Home Blog

हूती और सऊदी अरब के बीच नई झड़प की वजह क्या, पाकिस्तान कैसे फंस गया?


अमेरिका और ईरान में जारी जंग के बीच एक और युद्ध का खतरा मध्य-पूर्व में गहराने लगा है। कई वर्षों बाद सऊदी अरब और हूती विद्रोही आमने-सामने आ चुके हैं। यमन के सना एयरपोर्ट पर हमले के बाद हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की घेरेबंदी की धमकी दी है। अगर तनाव बढ़ा तो इसका असर मध्य-पूर्व के दूसरे छोर बाब अल-मंडेब तक देखने को मिल सकता है। 

 

चार साल पहले 2022 में सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों ने युद्धविराम का ऐलान किया था। हालांकि सना पर हमले के बाद हूती विद्रोहियों का दावा है कि यह समझौता टूट चुका है। आइये समझते हैं कि सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच ताजा झड़प की वजह क्या है, क्या अब सऊदी अरब जंग में तटस्थ रहने की जगह अमेरिका की तरफ झुक रहा है?

 

यह भी पढ़ें: अमेरिका ने चाबहार का वॉचटावर उड़ाया, नए हमले शुरू; 30 की मौत और 260 घायल

कहां से शुरू हुआ मौजूदा तनाव?

मौजूदा तनाव की शुरुआत 3 जुलाई को हुई। एक ईरानी जहाज यमन की राजधानी सना में उतरा, लेकिन हूती विद्रोहियों ने आरोप लगाया कि सऊदी अरब की वायुसेना ने ईरानी जहाज को उतरने से रोकने का प्रयास किया। यह एक दशक में पहली बार था जब कोई ईरानी जहाज सना तक पहुंचा। इसी जहाज में सवार होकर हूती का प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचा। जहां दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के सुपुर्द-ए-खाक रस्म में हिस्सा लिया। 13 जुलाई को यही प्रतिनिधिमंडल ईरान के विमान से वापस लौटा तो बवाल मच गया।

ईरानी विमान को क्यों नहीं उतरने दिया गया?

सऊदी अरब और यमन की सरकार नहीं चाहते हैं कि सना में ईरान के जहाज उतरे। उनका आरोप है कि इन फ्लाइट की आड़ में ईरान हूती विद्रोहियों को हथियारों की खेप भेज रहा है। संयुक्त राष्ट्र में यमन के राजदूत अब्दुल्ला अल-सादी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इन्हीं आरोपों को दोहराया। उनका कहना है कि राजधानी सना में उतरने का प्रयास कर रहा विमान ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर से संबंधित था। उसमें कर्मचारी, सैन्य और दोहरे उपयोग वाले उपकरण थे। 

 

13 जुलाई को ईरान के महान एयर का एक विमान सना एयरपोर्ट पर उतरने वाला था। ऐन वक्त में सना एयरपोर्ट के रनवे पर बमबारी हो गई। विमान को आनन-फानन अपना रास्ता बदलना पड़ा। बाद में यह विमान लाल सागर तट पर स्थित होदेइदाह एयरपोर्ट पर उतारा गया। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने सना एयरपोर्ट पर हमले की जिम्मेदारी ली। उसने कहा कि यह कदम ईरानी विमान को सना में उतरने से रोकने की खातिर उठाया गया था।

तो सऊदी अरब को सजा जरूर मिलेगी!

हूती विद्रोहियों ने सना एयरपोर्ट हमले का दोषी सऊदी अरब को ठहराया। जवाब में दक्षिणी सऊदी अरब के आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बैलेस्टिक मिसाइलों से हमला किया। सऊदी अरब ने इन हमलों को रोकने का दावा किया। बाद में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की घेरेबंदी का ऐलान किया। आभा एयरपोर्ट हमले के बाद भी हूती के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद अल-बुखैती ने कहा कि हम मानते हैं कि इन हमलों को सऊदी अरब से अंजाम दिया गया। इसकी सजा जरूर मिलेगी। उनसे इस बयान से साफ है कि आने वाले दिनों में सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच संकट और गहराने वाला है।  

हूती विद्रोहियों ने खींच दी लाल लकीर

हूती विद्रोहियों ने कहा कि सना से तेहरान के बीच उड़ानें जारी रहेंगी। अगर सऊदी अरब बाधा बना तो उसके एयरपोर्ट को ठप्प करने से भी नहीं हिचकेंगे। खतरा यह भी है कि हूती विद्रोही लाल सागर के प्रवेश द्वार बाब अल-मंडेब को बंद कर सकते हैं। अगर ऐसा करेंगे तो सऊदी अरब को बड़ा झटका लगेगा, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से सऊदी अरब बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का निर्यात लाल सागर पर स्थित अपने यानबू बंदरगाह से कर रहा है। गाजा पर इजरायल के हमले के बाद हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंडेब में कई इजरायली और अन्य देशों के जहाजों को निशाना बनाया था।

 

यह भी पढ़ें: भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर प्लांट पर साइबर अटैक! 19 हजार फाइलें लीक का दावा

क्या अब खुलकर सामने आने लगा सऊदी अरब?

