंद कर रहे हैं। ऑफिस की मीटिंग्स और माहौल से हटकर यहां होने वाली बातचीत ज्यादा सीधी और ईमानदार होती है। अब ये क्लब महीने में बड़े इवेंट्स भी आयोजित करते हैं जिसमें 500 से 1,000 लोग एक साथ शामिल होते हैं जिससे यह पूरी प्रक्रिया एक बहुत बड़ी सोशल कम्युनिटी बन गई है।

मिथुन संक्रांति पर ओडिशा में क्यों मनाया जाता है रज पर्व? जानिए पर्व की परंपरा


इस साल 15 जून को ज्योतिषीय गणना के अनुसार मिथुन संक्रांति है। इस दिन सूर्य देव मिथुन राशि में गोचर करेंगे। इसी अवसर पर ओडिशा में रज पर्व मनाया जाएगा। यह पर्व तीन दिनों तक मनाया जाता है। इस साल यह पर्व 14 जून से लेकर 16 जून तक मनाया जाएगा।जहां एक तरफ मिथुन संक्रांति के दिन सूर्य देव को जल अर्पित करने की परंपरा है ताकि उनकी कृपा भक्तों पर बनी रहे, वहीं ओडिशा में इस दिन धरती मां की आराधना की जाती है। रज त्योहार नारीत्व से जुड़ी परंपराओं का उत्सव मनाया जाता है।

 

रज त्योहार में ओडिशा के लोग धरती मां को विश्राम देते हैं। इन तीन दिनों तक किसान खेती-बाड़ी का काम नहीं करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पर्व में धरती मां की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। इसी कारण लोग इन दिनों धरती की पूजा-अर्चना करते हैं। अब सवाल उठता है कि इस पर्व में धरती मां को क्यों आराम दिया जाता है?

 

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रज पर्व में धरती मां को क्यों दिया जाता है विश्राम?

 

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इन तीन दिनों में भूदेवी मां के रजस्वला होने का प्रतीकात्मक रूप से सम्मान किया जाता है। माना जाता है कि धरती दुनिया के सभी जीवों का पालन-पोषण करती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जिस प्रकार महिलाओं को मासिक धर्म होता है, उसी प्रकार रज त्योहार के दौरान धरती मां भी रजस्वला होती हैं। इसी वजह से तीन दिनों तक खेती नहीं की जाती, ताकि धरती मां को विश्राम मिल सके।

 

रज पर्व के दौरान ओडिशा की महिलाओं को भी घर के कामकाज से राहत दी जाती है ताकि वे आराम कर सकें। इन तीन दिनों तक सभी लोग मिलकर उत्सव मनाते हैं। कई गांवों में झूले लगाए जाते हैं और महिलाएं झूला झूलती हैं। इसके अलावा लोग अपने-अपने घरों में स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लेते हैं। इस त्योहार में खास तौर पर पोड़ो पीठा और चाकुली पीठा बनाया और खाया जाता है।

 

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मानसून का प्रतीक

 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मिथुन संक्रांति को मानसून के आगमन का प्रतीक भी माना जाता है। चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बाद बारिश का मौसम शुरू होता है। वर्षा धरती को भिगोकर नई फसल के लिए तैयार करती है। इसी वजह से किसान अपने खेतों को तीन दिनों तक आराम देते हैं ताकि भूमि नई फसल के लिए तैयार हो सके।

 

नोट: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है। इसकी सत्यता और सटीकता की हम पुष्टि नहीं करते हैं।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद ट्रंप से पहली बार फ्रांस में मिलेंगे पीएम मोदी


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फ्रांस में मुलाकात करेंगे। ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह दोनों नेताओं की पहली मुलाकात होगी। डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा शांति बोर्ड में शामिल होने और मिस्र में आयोजित इजरायल-हमास संघर्ष विराम समझौते का न्योता भेजा था, लेकिन पीएम मोदी ने इन दोनों कार्यक्रम से दूरी बना ली थी। 

