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14 या 15 अगस्त कब है? मुहूर्त और व्रत नियम जानें


सनातन धर्म में Hariyali Teej को बेहद खास पर्व माना जाता है। इस पर्व में लाखों महिलाएं अपने पति और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखती हैं। इसके साथ ही महिलाएं अपने पति के साथ मिलकर महादेव की पूजा करती हैं। वहीं, अविवाहित लड़कियां भी व्रत रखती हैं ताकि उन्हें एक अच्छा पति मिले। धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस पर्व पर शादीशुदा महिलाएं सोलह शृंगार करती हैं, साथ ही हरी चूड़ियां पहनती हैं।

 

हरियाली तीज में सिर्फ सुखी जीवन और समृद्धि की कामना नहीं की जाती, बल्कि इस पर्व में मानसून के आगमन की खुशी भी मनाई जाती है। इसी वजह से कई सुहागन महिलाएं सोलह शृंगार करने के बाद झूला झूलती हैं। साथ ही कई महिलाएं अपनी लोकभाषा में गीत भी गाती हैं। अब सवाल उठता है कि इस साल हरियाली तीज कब मनाई जाएगी? आइए जानते हैं।

 

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Hariyali Teej 2026 Date: कब है हरियाली तीज?

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल 14 अगस्त की शाम 6 बजकर 46 मिनट पर हरियाली तीज की तिथि शुरू हो रही है, जो 15 अगस्त की शाम 5 बजकर 28 मिनट पर खत्म होगी। इस पर्व की उदया तिथि 15 अगस्त है। इसी वजह से 15 अगस्त को ही हरियाली तीज मनाना चाहिए। हरियाली तीज का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:50 से 05:35 तक रहेगा। इस समय जागकर भक्तों को पूजा-पाठ करनी चाहिए।

पूजा की विधि

इस पर्व में विशेष रूप से भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा की जाती है। साथ ही भक्तों को भगवान शिव के पूरे परिवार की भी पूजा करनी चाहिए। पूजा के दौरान भक्तों को शिवलिंग पर जलाभिषेक करना चाहिए। यह जलाभिषेक सिर्फ जल और कच्चे दूध से ही नहीं, बल्कि गंगाजल से भी करना चाहिए।

 

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पूजा के दौरान भगवान शिव और मां पार्वती को वस्त्र अर्पित करें। साथ ही मां पार्वती को सोलह शृंगार का सामान चढ़ाएं। इसके साथ मिठाई और फल भी अर्पित करें। पूजा के अंत में हरियाली तीज की व्रत कथा का पाठ करें। इसके बाद प्रेम भाव से आरती करें।

हरियाली तीज के व्रत के नियम

  1. हरियाली तीज के पर्व पर निर्जला व्रत रखें। हालांकि, आप अपने स्वास्थ्य के अनुसार फलाहारी व्रत भी रख सकते हैं।
  2. जो व्यक्ति व्रत रखता है, उसे सुबह पूजा करने से पहले व्रत का संकल्प लेना चाहिए, वरना व्रत अधूरा माना जाता है।
  3. व्रत रखने वाले भक्तों को व्रत कथा पढ़नी या सुननी चाहिए, वरना व्रत अधूरा माना जाता है।
  4. इस दिन सुहागन महिलाओं को सोलह शृंगार करना चाहिए। खासतौर पर हरे रंग की चूड़ियां पहनें और हरे रंग की साड़ी या सूट धारण करें।
  5. हरियाली तीज का व्रत रखने वाली महिलाओं को रात के समय सोना नहीं चाहिए। साथ ही रात में जागरण करना चाहिए।

 

नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

 

डोनाल्ड ट्रंप का गाजा प्लान, विवाद सुलझाने की जगह इजरायल को उलझा क्यों रहा है?


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक एलान, इजरायल के लिए मुसीबत बनता नजर आ रहा है। उन्होंने कुछ दिनों पहले दावा किया था कि हमास और गाजा के सभी सशस्त्र समूह पूरी तरह से हथियार छोड़ने के लिए तैयार हो गए हैं। उन्होंने दावा किया कि हथियार छोड़ने के साथ ही इजरायली सेना गाजा से पीछे हटेगी और एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल नई फिलिस्तीनी पुलिस के साथ गाजा की सुरक्षा संभालेगा।

डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ऐतिहासिक समझौता बताया है लेकिन हमास ने साफ कहा है कि यह समझौता एक पैकेज है। हमास के वरिष्ठ नेता गाजी हमाद ने कई बार दोहराया है कि उनका संगठन, तब तक हथियार छोड़ने के लिए तैयार नहीं है, जब इजरायल ‘येलो लाइन’ से पीछे नहीं हटता है। 

येलो लाइन, गाजा पट्टी में इजरायली सेना (IDF) की ओर से बनाई गई एक नई सुरक्षा सीमा है।  यह इजरायल के कब्जे वाले इलाकों को बाकी गाजा से अलग करती है। अभी यह एक बफर जोन के तौर पर काम कर रही है, जिसे लेकर हमास ऐतराज जता रहा है।

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गाजी हमाद, सीनियर हमास नेता:-
हम हथियार तब तक नहीं छोड़ेंगे, जब तक इजरायल युद्ध रोक नहीं देता, अपने सैनिकों को ‘येलो लाइन’ तक पीछे नहीं खींच लेता, हत्याएं बंद नहीं करता और भरपूर मानवीय मदद नहीं आने देता।

क्यों ट्रंप का प्लान इजरायल को फंसा देगा?

हमास ने अमेरिका को साफ कह दिया है कि कोई भी भारी हथियार नष्ट नहीं होंगे, बल्कि उन्हें नेशनल कमेटी के अधीन रखा जाएगा। एक बार यह शर्त भी मान लिया जाए लेकिन हमास जोर दे रहा है कि एक आजाद फिलिस्तीनी राज्य भी बनना चाहिए। इजरायल को यह मंजूर नहीं है। इजरायल, हमास के साथ कोई भी समझौता नहीं चाहता है।

इजरायल को फंसा रहे हैं ट्रप?

इजरायल की तरफ से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू चुप हैं। लेकिन इजरायल के दक्षिणपंथी मंत्री इस समझौते का विरोध कर रहे हैं। इजरायली अधिकारियों का कहना है कि पहले हमास को पूरी तरह हथियार खत्म करने होंगे, उसके बाद ही कोई वापसी हो सकती है।

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इजरायल क्या अमेरिकी शर्त मानेगा?

