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अगस्त महीने में किन लोगों पर होगी धन की बरसात, किसे झेलना पड़ेगा आर्थिक नुकसान?


अगस्त का यह महीना कई लोगों के लिए फायदेमंद रहेगा, जिन्हें धन लाभ होगा। इस महीने के पहले दिन शनिदेव का विशेष प्रभाव रहेगा, जो यह संदेश देता है कि लोगों को मेहनत करनी होगी, तभी जाकर धन लाभ हो पाएगा। अंक ज्योतिष के नजरिए से आज का मूलांक 8 है, जो शनि ग्रह का अंक माना जाता है। अगस्त महीने में सभी लोगों पर भगवान शिव की कृपा बरसेगी, जिससे धन लाभ, नौकरी और व्यापार से जुड़े मामलों में लोगों को लाभ होगा। साथ ही इस महीने कई लोगों पर सूर्य देव का प्रभाव रहेगा, जिससे लोगों का आत्मविश्वास और लीडरशिप क्वालिटी बेहतर होगी।

 

इस महीने ग्रहों की स्थिति यह संकेत दे रही है कि मेहनत और सही योजना बनाने वाले लोगों को आर्थिक रूप से लाभ मिल सकता है। कुछ राशियों को अचानक लाभ के अवसर प्राप्त होंगे, जबकि कुछ को अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखने की जरूरत होगी। निवेश, नौकरी में बदलाव और व्यवसाय का विस्तार करना इस महीने कई लोगों के लिए शुभ रहेगा। धैर्य, अनुशासन और विवेकपूर्ण निर्णय पूरे महीने सफलता की कुंजी रहेंगे।

 

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राशिफल

 

मेष राशि

 

अगस्त महीना आपके लिए धन लाभ कमाने के कई अवसर लेकर आ रहा है, जिससे आपको आर्थिक लाभ होगा। ऑफिस में आपकी मेहनत की सराहना होगी और आय के नए स्रोत बन सकते हैं। पुराने अटके हुए पैसे वापस मिलने के संकेत हैं।

क्या करें: शेयर बाजार या नए व्यवसाय में रणनीतिक निवेश करें।

क्या न करें: जल्दबाजी या गुस्से में आकर कोई वित्तीय सौदा न करें।

 

वृषभ राशि

 

आर्थिक रूप से यह महीना मिला-जुला रहेगा। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन होने से लाभ मिल सकता है, हालांकि अचानक कुछ बड़े खर्च आपकी बजट योजना को बिगाड़ सकते हैं।

क्या करें: अपने मासिक बजट को सख्ती से पालन करें।

क्या न करें: किसी भी व्यक्ति को बिना लिखित प्रमाण के पैसा उधार न दें।

 

मिथुन राशि

 

आपको नए व्यापारिक संपर्कों की वजह से इस महीने आर्थिक लाभ मिलेगा। फ्रीलांसिंग या बिजनेस से जुड़े लोगों को विदेशी प्रोजेक्ट्स से अच्छा धन लाभ होने के योग हैं, जहां आपकी बुद्धि काम आएगी।

क्या करें: अपनी बातचीत के वजह से नए सौदों को अंतिम रूप दें।

क्या न करें: एक साथ कई जगह निवेश करने से बचें।

 

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कर्क राशि

 

इस महीने आर्थिक मामलों में थोड़ा सतर्क रहने की आवश्यकता है। संपत्ति से जुड़े विवाद या पारिवारिक जरूरतों पर खर्च बढ़ सकता है। दफ्तर में सहकर्मियों से सहयोग मिलेगा, लेकिन निर्णय अपने विवेक से लें।

क्या करें: शेयर बाजार में जानकारों की सलाह लेकर धन निवेश करें।

क्या न करें: बिना सोचे-समझे धन खर्च न करें।

 

सिंह राशि

 

इस महीने के पहले दिन का मूलांक 1 है, जिसके कारण सूर्य का प्रभाव आपको आर्थिक मजबूती देगा। आपकी लीडरशिप क्वालिटी की वजह से व्यापार में अच्छा मुनाफा मिलेगा। अगर कोई नया प्रोजेक्ट शुरू करना चाहते हैं, तो यह समय बिल्कुल सही है।

क्या करें: नए व्यापारिक विचारों पर काम शुरू करें।

क्या न करें: अपने भीतर आत्मविश्वास के साथ अहंकार को हावी न होने दें।

 

कन्या राशि

 

आर्थिक स्थिति के लिए यह समय आपके लिए बेहद शानदार रहेगा। ऑफिस में आपकी काम करने की क्षमता की वजह से धन लाभ होगा। पुराने कर्जों को चुकाने में सफलता मिलेगी, जिससे मानसिक तनाव कम होगा।

क्या करें: अपने खातों और निवेशों की नियमित समीक्षा करें।

क्या न करें: बिना पूरी जानकारी के किसी नई स्कीम में पैसा न लगाएं।

 

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तुला राशि

 

जो लोग पार्टनरशिप में बिजनेस करते हैं, उन्हें कामकाज में जबरदस्त आर्थिक सुधार देखने को मिलेगा। कला, फैशन और मीडिया से जुड़े लोगों को बेहतरीन अवसर मिलेंगे। आपकी आर्थिक स्थिति पहले से अधिक संतुलित और मजबूत होगी।

क्या करें: बिजनेस पार्टनर के साथ संबंध सुधारें।

क्या न करें: दिखावे की वस्तुओं पर अनावश्यक खर्च न करें।

 

वृश्चिक राशि

 

इस महीने आर्थिक मामलों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। नौकरी में स्थान परिवर्तन या जिम्मेदारियों में बदलाव के साथ धन लाभ के योग हैं। कोई भी गुप्त निवेश करने से पहले अनुभवी व्यक्ति की सलाह लें।

क्या करें: केवल सुरक्षित योजनाओं में पैसे लगाएं।

क्या न करें: जोखिम भरे या शॉर्टकट वाले तरीकों से पैसा कमाने का प्रयास न करें।

 

धनु राशि

 

अगस्त का महीना आर्थिक समृद्धि लेकर आएगा। किस्मत का पूरा साथ मिलेगा और पैतृक संपत्ति से लाभ होने की संभावना है। दूर की यात्राएं आपके लिए धन कमाने के नए द्वार खोल सकती हैं।

क्या करें: अपनी आय का कुछ हिस्सा भविष्य की योजनाओं के लिए निवेश करें।

क्या न करें: उत्साह में आकर अपनी वित्तीय योजनाएं किसी से शेयर न करें।

 

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मकर राशि

 

इस महीने आपको धन से जुड़े फैसले सोच-समझकर लेने होंगे, वरना आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। आपकी निरंतर मेहनत रंग लाएगी। रियल एस्टेट और धातु के कारोबार से जुड़े लोगों को बड़ा लाभ हो सकता है।

क्या करें: धैर्य के साथ अपनी वित्तीय योजनाओं पर टिके रहें।

क्या न करें: अपने काम को टालने की आदत न अपनाएं।

 

कुंभ राशि

 

नया इनोवेटिव आइडिया आपके लिए धन कमाने का रास्ता बनाएगा। हालांकि शुरुआती लागत थोड़ी अधिक हो सकती है, जिससे बजट में कुछ खिंचाव महसूस होगा। कुल मिलाकर आर्थिक स्थिति नियंत्रण में रहेगी।

क्या करें: तकनीक माध्यमों का उपयोग करके व्यवसाय बढ़ाएं।

क्या न करें: बजट से बाहर जाकर किसी नए उद्यम में बड़ा पैसा न फंसाएं।

 

मीन राशि

 

आपका ज्ञान आपको सही वित्तीय निर्णय लेने में मदद करेगा। क्रिएटिव काम से जुड़े लोगों और अध्यात्म से जुड़े लोगों को इस महीने धन लाभ होने की संभावना है। हालांकि फालतू खर्चों पर लगाम लगाने से बचत में वृद्धि होगी।

क्या करें: वित्तीय सलाहकार की मदद से अपना पोर्टफोलियो व्यवस्थित करें।

क्या न करें: भावनाओं में बहकर कोई आर्थिक फैसला न लें।

 

नोट: यह राशिफल ज्योतिषीय मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

उजैर बलोच के भाई जुबैर पर ‘धुरंधर’ अंदाज में फायरिंग, ल्यारी में बवाल


पाकिस्तान के कराची शहर के ल्यारी में एक बार फिर गैंगवार शुरू हो गया है। ल्यारी में कुख्यात गैंगस्टर उजैर बालोच के भाई जुबैर बालोच को दो अज्ञात हमलावरों ने मोटरसाइकिल से आकर गोली मार दी। जुबैर अपने सिंगू लेन वाले घर के बाहर बैठे हुआ था, तभी हमला हुआ। उसकी उम्र 40 साल है।

जुबैर, घर के बाहर था, तभी मास्क लगाए हमलावर मोटरसाइकिल पर आए और उन्होंने उस पर अचानक फायरिंग शुरू कर दी। गोली जुबैर के सीने और पेट में लगी। गंभीर रूप से घायल जुबैर को तुरंत सिविल अस्पताल कराची ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने इमरजेंसी सर्जरी की। 

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अंतिम सांसें गिन रहा है जुबैर?

