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‘पावरफुल लीडर्स शोर नहीं मचाते’, बेयर ग्रिल्स ने डोनाल्ड ट्रंप पर कसा तंज?


ब्रिटेन के फेमस एडवेंचर एक्सपर्ट और मैन वर्सेज वाइल्ड के होस्ट बेयर ग्रिल्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कुछ तस्वीरें शेयर की हैं। इसमें बेयर ग्रिल्स अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा, प्रिंस विलियम और PM मोदी के साथ नजर आ रहे हैं। बेयर ग्रिल्स ने कैप्शन में लिखा- मैं दुनिया के कई प्रभावशाली नेताओं से मिला हूं। सबसे बेहतरीन नेता वही होते हैं, जो ज्यादा शोर नहीं मचाते। 

 

सोशल मीडिया पर तस्वीरें खूब वायरल हो रही हैं, कई लोग कमेंट में ट्रंप की फोटो पोस्ट कर चुटकी ले रहे हैं। बेयर ग्रिल्स ने जो तस्वीरें शेयर की हैं, उसमें ट्रंप नहीं हैं। कई लोग बेयर ग्रिल्स के इस पोस्ट को ट्रंप पर तंज के रूप में देख रहे हैं।  

3 बड़े नेताओं के साथ की तस्वीरें की हैं शेयर

बेयर ग्रिल्स ने जो पहली तस्वीर शेयर की है, उसमें बराक ओबामा नजर आ रहे हैं। यह तस्वीर साल 2015 में आए ‘रनिंग वाइल्ड विद बेयर ग्रिल्स’ के एक खास एपिसोड के सूटिंग के दौरान की है। दूसरी फोटो में बेयर ग्रिल्स के साथ प्रिंस विलियम हैं। यह तस्वीर 2016 में लंदन में ‘टस्क ट्रस्ट अवार्ड्स’ के दौरान ली गई थी। 

तीसरी तस्वीर में प्रधानमंत्री मोदी नजर आ रहे हैं। यह तस्वीर कोरोना महामारी से पहले, साल 2019 की है। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेयर ग्रिल्स के साथ ‘मैन वर्सेज वाइल्ड’ के एक खास एपिसोड की शूटिंग की थी। 

जब PM मोदी ने बेयर ग्रिल्स के साथ किया था एडवेंचर

PM मोदी ने बेयर ग्रिल्स के साथ साल 2019 में उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में बेयर ग्रिल्स के साथ मैन वर्सेज वाइल्ड के एक खास एपिसोड की शूटिंग की थी। इस एपिसोड में PM मोदी ने प्रकृति से प्रेम, पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने की बात कही थी। उन्होंने “वसुधैव कुटुंबकम” का संदेश भी दिया था।

क्या है लोगों का रिएक्शन?

X पर बेयर ग्रिल्स के इस पोस्ट पर भर-भर के कमेंट आ रहे हैं। कुछ यूजर्स ने कमेंट में ट्रंप की तस्वीरें भी पोस्ट की हैं। कुछ का मानना है कि बेयर ग्रिल्स का यह पोस्ट ट्रंप की ओर इशारा करता है।  
 

 

हाफिज सईद पर NIA कोर्ट सख्त, जारी हुआ गैर-जमानती वारंट


जम्मू की विशेष NIA अदालत ने पहलगाम आतंकी हमले की जांच में बड़ा कदम उठाते हुए लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के संस्थापक और घोषित आतंकी हाफिज मोहम्मद सईद के खिलाफ ओपन-डेटेड गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया है। अदालत ने माना कि मामले की निष्पक्ष, प्रभावी और पूरी जांच के लिए हाफिज सईद की गिरफ्तारी और हिरासत में पूछताछ जरूरी है। कोर्ट का यह आदेश राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से दायर याचिका पर आया है।

 

विशेष NIA जज प्रेम सागर ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 75 के तहत दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि आरोपी की गिरफ्तारी जांच को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक है। अदालत ने वारंट जारी कर उसे कानून के अनुसार अमल में लाने के लिए NIA जम्मू के डीआईजी को भेज दिया है। हाफिज सईद को इस मामले में एफआईआर में आरोपी नंबर-8 बनाया गया है।

 

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NIA ने कोर्ट के सामने रखे ये तर्क

NIA ने अदालत को बताया कि इस मामले में पूरक चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है। एजेंसी के अनुसार, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा का रहने वाला हाफिज सईद गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत घोषित आतंकी है और प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक है। जांच एजेंसी ने कहा कि वह पाकिस्तान में रहकर गिरफ्तारी से बच रहा है, इसलिए आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच को प्रभावी बनाने के लिए उसके खिलाफ ओपन-डेटेड गैर-जमानती वारंट जारी करना जरूरी था।

 

आपको बता दें कि यह मामला 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन मैदान में हुए आतंकी हमले से जुड़ा है। आतंकियों ने पर्यटकों और अन्य नागरिकों पर अंधाधुंध गोलीबारी की थी, जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई थी। इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था और इसके बाद केंद्र सरकार ने जांच की जिम्मेदारी NIA को सौंप दी थी।

 

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साजिश में हाफिज सईद की भूमिका का आरोप

NIA की जांच में दावा किया गया है कि पहलगाम हमले की साजिश पाकिस्तान में बैठे लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने रची थी। एजेंसी की पूरक चार्जशीट में हाफिज मोहम्मद सईद को इस पूरी साजिश का अहम आरोपी बताया गया है। अदालत के ताजा आदेश के बाद अब जांच एजेंसी के पास उसके खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया तेज करने का रास्ता साफ हो गया है। यह आदेश इस मामले की जांच को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

