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अयातुल्ला खामेनेई के जनाजे में शामिल होगा भारत, ईरान जाएंगे बिहार के राज्यपाल


ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार और दफन समारोह में भारत भी शामिल होगा। भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा शामिल होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी ईरान सरकार की ओर से निमंत्रण भेजा गया था लेकिन पहले से तय विदेश दौरे के कारण वह इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएंगे।

 

प्रधानमंत्री मोदी जुलाई की शुरुआत में इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया की यात्रा पर रहेंगे। ऐसे में भारत सरकार ने आधिकारिक प्रतिनिधित्व के लिए बिहार के राज्यपाल और विदेश राज्य मंत्री को ईरान भेजने का फैसला किया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री मोदी को अंतिम संस्कार में शामिल होने का निमंत्रण दिया था।

 

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4 जुलाई से शुरू होंगे अंतिम संस्कार के कार्यक्रम

ईरान में अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार की शुरुआत 4 जुलाई से होगी। तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद राजधानी तेहरान और धार्मिक शहर कोम में सार्वजनिक शोक यात्राएं निकाली जाएंगी। वहीं, इराक के पवित्र शहर नजफ और कर्बला में भी विशेष प्रार्थना सभाओं का आयोजन किया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पूरे कार्यक्रम को कई चरणों में आयोजित किया जा रहा है।

 

अंतिम दफन समारोह 9 जुलाई को ईरान के मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह में होगा। मशहद अयातुल्ला खामेनेई का पैतृक शहर भी है। इससे पहले यह समारोह मार्च में आयोजित होना था लेकिन क्षेत्रीय संघर्ष और सुरक्षा कारणों के चलते इसे स्थगित कर दिया गया था। अब अंतिम संस्कार के कार्यक्रम कई दिनों तक अलग-अलग शहरों में आयोजित किए जाएंगे।

 

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भारत की ओर से दो वरिष्ठ नेता करेंगे प्रतिनिधित्व

प्रधानमंत्री मोदी की अनुपस्थिति में बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा भारत सरकार का आधिकारिक प्रतिनिधित्व करेंगे। दोनों नेता अंतिम संस्कार और दफन समारोह में शामिल होकर भारत की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसे भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनयिक संबंधों और आपसी सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है।

11 के बदले 2 ही नंबर दिए! अब CBSE से क्यों भिड़े वेदांत श्रीवास्तव?


CBSE 12वीं के छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने अपनी कॉपियों को दोबारा चेक करवाने के बाद मिले नंबरों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। वेदांत का कहना है कि 11 सवालों को दोबारा चेक करवाने पर उन्हें सिर्फ 2 नंबर मिले हैं। CBSE बोर्ड ने इसे झूठ बताते हुए कहा है कि छात्र के फिजिक्स के पेपर में पहले ही 9 नंबर बढ़ाए जा चुके हैं। वेदांत श्रीवास्तव ने एक वीडियो में बताया कि उन्होंने 11 सवालों के लिए री-इवैल्यूएशन यानी दोबारा कॉपी चेक करवाने का आवेदन किया था। उनका कहना है कि इस पूरे प्रोसेस के बाद उनके रिजल्ट में सिर्फ 2 नंबर ही बढ़कर आए हैं। इसमें से 1 नंबर गणित के पेपर में और 1 नंबर कंप्यूटर साइंस के पेपर में बढ़ा है।

 

CBSE ने वेदांत के दावों को गलत और झूठ बताया है। बोर्ड के मुताबिक, वेदांत के फिजिक्स के पेपर में 9 नंबर बढ़ाए गए हैं। बोर्ड ने यह भी बताया है कि 12वीं के री-इवैल्यूएशन के लिए आए 99.7 प्रतिशत आवेदनों पर काम पूरा हो चुका है। बाकी बची हुई कॉपियों की जांच भी जल्द खत्म हो जाएगी।

 