जुबैर बलोच हालत अभी भी नाजुक बताई जा रही है। इस गोलीबारी में दो आम राहगीर भी घायल हो गए, उनमें से एक की हालत गंभीर है। हमलावर जब भाग रहे थे, तभी पास की एक दुकान के मालिक ने जवाबी फायरिंग की, जिसके बाद वे ओझल हो गए।

किसने की हत्या की कोशश?

घटनास्थल का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। सड़क पर अचानक हुई गोलीबारी और लोगों के भागने का नजर साफ झलक रहा है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। 

 

कराची पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि हमला निजी दुश्मनी की वजह से हुआ है या पुराने गैंगवार के चलते। पुलिस ने कहा कि दोनों संभावनाओं पर गहराई से छानबीन की जा रही है।

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जुबैर बलोच कौन है?

जुबैर बालोच साल 2012 में कई आपराधिक मामलों में गिरफ्तार हुआ था। वह पिछले साल जेल से रिहा हुआ था। उसका बड़ा भाई उजैर बालोच अभी भी जेल में बंद है। उजैर बलोच को 2012 में पुलिस अधिकारियों पर हमले के मामले में मिलिट्री कोर्ट ने 12 साल की सजा सुनाई थी। बाद में 2020 में उसे जासूसी के आरोप में भी सजा मिली। 

ल्यारी क्या है?

ल्यारी इलाका कई दशकों से ड्रग तस्करी, वसूली और गैंग वॉर का बड़ा केंद्र रहा है। यहां रहमान डकैत के नाम से बदनाम सरदार अब्दुल रहमान बालोच और उनके प्रतिद्वंद्वी अरशद पप्पू जैसे गैंगस्टरों के बीच खूनी संघर्ष हुआ था। 

 

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फिर से ल्यारी में हो रहा गैंगवार?

रहमान डकैत की 2009 में पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई थी। उसके चचेरे भाई उजैर बालोच ने उनके गुट की कमान संभाली। इस इलाके में राजनीतिक दलों का भी कथित तौर पर संरक्षण मिलता रहा। यहां अपराध और राजनीति का गहरा गठजोड़ बना। पुलिस ज़ुबैर बालोच पर हुए हमले के पीछे के कारणों का पता लगाने में जुटी हुई है। ल्यारी में एक बार फिर तनाव है।

कारोबारी कैसे बनेंगे युवा? PMEGP योजना में लोन-सब्सिडी मिलने में बीत जा रहा समय


प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत आवेदन करने के बाद लोन और सब्सिडी मिलने में देरी पर लंबे समय से सवाल उठ रहा है। कई लोगों की शिकायत है कि आवेदन से लोन और सब्सिडी की प्रक्रिया में करीब 7 महीने तक का समय लग जाता है। बीती 30 जुलाई 2026 को लोकसभा सांसद श्रेयस एम. पटेल ने भी सरकार से पूछा कि PMEGP के तहत लोगों को मिलने वाले लोन और सब्सिडी में देरी क्यों हो रही है? सरकार का कहना है कि आवेदन को प्रोसेस करने में औसतन 58 दिन, बैंक की ओर से लोन मंजूर करने में 70 दिन और KVIC की ओर से मार्जिन मनी सब्सिडी जारी करने में 84 दिन लगते हैं। यानी आवेदन से लेकर सब्सिडी जारी होने तक पूरी प्रक्रिया में औसतन 212 दिन यानी करीब 7 महीने का समय लगता है। यह समय हर मामले में एक जैसा नहीं होता। बैंक, राज्य और आवेदन की स्थिति के अनुसार इसमें और ज्यादा समय भी लग सकता है। 

 

दूसरी ओर सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 5 साल में 7.36 लाख से ज्यादा आवेदन बैंकों ने रिजेक्ट किए। यह पूरा आंकड़ा 50 फीसदी से ज्यादा है। 2025-26 की बात करें तो इस साल 1,63,205 आवेदन आए, जिनमें से 74,499 आवेदन रिजेक्ट हो गए। यह आंकड़ा 45.65 फीसदी रहा। इसके अलावा, करीब 41,612 आवेदन पेंडिंग ही रह गए। 

 

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क्या है PMEGP?

PMEGP (प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम) भारत सरकार की एक योजना है। इसका मकसद देश के बेरोजगार युवाओं को खुद का बिजनेस या उद्योग शुरू करने के लिए आर्थिक मदद लोन और सब्सिडी देना है। इस योजना के तहत मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र में नए उद्यम शुरू करने के लिए वित्तीय मदद दी जाती है, ताकि रोजगार के नए अवसर पैदा हों। इसके तहत सरकार, इसके तहत मैन्युफैक्चरिंग के लिए 50 लाख और सर्विस सेक्टर से जुड़े कारोबार के लिए 20 लाख तक का लोन ले सकते हैं।  

 

इस योजना में लोन लेने वाले लोगों को 2 खास कैटेगरी के भीतर भी 2 भागों में बांटा गया है। पहली कैटेगरी सामान्य वर्ग है, दूसरी कैटेगरी SC/ST/OBC/ महिला और दिव्यांगों के लिए है। इन दोनों की कैटेगरी में ग्रामीण और शहरी लोगों को अलग-अलग सब्सिडी भी दिया जाता है।  शहरी क्षेत्र के सामान्य लोगों को 15% और स्पेशल कैटेगरी को 25% की सब्सिडी दिया जाता है। इसके अलावा, ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देते हुए ग्रामीण सामान्य इन्टरप्रेन्योर को 25% और विशेष श्रेणी के लिए 35% सब्सिडी का प्लान है।

क्या कहते हैं आंकड़े?

सरकार द्वारा जारी पांच सालों के आंकड़ों से पता चलता है कि PMEGP के तहत हर साल बड़ी संख्या में आवेदन लंबित या अस्वीकृत रहे। आंकड़ों पर नजर डालें तो 2021- 22 में 2.63 लाख आवेदन आए, इनमें से केवल 1.08 लाख ही मंजूर हुए। इसी तरह 2022- 23 में 3.39 लाख में से 1.47 लाख और 2023-24 में 3.73 लाख में से 1.62 लाख आवेदन ही मंजूर हुए। वहीं साल 2024-25 में 2.45 लाख में से 1.08 लाख आवेदन ही आगे बढ़े, जबकि लगभग 1.96 लाख आवेदन रिजेक्ट हो गए। देखा जाए तो हर साल लगभग 50 फीसदी से ज्यादा आवेदन मंजूरी तक पहुंच ही नहीं पाए।

 

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बता दें कि PMEGP में आवेदन करने से लेकर सब्सिडी मिलने के बीच आवेदन और जरूरी दस्तावेजों की जांच की जाती है। इसके बाद बैंक यह देखता है कि लोन दिया जा सकता है या नहीं। इसके साथ ही बैंक लोन मंजूर होने पर लाभार्थी को अपना हिस्सा जमा करना होता है। इसके अलावा जहां जरूरी हो, वहां EDP प्रशिक्षण पूरा करना पड़ता है। इसके बाद बैंक सरकार से मार्जिन मनी (सब्सिडी) का दावा भेजता है, जिसके बाद सब्सिडी जारी की जाती है। इसी प्रक्रिया में 7 महीने तक का समय लग जाता है। कई मामलों में यह कम समय में भी हुआ है, तो कुछ में सब्सिडी मिलने तक 7 महीने से भी ज्यादा इंतजार करना पड़ा। 

देरी कम करने के लिए क्या कर रही है सरकार?