हूती विद्रोहियों के खिलाफ हमला करके सऊदी अरब ने स्पष्ट कर दिया है कि वह मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग में अब एक साइड लेने लगा है। अगर उसके हितों को ईरान खतरे में डालेगा तो सऊदी अरब न केवल हूती, बल्कि ईरान के खिलाफ भी खुलकर सामने आ सकता है। हालांकि अमेरिका के साथ ताजा झड़प में सऊदी अरब ने एक अलग रणनीति अपनाई है। उसने अबकी सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बजाय कतर, कुवैत, बहरीन, जॉर्डन और ओमान जैसे देशों को अधिक निशाना बना रहा है।

पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ा धर्मसंकट

जंग की शुरुआत में ईरान ने सऊदी अरब को निशाना बनाया। रियाद के दबाव के बावजूद पाकिस्तान ने अपनी सेना नहीं भेजी, जबिक दोनों देशों के बीच रक्षा समझौता है। हालांकि तब किसी तरह बातचीत बन गई। युद्धविराम के बीच पाकिस्तान ने प्रतीकात्मक तौर पर कुछ जहाज और सैनिकों को सऊदी अरब में तैनात किया है। मगर सबसे बड़ी परीक्षा यह है कि अगर हूती विद्रोहियों के साथ सऊदी अरब का संघर्ष बढ़ता है तो क्या पाकिस्तान इसमें रियाद का साथ देगा? क्योंकि वह अपने आंतरिक मामले में ही चौतरफा घिरा है।

‘नवनीत सहगल, हिरेन जोशी की जांच हो’, सट्टेबाजी केस में बघेल ने ऐसा क्यों कहा?


महादेव सट्टेबाजी ऐप केस में छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल का नाम भी सामने आया था। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीबीआई ने आरोप लगाए थे कि ऐप के प्रमोटर्स ने संरक्षण लेने के लिए भूपेश बघेल को 508 करोड़ रुपये दिए। अब इसी केस में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता विकास गर्ग को गिरफ्तार किए जाने के बाद भूपेश बघेल ने कहा है कि इस मामले में हिरेन जोशी और नवनीत सहगल की भी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाए हैं कि बार-बार कहने के बावजूद महादेव ऐप को बंद नहीं किया गया जबकि यह काम केंद्र सरकार को करना था।

 

इस केस में सीबीआई ने जब अपनी चार्जशीट दायर की थी तब भूपेश बघेल का नाम आरोपी के तौर पर शामिल किया गया था। अब भूपेश बघेल ने इसे अपनी छवि खराब करने के लिए किया गया अभियान बताया है। साथ ही, उन्होंने रिटायर हो चुके IAS अधिकारी नवनीत सहगल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी रहे हिरेन जोशी का नाम लेकर कहा है कि इन दोनों की भी जांच होनी चाहिए। बता दें कि हिरेन जोशी उस समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ काम कर रहे हैं जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे।   

 

यह भी पढ़ें: हजारों करोड़ का खेल, सट्टेबाजी का आरोप, BJP के विकास गर्ग के पीछे क्यों पड़ी ED?

अब क्या बोले भूपेश बघेल?

विकास गर्ग की गिरफ्तार के बारे में भूपेश बघेल ने कहा है, ‘महादेव ऐप में पहली कार्रवाई छत्तीसगढ़ में हुई। करीब 72 FIR हुई, सैकड़ों लोग गिरफ्तार हुए, हजारों बैंक खाते सीज किए गए। गैजेट्स और लैपटॉप जब्त किए गए और अनेक प्रदेशों में जाकर कार्रवाई की गई। तब केंद्र में बैठी सरकार ने हम पर आरोप लगाए कि महादेव सट्टा ऐप को संरक्षण देने का काम हमने किया। अब खबर आई है कि बीजेपी दिल्ली ईकाई के इकोनॉमिक अफेयर के जो चेयरमैन विकास गर्ग हैं, वह पकड़े गए हैं और 904 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई। यह कुछ इशारा करता है क्योंकि हम लोग बार-बार कहते थे कि महादेव ऐप बंद क्यों नहीं हो रहा है? इस ऐप को बंद करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। अब कारण समझ आ रहा है कि उन्हीं के लोग शामिल हैं।’ 