इजरायल ने रफाह में मोरक्को और युगांडा के 200 सैनिकों वाले एक पायलट अंतरराष्ट्रीय बल को भेजने की मंजूरी दी है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि यह शर्तों पर आधारित समझौता है। एक चरण पूरा होगा, तभी अगले चरण पर बात होगी। विस्तृत योजना दो हफ्ते में जारी हो सकती है। गाजा के लोग उम्मीद और डर दोनों महसूस कर रहे हैं। बीते साल अक्टूबर में हुए सीजफायर के बाद भी हिंसा जारी रही और गाजा में स्थिति बेहद खराब है।  

अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप की अगुवाई वाले समझौते भरोसे के काबिल कम होते हैं। ईरान के साथ उन्होंने संघर्ष विराम समझौता किया था, जिसे वह कब का तोड़ चुके हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज आज भी टकराव का केंद्र बना हुआ है। हर दिन किसी न किसी जहाज पर हमला हो रहा है। अब देखना होगा कि बार-बार अपने किए वादों से पलटने वाले डोनाल्ड ट्रंप, इस समझौते को लेकर कितने गंभीर हैं, यह नया समझौता कितना टिकता है। अगर इजरायल, अमेरिका की बात मानकर पीछे हटता गया तो एक बार फिर अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में ही इजरायली डिफेंस फोर्स घिर सकती है।

साइकिल खरीद में 90 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप, AAP ने दिल्ली सरकार को घेरा


आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली सरकार पर स्कूली छात्राओं के लिए साइकिल खरीद में करीब 90 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया है। पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि साइकिल खरीद के लिए जारी किए गए टेंडर की शर्तों में जानबूझकर बदलाव कर एक पहले से तय कंपनी को फायदा पहुंचाया गया। इन आरोपों के बाद दिल्ली की राजनीति में नया बवाल शुरू हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है।  

 

सौरभ भारद्वाज ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हाल ही में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विनोद नगर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में कक्षा 9 की छात्राओं को साइकिल बांटी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इन्हीं साइकिलों की खरीद प्रक्रिया में बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुई हैं और सरकार ने बाजार कीमत से काफी अधिक दाम पर साइकिलें खरीदीं। 

क्या आरोप लगाए?

सौरव भारद्वाज ने कहा, ‘दिल्ली सरकार के 650 करोड़ के स्वास्थ्य घोटाले के बाद एक और घोटाले का आरोप लग रहा है कि लड़कियों को बांटी गई साईकिलों में बड़ा घोटाला हुआ है। मुख्यमंत्री ने 2 दिन पहले विनोद नगर में साइकिल बांटी। उन साइकिलों की खरीद में बड़े घोटाले के आरोप लग रहे हैं। 650 करोड़ के घोटाले में ACB के आरोप थे कि टेंडर को टेलर किया गया। वही आरोप इन साइकिल खरीद में भी लगे हैं।’

 

सौरव भारद्वाज के मुताबिक, कई कंपनियों ने इस मामले में मुख्य सतर्कता आयोग (CVC), उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को लिखित शिकायत भेजी है। शिकायतों में कहा गया है कि टेंडर की शर्तें इस तरह बनाई गईं कि केवल चुनिंदा कंपनियां ही पात्र हो सकें। सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। 

मंहगे दाम पर साइकिल खरीद का आरोप

सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि एसके बाइक्स सहित कुछ कंपनियों ने शिकायत में कहा है कि टेंडर में जिन स्पेसिफिकेशन वाली माउंटेन टेरेन (MTB) साइकिलों की मांग की गई है, वही साइकिल बाजार में करीब 4,100 रुपये में उपलब्ध है। उनका आरोप है कि इसके बावजूद टेंडर में प्रति साइकिल कीमत 6,923 रुपये तय की गई और बाद में लगभग 6,957 रुपये प्रति साइकिल की दर से खरीद की गई।

 

सौरभ भारद्वाज ने अपने दावों को मजबूत करने के लिए कंपनी के पिछले रिकॉर्ड को भी शेयर किया। उन्होंने कहा कि संबंधित कंपनी पहले से राजस्थान, मध्य प्रदेश और असम जैसे राज्यों में इसी प्रकार की साइकिलें लगभग 4,100 रुपये प्रति साइकिल की दर से उपलब्ध करा चुकी है। ऐसे में दिल्ली में कहीं अधिक कीमत पर खरीद किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। 

शर्तों में बदलाव का आरोप

आम आदमी पार्टी का आरोप है कि दिल्ली सरकार ने 1.30 लाख साइकिलों की खरीद के लिए टेंडर जारी किया था। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यदि टेंडर का कुल मूल्य लगभग 90 करोड़ रुपये था, तो सामान्य नियमों के अनुसार इस प्रक्रिया में भाग लेने वाली कंपनियों के लिए टर्नओवर की सीमा करीब 180 करोड़ रुपये तक होनी चाहिए थी। लेकिन इसे बढ़ाकर 360 करोड़ रुपये कर दिया गया, जिससे कई कंपनियां अपने आप ही इस टेंडर प्रक्रिया से बाहर हो गईं। सरकार पर आरोप लगया गया है कि सरकार ने इस टेंडर के लिए प्री-बिड मीटिंग भी आयोजति नहीं की थी। आम आदमी पार्टी ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और पूरे टेंडर की प्रक्रिया सार्वजनिक करने की मांग की है। 

गाली देने वाला बॉस अच्छा लीडर होता है या नहीं? रिसर्च में हो गया खुलासा


कुछ लोगों की बातचीत में गाली गलौज आम बात होती है। वर्कप्लेस पर भी ऐसे लोग मिल जाते हैं और कई बार वे लीडर की भूमिका में होते हैं। क्या गाली देने वाला बॉस बेहतर टीम लीडर हो सकता है? सुनन में यह बात अजीब लग सकती है लेकिन एक नई स्टडी के मुताबिक इसका जवाब हर किसी के लिए एक जैसा नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि सामने वाला व्यक्ति और उसकी टीम उस भाषा को किस तरह लेती है।

 

शायद आपने भी ऐसे टीम लीडर या मैनेजर के साथ काम किया होगा जो कर्मचारियों का हौसला बढ़ाते समय बीच-बीच में गाली देने से परहेज नहीं करता हो या अपनी बात को स्पष्ट तरीके से रखने के लिए अक्सर अपशब्दों का सहारा लेते हैं। हालांकि, ऐसे व्यवहार पर सहकर्मियों की प्रतिक्रिया एक जैसी नहीं होती। कुछ लोगों को यह सहज और मजेदार लग सकता है, कुछ इसे नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कई लोग इसे खराब नेतृत्व, गैर-पेशेवर रवैया और पूरी तरह अनावश्यक मानते हैं।

 

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क्या कहती है स्टडी?