सरकार का कहना है कि वह PMEGP योजना की लगातार निगरानी कर रही है ताकि लोन मंजूरी और सब्सिडी जारी करने की प्रक्रिया तेज हो सके। इसके लिए लंबित आवेदनों की नियमित समीक्षा की जाती है। इसके लिए बैंकों और सरकारी अधिकारियों के साथ राज्य, जोन और जिला स्तर पर नियमित बैठकें होती हैं। इसके अलावा, आवेदकों की सुविधा के लिए PMEGP पोर्टल पर 1,000 से अधिक तैयार (मॉडल) प्रोजेक्ट रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि उन्हें परियोजना रिपोर्ट (DPR) बनाने में आसानी हो।

 

साथ ही सरकार ने कुछ नियमों में भी राहत दी है। अब मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 10 लाख रुपये तक और सेवा क्षेत्र में 5 लाख रुपये तक की परियोजनाओं के लिए शैक्षणिक योग्यता जरूरी नहीं है। वहीं 2 लाख रुपये तक की परियोजनाओं के लिए EDP प्रशिक्षण की अनिवार्यता भी हटा दी गई है, जिससे लोन मंजूरी की प्रक्रिया तेज हो सके। 

हेल्पडेस्क और जागरूकता अभियान

सरकार ने लोगों की मदद के लिए हर राज्य में PMEGP हेल्पडेस्क शुरू किए हैं। यहां आवेदन भरने, योजना की जानकारी लेने और किसी भी परेशानी में मदद मिलती है। इसके अलावा, लोगों को इस योजना और पैसों के सही इस्तेमाल की जानकारी देने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। सरकार ने PMEGP पोर्टल को जन समर्थ पोर्टल से भी जोड़ दिया है। इससे अब आवेदन ऑनलाइन और पहले से आसान भी हो गया है। आवेदन की हर जानकारी मोबाइल पर SMS के जरिए मिलती रहती है। साथ ही, उद्यम (Udyam) रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी अब इसी पोर्टल पर उपलब्ध है। 

क्या चेहर पर रेजर इस्तेमाल करने से महिलाओं में मोटे आते हैं बाल?


महिलाओं को अक्सर कहा जाता है कि चेहरे पर रेजर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। रेजर का इस्तेमाल करने से बाल घने और मोटे आते हैं। इस बात को लड़कियां हमेशा से सुनते आई है। इस वजह से कई महिलाएं फेशियल रेजर का इस्तेमाल नहीं करती हैं। जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि फेशियल रेजर बिल्कुल सुरक्षित होता है। इससे बालों की न ग्रोथ बढ़ती है न ही घनापन आता है।

 

अगर आप सही तरीके से बालों को हटाते है तो मेकअप अच्छे से एब्जॉर्ब होता है और एक्सफोलिएशन भी होता है। हालांकि यह हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं होता है। उन महिलाओं को रेजर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए जिन्हें स्किन डिसऑर्डर या फिर हार्मोनल समस्या है।

 

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क्या शेव करने से बालों की ग्रोथ ज्यादा होती है?

नहीं। जबकि सच यह है कि शेविंग से बाल त्वचा की सतह से हटता है और इसका त्वचा के नीचे मौजूद बालों से कोई लेना देना है। शुरुआत में शेविंग के बाद तुरंत बाद जो बाल आते हैं तो ऐसा लगता है कि मोटे और घने है। हालांकि बालों की मोटाई, रंग और बढ़ने की रफ्तार में कोई बदलाव नहीं आता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के विशेषज्ञों ने बताया कि शेविंग के बाद बालों की ग्रोथ पर कोई फर्क नहीं पड़ता है।

क्या महिलाओं के लिए शेविंग सुरक्षित है?

महिलाओं के लिए फेशियल शेव उतना ही सुरक्षित है जितना शरीर से बाल हटाना है। यह सुरक्षित तब तक है जब तक आप साफ रेजर का इस्तेमाल करते हैं। कई महिलाएं फेशियल हेयर को हटाने के लिए फेशियल रेजर का इस्तेमाल करती हैं। फेशियल रेजर का इस्तेमाल करने से बाल एकदम से निकल जाते हैं, त्वचा मुलायम हो जाती है और एक्सफोलिएट होती है जो डर्ट और गंदगी को हटाने का काम करता है। यह बहुत ही आसान तरीका है जिसमें दर्द भी नहीं होता है और पैसे भी कम खर्च होते हैं।

 

फेशियल रेजर का इस्तेमाल करते हुए कुछ महिलाओं को स्किन इरिटेशन, रेजर बर्न, इनग्रोन हेयर और रेडनेस की समस्या होती है। उन महिलाओं को रेजर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए जिन्हें एक्ने, एक्जिमा या स्किन से जुड़ी बीमारी होती है।

 

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किन बातों का रखें ध्यान?

  • अगर आप शेविंग करने जा रहे हैं तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें।
  • अपने चेहरे को माइल्ड क्लींजर से साफ करें।
  • आप साफ और शार्प रेजर का इस्तेमाल करें।
  • अगर जरूरत लगे तो चेहरे पर फेशियल ऑयल या शेविंग जेल का इस्तेमाल करें।
  • रेजर चलाते समय त्वचा को टाइट रखें।
  • ब्लेड इस्तेमाल होने के बाद अच्छे से धो कर रखें।
  • शेविंग के बाद मॉश्चराइजर का इस्तेमाल करें।

मेष को धन लाभ, क्या मिथुन वालों को मिलेगा किस्मत का साथ?


शुक्रवार का यह दिन मेष, धनु और मिथुन राशि के लिए बेहद खास रहने वाला है। जहां एक तरफ मेष राशि के लोगों के लिए लिए गए फैसले लाभदायक साबित होंगे, वहीं दूसरी तरफ मिथुन राशि के लोगों को किस्मत का साथ मिलेगा। हिन्दू पंचांग के मुताबिक आज श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है। पंचांग के अनुसार आज के दिन का मूलांक 4 है, जिसके स्वामी राहु देव हैं। मूलांक 4 का प्रभाव अचानक मिलने वाले नए विचारों, कूटनीतिक फैसलों और जीवन में बदलावों को दर्शाता है। ग्रहों की चाल की बात करें तो चंद्रमा आज कुंभ राशि में विराजमान रहेंगे, जिससे कुंभ राशि के लोगों को समाज में सम्मान मिलेगा। शुक्रवार होने के कारण मां लक्ष्मी की कृपा भी कुछ लोगों पर बनी रहेगी।


आज की ऊर्जा उत्साह और कर्मप्रधान रहेगी। यह दिन पुराने अटके कामों को पूरा करने का अवसर देगा। जहां राहु का मूलांक आपको लीक से हटकर सोचने की प्रेरणा देगा, वहीं चंद्रमा की स्थिति व्यावहारिक निर्णय लेने में मदद करेगी। हालांकि, किसी भी तरह की जल्दबाजी या अति उत्साह से बचना आज आपके हित में रहेगा। आइए जानते हैं मेष से मीन तक सभी 12 राशियों के लिए आज का दिन कैसा रहने वाला है।

 

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राशिफल


मेष राशि


आज के दिन ऑफिस मीटिंग में आपकी राय की सराहना होगी। बिजनेस से जुड़े लोगों को आज सुबह 8:15 से 10:15 बजे के बीच निर्णय लेना चाहिए। जीवनसाथी के साथ बातचीत कर पाएंगे।
आज क्या करें: देवी लक्ष्मी की पूजा करें और उन्हें खीर का भोग लगाएं।
आज क्या न करें: जल्दबाजी में कोई भी धन निवेश संबंधी फैसला न लें।


वृषभ राशि


नौकरीपेशा लोगों को मान-सम्मान मिलेगा। व्यापार में रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है, जिससे आर्थिक स्थिति सुधरेगी। प्रेम जीवन में मिठास रहेगी। परिवार के साथ डिनर का प्लान बन सकता है।
आज क्या करें: सफेद रंग के कपड़े पहनें।
आज क्या न करें: किसी भी व्यक्ति से विवाद या कड़वे बोल बोलने से बचें।


मिथुन राशि


आज आपको किस्मत का साथ मिलेगा। बिजनेस पार्टनरशिप में पारदर्शिता रखें, बड़ा फायदा हो सकता है। लव पार्टनर के साथ चल रही अनबन खत्म होगी। रिश्ते में विश्वास और नजदीकियां बढ़ेंगी।
आज क्या करें: गणेश जी को दूर्वा (घास) अर्पित करें और मंत्रों का जाप करें।
आज क्या न करें: दूसरों के मामलों में दखल देने से बचें।

 

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कर्क राशि


आज चंद्रमा आपकी राशि के आठवें भाव में विराजमान रहेंगे, इसलिए गाड़ी चलाते समय लापरवाही न बरतें। साथ ही धन के लेन-देन में सतर्कता रखें। लव पार्टनर की बातों को ठंडे दिमाग से समझें।
आज क्या करें: शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित करें।
आज क्या न करें: स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न बरतें।


सिंह राशि


आज का दिन आपके लिए बेहद शुभ और फलदायी रहेगा। नए सौदे फाइनल हो सकते हैं और नौकरी में प्रमोशन मिल सकता है। लव लाइफ में खुशहाली रहेगी। सिंगल लोगों को आज कोई नया और खास प्रस्ताव मिल सकता है।
आज क्या करें: सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें।
आज क्या न करें: अपने भीतर ओवर कॉन्फिडेंस को जगह न दें।