 

उन्होंने आगे कहा है, ‘मैं तो मांग करूंगा कि नवनीत सहगल और हिरेन जोशी, जो कि बहुत ताकतवर अधिकारी हुआ करते थे और उनके वाट्सऐप मैसेज से हेडलाइन तय होती थी, आज कल वे कहां हैं? सरकार उनकी जांच क्यों नहीं करती? उन तक ईडी क्यों नहीं पहुंचती? हम मांग करते हैं कि उनकी भी जांच हो। जब हम छत्तीसगढ़ की सरकार में थे तब हमने मांग की थी कि विदेश में बैठे लोगों के लिए लुकआउट सर्कुलर जारी किया जाए लेकिन आज डबल इंजन की सरकार है और वे लोग आज भी बाहर हैं। क्या बात है कि सरकार इस मामले को दबा रही है? मेरी मांग है कि नवनीत सहगल और हिरेन जोशी की भी जांच होनी चाहिए।’

 

यह भी पढ़ें: अचानक चर्चा में क्यों आया हरिके पत्तन? अब बनने जा रहा शहीद स्मारक

 

सट्टेबाजी के मामले पर भूपेश बघेल ने कहा, ‘यह एक सामाजिक बुराई है। इसी वजह से युवा और उनके परिवार बर्बाद हो रहे हैं। हमने इसी के चलते कार्रवाई की थी। तब चुनाव नजदीक था और केंद्र में इनकी सरकार है तो बदनाम करने के लिए इन्होंने मुझ पर सीधा आरोप लगाया कि महादेव को भी नहीं छोड़ा और 508 करोड़ का घपला किया है। मेरे घर में सीबीआई का छापा भी पड़ा। आप आरोप लगाकर निकल तो जाते हैं, किसी की छवि तो खराब कर लेते हैं लेकिन जब तार खुलते हैं तो पता चलता है कि ये उन्हीं का आदमी है।’

पृष्ठ अस्थायी रूप से अनुपलब्ध है

पृष्ठ अस्थायी रूप से अनुपलब्ध है – Khabargaon

502 / 503

सर्वर में तकनीकी समस्या आ गई है। कृपया रिफ्रेश करें या कुछ देर बाद पुनः प्रयास करें।

कुरान और बाइबल में घमंड को क्यों माना गया है दोष? जानिए इससे बचने का तरीका


घमंड एक ऐसी भावना है, जब व्यक्ति को अपनी किसी चीज पर अभिमान यानी अहंकार हो जाता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति खुद को दूसरों से बेहतर और ऊंचा समझने लगता है। ईसाई धर्म के पवित्र ग्रंथ बाइबल और इस्लाम के कुरान में घमंड को दोष माना गया है। जहां एक तरफ इस्लाम में माना जाता है कि अल्लाह घमंड करने वाले लोगों को पसंद नहीं करते हैं। साथ ही यह भी माना जाता है कि जिन्होंने अपने जीवनकाल में घमंड किया, उन्हें मृत्यु के बाद जन्नत नहीं मिलती। वहीं दूसरी तरफ ईसाई धर्म में व्यक्ति को अपनी किसी भी चीज पर घमंड न करने की सलाह दी गई है। बाइबल के अनुसार, घमंड सिर्फ एक दोष नहीं, बल्कि अन्य दोषों की जड़ है।

 

मुस्लिम धर्म के सबसे पवित्र धर्मग्रंथ कुरान में एक कहानी का जिक्र किया गया है। कुरान की सूरा अल-बकरा में बताया गया है कि घमंड की वजह से इबादतगुजार इब्लीस ने अल्लाह के आदेश का पालन नहीं किया और शैतान बन गया। इसके अलावा बाइबल में लूसिफर के पतन की कहानी हमें समझाती है कि कैसे उसे अपनी सुंदरता और बुद्धि पर घमंड हो गया था, जिस वजह से उसे स्वर्ग छोड़ना पड़ा। अब सवाल उठता है कि बाइबल और कुरान में घमंड को लेकर क्या कहा गया है।

 

यह भी पढ़ें: जुलाई महीने में कब है गुप्त नवरात्रि? पर्व का महत्व और पूजा की विधि जानें

 घमंड को लेकर कुरान?