एग फ्रीजिंग का सोच रही हैं? कब और कितनी बार करा सकती हैं, एक्सपर्ट से जानें 


आज के समय में कई महिलाएं पढ़ाई, करियर, शादी में देरी या कुछ मेडिकल कारणों की वजह से प्रेग्नेंसी की प्लानिंग देर से कर रही हैं। लेकिन, उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं की प्रजनन क्षमता यानी फर्टिलिटी धीरे-धीरे कम होने लगती है। साथ ही एग्स की संख्या व गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। इस स्थिति में भविष्य के लिए प्रजनन क्षमता को सुरक्षित रखने में एग फ्रीजिंग एक नया और बेहतर विकल्प बनकर उभरा है।  

 

हालांकि, एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया हर महिला के लिए एक जैसी नहीं होती। इसलिए यह जान लेना जरूरी है कि एग फ्रीजिंग कब करानी चाहिए, कितने अंडे फ्रीज कराने चाहिए और इसके लिए कितने साइकल की जरूरत पड़ सकती है। इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर करते हुए फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. मारी ली ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी है।

फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. मारी ली की सलाह

इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर करते हुए फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. मारी ली ने लिखा:- एग फ्रीजिंग का फैसला लेना आमतौर उतना मुश्किल नहीं होता। सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि कितने अंडे फ्रीज कराने चाहिए, कितने साइकल की जरूरत पड़ेगी और इसकी शुरुआत कब करनी चाहिए। कुछ महिलाओं के लिए एक साइकल ही काफी होता है, जबकि कुछ को दो या उससे ज्यादा साइकल कराने पड़ सकते हैं। यह पूरी तरह महिला की उम्र, स्वास्थ्य और भविष्य में परिवार की योजना पर निर्भर करता है। ऐसी स्थिति में सही फर्टिलिटी विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहद जरूरी है। यह केवल एग फ्रीजिंग कराने या न कराने का फैसला नहीं है। सही जानकारी और सही योजना के साथ भविष्य के लिए बेहतर फैसला लेना जरूरी है।

डॉ. मारी ली बताती हैं कि आमतौर पर महिलाएं फर्टिलिटी एक्सपर्ट के पास जाने से पहले ही एग फ्रीज कराने का फैसला कर चुकी होती हैं। बगैर यह जाने कि कितने अंडे फ्रीज कराने चाहिए। उन्होंने यह बताया कि इसका फैसला उम्र, स्वास्थ्य और भविष्य में कितने बच्चे चाहती हैं, इन बातों को ध्यान में रखकर किया जाता है। 

कितने अंडे फ्रीज कराने चाहिए?

डॉ. मारी ली के मुताबिक, ज्यादातर महिलाएं फर्टिलिटी एक्सपर्ट के पास पहुंचने से पहले एग फ्रीज कराने का फैसला कर चुकी होती हैं। लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता कि कितने अंडे फ्रीज कराने चाहिए। इसका फैसला उम्र, स्वास्थ्य और भविष्य में कितने बच्चे चाहती हैं, इन बातों को ध्यान में रखकर किया जाता है। आगे पढ़ें उम्र के हिसाब से कितने एग फ्रीज कराने पर कितनी संभावना होती है।

किस उम्र में कितने एग फ्रीज कराने पर कितनी संभावना?

5 साल से कम उम्र में

एक्सपर्ट के मुताबिक, इस उम्र में 10 एग फ्रीज कराने पर कम से कम एक बच्चा होने की संभावना 71% से 75% तक हो सकती है। क्योंकि, इस उम्र में अंडों की गुणवत्ता और संख्या दोनों बेहतर होती हैं। इस समय ज्यादातर महिलाओं को एक ही साइकल में पर्याप्त अंडे मिल जाते हैं। हालांकि, इससे भविष्य में गर्भधारण की पूरी गारंटी नहीं मिलती।

 

35 से 37 साल के बीच
इस उम्र में 10 अंडे फ्रीज कराने पर कम से कम एक बच्चा होने की संभावना 57% से 67% तक हो सकती है। यह महिला की ओवरी की क्षमता पर भी निर्भर करता है। इस उम्र में कुछ महिलाओं के लिए एक साइकल काफी होता है। वहीं कुछ महिलाओं को दूसरा साइकल भी कराना पड़ सकता है। यह सामान्य माना जाता है।

 

38 से 40 साल के बीच
यह उम्र का वह पड़ाव है, जब महिलाओं में अंडों की गुणवत्ता तेजी से कम होने लगती है। इस उम्र में 10 अंडे फ्रीज कराने पर कम से कम एक बच्चा होने की संभावना 34% से 51% तक हो सकती है। आमतौर पर इस उम्र में ज्यादातर महिलाओं को एक से ज्यादा साइकल की जरूरत पड़ती है।

 

41 साल या उससे ज्यादा की उम्र में

एक्सपर्ट के मुताबिक, इस उम्र में 10 अंडे फ्रीज कराने पर कम से कम एक बच्चा होने की संभावना 12% से 26% तक रह जाती है। डॉक्टर की सलाह है कि इस उम्र में फर्टिलिटी एक्सपर्ट से यह भी चर्चा करनी चाहिए कि एग फ्रीजिंग सही विकल्प है या किसी दूसरे विकल्प पर विचार करना बेहतर रहेगा।

क्या ज्यादा एग फ्रीज कराने से प्रेग्नेंसी तय हो जाती है? 