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CBSE के जवाब के बाद वेदांत ने फिर से अपनी बात रखी। उन्होंने साफ किया कि फिजिक्स में जो 9 नंबर बढ़े हैं वह री-इवैल्यूएशन से नहीं मिले हैं। वेदांत के मुताबिक, ये 9 नंबर उनके असली नंबर थे जो बोर्ड ने पहले उन्हें नहीं दिए थे क्योंकि उनकी फिजिक्स की असली कॉपी ही बदल दी गई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोबारा कॉपी चेक करवाने की जो सरकारी प्रोसेस होती है, उसमें उन्हें सिर्फ वही 2 नंबर मिले हैं जिनका उन्होंने पहले जिक्र किया था।

मामला शुरू कैसे हुआ?

यह सब 13 मई को 12वीं का रिजल्ट आने के बाद शुरू हुआ। 19 मई को वेदांत ने देखा कि उन्हें फिजिक्स में उनकी उम्मीद से बहुत कम नंबर मिले हैं। जब उन्होंने अपनी कॉपी की फोटोकॉपी निकलवाई, तो उन्हें पता चला कि वह कॉपी उनकी थी ही नहीं। इसके बाद 23 मई को वेदांत ने इंटरनेट पर ‘एक्स’ यानी ट्विटर पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि उन्होंने पूरे साल पढ़ाई में बहुत मेहनत की थी, नींद छोड़ दी थी लेकिन अब उन्हें यह भी नहीं पता कि क्या उनकी असली कॉपी चेक हुई थी या नहीं।

 

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जब वेदांत ने यह बात इंटरनेट पर शेयर की तो उन्हें बहुत ज्यादा ट्रोल किया गया। इस मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी शामिल हुए। राहुल गांधी ने वेदांत का साथ देते हुए कहा कि एक 17 साल का लड़का जब न्याय मांग रहा था तो उसे मदद मिलने के बजाय इंटरनेट पर ट्रोल किया गया और बीजेपी की आईटी सेल ने उन्हें गलत नाम दिए जैसे ‘राष्ट्र-विरोधी’ या ‘पाकिस्तानी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके।

सुबह की भागदौड़ से बचना है? रात में ऐसे तैयार करें स्कूल बैग


सुबह के समय बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करना हर घर में एक बड़ी चुनौती बन जाता है। जल्दबाजी में बच्चे अपनी किताबें, नोटबुक या जरूरी सामान घर पर भूल जाते हैं। ऐसे में स्कूल बैग को रात में ही तैयार कर लेना एक बेहतरीन उपाय है। माता-पिता को सिर्फ 10 मिनट का समय निकालकर बच्चे का बैग सुकून से व्यवस्थित करना चाहिए। इससे सुबह का काम आसान हो जाता है और बच्चा बिना किसी परेशानी के समय पर स्कूल पहुंच पाता है। 

रात में बैग पैक करने से माता-पिता को भी सुबह की भागदौड़ में राहत मिलती है।यह छोटी सी आदत न सिर्फ समय बचाती है बल्कि बच्चों को जिम्मेदारी सिखाती भी है। विशेषज्ञों के अनुसार, रात में बैग तैयार करने की आदत बच्चों में अनुशासन विकसित करती है। 

लगभग हर घर में सुबह की बिजी लाइफ में यही समस्या देखी जाती है।अगर आप भी सुबह की हड़बड़ी से परेशान हैं तो रात में बैग तैयार करने की आदत डाल लें। इससे न केवल आपका समय बचेगा बल्कि बच्चे भी खुशी-खुशी स्कूल जा सकेंगे। यह छोटा बदलाव पूरे दिन की शुरुआत अच्छी कर सकता है।

 

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10 मिनट में कैसे करें बैग तैयार?