कन्या राशि


दफ्तर में सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा, जिससे ऑफिस में आपके अटके काम पूरे होंगे। खर्चों में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। जीवनसाथी के साथ किसी बात को लेकर गलतफहमी हो सकती है।
आज क्या करें: गाय को हरी घास या पालक खिलाएं।
आज क्या न करें: लेन-देन के मामलों में किसी पर भरोसा न करें।

 

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तुला राशि


कला, मीडिया और डिजाइनिंग से जुड़े लोगों के लिए आज का दिन शानदार रहेगा। धन लाभ के अच्छे अवसर मिलेंगे। लव लाइफ भी बेहद बढ़िया रहेगी। पार्टनर के साथ यादगार पल बिताने का मौका मिलेगा।
आज क्या करें: मां दुर्गा की पूजा करें और मंदिर में लाल फूल चढ़ाएं।
आज क्या न करें: अपने जरूरी काम कल पर टालने की भूल न करें।


वृश्चिक राशि


प्रॉपर्टी या प्रॉपर्टी से जुड़े कामों में सफलता मिलेगी। नौकरी में अपने विचारों को खुलकर सामने रखें, सराहना मिलेगी। परिवार में किसी मांगलिक कार्य की योजना बन सकती है। अपनों का पूरा सहयोग और प्यार मिलेगा।
आज क्या करें: चमेली के तेल का दीपक जलाएं।
आज क्या न करें: घर के सदस्यों के साथ बहस न करें।

 

धनु राशि


आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा। छोटी दूरी की व्यावसायिक यात्राएं फायदेमंद साबित होंगी। साथ ही धन कमाने के साधन बढ़ेंगे। परिवार में भाई-बहनों और दोस्तों के साथ रिश्ते मजबूत होंगे। पार्टनर के साथ अच्छा समय बीतेगा।
आज क्या करें: विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
आज क्या न करें: बिना सोचे-समझे किसी कागजात पर साइन न करें।

 

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मकर राशि


आपके लिए आर्थिक रूप से यह दिन लाभकारी रहेगा। फंसा हुआ धन वापस मिल सकता है। नौकरी में अधिकारियों से प्रोत्साहन और सम्मान मिलेगा। आपकी वाणी में सौम्यता रहेगी, जिससे लोग आपकी ओर आकर्षित होंगे।
आज क्या करें: शनिदेव के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
आज क्या न करें: किसी को कड़वे शब्द न कहें।


कुंभ राशि


चंद्रमा आज आपकी राशि में विराजमान रहेंगे, इसलिए नए विचार और योजनाएं आपको सफलता की दिशा में ले जाएंगी। लव पार्टनर के साथ प्रेम बढ़ेगा और पुराना तनाव खत्म होगा।
आज क्या करें: पक्षियों के लिए पानी और अनाज की व्यवस्था करें।
आज क्या न करें: अपनी क्षमता से अधिक जिम्मेदारियां अपने ऊपर न लें।


मीन राशि


विदेशी कारोबार या कंपनियों से लाभ के योग हैं। हालांकि, आज बेवजह की भागदौड़ और बजट से बाहर जाकर खर्च हो सकता है। प्रेम जीवन में एक-दूसरे की निजता का सम्मान करें। शांत रहकर बात करने से रिश्ते संभलेंगे।
आज क्या करें: मंदिर में चने की दाल या बेसन के लड्डू का दान करें।
आज क्या न करें: किसी भी तरह के गैर-कानूनी काम से दूर रहें।


नोट: यह राशिफल ज्योतिषीय मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

समुद्र में तैरकर स्पेन में घुसी भीड़, मोरोक्को से सटे सेउता में क्या हो रहा है?

यूरोप और अफ्रीका को जोड़ने अलग करने वाले स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर के उत्तरी ओर स्पेन है और दक्षिण दिशा में मोरोक्को है। स्पेन का जो इलाका इस सीमा पर पड़ता है उसका नाम सेउता (Ceuta) है। अब पड़ोसी देश मोरोक्को से हजारों प्रवासी लोग अचानक स्पेन के सेउता में घुसने लगे हैं। इसका नतीजा यह हुआ है कि स्पेन ने सेउता में आर्मी तैनात करने का एलान कर दिया है। गुरुवार को सीमा पर तैनात सुरक्षाकर्मी बेबस हो गए और हजारों अवैध प्रवासी जबरन स्पेन में घुसने लगे। यह घटना बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि पहले ही प्रवासियों की समस्या से परेशान स्पेन के सामने इस बार थोक में लोग आ गए हैं। अवैध तरीके से घुस रहे इन लोगों को रोकने की कोशिश में स्पेन की ओर से फायरिंग भी की गई है और अभी तक कम से कम 9 लोगों की मौत भी हो चुकी है। 

 

स्थिति काबू में करने के लिए स्पेन की ओर से हजारों सैनिकों को सेउता भेजा जा रहा है। स्थानीय अधिकारियों ने मदद की मांग की है क्योंकि मोरोक्को की ओर से आ रहे अवैध प्रवासियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। कोई पानी में कूदकर सेउता में घोषित कर रहा है तो कोई दीवार फांदकर। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई लोगों की मौत पानी में डूब जाने की वजह से भी हुई है। अब स्पेन की सरकार ने कहा है कि सेना अब सिविल गार्ड की मदद करेगी ताकि सेउता में सुरक्षा व्यवस्था बरकरार रखी जा सके। वहां के हालात देखने के लिए स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज और आंतरिक मामलों के मंत्री फर्नांडो ग्रांड-मरलास्का शुक्रवार को सेउता पहुंचे।

कैसे शुरू हुआ हंगामा?

दरअसल, इसी महीने स्पेन की सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि सेउता या मेलिला पहुंचने की कोशिश करने वाले जिन प्रवासियों को समुद्र के पास रोका गया है, उन्हें यूं ही मोरोक्को नहीं भेजा जा सकता है। इसके बाद से ही धीरे-धीरे पिछले कई दिनों सेउता पहुंचने वाले लोगों को संख्या बढ़ने लगी थी। हालांकि, गुरुवार को घटना इसी वजह से हुई या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। इन लोगों को सीमा पर रोका गया तो ये वहीं जमा होने लगे। देखते ही देखते कई सारे लोग समुद्र में उतकर स्पेन की सीमा में दाखिल होने लगे।

 

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यह तरीका आसान लगा तो गुरुवार को हजारों लोग समुद्र में कूद गए और तैरकर या नाव लेकर स्पेन (सेउता) में दाखिल हो गए। कुछ की समय में सेउता के बीच पर रबर रिंग और फ्लिपर के सहारे लोग घुसते दिखने लगे। हजारों लोगों के अचानक घुसने से सेउता की कानून व्यवस्था खतेर में पड़ गई है। इसके बारे में सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि एक सीमा के बाद बॉर्डर पोस्ट को संभाला नहीं जा सका। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि स्पेन की सरकार फैसले लेने में देरी कर रही है जिसके चलते स्थिति बिगड़ रही है।

सेउता के नेता जुआन जीसस विवास ने भी मांग की है कि स्पेन सरकार इसमें तुरंत हस्तक्षेप करे। सेउता में सिविल गार्ड ऑफिसर्स के प्रतिनिधि राचिद सबीही ने कहा है, ‘स्थिति बेहद खराब है। व्यवस्था ध्वस्त हो गई है।’ हालांकि, स्पष्ट तौर पर संख्या नहीं बताई गई है लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि कम से कम 3 हजार लोग कुछ घंटों में ही स्पेन में घुस चुके हैं।  सेउता के नेता जुआन जीसस विवास ने कहा था कि पहले ही लगभग 300 प्रवासी हर दिन सेउता आ रहे थे जिसके चलते रिसेप्शन सेंटर पर भीड़ लगी रहती थी। अब वह मांग कर रहे हैं कि नेशनल इमरजेंसी घोषित की जाए और सेना लगाकर इन लोगों से निपटा जाए।

 

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भौगोलिक स्थिति है बड़ा कारण

साल 1884 में जब अफ्रीका के कई हिस्सों को यूरोप के देशों में आपस में बांट लिया तभी कई स्पेन के कब्जे में आ गए। इसी क्रम में सेउता और मेलिला जैसे इलाके स्पेन के हिस्सा आए लेकिन ये स्पेन के मूल भूभाग से अलग हैं। नक्शे को देखेंगे तो भले ही सेउता स्पेन का हिस्सा हो लेकिन उसके और स्पेन के मेनलैंड के बीच में  स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर है। इसी तरह मेलिला भी भौगोलिक तौर पर स्पेन से अलग है लेकिन मोरोक्को से सटा हुआ है।

 

इन दोनों शहरों को मोरोक्को से अलग करने के लिए स्पेन ने तगड़ी बाड़बंदी कर रखी है लेकिन ऐसे कई घटनाएं हो चुकी हैं जिनमें यह देखा गया है कि ये इंतजाम नाकाफी साबित हुए हैं और हजारों लोग स्पेन में घुस गए हैं।

स्पेन में क्यों घुसने लगते हैं मोरोक्को के लोग?