 

पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की आखिरी मुलाकात फरवरी 2025 में हुई थी। पिछले एक साल में डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार भारत विरोधी बयान देकर मोदी सरकार को असहज कर दिया था। टैरिफ मामले में दोनों देशों के बीच तनाव और भी चरम पर पहुंच गया था।

 

 

 

फ्रांस में होगी भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय वार्ता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इसके बाद जी-7 नेताओं, जी-7 आउटरीच सहयोगियों और ग्लोबल टेक सीईओ के साथ इनोवेशन और एआई पर वर्किंग लंच करेंगे। फ्रांस से रवाना होने से पहले डोनाल्ड ट्रंप फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों के साथ वर्साय के महल में डिनर भी करेंगे। 

 

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माना जा रहा है कि फ्रांस में मुलाकात के दौरान भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर चर्चा होगी। अमेरिका अधिकारियों ने भी इसकी संभावना जताई है। उनका कहना है कि हमने इस साल की शुरुआत में एक जॉइंट फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर साइन किया था। पिछले एक साल से हम भारत के साथ काफी गहन बातचीत कर रहे हैं। कुछ हफ्ते पहले अमेरिका की एक टीम भारत गई थी। हमारी उनसे अक्सर बातचीत होती रहती है।

किन-किन नेताओं के साथ होगी ट्रंप की बैठक?

अमेरिका अधिकारियों के मुताबिक सोमवार सुबह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस से फ्रांस के एवियन के लिए रवाना होंगे। दोपहर तक उनके पहुंचने की उम्मीद है। जी-7 समिट में डोनाल्ड ट्रंप अपने सहयोगियों के साथ आर्थिक विकास, सप्लाई चेन की मजबूती, अवैध आव्रजन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

 

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सोमवार की शाम फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। मंगलवार को जी-7 देशों के नेताओं के सात औपचारिक स्वागत और वर्किंग डिनर होगा। इसी दिन ट्रंप यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी मुलाकात करेंगे। कतर के अमीर और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति के साथ भी द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। दोपहर में जी-7 और मध्य पूर्व के नेताओं के साथ वर्किंग लंच आयोजित किया जाएगा। मंगलवार शाम को डोनाल्ड ट्रंप को एक सोशल डिनर और सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल होना है। 

बाहर निकलना है? संभलकर निकलें, आंधी, तूफान और बारिश से पड़ सकता है पाला


देश के कई राज्यों में हल्की बारिश और तेज हवाएं चल रहीं हैं। मौसम में आए अचानक बदलाव की वजह से लोगों को बड़ी राहत मिली है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उत्तर-पश्चिम भारत में रविवार को बारिश और गरज-चमक के साथ तेज हवाओं का दौर जारी रहने वाला है। 

हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के कई इलाकों में गरज-चमक के साथ 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाएं चल सकती हैं। दिल्ली में भी हल्की बारिश हो सकती है, तेज गर्मी से राहत जारी रहेगी।

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कहां लू पड़ सकता है?

मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में अगले दो दिनों तक कुछ जगहों पर लू पड़ने की संभावना है। विदर्भ में भी आज से 15 जून तक लू का असर रह सकता है। मौसम विभाग ने इन इलाकों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

किन राज्यों में मानसून की दस्तक?

दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है। अगले 2-3 दिनों में कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बाकी हिस्सों में मानसून पहुंचने की संभावना है। पिछले 24 घंटों में असम और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में भारी से बहुत भारी बारिश हुई। केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में भी कई जगहों पर अच्छी बारिश दर्ज की गई।

दिल्ली-NCR में कैसा रहेगा मौसम?