  • टाइम-टेबल जरूर देखें

बैग तैयार करने से पहले स्कूल का टाइम-टेबल एक बार ध्यान से देख लें। इससे आपको पता चल जाएगा कि अगले दिन किन कौन सी किताब और कॉपियां रखनी है। टाइम-टेबल देखकर बैग तैयार करने से बैग का वजन भी कम रहता है और जरूरी सामान भी नहीं छूटता।

  • होमवर्क और असाइनमेंट पहले ही रख लें

अगर बच्चे को अगले दिन कोई होमवर्क, प्रोजेक्ट, चार्ट या असाइनमेंट जमा करना है तो उसे रात में ही बैग में रख दें। सुबह की जल्दी में अक्सर बच्चे इन जरूरी चीजों को रखना भूल जाते हैं जिससे स्कूल में परेशानी हो सकती है। 

  • पेंसिल बॉक्स चैक करें

कई बार बच्चे स्कूल पहुंचने के बाद देखते हैं कि पेंसिल, पेन या रबर खत्म हो गया है। इसलिए रात में ही पेंसिल बॉक्स चेक कर लें। उसमें पेन, पेंसिल, रबर, शार्पनर, स्केल और अन्य जरूरी स्टेशनरी पूरी होनी चाहिए। इससे बच्चे को स्कूल में किसी से सामान मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

  • बैग की सभी पॉकेट्स व्यवस्थित करें

स्कूल बैग में अलग-अलग पॉकेट्स का सही इस्तेमाल करें। किताबें एक जगह, स्टेशनरी दूसरी जगह और टिफिन या पानी की बोतल के लिए अलग स्थान रखें। जब सामान व्यवस्थित रहता है तो बच्चे को स्कूल में भी कोई चीज ढूंढ़ने में परेशानी नहीं होती और बैग साफ-सुथरा बना रहता है।

 

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  • यूनिफॉर्म और जरूरी सामान भी तैयार रखें

सिर्फ बैग ही नहीं, बल्कि स्कूल यूनिफॉर्म, जूते, मोजे, बेल्ट और आईडी कार्ड भी रात में ही एक जगह निकालकर रख दें। इससे सुबह बच्चे को किसी चीज की तलाश नहीं करनी पड़ेगी और वह समय पर स्कूल के लिए तैयार हो सकेगा।

  • बैग को एक बार अंतिम रूप से चेक करें

बैग तैयार होने के बाद उसे एक बार फिर से खोलकर देख लें। यह कंफर्म करें कि सभी किताबें, कॉपियां, होमवर्क और स्टेशनरी मौजूद हैं। यह छोटी सी आदत सुबह होने वाली कई परेशानियों से बचा सकती है और बच्चे का दिन बेहतर तरीके से शुरू हो सकता है।

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु आने से पहले दिखते हैं ये 7 रहस्यमयी संकेत


गरुड़ पुराण हिन्दू धर्म का ऐसा ग्रंथ है, जिसमें व्यक्ति के जीवन और मृत्यु की यात्रा के बारे में बताया गया है। गरुड़ पुराण सनातन धर्म के 18 महापुराणों में से एक है। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि व्यक्ति को अपने कर्मों का फल न केवल इस जीवन में मिलता है, बल्कि मृत्यु के बाद भी उन्हीं कर्मों के आधार पर स्वर्ग या नर्क की प्राप्ति होती है। साथ ही, इस जन्म के कर्मों का फल अगले जन्म में भी मिलता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, व्यक्ति को मृत्यु आने से पहले कुछ ऐसे संकेत मिलते हैं, जिनके कुछ समय बाद उसका निधन हो जाता है।

 

गरुड़ पुराण के मुताबिक, हर इंसान को मृत्यु से लगभग 6 महीने पहले कुछ खास संकेत मिलते हैं, जिससे उसे आभास हो जाता है कि उसका निधन होने वाला है। कई धार्मिक जानकारों के अनुसार, व्यक्ति के निधन के बाद उसके परिवार को गरुड़ पुराण की कथा सुननी चाहिए, जिससे मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति मिलती है। अब सवाल उठता है कि मृत्यु से पहले व्यक्ति को क्या संकेत मिलते हैं? आइए जानते हैं।

 

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मृत्यु से पहले मिलने वाले 7 संकेत

 

1. अपनी नाक न दिखना- जब किसी व्यक्ति को अपनी नाक का आगे वाला हिस्सा यानी नोज टिप दिखाई नहीं देता, तो इसे पहला संकेत माना गया है कि व्यक्ति का निधन जल्द हो सकता है।