स्पेन के लिए यह समस्या नई नहीं है। वह दशकों से अवैध प्रवासियों से परेशान रहा है। इसका एक बड़ा कारण दोनों देशों की आर्थिक स्थिति है। स्पेन एक अच्छी अर्थव्यवस्था वाला देश है तो मोरोक्को उशकी तुलना में गरीब देश है। स्पेन में प्रति व्यक्ति GDP लगभग 38 हजार डॉलर है तो मोरोक्को में की प्रति व्यक्ति GDP 5 हजार डॉलर से भी कम है। मोरोक्को में सिर्फ 39.1 प्रतिशत लोग ही कुछ न कुछ काम करते हैं। उस काम के लिए भी मोरोक्को में लगभग 613 डॉलर हर महीने मिलते हैं जबकि स्पेन में औसत सैलरी लगभग 2800 डॉलर है। 

 

समुद्र में तैरकर सेउता (स्पेन) में घुसते अवैध प्रवासी, Photo Credit: PTI 

 

ये कुछ कारण हैं जिनके चलते लोग मोरोक्को छोड़कर स्पेन में बस जाना चाहते हैं। नौकरी और जीवन के बेहतर मौके, बेहतर सुरक्षा और कई अन्य कारणों के चलते हर साल मोरोक्को के हजारों लोग स्पेन में घुसने की कोशिश करते रहते हैं।  

स्पेन और मोरोक्को के बीच समझौता

स्पेन ने अब यह भी बताया है कि अवैध रूप से सेउता में घुसे प्रवासियों को वापस भेजने के लिए मोरोक्को से उसका एक समझौता हुआ है। हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि इन लोगों को कब तक भेजा जाना है। स्पेन की राजधानी मैड्रिड में स्थित मोरोक्को के दूतावास ने कहा है कि कई क्रिमिनल नेटवर्क ऐसे हैं जो प्रवासियों को जबरन भेज रहे हैं और इसी की आड़ में इंसानों की तस्करी कर रहे हैं। मोरोक्को का कहना है कि वह इस तरह की गतिविधि का बिल्कुल समर्थन नहीं करता है। 

 

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बता दें कि साल 2021 में भी सेउता में इसी तरह की एक घटना हुई थी। तब सिर्फ 2 दिन में 8 हजार से ज्यादा अवैध प्रवासी सेउता में घुस गए थे। तब आरोप लगे थे कि स्पेन से चल रहे तनाव के चलते मोरोक्को ने सीमा पर नियंत्रण कम कर दिया था जिससे अवैध प्रवासियों के घुसने में आसानी हुई थी।  

भाप से हाइड्रोजन तक का सफर, 173 साल में कहां तक पहुंचा भारतीय रेलवे? 

भारतीय रेल आज करोड़ों भारतीयों के लिए लाइफलाइन बन चुकी है। हर रोज करोड़ों लोग एक शहर से दूसरे शहर एक जगह से दूसरी जगह रेल से सफर करते हैं। 16 अप्रैल 1853 को मुंबई के बोरी बंदर से ठाणे के बीच 34 किलोमीटर की मामूली दूरी से शुरू हुआ यह सफर आज दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में से एक बन चुका है। शुरुआत में अंग्रेजों  ने अपने व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए भारत में रेल की शुरुआत की थी। भाप के इंजनों से लेकर वंदे भारत और बुलेट ट्रेन के सपने तक भारतीय रेल ने अब बहुत लंबा सफर तय कर लिया है। इस सफर में रेल ने ना सिर्फ तकनीकी बदलाव देखे बल्कि देश की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर को भी पूरी तरह बदल दिया है।

 

भारत में रेलवे की शुरुआत 16 अप्रैल 1853 को हुई थी, जिसमें कुल 400 लोगों ने सफर किया था। लॉर्ड डलहौजी ने 20 अप्रैल 1853 के अपने ऐतिहासिक ‘रेलवे मिनट’ में भारत में रेल के विस्तार की नीति के बारे में जानकारी दी थी और इसी कारण इन्हें भारत में रेल का जनक भी कहा जाता है। इतिहासकारों का मानना है कि अंग्रेजों का भारत में रेल की शुरूआत करना अपने प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूत करना और कच्चे माल को बंदरगाहों तक पहुंचाना था। शुरुआत में भारतीय रेल का विस्तार ब्रिटेन के उत्पादों को भारतीय बाजार तक पहुंचाने और भारत से कच्चा माल बंदरगाहों तक पहुंचाने तक ही सीमित था। 

 

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पहली ट्रेन

1947 तक रेल का सफर

भारत में रेल के बारे में ज्यादातर लोग जानते तक नहीं थे लेकिन ब्रिटेन से आए अंग्रेजों को अपना व्यापार शुरू करने के लिए भारत में रेल नेटवर्क की जरूरत महसूस हुई। इसके बाद पहली बार साल 1832 में मद्रास (अब चेन्नई) में ब्रिटिश सरकार ने रेल मार्ग बनाने का प्रस्ताव रखा था। इसके करीब दो दशक बाद 16 अप्रैल 1853 को मुंबई (तत्कालीन बंबई) के बोरीबंदर से ठाणे के बीच पहली यात्री ट्रेन दौड़ी और भारत की मौजूदा रेलवे की पहली शुरुआत हुई। 

 

इसके बाद 15 अगस्त 1854 को पूर्वी भारत में हावड़ा से हुगली के बीच पहली रेल सेवा शुरू हुई, जबकि 1855 में दक्षिण भारत की लगभग 97 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बिछाई गई, जो उस समय देश की सबसे लंबी रेल लाइन मानी गई। रेल नेटवर्क के विस्तार के साथ यात्रियों की सुविधाएं भी समय के साथ-साथ बढ़ीं। 1892 में ट्रेनों में पहली बार रसोई कार (खाने की सुविधा) शुरू हुई और रेल यात्रा पहले से अधिक आरामदायक बनने लगी।

 

अभी तक रेलवे नेटवर्क बढ़ता जा रहा था और इसके संचालन और प्रशासन के लिए व्यवस्था पर बहस शुरू हो गई थी। इसके बाद बीसवीं सदी में भारतीय रेलवे ने तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर कई ऐतिहासिक बदलाव देखे। 1900 में रेलवे बोर्ड का गठन किया गया, जिसने रेल व्यवस्था को संगठित रूप दिया। रेलवे के बढ़ते काम को देखते हुए 1924-25 में रेल बजट को सामान्य बजट से अलग किया गया और 1925 में भारत की पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन शुरू हुई। 

 

भारत की पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन

इसके बाद 1930 में यात्रियों के लिए पहला वातानुकूलित यानी एसी कोच सर्विस शुरू की गई। 1 अप्रैल 1937 को ईस्ट इंडियन रेलवे और ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे (GIPR) के राष्ट्रीयकरण के साथ रेलवे प्रशासन में बड़ा बदलाव हुआ। 15 अगस्त 1947 तक भारत में 42 अलग-अलग रेल सिस्टम चल रहे थे और देश में कुल 65,217 किलोमीटर लंबा रेल नेटवर्क बिछ चुका था। यही मजबूत आधार आगे चलकर स्वतंत्र भारत की एकीकृत और दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में शामिल भारतीय रेलवे की नींव बना।

भाप से बिजली तक 

भारत जैसे बड़े देश में रेल नेटवर्क बिछाना और चलाना बहुत कठिनाई का काम था। शुरुआती सालों में ट्रेन में सिर्फ भाप के इंजन होते थे। 1853 से 1925 तक भाप के इंजनों का ही एकाधिकार था। भारत ने 3 फरवरी 1925 को पहली बिजली से चलने वाली ट्रेन शुरू की थी। इसके बाद 1950 में चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स की स्थापना और 1957 में 25 kV AC ट्रैक्शन के अपनाने ने रेलवे को नई दिशा दी। आज भारतीय रेल दुनिया का सबसे बड़ा बिजली से चलने वाला रेल नेटवर्क है। 2025 में इलेक्ट्रिक ट्रेन को चले 100 साल पूरे हो चुके हैं और अब हम 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिक ट्रेनों की ओर बढ़ रहे हैं। 