दिल्ली और आसपास के इलाकों में आज आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। दोपहर या शाम के समय हल्की बारिश के साथ गरज-चमक और 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज हवाएं चल सकती हैं। अधिकतम तापमान 36-38 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की उम्मीद है। 14 और 15 जून को भी गरज-चमक की संभावना बनी रहेगी, जबकि 16 जून को तापमान थोड़ा बढ़कर 39-41 डिग्री तक जा सकता है।

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किस राज्य में कैसा रहेगा मौसम?

पूर्वोत्तर भारत, ओडिशा, बिहार और झारखंड में अगले कई दिनों तक भारी बारिश हो सकती है। कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश की चेतावनी भी जारी की गई है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में भी गरज-चमक के साथ तेज हवाएं और छिटपुट बारिश की संभावना है।
केरल, तटीय कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में अच्छी बारिश जारी रहेगी।

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मौसम विभाग ने क्या चेतावनी दी है?

मछुआरों को 18 जून तक समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के कुछ हिस्सों में ज्यादा खतरा है। तेज हवाओं और गरज-चमक से पेड़ गिरने, बिजली के खंभों को नुकसान और फसलों को खतरा हो सकता है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील है कि मौसम अपडेट चेक करते रहें, खुली जगहों पर न जाएं, पेड़ों के नीचे आश्रय न लें और बिजली के सामान को अनप्लग रखें। भारी बारिश वाले इलाकों में जलभराव और यातायात बाधित होने की आशंका है। 

गर्मियों में गन्ने का जूस पीना किन लोगों के लिए खतरनाक? डाइटिशियन से जानिए


गर्मियों के मौसम में लोग सबसे ज्यादा गन्ने का जूस पीते हैं। इस मौसम में आपको हर चौराहे पर गन्ने का जूस मिल जाएगा। शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए यह फायदेमंद भी होता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, फास्फोरस, पोटैशियम, आयरन, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर के लिए फायदेमंद है।

 

इसके अलावा गन्ने का जूस शरीर को ठंडा भी रखता है। ऐसे में लोग इस जूस का अधिक सेवन कर लेते हैं जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ICMR ने हाल ही में बताया था कि गर्मी में गन्ने का जूस अधिक मात्रा में नहीं पीना चाहिए। एक ग्लास गन्ने के जूस में 30 ग्राम तक चीनी होती है जो सेहत के लिए नुकसानदायक है। इस बारे में हमने न्यूट्रीप्लस की डायरेक्टर और सीनियर क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट डॉक्टर अंजलि फाटक से बात की।

 

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गन्ने का जूस सेहत के लिए कैसे नुकसानदायक है? 

डॉक्टर अंजलि फाटक ने बताया कि गन्ने के जूस में प्राकृतिक शुगर होता है। इसमें 70% पानी होता है जो शरीर को हाइड्रेटेड रखने का काम करता है। इसके अलावा जरूर मिनरल्स पाए जाते हैं। साथ ही इलेक्ट्रोलाइट को बैलेंस करता है। यह जूस लिवर के लिए बहुत फायदेमंद है। इसके कई फायदे हैं तो कुछ नुकसान भी हैं।

 

शुगर को बढ़ाता है- डायबिटीज और प्री डायबिटीज वाले लोगों को गन्ने का जूस पीने से मना किया जाता है। अगर वे लोग इस जूस को पीते हैं तो उनका शुगर लेवल बढ़ जाएगा। अगर वे गन्ने का जूस पीना चाहते हैं तो खाने के साथ लें। खाली पेट सुबह या शाम के समय में गन्ने का जूस न पिएं।

 

वजन बढ़ता– अगर कोई व्यक्ति वजन घटाना चाहता है तो उसे गन्ने का जूस नहीं पीना चाहिए क्योंकि इसमें शुगर की मात्रा ज्यादा है। इस वजह से इसमें कैलोरी की मात्रा भी ज्यादा होती है। 

 

गट हेल्थ पर पड़ता है असर- गन्ने का जूस लोग कहीं से भी पी लेते हैं। अगर साफ-सफाई नहीं है तो इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। इस वजह से दस्त और पेट दर्द की समस्या भी हो सकती है। गन्ने का जूस पीते समय साफ-सफाई का ध्यान रखें।