 

2. हाथ की रेखाएं हल्की होना- गरुड़ पुराण के मुताबिक, जब व्यक्ति के दोनों हाथों की रेखाएं हल्की पड़ने लगती हैं, तो माना जाता है कि लगभग 6 महीने बाद उसका निधन हो सकता है।

 

3. खुशबू महसूस न होना- पूजा के दौरान घी का दीपक जलाया जाता है। दीपक बुझने के बाद जो सुगंध आती है, यदि वह किसी व्यक्ति को महसूस न हो, तो गरुड़ पुराण के अनुसार यह भी एक संकेत माना गया है कि उसकी आत्मा जल्द ही शरीर छोड़ सकती है।

 

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4. परछाई न दिखना- जब व्यक्ति को अपनी छाया या परछाई दिखाई नहीं देती, तो इसे भी मृत्यु के निकट होने का संकेत माना गया है।

 

5. जीवन के खास पल याद आना- गरुड़ पुराण के अनुसार, निधन से ठीक पहले व्यक्ति को अपने जीवन के कुछ खास पल याद आने लगते हैं। इनमें उसके अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के कर्म शामिल होते हैं।

 

6. पूर्वज दिखाई देना- यदि किसी व्यक्ति को सपने में बार-बार अपने पूर्वज, रिश्तेदार या कोई पुराना दिवंगत मित्र दिखाई देने लगे, तो इसे भी मृत्यु का संकेत माना गया है।

 

7. नकारात्मक ऊर्जा – मृत्यु से पहले व्यक्ति को रात के समय डर लगने लगता है। साथ ही, उसे नकारात्मक ऊर्जा, अजीब-सी बेचैनी महसूस होती है और ऐसा आभास होता है कि उसे कोई लेने आया है।

 

नोट- यह लेख धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

सेशेल्स ने PM मोदी को दिया सर्वोच्च नागरिक सम्मान, जानिए किन-किन देशों ने नवाजा


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेशेल्स ने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में उनके अहम योगदान के लिए देश के सबसे बड़े राष्ट्रपति सम्मान ‘गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ से सम्मानित किया है। हिंद महासागर में बसे इस खूबसूरत द्वीपीय देश की यात्रा के दौरान उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया गया। इसके साथ ही पीएम मोदी उन चुनिंदा वैश्विक नेताओं में शामिल हो गए हैं, जिन्हें दुनिया के कई देशों ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा है।

 

सम्मान मिलने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इसे जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे सभी देशों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की रक्षा केवल आज की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने सेशेल्स की सरकार और वहां की जनता का आभार जताते हुए कहा कि भारत हरित और टिकाऊ विकास के लिए लगातार काम कर रहा है।

 

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पर्यावरण के लिए पहले भी मिल चुके हैं कई बड़े सम्मान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह सम्मान पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबल डेवलपमेंट (सतत विकास) के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए मिला है। इससे पहले भी उन्हें कई बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है।

 

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  • एग्रिकोला मेडल (मई 2026): संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने उन्हें खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने में योगदान के लिए यह सम्मान दिया था।
  • सियोल शांति पुरस्कार (2018): अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने और समावेशी आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाने के लिए उन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला था।
  • चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवॉर्ड (2018): जलवायु परिवर्तन से निपटने और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) ने उन्हें अपना सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान प्रदान किया था।

30 से ज्यादा देशों ने किया सम्मानित

सेशेल्स से मिला यह सम्मान दिखाता है कि दुनिया में भारत की साख लगातार बढ़ रही है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी पकड़ पहले से ज्यादा मजबूत हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब तक दुनिया के 30 से ज्यादा प्रभावशाली देशों ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया है। इनमें रूस का ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू’, फ्रांस का ‘लीजन ऑफ ऑनर’, अमेरिका का ‘लीजन ऑफ मेरिट’, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का ‘ऑर्डर ऑफ जायद’ और सऊदी अरब का ‘ऑर्डर ऑफ किंग अब्दुलअजीज’ जैसे बड़े सम्मान शामिल हैं। इसके अलावा, हाल के वर्षों में स्वीडन, नॉर्वे, स्लोवाकिया, ब्राजील और इजराइल जैसे देशों ने भी प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा है।

