जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली- एनसीआर में आने वाले दिनों में वायु प्रदूषण बढ़ने की आशंका को देखते हुए केंद्रीय वन व पर्यावरण मंत्रालय सहित वायु प्रदूषण के रोकथाम के लिए उसके अधीन काम करने वाली एजेंसियों ने इससे निपटने के लिए मोर्चा संभाल लिया है।
जिसमें एनसीआर में संचालित ऐसे सभी उद्योगों को बंद करने का फैसला लिया है, जो बार-बार के निर्देश के बाद भी प्रदूषण रोकने वाले उपकरण नहीं लगा रहे है या उसका कोई वर्क आर्डर भी नहीं दिया है।
फिलहाल ऐसे उद्योगों को कारण बताओ नोटिस जारी कर और पांच दिनों में जवाब मांगने के लिए कहा गया है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर तुरंत बंद कराने के लिए कहा गया है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को यह आदेश तब जारी किया है,जब मौजूदा समय में एनसीआर में संचालित करीब 2321 उद्योगों से करीब दो सौ उद्योगों ने ही प्रदूषण रोकने वाले उपकरण अब तक लगाए है, वहीं करीब आठ सौ उद्योगों ने वर्क आर्डर दे दिए है। यानी अभी भी आधे से अधिक उद्योगों को इन उपकरणों को लगाना बाकी है।
इस बीच कुछ उद्योगों को निर्धारित मात्रा कम प्रदूषण फैलाने के मामले में इससे छूट भी दी गई है। यह बात अलग है कि इनके खिलाफ यह सख्ती सिर्फ वायु प्रदूषण बढ़ने के दौरान यानी नंवबर-दिसंबर में ही दिखायी जाती है।
सीपीसीबी ने राज्य प्रदूषण बोर्डों को जारी आदेश में कहा है कि वह निर्देशों का पालन न करने वाले व संतोषजनक जवाब न देने वाले उद्योगों की तुरंत स्थानीय प्रशासन की मदद से बंद करने और बिजली कटाने की कार्रवाई करें।
प्रदूषण के खिलाफ मोर्चा संभाले एजेंसियों ने इसके साथ ही राष्ट्रीय महत्व के निर्माण कार्यों को छोड़कर एनसीआर में संचालित ऐसे सभी निर्माण कार्यों को पांच नवंबर से 20 नवंबर तक बंद रखने के भी निर्देश दिए है। जिन कामों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है, उनमें रेलवे, मेट्रो व रक्षा आदि से जुड़े कार्य शामिल है।
वायु गुणवत्ता आयोग ने इसे लेकर राज्य सरकारों व राज्य प्रदूषण बोर्डों से प्रत्येक क्षेत्रों में नियमित भ्रमण करने के लिए कहा है।
50 प्रतिशत कर्मचारियों करें वर्क फ्रॉम होम
इस बीच दिल्ली-एनसीआर को वाहनों से होने वाले प्रदूषण से बचाने के लिए पांच से 20 नवंबर तक दिल्ली सहित गुरुग्राम, सोनीपत, गाजियाबाद, फरीदाबाद व गौतम बुद्ध नगर (नोयडा) के सभी सरकारी और निजी दफ्तरों में काम करने वाले पचास प्रतिशत कर्मचारियों को वर्क फ्राम होम पर भेजने के आदेश दिए गए है। हालांकि इस आदेश से अत्यावश्यक सेवाओं से जुडे दफ्तरों व ईकाइयों को मुक्त रखा गया है।
