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बांग्लादेश में बढ़ रहा पाकिस्तान का सैन्य दखल, चीन की भी दिलचस्पी; भारत अलर्ट


मोहम्मद युनूस की अंतरिम सरकार में बांग्लादेश ने पाकिस्तान के साथ रिश्तों को सबसे बेहतर किया। अब तारिक रहमान के शासन में भी दोनों देशों के बीच सैन्य गठबंधन बढ़ रहा है। यह भारत के लिए एक बड़ी चिंता बनकर उभरी है। हाल ही में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि बांग्लादेश से पाकिस्तान के रिश्ते बेहतर हो रहे हैं। पाकिस्तान ने चीन, अजरबैजान और तुर्की के साथ बांग्लादेश को मित्र मुल्क के तौर पर जोड़ा है।  

 

बांग्लादेश अब पाकिस्तान से द्विपक्षीय व्यापार के अलावा सैन्य खरीद और रणनीतिक साझेदारी बढ़ा रहा है। हाल ही में इस्लामाबाद ने बांग्लादेश को दो जेएफ-17 फाइटर जेट सिमुलेटर सौंपे। माना जा रहा है कि आने वाले समय में बांग्लादेश चीन निर्मित जेएफ-17 थंडर फाइटर जेट खरीद सकता है। इन विमानों की तैनाती भारतीय सीमा के करीब होने की उम्मीद है।

 

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पाकिस्तान की तरफ बढ़ रहा झुकाव

1971 से 2024 तक बांग्लादेश के रिश्ते पाकिस्तान के साथ उतने बेहतर नहीं थे। मगर 05 अगस्त 2024 को शेख हसीना के अपदस्थ होने के बाद बांग्लादेश का झुकाव पाकिस्तान की तरफ बढ़ा है। मगर पाकिस्तान के साथ बढ़ती सैन्य रणनीति की नींव मोहम्मद युनूस की अंतरिम सरकार ने रखी। इसी साल जनवरी में कुछ मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि बांग्लादेश पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौता करने पर विचार कर रहा है। दोनों देशों के बीच जेएफ-17 फाइटर जेट की बिक्री पर गहन मंथन जारी है। 

रक्षा सहयोग में पाकिस्तान दिखा रहा दिलचस्पी

मौजूदा समय में भी दोनों देशों की बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने पर विचार विमर्श चल रहा है। पाकिस्तान अब बांग्लादेश को रक्षा उपकरण, उन्नत सिस्टम के अलावा प्रशिक्षण देने पर दिलचस्पी दिखा रहा है। पिछले एक वर्ष से पाकिस्तान दुनिया के अलग-अलग देशों को सैन्य उपकरण और विमान भेजने की जुगाड़ में है। सऊदी अरब के सहयोग से लीबिया को विमान भी बेचे हैं।

 

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चीन का भी बढ़ रहा दखल

बांग्लादेश के साथ न केवल पाकिस्तान, बल्कि चीन भी सहयोग बढ़ा रहा है। मौजूदा समय में बांग्लादेश करीब 2.2 अरब डॉलर में 20 फाइटर जेट खरीने पर मंथन कर रहा है। माना जा रहा है कि बांग्लादेश पाकिस्तान और चीन की मदद से अपनी वायुसेना को आधुनिक बनाएगा। पुराने विमानों की जगह नए विमानों की तैनाती की जाएगी। बता दें कि बांग्लादेश फ्रिगेट, टैंक, मिसाइल और पनडुब्बी भी चीन से खरीद रहा है।

भारत हुआ अलर्ट

बांग्लादेश में पाकिस्तान और चीन के बढ़ते दखल से भारत चिंतित है। खासकर चिकन नेक पास पाकिस्तान सेना की बढ़ती गतिविधियों ने भारत को अलर्ट कर दिया है। कुछ मीडिया रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि बांग्लादेश और पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों के बीच रणनीतिक यात्राओं में भी इजाफा हुआ है। अगर बांग्लादेश में पाकिस्तान का प्रभाव बढ़ता है तो यह भारत के लिहाज से बेहद संवेदनशील है।

लगातार तीसरी बार बढ़े CNG के दाम, मई में कितनी मंहगी हुई? अपने शहर का रेट जानें


देशभर में पेट्रोल-डीजल के दामों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। आज एक बार फिर पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद अब CNG उपभोक्ताओं को भी महंगाई का बड़ा झटका लगा है। दिल्ली-NCR समेत कई शहरों में CNG के दाम भी फिर से बढ़ा दिए गए हैं। इस बार सीएनजी के दाम में एक रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इससे पहले हाल के दिनों में सीएनजी की कीमतों में दो बार बढ़ोतरी हुई है। 

 

दिल्ली में सीएनजी की कीमत में एक रूपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की है। पिछले 10 दिनों में यह तीसरी बार है जब सीएनजी के दाम बढ़ाए गए हैं। नई कीमतें लागू होने के बाद दिल्ली में सीएनजी का रेट 80 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गया है। 

 

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मई में लगातार बढ़ रहे दाम

 इससे पहले भी मई महीने में सीएनजी की कीमतों को बढ़ाया गया था। 17 मई को सीएनजी के दाम में 1 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई थी और उससे भी पहले, 15 मई को सीएनजी की कीमतों में 2 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई थी। मुंबई, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम जैसे शहरों में भी दाम बढ़ने से टैक्सी, ऑटो और प्राइवेट गाड़ियों के चालकों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है। 

किन लोगों पर पड़ेगा असर?

