Home Blog

बलिया में 11 साल के शौर्य बने महंत, कौन हैं नन्हे मठाधीश?


उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का मझौवा मठ चर्चा का केंद्र बन गया है, जहां 11 साल के शौर्य तिवारी को मठ के महंत की गद्दी दी गई। महंत बनाए जाने के बाद शौर्य तिवारी को नया नाम दिया गया, साथ ही उनका वैदिक रीति-रिवाजों से अभिषेक किया गया। शौर्य तिवारी के गुरु के अनुसार, महंत बनने के बावजूद शौर्य को धर्म की शिक्षा दी जाएगी। अभिषेक समारोह का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

 

बलिया के रेवती बस स्टैंड के पास स्थित मझौवा मठ एवं लक्ष्मी नारायण मंदिर में रविवार को शौर्य तिवारी का अभिषेक हुआ, जिसके बाद संतों ने उनका नाम बदलकर श्याम नारायण रामानुज वैष्णवोदास रखा। जानकारी के लिए बता दें कि 25 जून को मठ के पुराने महंत मकसुदनाचार्य का निधन हो गया था, तब से ही महंत की गद्दी खाली थी। अब सवाल उठता है कि क्या अब से शौर्य तिवारी ही मठ से जुड़े अहम फैसले लेंगे।

 

यह भी पढ़ें: बिहार में दाखिल-खारिज नियम में क्या बदल गया है? पढ़ें हर सवाल का जवाब

क्या मठ की जिम्मेदारी संभालेंगे शौर्य?

मझौवा मठ के अभिषेक कार्यक्रम में कई लोग मौजूद थे, जहां कई रिपोर्टर्स भी शामिल हुए थे। रिपोर्टर्स ने जब शौर्य से सवाल किया कि क्या वह मठ की जिम्मेदारी संभाल पाएंगे, तो इसके जवाब में शौर्य ने कहा, ‘जरूर, मैं संभाल पाऊंगा।’ इसके बाद रिपोर्टर्स ने शौर्य से पूछा कि क्या वह जीवन में शादी नहीं करना चाहेंगे, तो शौर्य ने बेबाकी से जवाब दिया कि वह कभी शादी नहीं करना चाहेंगे।

 

शौर्य का यह जवाब वहां मौजूद लोगों को रोचक लगा। हालांकि, उनके गुरु बालक दास ने रिपोर्टर्स के सामने कहा कि शौर्य अभी बच्चे हैं। जब वह धर्म, संस्कृति और परंपराओं को पूरी तरह समझ लेंगे, तब वह मठ की पूरी जिम्मेदारी उठाएंगे। फिलहाल मठ संरक्षक मंडल मठ से जुड़े फैसले लेगा।

 

यह भी पढ़ें: क्या है गंज शाहिदा मस्जिद विवाद, जिसकी आंच पाकिस्तान तक पहुंच गई?

महंत बनने के बाद जारी रहेगी शिक्षा

 

शौर्य तिवारी के गुरु नारायण दास ने बताया कि शौर्य अभी कम उम्र के हैं, इस वजह से उन्हें धर्म और अध्यात्म की शिक्षा दी जाएगी, ताकि वह धर्म, परंपरा और संस्कृति को अच्छी तरह समझ सकें। शौर्य फिलहाल चौथी कक्षा में पढ़ते हैं।

 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब अभिषेक हो रहा था तो शौर्य को पहले स्नान कराया गया। तब उन्होंने मासूम आवाज में कहा, “ठंडा पानी है, इसलिए अच्छा लग रहा है।” इसके बाद उन्होंने अपने परिवार से फोन पर पूछा कि घर कब जाएंगे।

10 साल में 6 PM, कोई गुमनाम, कोई सक्रिय, ब्रिटेन के रिटायर PM करते क्या हैं?

भारत में साल 2014 से एक प्रधानमंत्री हैं, नरेंद्र मोदी। 3 संसदीय चुनाव हुए हैं, हर बार एनडीए की ही सरकार बनी है। कभी भारत पर शासन कर चुके ब्रिटेन का संवैधानिक संकट कुछ ऐसा है कि हर साल, 2 साल बाद कुछ न कुछ ऐसी खलबली मचती है कि जो भी प्रधानमंत्री चुना जाता है, उसे इस्तीफा देना पड़ता है। 
साल 2014 से अब तक देखें तो ब्रिटेन में 6 प्रधानमंत्री बदल चुके हैं। 

बदले गए प्रधानमंत्रियों की लिस्ट में डेविड कैमरून से लेकर कीर स्टार्मर तक का नाम है। इसी लिस्ट में भारतीय मूल के ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भी शामिल रहे हैं, जिनके प्रधानमंत्री बनने पर भारत में भी उत्सव जैसा माहौल रहा है। कभी ब्रिटिश प्रधानमंत्री वित्त विभाग संभालने में फेल होते हैं, इसलिए इस्तीफा देते हैं, कभी उनके खिलाफ पार्टी में बगावत होती है, इसलिए।

यह भी पढ़ें: ब्रिटेन के PM कीर स्टार्मर ने इस्तीफा क्यों दिया, कौन लेगा जगह? हर सवाल का जवाब

2010 से 2026 तक, रिटायर हुए प्रधानमंत्री कर क्या रहे हैं?

