
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब तक बीजेपी-एनडीए विपक्ष में रहा, तब तक कभी लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया गया। हमने हमेशा एक रचनात्मक विपक्ष के तौर पर काम किया और अध्यक्ष पद की गरिमा को बनाए रखा।
लोकसभा में अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी को अचानक एक आइडिया आया। आइडिया यह था कि उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बहस हो जाए। इस पर गृह मंत्री ने कहा, ‘यह कोई मार्केट नहीं है, लोकसभा है। यहां बहस के विषय तय होते हैं। आपके परनाना से आपकी दादी और पिताजी तक, बड़े-बड़े भारत के नेता थे। किसी के प्रेस कॉन्फ्रेंस पर लोकसभा ने बहस नहीं की है। अगर यह अपेक्षा करते हैं कि इनकी महान प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सदन बहस करे तो इस सदन का सिर न गिरने देकर ओम बिरला ने उपकार किया है।’
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‘राहुल गांधी खुद लोकसभा में नहीं बोलना चाहते’
शाह ने आगे कहा कि झूठा प्रोपेगैंडा फैलाया जा रहा है कि विपक्षी नेताओं को बोलने नहीं दिया जाता है। राहुल गांधी कहते हैं कि उन्हें बोलने की इजाजत नहीं है। असल में वह लोकसभा में बोलना ही नहीं चाहते हैं। 17वीं लोकसभा में राहुल गांधी की अटेंडेंस 51 फीसद थी। औसत उपस्थिति 66 फीसद थी। वहीं 16वीं लोकसभा में उनकी अटेंडेंस 52 फीसद, जबकि औसत उपस्थिति 80 फीसद थी।
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शाह ने दावा किया कि हमने कभी विपक्ष की आवाज नहीं दबाई। इमरजेंसी के दौरान विपक्ष की आवाज को दबाया गया था। उस वक्त नेताओं को जेल में डाल दिया गया था। सरकार का विरोध करने के लिए आप लोकसभा अध्यक्ष पर सवाल उठा रहे हैं, जो लोकतंत्र की गरिमा के प्रतीक हैं।
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बीजेपी कभी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाई: शाह
उन्होंने आगे कहा, हमारी पार्टी की राजनीतिक यात्रा के जीवन में हम तो ज्यादातर वहीं (विपक्ष में) बैठे हैं। बहुत कम समय हम यहां बैठे हैं। ज्यादातर (सत्ता पक्ष में) कांग्रेस पार्टी और उनके साथी ही बैठे हैं। हम भी विपक्ष में रहे हैं। तीन बार लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया। भारतीय जनता पार्टी और एनडीए कभी विपक्ष में रहते हुए स्पीकर के खिलाफ अविश्वास का प्रस्ताव नहीं लाई।
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‘स्पीकर का पद पार्टी से ऊपर होता है’
गृह मंत्री ने आगे कहा कि हमने एक रचनात्मक विरोधी के तौर पर काम किया। हमने स्पीकर पद की गरिमा का संरक्षण करने का काम किया। स्पीकर से हमने हमारे कानूनी और सांविधानिक अधिकारों के सरंक्षण की मांग की। हम कभी स्पीकर के सामने अविश्वास प्रस्ताव लेकर नहीं आए हैं। स्पीकर का पद पार्टी से ऊपर है। संविधान ने इस पद को एक प्रकार से मध्यस्थ की भूमिका पर रखा है। आप ने मध्यस्थ की भूमिका करने वाले पर ही सवाल उठा दिया। 75 साल से हमारे दोनों सदनों ने लोकतंत्र की नींव को पाताल से भी गहरा पहुंचाया है। पाताल से गहरी पहुंची नींव की साख पर विपक्ष ने आज सवालिया निशान उठाया है।