CNG की कीमत बढ़ने का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो रोजाना ऑटो, टैक्सी या CNG कारों का इस्तेमाल करते हैं। दिल्ली-NCR में लाखों वाहन CNG पर चलते हैं। ऐसे में किराया बढ़ने की संभावना भी बढ़ गई है। ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर लागत बढ़ने से सामान ढुलाई महंगी हो सकती है, जिसका असर आम लोगों की जेब पर भी दिखाई देगा। 

शहरों में क्या हैं नए रेट?

नई बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में CNG की कीमत 81.09 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है, जबकि मुंबई में रेट 84 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुके हैं। नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद में भी कीमतों में इजाफा हुआ है। अलग-अलग राज्यों में टैक्स और लोकल चार्ज के हिसाब से रेट अलग हैं। जानकारों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में सीएनजी के दामों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इससे आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर भी दबाव बढ़ेगा।

 

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क्यों बढ़ रहे हैं सीएनजी के दाम?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी इसका बड़ा कारण है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और सप्लाई चेन पर असर की वजह से भारत में गैस कंपनियों की लागत बढ़ गई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरेलू सीएनजी कीमतों पर पड़ रहा है।

 

सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि लंबे समय तक कीमतें स्थिर रखने की वजह से उन पर भारी आर्थिक दबाव पड़ा। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में कहा था कि सरकारी कंपनियां रोजाना हजारों करोड़ रुपये का बोझ उठा रही थीं। इसी वजह से अब धीरे-धीरे ईंधन कीमतों को बढ़ाया जा रहा है। 

गर्मी के दिनों में आपको भी ज्यादा नींद आती है? जानिए इसके पीछे का कारण


देशभर में हीटवेव का असर दिखाई दे रहा है। लोग गर्मी से बेहाल है। इस समय तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच गया है। इस मौसम में अगर आपको भी पूरी नींद लेने के बावजूद थकान और दिन भर भारी-भारी महसूस होती है तो आप अकेले नहीं है। अधिक तापमान और उमस की वजह से ऐसा होना आम बात है। बाहर का तापमान ज्यादा होने पर शरीर को अंदर का तापमान सामान्य रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इस प्रकिया को थर्मोरेगुलेशन कहा जाता है।

 

इस मौसम में शरीर में पानी की कमी, रात को पर्याप्त नींद नहीं लेने और खान-पान में गड़बड़ होने की वजह से व्यक्ति दिनभर थका हुआ महसूस करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक हीट स्ट्रेस का असर आपके फिजिकल और मेंटल स्वास्थ्य पर पड़ता है। डॉक्टर के मुताबिक गर्मी में पसीना अधिक आता है, इस वजह से दिल शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ा देता है। जब आपका शरीर ज्यादा काम करता है तो जल्दी थक जाता है। इस वजह से जब हम गर्मी में बाहर होते हैं तो ज्यादा थका हुआ महसूस करते हैं।

 

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दिन भर क्यों महसूस आती हैं नींद?

अधिक तापमान का नींद पर असर

 

अधिक तापमान की वजह से नींद की गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ता है। इस बात की पुष्टि कई स्टडी में भी हुई है। Journal of the Neurological Sciences की रिपोर्ट के मुताबिक हीटवेव की वजह से आपकी नींद की अवधि कम हो जाती है। खासतौर से डीप स्लीप और आरईएम (रैपिड आई मूवमेंट स्लीप) कम होता है। यह नींद का वह समय होता है जिसमें सबसे ज्यादा सपने आते हैं। आरईएम का टाइम स्पैन ज्यादा होना चाहिए।

 

शरीर में पानी की कमी

 

गर्मी में डिहाइड्रेशन की समस्या सबसे आम है। खासतौर से दिन के समय में शरीर में पानी की कमी हो जाती है जिसकी वजह से सिरदर्द, चक्कर आने की समस्या होती है। 

 

खान-पान में गड़बड़ी

 

आपके खान-पान का प्रभाव भी नींद पर पड़ता है। गर्मी में तली-भूनी चीजों को खाने से थकान महसूस होती है। इसी वजह से डॉक्टर इस मौसम में हल्का खाना खाने की सलाह देते हैं।

 

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दिन में एनर्जी बनाएं रखने के लिए क्या करें?