कुरान की सूरा अन-नहल में लिखा है कि अल्लाह घमंड करने वालों को पसंद नहीं करते। जो लोग अपनी सोच-समझ पर घमंड करते हैं और खुद को दूसरों से बेहतर समझते हैं, ऐसे लोगों को कुरान में मुतकब्बिरीन कहा गया है। कुरान में साफ तौर पर बताया गया है कि घमंडी स्वभाव को देखकर अल्लाह नाराज होते हैं।

 

कुरान की सूरा अल-आराफ में बताया गया है कि घमंड की वजह से व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति सही और गलत के बीच अंतर नहीं कर पाता क्योंकि उसके ऊपर घमंड का पर्दा पड़ जाता है।

घमंड से बचने के उपाय

कुरान के मुताबिक, व्यक्ति को यह सोचना चाहिए कि जिन चीजों पर उसे घमंड है, वे सभी अस्थायी हैं। एक दिन हर व्यक्ति को अल्लाह के सामने जवाब देना है। इसलिए अपनी किसी भी चीज पर घमंड करने का कोई आधार नहीं है। हदीस में घमंड को दिल की एक बीमारी बताया गया है, जिसका इलाज बार-बार अल्लाह से माफी मांगना, दुआ करना और विनम्रता अपनाना है।

 

यह भी पढ़ें: 13 जुलाई का राशिफल, वृषभ को मिलेगी नौकरी में प्रमोशन, कर्क पर रहेगा काम का दबाव?

क्या है बाइबल की सीख?

बाइबल के नीतिवचन में बताया गया है कि घमंड और बुद्धि एक साथ नहीं रहते। यानी जिस व्यक्ति को अपनी बुद्धि पर घमंड हो जाता है, उसकी बुद्धि नष्ट होने लगती है। नीतिवचन में बताया गया है कि विनाश से पहले गर्व और ठोकर खाने से पहले घमंड आता है।’विनाश से पहले गर्व, और ठोकर खाने से पहले घमंड होता है।’नीतिवचन यह भी बताता है कि घमंड केवल एक बुराई नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के पतन का संकेत भी देता है।

बचने के उपाय

ईसाई धर्म में साफ तौर पर बताया गया है कि व्यक्ति को घमंड से बचने के लिए ईश्वर के सामने आत्मसमर्पण करना चाहिए। साथ ही जीवन में सेवा, विनम्रता और नरम स्वभाव अपनाना चाहिए।

‘पावरफुल लीडर्स शोर नहीं मचाते’, बेयर ग्रिल्स ने डोनाल्ड ट्रंप पर कसा तंज?


ब्रिटेन के फेमस एडवेंचर एक्सपर्ट और मैन वर्सेज वाइल्ड के होस्ट बेयर ग्रिल्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कुछ तस्वीरें शेयर की हैं। इसमें बेयर ग्रिल्स अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा, प्रिंस विलियम और PM मोदी के साथ नजर आ रहे हैं। बेयर ग्रिल्स ने कैप्शन में लिखा- मैं दुनिया के कई प्रभावशाली नेताओं से मिला हूं। सबसे बेहतरीन नेता वही होते हैं, जो ज्यादा शोर नहीं मचाते। 

 

सोशल मीडिया पर तस्वीरें खूब वायरल हो रही हैं, कई लोग कमेंट में ट्रंप की फोटो पोस्ट कर चुटकी ले रहे हैं। बेयर ग्रिल्स ने जो तस्वीरें शेयर की हैं, उसमें ट्रंप नहीं हैं। कई लोग बेयर ग्रिल्स के इस पोस्ट को ट्रंप पर तंज के रूप में देख रहे हैं।  

3 बड़े नेताओं के साथ की तस्वीरें की हैं शेयर

बेयर ग्रिल्स ने जो पहली तस्वीर शेयर की है, उसमें बराक ओबामा नजर आ रहे हैं। यह तस्वीर साल 2015 में आए ‘रनिंग वाइल्ड विद बेयर ग्रिल्स’ के एक खास एपिसोड के सूटिंग के दौरान की है। दूसरी फोटो में बेयर ग्रिल्स के साथ प्रिंस विलियम हैं। यह तस्वीर 2016 में लंदन में ‘टस्क ट्रस्ट अवार्ड्स’ के दौरान ली गई थी। 

तीसरी तस्वीर में प्रधानमंत्री मोदी नजर आ रहे हैं। यह तस्वीर कोरोना महामारी से पहले, साल 2019 की है। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेयर ग्रिल्स के साथ ‘मैन वर्सेज वाइल्ड’ के एक खास एपिसोड की शूटिंग की थी। 

जब PM मोदी ने बेयर ग्रिल्स के साथ किया था एडवेंचर

PM मोदी ने बेयर ग्रिल्स के साथ साल 2019 में उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में बेयर ग्रिल्स के साथ मैन वर्सेज वाइल्ड के एक खास एपिसोड की शूटिंग की थी। इस एपिसोड में PM मोदी ने प्रकृति से प्रेम, पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने की बात कही थी। उन्होंने “वसुधैव कुटुंबकम” का संदेश भी दिया था।

क्या है लोगों का रिएक्शन?