जेवर से लखनऊ सिर्फ 100 मिनट में, पूरे प्लान की ABCD


नई दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदलने वाला है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह हाई-स्पीड ट्रेन चलने के बाद उत्तर प्रदेश में यात्रा का समय बहुत कम हो जाएगा। रेल मंत्री ने शनिवार को जेवर में एक कार्यक्रम में बताया कि जेवर से लखनऊ की दूरी बुलेट ट्रेन से सिर्फ एक घंटा 40 मिनट में तय हो जाएगी। 

दिल्ली से लखनऊ का पूरा सफर करीब दो घंटा 10 मिनट में पूरा हो जाएगा। दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर 813 किलोमीटर लंबा होगा। यह 2026-27 के केंद्रीय बजट में घोषित सात नए बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट्स में से एक है। इस बुलेट प्रोजेक्ट का इंतजार अब लोग कर रहे हैं। अगर यह प्रोजेक्ट चालू हुआ तो दिल्ली-NCR के साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश का सीधा कनेक्ट होगा। 

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किस रूट पर चलेगी ट्रेन?

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस रूट पर दिल्ली, नोएडा, जेवर एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कन्नौज, रायबरेली, प्रयागराज, लखनऊ और वाराणसी जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन बनाए जाएंगे। खास बात यह है कि इससे पर्यटन उद्योग में क्रांति आ सकती है। दिल्ली से उत्तर प्रदेश के अंतिम कोने तक लोग आसानी से पहुंच सकेंगे। 

अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय रेल मंत्री:-
जैसे गंगा बहती है, वैसे ही बुलेट ट्रेन भी चलेगी।

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बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से क्या होगा?

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से उत्तर प्रदेश में औद्योगिक और आर्थिक विकास को बड़ा बढ़ावा मिल सकता है। जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब शुरू हो चुका है। इस बुलेट ट्रेन से एयरपोर्ट और लखनऊ-वाराणसी जैसी जगहों के बीच कनेक्टिविटी बहुत बेहतर हो जाएगी। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन पर काम पहले से चल रहा है, जबकि ये नई लाइनें आने वाले समय में देश की रेल यात्रा को पूरी तरह बदल सकती हैं।

बारिश में छत टपकने से हैं परेशान? आज ही आजमाएं ये घरेलू उपाय, मिलेगी राहत


बारिश के आने से सुकून तो बहुत मिलता है लेकिन घरों में समस्या भढ़ जाती है। कई घरों की छत से बारिश के कारण पानी टपकने लगता है। इससे दीवारों में सीलन, पेंट खराब होने और घर के सामान को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। हालांकि कुछ ऐसे छोटे-छोटे उपाय हैं जिनकी मदद से आप अपने घर को सुरक्षित रख सकते हैं। ये आसान तरीके न सिर्फ छत को टपकने से रोकते हैं बल्कि घर को लंबे समय तक मजबूत भी बनाए रखने में मदद करते हैं। 

 

बारिश में छत चूने की समस्या भले ही आम लगती हो लेकिन अगर इस पर काबू ना पाया जाए तो घर की छत गिरने का डर रहता है। ज्यादातर यह समस्या पुराने घर या टूटी छतों में देखने को मिलती है। इस परेशानी को नजरअंदाज करना गलत है। सही वॉटरप्रूफिंग, नियमित जांच और ड्रेनेज की सफाई से आप इस परेशानी से बच सकते हैं। ये तरीके सस्ते और कारगर होते हैं जिन्हें आप मानसून से पहले या उसके दौरान आसानी से अपना सकते हैं। आइए जानते हैं इन घरेलू उपायों के बारे में जिनसे घर को बारिश के नुकसान से बचाया जा सकता है।