  • दिन भर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहना चाहिए।
  • दोपहर में धूप में निकलने से बचना चाहिए।
  • कमरे को हवादार रखें।
  • सोने से आधे घंटे पहले फोन बंद कर दें।
  • धूप में काम करते समय थोड़ी-थोड़ी देर पर ब्रेक लें।
  • दिन में हल्का खाना खाएं।
  • चाय-कॉफी का सेवन कम करें।

26 या 27 मई कब है बकरीद, इस दिन क्यों दी जाती है कुर्बानी? जानिए हर बात


इस्लाम धर्म में ईद-उल-अजहा यानी बकरीद बेहद खास त्योहारों में से एक है। यह त्योहार केवल खुशियां और उत्सव लेकर नहीं आता, बल्कि लोगों को खास सीख भी देता है। इस पर्व के जरिए लोग अल्लाह के प्रति अपना सब कुछ समर्पित करने के भाव को दर्शाते हैं। बकरीद का त्योहार इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से मनाया जाता है, जो साल के आखिरी महीने यानी जिलहिज्जा में पड़ता है। जिलहिज्जा महीना इस्लाम धर्म में सबसे पाक महीनों में माना जाता है। इसी महीने में लोग हज की यात्रा करते हैं।

 

इस्लामिक कैलेंडर चांद की दिशा पर आधारित होता है। इसी वजह से बकरीद त्योहार की सही तारीख चांद दिखने के मुताबिक तय की जाती है। अंग्रेजी कैलेंडर के मई महीने में ही इस्लामिक कैलेंडर का आखिरी महीना माना जाता है। हर साल की तरह इस साल भी कई लोगों को कन्फ्यूजन है कि आखिर बकरीद का त्योहार कब मनाया जाएगा। जहां एक तरफ कई जानकारों का मानना है कि बकरीद का त्योहार 27 मई के दिन मनाया जाएगा, वहीं दूसरी तरफ कई लोगों का मानना है कि 28 मई के दिन त्योहार मनाना चाहिए। ऐसे में सही तारीख क्या है, आइए जानते हैं।

 

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कब मनाई जाएगी बकरीद?

इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, जिलहिज्जा महीने में जिस रात चांद दिखेगा, उसके बाद 10वें दिन बकरीद का त्योहार मनाया जाएगा। इस बार कई लोगों को उम्मीद थी कि 17 मई की रात को चांद नजर आएगा। जबकि 17 मई के बजाय 18 मई की रात को चांद नजर आया। इसी वजह से इस साल 28 मई के दिन बकरीद का त्योहार मनाया जाएगा। बकरीद के त्योहार में सबसे पहले बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक नमाज अदा करते हैं, उसके बाद बकरी या किसी अन्य जानवर की कुर्बानी दी जाती है।


बकरीद के दिन कुर्बानी परंपरा का रहस्य

इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक, एक बार पैगंबर हजरत इब्राहिम अल्लाह को अपनी सबसे प्यारी चीज कुर्बान करना चाहते थे। अल्लाह के हुक्म पर वह अपने बेटे की कुर्बानी देने के लिए तैयार हो गए थे। यह देखकर अल्लाह उनकी  समर्पण से खुश हुए और उनके बेटे की जान बचा ली। इसके बदले अल्लाह ने जानवर की कुर्बानी देने का आदेश दिया। तभी से बकरीद के दिन कुर्बानी देने की परंपरा शुरू हुई।

 

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बकरीद के त्योहार में बकरी की कुर्बानी केवल एक रस्म नहीं है, बल्कि इस परंपरा में कई गहरे अर्थ छिपे हुए हैं। कुर्बानी के जरिए लोग त्याग, समर्पण और जरूरतमंदों की मदद करना सीखते हैं। कुर्बानी के बाद मांस को तीन हिस्सों में बांटा जाता है। पहला हिस्सा परिवार के लिए रखा जाता है। दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों और दोस्तों को दिया जाता है। वहीं तीसरा हिस्सा गरीब और जरूरतमंद लोगों में बांटा जाता है। इसी तरह यह त्योहार लोगों को मिल-बांटकर खुशियां मनाने की सीख देता है।

 

नोट- यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी की हम पुष्टि नहीं करते

दोनों पैर कट गए थे, सिर्फ हाथों के दम पर एवरेस्ट चढ़ गया रूस का यह शख्स


रूस के रहने वाले माउंटेनियर रुस्तम नबीयेव ने इतिहास बना दिया है। 11 साल पहले दोनों पैर कट जाने के बावजूद रुस्तम ने अपने हाथों के सहारे दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई पूरी की है। माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8,848.86 मीटर है। रुस्तम ने 20 मई 2026 को नेपाल के चढ़ाई सीजन के दौरान यह कामयाबी हासिल की है। साल 2015 में एक मिलिट्री बैरक के गिरने से उन्होंने अपने दोनों पैर खो दिए थे।

 