डॉ. मारी ली यह भी बताया कि ज्यादा अंडे फ्रीज करा लेने से यह तय नहीं हो जाता कि भविष्य में प्रेग्नेंसी जरूर होगी। उन्होंने लिखा अगर आपको अपनी उम्र, सेहत और फर्टिलिटी से जुड़ी सही जानकारी हो, तो आप भविष्य की बेहतर योजना बना सकती हैं और सही फैसला ले सकती हैं। बताते चलें कि अंडे फ्रीज़ करने से प्रजनन क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता। फर्टिलिटी एक्सपर्ट से इस बारे में बात कर आप सही फैसला ले सकती हैं। 

 

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। एग फ्रीजिंग से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले फर्टिलिटी एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें।  

जुलाई महीने में कब है गुप्त नवरात्रि? पर्व का महत्व और पूजा की विधि जानें


हिन्दू पंचांग के अनुसार नवरात्रि पर्व साल में चार बार मनाया जाता है, जिनमें से 2 नवरात्रियों को गुप्त नवरात्रि माना जाता है। इन दो गुप्त नवरात्रियों का खास महत्व है, जिसमें जुलाई महीने का गुप्त नवरात्रि पर्व सबसे अहम माना जाता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक गुप्त नवरात्रि में तंत्र-मंत्र और शक्ति की उपासना की जाती है। गुप्त नवरात्रि को तांत्रिक सिद्धि के लिए बेहद खास माना जाता है। जुलाई महीने में ज्योतिष शास्त्र के अनोखे संयोग के बीच गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो रही है, जिससे यह पर्व आध्यात्मिक साधना के लिए बेहद शानदार माना जा रहा है।

 

गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा की जाती है। इसके साथ ही कई भक्त दस महाविद्याओं की साधना करते हैं। साथ ही व्रत भी रखते हैं। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक गुप्त नवरात्रि में महाविद्याओं की साधना करने से व्यक्ति को सिद्धि मिलती है। अब सवाल उठता है कि जुलाई महीने में गुप्त नवरात्रि कब से शुरू होगी और कब खत्म होगी।

 

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कब से शुरू होगी गुप्त नवरात्रि?

 

हिन्दू पंचांग के अनुसार जुलाई महीने में 9 दिनों की नवरात्रि मनाई जाएगी, जहां 14 जुलाई को दोपहर 3 बजकर 12 मिनट पर नवरात्रि के पहले दिन की शुरुआत होगी, जो 15 जुलाई को 11 बजकर 50 मिनट पर खत्म होगी। इसका उदया तिथि 15 जुलाई है, इसलिए गुप्त नवरात्रि पर्व का पहला दिन 15 जुलाई माना जाएगा। इस पर्व को 15 जुलाई से लेकर 23 जुलाई तक मनाया जाएगा।

 

धार्मिक जानकारों के मुताबिक गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा और आराधना की जाएगी। जानकारी के लिए बता दें, मां तारा, मां भुवनेश्वरी, मां काली, मां त्रिपुरसुंदरी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी, मां भैरवी और मां कमला की गुप्त नवरात्रि में आराधना करनी चाहिए।

 

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कलश स्थापना का सही मुहूर्त

 

गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा और उनके नौ रूपों की पूजा की जाती है। इस पर्व के पहले दिन सभी अपने मंदिर में कलश की स्थापना करते हैं। इस बार 15 जुलाई की सुबह भक्त अपने घर के पूजा स्थान पर कलश की स्थापना कर सकते हैं। कलश स्थापित करने के बाद भक्तों को विधिवत पूजा-पाठ करनी चाहिए।

 

गुप्त नवरात्रि का महत्व

 

कई धार्मिक जानकारों का मानना है कि गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा करने से व्यक्ति के ग्रह दोष का प्रभाव कम होता है। साथ ही लोगों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। कई ज्योतिषियों का मानना है कि जो भक्त गुप्त नवरात्रि पर्व पर व्रत रखते हैं, उन्हें जीवन में शिक्षा, नौकरी, व्यापार और विवाह से जुड़ी चुनौतियों का सामना नहीं करना पड़ता है।

 

नोट- इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

‘हम होर्मुज के रक्षक, कीमत भी वसूलेंगे’ डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट पर ठोंका दावा


पश्चिम एशिया में एक बार फिर से स्थितियां खराब हो रही हैं। पिछले तीन-चार दिनों में ईरान के ऊपर हुए हमलों के बाद सोमवार को अमेरिका और ईरान ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट पर उनका नियंत्रण है। इस घटनाक्रम ने जंग खत्म करने के लिए जारी कूटनीतिक कोशिशों पर भी गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।

 

इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने अपने ट्रुथ सोशल पर कहा है कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट में ईरान के खिलाफ नाकेबंदी बहाल कर रहा है और वह सुरक्षित आवाजाही के लिए जहाजों से फीस वसूलेगा।

 

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सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप की घोषणा

ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका और ईरान के एक-दूसरे को निशाना बनाकर किए गए ताजा हमलों के बाद एक सोशल मीडिया पोस्ट में यह घोषणा की। फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद ईरान के होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण स्थापित करने से पहले वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इस अहम मार्ग से होकर गुजरता था।