1947 में रेल नेटवर्क का विभाजन

भारत में रेल नेटवर्क की शुरुआत अंग्रेजों के शासन में ही हुई। हालांकि, अंग्रेजों ने भारत को बुरी तरह तबाह कर दिया था। जाते-जाते अंग्रेजों ने भारत के दो टुकड़े कर दिए। भारत और पाकिस्तान दो देश बने और संपत्ति का बंटवारा दो देशों के बीच हुआ। पैसा, सोना, अधिकारी, कर्मचारी से लेकर पेन-पेपर तक का बंटवारा हुआ। बंटवारे की स्थिति का अंदाजा लगाने के लिए आप इस बात को समझ सकते हैं कि एक शब्दकोश को दो हिस्सों में बांट दिया गया था। इस बंटवारे का असर जाहिर तौर पर रेलवे पर भी पड़ने वाला था। 

 

रेलवे केवल एक परिवहन साधन नहीं बल्कि विभाजन की सबसे दर्दनाक और खौफनाक त्रासदियों का गवाह भी बन गया था। 1947 में आजादी के समय रेलवे का नेटवर्क भी विभाजन की विभीषिका से प्रभावित था और पाकिस्तान से भारत और भारत से पाकिस्तान आ जा रही ट्रेंने यात्रियों से ज्यादा लाशों को लादकर सफर कर रही थी। लाहौर और अमृतसर जैसे शहरों के बीच चलने वाली ट्रेनों पर कई हमले हुए और कई बार तो ट्रेन में सिर्फ लाशें ही रह गई। इस तरग ट्रेन भारत विभाजन की गवाह भी बनी। भारत के विभाजन के समय भारतीय रेलवे का बंटवारा भौगोलिक और प्रशासनिक आधार पर किया गया। इसके तहत लगभग 40 प्रतिशत रेल नेटवर्क पाकिस्तान के हिस्से में गया, जबकि 60 प्रतिशत नेटवर्क भारत के पास ही रहा।

 

उस समय के दो प्रमुख नेटवर्क नॉर्थवेस्टर्न रेलवे और बंगाल एंड असम रेलवे को विभाजित करके पाकिस्तान और भारत के बीच बांटा गया।  रेलवे लाइनों, डिब्बों (कोच), इंजनों और स्टेशनों का विभाजन रेडक्लिफ रेखा की भौगोलिक सीमा के आधार पर किया गया। रेलवे कर्मचारियों को अपनी इच्छानुसार भारत या पाकिस्तान में से किसी एक देश को चुनने की छूट दी गई थी।  रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय रेलवे को 388 किलोमीटर विद्युतीकृत मार्ग और कुल 54,000 किलोमीटर मार्ग मिला, जबकि पाकिस्तान के हिस्से में 7500 किलोमीटर का मार्ग आया था। 

 

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1947 के बाद कैसे बदली रेल?

1947 में भारत को आजादी मिली लेकिन इसके साथ ही भारत सरकार के सामने कई बड़ी चुनौतियां भी थीं। लोगों की उम्मीदों को पूरा करना और देश के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए रेलवे का नेटवर्क बिछाना एक बड़ी चुनौती थी। भारत में संविधान लागू होने के बाद रेलवे के विकास के लिए भी तेजी से काम शुरू हुआ। 1951 में जॉन मथाई ने पहला रेल बजट पेश किया। 1951 में भारतीय रेलवे का राष्ट्रीयकरण हुआ। देशभर में फैली अलग-अलग प्राइवेट और रियासती रेलवे कंपनियों का विलय करके भारतीय रेल का राष्ट्रीयकरण किया गया था। रेलवे को एकल प्रबंधन के तहत लाया गया। 14 अप्रैल 1952 को पहला क्षेत्रीय पुनर्गठन किया गया, जिसमें केंद्रीय, पूर्वी, उत्तरी, उत्तर पूर्वी, दक्षिणी और पश्चिमी भागों में बांटा गया।  

 

रेलवे बजट

1921 में ‘एक्वर्थ कमेटी’ की सिफारिश पर रेल बजट को सामान्य बजट से अलग किया गया था क्योंकि उस समय सरकार बजट का ज्यादातर हिस्सा रेल नेटवर्क पर ही खर्च कर रही थी। इसके बाद करीब 9 दशकों तक यही व्यवस्था रही। हालांकि, 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के दो साल बाद साल 2016 में रेलवे बजट को आम बजट के साथ ही जोड़ दिया गया था।

आखिरी बार वित्त वर्ष 2016-17 के लिए रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने रेल बजट पेश किया था

 

आजादी के बाद से रेलवे का बजट और उसकी क्षमता लगातार बढ़ी है। 1986 में कंप्यूटराइज्ड रिजर्वेशन सिस्टम की शुरुआत ने आम आदमी के लिए टिकट बुकिंग को आसान करने की कोशिश की गई थी। आज रेलवे प्रतिदिन लगभग 2.5 करोड़ यात्रियों को ढोती है। आजादी के बाद पहला रेल बजट 4 करोड़ 28 लाख रुपये था। 2026 के आम बजट में रेलवे को कुल 2,93,030 करोड़ रुपये मिले हैं। 

रोजगार देने में रेलवे आगे

भारतीय रेलवे देशभर में परिवहन का मुख्य साधन ही नहीं बल्कि रोजगार के लिए भी काफी अहम है। भारतीय रेलवे आज के समय में भी भारत के सबसे बड़े सरकारी नियोक्ताओं में शामिल है। रेलवे के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, रेलवे में लगभग 12 से 13 लाख नियमित कर्मचारी काम कर रहे हैं, जिनमें जिनमें स्टेशन मास्टर, लोको पायलट, गार्ड ट्रैक मेंटेनर, टेक्नीशियन, सिग्नल एवं टेलीकॉम कर्मचारी, इंजीनियर, टिकट निरीक्षक (TTE), आरपीएफ, परिचालन, चिकित्सा, प्रशासनिक और कार्यालयी कर्मचारी सहित  अलग-अलग श्रेणियों के अधिकारी हैं। रेलवे के ज्यादातर कार्यबल ग्रुप सी के कर्मचारी हैं, जबकि ग्रुप A और B के अधिकारी संचालन, इंजीनियरिंग और प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालते हैं। केंद्र सरकार के अनुसार पिछले 10 साल में भारतीय रेलवे में 5 लाख लोगों को रोजगार दिया गया है। इस तरह से रेलवे लाखों लोगों के लिए रोजगार का साधन भी बन रहा है। 

 

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रेलवे और राजनीति

रेलवे भारत के लोगों के जीवन का एक अहम हिस्सा बन चुका है। करोड़ों लोग इसके जरिए सफर करते हैं और लाखों परिवार रोजगार की दृष्टि से रेलवे पर निर्भर हैं। ऐसे में राजनीति में रेलवे के मुद्दे प्रमुख रहे हैं। रेल मंत्रालय देश के प्रमुख मंत्रालयों में से एक रहा है और इस मंत्रालय को पाने के लिए मंत्रियों में होड़ रही है। हालांकि, रेलवे एक जिम्मेदारी भरा मंत्रालय भी है क्योंकि सफर के दौरान यात्रियों को आराम और सुविधा देना काफी बड़ा मुद्दा रहा है। आजादी के कुछ साल बाद ही जब रेलवे के विस्तार पर जोर दिया जा रहा था उस समय एक ऐसी रेल दुर्घटना हुई जिसने देश को हिला दिया था।

 

तमिलनाडु के अरियालूर में भारी बारिश के कारण मरुदैयारु नदी पर बना रेलवे पुल कमजोर होकर ढह गया। उसी समय चेन्नई (तत्कालीन मद्रास) से तूतीकोरिन जा रही एक एक्सप्रेस ट्रेन पुल पर पहुंची और उसके 13 डिब्बे नदी में जा गिरे। इस हादसे में कम से कम 154 लोगों की मौत हुई, जबकि 110 से अधिक यात्री घायल हुए। इस हादसे के बाद तत्कालीन रेलवे मंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद लाल बहादुर शास्त्री ने कहा था कि दुर्घटना के लिए वे व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार नहीं हैं, लेकिन रेल मंत्रालय के प्रमुख होने के नाते नैतिक जिम्मेदारी उनकी है। उनके इस फैसले को आज भी जवाबदेही की मिशाल के रूप में देखा जाता है। 

 