 

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1. दरारों को सीमेंट और वॉटरप्रूफ पाउडर से भरें

अगर छत में छोटी-छोटी दरारें दिखाई दे रही हैं तो उन्हें सीमेंट में वॉटरप्रूफ पाउडर मिलाकर भर दें। इससे पानी के अंदर आने का रास्ता बंद हो जाता है। 

2. वॉटरप्रूफ टेप का इस्तेमाल करें

छोटी दरारों से पानी आ रहा हो तो वॉटरप्रूफ टेप लगाना एक आसान उपाय है। यह टेप पानी को अंदर आने से रोकने में मदद करती है और कुछ समय तक राहत दे सकती है।

3. छत पर जमा कचरा साफ करें

कई बार छत पर पत्ते, मिट्टी और कचरा जमा होने से पानी रुक जाता है, जिससे छत चूने की समस्या बढ़ जाती है। इसलिए बारिश से पहले और उसके दौरान छत की नियमित सफाई करते रहें।

 

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4. एल्यूमिनियम पेंट या वॉटरप्रूफ कोटिंग लगाएं

छत पर वॉटरप्रूफ कोटिंग या एल्यूमिनियम पेंट लगाने से पानी सीधे सतह में नहीं समाता। इससे छत की सुरक्षा बढ़ती है और सीलन की समस्या कम हो सकती है।

5. छत टपकने वाली जगह पर प्लास्टिक शीट बिछाएं

अगर बारिश के दौरान तुरंत समाधान चाहिए तो छत टपकने वाली जगह पर मोटी प्लास्टिक शीट या तिरपाल बिछा सकते हैं। यह भले ही अस्थायी उपाय है लेकिन पानी को अंदर आने से रोकने में मदद कर सकता है।

6. पानी की निकासी का ध्यान रखें

छत पर बने ड्रेनेज पाइप या पानी निकलने वाले रास्तों को साफ रखें। जब पानी आसानी से निकल जाता है तो छत पर दबाव कम पड़ता है।

 

एक गवाही ने मचा दिया था महाविनाश, जब भृगु ऋषि के श्राप से गायब हो गए थे अग्निदेव


सनातन धर्म में अग्नि को पांच तत्वों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार अग्नि के स्पर्श से सब कुछ शुद्ध हो जाता है। इसी वजह से नए घर के गृह प्रवेश के दौरान हवन कराया जाता है, ताकि अग्निदेव के प्रभाव से घर शुद्ध हो जाए और वहां सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बना रहें। इन्हीं अग्निदेव को सच्ची गवाही देने की वजह से श्राप का सामना करना पड़ा था। उस श्राप से अग्निदेव इतने क्रोधित हुए कि धरती लोक ही छोड़कर चले गए।

 

पौराणिक कथा के मुताबिक, जब ऋषि भृगु अपने गुस्से पर काबू नहीं रख पाए, तब उन्होंने अग्निदेव को श्राप दे दिया। इसी श्राप का प्रभाव आज भी अग्निदेव पर माना जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि ऋषि भृगु को ब्रह्मा जी का पुत्र माना जाता है। अब सवाल उठता है कि आखिर ऐसी क्या वजह थी, जिसके कारण भृगु ऋषि ने अग्निदेव को श्राप दिया।

 

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अग्निदेव ने क्यों दी गवाही?

 

पौराणिक कथा के मुताबिक, ऋषि भृगु की पत्नी का नाम पुलोमा था, जो बेहद सुंदर थीं। दोनों पति-पत्नी सुखपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे थे। एक दिन ऋषि भृगु संध्या के समय उपासना के लिए गंगा तट पर गए थे।

 

