
उत्तर प्रदेश के बिजेथुआ महावीरन मंदिर में इस समय कई श्रद्धालु दर्शन करने पहुंच रहे हैं क्योंकि 2 अप्रैल को हनुमान जयंती है। इस दिन यहां दर्शन करने की खास मान्यता है। हर साल लाखों की संख्या में भक्त मंदिर में आते हैं इसलिए मंदिर समिति ने फूलों और लाइटों से भव्य सजावट की है। हनुमान जयंती के दिन मंदिर में हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ किया जाता है। यह मंदिर उत्तर प्रदेश के जौनपुर और सुल्तानपुर जिले के बॉर्डर पर स्थित है। यहां हर मंगलवार और शनिवार को भी बड़ी संख्या में भक्त दर्शन करने आते हैं। मंदिर परिसर में एक ‘मकड़ी कुंड’ भी है। मान्यता है कि इस कुंड के पानी से शरीर के सभी दुख दूर हो जाते हैं। इसी वजह से कई भक्त यहां स्नान करते हैं और कुंड का जल अपने साथ घर भी ले जाते हैं।
बिजेथुआ महावीरन मंदिर सुल्तानपुर जिले से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित है। मंदिर में अनेक घंटियां टंगी हुई हैं। मान्यता है कि यहां पूजा करने से शादी और मुंडन जैसे शुभ कार्य सफलतापूर्वक संपन्न होते हैं। इसी कारण नए दंपती यहां आकर पूजा-अर्चना करते हैं और हनुमान जी का आशीर्वाद लेते हैं। अब सवाल उठता है कि इस मंदिर से जुड़ी रामायण की कथा क्या है और यहां कैसे पहुंचा जा सकता है।
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बिजेथुआ धाम की पौराणिक कथा
धार्मिक मान्यता के अनुसार, बिजेथुआ धाम का इतिहास रामायण काल से जुड़ा है। जब राक्षसों के बाण लगने से लक्ष्मण मूर्छित हो गए थे, तब हनुमान जी उनके लिए संजीवनी बूटी लेने गए थे। उसी दौरान रावण ने हनुमान जी को रोकने के लिए राक्षस कालनेमि को भेजा था ताकि वह उन्हें रोक सके और लक्ष्मण जी को संजीवनी न मिल पाए। कालनेमि ने साधु का रूप धारण कर हनुमान जी को रोकने की कोशिश की लेकिन हनुमान जी समझ गए कि वह साधु नहीं बल्कि राक्षस है। इसके बाद हनुमान जी ने कालनेमि का वध कर दिया।
कहा जाता है कि कालनेमि के वध के बाद हनुमान जी जिस स्थान पर कुछ समय के लिए रुके थे, वही स्थान आज बिजेथुआ धाम के रूप में प्रसिद्ध है। मंदिर के गर्भगृह में दर्शन के दौरान भक्त परिक्रमा करते हैं। यहां लोग अपनी मनोकामना पूरी होने के लिए घंटी बांधते हैं और इच्छा पूरी होने पर वापस आकर हनुमान पाठ करते हैं तथा श्रद्धा अनुसार दान देते हैं।
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कैसे जाएं बिजेथुआ मंदिर?
बिजेथुआ मंदिर जाने के लिए हवाई जहाज, ट्रेन और बस तीनों साधनों का उपयोग किया जा सकता है। दर्शन के लिए सबसे पहले अपने नजदीकी एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन या बस अड्डे से प्रयागराज (इलाहाबाद) पहुंचना है। इसके बाद यहां से बस पकड़कर सुल्तानपुर बॉर्डर जाना होता है, जो प्रयागराज एयरपोर्ट से लगभग 148 किलोमीटर दूर है। सुल्तानपुर पहुंचने के बाद बस या ऑटो के जरिए आसानी से बिजेथुआ महावीर मंदिर पहुंचा जा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि नहीं की जाती है।