रुस्तम नबीयेव साल 2015 में उस हादसे का शिकार हुए थे जब वह सो रहे थे और अचानक बैरक की बिंल्डिंग गिर गई थी। उस घटना में कई सैनिकों की मौत हो गई थी। इस बड़े हादसे में पैर गंवाने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। एवरेस्ट बेस कैंप के फील्ड ऑफिस कोऑर्डिनेटर खिम लाल गौतम ने बताया कि रुस्तम सुरक्षित तरीके से शिखर तक पहुंच गए थे और उसके बाद वापस बेस कैंप की तरफ आ गए। चढ़ाई के वीडियो में वह खुम्बु आइसफॉल की खतरनाक सीढ़ियों को सिर्फ अपने हाथों के दम पर पार करते हुए नजर आए। उस आइसफॉल को पार करके 6,065 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कैंप एक तक पहुंचने में उन्हें लगभग 15 घंटे का समय लगा था।

 

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एवरेस्ट पर जीत

पैर खोने के बाद रुस्तम ने सबसे पहले रूस और यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रस को चढ़ा था। इसके बाद 2021 में उन्होंने नेपाल में दुनिया की आठवीं सबसे ऊंची चोटी माउंट मनास्लू पर भी चढ़ाई की थी। इस साल उनका एवरेस्ट का बड़ा लक्ष्य भी पूरा हो गया। चोटी पर पहुंचने के बाद उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपनी बात कही। उन्होंने लिखा कि 20 मई को सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर नेपाल के समय के हिसाब से उन्होंने माउंटेनियर के इतिहास में पहली बार बिना पैरों के सिर्फ अपने हाथों का इस्तेमाल करके एवरेस्ट की चोटी को छू लिया है। उन्होंने यह जीत उन सभी के नाम की जो उन्हें देख रहे थे। उन्होंने कहा कि जब तक आपके अंदर जान है तब तक लड़ते रहिए और आखिर तक लड़िए। 

 

 

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लोगों ने की तारीफ

जब रुस्तम के चढ़ाई वाले वीडियो और फोटो इंटरनेट पर आए तो लोगों ने उनकी हिम्मत और ताकत की बहुत तारीफ की। एक यूजर ने कमेंट किया कि जो लोग रुस्तम को विकलांग समझते हैं, असल में वह बहुत से लोगों से ज्यादा काबिल और मजबूत हैं।

10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव का एलान, 18 जून को होगी वोटिंग


भारत के चुनाव आयोग ने 10 राज्यों की कुल 24 राज्यसभा सीटों के चुनाव का एलान कर दिया है। इन सभी सीटों के लिए अगर जरूरी हुआ तो 18 जून को मतदान होगा। इन 24 में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गुजरात की चार-चार सीटें शामिल हैं। जिन सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है उनमें कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा, कांग्रेस के दिग्विजय सिंह, केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और शक्ति सिंह गोहिल का नाम प्रमुख है।

 

चुनाव आयोग ने बताया है कि अधिसूचना 1 जून को जारी की जाएगी और नामांकन की आखिरी तारीख 8 जून को होगी। 9 तारीख को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 11 जून तक नाम वापस ले लिए जाएंगे। अगर कहीं पर चुनाव यानी मतदान की जरूरत पड़ती है तो 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम के 4 बजे तक वोट डाले जाएंगे। उसी दिन शाम के 5 बजे से वोटों की गिनती पूरी होगी और यह पूरी चुनावी प्रक्रिया 20 जून को पूरी हो जाएगी।

 

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कहां-कहां होंगे चुनाव?

कुल 10 राज्यों की 24 सीटों के चुनाव होने हैं। इसमें से शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई सीट अगस्त 205 से खाली है। बाकी के 22 सदस्यों का कार्यकाल जून 2026 में और एक सांसद का कार्यकाल जुलाई में खत्म होना है। 24 में से 4-4 सीटें गुजरात, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में खाली हो रही हैं। इसके अलावा, मध्य प्रदेश और राजस्थान की भी तीन-तीन सीटें खाली हो रही हैं। झारखंड की दो और मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम की एक-एक सीट खाली हो रही है जिस पर चुनाव होने हैं।

 

इसमें गुजरात, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में  भारतीय जनता पार्टी (BJP) की या उसके सहयोयिगों की सरकार है। कर्नाटक और झारखंड में कांग्रेस का उसके सहयोगियों की सरकार है। वहीं, मिजोरम में जोराम पीपल्स मूवमेंट के लाल्दुहोमा की सरकार है जो NDA या INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं।

 

2 सीटों के लिए उपचुनाव

महाराष्ट्र की एक सीट सुनेत्रा पवार के इस्तीफे के चलते खाली हो गई है। वह महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम बनने के बाद बारामती विधानसभा सीट से विधायक चुनी गई हैं और अब राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया है। इसी तरह तमिलनाडु में ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के नेता सी वी षणमुगम तमिलनाडु में विधायक चुने गए हैं और अब उन्होंने भी राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया है। सुनेत्रा पवार का कार्यकाल 3 जून 2028 तक तो सी वी षणमुगम का कार्यकाल 29 जून 2028 तक चलना था। इन दोनों सीटों पर भी 18 जून को ही वोटिंग होगी।