 

अगर किसी व्यक्ति को किडनी या लिवर से जुड़ी समस्या है तो डॉक्टर की सलाह पर गन्ने का जूस पिएं। जिन लोगों का लिवर स्वस्थ है उनके लिए गन्ने का जूस फायदेमंद है।

 

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इन बातों का ध्यान रखें

  • हमेशा ताजा गन्ने का जूस पिएं।
  • गन्ने के जूस में बर्फ न डलवाएं।
  • एक दिन में एक ग्लास से ज्यादा जूस न पिएं।
  • आप गन्ने के जूस को नींबू या अदरक के साथ लें सकते हैं। ये आपके पाचन तंत्र के लिए अच्छा है।

जहां ध्यान में रहते हैं शिव, वहां महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी क्यों?

दिनेश जस्पा, लाहौल: हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी में करीब 13,124 फुट की ऊंचाई पर स्थित नीलकंठ झील, आठ महीने तक बर्फ की मोटी चादर से ढकी रही। ऐसी मान्यता है कि इस अवधि तक भगवान शिव, अपने ध्यान लीला में मग्न रहते हैं। अब भक्तों के लिए झील का द्वार खुल गया है। बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचकर झील में स्नान कर रहे हैं। 

झील खुलने के साथ ही भक्त वहां पहुंच रहे हैं, लोहे की छड़ों से जमी बर्फ तोड़ रहे हैं और पानी में उतरकर स्नान कर रहे हैं। भक्तों का शरीर ठंड से अकड़ रहा है लेकिन शून्य से नीचे के तापमान में भी भक्त डुबकी लगाने से नहीं चूक रहे हैं। झील के आसपास लगातार ‘ओम नम: शिवाय’ का जाप हो रहा है। आने वाले भक्त ओम नम शिवाय और हर हर महादेव का जाप कर रहे हैं।

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मंदिर कैसे पहुंचते हैं भक्त?

झील तक पहुंचने से पहले भक्तों को नंगे पांव 300 मीटर की यात्रा करनी पड़ती है। बर्फ और भीषण सर्दी की वजह से उनके पांव ठंडे पड़ गए लेकिन न तो जयकार रुके न ही भक्त आगे बढ़ने से डगे। वहां मौजूद भक्तों ने बताया कि भगवान तक पहुंचने के लिए खुद को गलाना पड़ता है।

कैसे पहुंचे नीलकंठ?

नीलकंठ झील तक नैनगार तक गाड़ी से पहुंचा जा सकता है, उसके बाद पैदल यात्रा करनी पड़ती है। पुजारी बताते हैं कि धार्मिक मान्यताओं के कारण महिलाएं इस झील की ओर नहीं जाती हैं। 

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कब बंद होगा झील का द्वार?

अक्टूबर में फिर से बर्फबारी शुरू होने पर झील का द्वार बंद हो जाएगा। भक्त इस यात्रा में सिर्फ दर्शन भर नहीं करते, बल्कि आठ महीने की प्रतीक्षा, बर्फीली ठंड और कड़ी मेहनत के बाद खुद को भोलेनाथ को समर्पित करते हैं।

 

महिलाओं के जाने पर क्यों पाबंदी क्यों है?

हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी में स्थित पवित्र नीलकंठ महादेव मंदिर और झील में महिलाओं के जाने पर पाबंदी के पीछे धार्मिक मान्यताएं और पौराणिक कथाएं हैं। लोक मान्यताओं के अनुसार, इस नीली झील के पानी का रंग भगवान शिव के विषपान से जुड़ा माना जाता है और इस स्थान को बेहद पवित्र एवं अलौकिक माना गया है। 

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स्थानीय परंपराओं कहती हैं कि महिलाओं को मासिक धर्म से जुड़ी शुचिता के कड़े पारंपरिक नियमों के कारण इस दुर्गम और पवित्र स्थान से दूर रखा जाता है। एक पौराणिक मान्यता यह भी है कि यहां की स्थानीय देवी महिलाओं के आगमन से रुष्ट हो सकती हैं, जिसके कारण घाटी में अनिष्ट या प्राकृतिक आपदा आने का भय रहता है। यही वजह है कि सदियों पुरानी इस धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का पालन करते हुए आज भी महिलाओं का वहां जाना वर्जित है।

पहले किडनैप किया, फिर रेप…, लंदन में भारतीय को 34 साल की सजा


ब्रिटेन के लंदन में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक कोर्ट ने भारतीय मूल के नागरिक को गंभीर आरोपों में 34 साल की सजा सुनाई है। भारतीय मूल के इस नागरिक पर एक महिला का अपहरण कर उसके साथ रेप करने का आरोप था। पुलिस के अनुसार, आरोपी महिला को थाईलैंड से लंदन लेकर आया था। लंदन में उसका अपहरण किया गया और फिर उसके साथ रेप किया गया। इस घटना के बाद महिला गहरे सदमे में चली गई थी, जिसके कारण कई दिन बीत जाने के बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

 

यह मामला लंदन के आइलवर्थ क्राउन कोर्ट में चल रहा था, जहां फरवरी में आरोपी गगनदीप सिंह को दोषी पाया गया था। इसके बाद 12 जून को कोर्ट ने गगनदीप को 34 साल की सजा सुनाई। बताया गया कि गगनदीप ने पीड़िता को लंदन बुलाया था और उसके वहां पहुंचने के बाद उसे जबरन एक घर में कैद करके रखा था। आरोपी ने न सिर्फ उसके साथ रेप किया बल्कि उसे मानसिक रूप से भी प्रताड़ित किया।

 

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क्या है पूरा मामला?

 

पीड़िता के मुताबिक, गगनदीप सिंह ने जून 2024 में उसे ब्रिटेन आने के लिए कहा था। इस दौरान गगनदीप ने उससे कहा था कि वह उसे सूटकेस में छिपाकर ले जाएगा। यह सुनकर पीड़िता को शक हुआ था, जिसके बाद वह अकेले ही लंदन पहुंची थी। जब पीड़िता बर्मिंघम हवाई अड्डे पर पहुंची, तो कुछ नकाबपोश लोगों ने उसका अपहरण कर लिया।

 

गगनदीप पीड़िता को लंदन के हैनवेल स्थित एक घर में ले गया, जहां उसके साथ रेप किया गया। विरोध करने पर आरोपी ने उसे कई बार घूंसे मारे और उसके कपड़े भी जला दिए। साथ ही उसे धमकियां भी दी गईं। बाद में उसे जाने दिया गया। इसके बाद हिम्मत जुटाकर पीड़िता ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।

 

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इस पर पुलिस ने क्या कहा?

 

इस मामले पर डिटेक्टिव कॉन्स्टेबल सीतारा अब्दुल ने कहा कि पीड़िता ने जिस प्रकार की क्रूरता का सामना किया, उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसी वजह से वह पुलिस में शिकायत दर्ज कराने से डर रही थी। हालांकि, पीड़िता की मां ने उसका पूरा साथ दिया, जिसके कारण वह अपनी आपबीती पुलिस को बता पाई।

 

पीड़िता ने घटना के बाद कहा, ‘मैं कभी पुलिस को इस घटना के बारे में नहीं बताना चाहती थी, क्योंकि वह मेरे लिए बेहद डरावना अनुभव था। उसे याद करके भी मैं डर जाती थी। मुझे लगता था कि अगर मैं इस घटना के बारे में बताऊंगी, तो खुद को और अपने आसपास के लोगों को खतरे में डाल सकती हूं।’ मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने इस मामले की गंभीरता से जांच की, जिसके बाद आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की गई।