हमारे अध्ययन से पता चलता है कि गाली देने वाले बॉस के प्रति लोगों की राय केवल इस बात पर निर्भर नहीं करती कि उन्होंने क्या कहा, बल्कि इस पर भी निर्भर करता है कि सुनने वाला कौन है और वह किस देश या सामाजिक परिवेश में रहता है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि नेतृत्व करने का कोई एक ऐसा तरीका नहीं है, जिसे हर जगह सही माना जाए। फिर भी, कुल मिलाकर जिन कर्मचारियों के वरिष्ठ अधिकारी अक्सर गाली-गलौज करते थे, वे उनसे कम संतुष्ट पाए गए।

 

इसलिए यदि आप सोच रहे हैं कि बैठकों में गाली-गलौज करना एक प्रभावी प्रबंधन रणनीति हो सकती है, तो बेहतर होगा कि इससे बचा जाए। हालांकि, हमारे अध्ययन में शामिल 19 देशों के 5,660 कर्मचारियों में कुछ लोगों की राय बिल्कुल अलग थी। 

किन लोगों को पसंद है गाली देने वाला लीडर?

स्वयं में साइकोपैथिक और मैकियावेलियन (भावनाओं या सहानुभूति के बजाय अपने लाभ को प्राथमिकता देने वाले) व्यक्तित्व के अधिक लक्षण बताने वाले प्रतिभागियों ने बताया कि जैसे-जैसे उनके बॉस की भाषा में गाली-गलौज बढ़ती गई, वैसे-वैसे उनके प्रति उनकी संतुष्टि भी बढ़ी।  साइकोपैथिक और मैकियावेलियन व्यक्तित्व वाले लोग भावनात्मक रूप से अपेक्षाकृत कम जुड़ाव महसूस करते हैं और सामाजिक मानदंडों की परवाह भी कम करते हैं। इन मानदंडों में यह धारणा भी शामिल है कि बॉस को गाली नहीं देनी चाहिए। ऐसे लोगों को गाली देने वाला बॉस अधिक सच्चा, आत्मविश्वासी और औपचारिक नियमों से मुक्त व्यक्ति के रूप में दिखाई दे सकता है।

 

वहीं, जिन कर्मचारियों में ‘नार्सिसिस्टिक’ यानी आत्ममुग्धता के लक्षण अधिक थे, उनकी प्रतिक्रिया चौंकाने वाली रही। उन्हें न तो बॉस की गालियां विशेष रूप से पसंद आईं और न ही उनसे कोई खास आपत्ति हुई। उनके वरिष्ठ अधिकारी के प्रति संतुष्टि लगभग वैसी ही बनी रही। अध्ययन में यह भी स्पष्ट हुआ कि केवल व्यक्ति का स्वभाव ही नहीं, बल्कि वह किस समाज में रहता है, यह भी उसकी प्रतिक्रिया को प्रभावित करता है।

 

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आर्थिक असमानता का क्या प्रभाव पड़ता है?

जिन देशों में आय की समानता अपेक्षाकृत अधिक है, जैसे स्वीडन और ऑस्ट्रिया, वहां लोगों के व्यक्तित्व के आधार पर प्रतिक्रियाओं में स्पष्ट अंतर दिखाई दिया। यानी वही मैनेजर, वही भाषा और वही गाली- एक कर्मचारी को सहज और मिलनसार लग सकती है, जबकि दूसरे को वही व्यवहार गैर-पेशेवर प्रतीत हो सकता है।

 

इसके विपरीत, जिन देशों में आर्थिक असमानता अधिक है, जैसे दक्षिण अफ्रीका और मेक्सिको, वहां व्यक्तित्व का प्रभाव लगभग खत्म हो गया। ऐसे देशों में अधिकांश कर्मचारियों ने चाहे उनका व्यक्तित्व कैसा भी रहा हो, गाली देने वाले बॉस को नकारात्मक नजरिये से ही देखा। आखिर ऐसा क्यों होता है? आर्थिक असमानता पर हुए दूसरे अध्ययन बताते हैं कि जिन समाज में असमानता अधिक होती है, वहां लोग सामाजिक हैसियत और पद को लेकर अधिक सजग रहते हैं। ऐसे माहौल में पद की गरिमा बहुत महत्वपूर्ण होती है। इसलिए जब कोई वरिष्ठ अधिकारी गाली देता है तो कर्मचारी उसे दोस्ताना व्यवहार के रूप में नहीं बल्कि अपने अपमान के रूप में देखता है। यानी वहां निजी व्यक्तित्व से ज्यादा सामाजिक परिवेश लोगों की सोच को प्रभावित करता है।

रिसर्च में क्या निकला ?

प्रभावी संवाद केवल सही शब्द चुनने का नाम नहीं है। एक ही वाक्य किसी कर्मचारी को प्रेरित कर सकता है, दूसरे को नाराज कर सकता है और तीसरे पर उसका कोई असर ही नहीं पड़ सकता। यही वजह है कि नेतृत्व को लेकर दी जाने वाली सलाह कई बार विरोधाभासी लगती है। कोई विशेषज्ञ कहता है कि नेता को हमेशा ‘स्वाभाविक’ रहना चाहिए, जबकि दूसरा हर परिस्थिति में पेशेवर आचरण बनाए रखने की सलाह देता है।

 

असलियत यह है कि दोनों ही बातें सही हो सकती हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि सामने कौन है और वह किस सांस्कृतिक तथा सामाजिक वातावरण से आता है। तो क्या नेतृत्व की भूमिकाएं निभा रहे लोगों को गाली देना पूरी तरह छोड़ देना चाहिए? जरूरी नहीं। लेकिन उन्हें यह जरूर समझना चाहिए कि हर व्यक्ति अलग होता है, इसलिए संवाद करने का कोई एक तरीका ऐसा नहीं हो सकता जो सभी कर्मचारियों पर समान रूप से असर करे। अच्छा बॉस वही होता है जो अपनी टीम को समझे। एक प्रभावी बॉस के लिए यह जानना उतना ही जरूरी है कि उसकी टीम कैसी है, जितना कि यह तय करना कि किस परिस्थिति में कौन से शब्द बोलने चाहिए और किन से बचना चाहिए।

