बिना डॉक्टर की सलाह के विटामिन D लेने की गलती न करें, किडनी, लिवर को होगा नुकसान

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हमारे शरीर के लिए विटामिन्स डी बहुत जरूरी है। विटामिन डी कैल्सशियम और फॉस्फेट को सोखता है जो हड्डियों, मसल्स और इम्यूनिटी को मजबूत करने में मदद करता है। दुनियाभर में 1 बिलियन से ज्यादा लोग विटामिन डी की कमी से जूझ रहे हैं। विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए लोग टैबलेट्स, सैचेट्स और इंजेक्शन का सहारा लेते हैं। कुछ लोग विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए बिना सोचे-समझें सप्लीमेंट्स लेते हैं।

 

बिना डॉक्टर की सलाह लिए इस तरह से विटामिन डी के सप्लीमेंट्स लेने से किडनी पर प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा दिमाग में पानी भर सकता है। आइए इसके बारे में दिल्ली के इंद्रपस्थ अपोलो अस्पताल में एमएस, डीएनबी सीनियर कंसल्टेंट स्पाइन सर्जन डॉक्टर सौरभ कपूर से जानते हैं।

 

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विटामिन डी से होने वाली परेशानियां

डॉक्टर संजय के मुताबिक विटामिन डी फैट सॉल्युबल होता है। सिर्फ विटामिन डी की कमी की वजह से हड्डियां कमजोर नहीं होती है। उसके पीछे हजारों कारण हो सकते हैं। अगर बिना जरूरत के आप विटामिन डी लेते हैं तो ये बॉडी में जमने लगता है। बॉडी से विटामिन डी को निकालना बहुत मुश्किल होता है। 

 

अगर विटामिन डी का हाई लेवल पर पहुंच गया तो उसके कई सारे साइड इफेक्ट्स हैं। शरीर में दर्द ठीक होने के बजाय बढ़ सकता है, दिमाग में पानी भर सकता है और लिवर के लिए नुकसानदायक है। अधिक मात्रा में विटामिन डी लेने से खून में कैल्श्यिम का लेवल बढ़ जाता है। इस स्थिति को हाइपरकैल्सीमिया कहते हैं। खून में कैल्शियम का लेवल हाई होने पर किडनी को इसे फिल्टर करने में दिक्कत होती है जिसकी वजह से पथरी का खतरा बढ़ जाता है। अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया तो किडनी फेलियर का खतरा बन सकता है।

 

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विटामिन डी ज्यादा होने पर दिखते हैं ये लक्षण

  • बार-बार पेशाब आना
  • उल्टी होना
  • कमजोरी और थकान महसूस होना
  • भूख न लगना
  • घबराहट

नियमित रूप से ब्लड टेस्ट करवाएं और विटामिन डी और कैल्शियम की जांच करवाएं। बिना जांच के विटामिन डी की टैबेलट लेने की गलती न करें। नेचुरुल तरीके से विटामिन डी के लेवल को बढ़ाने के लिए हेल्दी डाइट लें। आपकी डाइट में विटामिन सी और प्रोटीन युक्त चीजों का सेवन करें।

रोजाना आधा घंटा धूप लें।

 

जब इन चीजों को करने के बाद भी विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में न पहुंचे तो स्पलीमेंट्स लेना चाहिए। डॉक्टर ने जितने दिन की दवाई दी है उतने ही दिन दाव लें। बिना जांच करवाएं खुद से दवा लेने की गलती न करें।

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