लाल बहादुर शास्त्री रेलवे प्रोजेक्ट की जांच करते हुए

यह पहली घटना थी जब रेल हादसे का सीधा असर भारत की राजनीति पर देखा गया था। इसके बाद कई मौकों पर रेलवे के मुद्दों पर राजनीति होती रही है। संसद से सड़क तक रेलवे के मुद्दे देश के प्रमुख मुद्दे रहे। रेल के किराए में बढ़ोतरी पर सरकारों की मुश्किलें बढ़ जाती थी और देश के कई बड़े नेताओं ने रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली। दशकों तक रेल बजट को केंद्र सरकार का सबसे महत्वपूर्ण बजट माना जाता था और हर साल नई ट्रेनों, नई रेल लाइनों, स्टेशनों के विकास तथा नई परियोजनाओं की घोषणाएं राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन जाती थीं। आज भी रेल से जुड़े मुद्दे देश के प्रमुख मुद्दों में से एक है। 

सबसे चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट और आज की स्थिति

रेलवे के इतिहास में कोंकण रेलवे का निर्माण सबसे चुनौतीपुर्ण माना जाता है और यह इंजीनियरिंग का एक अद्भुत नमूना था। वहीं, हाल ही में पूरा हुआ विश्व का सबसे ऊंचा रेल पुल चिनाब ब्रिज और 11 किलोमीटर लंबी पीर पंजाल सुरंग हिमालयी दुर्गम इलाकों में रेल पहुंचाने की एक मिसाल है। वर्तमान में, ‘वंदे भारत’ जैसी सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनों का जाल पूरे देश में बिछाया जा रहा है। इसके अलावा, अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट भारत में हाई-स्पीड रेल युग की शुरुआत है। 

 

चिनाब ब्रिज

रेलवे के सामने चुनौती

भारत में पहली बार ट्रेन की शुरुआत करने के लिए ब्रिटिश सरकार को कई सालों पर मंथन करना पड़ा था। उस समय रेल की शुरुआत को लेकर कई चुनौतियां थीं और प्रस्ताव आने के कई सालों बाद पहली ट्रेन की शुरुआत हुई। आजादी के बाद भी रेलवे समय-समय पर अपनी लेटलतीफी, पुरानी बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा संबंधी दुर्घटनाओं को लेकर चर्चा में रही है। भारत सबसे बड़ी आबादी वाला देश है और इसमें हर रोज करोड़ों लोग रेलवे से सफर करते हैं। रेलवे के सामने इतने लोगों को सुविधाजनक यात्रा करवाना एक बड़ी चुनौती है। भारतीय रेलवे अब हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की ओर बढ़ रहा है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड कॉरिडोर जल्दी ही शुरू होने वाला है, लेकिन यात्रियों की बढ़ती संख्या चुनौती बनी हुई है। भारत संपूर्ण विद्युतीकरण की ओर बढ़ रहा है। इस मामले में भारत ने ब्रिटेन और चीन जैसे देशों को भी पीछे छोड़ दिया है। इसके साथ ही भारत ने अपनी पहली हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत भी इसी साल की है। भविष्य में नई तकनीक के साथ तेजी से आगे बढ़ने की चुनौती भारतीय रेलवे के सामने है। 

बचपन में फ्रूट जूस और शुगर ड्रिंक्स पीने से हाई BP का खतरा, स्टडी में दावा


एक ग्लास जूस को हमेशा से हेल्दी ऑप्शन माना जाता है। लोगों का मानना है कि सॉफ्ट ड्रिंक से ज्यादा हेल्दी फलों का जूस होता है। हालांकि सर्कुलेशन में एक स्टडी पब्लिश हुई है जिसमें बताया गया है कि अगर बच्चा अधिक मात्रा में फ्रूट जूस या शुगर वाली ड्रिंक्स पीता है तो बड़े होने पर उनमें हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ जाता है। 

 

इस स्टडी में पाया गया कि जो बच्चे और टीएनजर्स रोजाना चीनी वाली ड्रिंक्स की दो या उससे ज्यादा सर्विंग लेते थे। उनमें बाद में हाइपरटेंशन होने का खतरा 52% से ज्यादा था उनके मुकाबले जो हफ्ते में तीन बार स्वीट ड्रिंक पीते थे। वहीं, जो फ्रूट जूस 1.5 या उससे ज्यादा की सर्विंग लेते थे। उनमें  35% ज्यादा खतरा पाया गया, उनके मुकाबले जिन्होंने कभी कोई फ्रूट जूस नहीं पिया। 

 

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स्टडी में क्या पाया गया?

इस स्टडी में पाया गया कि अगर आप फल खा रहे हैं तो कोई नुकसान नहीं है। इस स्टडी में न्यूट्रिशन प्रिंसिपल के सिद्धांत को बताया गया है जिसके मुताबिक चीनी की मात्रा के साथ-साथ उसका सोर्स भी मायने रखता है। साबुत फल में मिलने वाली चीनी का शरीर पर बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता है। रोजाना चीनी वाली ड्रिंक्स की जगह पर एक साबुत फल खाते हैं तो हाइपरटेंशन का खतरा 22% कम हो गया। वहीं अगर आप फलों के जगह पर साबुत फल लेते हैं तो खतरा 19% तक कम हो जाता है।

चीनी से क्यों बढ़ता है बीपी?

साबुत फल में फाइबर होता है जो पाचन को बेहतर करता है और चीनी धीरे एब्जॉर्ब होता है जिससे ब्लड में ग्लूकोज और इंसुलिन का स्तर धीरे-धीरे बढ़ता है। इस दौरान एकदम से शुगर का लेवल नहीं बढ़ता है। जबकि फलों का जूस बनाने से उसका फाइबर काफी हद तक निकल जाता है और शरीर में शुगर एकदम से एब्जॉर्ब होता है। ब्लड में लगातार ग्लूकोज और इंसुलिन का लेवल बढ़ने से इंसुलिन रजिस्टेंट बढ़ता है। इससे सिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम एक्टिव होता है जो ब्लड प्रेशर को बढ़ाने का काम करता है।

 

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शुगर वाली ड्रिंक्स में फ्रुक्टोज की मात्रा अधिक होती जो मुख्य रूप से लिवर में मेटाबोलाइज होती है। जब लिवर के आसपास फैट जमने लगता है तो फैटी लिवर की समस्या हो सकती है, ट्राइग्लिसराइडस और पेट के आसपास फैट जमा होने लगता है। जब शुगर की मात्रा अधिक होती है तो नाइट्रिक ऑक्साइड का स्तर कम हो जाता है जिससे ब्लड वेसल्स ठीक से फैल नहीं पाती है और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। इसके अलावा फ्रक्टोज के टूटने से यूरिक एसिड बनता है। यूरिक एसिड का लेवल बढ़ने से ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचता है, साथ ही नाइट्रिक ऑक्साइड का लेवल भी कम हो सकता है। इससे ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ जाता है।


वहीं, साबुत फल में पोटैशियम, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और पॉलीफेनॉल होता है। ये सभी चीजें ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करती है। इस वजह से साबुत फल में मौजूद फाइबर हृदय के लिए नुकसानदायक नहीं होता है। यह स्टडी भारत के लिए भी जरूरी है। भारत में पैकेज्ड फ्रूट जूस, चीनी वाली ड्रिंक्स का मार्केट बढ़ रहा है। पेरेंट्स अपने बच्चों को पैकेट वाली जूस पीने के लिए देते हैं जिसमें पोषक तत्व न के बराबर होते हैं। आप बच्चों को जूस की जगह पर साबुत फल खाने को दें।

सावन का महीना क्यों है खास? इन धार्मिक घटनाओं ने बढ़ाया इस महीने का महत्व


हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक सावन का महीना बेहद खास है क्योंकि यह भगवान शिव का प्रिय महीना है। इसी वजह से कई भक्त भगवान शिव की आराधना करते हैं। साथ ही कई भक्त कांवड़ यात्रा में भी शामिल होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने देवताओं से जुड़े कई प्रसंग हुए थे, जिस वजह से इस महीने का महत्व और बढ़ जाता है। इसी महीने भगवान शिव ने माता पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इसके अलावा भगवान राम के पुत्र लव और कुश का भी इसी महीने जन्म हुआ था।


इस साल सावन 30 जुलाई से शुरू होकर 29 अगस्त को समाप्त होगा। हिन्दी पंचांग के अनुसार इस महीने में चंद्रमा श्रवण नक्षत्र में होता है, इसलिए इसे श्रावण मास भी कहा जाता है। हिन्दू धर्म के कई जानकारों का मानना है कि जो व्यक्ति इस महीने में हर दिन सच्चे श्रद्धा भाव से शिवलिंग पर जल चढ़ाता है, उस पर भगवान शिव की हमेशा कृपा दृष्टि बनी रहती है।

 

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सावन महीना क्यों है शुभ?