 

 

 

डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘होर्मुज स्ट्रेट खुला है और ईरान के साथ या उसके बिना भी खुला रहेगा। हम ईरानी नाकाबंदी को फिर से लागू कर रहे हैं, जिसका नाम इसलिए रखा गया है क्योंकि यह सिर्फ ईरान के जहाजों या कस्टमर्स को अंदर आने या बाहर जाने से रोक रहा है। बाकी सभी देश होर्मुज स्ट्रेट का सही और खुला इस्तेमाल कर सकेंगे।’

 

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‘होर्मुज स्ट्रेट का रखवाला’

उन्होंने आगे कहा, ‘अमेरिका को अब से ‘होर्मुज स्ट्रेट का रखवाला’ के नाम से जाना जाएगा। लेकिन इस तरह और निष्पक्षता के तौर पर दुनिया के इस बहुत अस्थिर हिस्से को बचाव और सुरक्षा देने के काम के लिए जरूरी सभी खर्चों के लिए भेजे गए सभी कार्गो पर 20% की दर से प्रतिपूर्ति किया जाएगा। प्रोसेस और बनना तुरंत शुरू हो जाएगा।’

 

दरअसल, रविवार को तनाव उस समय और बढ़ गया जब ईरान ने ओमान के तट के पास होर्मुज स्ट्रेट में एक कंटेनर जहाज को निशाना बनाया। इस हमले ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि वैश्विक स्तर पर कभी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के लगभग पांचवें हिस्से की आवाजाही वाले इस समुद्री मार्ग का मुद्दा ही दोनों देशों के बीच वार्ता का सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है।

हाई कोर्ट ने 27 लोगों को बताया था विदेशी, सुप्रीम कोर्ट ने हटाया टैग


सुप्रीम कोर्ट ने असम के 27 लोगों पर लगा ‘विदेशी’ का टैग हटा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को असम के 27 लोगों को विदेशी घोषित करने वाले गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसलों को रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नागरिकता का फैसला बहुत गंभीर मुद्दा है, इसलिए इसे पूरी तरह निष्पक्ष, कानूनी और उचित तरीके से तय की जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इन सभी 27 मामलों को वापस असम के विदेशी ट्रिब्यूनल को भेज दिया है। अब इन ट्रिब्यूनलों में इन लोगों के केस दोबारा सुनवाई के साथ नए सिरे से तय किए जाएंगे।

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असम में क्यों बार-बार सामने आते हैं ऐसे मामले?

असम में कई लोगों की नागरिकता पर शक है कि वे भारतीय नागरिक हैं या नहीं। ऐसे मामलों की सुनवाई विदेशी ट्रिब्यूनल में होती है। अगर ट्रिब्यूनल किसी को विदेशी मान लेता है तो मामला पेचीदा हो जाता है।

जिस व्यक्ति पर ट्रिब्यूनल यह फैसला देता है, उसके पास हाई कोर्ट में अपील दायर करने का वक्त होता है। इन 27 लोगों के मामले में हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले को सही माना था, जिससे वे विदेशी करार हो गए थे। 

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सुप्रीम कोर्ट ने क्यों हाई कोर्ट का फैसला पलटा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रक्रिया सही तरीके से नहीं हुई, इसलिए दोबारा सुनवाई होनी चाहिए। कोर्ट ने साफ कहा कि किसी भी व्यक्ति की नागरिकता छीनने का फैसला हल्के में नहीं लिया जा सकता। यह संवैधानिक महत्व से जुड़ा है, इसलिए इसकी प्रक्रिया उचित होनी चाहिए। 

 

गर्भधारण से पहले क्यों जरूरी है गर्भाधान संस्कार? जानिए आयुर्वेद क्या कहता है


आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव, खराब खान-पान और देर से परिवार शुरू करने की वजह से कई कपल्स को बच्चा पैदा करने में दिक्कतें आ रही हैं। साथ ही कुछ महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान भी तरह-तरह की परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। इसीलिए अब लोग सिर्फ इलाज पर निर्भर नहीं रह रहे हैं, बल्कि गर्भधारण से पहले ही अपनी सेहत को बेहतर बनाने पर जोर दे रहे हैं। इसी वजह से आयुर्वेद का ‘गर्भाधान संस्कार’ तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक जीवनशैली और तनाव का सबसे ज्यादा असर प्रेग्नेंसी पर पड़ रहा है।

इन समस्याओं को देखते हुए कई कपल्स अब गर्भधारण की योजना बनाने से पहले आयुर्वेद की मदद ले रहे हैं और ‘गर्भाधान संस्कार’ जैसे कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए आगे आ रहे हैं।

 

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क्या है गर्भाधान संस्कार?

आयुर्वेद में गर्भाधान संस्कार को गर्भधारण की तैयारी का पहला कदम माना जाता है। इसका मतलब सिर्फ बच्चा पैदा करना नहीं बल्कि होने वाले माता-पिता को पहले से शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से तैयार करना है। माना जाता है कि अगर माता-पिता पहले से स्वस्थ होंगे तो प्रेग्नेंसी भी बेहतर होगी और बच्चे का विकास भी अच्छी तरह हो सकेगा।

इसमें क्या-क्या किया जाता है?