डेविड कैमरन, पूर्व प्रधानमंत्री, यूनाइटेड किंगडम
  • डेविड कैमरन: साल 2010 में डेविड कैमरन प्रधानमंत्री बने थे। साल 2010 से लेकर 2016 तक वह प्रधानमंत्री रहे। डेविड कैमरन ब्रेक्सिट के खिलाफ थे। वह चाहते थे कि यूरोपियन यूनियन में उनका देश बना रहे। 52 फीसदी लोगों ने जनमत संग्रह में उनके खिलाफ मतदान किया। उन्होंने हार की नैतिक जिम्मेदारी ली और अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
    अब क्या करते हैं?
    डेविड कैमरन रिटायर होने के बाद के बाद भी सरकार से जुड़े रहे। ऋषि सुनक के कार्यकाल में 2023 से 2024 तक विदेश सचिव ही रहे। वह राजनीतिक तौर पर सक्रिय हैं। हाउस ऑफ लॉर्ड्स में 2024 तक रहे।
टेरेसा मे, पूर्व प्रधानमंत्री, यूनाइटेड किंगडम
  • टेरेसा मे: साल 2016 में जब डेविड कैमरन ने इस्तीफा दिया, खराब और बिखरी हुई अर्थव्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी टेरेसा में को मिली। टेरेसा में को कंजर्वेटिव पार्टी के नेता के पद से 7 जून 2019 को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। वह ब्रेक्सिट को संसद से पारित कराने में असफल रहीं थीं। 3 साल में न ब्रिटेन की इस्तीफा सुधरी, न ही ब्रिटेन के हालात बेहतर हुए। 
    अब क्या करती हैं?
    हाउस ऑफ लॉर्ड्स की सदस्य हैं। किताबें लिखती हैं। अब कम चर्चा में रहती हैं। अपने परिवार के साथ वक्त बिता रही हैं। उनके पति फिलिप मे इन्वेस्टर हैं।

यह भी पढ़ें: ब्रिटेन में PM स्टार्मर के खिलाफ बगावत क्यों? 10 साल में 6 प्रधानमंत्री बदले

बोरिस जॉनसन, टेरेसा मे, पूर्व प्रधानमंत्री, यूनाइटेड किंगडम

 

  • बोरिस जॉनसन: साल 2022 में गिरती पड़ती अर्थव्यवस्था को संभालने की जिम्मेदारी बोरिस जॉनसन को मिली। साल 2019 से 2022 तक करीब 4 साल वह प्रधानमंत्री बने रहे। बोरिस जॉनसन की अगुवाई में 1987 के बाद पहली बार कंजर्वेटिव पार्टी बहुमत से जीती थी। उनके सांसद ही उनके खिलाफ हो गए थे। क्रिस पिंचर, पार्टी गेट, महंगाई, टैक्स और लापरवाही जैसे कई मुद्दे थे जिन्होंने उनकी राह मुश्किल की। 
    अब क्या करते हैं?
    उनकी राजनीति आलोचनाओं के केंद्र में रही। अब राजनीति से दूर हैं, सार्वजनिक फोरम में स्पीच देते हैं, किताबें लिखते हैं और व्यापार संभालते हैं। उनकी 3 शादियां हुई हैं। एलेग्रा मोस्टेन से 1993 में और मरीना व्हीलर से 2020 में तलाक हुआ। तलाक के अगले साल ही उन्होंने कैरी सायमंड से शादी रचा ली। बोरिस जॉनसन के 5 बच्चे हैं। परिवार के साथ वक्त बिताते हैं।
लिज ट्रस, पूर्व प्रधानमंत्री, यूनाइटेड किंगडम
  • लिज ट्रस: बोरिस के इस्तीफे के बाद लिज ट्रस ने सत्ता संभाली। उनका कार्यकाल 60 दिनों से भी कम का रहा। 6 सितंबर को उन्होंने पद संभाला, 20 अक्तूबर को इस्तीफा दे बैठीं। वह पहले से खराब अर्थव्यवस्था संभाल नहीं पाईं। बोरिस जॉनसन ने कर थोपे, इन्होंने करों में छूट दी, अर्थव्यवस्था पर असर आया। अराजकता की स्थिति रही, उन्होंने पद छोड़ने का मन बना लिया। 
    अब क्या करती हैं?
    संसद सदस्य नहीं हैं। कंजर्वेटिव पार्टी की नेता हैं, किताबें लिखती हैं, सार्वजनिक समारोहों में नजर आती हैं।
अक्षता मूर्ति और ऋषि सुनक। 
  • ऋषि सुनक: लिज ट्रस के बाद उनके वित्त मंत्री ऋषि सुनक ने प्रधानमंत्री पद की कमान संभाली। वह भारतीय मूल के थे, उनकी पत्नी नारायण और सुधा मूर्ति की बेटी अक्षता मूर्ति हैं। 14 साल के शासन में कंजर्वेटिव पार्टी की हार हुई थी। 2024 में देश में लेबर पार्टी की लहर थी, ऋषि सुनकर की कंजर्वेटिव पार्टी से लोगों का मोह भंग हुआ, उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। उनका कार्यकाल 2 साल का रहा।
    अब क्या करते हैं?
    कंजर्वेटिव पार्टी के सक्रिय नेता हैं। उद्योगपति हैं। खूब राजनीतिक और व्यक्तिगत दौरे करते हैं। उनके पास अभी लंबा सियासी भविष्य है। साल 2025 में उन्होंने एक बार फिर गोल्डमैन सेक्स में वरिष्ठ सलाहकार की भूमिका स्वीकारी थी।