कांवड़ ले जा रहे हैं? भूलकर भी न करें ये 5 काम, खंडित हो जाएगी पूजा


इस साल 30 जुलाई से सावन महीने की शुरुआत हो चुकी है। इस महीने को शिव भक्ति के लिए सबसे पावन महीना माना जाता है। इसी वजह से कई भक्त इस महीने कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं, जहां वे लाखों की संख्या में गंगा या किसी पवित्र नदी का जल लेकर आते हैं। इसी जल से शिवलिंग का जलाभिषेक किया जाता है। धार्मिक जानकारों के मुताबिक, कांवड़ यात्रा के दौरान भक्तों को कुछ नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। तभी यात्रा सफल मानी जाती है।

 

इस साल सावन का महीना 30 जुलाई से लेकर 28 अगस्त तक चलने वाला है। इस दौरान कई भक्त सोमवार का व्रत रखते हैं, तो कई लोग रुद्राभिषेक कराते हैं। इसके अलावा कई लोग कांवड़ यात्रा पर भी जाते हैं। अब सवाल उठता है कि भक्तों को कांवड़ यात्रा के दौरान किन नियमों का पालन करना चाहिए? आइए जानते हैं कांवड़ यात्रा के 5 विशेष नियम।

 

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कांवड़ यात्रा के 5 नियम

1.जमीन पर कांवड़ न रखें – इस यात्रा के दौरान कांवड़ियों को अपनी कांवड़ जमीन पर नहीं रखनी चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जल से भरी कांवड़ को जमीन पर रखना उचित नहीं माना जाता। यदि किसी भक्त से गलती से कांवड़ जमीन पर रख दी जाए, तो उसे दोबारा जल भरकर लाना चाहिए। मान्यता है कि जमीन पर रखी गई कांवड़ के जल से जलाभिषेक करने पर शिवजी का आशीर्वाद नहीं मिलता और पूजा खंडित मानी जाती है।

 

2.पवित्र नदी का जल लें – कांवड़ यात्रियों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वे बहती हुई पवित्र नदी का जल ही लेकर जाएं। कुएं या तालाब का जल कांवड़ के लिए नहीं लेना चाहिए।

 

3.तामसिक भोजन और नशे से दूर रहें – भक्तों को यात्रा के दौरान तामसिक भोजन यानी लहसुन, प्याज, मांस और मछली का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही शराब, सिगरेट, गुटखा और अन्य नशे से भी पूरी तरह दूर रहना चाहिए।

 

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4.चमड़े की वस्तुओं का प्रयोग न करें – कांवड़ यात्रा के दौरान चमड़े से बनी वस्तुओं का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। यानी चमड़े के पर्स, बेल्ट और जूते आदि का प्रयोग करने से बचना चाहिए।

 

5.चप्पल न पहनें – इस यात्रा के दौरान भक्तों को न सिर्फ साफ-सुथरे कपड़े पहनने चाहिए, बल्कि धार्मिक मान्यता के अनुसार यथासंभव नंगे पैर यात्रा करनी चाहिए और चप्पल या जूते पहनने से बचना चाहिए।

 

नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

 

क्या पाकिस्तान में तख्तापलट होने वाला है, गृह मंत्री के बयान से बहस क्यों छिड़ी?


पाकिस्तान में निरंकुशता लगातार बढ़ती जा रही है। सेना हर जगह अपना नियंत्रण चाहती है या बना लिया है। विरोध करने वालों को जेलों में डाला जाता है। सोशल मीडिया और यूट्यूब पर बगावती स्वर अपनाने वाले लोगों के चैनलों को ब्लॉक कर दिया जाता है। हाल ही में 27 यूट्यूब चैनल को ब्लॉक करने का आदेश भी दिया गया। 

 

पाकिस्तान की भाषा में इसे हाईब्रिड निजाम कहा जाता है। जहां मुखौटे के तौर पर नागरिक सरकार होती है, लेकिन असली सत्ता सेना चला रही होती है। आज पाकिस्तान की सत्ता पर आसिम मुनीर का पूरी तरह से कब्जा हो चुका है। वे टॉयलेट को छोड़कर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ हर जगह मौजूद रहते हैं। दुनिया में विरला ही उदाहरण है, जहां सेना प्रमुख का अपने प्रधानमंत्री के साथ घूमना इतना आम है।

 

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क्या आसिम मुनीर एक मौके की तलाश में? 

बलूचिस्तान, खैबर खख्तूनख्वा और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में जनता की नाराजगी व सेना के खिलाफ बढ़ती नफरत से आसिम मुनीर परेशान है। यही वजह है कि पाकिस्तान में एक बड़े व्यवस्था परिवर्तन की सुगबुगाहट चल रही है। कुछ पत्रकारों और जानकारों का आरोप है कि सेना सत्ता पर कब्जा करने फिराक में है। अगर कुछ बड़ा उथल-पुथल होता है तो आसिम मुनीर को अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका मिल जाएगा। मुनीर अब उसी मौके की तलाश में है। इस बात को तब और बल मिला जब पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने व्यवस्था परिवर्तन की बात कह दी। पाकिस्तान की जनता, पत्रकार, छात्र और नागरिक संगठन अलग-अलग तरह से मोहसिन नकवी के बयान के मायने निकालने में जुटे हैं।

 

 

 

‘रेडलाइन क्रॉस नहीं करना चाहता’

पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने हाल में अपने एक बयान में कहा, ‘अल्लाह ने आपको एक इनायत (कृपा) दी है। एक बंदा (आसिम मुनीर) आपके लिए इतने बड़े-बड़े अवसर लेकर आ रहा है। सबसे बड़ा क्रेडिट उस शख्स को यह जाता है कि वह कोई रेडलाइन है, जो क्रॉस नहीं करना चाहता है। वो कहता है कि नहीं… इसी सिस्टम में ही और ठीक करना है।’ 

 

मोहसिन नकवी के इस बयान ने नई आशंका पैदा कर दी है। लोग पूछ रहे हैं कि नकवी कौन सी रेडलाइन की बात कर रहे हैं। क्या आसिम मुनीर तख्तापलट करना चाहते है? क्या रेडलाइन उन्हें ऐसा करने से रोक रही है।

कॉकरोच का जिक्र, व्यवस्था बदलने की बात

अपने बयान में मोहसिन नकवी ने कॉकरोच आंदोलन का जिक्र किया और कहा, ‘वे (युवा) सिर्फ एक चीज मांगते हैं कि अपना निजाम ठीक कर लें। हमें इंसाफ और मेरिट मिल जाए। नौकरी मिले। सबकुछ जायज तरीके से मिले। नौजवान जो चाहते हैं, वह हम नहीं दे पा रहे हैं। अब उन्हें नौजवान कहें या कॉकरोच कहें, लेकिन एक चीज मैं सबको बताऊंगा कि ये कॉकरोच अगर इकट्ठा हो गया तो ये हर चीज को उलट सकते हैं। इसके लिए जरूरी यह है कि वह जो मांगें, उसे दिया जाए।’

क्या ढह गया पाकिस्तान की सिस्टम?