इसी महीने धर्म से जुड़ी ऐसी कई घटनाएं हुई थीं, जो इस महीने को बेहद खास बनाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी महीने भगवान शिव ने अपने भक्त मार्कण्डेय पर कृपा बरसाई थी। उनकी जान बचाने के लिए यमराज को भस्म कर दिया था। यह महीना इसलिए भी खास माना जाता है क्योंकि इसी महीने भगवान शिव ने माता पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इसके अलावा इस महीने कुछ देवताओं का जन्म भी हुआ था।

 

पार्वती मां को स्वीकारा – पौराणिक कथाओं के मुताबिक इसी महीने माता पार्वती ने कठोर व्रत और तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें प्रेमपूर्वक पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। साथ ही इसी महीने भगवान शिव माता पार्वती के साथ पृथ्वी लोक आए थे। इसी वजह से सावन महीने में सभी भक्त भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। जिस दिन भगवान शिव ने माता पार्वती को स्वीकार किया था, उसी दिन हरियाली तीज मनाई जाती है।

 

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शिव जी बने थे नीलकंठ – सावन महीने में ही समुद्र मंथन हुआ था। उस दौरान भगवान शिव ने मंथन से निकला विष पी लिया था, ताकि सृष्टि के प्राणियों की रक्षा हो सके। भगवान शिव के विषपान के बाद ही उन्हें नीलकंठ कहा जाने लगा। विष के प्रभाव को कम करने के लिए भक्त हर दिन जलाभिषेक करते हैं। भगवान शिव से जुड़ी इन्हीं विशेष घटनाओं की वजह से सावन महीने को अत्यंत शुभ और पवित्र माना जाता है।

 

नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

न न करते कैसे जंग में कूदा सऊदी अरब? कूटनीति और पाकिस्तान… कुछ भी नहीं आया काम


अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग में खाड़ी देशों की कोशिश बचने की रही है। सऊदी अरब ने पाकिस्तान के साथ कूटनीति का सहारा लिया। पिछले साल एक रक्षा समझौता भी किया, ताकि तेहरान पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जा सके। तमाम कोशिशों की बावजूद सऊदी अरब की जंग में एंट्री हो चुकी है। हालांकि यह तेहरान और रियाद के बीच कोई प्रत्यक्ष जंग नहीं है। ईरान के प्रॉक्सी ने रियाद के खिलाफ नया मोर्चा खोला तो जवाब में सऊदी अरब ने भी बमबारी की। लेकिन दुनियाभर के विशेषज्ञों को अब युद्ध के अन्य क्षेत्रों में फैलने का खतरा सताने लगा है।

 

सऊदी अरब और ईरान के बीच नहीं बनती है। यह सबको पता है। जंग शुरू होने से पहले ही ईरान ने सभी खाड़ी देशों को चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने अपनी जमीन को ईरान के खिलाफ हमला करने में अमेरिका को इस्तेमाल करने की अनुमति दी तो तेहरान उन पर भी हमला करेगा। नतीजा यह हुआ कि अधिकांश खाड़ी देशों ने अमेरिका को ईरान पर हमला करने की अनुमति नहीं दी। लंबे समय तक कूटनीतिक रास्ता अपनाने का दबाव बनाया। अमेरिका ने इन देशों की जमीन का इस्तेमाल सिर्फ रक्षात्मक उपायों में किया।

 

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कूटनीति से बचता रहा सऊदी अरब

युद्ध के पहले और दूसरे चरण में ईरान ने सऊदी अरब, कुवैत, कतर, बहरीन, ओमान, जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात पर हमला किया। अधिकांश हमले अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए थे। अन्य देशों की अपेक्षा सऊदी अरब पर हमले सीमित थे। कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। 

 

रिपोर्ट में दावा किया जाता है कि पाकिस्तान सेना प्रमुख ने इसी साल मार्च महीने में ईरान और सऊदी अरब के बीच एक गुप्त समझौता करवाया था। इसके तहत आईआरजीसी के मुखिया को पाकिस्तान के रास्ते अवैध ईरानी तेल के कारोबार की अनुमति मिली। आसिम मुनीर से जुड़ी एक कंपनी को पूरा काम सौंपा गया। दोनों देशों के जनरलों ने खूब मुनाफा कमाया। बदले में सऊदी अरब पर कोई हमला नहीं करने पर सहमति बनी।

 

जुलाई महीने में ईरान ने पहली बार सऊदी अरब पर मिसाइल दागी। इस पर पाकिस्तान ने नाराजगी जताई और समझौते को खतरे में डालने की धमकी दी। इसके बाद ईरान ने सऊदी अरब के प्रति संयम बरता।

अमेरिका पर बनाया बातचीत का दबाव

युद्ध शुरू होने के बाद से ही सऊदी अरब ने भी संयम का परिचय दिया। उसने अमेरिका पर बातचीत करने का दबाव बनाया। युद्ध की जगह वार्ता को महत्व देने पर जोर दिया। सऊदी अरब ने कई मौकों पर कहा कि जंग में उसे नहीं घसीटा जाना चाहिए। रियाद के रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह जंग उनकी नहीं है। अगर उलझे तो उनका ही नुकसान होगा। यही कारण है कि सऊदी अरब ने अमेरिका पर कूटनीतिक हल निकालने का खूब दबाव बनाया।

कहां से बिगड़ी सऊदी अरब की बात?

13 जुलाई को सना एयरपोर्ट पर हमला एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ। हूती विद्रोहियों का आरोप है कि यह हमला सऊदी अरब के कहने पर यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार ने किया। जवाबी कार्रवाई में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के आभा एयरपोर्ट हमला किया। तेल संयंत्र को निशाना बनाया और 20 जुलाई को लाल सागर पर सऊदी अरब की नाकेबंदी की घोषणा की। जवाब में सऊदी अरब ने हूती विद्रोहियों के सैन्य ठिकानों पर बमबारी की। यहीं से ईरान के प्रॉक्सी और सऊदी अरब के बीच बात बिगड़ गई।

 

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सऊदी के हमलों से बढ़ा युद्ध का खतरा

हूती विद्रोहियों के साथ एकजुटता दिखाने के उद्देश्य से इराक में मौजूद ईरान समर्थित मिलिशिया ने भी सऊदी अरब के तेल सुविधा पर हमला बोल दिया। जवाब में सऊदी अरब ने अमेरिका के साथ मिलकर ‘पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज’ के ठिकानों पर भीषण बमबारी की। यह तीसरी बार था जब इराक से सऊदी अरब पर हमला किया गया। मगर सबसे हैरान की बात यह रही कि सऊदी अरब ने पहली बार सैन्य प्रतिक्रिया दी। 

क्या ईरान से सीधा भिड़ेगा सऊदी अरब?

इराक में भीषण बमबारी के बाद जंग के लाल सागर में हूती और बगदाद में ईरान समर्थित प्रॉक्सी तक फैलने का खतरा बढ़ गया है। विश्लेशकों का मानना है आज सऊदी अरब भले ही तेहरान के प्रॉक्सी से लड़ रहा है, लेकिन आने वाले दिनों में उसे प्रत्यक्ष तौर पर ईरान से भी लड़ना पड़ सकता है, क्योंकि इन समूहों को सैन्य साजो-सामान तेहरान से ही भेजा जाता है।

 

सऊदी अरब के साथ तनाव बढ़ने की आशंका इस वजह से भी है कि ईरान की अर्ध-सरकारी न्यूज एजेंसी मेहर के मुताबिक सऊदी अरब और अमेरिका के हमलों में आईआरजीसी के चार सदस्यों की जान गई है। बदले में ईरान जवाबी कार्रवाई कर सकता है।

क्या युद्ध का केंद्र बनेगा लाल सागर?

सऊदी अरब को पूर्व में हूती विद्रोहियों ने घेर रखा है। उत्तर-पश्चिम में इराकी मिलिशिया ने। खास बात यह है कि ईरान के ये प्रॉक्सी सऊदी अरब के तेल केंद्रों को निशाना बना रहे हैं, जो रियाद के लिए बेहद संवेदनशील है, क्योंकि उसकी पूरी अर्थव्यवस्था तेल पर टिकी है। तेल केंद्रों पर हमलों को रियाद किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। उधर, नाकेबंदी के अलावा हूती विद्रोहियों ने लाल सागर पर टोल लगाने पर भी विचार करना शुरू कर दिया है। अगर ऐसा हुआ तो सऊदी अरब के साथ तनाव बढ़ना बिल्कुल तय है, क्योंकि होर्मुज के ठप होने के बाद से सऊदी अरब अपना अधिकांश तेल लाल सागर के रास्ते निर्यात करता है।