यह भी पढ़ें: ‘चार्ल्स पर फिदा थीं मेरी मां…’, ब्रिटेन के राजा से मिल ट्रंप को क्या याद आया?

कीर स्टार्मर, प्रधानमंत्री, यूनाइटेड किंगडम
  • कीर स्टार्मर: लेबर पार्टी को करीब डेढ़ दशक बात जीत मिली। 2024 से 2026, सिर्फ 2 साल में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। उनके सामने कई ऐसे मुद्दे थे, जिनसे पार्टी के लोग ही खफा थे। कीर स्टार्मर के मंत्रियों ने इस्तीफा दिया, उन्होंने ग्रीन इन्वेस्टमेंट, इनहेरिटेंस टैक्स में बदलाव किया, जिससे लोग खुश नहीं थे। ब्रिटेन में अवैध घुसपैठ, जेफरी एपस्टीन के दोस्त लॉर्ड मेंडलसन को प्रतिनिधि नियुक्त करने जैसे मुद्दों पर उनकी खूब किरकिरी हुई। पार्टी के भीतर ही बगावत हुई और अब उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
    अब क्या करेंगे?
    कीर स्टार्मर सांसद हैं, लेबर पार्टी के नेता हैं। अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं लेकिन नए प्रधानमंत्री के पद संभालने तक पद पर वह बने रहेंगे। उन्होंने इस्तीफे के बाद कहा है कि वह अपनी पत्नी विक के अच्छे पति बनना चाहते हैं, बच्चों के लिए अच्छे पता बनना चाहते हैं। उनकी पत्नी का नाम विक्टोरिया एलेक्जेंडर है। उनके 2 बच्चे हैं। 

कहीं लू के थपेड़े, कहीं तेज बारिश, कहां अटक गया है मानसून?


देश के ज्यादातर राज्यों में लोग बारिश का इंतजार कर रहे हैं लेकिन लू के थपेड़े बरस रहे हैं। कई राज्यों में अभी लू के हालात बने रहेंगे। दक्षिण-पश्चिम मानसून आज मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक के बाकी हिस्सों, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ गया है। 

अगले 48 घंटों में यह महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा के बाकी हिस्सों और छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार के कुछ और क्षेत्रों में आगे बढ़ने की अच्छी संभावना है। उत्तर भारत को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। दिल्ली-NCR के लोगों को भी कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। 

यह भी पढ़ें: गर्मी ने किया बेहाल, चादर-तकिया लेकर समुद्र के किनारे रेत पर सो रहे मुंबई के लोग

किन राज्यों में हीटवेव का खतरा है?

विदर्भ, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पूर्वी मध्य प्रदेश में अगले 4-5 दिनों तक लू चलने की संभावना है। विदर्भ में भीषण लू और गर्म रातें रहने की चेतावनी है। छत्तीसगढ़, तेलंगाना और बिहार के कुछ इलाकों में भी लू पड़ेगी। यूपी का बांदा सबसे गर्म शहर रहा, जहां 42.6°C तापमान दर्ज किया गया है।

दिल्ली-NCR में कैसा मौसम रहेगा?

दिल्ली में अगले 4 दिन आसमान में आंशिक बादल छाए रहेंगे। 22 जून को दोपहर और शाम में आंधी, बिजली और तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश की संभावना है। अधिकतम तापमान 38 से 41 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा।

कहां बारिश होगी?

इस हफ्ते उत्तर भारत, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। बारिश 7 से 20 सेंटीमटर तक हो सकती है। मेघालय में कहीं-कहीं 20 सेंटीमीटर से ज्यादा बारिश हो सकती है। पिछले 24 घंटों में पश्चिम बंगाल और मेघालय के पहाड़ी इलाकों में भीषण बारिश हुई है। 

पूर्वोत्तर भारत में कैसा रहेगा मौसम?

23 से 28 जून तक अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में व्यापक बारिश होने की संभावना है। कई दिनों में भारी से बहुत भारी बारिश और आंधी-बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है।

यह भी पढ़ें: SPF 15, 30 या 50, भीषण गर्मी में कौन सा सनस्क्रीन लगाना सही? डॉक्टर से जानें

दक्षिण भारत में कैसा रहेगा मौसम?

केरल, तटीय कर्नाटक, तेलंगाना, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और तमिलनाडु में अगले कई दिनों तक अच्छी बारिश होगी। कुछ जगहों पर भारी बारिश के साथ आंधी-तूफान और तेज हवाएं (40-60 किमी/घंटा) चल सकती हैं।

मौसम विभाग की चेतावनी क्या है?

बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के कई हिस्सों में 22 से 27 जून तक समुद्र में तेज हवाएं और खराब मौसम रहने की संभावना है। मछुआरों को इन इलाकों में न जाने की सलाह दी गई है। 

 

फ्रिज से आ रही है बदबू? अपनाएं आसान घरेलू उपाय, मिनटों में मिलेगी राहत


घरों में फ्रिज का इस्तेमाल करने वाले ज्यादातर लोग इस समस्या से जूझते हैं कि कभी-कभी फ्रिज से तेज बदबू आने लगती है। कई बार यह दुर्गंध इतनी तेज होती है कि पूरा किचन महकने लगता है, लेकिन लोगों को अक्सर इसका सही कारण भी पता नहीं होता। विशेषज्ञों के अनुसार, फ्रिज में बदबू आने के पीछे मुख्य वजह हमारी लापरवाही ही होती है।

खाना बहुत लंबे समय तक फ्रिज में रखे रहना, खाना गिरकर साफ न करना, बिना ढके खाद्य पदार्थ रखना और लंबे समय तक फ्रिज की सफाई न करना जैसे कारणों से दुर्गंध पैदा होती है। कई उपभोक्ता इसे फ्रिज की खराब क्वालिटी से जोड़कर देखते हैं, लेकिन विशेषज्ञ साफ तौर पर कहते हैं कि ज्यादातर मामलों में यह समस्या मशीन की नहीं बल्कि इस्तेमाल करने वाले की होती है।

दिलचस्प बात यह है कि बिना किसी अतिरिक्त खर्च के फ्रिज को तरोताजा और बदबू-मुक्त रखा जा सकता है। नियमित सफाई, खाने को सही तरीके से ढककर रखना, समय-समय पर एक्सपायर्ड आइटम्स निकालना और फ्रिज के अंदरूनी हिस्सों को साफ रखने जैसी छोटी-छोटी आदतें इस समस्या का स्थायी समाधान बन सकती हैं। 

खतरा जिनसे अनजान हैं लोग

स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी चेताते हैं कि फ्रिज में जमी बदबू सिर्फ असुविधा नहीं बल्कि बैक्टीरिया और फंगस के फैलने का संकेत भी हो सकती है, जो खाने की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है। इसलिए समय पर फ्रिज की देखभाल करना जरूरी है।

 

यह भी पढ़ें: छोटे घर में कैसे सजाएं बड़े सामान? 10 तरीके जो काम बनाएंगे आसान

फ्रिज की बदबू दूर करने के घरेलू उपाय

1. बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करें

बेकिंग सोडा बदबू सोखने के लिए जाना जाता है। एक छोटी कटोरी में बेकिंग सोडा भरकर फ्रिज के किसी कोने में रख दें। यह फ्रिज के अंदर की दुर्गंध को कम करने में मदद करता है।

2. नींबू का करें उपयोग

नींबू को दो हिस्सों में काटकर फ्रिज में रख दें। इसकी ताजगी भरी खुशबू बदबू को कम करने में मदद करती है। चाहें तो नींबू के रस में थोड़ा नमक मिलाकर भी रख सकते हैं।

3. कॉफी पाउडर रख सकते हैं

एक कटोरी में थोड़ा कॉफी पाउडर रखकर फ्रिज में रखने से दुर्गंध कम हो सकती है। कॉफी की तेज खुशबू बदबू को सोखने में मदद करती है।

4. नियमित सफाई जरूरी

फ्रिज की ट्रे, रैक और ड्रॉअर को समय-समय पर निकालकर साफ करें। कई बार खाने के छोटे कण और तरल पदार्थ जमा होकर बदबू का कारण बनते हैं।

5. खराब खाद्य पदार्थ तुरंत हटाएं

खराब हो चुके फल, सब्जियां या बचा हुआ खाना फ्रिज में न रखें। ये बदबू फैलाने के साथ-साथ अन्य खाद्य पदार्थों को भी प्रभावित कर सकते हैं।

6. सिरके से सफाई करें

पानी और सफेद सिरके को बराबर मात्रा में मिलाकर फ्रिज की अंदरूनी सतह साफ करें। इससे दाग और दुर्गंध दोनों को कम करने में मदद मिलती है।

7. खाने को ढककर रखें

खुले बर्तनों में रखा खाना जल्दी बदबू फैला सकता है। इसलिए भोजन को एयरटाइट कंटेनर में स्टोर करना बेहतर माना जाता है।

नया ट्रेंड: फ्रिज डिओडोराइज़र

फ्रिज डिओडोराइज़र एक ऐसा उपकरण या उत्पाद है जो रेफ्रिजरेटर के अंदर से सड़े हुए खाने, प्याज, लहसुन या अन्य चीजों की दुर्गंध को सोखता है या खत्म करता है। यह फ्रिज की हवा को ताजा रखता है जिससे एक खाने की महक दूसरे खाने में नहीं जाती और खाने के स्वाद भी पहले जैसा बरकरार रहता है। बाजार में अब ऐसे फ्रिज की मांग तेजी से बढ़ गई है। आजकल लोगों का ऐसा ही रेफ्रिजरेटर चाहिए होता है जिसमें गंध को सोखने वाला फिल्टर पहले से ही मौजूद हो। 

 

यह भी पढ़ें: शादी के बाद ऐसे सजाएं नया किचन, नया ट्रेंड घर को बनाएगा और खूबसूरत

कौन सी चीजें सबसे ज्यादा बदबू फैलाती हैं?

