
अमेरिका, इजरायल और ईरान के टकराव के चलते सबसे ज्यादा संकट पेट्रोलियम उत्पादों पर है। भारत में भी गैस की कमी महसूस की जाने लगी है और कई उद्योग इससे प्रभावित हो रहे हैं। अब आशंका है कि गैस की इस किल्लत का असर ट्रेन में मिलने वाले खाने पर भी पड़ेगा। इसी को ध्यान में रखते हुए इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IRCTC) ने खाने की सप्लाई करने वाले वेंडर्स से कहा है कि वे खाना बनाने के लिए गैस के बजाय माइक्रोवेव अवन और इंडक्शन चूल्हे का इस्तेमाल करें।
IRCTC ने यह भी कहा है कि रेलवे स्टेशनों पर फूड प्लाजा, रिफ्रेशमेंट रूम और पब्लिक मील जैसी कैटरिंग सुविधाएं इस स्थिति के लिए तैयार रहें, ताकि अगर गैस सप्लाई में कोई दिक्कत भी आए तो यात्रियों के खाने पर असर न पड़े। रेलवे का कहना है कि यात्रियों को खाना देना उसकी प्राथमिकता है और इसलिए तैयारी पहले से ही चल रही है।
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रेलवे अधिकारियों के अनुसार, IRCTC देशभर में रोजाना करीब 17 लाख यात्रियों को खाना उपलब्ध कराता है। यह खाना रेलवे के बेस किचन में तैयार किया जाता है और ट्रेनों में अलग-अलग तरीकों से यात्रियों तक पहुंचाया जाता है। ऐसे में अगर एलपीजी की सप्लाई प्रभावित होती है तो इसका सीधा असर भोजन तैयार करने और उसकी आपूर्ति पर पड़ सकता है।
हालात बिगड़े तो पके खाने की सेवा हो सकती है बंद
मीडिया सूत्रों के मुताबिक, अगर गैस की कमी ज्यादा गंभीर हो जाती है तो ट्रेनों में मिलने वाला पका हुआ खाना कुछ समय के लिए बंद करने का विकल्प भी विचाराधीन है। ऐसी स्थिति में जिन यात्रियों ने टिकट बुक करते समय खाना पहले से बुक किया होगा उन्हें उसका पैसा वापस किया जा सकता है। फिलहाल, रेलवे ने इसे केवल एहतियाती कदम बताया है। लाइसेंस होल्डर्स खासकर वेस्टर्न जोन में काम करने वालों को IRCTC ने यह भी निर्देश दिया है कि वे रेलवे फूड सेंटर्स पर माइक्रोवेव ओवन और इलेक्ट्रिक इंडक्शन सिस्टम जैसे दूसरे खाना पकाने के तरीके अपनाएं।
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सरकार ने दिया भरोसा
इस बीच केंद्रीय पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 10 मार्च को एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि देश में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा की कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि घरों में CNG और PNG की सप्लाई पूरी तरह से सुरक्षित है, जबकि इंडस्ट्रीज को भी उनकी जरूरत का फ्यूल मिल रहा है।
https://twitter.com/HardeepSPuri/status/2031345282957627863
सरकार ने मौजूदा स्थिति को देखते हुए आवश्यक वस्तु अधिनियम भी लागू किया है ताकि ऊर्जा बाजार को स्थिर रखा जा सके और सप्लाई पर नियंत्रण बना रहे। दरअसल भारत अपनी लगभग 30 प्रतिशत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते करता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण लॉजिस्टिक चुनौतियां सामने आ रही हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि वैकल्पिक स्रोतों और मार्गों से गैस की व्यवस्था की जा रही है, ताकि देश की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित न हो।