अमेरिका को ईरान दे रहा जख्म, अब तक ट्रंप के 13 सैनिकों की मौत; 200 घायल

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अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर 28 फरवरी को जो कार्रवाई की थी उसके बाद से ईरान के जवाबी हमले भी जारी हैं। ईरान और अमेरिका दोनों और से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं लेकिन नुकसान दोनों ओर हो रहा है। इस जंग के करीब तीन हफ्तों में अमेरिका के करीब 200 जवान घायल हो गए हैं। इस बात की जानकारी अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने सोमवार को दी है। इसके साथ ही ईरान के जवाबी हमलों में 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत भी हो गई है। 

 

अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने एक बयान जारी कर बताया कि घायल जवानों में से ज्यादातर को मामूली चोटें लगी थीं और घायलों में से 180 सैनिक ड्यूटी पर लौट गए हैं। सेंट्रल कमांड ने कहा, ‘ज्यादातर घालयों को मामूली चोटें ही लगी थीं और 180 सैनिक ड्यूटी पर लौट भी गए हैं, जबकि 10 सैनिक गंभीर रूप से घायल हैं।’

 

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7 देशों में 14 अमेरिकी सैनिकों की मौत

अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने इस बारे में जानकारी देते हुए यह भी बताया कि किन देशों में अमेरिका के सैनिक घालय हुए हैं और उनकी मौत हुई है। उनके अनुसार,  ये चोटें बहरीन, इराक, इजराइल, जॉर्डन, कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में लगी हैं। पेंटागन ने 10 मार्च को घायलों की संख्या 140 बताई थी, जबकि 13 अमेरिकी सैनिक इस जंग में मारे गए हैं। मारे गए सैनिकों में से 7 ईरानी हमलों में मारे गए हैं और छह प्लेन क्रैश में। 

ईरान में भी तबाही

अमेरिका और इजरायल के हमलों से ईरान में भी तबाही मची हुई है। एक तरफ अमेरिका, ईरान के रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना रहा है और दूसरी तरफ इस जंग में कई ईरानी नागरिकों की भी मौत हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस जंग में 1200 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। जिसमें 200 महिलाएं और 200 बच्चे शामिल थे। इसके अलावा 10,000 नागरिक घायल भी हो गए हैं। 

 

ईरान और अमेरिका के अलावा इस जंग में इजरायल को भी भारी नुकसान हुआ है। इजरायल में 14 लोगों की मौत हो गई है और 886 लोगों की लेबनान में मौत हो गई है। 1 मिलियन से ज्यादा लोग लेबनान में अपना घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। 

 

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जंग का 18वां दिन

अमेरिका-इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान के ऊपर 28 फरवरी को हमला कर दिया था। इसी हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की  मौत हो गई। इसके बाद ईरान ने बदला लेने का मन बना लिया और पश्चिमी एशिया में स्थित अमेरिका और इजरायल के ठिकानों को निशाना बनाया। दोनों और से इस जंग में एक दूसरे को हराने की कोशिश हो रही है लेकिन कोई भी पक्ष हार मानने को तैयार नहीं है। 

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