 

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रिटायर हो रहे सांसदों में बीजेपी के 12, कांग्रेस के 4, YSR कांग्रेस के तीन, तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के 1, नेशनल पीपल्स पार्टी के 1, जनता दल (सेक्युलर) के 1 और मिजो नेशनल फ्रंट के एक सांसद शामिल हैं। एक सीट शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई है। राज्यों की विधानसभाओं की स्थिति देखें तो गुजरात, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश में बीजेपी का मजबूत होना तय है। वहीं, कर्नाटक में कांग्रेस मजबूत हो सकती है।

आपके पेट में छिपा है ग्लास जैसी त्वचा का राज, रोजाना खाएं ये चीजें


आज के समय में हर किसी को खूबसूरत और दमकती त्वचा चाहिए। इस पाने के लिए लोग तमाम तरह के प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं। कुछ लोग दमकती त्वचा पाने के लिए 12 स्टेप स्किन केयर रूटीन को फॉलो करते हैं। आपको जानकार हैरानी होगी कि दमकती त्वचा का राज स्वस्थ आंत में छिपा है। 

 

अगर आप अंदर से स्वस्थ हैं तो इसका प्रभाव चेहरे पर भी दिखाई देता है। आपकी त्वचा फ्रेश दिखाई देंगी। इसके लिए आपको अपनी डाइट में इन चीजों को शामिल करना है। ये चीजें आपके गट यानी आंत के लिए बहुत फायदेमंद है।

 

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गट हेल्थ के लिए फायदेमंद है ये चीजें

छाछ

 

छाछ एक ऐसा प्रोबायोटिक है जो आपके सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। यह एक प्राकृतिक प्रोबायोटिक है जो आपके शरीर को ठंडा रखता है और सूजन को कम करने का काम करता है। छाछ पीने से आपका गट हेल्दी रहता है जिसका असर त्वचा पर भी दिखाई देता है।

 

मेथी पानी

 

सुबह उठकर मेथी का पानी पिएं। इसे बनाने के लिए आपको एक ग्लास पानी में आधा चम्मच मेथी का दान  डाल दें। मेथी में फाइबर की भरपूर मात्रा होती है जो शरीर से टॉक्सिन को बाहर निकालने का काम करता है। यह पीसीओएस के मरीज के लिए भी फायदेमंद होता है।

 

घी

 

घी हेल्दी फैट है जो ब्यूटिरेट से भरपूर होता है। यह हेल्दी फैट जो गट लाइनिंग के लिए अच्छा होता है। साथ ही घी विटामिन A, E और K को अच्छे से एब्जॉर्ब करता है। रोजाना एक चम्मच घी खाना सेहत के लिए फायदेमंद है। घी खाने से त्वचा ग्लोइंग और खूबसूरत दिखती है।

 

हरी सब्जियां खाएं
 
आज के समय में लोग ऐजिंग की समस्या को कम करने के लिए रेटिनॉल का इस्तेमाल करते हैं। आप इसकी बजाय अपनी डाइट में हरी सब्जियों को शामिल करें । उसके साथ खाने में हल्दी, चीया,अलसी और हर्ब्स को शामिल करें। ये चीजें खाने से शरीर में इलास्टिसिटी बढ़ती है जो कोलेजन क बूस्ट करने का काम करता है। साथ ही ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को भी कम करने में भी मदद करता है।

 

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तनाव को दूर रहे

 

तनाव हमारे शरीर के लिए ही नहीं त्वचा के लिए भी नुकसानदायक है। कोर्टिसोल का लेवल ज्यादा होने से पाचन संबंधी परेशानियां और शरीर में सूजन होता है। हमेशा जितनी भूख हो उससे कम खाना खाएं। खाना खाने के बाद 5 से 10 मिनट तक के लिए जरूर चलें।

अगर आपके मन में है असमंजस, तो भगवद्गीता के ये उपदेश बदल सकते हैं आपकी सोच


हर व्यक्ति अपने जीवन में एक न एक बार किसी न किसी परिस्थिति में असमंजस महसूस करता है। असमंजस एक ऐसा भाव है, जिसमें व्यक्ति को दो चीजों में से एक को चुनने में कठिनाई होती है। व्यक्ति अक्सर असमंजस की वजह से अशांत और चिंता में रहता है। इसी कारण लोग मन की शांति के लिए असमंजस से दूर होने की कोशिश करते हैं। इस असमंजस को भगवद्गीता के जरिए समझा जा सकता है। भगवद्गीता के उपदेश न केवल यह बताते हैं कि असमंजस क्यों होता है बल्कि यह भी समझाते हैं कि व्यक्ति इससे मुक्ति कैसे पा सकता है।

 

सनातन धर्म में भगवद्गीता बेहद खास ग्रंथ है, जिसमें व्यक्ति के जीवन से जुड़े हर सवाल का जवाब मिलता है। इस धर्म ग्रंथ में महाभारत के प्रसंगों के साथ खास तौर पर भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए उपदेशों का वर्णन किया गया है। भगवद्गीता में बताया गया है कि पांडव पुत्र अर्जुन भी असमंजस से जूझ चुके थे। तब भगवान कृष्ण ने उन्हें ऐसे उपदेश दिए, जिन्हें सुनकर अर्जुन का असमंजस के प्रति नजरिया ही बदल गया।

 

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क्यों होता है असमंजस ?