मोहसिन नकवी के बयान का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह था कि उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की व्यवस्था ढह गई है। ‘जिस सिस्टम में हम जी रहे हैं, वह ढह गया है। आप मानें या न मानें। इसे 70 वर्षों से घसीटते आ रहे हैं।’

 

पाकिस्तान में अब जनता उनके बयान के पीछे की मंशा पर शक जता रही है। लोगों का सवाल है कि आसिम मुनीर के बेहद खास मोहसिन नकवी अचानक व्यवस्था ढह जाने की बात क्यों करने लगे हैं, क्या सेना के स्तर पर कुछ बड़ी प्लानिंग चल रही है, क्या उससे पहले मोहसिन नकवी दिमागी तौर पर जनता को तैयार करने में जुटे हैं।

 

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लोकतंत्र की तारीफ और बुराई भी

मोहसिन नकवी ने आगे व्यवस्था बदलने तक की बात कही। उन्होंने कहा, ‘लोकतंत्र हम सब चाहते हैं। मैं उसका सबसे बड़ा समर्थक हूं और रहूंगा, लेकिन लोकतंत्र के अंदर ही चार-पांच तरह के निजाम है। मगर हम कहते हैं नहीं, जो मर्जी हो जाए, हमने इसी को घसीटना और चलाना है।’ 

 

मोहसिन नकवी के बयान से उन आशंकाओं को बल मिलता है, जिनमें दावा किया जा रहा है कि सेना सत्ता पर काबिज होना चाहती है, क्योंकि नकवी एक तरफ खुद को लोकतंत्र का पहरेदार बताने में जुटे हैं, जबकि दूसरी तरफ इस व्यवस्था की खामियां भी गिनाने में जुटे हैं। 

आसिम मुनीर को राष्ट्रपति बनाने का प्लान!

पाकिस्तान के पत्रकार अफताब इकबाल ने मोहसिन नकवी के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह एक ध्यान भटकना है। अगर सदारती निजाम (अध्यक्षीय शासन प्रणाली) ही लाना है। फील्ड मार्शल को पाकिस्तान का राष्ट्रपति बनाना है, उसे चुनाव जितवाना है, सूबों का आकार छोटा करना है तो यह घी तो सीधी अंगुली से भी निकल सकता है। इस पर आपको इतनी हिंसा क्यों थोपनी पड़ी? असल बात कुछ और है। वह है, पूरी तरह से नियंत्रण। 

आयूब, मुशर्रफ की राह पर मुनीर

अफताब इकबाल ने आयूब खान का उदाहरण दिया और कहा कि 1958 में उसने भी पूरा कंट्रोल करने के बाद ही पहला मार्शल लॉ लगाया था। वे आगे कहते हैं कि जियाउल हक ने भी पहले पावर को कंट्रोल किया। उसके जकड़ में मुकम्मल सबकुछ आ गया तो तब उसने इस्लामी निजाम का ढकोसला देकर 11 साल तक शासन किया। परवेज मुशर्रफ ने भी निजाम को अजगर की तरह जकड़ने के बाद सफर का आगाज किया था। 

 

अफताब इकबाल का कहना है कि आयूब खान और आज का दौर बिल्कुल अलग है। अगर आज आसिम मुनीर से कहा जाए कि आप अपनी कमान किसी और दे दें। फील्ड मार्शल बने, इलेक्शन जीते और इलेक्शन जीतना आपके बाएं हाथ का खेल है। आप आम चुनाव जीत चुके हैं तो रिफरेंडम और सदारती इलेक्शन जीतना का मसला ही कोई नहीं है। आप चाहे तो यह काम कर सकते हैं।

किसकी स्क्रिप्ट पर काम कर रहे आसिम मुनीर?

अफताब इकबाल आगे कहते हैं कि आसिम मुनीर कमान किसी और के हाथ में देने की कल्पना ही नहीं कर सकते। वह तो थोड़ी-बहुत बची कमान को भी काबू करने की कोशिश में है, क्योंकि हालात और वक्त ऐसा है कि किसी पर विश्वास नहीं किया जा सकता है। अगर वे इलेक्शन जीत भी गए तो कौन भरोसा करेगा। फॉर्म 47 के रिजल्ट कोई मानेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि आसिम मुनीर आयूब खान और जियाउल हक की स्क्रिप्ट पर काम कर रहे हैं। मगर अबकी बार के हालात पहले से अलग हैं।

बारिश, बाढ़, लैंडस्लाइड, अगले 7 दिन पड़ सकते हैं भारी, मौसम का हाल जानिए

देश के कई राज्यों में तेज बारिश मुश्किलें बढ़ा सकती है। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने गुजरात, केरल, माहे, तटीय कर्नाटक और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी तथा कहीं-कहीं अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई है। इसके बाद बारिश में काफी कमी आने की उम्मीद है। 

पिछले 24 घंटों में गुजरात में कई जगहों पर 30 सेंटीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज की गई, जबकि तमिलनाडु, केरल और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में बहुत भारी बारिश हुई। अगले एक सप्ताह में उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत में भी तेज बारिश होने की संभावना है।

IMD के अनुसार, दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में बने कम दबाव क्षेत्र के कमजोर होने के साथ पश्चिमी विक्षोभ की वजह से मानसून सक्रिय रहेगा। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और निचले इलाकों में जलभराव की आशंका है। मछुआरों को भी समुद्र में जाने से पहले सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

 

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कैसा है देश का मौसम?

बीते 24 घंटों में गुजरात क्षेत्र में कई जगहों 30 सेंटीमीटर से ज्यादा की बारिश दर्ज की गई है। मध्य महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, केरल, माहे और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 21 सेंटीमीटर से ज्यादा बारिश हुई है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, तटीय कर्नाटक और मेघालय में 12-20 सेमी बारिश दर्ज हुई। उत्तराखंड, पश्चिमी मध्य प्रदेश, कोंकण-गोवा, झारखंड, लक्षद्वीप और नागालैंड में भी तेज बारिश हुई है।

अगले 7 दिनों तक, कैसा रहेगा मौसम?