कर्नाटक के उडुपी स्थित एसडीएम आयुर्वेद महाविद्यालय एवं अस्पताल में कई सालों से यह सुविधा दी जा रही है। यहां आने वाले कपल्स को उनकी सेहत के हिसाब से सलाह दी जाती है। इसमें खान-पान में बदलाव, रोजमर्रा की अच्छी आदतें अपनाना, योग और मानसिक तनाव कम करने जैसे उपाय बताए जाते हैं। इसका मकसद शरीर को गर्भधारण के लिए तैयार करना होता है।

 

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आयुर्वेद क्या कहता है?

आयुर्वेद के अनुसार, स्वस्थ गर्भधारण के लिए चार चीजें सबसे जरूरी मानी गई हैं। इनमें सही समय, महिला का स्वस्थ रिप्रोडक्टिव सिस्टम, शरीर को पूरा पोषण मिलना और स्वस्थ ऐग और स्पर्म शामिल हैं। आयुर्वेद इसे खेती से जोड़कर समझाता है। जैसे अच्छी फसल के लिए उपजाऊ जमीन, सही मौसम, पर्याप्त पानी और अच्छे बीज की जरूरत होती है उसी तरह स्वस्थ बच्चे के लिए भी इन सभी बातों का ध्यान रखना जरूरी माना गया है।

डॉक्टर ने क्या कहा?

एसडीएम आयुर्वेद महाविद्यालय एवं अस्पताल की प्राचार्य और वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ममता के. वी. का कहना है कि ‘गर्भ’ का मतलब भ्रूण और ‘आधान’ का मतलब उसकी स्थापना है। उनके अनुसार गर्भाधान संस्कार सिर्फ एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं बल्कि माता-पिता को शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से तैयार करने की प्रक्रिया है ताकि बच्चे को जीवन की बेहतर शुरुआत मिल सके।

मेष, मकर, मीन सावधान, सिंह के बदलेंगे दिन, कैसी रहेगी भाग्यदशा? पढ़ें राशिफल


12 जुलाई का दिन बेहद ऊर्जावान और सकारात्मक रहने वाला है। अंक ज्योतिष के अनुसार आज का मूलांक 3 है, जो देवगुरु बृहस्पति के प्रभाव को दर्शाता है। इससे आज ज्ञान, बुद्धि और सही निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि होगी। ग्रह-नक्षत्रों की गणना के अनुसार आज चंद्रमा वृषभ राशि में गोचर करेंगे, जिससे मानसिक शांति और स्थिरता का वातावरण बना रहेगा। सूर्य देव की कृपा से आज का दिन सभी राशियों के लिए आत्ममंथन करने और नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ने के लिए बेहद अच्छा है।


आज की ऊर्जा कर्म और भाग्य के सुंदर संतुलन को दर्शाती है। रविवार का दिन होने के कारण प्रशासनिक कार्यों, सरकारी योजनाओं और नए निवेशों में रफ्तार मिलेगी। आज की आकाशीय ऊर्जा हमें धैर्य रखने और दूसरों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने के लिए प्रेरित कर रही है। व्यापार के लिए आज का दिन नई रणनीतियों को आकार देने के लिए शानदार है, वहीं पारिवारिक मोर्चे पर यह अपनों के साथ आनंदमय समय बिताने का संकेत दे रहा है। आइए जानते हैं मेष से लेकर मीन तक सभी 12 राशियों के लिए आज का दिन कैसा रहने वाला है।

 

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राशिफल


मेष राशि


सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। व्यापार में नए ऑर्डर मिलने से उत्साह बढ़ेगा। धन लाभ के योग हैं लेकिन अचानक होने वाले खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी है। जीवनसाथी के साथ संबंध अच्छे रहेंगे।
आज क्या करें: सूर्य देव को जल अर्पित करें।
आज क्या न करें: आज किसी को उधार देने से बचें।


वृषभ राशि


चंद्रमा आपकी ही राशि में हैं, जिससे मानसिक स्पष्टता रहेगी। व्यापार में बड़ा मुनाफा हो सकता है। आर्थिक पक्ष मजबूत रहेगा। अटका हुआ धन वापस मिलने की पूरी संभावना है। लव पार्टनर के साथ रोमांटिक समय बीतेगा।
आज क्या करें: गाय को हरी घास या रोटी खिलाएं।
आज क्या न करें: किसी भी काम में जल्दबाजी या हड़बड़ाहट न दिखाएं।


मिथुन राशि


नौकरीपेशा जातकों को आज काम का दबाव झेलना पड़ सकता है। व्यापार में सामान्य गति रहेगी। खर्चों की अधिकता रहेगी, इसलिए बजट बनाकर चलना आज के दिन बेहद जरूरी है।
आज क्या करें: पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करें।
आज क्या न करें: आज किसी अजनबी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।

 

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कर्क राशि


ऑफिस में आपके प्रदर्शन की सराहना होगी। धन कमाने के नए स्रोत बनेंगे। निवेश के लिए दिन काफी अच्छा और लाभदायक है। दोस्तों के साथ मेलजोल बढ़ेगा। जीवनसाथी से कोई सुंदर गिफ्ट मिल सकता है।
आज क्या करें: माता-पिता के पैर छूकर दिन की शुरुआत करें।
आज क्या न करें: आज किसी बहस में न उलझें।


सिंह राशि


आज का दिन आपके लिए उपलब्धियों से भरा रहेगा। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। संपत्ति से जुड़े मामलों में सफलता मिलेगी। पिता का पूरा सहयोग मिलेगा।
आज क्या करें: सूर्य चालीसा का पाठ करें।
आज क्या न करें: अहंकार और अति-आत्मविश्वास से दूर रहें।