  • कटे हुए प्याज
  • मछली और मांस
  • खराब फल और सब्जियां
  • लंबे समय तक रखा हुआ खाना
  • अदरक लहसुन का पेस्ट

कितने दिनों में करनी चाहिए फ्रिज की सफाई?

विशेषज्ञों के अनुसार फ्रिज की हल्की सफाई हर सप्ताह करनी चाहिए। इस दौरान पुराने या खराब हो चुके खाने को निकाल देना चाहिए और रैक पर गिरे हुए दाग-धब्बों को साफ कर लेना चाहिए। वहीं महीने में कम से कम एक बार फ्रिज की गहरी सफाई करना बेहतर माना जाता है। इसके लिए फ्रिज को खाली करके सभी ट्रे, रैक और ड्रॉअर निकालकर अच्छी तरह धोने चाहिए। साथ ही फ्रिज की अंदर की दीवारों और कोनों को भी साफ करना चाहिए क्योंकि यहां अक्सर गंदगी और बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं। नियमित सफाई करने से न केवल फ्रिज साफ रहता है बल्कि इससे खाना भी एकदम फ्रैश रहता है।

रक्षाबंधन पर पड़ जाए चंद्रग्रहण की छाया तो राखी बांधे या नहीं? समझिए


सनातन धर्म में रक्षाबंधन को बेहद पावन त्योहार माना जाता है। यह त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम और भरोसे का प्रतीक है। इस साल 28 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा। संयोग से इसी दिन चंद्रग्रहण भी लगने वाला है, जो इस साल का आखिरी चंद्रग्रहण होगा। चंद्रग्रहण की वजह से त्योहार पर प्रभाव पड़ेगा। इसी वजह से एक तरफ कई लोग उस दिन अपने भाई को राखी नहीं बांधेंगे, जबकि दूसरी तरफ कई लोग उस दिन रक्षाबंधन की सारी परंपराएं निभाएंगे।

 

इस साल रक्षाबंधन का त्योहार मनाने को लेकर कई लोग दुविधा में हैं। जहां कुछ लोगों का मानना है कि चंद्रग्रहण की वजह से रक्षाबंधन का पर्व नहीं मनाना चाहिए, वहीं दूसरी तरफ चंद्रग्रहण के दिन कई महिलाएं अपने भाई को राखी बांधेंगी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या चंद्रग्रहण के दिन राखी बांधने से कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा? इस सवाल का जवाब आइए जानते हैं।

 

यह भी पढ़ें: पार्वती का श्राप, शनिदेव के लिए वरदान कैसे बना? कहानी गणेश पुराण की

कब लगेगा चंद्रग्रहण?

ज्योतिषीय जानकारों के मुताबिक 28 अगस्त को चंद्रग्रहण सुबह 6 बजकर 53 मिनट से शुरू होगा, जो दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। यानी ग्रहण कुल 5 घंटे 39 मिनट तक रहने वाला है। इस ग्रहण को ब्लड मून भी कहा जाता है।

 

धार्मिक मान्यता के अनुसार चंद्रग्रहण के 9 घंटे पहले तक शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। कई लोगों का मानना है कि चंद्रग्रहण लगने से सूतक काल शुरू हो जाता है और उस दौरान शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। अब सवाल उठता है कि रक्षाबंधन उस दिन मना सकते हैं या नहीं।

 

यह भी पढ़ें: कहां है खैट पर्वत, जिसे कहते हैं परियों का गांव? यहीं से लापता हुईं बबिता पांडेय

क्या रक्षाबंधन मनाना चाहिए?

 

ज्योतिष जानकारों के मुताबिक 28 अगस्त को भारत में चंद्रग्रहण की लाल छाया दिखाई नहीं देगी। जब चंद्रग्रहण ही दिखाई नहीं देगा, तो उसके नकारात्मक प्रभाव भी नहीं पड़ेंगे। साथ ही भारत में सूतक काल भी मान्य नहीं माना जाएगा। इस वजह से भारत में सभी भक्तों को रक्षाबंधन का त्योहार उस दिन मनाना चाहिए।

 

इस साल 28 अगस्त को सभी लोग रक्षाबंधन की परंपराएं निभा सकते हैं। इसका मतलब साफ है कि सभी भक्त रक्षाबंधन के दिन पूजा-पाठ कर सकते हैं और अपने भाई को राखी भी बांध सकते हैं।

 

नोट- यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

ब्रिटेन के PM कीर स्टार्मर ने इस्तीफा क्यों दिया, कौन लेगा जगह? हर सवाल का जवाब


ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर एक बयान में प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने जो भी फैसले लिए, वे हमेशा देश के हित में थे। स्टार्मर ने अपनी पत्नी विक का शुक्रिया अदा करते हुए उन्हें अपना सहारा बताया। 

भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि अब वह सबसे अच्छे पति और पिता बनने पर ध्यान देंगे। उन्होंने अपने बच्चों को अपनी खुशी और गर्व बताया। बयान के बाद उन्होंने पत्नी को गले लगाया। कीर स्टार्मर ने कहा कि उन्होंने लेबर पार्टी को राजनीतिक, आर्थिक और नैतिक रूप से दिवालिया हालत से बाहर निकाला। 

यह भी पढ़ें: भारत आ रहे ब्रिटिश PM कीर स्टार्मर, स्कॉच व्हिस्की का मामला क्या है?