उत्तर भारत का क्या हाल है?

2 से 7 अगस्त के दौरान हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख, उत्तराखंड में तेज बारिश होने की संभावना है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी 2-7 अगस्त के बीच भारी बारिश की आशंका है। 1-2 अगस्त को राजस्थान में भी भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इन क्षेत्रों में आंधी-तूफान, बिजली चमकने और 30-50 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है।

मध्य भारत में कैसा रहेगा मौसम?

1 अगस्त को पश्चिमी मध्य प्रदेश, 4-7 अगस्त को पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में व्यापक बारिश होने की संभावना है। विदर्भ में 1 अगस्त और 5-6 अगस्त को भारी बारिश की चेतावनी है। कुछ स्थानों पर आंधी-तूफान और बिजली गिरने की भी आशंका है।

बारिश के बाद हुए जलभराव से गुजरते लोग। Photo Credit: PTI

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पूर्वी भारत में कैसा रहेगा मौसम?

अंडमान-निकोबार, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, झारखंड, ओडिशा और बिहार में 1-7 अगस्त के दौरान बड़े स्तर पर बारिश होगी। 1-5 अगस्त को झारखंड और अंडमान में आंधी-तूफान, बिजली और तेज हवाओं की संभावना है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 1-5 अगस्त को कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश हो सकती है।

पूर्वोत्तर में कैसी हो सकती है बारिश?

अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 1-7 अगस्त के दौरान बड़े स्तर पर बारिश की संभावना है। कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ आंधी-बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है। 


पश्चिम भारत में कैसा रहेगा मौसम?

कोंकण-गोवा, मध्य महाराष्ट्र, गुजरात, सौराष्ट्र और कच्छ में 1-7 अगस्त के दौरान व्यापक बारिश होगी। आज गुजरात में कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी और कहीं-कहीं अत्यधिक भारी बारिश की संभावना है।

दक्षिणी हिस्से में कैसी होगी बारिश?

केरल, माहे, तटीय कर्नाटक और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भारी से बहुत भारी तथा कहीं-कहीं अत्यधिक भारी बारिश होने की चेतावनी है। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और लक्षद्वीप में भी अगले कुछ दिनों में भारी बारिश हो सकती है। 2 अगस्त को कर्नाटक और केरल में 50-70 किमी प्रति घंटा की तेज हवाएं चलने की आशंका है।

दिल्ली-NCR में कैसा रहेगा मौसम?

अगले 3 दिनों तक दिल्ली में आमतौर पर बादल छाए रहेंगे। सुबह से दोपहर और शाम को हल्की बारिश की संभावना है। अधिकतम तापमान 31-35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 23-28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है।  

किन्हें सावधान रहने की जरूरत है?

अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के कई हिस्सों में 6 अगस्त तक समुद्र में ऊंची लहरें उठने की संभावना है। मछुआरों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। भारी बारिश से पेड़ उखड़ सकते हैं, फसलें प्रभावित होंगी, कमजोर ढांचे क्षतिग्रस्त हो सकते हैं और निचले इलाकों में बाढ़-जलभराव की स्थिति बन सकती है।

सेहत के लिए हानिकारक है ये फूड कॉम्बिनेशन, बढ़ेगा बीमारियों का खतरा


स्वस्थ रहने के लिए पौष्टिक आहार लेना चाहिए। हम क्या खा रहे हैं? जितना जरूरी है। उतना ही यह भी जरूरी है कि किस चीज के साथ खा रहे हैं। क्या आप जानते हैं गलत फूड कॉम्बिनेशन खाने से सेहत को नुकसान पहुंचता है। इस वजह से आपको पाचन संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। गलत फूड कॉम्बिनेशन को लेने से शरीर को क्या नुकसान पहुंचता है? इसके बारे में हमने पौष्टिक आहार विशेषज्ञ और न्यूट्रीप्लस की डायरेक्टर डॉक्टर अंजलि फाटक से बात की।

 

डॉक्टर अंजलि के मुताबिक आयुर्वेद में कुछ खाद्य पदार्थों को एक साथ नहीं खाने की सलाह दी गई है। इसे गलत फूड कॉम्बिनेशन कहा जाता है। जब हम बार बार गलत कॉम्बिनेशन को अपनी डाइट में शामिल करते हैं तो पाचन कमजोर हो सकता है। आइए जानते हैं किन गलत फूड कॉम्बिनेशन को खाने से बचना चाहिए?

 

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इन चीजों को साथ में न खाएं

1. आयरन युक्त भोजन + चाय/कॉफी – चाय और कॉफी में मौजूद टैनिन तथा पॉलीफेनॉल नॉन-हीम आयरन (पौधों से मिलने वाला आयरन) के एब्जॉप्शन को कम कर सकता है। इसलिए आयरन युक्त भोजन के तुरंत बाद चाय या कॉफी न लें।

 

2. ग्रेपफ्रूट + कुछ दवाइयां – ग्रेपफ्रूट में ऐसे प्राकृतिक कपाउंड होते हैं जो कई दवाओं (जैसे कुछ कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाएं, ब्लड प्रेशर की कुछ दवाएं) के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकते हैं। इससे दवा का प्रभाव बढ़ या घट सकता है। ऐसे मरीज डॉक्टर की सलाह के बिना ग्रेपफ्रूट का सेवन न करें।

 

3. कैल्शियम + आयरन सप्लीमेंट- दोनों सप्लीमेंट एक साथ लेने पर आयरन का एब्जॉप्शन कम हो सकता है। इनके बीच कम से कम 2 घंटे का अंतर रखें।

 

4. अत्यधिक नमक + प्रोसेस्ड फूड- दोनों मिलकर शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ाते हैं, जिससे हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और किडनी पर दबाव बढ़ सकता है।

 

5. शुगर वाली ड्रिंक्स + हाई-फैट फास्ट फूड– यह कॉम्बिनेशन अत्यधिक कैलोरी, शुगर और फैट को बढ़ावा देता है, जिससे मोटापा, फैटी लिवर और इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ता है।

 

6. हाई-प्रोटीन डाइट + कम पानी–  अधिक प्रोटीन लेने के साथ पर्याप्त पानी न पीने पर कब्ज, डिहाइड्रेशन और किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, विशेषकर पहले से किडनी रोग वाले लोगों में।