कन्या राशि


भाग्य का साथ मिलने से रुके हुए काम पूरे होंगे। व्यापारिक यात्राएं सुखद और फलदायी रहेंगी। भाग्यवश धन लाभ होगा। धार्मिक कार्यों में धन खर्च होने के योग हैं।
आज क्या करें: किसी जरूरतमंद व्यक्ति को पीले अनाज का दान करें।
आज क्या न करें: आज अपनी गुप्त बातें किसी से साझा न करें।

 

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तुला राशि


नौकरी में चुनौतियां आ सकती हैं। साझेदारी के बिजनेस में थोड़ा सतर्क रहने की आवश्यकता है। धन के लेनदेन में सावधानी बरतें। आज निवेश करने से बचना ही समझदारी होगी। जीवनसाथी की भावनाओं का सम्मान करें।
आज क्या करें: महामृत्युंजय मंत्र का 11 बार जप करें।
आज क्या न करें: आज के दिन कोई नया बड़ा सौदा फाइनल न करें।


वृश्चिक राशि


टीम वर्क से आज आपको बड़ी सफलता मिलेगी। नए व्यावसायिक संबंध स्थापित होंगे, जो भविष्य में लाभ देंगे। आमदनी अच्छी रहेगी। पुराने कर्ज को चुकाने में आज सफलता मिल सकती है।
आज क्या करें: हनुमान चालीसा का पाठ करें और बूंदी का प्रसाद बांटें।
आज क्या न करें: शाम के समय घर में अंधेरा न रखें।


धनु राशि


नौकरी में विरोधियों पर आप भारी पड़ेंगे। व्यापार में कड़ी मेहनत के बाद ही सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। पैतृक संपत्ति से लाभ होने के योग हैं। वित्तीय प्रबंधन पर ध्यान देने की जरूरत है।
आज क्या करें: मंदिर में कपूर जलाएं और गुरुजनों का आशीर्वाद लें।
आज क्या न करें: आज के दिन किसी से कर्ज या लोन न लें।

 

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मकर राशि


विद्यार्थियों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए दिन बेहतरीन है। कार्यक्षेत्र में आपकी बुद्धिमानी की तारीफ होगी। आज धन लाभ के सुंदर योग बने हुए हैं। लॉटरी या शेयर बाजार से लाभ हो सकता है। प्रेम जीवन में नया मोड़ आएगा।
आज क्या करें: उगते सूर्य को अर्घ्य दें और गायत्री मंत्र का जप करें।
आज क्या न करें: अपनी योजनाओं को बीच में अधूरा न छोड़ें।


कुंभ राशि


नौकरीपेशा लोगों को आज काम पर अधिक ध्यान देना होगा। प्रॉपर्टी के बिजनेस से जुड़े लोगों को लाभ हो सकता है। सुख-सुविधाओं की चीजों पर धन खर्च होगा। बजट का संतुलन न बिगड़ने दें। माता के स्वास्थ्य की चिंता रह सकती है।
आज क्या करें: शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करें।
आज क्या न करें: किसी के बहकावे में आकर अपनी नौकरी से समझौता न करें।


मीन राशि


आपके साहस और पराक्रम में वृद्धि होगी। छोटे भाई-बहनों और सहकर्मियों के सहयोग से व्यापार में बड़ी सफलता मिलेगी। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। छोटी दूरी की यात्राओं से धन लाभ के मार्ग खुलेंगे।
आज क्या करें: विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या सुनें।
आज क्या न करें: आलस को अपने ऊपर हावी न होने दें।

 

नोट: यह राशिफल ज्योतिषीय मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच भीषण बमबारी, 5 देशों पर हमला; 140 स्थानों पर तबाही


अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ चुका है। एक हफ्ते में अमेरिका ने ईरान पर हमलों की तीसरी लहर शुरू कर दी है। जवाब में ईरान ने ओमान, कुवैत और बहरीन पर हमला किया। आईआरजीसी ने अगले आदेश तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का ऐलान किया है। कुछ जगहों ने ईरान के बजाय ओमान तट के करीब से गुजर रहे हैं। ईरान ने स्पष्ट कहा कि मार्ग बदलना स्वीकार्य नहीं है। उधर, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया पर धमकी दी कि ईरान ने गलत विकल्प चुना। अब उसे इसकी कीमत चुकानी होगी।  

 

यूएस सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसकी सेनाओं ने ईरान के खिलाफ तीसरे दौर के हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य से स्वतंत्र रूप से गुजरने वाले नाविकों और वाणिज्यिक जहाजों पर हमला करने की ईरान की क्षमता को लगातार कमजोर कर उसे भारी कीमत चुकाने पर मजबूर कर रहा है।

 

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होर्मुज पर जहाजों पर हमले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पहुंच चुका है। ओमान तट के पास कंटेनर पर अटैक के बाद अमेरिका ने ईरान के बंदर अब्बास, सिरिक और चाबहार और केशम द्वीप पर हमले किए। जवाब में ईरान ने ओमान, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। 

 

ओमान: ईरान ने बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, कतर और ओमान पर हमले की जिम्मेदारी ली है। ओमान के दुक्म बंदरगाह पर ईरान ने रसद सहायता केंद्र और ईंधन भरने वाले प्लेटफार्मों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। ईरान का दावा है कि हमले में यह केंद्र नष्ट हो चुके हैं। 