कीर स्टार्मर की उपलब्धियां क्या रहीं?

कीर स्टार्मर ने दावा किया कि उन्होंने पार्टी की यहूदी विरोधी छवि को खत्म किया, अर्थव्यवस्था, रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा पर लोगों का विश्वास बहाल किया। उन्होंने 2024 में डाउनिंग स्ट्रीट में प्रवेश को अपने जीवन का सबसे गर्व का पल बताया। उन्होंने ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय से सोमवार सुबह इस फैसले की जानकारी दी। 

कैसे चुना जाएगा नया नेता?

कीर स्टार्मर ने लेबर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से कहा है कि 9 जुलाई से नेतृत्व चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो और गर्मियों की छुट्टियों से पहले नया नेता चुना जाए। नया नेता चुने जाने तक वह प्रधानमंत्री बने रहेंगे। उन्होंने अगले प्रधानमंत्री को पूरा सहयोग देने का वादा किया।

कौन संभालेगा कीर स्टार्मर की जगह?

यह काफी चौंकाने वाला है क्योंकि लेबर पार्टी ने 2024 के आम चुनाव में भारी जीत हासिल की थी, मात्र दो साल बाद स्टार्मर को इस्तीफा देना पड़ रहा है। वेस्टमिंस्टर में सोमवार को ही एंडी बर्नहम भी सांसद के रूप में शपथ लेंगे, जिन्हें स्टार्मर का संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है।

यह भी पढ़ें: ‘ग्रूमिंग गैंग’ पर बोल फंस गए पीएम कीर स्टार्मर, क्या गलती कर बैठे?

इस्तीफा क्यों दिया है?

18 जून 2026 को हुए उप-चुनाव में ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर एंडी बर्नहम ने भारी अंतर से जीत हासिल की थी। उन्होंने लगभग 55 फीसदी वोट पाए और रिफॉर्म यूके के उम्मीदवार को 9,000 से ज्यादा वोटों से हराया। यह जीत बर्नहम को संसद पहुंचाने वाली थी। 

अब वह लेबर पार्टी की लीडरशिप रेस में हिस्सा ले सकेंगे। उनकी जीत के बाद पार्टी के अंदर स्टार्मर के खिलाफ बगावत तेज हो गई। बर्नहम को कई सांसदों का समर्थन मिला और उन्हें स्टार्मर का संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है। 

मई 2026 के लोकल चुनावों में लेबर पार्टी को भारी नुकसान हुआ। पार्टी ने करीब 1,500 सीटें गंवाईं। इसके बाद दर्जनों लेबर सांसदों ने स्टार्मर से इस्तीफा मांगा और डिपार्चर टाइमलाइन सेट करने की मांग की। कई मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया, जिसमें पूर्व हेल्थ सेक्रेटरी वेस स्ट्रीटिंग भी शामिल हैं। अब कीर स्टार्मर अगले आम चुनाव में पार्टी का नेतृत्व नहीं करेंगे।

कहां-कहां चूके कीर स्टार्मर?

कीर स्टार्मर पार्टी की प्रवासन नीतियां सवालों के घेरे में रहे। उर्जा नीतियां भी ब्रिटेन के लिए असरदार साबित नहीं हुईं। डोना्ड ट्रंप ने भी इन्हीं बातों को लेकर आशंका जाहिर की थी। डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा था कि वह नॉर्थ सी ड्रिलिंग बढ़ाने की वकालत कर रहे हैं लेकिन उनके देश की हालत ऐसी नहीं है। 

कीर स्टार्मर पर डिफेंस को पर्याप्त फंड न देने के भी आरोप लगे हैं। कई दिग्गज अधिकारियों ने इस्तीफे दिए, जिनकी वजह से उनकी बदनामी हुई। एपस्टीन फाइल्स में नाम और पीटर मंडेलसन को अमेरिका में एंबेसडर नियुक्त करने पर भी विवाद हुआ। 

पृष्ठ अस्थायी रूप से अनुपलब्ध है

पृष्ठ अस्थायी रूप से अनुपलब्ध है – Khabargaon

502 / 503

सर्वर में तकनीकी समस्या आ गई है। कृपया रिफ्रेश करें या कुछ देर बाद पुनः प्रयास करें।