भगवद्गीता के अध्याय 2 के श्लोक 62 और 63 में व्यक्ति के असमंजस भाव के बारे में बताया गया है। इसमें कहा गया है कि व्यक्ति को जीवन में किसी एक चीज को चुनने में तब समस्या आती है, जब उसे चीजों से अत्यधिक लगाव हो जाता है। इसी वजह से व्यक्ति सही चुनाव नहीं कर पाता है।

 

श्लोक 62
ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।
सङ्गात्सञ्जायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥

 

श्लोक 63
क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः।
स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥

 

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इन दोनों श्लोकों का अर्थ है कि व्यक्ति को असमंजस क्रोध और मोह की वजह से होता है। जब किसी चीज से जरूरत से ज्यादा लगाव हो जाता है, तो व्यक्ति की बुद्धि प्रभावित होने लगती है। बुद्धि के पतन के सात चरण बताए गए हैं, जिनके परिणामस्वरूप व्यक्ति का पतन भी हो सकता है। अब सवाल उठता है कि असमंजस के ये 7 चरण क्या हैं?

 

असमंजस के 7 चरण

भगवद्गीता के मुताबिक, श्रीकृष्ण ने बताया है कि असमंजस की स्थिति व्यक्ति के पतन का कारण बन सकती है। असमंजस की शुरुआत किसी विषय को चुनने में समस्या से होती है, जो आगे चलकर आसक्ति, कामना, क्रोध, भ्रम और बुद्धिनाश में बदल जाती है। आइए समझते हैं हर चरण क्या कहता है।

 

1. बार-बार सोचना – जब व्यक्ति किसी भोग-विलास की वस्तु के बारे में बार-बार सोचता है, तो वह वस्तु उसके मन में बस जाती है। यानी व्यक्ति को उस चीज से लगाव होने लगता है। यही व्यक्ति के पतन का पहला चरण है।


2. लगाव – जब व्यक्ति बार-बार एक ही वस्तु के बारे में सोचता है, तो उसे उससे लगाव हो जाता है। वह उस वस्तु को अपना समझने लगता है। यही लगाव आगे चलकर दुख का कारण बनता है।
3. कामना – लगाव की वजह से व्यक्ति के मन में इच्छा या कामना जागती है। इसके बाद उसका मन उस वस्तु को पाने के लिए बेचैन हो जाता है।

 

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4. क्रोध– जब व्यक्ति की इच्छा पूरी नहीं होती, तो उसके भीतर क्रोध पैदा होता है।


5. मोह- क्रोध के कारण व्यक्ति का उस वस्तु के प्रति लगाव और बढ़ जाता है। इस स्थिति में वह सही फैसला नहीं कर पाता। व्यक्ति प्रिय और अप्रिय के बीच अंतर करने में असमर्थ हो जाता है। इसी स्थिति में असमंजस पैदा होता है, जिससे वह गलत निर्णय ले सकता है।

 

6. सीख भूल जाना– मोह की वजह से व्यक्ति अपने जीवनभर की सीख भूलने लगता है। इस दौरान वह माता-पिता और गुरुओं द्वारा दी गई शिक्षा को भी नजरअंदाज कर देता है।


7. बुद्धि का नाश- जीवनभर की सीख भूल जाने के कारण व्यक्ति की बुद्धि का नाश होने लगता है और वह सही-गलत का फर्क नहीं कर पाता।

 

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असमंजस से कैसे पाएं मुक्ति?

भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने बताया है कि असमंजस पर तभी काबू पाया जा सकता है, जब व्यक्ति अपने मन और भावनाओं पर नियंत्रण रखे। इसी बारे में भगवद्गीता के अध्याय 6 के सातवें श्लोक में बताया गया है।

 

जितात्मनः प्रशान्तस्य परमात्मा समाहितः।
शीतोष्णसुखदुःखेषु तथा मानापमानयोः॥

 

इस श्लोक का अर्थ है कि जिसने अपने मन को जीत लिया, वह असमंजस से मुक्ति पा लेता है। ऐसा व्यक्ति कठिन परिस्थितियों का सामना भी शांत मन से कर सकता है। कुल मिलाकर, हर व्यक्ति को अपने मन पर नियंत्रण रखना चाहिए। तभी वह असमंजस से बाहर निकलकर सही निर्णय ले पाएगा।

पाकिस्तान में अलर्ट, तेल की भीषण कमी; कौन-कौन से कदम उठा रहा पड़ोसी?


