ईरान को मिल गया अली लारीजानी का उत्तराधिकारी, सामने चुनौतियां कौन-कौन सी?

0
3

अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष के बीच ईरान को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का नया मुखिया मिल गया है। 17 मार्च को अली लारीजानी की मौत के बाद से यह पद खाली था। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के पूर्व कमांडर मोहम्मद बगेर जोलघाद्र को राष्ट्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 1979 में इस्लामी क्रांति हुई। इसके बाद आईआरजीसी का गठन हुआ। जोलघाद्र तब से आईआरजीसी से जुड़े हैं। सैन्य और सुरक्षा मामलों का गहरा अनुभव रखते हैं। जोलघाद्र ने आठ साल आईआरजीसी ज्वाइंट स्टाफ के तौर पर अपनी सेवा दी। आठ साल तक डिप्टी कमांडर इन चीफ रहे। 2023 में राष्ट्रीय सलाहकार परिषद का सचिव बनाया गया।  

 

अली लारीजानी की मौत के बाद ईरान के शासन व्यवस्था में बड़ा शून्य पैदा हो गया था। युद्ध के बीच ईरान को एक ऐसे शख्स की तलाश थी, जिसे शासन प्रशान के अलावा सैन्य मामलों की भी गहरी समझ हो। उसकी यह तलाश मोहम्मद बगेर जोलघाद्र के तौर पर पूरी हुई। उनके पास इराक के साथ युद्ध लड़ने का भी अनुभव है।

 

जोलघाद्र की सामने चुनौतियां क्या?

  • माना जाता है कि अली लारीजानी की तुलना में जोलघाद्र के पास सैन्य मामलों की अच्छी समझ है। मगर उनके सामने कई चुनौतियां होंगी। अली लारीजानी जहां एक तरफ अमेरिका के खिलाफ बयानबाजी करते थे तो वहीं दूसरी तरफ बातचीत के पक्षधर थे। हाल ही हुई परमाणु वार्ता अली लारीजानी की कोशिश का ही नतीजा थी। अगर जोलघाद्र कूटनीति की जगह सैन्य हस्तक्षेप को अधिक महत्व देते हैं तो यह युद्ध और आगे खिंच सकता है।  

 

  • साल की शुरुआत में भड़के हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद ईरान में बड़ी संख्या में लोगों को पकड़ा जा रहा है। इन पर विदेशी संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने का आरोप है। वहीं इराक सीमा के नजदीक हमले हो रहे हैं। पश्चिम अजरबैजान प्रांत तक को निशाना बनाया जा रहा है। यह इलाका कुर्दों का है। अमेरिका और इजरायल की पूरी कोशिश यहां ईरानी सरकार के खिलाफ विद्रोह भड़काना है। ऐसे में बाहरी हमलों के बावजूद जोलघद्र के सामने आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। 

 

  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों का परिचालन सामान्य होगा या नहीं, यह अब जोलघाद्र के रुख पर निर्भर करेगा। खाड़ी देशों के खिलाफ हमले की प्रकृति भी वह ही तय करेंगे। अगर अमेरिका के साथ कोई बातचीत होती है तो उसमें भी जोलघाद्र की भूमिका अहम होगी।  

 

 

 

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here