इसी दौरान पुलोम नाम का एक राक्षस साधु का वेश धारण कर ऋषि भृगु के घर पहुंच गया। ऋषि के वेश में आए उस व्यक्ति को पुलोमा ने अतिथि समझकर उसका आदर-सत्कार किया और भोजन कराया। राक्षस पुलोम, पुलोमा को देखकर मोहित हो गया। उसने मन ही मन उनका अपहरण करने की योजना बना ली। भोजन करने के बाद उसने पुलोमा से अपने साथ चलने के लिए कहा, लेकिन पुलोमा ने साफ इनकार कर दिया। तब राक्षस ने दावा किया कि बचपन में उसने पुलोमा को अपनी पत्नी मान लिया था। अपने इस दावे को साबित करने के लिए उसने अग्निदेव को गवाही देने के लिए कहे थे।

 

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अग्निदेव ने दी सच्ची गवाही

 

जब राक्षस ने अग्निदेव से सच्चाई पूछी, तो अग्निदेव ने बताया कि यह बात कुछ हद तक सही है। उन्होंने कहा कि एक समय पुलोमा के पिता ने राक्षस से यह वचन दिया था कि वे अपनी पुत्री का विवाह उससे करेंगे और उस समय अग्निदेव वहां मौजूद थे। हालांकि, वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार पुलोमा के वास्तविक पति ऋषि भृगु ही थे।

 

अग्निदेव की यह गवाही सुनते ही राक्षस ने आव देखा न ताव और पुलोमा को जबरदस्ती अपने साथ ले जाने लगा। उस समय पुलोमा गर्भवती थीं। रास्ते में ही उनके पुत्र का जन्म हुआ। नवजात शिशु का तेज इतना प्रचंड था कि उसे देखकर राक्षस पुलोम डरकर भाग गया। बाद में जब ऋषि भृगु को पूरी घटना का पता चला, तो उन्होंने अग्निदेव को श्राप दे दिया।

 

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ऋषि भृगु ने अग्निदेव को दिया श्राप

 

ऋषि भृगु ने अग्निदेव को श्राप दिया कि अब से वे सर्वभक्षी कहलाएंगे, अर्थात अच्छी और बुरी हर वस्तु को ग्रहण करेंगे। इस श्राप को सुनकर अग्निदेव अत्यंत नाराज हो गए और धरती लोक छोड़कर चले गए।

 

इस समस्या को देखते हुए ब्रह्मा जी ने अग्निदेव को अपने पास बुलाया और उन्हें समझाया कि उनके बिना धरती लोक का संचालन संभव नहीं है। साथ ही, श्राप का प्रभाव कम करने के लिए ब्रह्मा जी ने अग्निदेव को वरदान दिया कि संसार में कोई भी शुभ कार्य, यज्ञ और हवन के बिना पूर्ण नहीं माना जाएगा।

 

नोट: इस लेख में दी गई कहानी धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

शोएब अख्तर के आतंकियों से हैं रिश्ते? लश्कर से भाई के जनाजे में दिखी नजदीकियां


पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर के बड़े भाई शाहिद अख्तर के जनाजे में लश्कर के कई कुख्ताय आतंकी नजर आए हैं। 24 जून को शाहिद अख्तर की मौत हुई थी। उन्हें इस्लामाबाद के एक कब्रिस्तान में दफनाया गया जहां लश्कर से कई बड़े चेहरे पहुंचे थे। 

शाहिद अख्तर की अंतिम यात्रा में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी समेत कई आतंकी खुलकर शामिल हुए। वायरल वीडियो में यह सब साफ झलक रहा है। लश्कर-ए-तैयबा भारत में हुए कई बड़े आतंकी हमलों को अंजाम दे चुका है। लश्कर-ए-तैयबा, 26/11 मुंबई हमला और पहलगाम में पर्यटकों की मौत की जिम्मेदारी इसी आतंकी संगठन ने ली थी। 

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पाकिस्तान में आजाद घूमते हैं लश्कर के आतंकी 

अंतिम यात्रा में लश्कर के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी के अलावा, लश्कर की राजनीतिक पार्टी पाकिस्तान मार्कजी मुस्लिम लीग (PMML) के अध्यक्ष इनाम उर रहमान भी मौजूद था। PMML को हाफिज सईद ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए बनाया था।

कौन है सैफुल्लाह कसूरी?