पाकिस्तान भीषण ईंधन संकट में फंस चुका है। उसके पास कुछ दिनों का तेल बचा है। यही कारण है कि अब उसे पावर ग्रिड और एयरपोर्ट तक को तेल आपूर्ति ठप होने का अलर्ट देने पड़ रहा है। पाकिस्तान का अधिकांश तेल संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब से आता है। इसकी आपर्ति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होती है। होर्मुज के बंद होने से पाकिस्तान में ईंधन संकट खड़ा हो गया है। 

 

इस बीच पाकिस्तान की अटक रिफाइनरी ने तेल और गैस नियामक प्राधिकरण व पाकिस्तान सरकार को पत्र लिखकर तेल आपूर्ति ठप होने के बारे में आगाह किया है। अटक रिफाइनरी पाकिस्तान की सबसे पुरानी रिफाइनरी है। यहां रोजाना 53,400 बैरल कच्चा तेल प्रसंस्करण करने की क्षमता है। पिछले दो महीने में पाकिस्तान ने करीब 2 अरब डॉलर का तेल खरीदा है। सऊदी अरब यानबू बंदरगाह से पाकिस्तान को कच्चे तेल की आपूर्ति कर रहा है।

 

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ईवी की तरफ भाग रही पाकिस्तानी जनता

तेल आपूर्ति बाधित होने और बढ़ती कीमतों से परेशान पाकिस्तान की जनता तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की तरफ रुख कर रही है। इसके अलावा हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ रही है। मौजूदा समय में पाकिस्तान में 30 से अधिक कंपनियां इलेक्ट्रिक वाहनों के विनिर्माण और असेंबलिंग में लगी हैं। सिर्फ अप्रैल महीने में ही 40,000 इलेक्ट्रिक बाइक बिकी हैं। हालांकि पाकिस्तान में इलेक्ट्रिक चारपहिया वाहनों की मांग कुछ खास नहीं है। अभी यहां इसका शुरुआती चरण है। 

रूसी तेल खरीदने पर विचार, लेकिन कैसे करेगा साफ?

पाकिस्तान तेल संकट से निपटने की खातिर हाथ पैर मारने में जुटा है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक इस्लामाबाद रूस से तेल खरीदने पर विचार कर रहा है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान समेत कुछ देशों को अमेरिका रूस से तेल खरीदने की अनुमति दे सकता है। अमेरिका यह कदम वैश्विक तेल आपूर्ति में आई बाधा से निपटने के उद्देश्य से उठा सकता है।

 

मगर पाकिस्तान की दिक्कत यही खत्म नहीं होती है। दरअसल, पाकिस्तानी रिफाइनरियों के पास इतनी उन्नत तकनीक नहीं है कि वह रूसी तेल को साफ कर पाएं। मतलब अमेरिका से छूट मिलने के बावजूद पाकिस्तान सीधे तौर पर इसका कोई लाभ नहीं उठा पाएगा। 

रणनीतिक तेल भंडार बनाना चाहता है पाकिस्तान, दिक्कत क्या है?

पाकिस्तान के पास कोई रणनीतिक तेल भंडार नहीं है। जबकि भारत के पास 60 दिनों से अधिक के रणनीतिक तेल भंडार हैं। अब पाकिस्तान की सरकार रणनीतिक तेल भंडार बनाने पर विचार कर रही है। बुधवार को पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने यह जानकारी दी। दुनियाभर के देश रणनीतिक तेल भंडार इस वजह से बनाते हैं ताकि युद्ध, आपदा और आपूर्ति में बाधा आने पर अर्थव्यवस्था को चलाया जा सके। मगर पाकिस्तान के पास सिर्फ पांच छह दिन का भंडार प्राइवेट कंपनियों के पास है।

कहां से रकम लाएगा पाकिस्तान?

पाकिस्तान में हर महीने करीब 550 मिलियन डॉलर का कच्चा तेल खपता है। अगर रणनीतिक भंडार बनाता है तो उसे करीब 300 मिलियन डॉलर की रकम खर्च करनी होगी। मौजूदा समय में पाकिस्तान 7 अरब डॉलर के आईएमएफ कार्यक्रम के तहत अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने में जुटा है। ऐसी स्थिति में रणनीतिक तेल भंडार की स्थापना करना, उसका रख-रखाव करना आसान नहीं होगा।

 

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खाड़ी देशों से क्या चाहता है पाकिस्तान?