 

कतर: ईरान ने अल उदैद एयरबेस पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। कतर के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ईरान की तरफ से आने वाली मिसाइलों को रोक दिया गया। वहीं कतर के गृह मंत्रालय के मुताबिक एक बच्चे समेत तीन लोग घायल हैं। उधर, ईरान का दावा है कि उसके हमले में कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और लड़ाकू विमान का एक रखरखाव केंद्र तबाह हो गया।

 

जॉर्डन: ईरान ने जॉर्डन के प्रिंस हसन एयरबेस पर भी हमला किया। ईरान का कहना है कि उसके बैलेस्टिक मिसाइल हमले में एमक्यू-9 ड्रोन रखने वाले हैंकर को नुकसान पहुंचा है। एक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर भी तबाह हुआ है। 

 

बहरीन: ईरान के हमले के बीच बहरीन में सायरन बजने की आवाज सुनी गई। ईरान के मुताबिक उसने बहरीन में अमेरिका के रडार साइट और संचार प्रणाली को निशाना बनाया है। 

 

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कुवैत: अमेरिका के सहयोगी कुवैत पर ईरान ने ड्रोन से हमला किया। यहां गोला-बारूद डिपो, रडार साइट और पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाकर हमलों को अंजाम दिया गया।

अमेरिका ने कितने स्थानों पर की बमबारी?

अमेरिका सेना ने अपनी तीसरी लहर में ईरान के भीतर 140 स्थानों पर भीषण बमबारी की। पहले चरण में 80 और दूसरे में 90 स्थानों पर बमबारी की गई थी। यूएस सेंट्रल कमांड ने बताया कि ताजा हमलों में ईरानी मिसाइल और ड्रोन साइट, नौसैनिक क्षमताएं, गोला-बारूद भंडारण सुविधाएं, संचार नेटवर्क और तटीय निगरानी स्थल को नष्ट किया गया है। अमेरिकी सेना के मुताबिक एक हफ्ते में 300 से अधिक लक्ष्यों पर हमलों को अंजाम दिया गया है।

वंदे मातरम और जन गण मन में ‘महान’ कौन, क्यों मचा है ऐसा शोर?


केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों को एक बार फिर सख्त निर्देश दिया है कि सरकारी कार्यक्रमों में जब भी राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों बजाए या गाए जाएं तो पहले ‘वंदे मातरम’ बजाना या गाना होगा, उसके बाद ‘जन गण मन’ गाया या बजाया जाएगा। गृह मंत्रालय ने 9 जुलाई को सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्रीय मंत्रालयों के सचिवों को पत्र लिखकर कहा कि इस नियम का सख्ती से पालन किया जाए। 

केंद्र सरकार का निर्देश है कि ‘वंदे मातरम’ और ‘जन गण मन’ को सही शब्दों, सही उच्चारण और सही लय में ही गाया या बजाया जाए। फरवरी महीने में भी सरकार ने आदेश दिया था कि वंदे मातरम के सभी छह छंद पूरे गाए जाएं, जो करीब 3 मिनट 10 सेकंड का होता है। अब इस नियम को दोबारा याद दिलाया गया है।

‘वंदे मातरम’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ का हिस्सा है। यह गीत, भारत माता की आराधना है। स्वतंत्रता आंदोलन के समय कांग्रेस ने इसके पहले दो छंदों को अपनाया था। बाद में इसे राष्ट्रगीत का दर्जा दिया गया। ‘जन गण मन’ की रचना रवींद्रनाथ टैगोर ने की थी।

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वंदे मातरम पर क्या कानून लाने जा रही है सरकार?

सरकार जल्द ही संसद के मानसून सत्र में एक बिल लाने जा रही है, जिसमें वंदे मातरम का अपमान करने या इसे गाने में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाया जाएगा।  राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 3 के तहत राष्ट्रगान, राष्ट्रध्वज और संविधान का अपमान करने पर तीन साल तक की सजा हो सकती है। सरकार चाहती है कि सभी संस्थाएं और संगठन इन निर्देशों का पूरी तरह पालन करें।

वंदे मातरम या जन गण मन महान कौन?

संवैधानिक मामलों की जानकार और सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता रुपाली पंवार बताती हैं, ‘वंदे मातरम और जन गण मन दोनों ही महान हैं, लेकिन अलग-अलग भूमिकाओं में। ये बहस राजनीतिक और भावनात्मक है, न कि संवैधानिक। जन गण मन पर किसी वर्ग को कोई आपत्ति नहीं है, वहीं वंदे मातरम को आलोचक सेक्युलर विचारधारा के खिलाफ मानते हैं। इसके सिर्फ दो छंद राष्ट्रगीत के तौर पर स्वीकृत हैं लेकिन जन गण मन में किसी खास धर्म या देवी का सीधा जिक्र नहीं है।’

कितनी पुरानी ये बहस है?

दीवान लॉ कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर निखिल गुप्ता बताते हैं, ’24 जनवरी 1950 को संविधान सभा में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने जन गण मन को राष्ट्रगान और वंदे मातरम को राष्ट्रगीत घोषित करते हुए कहा था कि दोनों को समान सम्मान मिलेगा। अब सरकार कह रही है कि यह मूल भावना थी, जिसे अब कानूनी रूप दिया गया है लेकिन सेक्युलर वर्ग को वंदे मातरम पर आपत्ति है। इस्लाम में ईश्वर के अतिरिक्त कोई पूजा के योग्य नहीं है, इसलिए ज्यादातर मुसलमानों को इस पर ऐतराज है।’

आलोचना क्या है?