 

7. अधिक शराब + ज्यादा फैट वाला भोजन– यह कॉम्बिनेशन रक्त में ट्राइग्लिसराइड बढ़ा सकता है और पैंक्रियाज पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।

गलत फूड कॉम्बिनेशन के उदाहरण

  • मछली + दूध – आयुर्वेद में इसे सबसे गलत फूड कॉम्बिनेशन माना गया है।
  • दूध + खट्टे फल (संतरा, मौसंबी, नींबू आदि)
  • दूध + नमक (जैसे नमकीन दूध आधारित व्यंजन)
  • दूध + मूली
  • दूध + करेला
  • दूध + कुल्थी
  • दूध + खट्टा दही
  • शहद + घी समान मात्रा में
  • शहद को गर्म करना या बहुत गर्म भोजन/पानी में मिलाना
  • दही को रात में खाना, विशेषकर बिना काली मिर्च, सौंठ या अन्य उपयुक्त मसालों के
  • फलों के साथ भारी भोजन, विशेषकर भोजन के तुरंत बाद
  • तरबूज को अन्य भोजन के साथ खाना, क्योंकि आयुर्वेद इसे अलग से खाने की सलाह देता है।
  • गर्म भोजन के साथ बर्फ जैसा ठंडा पानी, क्योंकि इससे पाचन तंत्र प्रभावित हो सकती है।

अगस्त महीने में किन लोगों पर होगी धन की बरसात, किसे झेलना पड़ेगा आर्थिक नुकसान?


अगस्त का यह महीना कई लोगों के लिए फायदेमंद रहेगा, जिन्हें धन लाभ होगा। इस महीने के पहले दिन शनिदेव का विशेष प्रभाव रहेगा, जो यह संदेश देता है कि लोगों को मेहनत करनी होगी, तभी जाकर धन लाभ हो पाएगा। अंक ज्योतिष के नजरिए से आज का मूलांक 8 है, जो शनि ग्रह का अंक माना जाता है। अगस्त महीने में सभी लोगों पर भगवान शिव की कृपा बरसेगी, जिससे धन लाभ, नौकरी और व्यापार से जुड़े मामलों में लोगों को लाभ होगा। साथ ही इस महीने कई लोगों पर सूर्य देव का प्रभाव रहेगा, जिससे लोगों का आत्मविश्वास और लीडरशिप क्वालिटी बेहतर होगी।

 

इस महीने ग्रहों की स्थिति यह संकेत दे रही है कि मेहनत और सही योजना बनाने वाले लोगों को आर्थिक रूप से लाभ मिल सकता है। कुछ राशियों को अचानक लाभ के अवसर प्राप्त होंगे, जबकि कुछ को अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखने की जरूरत होगी। निवेश, नौकरी में बदलाव और व्यवसाय का विस्तार करना इस महीने कई लोगों के लिए शुभ रहेगा। धैर्य, अनुशासन और विवेकपूर्ण निर्णय पूरे महीने सफलता की कुंजी रहेंगे।

 

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राशिफल

 

मेष राशि

 

अगस्त महीना आपके लिए धन लाभ कमाने के कई अवसर लेकर आ रहा है, जिससे आपको आर्थिक लाभ होगा। ऑफिस में आपकी मेहनत की सराहना होगी और आय के नए स्रोत बन सकते हैं। पुराने अटके हुए पैसे वापस मिलने के संकेत हैं।

क्या करें: शेयर बाजार या नए व्यवसाय में रणनीतिक निवेश करें।

क्या न करें: जल्दबाजी या गुस्से में आकर कोई वित्तीय सौदा न करें।

 

वृषभ राशि

 

आर्थिक रूप से यह महीना मिला-जुला रहेगा। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन होने से लाभ मिल सकता है, हालांकि अचानक कुछ बड़े खर्च आपकी बजट योजना को बिगाड़ सकते हैं।

क्या करें: अपने मासिक बजट को सख्ती से पालन करें।

क्या न करें: किसी भी व्यक्ति को बिना लिखित प्रमाण के पैसा उधार न दें।

 

मिथुन राशि

 

आपको नए व्यापारिक संपर्कों की वजह से इस महीने आर्थिक लाभ मिलेगा। फ्रीलांसिंग या बिजनेस से जुड़े लोगों को विदेशी प्रोजेक्ट्स से अच्छा धन लाभ होने के योग हैं, जहां आपकी बुद्धि काम आएगी।

क्या करें: अपनी बातचीत के वजह से नए सौदों को अंतिम रूप दें।

क्या न करें: एक साथ कई जगह निवेश करने से बचें।

 

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कर्क राशि

 

इस महीने आर्थिक मामलों में थोड़ा सतर्क रहने की आवश्यकता है। संपत्ति से जुड़े विवाद या पारिवारिक जरूरतों पर खर्च बढ़ सकता है। दफ्तर में सहकर्मियों से सहयोग मिलेगा, लेकिन निर्णय अपने विवेक से लें।

क्या करें: शेयर बाजार में जानकारों की सलाह लेकर धन निवेश करें।

क्या न करें: बिना सोचे-समझे धन खर्च न करें।

 

सिंह राशि

 

इस महीने के पहले दिन का मूलांक 1 है, जिसके कारण सूर्य का प्रभाव आपको आर्थिक मजबूती देगा। आपकी लीडरशिप क्वालिटी की वजह से व्यापार में अच्छा मुनाफा मिलेगा। अगर कोई नया प्रोजेक्ट शुरू करना चाहते हैं, तो यह समय बिल्कुल सही है।

क्या करें: नए व्यापारिक विचारों पर काम शुरू करें।

क्या न करें: अपने भीतर आत्मविश्वास के साथ अहंकार को हावी न होने दें।

 

कन्या राशि

 

आर्थिक स्थिति के लिए यह समय आपके लिए बेहद शानदार रहेगा। ऑफिस में आपकी काम करने की क्षमता की वजह से धन लाभ होगा। पुराने कर्जों को चुकाने में सफलता मिलेगी, जिससे मानसिक तनाव कम होगा।

क्या करें: अपने खातों और निवेशों की नियमित समीक्षा करें।

क्या न करें: बिना पूरी जानकारी के किसी नई स्कीम में पैसा न लगाएं।

 

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तुला राशि

 

जो लोग पार्टनरशिप में बिजनेस करते हैं, उन्हें कामकाज में जबरदस्त आर्थिक सुधार देखने को मिलेगा। कला, फैशन और मीडिया से जुड़े लोगों को बेहतरीन अवसर मिलेंगे। आपकी आर्थिक स्थिति पहले से अधिक संतुलित और मजबूत होगी।