किचन का सिंक जाम हो तो क्या करें? 6 नुस्खे जो बनाएंगे आपका काम


आमतौर पर हर घर में किचन का सिंक अक्सर जाम हो जाता है। किचन घर का वह हिस्सा है जहां सुबह से रात तक सबसे ज्यादा काम होता रहता है। बर्तन धोना, सब्जियां साफ करना और रोजमर्रा के दूसरे कामों में सिंक का इस्तेमाल लगातार होता है।जब बर्तनों से निकलने वाला तेल, घी, मसाले, चायपत्ती और खाने के छोटे-छोटे कण पाइप में चले जाते हैं तो धीरे-धीरे सिंक जाम हो जाता है। पानी बहना बंद हो जाता है और सिंक में पानी भरने लगता है।

अगर समय पर साफ-सफाई न की जाए तो पूरे रसोईघर में बदबू फैलने लगती है, जिससे घरवालों को काफी परेशानी होती है।ऐसी स्थिति में लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। रोजाना का काम रुक जाता है और घर में तनाव बढ़ जाता है लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। 

 

कई आसान और प्रभावी घरेलू उपायों की मदद से जाम हुआ सिंक जल्दी साफ किया जा सकता है।इन उपायों को अपनाकर आप बिना किसी महंगे प्लंबर के बुलाए या केमिकल इस्तेमाल किए अपने किचन को साफ और सुगंधित रख सकते हैं। समय-समय पर इन तरीकों का इस्तेमाल करने से सिंक जाम होने की समस्या भी कम हो जाती है।

 

यह भी पढ़ें: मानसून में जूतों की बदबू से हैं परेशान? अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय

1. गर्म पानी का इस्तेमाल करें

अगर जाम ज्यादा गंभीर नहीं है तो सबसे पहले पाइप में धीरे-धीरे गर्म पानी डालें। गर्म पानी चिकनाई और जमी गंदगी को नरम करके बहाने में मदद करता है। यह तरीका किचन सिंक के लिए खासतौर पर कारगर माना जाता है।

2. बेकिंग सोडा और सिरके का मिश्रण

सिंक के ड्रेन में आधा कप बेकिंग सोडा डालें और उसके ऊपर एक कप सफेद सिरका डाल दें। कुछ मिनट तक झाग बनने दें और फिर गर्म पानी डालकर पाइप को फ्लश कर दें। इससे पाइप में जमा गंदगी ढीली हो सकती है।

3. प्लंजर का उपयोग करें

अगर पानी बिल्कुल नहीं निकल रहा है, तो प्लंजर का इस्तेमाल करें। कुछ मिनट तक दबाव बनाने से पाइप में फंसी गंदगी बाहर निकल सकती है और पानी का प्रवाह सामान्य हो सकता है।

4. ड्रेन स्ट्रेनर साफ करें

कई बार जाम की वजह पाइप नहीं बल्कि ड्रेन कवर या स्ट्रेनर में फंसे बाल और कचरा होते हैं। इसे निकालकर अच्छी तरह साफ करें।

5. पाइप ट्रैप की सफाई करें

सिंक के नीचे लगे U-आकार के पाइप (P-Trap) में अक्सर गंदगी जमा हो जाती है। बाल्टी रखकर इस हिस्से को खोलें और जमा कचरा निकालकर दोबारा फिट कर दें।

6. वायर या हुक की मदद लें

पतले तार या हुक को ड्रेन में डालकर फंसे हुए बाल, प्लास्टिक या अन्य कचरे को बाहर निकाला जा सकता है। यह तरीका बाथरूम सिंक में ज्यादा उपयोगी होता है।

 

यह भी पढ़ें: शादी के बाद ऐसे सजाएं नया किचन, नया ट्रेंड घर को बनाएगा और खूबसूरत

कब बुलाना चाहिए प्लंबर को?

अगर घरेलू तरीकों को इस्तेमाल करने के बाद भी सिंक में से पानी नहीं निकल रहा है, बदबू आ रही है या फिर बार-बार सिंक जाम हो रहा है तो समस्या काफी बढ़ गई है। ऐसे में फिर प्लंबर की मदद लेना ही सबसे बेहतर होगा।

 

‘पुजारी महिला के सिर पर नहीं रखेगा हाथ’, हरिद्वार के मंदिर ने क्यों लिया फैसला?


उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर कमेटी ने एक फैसला लिया है। इस फैसले के मुताबिक मंदिर में कोई भी पुजारी आशीर्वाद देने के लिए किसी भक्त के सिर पर हाथ नहीं रखेगें। यह नियम महिलाओं की सुरक्षा और मंदिर की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। इस नियम को लेकर मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख महंत रविंद्र पुरी ने अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में यहां कुंभ मेला लगेगा, जहां लाखों लोग आएंगे। ऐसे में पुजारियों के खिलाफ कोई शिकायत न आए, इसलिए यह फैसला लिया गया है।


महंत रविंद्र पुरी ने हाल ही में एएनआई को इंटरव्यू दिया था। इसमें उन्होंने बताया कि पुजारी अपने हाथों से भक्तों के माथे पर तिलक लगा सकते हैं, हालांकि वे किसी भी भक्त के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद नहीं दे सकते। नियम के मुताबिक जो पुजारी इस नियम का पालन नहीं करेगा, उसे मंदिर की सेवा से बाहर कर दिया जाएगा।

 

यह भी पढ़ें: 21 जून का राशिफल: क्या बृहस्पति की वजह से आप पर बरसेगी लक्ष्मी की कृपा?