असदुद्दीन ओवैसी और अबू आजमी जैसे मुस्लिम नेताओं का साफ कहना है कि वे वंदे मातरम का सम्मान करते हैं लेकिन वंदे मातरम नहीं कहेंगे। उनका धर्म, उन्हें ईश्वर के अलावा किसी की पूजा से रोकता है। यह उनका धार्मिक अधिकार है कि वे वंदे मातरम न कहें। असदुद्दीन ओवैसी तो यहां तक कह चुके हैं, ‘अगर आप मुझे किसी और की पूजा करने के लिए मजबूर करते हैं, तो मेरी धार्मिक आजादी कहां रही?’

 

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि जन-गण-मन को संविधान के तहत विशेष दर्जा प्राप्त है, जबकि वंदे मातरम की ऐतिहासिक अहमियत तो है पर दोनों को समान कानूनी स्तर पर रखना उचित नहीं होगा। 

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सरकार की सोच क्या है?

कानूनी और संवैधानिक रूप से आज भी जन गण मन ही भारत का राष्ट्रगान है और वंदे मातरम राष्ट्रगीत है। सरकार का दावा है कि नए नियम बस दोनों को बराबर सम्मान देने के लिए लाए जा रहे हैं। यह किसी को महान घोषित करने का मामला नहीं है। 

क्या कह रहा है पक्ष?

नेशनलिस्ट काग्रेंस पार्टी (शरद पवार) के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी कहते हैं, ‘मैंने पहले भी कई इंटरव्यू में कहा है, मुसलमान ‘वंदे मातरम’ नहीं गा सकते क्योंकि उनकी मान्यता के अनुसार, वे केवल एक ईश्वर की पूजा करते हैं और उनमें विश्वास रखते हैं। इसलिए, वे ईश्वर के अलावा किसी और के सामने या किसी और चीज के सामने अपना सिर नहीं झुका सकते।’

कुछ ऐसा ही तर्क कांग्रेस सांसद जेपी माथर ने कहा, ‘यह ठीक है, और निश्चित रूप से हम सभी को वंदे मातरम और राष्ट्रगान का सम्मान करना चाहिए। मैंने वह नोटिफिकेशन या निर्देश नहीं देखा है। जिस तरह से यह सरकार काम करती है, वह हमेशा इसमें कोई न कोई राजनीतिक एजेंडा शामिल करने या लोगों पर किसी तरह का दबाव डालने की कोशिश करती है।’

क्या कहते हैं सत्ता पक्ष के लोग?

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा, ‘वंदे मातरम भारत की आत्मा की आवाज है। देश की आजादी की लड़ाई वंदे मातरम के नारे के साथ लड़ी गई थी। इसलिए, वंदे मातरम गाना या बोलना हर भारतीय के लिए गर्व की बात है और हर नागरिक को ऐसा करना चाहिए।’
 
बीजेपी सांसद शशांक मणि ने कहा, ‘वंदे मातरम को कांग्रेस और पूर्ववर्ती सरकारों ने भुला दिया था। उन्होंने सिर्फ पहले दो छंद रखे थे और हमने देखा, पार्लियामेंट में जो डिबेट हुई तो उसमें ये निकल कर आया कि सभी छंद बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय जी ने 150 साल पहले लिखे थे और इसके उच्चारण से मां भारती का जयगान होता है। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को आगे बढ़ाया जा सकता है। इसी कारणवश हमारी सरकार ने ये लागू किया है कि वंदे मातरम का पूर्ण गान होना चाहिए और पहले होना चाहिए।’

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वंदे मातरम vs जन गण मन का शोर क्यों?

वंदे मातरम मूल रूप से 6 छंदों का है। पहली दो पंक्तियां मातृभूमि की स्तुति हैं। बाद की पंक्तियों में दुर्गा और हिंदू देवियों का रूपक लिया गया है। अल्पसंख्यकों को इस पर ऐतराज है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वंदे मातरम को खूब गाया गया। क्रांतिकारियों ने इसे सुर बना लिया। यह रचना 7 नवंबर 1875 को लिखी गई थी। गीत के कुछ छंदों में देवी-पूजा और युद्धाभिलाषा जैसी पंक्तियां हैं। 1930 से 40 के दौर में रवीन्द्रनाथ टैगोर और सुभाष चंद्र बोस के बीच भी इस गीत को लेकर बहस हुई।

1937 तक जवाहर लाल नेहरू,  महात्मा गांधी और रवींद्र नाथ टैगोर की सलाह पर दो छंदों को स्वीकार किया। तब कुछ मुस्लिम नेताओं ने दुर्गा और लक्ष्मी के रूपक वाले बाद के छंदों और उपन्यास के संदर्भों पर आपत्ति जताई। यह पूरा गीत, राष्ट्रगान नहीं बन सका। एक पक्ष आज कहता है कि वंदे मातरम स्वाधीनता संग्राम का असली गान है, इसे पूरा गाने का अधिकार और अनिवार्यता से जुड़ा कानून बनना चाहिए। दूसरे पक्ष का तर्क है कि धर्मनिरपेक्ष भारत में यह हिंदू धर्म की ओर झुका है, इसे संवैधानिक मजबूरी नहीं बनानी चाहिएष जन गण मन इससे बेहतर विकल्प है।