क्या करें: बिजनेस पार्टनर के साथ संबंध सुधारें।

क्या न करें: दिखावे की वस्तुओं पर अनावश्यक खर्च न करें।

 

वृश्चिक राशि

 

इस महीने आर्थिक मामलों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। नौकरी में स्थान परिवर्तन या जिम्मेदारियों में बदलाव के साथ धन लाभ के योग हैं। कोई भी गुप्त निवेश करने से पहले अनुभवी व्यक्ति की सलाह लें।

क्या करें: केवल सुरक्षित योजनाओं में पैसे लगाएं।

क्या न करें: जोखिम भरे या शॉर्टकट वाले तरीकों से पैसा कमाने का प्रयास न करें।

 

धनु राशि

 

अगस्त का महीना आर्थिक समृद्धि लेकर आएगा। किस्मत का पूरा साथ मिलेगा और पैतृक संपत्ति से लाभ होने की संभावना है। दूर की यात्राएं आपके लिए धन कमाने के नए द्वार खोल सकती हैं।

क्या करें: अपनी आय का कुछ हिस्सा भविष्य की योजनाओं के लिए निवेश करें।

क्या न करें: उत्साह में आकर अपनी वित्तीय योजनाएं किसी से शेयर न करें।

 

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मकर राशि

 

इस महीने आपको धन से जुड़े फैसले सोच-समझकर लेने होंगे, वरना आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। आपकी निरंतर मेहनत रंग लाएगी। रियल एस्टेट और धातु के कारोबार से जुड़े लोगों को बड़ा लाभ हो सकता है।

क्या करें: धैर्य के साथ अपनी वित्तीय योजनाओं पर टिके रहें।

क्या न करें: अपने काम को टालने की आदत न अपनाएं।

 

कुंभ राशि

 

नया इनोवेटिव आइडिया आपके लिए धन कमाने का रास्ता बनाएगा। हालांकि शुरुआती लागत थोड़ी अधिक हो सकती है, जिससे बजट में कुछ खिंचाव महसूस होगा। कुल मिलाकर आर्थिक स्थिति नियंत्रण में रहेगी।

क्या करें: तकनीक माध्यमों का उपयोग करके व्यवसाय बढ़ाएं।

क्या न करें: बजट से बाहर जाकर किसी नए उद्यम में बड़ा पैसा न फंसाएं।

 

मीन राशि

 

आपका ज्ञान आपको सही वित्तीय निर्णय लेने में मदद करेगा। क्रिएटिव काम से जुड़े लोगों और अध्यात्म से जुड़े लोगों को इस महीने धन लाभ होने की संभावना है। हालांकि फालतू खर्चों पर लगाम लगाने से बचत में वृद्धि होगी।

क्या करें: वित्तीय सलाहकार की मदद से अपना पोर्टफोलियो व्यवस्थित करें।

क्या न करें: भावनाओं में बहकर कोई आर्थिक फैसला न लें।

 

नोट: यह राशिफल ज्योतिषीय मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

उजैर बलोच के भाई जुबैर पर ‘धुरंधर’ अंदाज में फायरिंग, ल्यारी में बवाल


पाकिस्तान के कराची शहर के ल्यारी में एक बार फिर गैंगवार शुरू हो गया है। ल्यारी में कुख्यात गैंगस्टर उजैर बालोच के भाई जुबैर बालोच को दो अज्ञात हमलावरों ने मोटरसाइकिल से आकर गोली मार दी। जुबैर अपने सिंगू लेन वाले घर के बाहर बैठे हुआ था, तभी हमला हुआ। उसकी उम्र 40 साल है।

जुबैर, घर के बाहर था, तभी मास्क लगाए हमलावर मोटरसाइकिल पर आए और उन्होंने उस पर अचानक फायरिंग शुरू कर दी। गोली जुबैर के सीने और पेट में लगी। गंभीर रूप से घायल जुबैर को तुरंत सिविल अस्पताल कराची ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने इमरजेंसी सर्जरी की। 

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अंतिम सांसें गिन रहा है जुबैर?

जुबैर बलोच हालत अभी भी नाजुक बताई जा रही है। इस गोलीबारी में दो आम राहगीर भी घायल हो गए, उनमें से एक की हालत गंभीर है। हमलावर जब भाग रहे थे, तभी पास की एक दुकान के मालिक ने जवाबी फायरिंग की, जिसके बाद वे ओझल हो गए।

किसने की हत्या की कोशश?

घटनास्थल का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। सड़क पर अचानक हुई गोलीबारी और लोगों के भागने का नजर साफ झलक रहा है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। 

 

कराची पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि हमला निजी दुश्मनी की वजह से हुआ है या पुराने गैंगवार के चलते। पुलिस ने कहा कि दोनों संभावनाओं पर गहराई से छानबीन की जा रही है।

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जुबैर बलोच कौन है?

जुबैर बालोच साल 2012 में कई आपराधिक मामलों में गिरफ्तार हुआ था। वह पिछले साल जेल से रिहा हुआ था। उसका बड़ा भाई उजैर बालोच अभी भी जेल में बंद है। उजैर बलोच को 2012 में पुलिस अधिकारियों पर हमले के मामले में मिलिट्री कोर्ट ने 12 साल की सजा सुनाई थी। बाद में 2020 में उसे जासूसी के आरोप में भी सजा मिली। 

ल्यारी क्या है?

ल्यारी इलाका कई दशकों से ड्रग तस्करी, वसूली और गैंग वॉर का बड़ा केंद्र रहा है। यहां रहमान डकैत के नाम से बदनाम सरदार अब्दुल रहमान बालोच और उनके प्रतिद्वंद्वी अरशद पप्पू जैसे गैंगस्टरों के बीच खूनी संघर्ष हुआ था। 

 

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फिर से ल्यारी में हो रहा गैंगवार?

रहमान डकैत की 2009 में पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई थी। उसके चचेरे भाई उजैर बालोच ने उनके गुट की कमान संभाली। इस इलाके में राजनीतिक दलों का भी कथित तौर पर संरक्षण मिलता रहा। यहां अपराध और राजनीति का गहरा गठजोड़ बना। पुलिस ज़ुबैर बालोच पर हुए हमले के पीछे के कारणों का पता लगाने में जुटी हुई है। ल्यारी में एक बार फिर तनाव है।