X पर बेयर ग्रिल्स के इस पोस्ट पर भर-भर के कमेंट आ रहे हैं। कुछ यूजर्स ने कमेंट में ट्रंप की तस्वीरें भी पोस्ट की हैं। कुछ का मानना है कि बेयर ग्रिल्स का यह पोस्ट ट्रंप की ओर इशारा करता है।  
 

 

हाफिज सईद पर NIA कोर्ट सख्त, जारी हुआ गैर-जमानती वारंट


जम्मू की विशेष NIA अदालत ने पहलगाम आतंकी हमले की जांच में बड़ा कदम उठाते हुए लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के संस्थापक और घोषित आतंकी हाफिज मोहम्मद सईद के खिलाफ ओपन-डेटेड गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया है। अदालत ने माना कि मामले की निष्पक्ष, प्रभावी और पूरी जांच के लिए हाफिज सईद की गिरफ्तारी और हिरासत में पूछताछ जरूरी है। कोर्ट का यह आदेश राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से दायर याचिका पर आया है।

 

विशेष NIA जज प्रेम सागर ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 75 के तहत दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि आरोपी की गिरफ्तारी जांच को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक है। अदालत ने वारंट जारी कर उसे कानून के अनुसार अमल में लाने के लिए NIA जम्मू के डीआईजी को भेज दिया है। हाफिज सईद को इस मामले में एफआईआर में आरोपी नंबर-8 बनाया गया है।

 

यह भी पढ़ें: यूपी में पैरामेडिकल शिक्षा में बड़ा बदलाव, 36 से अधिक डिप्लोमा कोर्स होंगे बंद

NIA ने कोर्ट के सामने रखे ये तर्क

NIA ने अदालत को बताया कि इस मामले में पूरक चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है। एजेंसी के अनुसार, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा का रहने वाला हाफिज सईद गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत घोषित आतंकी है और प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक है। जांच एजेंसी ने कहा कि वह पाकिस्तान में रहकर गिरफ्तारी से बच रहा है, इसलिए आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच को प्रभावी बनाने के लिए उसके खिलाफ ओपन-डेटेड गैर-जमानती वारंट जारी करना जरूरी था।

 

आपको बता दें कि यह मामला 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन मैदान में हुए आतंकी हमले से जुड़ा है। आतंकियों ने पर्यटकों और अन्य नागरिकों पर अंधाधुंध गोलीबारी की थी, जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई थी। इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था और इसके बाद केंद्र सरकार ने जांच की जिम्मेदारी NIA को सौंप दी थी।

 

यह भी पढ़ें: नासिक में महिला से छेड़छाड़, 15Km तक परिवार का किया पीछा, कार में तोड़फोड़

साजिश में हाफिज सईद की भूमिका का आरोप

NIA की जांच में दावा किया गया है कि पहलगाम हमले की साजिश पाकिस्तान में बैठे लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने रची थी। एजेंसी की पूरक चार्जशीट में हाफिज मोहम्मद सईद को इस पूरी साजिश का अहम आरोपी बताया गया है। अदालत के ताजा आदेश के बाद अब जांच एजेंसी के पास उसके खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया तेज करने का रास्ता साफ हो गया है। यह आदेश इस मामले की जांच को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

एग फ्रीजिंग का सोच रही हैं? कब और कितनी बार करा सकती हैं, एक्सपर्ट से जानें 


आज के समय में कई महिलाएं पढ़ाई, करियर, शादी में देरी या कुछ मेडिकल कारणों की वजह से प्रेग्नेंसी की प्लानिंग देर से कर रही हैं। लेकिन, उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं की प्रजनन क्षमता यानी फर्टिलिटी धीरे-धीरे कम होने लगती है। साथ ही एग्स की संख्या व गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। इस स्थिति में भविष्य के लिए प्रजनन क्षमता को सुरक्षित रखने में एग फ्रीजिंग एक नया और बेहतर विकल्प बनकर उभरा है।  

 

हालांकि, एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया हर महिला के लिए एक जैसी नहीं होती। इसलिए यह जान लेना जरूरी है कि एग फ्रीजिंग कब करानी चाहिए, कितने अंडे फ्रीज कराने चाहिए और इसके लिए कितने साइकल की जरूरत पड़ सकती है। इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर करते हुए फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. मारी ली ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी है।

फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. मारी ली की सलाह

इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर करते हुए फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. मारी ली ने लिखा:- एग फ्रीजिंग का फैसला लेना आमतौर उतना मुश्किल नहीं होता। सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि कितने अंडे फ्रीज कराने चाहिए, कितने साइकल की जरूरत पड़ेगी और इसकी शुरुआत कब करनी चाहिए। कुछ महिलाओं के लिए एक साइकल ही काफी होता है, जबकि कुछ को दो या उससे ज्यादा साइकल कराने पड़ सकते हैं। यह पूरी तरह महिला की उम्र, स्वास्थ्य और भविष्य में परिवार की योजना पर निर्भर करता है। ऐसी स्थिति में सही फर्टिलिटी विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहद जरूरी है। यह केवल एग फ्रीजिंग कराने या न कराने का फैसला नहीं है। सही जानकारी और सही योजना के साथ भविष्य के लिए बेहतर फैसला लेना जरूरी है।

डॉ. मारी ली बताती हैं कि आमतौर पर महिलाएं फर्टिलिटी एक्सपर्ट के पास जाने से पहले ही एग फ्रीज कराने का फैसला कर चुकी होती हैं। बगैर यह जाने कि कितने अंडे फ्रीज कराने चाहिए। उन्होंने यह बताया कि इसका फैसला उम्र, स्वास्थ्य और भविष्य में कितने बच्चे चाहती हैं, इन बातों को ध्यान में रखकर किया जाता है। 

कितने अंडे फ्रीज कराने चाहिए?

डॉ. मारी ली के मुताबिक, ज्यादातर महिलाएं फर्टिलिटी एक्सपर्ट के पास पहुंचने से पहले एग फ्रीज कराने का फैसला कर चुकी होती हैं। लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता कि कितने अंडे फ्रीज कराने चाहिए। इसका फैसला उम्र, स्वास्थ्य और भविष्य में कितने बच्चे चाहती हैं, इन बातों को ध्यान में रखकर किया जाता है। आगे पढ़ें उम्र के हिसाब से कितने एग फ्रीज कराने पर कितनी संभावना होती है।

किस उम्र में कितने एग फ्रीज कराने पर कितनी संभावना?

5 साल से कम उम्र में

एक्सपर्ट के मुताबिक, इस उम्र में 10 एग फ्रीज कराने पर कम से कम एक बच्चा होने की संभावना 71% से 75% तक हो सकती है। क्योंकि, इस उम्र में अंडों की गुणवत्ता और संख्या दोनों बेहतर होती हैं। इस समय ज्यादातर महिलाओं को एक ही साइकल में पर्याप्त अंडे मिल जाते हैं। हालांकि, इससे भविष्य में गर्भधारण की पूरी गारंटी नहीं मिलती।

 

35 से 37 साल के बीच
इस उम्र में 10 अंडे फ्रीज कराने पर कम से कम एक बच्चा होने की संभावना 57% से 67% तक हो सकती है। यह महिला की ओवरी की क्षमता पर भी निर्भर करता है। इस उम्र में कुछ महिलाओं के लिए एक साइकल काफी होता है। वहीं कुछ महिलाओं को दूसरा साइकल भी कराना पड़ सकता है। यह सामान्य माना जाता है।

 

38 से 40 साल के बीच
यह उम्र का वह पड़ाव है, जब महिलाओं में अंडों की गुणवत्ता तेजी से कम होने लगती है। इस उम्र में 10 अंडे फ्रीज कराने पर कम से कम एक बच्चा होने की संभावना 34% से 51% तक हो सकती है। आमतौर पर इस उम्र में ज्यादातर महिलाओं को एक से ज्यादा साइकल की जरूरत पड़ती है।

 

41 साल या उससे ज्यादा की उम्र में

एक्सपर्ट के मुताबिक, इस उम्र में 10 अंडे फ्रीज कराने पर कम से कम एक बच्चा होने की संभावना 12% से 26% तक रह जाती है। डॉक्टर की सलाह है कि इस उम्र में फर्टिलिटी एक्सपर्ट से यह भी चर्चा करनी चाहिए कि एग फ्रीजिंग सही विकल्प है या किसी दूसरे विकल्प पर विचार करना बेहतर रहेगा।

क्या ज्यादा एग फ्रीज कराने से प्रेग्नेंसी तय हो जाती है? 