पाकिस्तान चाहता है कि खाड़ी देश उसके यहां रणनीतिक तेल भंडार स्थापित करें, ठीक वैसे ही जैसे संयुक्त अरब अमीरात ने भारत में कर रखा है। अटक रिफाइनरी लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आदिल खट्टक का कहना है कि सऊदी अरब, कुवैत और कतर जैसे खाड़ी देश पाकिस्तान में रणनीतिक तेल भंडार की स्थापना करें। संकट में पाकिस्तान जहां इसका इस्तेमाल करेगा, वहीं खाड़ी देश भी निर्यात केंद्र के तौर पर इस भंडार का उपयोग कर सकेंगे।

पाकिस्तान तक तेल की तस्करी

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के बाद से ईरान से पाकिस्तान में तेल की तस्करी बढ़ी है। अनुमान के मुताबिक रोजाना 60 लाख लीटर तेल की तस्करी हो रही है। बाइक समेत अन्य वाहनों से लोग ईरान से पाकिस्तान तक तेल लेकर आते हैं। हाल ही में पाकिस्तान ने इराक के साथ मिलकर ईरान से एक डील की है। इसके तहत ईरान अब पाकिस्तान और इराकी तेल व एलएनजी जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करेगा।  

‘अपने नेताओं से कहो पैसे बनाना बंद करें…’, AAP समर्थकों को हरभजन का जवाब


आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में जाने वाले नेताओं में पूर्व भारतीय क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह का नाम भी शामिल है। अपने इस फैसले के बाद हरभजन सिंह चुप्पी साधे हुए थे लेकिन अब उन्होंने सोशल मीडिया पर हो रही ट्रोलिंग का करारा जवाब दिया है। हरभजन सिंह ने आम आदमी पार्टी यानी AAP समर्थकों को जवाब देते हुए कई गंभीर आरोप भी लगाए और सवालों का जवाब दिया। 

दरअसल, हाल के दिनों में हरभजन सिंह लगातार पंजाब की कानून व्यवस्था और राजनीतिक हालात को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर रहे थे। उनके कुछ पोस्ट पर AAP समर्थकों ने सवाल उठाए और उन पर राजनीति करने के आरोप लगाए। इसी दौरान एक यूजर के जवाब में हरभजन सिंह ने AAP नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए। 

 

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क्या बोले हरभजन?

 

हरभजन सिंह से सोशल मीडिया पर एक व्यक्ति ने सवाल किया, ‘जब आप AAP में थे तब आपने कभी पंजाब के लिए चिंता क्यों नहीं जाहिर की? पूरे कार्यकाल में आपने सिर्फ सुविधाओं का लाभ उठाया और ना तो कुछ पोस्ट किया और ना ही कुछ किया।’

 

इस पोस्ट के जवाब में हरभजन सिंह ने लिखा, ‘पहले तथ्यों की जांच कर लीजिए कि मैंने कितनी बार राज्यसभा में मुद्दे उठाए हैं। यह रिकॉर्ड में है। मैंने पंजाब सरकार की ओर से दी गई किसी भी सुविधा का लाभ नहीं लिया। भगवान ने मुझे क्रिकेट से बहुत कुछ दिया है। आपके साथ दिक्कत यह है कि अगर कोई मुद्दा उठाए तो आप पूछते हैं कि क्यों उठाया और अगर ना पूछें तो आप बोलते हैं कि चुप क्यों हैं। कमाल है यार।’ 

सोशल मीडिया पर दिया जवाब

हरभजन सिंह ने अपने अलग-अलग पोस्ट में पंजाब की स्थिति को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा कि पंजाब को बेहतर प्रशासन और साफ राजनीति की जरूरत है। उनके पोस्ट पर कई यूजर्स ने उन्हें ट्रोल करने की कोशिश की, जिसके बाद उन्होंने तीखे अंदाज में जवाब दिया। सोशल मीडिया पर उनके समर्थकों ने कहा कि हरभजन सिंह सिर्फ अपनी राय रख रहे हैं, जबकि विरोधियों ने इसे राजनीतिक हमला बताया। एक पोस्ट के जवाब में हरभजन सिंह ने लिखा कि सही चीज के साथ खड़े हो जाएं। यह किसी राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं है।

पीएम को जिक्र क्यों?

सोशल मीडिया पर एक व्यक्ति ने हरभजन सिंह से कहा कि अपने नेता नरेंद्र मोदी से कहें कि वह पंजाब के हिस्से का 1 हजार करोड़ रुपये ग्रामीण विकास फंड (RDF) का जारी करें।’ इसके जवाब में हरभजन सिंह ने कहा कि हां मैं उनसे (पीएम मोदी से) जरूर कहूंगा क्योंकि यह मेरी जिम्मेदारी है। इसके बाद उन्होंने  AAP पर हमला करते हुए कहा, ‘ क्या आप अपने नेता से कह सकते हैं कि पंजाब के मंत्रियों का इस्तेमाल करके पैसा लेना बंद कर दें? और पंजाबियों को झूठे वादों के साथ पागल बनाना बंद कर दें?’ बीजेपी में शामिल होने के बाद हरभजन सिंह अब खुलकर  AAP के विरोध में आ गए हैं। फिलहाल हरभजन सिंह का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। उनको लेकर अटकलें लग रही हैं की बीजेपी में उनकी भूमिका क्या होगी।