मंदिर में नुकीली चीजें या टूटी मूर्तियां क्यों नहीं रखी जातीं?

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आस्था के नजरिए से घर का मंदिर वह स्थान है जहां हम अपने इष्ट देव से जुड़ाव महसूस करते हैं। इस स्थान की ऊर्जा हमारे विचारों और मानसिक शांति को प्रभावित करती है। इसलिए, यहां कोई भी ऐसा सामान नहीं होना चाहिए जो मन में भारीपन, दुख या नकारात्मक विचार पैदा करें। मंदिर का उद्देश्य भक्ति है। इसलिए किसी भी तरह की अव्यवस्था इस भक्ति में बाधा उत्पन्न करती है।

 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंदिर में रखी हर वस्तु का एक निश्चित उद्देश्य होता है। जब हम वहां ऐसी चीजें रखते हैं जो पूजा-पाठ से संबंधित नहीं हैं, तो वह स्थान केवल एक कोना बनकर रह जाता है, अपनी आध्यात्मिक जीवंतता खो देता है।


सादगी और सही चुनाव ही मंदिर को ‘सिद्ध’ और प्रभावशाली बनाते हैं, जिससे घर के वातावरण में सौम्यता बनी रहती है। मान्यताओं के अनुसार खंडित मूर्तियां या भगवान की उग्र तस्वीरें रखने से किसी को भी बचना चाहिए। जानते हैं कौन सी ऐसी सामान्य चीजें हैं जो हमें धर के मंदिर में रखने से बचना चाहिए। 

 

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मंदिर में क्या रखने से बचना चाहिए?

खंडित मूर्तियां या तस्वीरें: अगर कोई मूर्ति थोड़ी भी टूट गई हो या तस्वीर का कांच टूट गया हो, तो उसे मंदिर में नहीं रखना चाहिए। आस्था कहती है कि ईश्वर का स्वरूप पूर्ण होना चाहिए; टूटी हुई चीजें अधूरापन और मानसिक अशांति का प्रतीक मानी जाती हैं।

 

नुकीली या अनावश्यक वस्तुएं: मंदिर के पास कैंची, चाकू या फालतू का कबाड़ कभी न रखें। यह स्थान केवल पवित्र सामग्री जैसे अगरबत्ती, दीया और धार्मिक पुस्तकों के लिए सुरक्षित होना चाहिए।

 

उग्र रूप वाली मूर्तियां: घर के मंदिर में भगवान के सौम्य और आशीर्वाद देते हुए स्वरूप को प्राथमिकता देनी चाहिए। तांडव करते हुए शिव या युद्ध मुद्रा वाली उग्र तस्वीरें घर के वातावरण में तनाव पैदा कर सकती हैं, जबकि सौम्य मूर्तियां मन को शांति प्रदान करती हैं।

 

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पूर्वजों की तस्वीरें: हमारे पूर्वज पूजनीय हैं लेकिन उन्हें देवताओं के समान मंदिर के भीतर नहीं रखना चाहिए। उनका स्थान अलग होना चाहिए। मंदिर केवल भगवान के लिए है और पितरों की फोटो वहां रखने से पूजा के समय ध्यान भटक सकता है।

 

एक ही देव की कई तस्वीरें: मंदिर में एक ही भगवान की कई सारी मूर्तियां रखने से बचना चाहिए। आस्था के अनुसार, यह मन को भ्रमित करता है। एक सुंदर और प्रभावशाली प्रतिमा पर ध्यान केंद्रित करना कहीं अधिक फलदायी होता है।

 

सूखे हुए फूल और मालाएं: पूजा के समय चढ़ाए गए फूल अगर सूख जाएं, तो उन्हें तुरंत हटा देना चाहिए। सूखे फूल बासीपन और ऊर्जा के नाश का संकेत हैं। ताजे फूल ही नई आशा और भक्ति का संचार करते हैं।

 

नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

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