महंत रविंद्र पुरी ने क्या कहा?


इस नियम को लेकर महंत रविंद्र पुरी ने कहा, ‘हमने सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देने की परंपरा पर रोक लगाई है। अब से कोई भी पुजारी महिला या पुरुष के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद नहीं दे सकता। पुजारी भक्तों से प्रसाद ले सकते हैं और उन्हें आशीर्वचन दे सकते हैं। आशीर्वाद देने वाला कोई पुजारी नहीं है, बल्कि मां भवानी हैं, जो भक्तों को आशीर्वाद देती हैं।’


आगे उन्होंने कहा, ‘मैं समझता हूं कि पुजारी द्वारा सिर छूकर आशीर्वाद देना सही नहीं है। आने वाले दिनों में कुंभ का मेला लगेगा, जहां करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आने वाले हैं। कई पुजारी अलग-अलग सोच और विचारों के होते हैं, जिनके मन में क्या चल रहा है, यह किसी को पता नहीं होता। इसलिए हम कोशिश कर रहे हैं कि भविष्य में कोई शिकायत न आए। भक्तों के साथ कोई अप्रिय घटना न हो, इसलिए हमने इस नियम की शुरुआत की है।’भक्तों को मां भवानी देंगी आशीर्वाद


महंत रविंद्र पुरी ने बताया कि जो भक्त इस मंदिर में दर्शन करने आएंगे, उन्हें पुजारी क्या आशीर्वाद देंगे? वे तो माता भवानी का आशीर्वाद लेने आते हैं। जिस प्रकार श्रद्धालु भगवान के भक्त हैं, उसी प्रकार पुजारी भी भगवान के भक्त हैं। ऐसे में एक भक्त दूसरे भक्त को क्या आशीर्वाद दे सकता है? इसलिए पुजारियों द्वारा सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देने की परंपरा को समाप्त करने का नियम लाया गया है।

भगवान राम की तस्वीर पर फेंके जूते, बांग्लादेश में बवाल, सड़क पर उतरे हिंदू


बांग्लादेश की राजधानी ढाका और देश के कई हिस्सों में लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। लोगों का आरोप है कि पलाशबाड़ी में एक जुलूस के दौरान भगवान राम की तस्वीर पर जूते फेंके गए थे। साथ ही राधा-गोबिंद मंदिर में भगवान राम की मूर्ति तोड़ने की धमकी भी दी गई थी। इस घटना के विरोध में हजारों हिंदू लोग सड़कों पर उतर आए और आंदोलन शुरू कर दिया। लोगों ने सरकार से मांग की है कि इस शर्मनाक हरकत को अंजाम देने वालों को सख्त सजा दी जाए।

 

यह विरोध प्रदर्शन शुक्रवार रात को शुरू हुआ था। इसके बाद शनिवार को हजारों लोग प्रदर्शन में शामिल हुए, जिसके चलते मामला गंभीर रूप लेता गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ भी नाराजगी जताई। लोगों का कहना है कि सरकार अल्पसंख्यकों की धार्मिक आस्था की रक्षा करने में विफल रही है, साथ ही अब तक आरोपियों को सजा भी नहीं दिला पाई है।

 

यह भी पढ़ें: 16 साल से कम उम्र के बच्चे नहीं यूज कर पाएंगे सोशल मीडिया, ब्रिटेन PM का फैसला

 

हिंदू संगठनों ने किया विरोध प्रदर्शन

इस घटना को लेकर बांग्लादेश पूजा उद्जापन परिषद ने भी प्रदर्शन किया। उनके साथ बौद्ध और ईसाई संगठनों के सदस्य भी शामिल हुए। इस मामले पर हिंदू संगठनों का कहना है कि इस घटना ने लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, जो बिल्कुल भी उचित नहीं है। इन संगठनों ने ढाका प्रेस क्लब के सामने प्रदर्शन किया, जहां हिंदू संगठनों के नेताओं ने घटना की निंदा की। साथ ही पूरे देश को संदेश दिया कि इस तरह की घटनाएं सांप्रदायिक मतभेद बढ़ाती हैं।

 

विरोध प्रदर्शन में शामिल एक व्यक्ति ने कहा, ‘हम इस देश के नागरिक हैं, हम यहां के प्रवासी नहीं हैं। बांग्लादेश के निर्माण में हमने भी खून बहाया है। हमारे पूर्वजों के बलिदान से ही यह देश बना है। इसलिए अब हमें देश में हो रही बुराइयों को रोकना होगा।’

 

यह भी पढ़ें: पहले किडनैप किया, फिर रेप…, लंदन में भारतीय को 34 साल की सजा

 

प्रदर्शन में शामिल लोगों ने मांग की कि जुलूस के दौरान हुई घटना पर तुरंत कार्रवाई की जाए और आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए। फिलहाल इस मामले में किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।