सैफुल्लाह कसूरी भारत के खिलाफ जमकर बोलता है। पहलगाम हमले के बाद उसने कई वीडियो में भारत को धमकी दी। उसने कहा था कि लश्कर समुद्री रास्ते से फिर 26/11 जैसा हमला कर सकता है। उसने भारत पर ही आतंकवाद चलाने का आरोप भी लगाया। 

सैफुल्लाह ने कहा था कि अगर भारत ने दबाव बढ़ाया तो अपने तरीके से पाकिस्तान जवाब देगा। सैफुल्लाह कसूरी को पाकिस्तानी सेना अपने कार्यक्रमों में बुलाती है और सैनिकों की अंतिम यात्रा में नमाज पढ़वाती है। पाकिस्तान सरकार इस आतंकी पर मेहरबान रहती है। 

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भारत में भी है शोएब अख्तर का फैन बेस

शोएब अख्तर साल 2011 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से रिटायर हो चुके हैं, लेकिन पाकिस्तान में कमेंट्री करते हैं। वह IPL में भी कमेंट्री कर चुके हैं। भारत ने पिछले साल पहलगाम हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर चलाकर लश्कर के ठिकानों को तबाह किया था। 

 

‘लोग रो रहे थे, सिया चुप थी…’, लोहागढ़ में केतन को ढूंढने वाले ने क्या कहा?


महाराष्ट्र के पुणे जिले के लोहागढ़ किले में केतन अग्रवाल की हत्या पर देशभर में चर्चा हो रही है। 25 साल के इस युवक की हत्या का आरोप, युवक के मंगेतर सिया पर है। 18 जून को लोहागढ़ के किले से गिरकर केतन की मौत हो गई थी। अब हर दिन इस केस में नए खुलासे हो रहे हैं। 

बचाव टीम के एक सदस्य सुनील गायकवाड़ ने आंखों देखी बताई, जब नीचे जाकर केतन की लाश ढूंढने में वह कामयाब हुए। जब वह घटनास्थल पर पहुंचे तो केतन का सिर कुचला हुआ था और उनके हाथ-पैरों पर कई चोटों के निशान थे। 

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सुनील गायकवाड़ ने कहा, ‘हमने एक मृत युवक को जमीन पर देखा। उसके सिर पर गंभीर चोटें थीं। वह मौके पर ही मर चुका था।’

सब रो रहे थे, सिया शांत थी

केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी पर इस हत्या की साजिश रचने का आरोप है। सुनील गायकवाड़ ने बताया कि शव निकालते समय कई लोग घबराए हुए थे और रो रहे थे, लेकिन सिया बिल्कुल शांत दिख रही थी। उसमें कोई खास भावना नहीं दिखी।

सुनील गायकवाड़:-
सिर दबा हुआ था। हाथ-पैर पर चोट के निशान थे। साथ के लोगों ने बताया कि शव निकालने के दौरान सिया मौजूद थी, लोग जोर-जोर से रो रहे थे, परेशान थे, सिया शांत और भावहीन नजर आ रही थी।

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चेतन कौन था?

पुलिस जांच में पता चला कि सिया और चेतन पिछले छह महीनों से लगातार संपर्क में थे। दोनों के बीच 2004 बार फोन पर बात हुई है। हत्या वाले दिन दोनों एक कैफे में मिले और किले में ठीक कहां धक्का देना है, इसकी प्लानिंग की। 

 

 

पुलिस क्या कह रही है?

पुलिस का कहना कि दोनों आरोपियों ने घटना से पहले और बाद में अपने फोन के सारे चैट इतिहास और रीसायकल बिन भी डिलीट कर दिए थे। सिया के भाई साहिल से भी पूछताछ की जा रही है।

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साहिल ने क्या बताया है?

साहिल ने पुलिस को बताया कि उसे सिया और चेतन के रिश्ते की जानकारी थी और उसने सिया को यह रिश्ता खत्म करने की सलाह दी थी। केतन की मौत शुरू में दुर्घटना लग रही थी, लेकिन बाद में सिया और चेतन की साजिश सामने आने पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया। केस की छानबीन चल रही है।