डॉ. मारी ली यह भी बताया कि ज्यादा अंडे फ्रीज करा लेने से यह तय नहीं हो जाता कि भविष्य में प्रेग्नेंसी जरूर होगी। उन्होंने लिखा अगर आपको अपनी उम्र, सेहत और फर्टिलिटी से जुड़ी सही जानकारी हो, तो आप भविष्य की बेहतर योजना बना सकती हैं और सही फैसला ले सकती हैं। बताते चलें कि अंडे फ्रीज़ करने से प्रजनन क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता। फर्टिलिटी एक्सपर्ट से इस बारे में बात कर आप सही फैसला ले सकती हैं। 

 

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। एग फ्रीजिंग से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले फर्टिलिटी एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें।  

जुलाई महीने में कब है गुप्त नवरात्रि? पर्व का महत्व और पूजा की विधि जानें


हिन्दू पंचांग के अनुसार नवरात्रि पर्व साल में चार बार मनाया जाता है, जिनमें से 2 नवरात्रियों को गुप्त नवरात्रि माना जाता है। इन दो गुप्त नवरात्रियों का खास महत्व है, जिसमें जुलाई महीने का गुप्त नवरात्रि पर्व सबसे अहम माना जाता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक गुप्त नवरात्रि में तंत्र-मंत्र और शक्ति की उपासना की जाती है। गुप्त नवरात्रि को तांत्रिक सिद्धि के लिए बेहद खास माना जाता है। जुलाई महीने में ज्योतिष शास्त्र के अनोखे संयोग के बीच गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो रही है, जिससे यह पर्व आध्यात्मिक साधना के लिए बेहद शानदार माना जा रहा है।

 

गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा की जाती है। इसके साथ ही कई भक्त दस महाविद्याओं की साधना करते हैं। साथ ही व्रत भी रखते हैं। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक गुप्त नवरात्रि में महाविद्याओं की साधना करने से व्यक्ति को सिद्धि मिलती है। अब सवाल उठता है कि जुलाई महीने में गुप्त नवरात्रि कब से शुरू होगी और कब खत्म होगी।

 

यह भी पढ़ें: साप्ताहिक राशिफल: ग्रह-नक्षत्रों की बदलती चाल से यह हफ्ता आपके लिए कैसा रहेगा?

 

कब से शुरू होगी गुप्त नवरात्रि?

 

हिन्दू पंचांग के अनुसार जुलाई महीने में 9 दिनों की नवरात्रि मनाई जाएगी, जहां 14 जुलाई को दोपहर 3 बजकर 12 मिनट पर नवरात्रि के पहले दिन की शुरुआत होगी, जो 15 जुलाई को 11 बजकर 50 मिनट पर खत्म होगी। इसका उदया तिथि 15 जुलाई है, इसलिए गुप्त नवरात्रि पर्व का पहला दिन 15 जुलाई माना जाएगा। इस पर्व को 15 जुलाई से लेकर 23 जुलाई तक मनाया जाएगा।

 

धार्मिक जानकारों के मुताबिक गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा और आराधना की जाएगी। जानकारी के लिए बता दें, मां तारा, मां भुवनेश्वरी, मां काली, मां त्रिपुरसुंदरी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी, मां भैरवी और मां कमला की गुप्त नवरात्रि में आराधना करनी चाहिए।

 

यह भी पढ़ें: सफलता का ढिंढोरा पीटना क्यों माना गया है गलत? जानिए भगवत गीता और महाभारत की सीख

कलश स्थापना का सही मुहूर्त

 

गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा और उनके नौ रूपों की पूजा की जाती है। इस पर्व के पहले दिन सभी अपने मंदिर में कलश की स्थापना करते हैं। इस बार 15 जुलाई की सुबह भक्त अपने घर के पूजा स्थान पर कलश की स्थापना कर सकते हैं। कलश स्थापित करने के बाद भक्तों को विधिवत पूजा-पाठ करनी चाहिए।

 

गुप्त नवरात्रि का महत्व

 

कई धार्मिक जानकारों का मानना है कि गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा करने से व्यक्ति के ग्रह दोष का प्रभाव कम होता है। साथ ही लोगों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। कई ज्योतिषियों का मानना है कि जो भक्त गुप्त नवरात्रि पर्व पर व्रत रखते हैं, उन्हें जीवन में शिक्षा, नौकरी, व्यापार और विवाह से जुड़ी चुनौतियों का सामना नहीं करना पड़ता है।

 

नोट- इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

‘हम होर्मुज के रक्षक, कीमत भी वसूलेंगे’ डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट पर ठोंका दावा


पश्चिम एशिया में एक बार फिर से स्थितियां खराब हो रही हैं। पिछले तीन-चार दिनों में ईरान के ऊपर हुए हमलों के बाद सोमवार को अमेरिका और ईरान ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट पर उनका नियंत्रण है। इस घटनाक्रम ने जंग खत्म करने के लिए जारी कूटनीतिक कोशिशों पर भी गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।

 

इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने अपने ट्रुथ सोशल पर कहा है कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट में ईरान के खिलाफ नाकेबंदी बहाल कर रहा है और वह सुरक्षित आवाजाही के लिए जहाजों से फीस वसूलेगा।

 

यह भी पढ़ें: जैसे सत्ता में आए, वैसे ही होंगे विदा? नेपाल के Zen Z बालेन शाह से नाराज क्यों?

सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप की घोषणा

ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका और ईरान के एक-दूसरे को निशाना बनाकर किए गए ताजा हमलों के बाद एक सोशल मीडिया पोस्ट में यह घोषणा की। फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद ईरान के होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण स्थापित करने से पहले वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इस अहम मार्ग से होकर गुजरता था।

 

 

 

डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘होर्मुज स्ट्रेट खुला है और ईरान के साथ या उसके बिना भी खुला रहेगा। हम ईरानी नाकाबंदी को फिर से लागू कर रहे हैं, जिसका नाम इसलिए रखा गया है क्योंकि यह सिर्फ ईरान के जहाजों या कस्टमर्स को अंदर आने या बाहर जाने से रोक रहा है। बाकी सभी देश होर्मुज स्ट्रेट का सही और खुला इस्तेमाल कर सकेंगे।’

 

यह भी पढ़ें: सिंधु का नाम लेकर मरने की कसम क्यों खा रहे पाकिस्तानी, भारत ने ऐसा क्या किया?

‘होर्मुज स्ट्रेट का रखवाला’

उन्होंने आगे कहा, ‘अमेरिका को अब से ‘होर्मुज स्ट्रेट का रखवाला’ के नाम से जाना जाएगा। लेकिन इस तरह और निष्पक्षता के तौर पर दुनिया के इस बहुत अस्थिर हिस्से को बचाव और सुरक्षा देने के काम के लिए जरूरी सभी खर्चों के लिए भेजे गए सभी कार्गो पर 20% की दर से प्रतिपूर्ति किया जाएगा। प्रोसेस और बनना तुरंत शुरू हो जाएगा।’

 

दरअसल, रविवार को तनाव उस समय और बढ़ गया जब ईरान ने ओमान के तट के पास होर्मुज स्ट्रेट में एक कंटेनर जहाज को निशाना बनाया। इस हमले ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि वैश्विक स्तर पर कभी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के लगभग पांचवें हिस्से की आवाजाही वाले इस समुद्री मार्ग का मुद्दा ही दोनों देशों के बीच वार्ता का सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है।

हाई कोर्ट ने 27 लोगों को बताया था विदेशी, सुप्रीम कोर्ट ने हटाया टैग


सुप्रीम कोर्ट ने असम के 27 लोगों पर लगा ‘विदेशी’ का टैग हटा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को असम के 27 लोगों को विदेशी घोषित करने वाले गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसलों को रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नागरिकता का फैसला बहुत गंभीर मुद्दा है, इसलिए इसे पूरी तरह निष्पक्ष, कानूनी और उचित तरीके से तय की जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इन सभी 27 मामलों को वापस असम के विदेशी ट्रिब्यूनल को भेज दिया है। अब इन ट्रिब्यूनलों में इन लोगों के केस दोबारा सुनवाई के साथ नए सिरे से तय किए जाएंगे।

यह भी पढ़ें: बहुविवाह पर रोक, लिव-इन का रजिस्ट्रेशन जरूरी, असम के UCC बिल में क्या-क्या है?

असम में क्यों बार-बार सामने आते हैं ऐसे मामले?

असम में कई लोगों की नागरिकता पर शक है कि वे भारतीय नागरिक हैं या नहीं। ऐसे मामलों की सुनवाई विदेशी ट्रिब्यूनल में होती है। अगर ट्रिब्यूनल किसी को विदेशी मान लेता है तो मामला पेचीदा हो जाता है।

जिस व्यक्ति पर ट्रिब्यूनल यह फैसला देता है, उसके पास हाई कोर्ट में अपील दायर करने का वक्त होता है। इन 27 लोगों के मामले में हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले को सही माना था, जिससे वे विदेशी करार हो गए थे। 

यह भी पढ़ें: टिफिन में बीफ ले आए 5 बच्चे, हिंदू छात्रों को ऑफर किया, अब निकाले जाएंगे

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों हाई कोर्ट का फैसला पलटा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रक्रिया सही तरीके से नहीं हुई, इसलिए दोबारा सुनवाई होनी चाहिए। कोर्ट ने साफ कहा कि किसी भी व्यक्ति की नागरिकता छीनने का फैसला हल्के में नहीं लिया जा सकता। यह संवैधानिक महत्व से जुड़ा है, इसलिए इसकी प्रक्रिया उचित होनी चाहिए।